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मिशन 2019 की तैयारियों में पूरे जोश के साथ कांग्रेस अपनी रणनीति बनाने में जुटी है। गुरुवार देर रात Uttar Pradesh की बागडोर संभाल रहीं प्रियंका गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर सूबे की 25 प्रमुख सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगा दी। सूत्रों की मानें तो जल्द ही कांग्रेस हाईकमान यूपी में पहली List के तौर पर इन नामों की सूची जारी कर सकता है। इस सूची को लेकर केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भी खासी बेचैनी है। बताया जा रहा है कि इनमें वो सीटें भी हैं जिनको 2009 के चुनाव में कांग्रेस जीत चुकी है।


[caption id="attachment_18854" align="alignnone" width="720"] गुरुवार देर रात कांग्रेस मुख्यालय में मीटिंग के लिए पहुंची प्रियंका गांधी।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


Mid-Night तक सचिवों के साथ मीटिंग करते रहे दोनों दिग्गज


कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा और दूसरे महासचिव व पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार रात 12 बजे तक अपने सचिवों के साथ मैराथन बैठक करते रहे। काफी माथापच्ची के बाद अंततः 25 नामों पर फाइनल मुहर दोनों नेताओं ने लगा दी।

[caption id="attachment_18855" align="alignnone" width="695"] मीटिंग के लिए कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया।[/caption]

25 सीटों पर जीत की उम्मींद लगाए बैठी है कांग्रेस


जानकार सूत्रों के मुताबिक, यूपी की 80 सीटों में से 25 पर मज़बूत उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करने के बाद नाम फाइनल किए गए। इन सीटों पर पूर्व में कांग्रेस जीत का स्वाद चख चुकी है। ऐसे में ताकतवर और जनाधार वाले नेता को मैदान में उतार कांग्रेस फिर से इन सीटों को जीतकर वापस पाना चाह रही है। कानपुर समेत कुछ सीटों पर कांग्रेस के दिग्गजों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही हैं। Kanpur में गुटबाजी के साथ कई-कई दावेदार भी हैं।

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इस रणनीति पर है कांग्रेस का पूरा फोकस


सूत्रों की मानें तो जहां कांग्रेस और बीजेपी में मुकाबला हो वहां सपा-बसपा गठबंधन उसी लिहाज से उम्मीदवार दे। लेकिन जहां बीजेपी के सामने मुकाबले में सपा-बसपा का उम्मीदवार टक्कर में हो वहां कांग्रेस बीजेपी को हराने में मदद करने वाला उम्मीदवार दे। पार्टी फिलहाल इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है। यूपी में दो कार्यवाहक प्रेसीडेंट बनाने के मुद्दे पर भी काफी देर तक चर्चा की गई। वहीं, कुछ दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर उन्हें समायोजित करने के लिए भी बातचीत कर चर्चा की गई।

वार्ड नंबर 84 जूही कलॉ से सपा, कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों के खिलाफ "बागी" प्रत्याशी बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं। ये सभी "बागी" काफी ताकतवर हैं, शायद यही वजह है कि अधिकृत प्रत्याशियों के रातों की नींद गायब हो चुकी है। बागियों की बगावत के बीच ही बसपा का हाथी काफी खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं। क्षेत्र के लोगों की मानें तो बसपा प्रत्याशी आरफा खातून के चुनाव प्रचार का शोर तो नहीं है लेकिन जोर काफी है। इकलौती मुस्लिम प्रत्याशी होने का उनको सीधा लाभ मिल रहा है। मुस्लिम वोटर का उनके साथ जाना तय भी माना जा रहा है। 


[caption id="attachment_18315" align="aligncenter" width="640"] किदवईनगर विधायक महेश त्रिवेदी के साथ जनसंपर्क कर वोट मांगती बीजेपी प्रत्याशी अल्पना जायसवाल।[/caption]

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कानपुर। किदवईनगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-84 (जूही कलॉ) में BJP, कांग्रेस,सपा के “बागी” प्रत्याशियों की “बगावत” ने अधिकृत प्रत्याशियों का “बैंड” बजा दिया है। बगावत की आंधी में कांग्रेस औ और बीजेपी के प्रत्याशियों के रातों की नींद और दिन का सुकून गायब कर दिया है। चुनाव प्रचार से अधिक जोर इस बात पर लगाया जा रहा है कि “बागी” कहां शह और मात की सियासी चौसर सजाए हैं। छात्र राजनीति के गढ़ वाले इस वार्ड में हर कदम पर प्रत्याशियों के लिए कांटे बिछे हैं। कुल मिलाकर यहां मुकाबाल चतुष्कोणीय दिखाई दे रहा है। इन सबके बीच BSP प्रत्याशी आरफा खातून खामोशी की चादर ओढ़े नजर आ रही हैं। चुनावी प्रचार का शोर कहीं नहीं है लेकिन अंदर ही अंदर उन्होंने पूरा जोर लगा रखा हैं। विश्वस्त्र सूत्रों की मानें तो यदि यहां मुस्लिम वोटर सेंट्रालाइज्ड हो गया तो हाथी कि चिघाड़ सुनाई दे सकती है।


वार्ड नंबर-84 में हैं करीब 23 हजार मतदाता

वार्ड नंबर-84 जूही कलॉ में करीब 23 हजार के आसपास मतदाता हैं। इसमें लाल कालोनी, पीली कालोनी, हरी कालोनी, रामलाल का तालाब, कच्ची बस्ती, गोविंदनगर का जे ब्लाक समेत कई मोहल्ले आते हैं। इस वार्ड में भी सर्वाधिक मतदाता ब्राम्हण हैं। यहां ब्राम्हण वोटर करीब 35 फीसदी है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटर हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब चार हजार के आसपास है।



BJP प्रत्याशी अल्पना जायसवाल का समीकरण बिगाड़ रहीं बागीशिवकांती शुक्ला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से निवर्तमान पार्षद बिल्लू जायसवाल की पत्नी अल्पना जायसवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के सहारे और RSS कार्यकर्ताओं की आस लेकर अल्पना अपना चुनावी अभियान तेज किए हुए हैं। पति बिल्लू के साथ युवा समर्थक भी भारी संख्या में प्रचार के दौरान नजर आ रहे हैं लेकिन यहां से बीजेपी की बागी शिवकांती शुक्ला अधिकृत प्रत्याशी का पूरा समीकरण बिगाड़ने में जुटी हैं। वार्ड के लिए शिवकांती शुक्ला नया नाम बिल्कुल भी नहीं है। शिवकांती शुक्ला पूर्व में यहां से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। बाद में वह बीजेपी में चली गई थीं। इस बार वह टिकट की प्रबल दावेदार थीं लेकिन टिकट नहीं मिली। इस लिए उन्होंने बगावत का बिगुल बजा दिया है। जानकारों की मानें तो अल्पना को पहले शिवकांती से ही निपटना होगा।

 

रचना त्रिपाठी ने बिगाड़ दी कांग्रेस प्रत्याशी निधी दीक्षित की गणित

कांग्रेस ने वार्ड नंबर 84 से निधि दीक्षित को अपना प्रत्याशी बनाया है लेकिन किदवईनगर विधान सभा के EX.MLA अजय कपूर ने रचना त्रिपाठी को मैदान में उतार कर कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के सपनों पर पानी फेरने का काम कर दिया। रचना त्रिपाठी के कार्यालय का शुभारंभ कर अजय कपूर ने सार्वजनिक तौर पर वोट और सपोर्ट की अपील करते हुए निधि का चुनाव काफी हल्का कर दिया। इस बात की खबर कांग्रेस हाईकमान तक भी है। जानकारों की मानें तो रचना त्रिपाठी अधिकृत प्रत्याशी की तुलना में कहीं बेहतर चुनाव लड़ रही हैं। यहां कांग्रेस से एक और बागी तारा सिंह भी काफी अच्छा चुनाव लड़ रही हैं।

सपा की अधिकृत प्रत्याशी को पानी पिला रही हैं बागी राजकुमारी

सपा ने यहां से रानी यादव को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। रानी यादव के मुकाबले सपा के मोनू वर्मा की मां राजकुमारी ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। राजकुमारी अपने बैनर और होर्डंग्सि में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्रा की फोटो और नाम लिखकर वोट मांग रही हैं। माना जा रहा है कि निश्चित तौर पर वह अधिकृत प्रत्याशी का काफी नुकसान करेंगी।

[caption id="attachment_18318" align="aligncenter" width="585"] क्षेत्र की मुस्लिम महिलाओं के साथ बसपा प्रत्याशी आरफा खातून जनसंपर्क के दौरान समर्थन की अपील करती हुईं।[/caption]

मुस्लिम बन सकते हैं BSP के हाथी के साथी 

बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने यहां से आरफा खातून को टिकट दिया है। इतना ही नहीं इस वार्ड से आरफा इकलौती मुस्लिम प्रत्याशी भी हैं। वार्ड में करीब चार हजार से अधिक वोटर मुस्लिम हैं। www.redeyestimes.com को मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक मुस्लिम वोटर पूरी तरह से आरफा खातून के पक्ष में करीब-करीब एक राय बना चुका है। यदि ऐसा होता है तो आरफा के जीत की राह बेहद आसान हो जाएगी, क्यों कि यहां बीएसपी के कैडर का वोटबैंक भी लगभग 2 हजार के आसपास है। साथ ही सबसे खास बात यह है कि यहां पर बीएसपी का कोई विद्रोही प्रत्याशी भी नहीं है। हालांकि चुनाव प्रचार-प्रसार में आरफा खातून काफी पीछे हैं लेकिन राजनीति के जानकार उनके चुनाव को अंदर ही अंदर काफी मजबूत मान रहे हैं।

DBS के पूर्व अध्यक्ष की पत्नी भी लड़ रहीं निर्दलीय चुनाव

डीबीएस कालेज छात्रसंघ के पूर्व प्रेसीडेंट रहे भूपेंद्र सिंह की पत्नी ममता सिंह भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों में वह एक मजबूत प्रत्याशी हैं। माना जा रहा है कि ममता सिंह एक बिरादरी का वोट बैंक अपने पाले में निश्चित तौर पर ले जाएंगी।

 

गोविंदनगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-34 (रतनलाल नगर) का चुनाव में कांटे का संघर्ष होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यहां से बीजेपी ने विधि राजपाल पर दांव लगाया है तो कांग्रेस ने पुराने कांग्रेसी दिग्गज अन्ना दिवेदी की धर्मपत्नी अर्चना दिवेदी को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन यहां जो नाम सबसे अधिक प्रभाव छोड़ रहा है वो है सांत्वना शर्मा का। सांत्वना निवर्तमान पार्षद मनीष शर्मा की पत्नी हैं। वो अपने पति मनीष, जेठ पंडित योगेश शर्मा और भरत शर्मा के जरिए विरोधियों पर सियासी तीर चला रही हैं। अभी तक की लड़ाई में वह अन्य प्रत्याशियों की तुलना में आगे बनी हैं। लेकिन राजनीति के जानकार मान रहे हैं चुनाव के अंत तक बाजी पलटेगी अवश्य। यहां आखिरी में चुनाव के त्रिकोणीय होने की गणित लगाई जा रही है। 


[caption id="attachment_18308" align="aligncenter" width="640"] निवर्तमान पार्षद और अपने पति मनीष शर्मा के साथ वार्ड नंबर 34 की प्रत्याशी सांत्वना शर्मा[/caption]

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कानपुर। गोविंदन नगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-34 (रतनलाल नगर) का चुनाव बेहद दिलचस्प होगा। इस वार्ड में चुनाव कौन जीतेगा ? यह किसी को नहीं पता लेकिन एक बात तय है कि यहां सांत्वना शर्मा के धनुष से निकले तीर से हर प्रत्याशी कोई खुद को बचा रहा है। सभी प्रत्याशी अपनी टक्कर सांत्वना शर्मा से ही मान रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि यहां का चुनाव काफी दिलचस्प और कांटे के संघर्ष वाला होगा।


22,700 हजार से अधिक मतदाता चुनेंगे अपना पार्षद

वार्ड नंबर 34 रतनलाल नगर में करीब 22 हजार 700 से अधिक मतदाता अपने पसंद का पार्षद चुनेंगे। इस वार्ड के अंतर्गत गुजैनी A, B, दबौली HIG, MIG, रतनलाल नगर, महादेव नगर, बर्रा भाग 7, स्टेट बैंक कालोनी, बर्रा 3, माली प्लाट समेत कई मोहल्ले आते हैं। यहां सर्वाधिक मतदाता ब्राम्हण हैं। उसके बाद सिंधी समुदाय का वोटर है।

शिवसेना के टिकट से चुनावी रणभूमि में हैं सांत्वना शर्मा

निवर्तमान पार्षद मनीष शर्मा की धर्मपत्नी सांत्वना शर्मा को शिवसेना ने अपना प्रत्याशी बनाया है। सांत्वना के पति मनीष शर्मा दो बार से पार्षद हैं। पहला चुनाव वह कांग्रेस के टिकट पर जीते थे दूसरी बार वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीते। परशीमन बदलने के साथ यह सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। गुजैनी A, B ब्लाक के साथ रतनलाल नगर के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा सांत्वना के खाते में जा सकता है। साथ ही बर्रा भाग 7 और 3 में भी वह बेहतर चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो वह बीजेपी के वोटबैंक में भी तगड़ी सेंधमारी कर सकती हैं।

विधि राजपाल हैं BJP की प्रत्याशी

केंद्र और यूपी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से विधि राजपाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। विधि के पिता लंबे समय से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं। विधान सभा चुनाव में उन्होंने टिकट की दावेदारी भी ठोंकी थी। अंदरखाने की मानें तो विधि राजपाल के चुनाव में संगठन अभी तक पूरे मन से चुनाव में नहीं लगा है। विधि अपनी दम पर चुनाव की गाड़ी को खींच रही हैं। बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के साथ सिंधी समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उनके खाते में जा सकता है। क्षेत्र के कई जगहों पर अभी भी उनका चुनाव गति नहीं पकड़ सका है। यह उनका माइनस प्वाइंट बन सकता है।

कांग्रेस ने अन्ना दिवेदी की पत्नी को दिया है टिकट

कांग्रेस पार्टी ने पुराने कांग्रेसी नेता अन्ना दिवेदी की धर्मपत्नी अर्चना दिवेदी को वार्ड नंबर 34 से अपना प्रत्याशी बनाया है। पुराने कांग्रेसी होने के नाते अन्ना दिवेदी की क्षेत्र में पकड़ है। कुछ जगहों पर कांग्रेस प्रत्याशी का पंजा भारी दिखा। लेकिन मतदाताओं में कांग्रेस के पंजे को लेकर जो उत्साह होना चाहिए वह अभी तक नहीं दिखाई दे रहा है। जानकारों की मानें तो यदि अन्ना ने ब्राम्हण वोट में यदि तगड़ी सेंधमारी कर दी तो वह अंत तक चुनाव के मुख्यधारा में आ सकते हैं। कहा यह भी जा रहा है कि अर्चना दिवेदी जितना बढ़िया चुनाव लड़ेंगी तो उसका सीधा नुकसान बीजेपी को ही होगा।

सपा प्रत्याशी लड़ाई की मुख्य धारा में नहीं

वार्ड नंबर 34 से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी अभी तक चुनावी लड़ाई की मुख्यधारा में नहीं आ सकी हैं। गुजैनी को दो ब्लाकों में उनका चुनाव थोड़ा-बहुत नजर आ रहा है। हालांकि इन ब्लाकों में भी सांत्वना शर्मा सब पर भारी पड़ रही हैं।

ब्राम्हण वोटर जिधर झुकेगा, वही प्रत्याशी चुनाव जीतेगा

वार्ड नंबर-34 रतनलाल नगर में ब्राम्हण वोट बैंक करीब 35 से 40 फीसदी के बीच है। इसके बाद सिंधी समुदाय का सबसे अधिक वोटर है। ये दोनों ही वोटर बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक माने जाते हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो इसमें निर्णायक भूमिका ब्राम्हण वोटरों की रहेगी। यह वोटर जिधर झुकेगा, उसी प्रत्याशी की जीत होगी। माना यह भी जा रहा है कि अर्चना दिवेदी ब्राम्हण वोट बैंक में आखिर तक अच्छी खासी सेंधमारी कर सकती हैं।

Kanpur के South City स्थित वार्ड नंबर-72 की सीट पर सिर्फ पार्षद प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा ही नहीं फंसी है बल्कि इन प्रत्याशियों के राजनीतिक "गुरु" कहे जाने वाले दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी फंस चुकी है। कांग्रेस प्रत्याशी जेपी पाल के लिए जहां कांग्रेस के Ex.MLA अजय कपूर सम्मान लगाए हुए हैं तो दूसरी तरफ अजय पाल को टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी ने भी अपनी ताकत लगा रखी है। चुनाव को और भी अधिक दिलचस्प बना दिया है कांग्रेस के "पुराने चावल" कैलाश पाल ने। गौरतलब यह है कि कैलाश चार बार पार्षद रह चुके हैं। इस लिए राजनीति के पंडित उनको हल्के में लेने की गल्ती बिल्कुल भी नहीं कर रहे हैं। 


[caption id="attachment_18260" align="aligncenter" width="960"] समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार करते कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP)[/caption]

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कानपुर। गोविंदनगर विधान सभा के वार्ड नंबर 72 के पार्षदीय चुनाव की “सियासी दाल” पक रही है। इस दाल में “तड़का” लगाकर कौन चुनाव जीतेगा ? यह तो वक्त बताएगा लेकिन एक बात यह बिल्कुल तय मानी जा रही है। कि पार्षद P3 में कोई एक P ही बनेगा। कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP) और कांग्रेस के ही पुराने दिग्गज व निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल (KP) के “सियासी चक्रव्यूह” में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी अजय पाल (AP) फंस गए हैं। हालांकि दबौली कालोनी के मतदाताओं के सहारे वो JP और KP को शह-मत देने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। राजनीति के पंडितों की मानें तो नतीजा चाहे जो भी हो लेकिन एक बात पक्की है कि चुनाव दिलचस्प होने के साथ ही बेहद कांटे का भी होगा। यहां प्रत्याशियों के साथ उन्हें चुनाव लड़े रहे पुराने दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। एक-एक वोट के लिए संघर्ष हो रहा है। सुबह से शाम तक जनसंपर्क के बाद प्रत्याशियों के दिग्गज देर रात सेटिंग-गेटिंग का फार्मूला तय करने में भी पीछे नहीं हैं।


वार्ड नंबर-72 में हैं 26 हजार से अधिक मतदाता

वार्ड नंबर-72 में करीब 26 हजार से अधिक मतदाता हैं। सर्वाधिक वोटर पाल बिरादरी के हैं। पाल बिरादरी के मतदाता करीब 40 फीसदी के आसपास हैं। दूसरे नंबर 30 फीसदी के करीब ब्राम्हण वोटर हैं। इसके बाद नुनिया ठाकुर, यादव, कुर्मी समेत अन्य पिछड़ी जाति के वोटर हैं। दलित वोटों का प्रतिशत कम है।

10 ने कराया था नामांकन, एक ने पर्चा वापस लिया

दबौली वार्ड नंबर-72 से कुल 10 प्रत्याशियों ने नामांकन करवाया था। बाद में एक प्रत्याशी ने अपना पर्चा वापस ले लिया है। अब इस वार्ड में कुल नौ प्रत्याशी ही बचे हैं।

ब्राम्हण मतदाता की कृपा से पार होगी चुनावी नाव

राजनीति के धुरंधरों की मानें तो पाल बिरादरी का सर्वाधिक वोट बैंक इस वार्ड में है। लेकिन तीन प्रत्याशियों के मैदान में कूदने की वजह से पाल बिरादरी का वोट बिखरेगा। ऐसे में यहां ब्राम्हण वोट बैंक काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो ब्राम्हण वोटरों की कृपा जिस प्रत्याशी पर ठीक ढंग से हो गई उसकी चुनावी “नाव” पार हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि तीनों ही प्रत्याशियों को ब्राम्हण लाबी का समर्थन हासिल है। इस लिए ऊंट किस करवट बैठेगा यह किसी को नहीं मालुम।



अजय पाल (AP) (BJP)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अजय पाल (AP) को दबौली कालोनी से तगड़ा समर्थन है। दबौली में तगड़ा वोट बैंक हैं। कई अन्य एरिया में भी वह सेंधमारी करते नजर आ रहे हैं। अजय पाल के लिए प्लस प्वाइंट यह है कि बीजेपी जैसे संगठन से उनको आखिरी दौर में काफी मदद मिल सकती है। नौरैयाखेड़ा में भी ठीक-ठाक वोटों की सेंधमारी अजयपाल कर सकते हैं। लेकिन माइनस फैक्टर MIG। नए परशीमन के मुताबिक MIG अब रतनलाल नगर वार्ड 34 में शिफ्ट कर गया। यहां करीब चार हजार मतदाता थे। ये सभी मतदाता बीजेपी के माने जाते थे। राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि थोड़ा नुकसान हो सकता है लेकिन इसकी भरपाई दूसरी जगहों से की जा रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि योगी की सभा के बाद चुनावी तस्वीर पलटेगी।



 

जय प्रकाश पाल (JP) (कांग्रेस)

ये नाम भी दबौली वार्ड-72 के मतदाताओं के लिए नया नहीं है। जय प्रकाश की पत्नी सोनी पाल वर्तमान में पार्षद हैं। जय प्रकाश को कांग्रेस से जुड़े हुए एक लंबा वक्त हो गया है। कांग्रेस के Ex.MLA अजय कपूर से उनकी निकटता किसी से छिपा नहीं है। दो दिन पहले अजय कपूर ने कार्यालय का शुभारंभ भी किया है। जय प्रकाश क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों के बल पर जनता से एक बार फिर मोतीझील भेजने का आशीर्वाद मांग रहे हैं। दबौली गांव के वोटरों का सबसे बड़ा भाग उनके ही खाते में जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। दबौली कालोनी के वोट बैंक में भी वह तगड़ी सेंधमारी करने में जुटे हैं। जेपी का चुनाव करीब-करीब सभी जगहों पर दिख रहा है। जेपी का चुनाव अंदर के साथ बाहर भी मजबूत नजर आ रहा है।

[caption id="attachment_18261" align="aligncenter" width="640"] समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार करते निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल (KP)[/caption]

कौन है कैलाश पाल (KP) (निर्दलीय)

दबौली गांव के रहने वाले कैलाश पाल कांग्रेस के पुराने नेता है। वह चार बार पार्षद बन चुके हैं। इसें एक बार निर्दलीय भी वह चुनाव जीत चुके हैं। पिछला चुनाव वह हार गए थे। राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कैलाश पाल के बारे में कहा जा रहा है उनका चुनाव शोर नहीं है। लेकिन चुनाव भारी है। पाल बिरादरी के एक खास वर्ग में उनकी घुसपैठ ठीक है। साथ ही पुराने संबध भी उनके काम आ रहे हैं। कुल मिलाकर यूं कह सकते हैं कि कैलाश पाल अभी तक स्लीपिंग मॉड्यूल्स की भूमिका में बने हुए हैं। उनका चुनाव अंदर ही अंदर है।

आखिरी दौर में पलट सकती है बाजी

राजनीति के पंडितों की मानें तो चुनाव के अंतिम दौर में बाजी पलट सकती है। कई नाराज लोगों को मनाने का काम चल रहा है। कुछ जगहों पर वोटरों की नाराजगी भी दूर की जा रही है। ऐसे में दो-तीन दिन के बाद चुनावी तस्वीर कुछ अलग भी हो सकती है।

सपा-बसपा अभी तक मुख्य लड़ाई में नहीं

वार्ड नंबर-72 में सपा प्रत्याशी राजनाथ यादव और बसपा प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह (भानू) अभी तक अपना चुनाव पूरी तरह से उठा नहीं पाए हैं। शायद यही वजह है कि ये दोनों प्रत्याशी फिलहाल अभी तक मुख्य लड़ाई में नहीं हैं। आखिरी दौर में इनमें से कोई चुनावी लड़ाई में यदि आ जाए तो यह भी बड़ी बात ही होगी।

नगर निकाय चुनाव को लेकर एक तरफ जहां सत्ताधारी दल BJP में टिकट के लिए मारामारी मची है तो दूसरी तरफ कांग्रेस में सन्नाटा पसरा है। बेहद गोपनीय तरीके से नगर निकाय चुनाव में अपनी तैयारियों को अंजाम दे रही कांग्रेस के लिए जल्द ही बेचैनी भरी खबर आ सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस के खिलाफ साउथ सिटी के 18 वार्डों में बागी प्रत्याशियों को खड़ा करने की पूरी तरह से तैयारी की जा चुकी है। ऐसा एक दिग्गज को हाशिए पर लाने के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन 18 वार्डों से पैनल के पास सिर्फ सिंगल नाम ही प्रत्याशिता के लिए भेजे गए हैं अब तक। 




 

 

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। नगर निकाय के चुनाव का शंखनाद होने के बाद जहां सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मेयर से लेकर पार्षदी तक का टिकट पाने के लिए मारामारी मची है तो दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में जोरदार सन्नाटा पसरा है। लेकिन शहर की राजनीति के कुशल पंडित कहे जाने वाले कुछ “चाणक्य” कांग्रेस में छाए सन्नाटे को दूर करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल को मिली एक बेहद अहम जानकारी के मुताबिक Kanpur के South City के अंतर्गत आने वाले करीब 18 वार्डों में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के समानांतर “बागी” भी जोरदार अजमाइश करेंगे। इसके लिए पूरा “ब्लूप्रिंट” तैयार हो चुका है। “बागी” प्रत्याशियों को टानिक देने के लिए कांग्रेस का एक खेमा पूरी तरह से कमर कसकर तैयार है।

अधिकांश सीटों पर हाईकमान को सिंगल नाम ही भेजे गए

कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा है कि साउथ के करीब डेढ़ दर्जन वार्डों में अधिकांश पर सिंगल नाम ही भेजे गए। दूसरे किसी ने या तो आवेदन नहीं किया या फिर करने नहीं दिया गया। इन 18 सीटों पर कांग्रेस करीब 4 वार्ड पूरी तरह से जीतने की स्थित में है। दो वार्डों में तो उसके पास वर्तमान में पार्षद हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस का एक धड़ा पूरी तरह से एक दिग्गज का समीकरण बिगाड़ने की तैयारी कर चुका है। इसकी कवायद पिछले करीब एक सप्ताह से चल रही थी। “बागी” प्रत्याशियों की लिस्ट भी करीब-करीब फाइनल हो चुकी है। जल्द ही इनके नामांकन भी होंगे।

बागी प्रत्याशी बिगाड़ देंगे कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का खेल

राजनीति में सियासी चौसर बिछा रहे चाणक्यों की मानें तो बागी प्रत्याशी कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का पूरा खेल बिगाड़ेंगे। इसका सीधा एडवांटेज BJP प्रत्याशियों को मिलेगा। कई सीटों पर बागी प्रत्याशी अधिकृत प्रत्याशियों से कहीं अधिक भारी बैठेगें।

तीन सीटों पर BJP चलेगी अपने तुरुप का इक्का

BJP के अंदरखाने में जो चर्चा है उसके मुताबिक पार्टी तीन सीटों पर अपने “तुरुप का इक्का” ही चलेगी। मतलब साफ है कांग्रेस के दिग्गजों के खिलाफ दबंग लोगों को टिकट देने का पूरा प्लान बन चुका है। सिर्फ औपरचारिकता मात्र ही बाकी है।

 

Kanpur मेयर की प्रत्याशिता को लेकर BJP के एक बड़े धड़े और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बीच "नूरा-कुश्ती" का दौर शुरु हो चुका है। चर्चा है कि बीजेपी का यह बड़ा धड़ा कई महीने पहले ही शैक्षणिक कारोबार से जुड़े घराने के लिए टिकट पर मुहर लगा चुका है। यह बात न तो स्वयंसेवकों को बर्दाश्त हो रही है और न ही RSS के कद्दावर पदाधिकारियों को। हाल अब यह है कि चित्रकूट में मौजूद RSS के "महाराथी" भाजपा में बिक रही टिकटों का मुद्दा हाईकमान के सामने उठाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो कंडीडेट के नाम पर फाइनल मुहर 27 अक्तूबर के बाद ही लगेगी। चर्चा है कि मेयर प्रत्याशी के चयन का ऐलान भी चित्रकूट में ही फाइनल किया जाएगा। 


 

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी नगर निकाय के चुनाव का “शंखनाद” नहीं किया है लेकिन राजनीतिक दलों में प्रत्याशी चयन को लेकर उठा-पटक का दौर शुरु हो चुका है। मेयर प्रत्याशी चयन को लेकर केंद्र और यूपी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में “रायता” कुछ अधिक फैल रहा है। क्षेत्रीय बीजेपी के दिग्गज जहां “बाहरवाली” को प्रत्याशी बनाने के लिए 5 कालीदास मार्ग से लेकर दिल्ली में “नमो” की चौखट तक “शह-मात” का खेल खेलने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के “महारथी” किसी “घरवाली” को प्रत्याशी बनाए जाने के पक्ष में हैं। RSS के बड़े सूत्रों का कहना है कि “बाहरवाली” किसी भी सूरत में मान्य नहीं होगी। “घरवाली” और “बाहरवाली” के मामले को RSS के दिग्गज चित्रकूट में अगले कुछ घंटों के दौरान होने वाली मीटिंग में भी प्रमुखता से उठाएगी।


पूंजीपति और शैक्षणिक संस्थान से जुड़े घराने को BJP देना चाहती है टिकट

बीजेपी सूत्रों की मानें तो क्षेत्रीय भाजपा Kanpur के ताकतवर लंबरदार, पूंजीपति और शैक्षणिक कारोबार से जुड़े घराने को टिकट दिलाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। शायद यही वजह रही कि दो दिवसीय प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक का आयोजन भी बीजेपी एक धड़े ने करवा दी। ठीक उसी रात को मेयर सीट का परशीमन भी जारी किया गया। अंदरखाने की मानें तो यह टिकट कुछ माह पहले ही फाइनल हो चुका है, सिर्फ औपचारिकता भर ही बाकी रह गई है।



भाजपा की धरोहर, दो Minister और कई MLA को दरकिनार कर फाइनल हो गई टिकट !

बीजेपी सूत्रों की मानें तो टिकट फाइनल कराने के लिए कई महीने से अंदर ही अंदर कवायद चल रही थी। जो “औपचारिकताएं” थी वह भी इन्हीं दिनों में पूरी कर ली गईं। प्रांतीय अधिवेशन करवाने के बाद भाजपा के एक धड़े ने BJP हाईकमान की नजर में इस घराने को पूरी तरह से भाजपाई भी साबित करवा दिया। जानकारों की मानें तो करीब एक साल पहले तक शैक्षणिक कारोबार से जुड़ा यह घराना पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमों अखिलेश सिंह यादव और उनकी पत्नी का बेहद करीबी हुआ करता था। इस घराने को मेयर की टिकट पक्की कराने के लिए शहर के दो मंत्रियों, कई विधायकों और सबसे बड़े भाजपा के धरोहर मुरली मनोहर जोशी तक को ताक पर रख दिया गया।



उत्तराखंड के एक सीनियर IAS भी टिकट पक्का कराने में बने सारथी

RSS के एक बड़े दिग्गज की मानें तो प्रांतीय अधिवेशन के जरिए बड़े घराने को भाजपाई साबित कर टिकट पर अंतरिम मुहर लगाने की पहल की गई ताकि पार्टी में विरोध न हो। इस पूरे खेल में उत्तराखंड कैडर के एक सीनियर IAS अफसर की महतो भूमिका रही। इस IAS अफसर के यूपी सरकार के साथ भी गहरे ताल्लुक हैं।



4 लग्जरी गाड़ियों की घराने ने दे दी है सौगात

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक इस घराने ने चार लग्जरी गाड़ियों की सौगात कुछ दिग्गजों को दे रखी हैं। जो कि उन्हीं गाड़ियों से इन दिनों सफर कर रहे हैं। हालांकि इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नंबर दिग्गजों के नाम से नहीं किया गया है। गाड़ियों की कीमत करीब 40 लाख रुपए के आसपास भाजपाई बता रहे हैं।

बिकती टिकटों से स्वयंसेवक से लेकर RSS के दिग्गज तक हैं बेचैन

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर “न खाऊंगा न खाने दूंगा” का नारा बुलंद किए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कानपुर की भाजपा में इन दिनों पार्षद से लेकर मेयर तक की टिकटों पर खुल रहे “बाजरा के भाव” से बीजेपी का जमीनीं और संघर्षशील कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं की मानें तो उनको वही प्रत्याशी चाहिए जो कार्यकर्ता हो। पैसे के बल पर बीजेपी में पहुंच बनाकर टिकट लाने वाले को भाजपाई अब चुनाव में हराने की कसमें भी खाते दिखाई दे रहे हैं। कुछ यही हाल स्वयंसेवकों और RSS के कद्दावर दिग्गजों का भी है। उनको भी यह बिल्कुल नहीं पच रहा है कि कोई बाहर का व्यक्ति आकर चुनाव लड़े।

RSS की पहली पसंद गीता मिश्रा, दूसरे पर कमलावती, तीसरे पर प्रमिला पांडेय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सूत्रों की मानें तो RSS की पहली पसंद एक जूनियर हाईस्कूल की प्रिंसिपल गीता मिश्रा हैं। संघ सूत्रों की मानें तो गीता मिश्रा के नाम पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मुहर लगा सकते हैं। साथ गीता मिश्रा की पैरवी में संघ से जुड़े एक चर्चित प्राचार्य भी कर रहे हैं। दूसरे नंबर पर बीजेपी की पुरानी नेत्री कमलावती हैं। इनके नाम पर भी राजनाथ सिंह की मुहर लग सकती है। तीसरे नंबर पर प्रमिला पांडेय का नाम चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा कानपुर की बॉबी तिवारी की भी है। ये फिलहाल मुंबई में रह रही हैं। परिवार के एक सदस्य मुकेश अंबानी के रिलायंस में महत्वपूर्ण पद पर काम करते हैं।

BJP से टिकट के लिए कांग्रेस के एक दिग्गज भी लगे

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी से मेयर के लिए दावेदारी ठोंक रहे हैं। यह दिग्गज भी शैक्षणिक कारोबार से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से कानपुर में प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं। ये कानपुर से प्यार भी करते हैं। कुछ इसी तरह के चुनाव प्रचार का वह आगाज भी कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो इनकी तगड़ी पैंठ BSP में भी है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो दिन पहले लखनऊ से मेयर सीट पर प्रियंका महेश्वरी को प्रत्याशी बनाने के साथ 19 पार्षद प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की थी। बुधवार को Kanpur AAP (South) ने 8 पार्षद प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर विरोधी दलों को चौंका दिया है। घोषित किए गए सभी प्रत्याशी पार्टी के पुराने वर्कर हैं।


[caption id="attachment_17933" align="aligncenter" width="640"]kanpur nagar nigam, redeyestimes.com नगर निकाय चुनाव के लिए पार्षद प्रत्याशियों की पहली list जारी करते Kanpur AAP (South) के पदाधिकारी।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। नगर निकाय चुनाव के लिए “शंखनाद” हो चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फिलहाल अभी चुनाव की तिथियों का ऐलान नहीं किया है लेकिन सभी राजनीतिक दलों में प्रत्याशिता को लेकर दावेदारी कर रहे दिग्गजों के दिलों की धड़कन बढ़ी है। इन सब के बीच राजधानी दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) बुधवार को चुनावी समर में कूद पड़ी। Kanpur AAP (South) के संयोजक सोम भारत ने प्रेस कांफ्रेंस में शहर के 8 वार्डों में अपने प्रत्याशियों की पहली List जारी कर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है।


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ये हैं Kanpur AAP (South) की पहली List के प्रत्याशी

58 तिवारीपुर, (रामादेवी) साजन वर्गिश, जयंती श्रीवास्तव वार्ड 63 हंसपुरम(नौबस्ता), मनीष वर्मा वार्ड (91) शास्त्री नगर, मुन्ना कुमार वार्ड (7) निराला नगर, निशा निगम वार्ड (67) बर्रा, लक्ष्मी श्रीवास वार्ड (21) खाड़ेपुर, निर्गुण कुमार वार्ड (12) चकेरी, सतीश चंद्र गुप्ता वार्ड 69 सरोजनी नगर।



दिल्ली की मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर करेंगे Work

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान Kanpur AAP (South) के प्रवक्ता शरद यादव ने कहा कि यूपी में यदि AAP जीतती है तो हम हाउस टैक्स हाफ करेंगे। शहर में फैली गंदगी के लिए पार्टी क्रांतिकारी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर शहर के सरकारी अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। जनता की सुविधाओं के मद्देनजर नए मोहल्ला क्लीनिक भी खोले जाएंगे।

मेयर प्रत्याशी को लेकर AAP में “उलझन”

मेयर सीट पर किन्ही वजहों से फिलहाल अभी तक सहमित नहीं बन पाई है। सूत्रों की माने तो जिस प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनी थी, उसके समानांतर शहर के एक पूर्व पार्षद दिल्ली में रही अपनी बेटी का नाम आगे कर दिए। सूत्रों की मानें तो पार्टी के तमाम वर्कर पूर्व छात्रसंघ के एक पदाधिकारी की धर्मपत्नी के नाम पर सहमति बना चुके हैं। लेकिन ऐन वक्त पर पेंच फंसने की वजह से मेयर कंडीडेट के नाम का ऐलान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि एक या दो दिन अभी और लग सकते हैं।

Kanpur AAP (South) की पूरी कार्यकारिणी रही मौजूद

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान Kanpur AAP (South) के प्रशांत त्रिपाठी, योगेश दीक्षित, चिन्टू फौजी, विनय अवस्थी, संजय झा, नवीन तिवारी, अमित मिश्रा, शंकर श्रीवास, जीतू फेरवानी, राजेश अग्निहोत्री, संदीप शुक्ला, मुकेश, छोटेलाल, नागेंद्र राणा, प्रमोद बाबा, पियूष अग्रवाल, धर्मेंद्र कुमार, देवेश दीक्षित समेत कई जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

सपा सुप्रीमों अखिलेश सिंह यादव ने सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। कार्यकारिणी में उन्होंने एक बार फिर चाचा शिवपाल से तल्खी दिखाते हुए उनको किनारे ही रखा। चचेरे चाचा प्रोफेसर राम गोपाल यादव को उन्होंने मुख्य महासचिव बनाया है। कार्यकारिणी जातिगत समीकरणों को ध्यान  में रखते हुए उन्होंने तीन ब्राम्हणों को भी जगह दी है। साथ ही सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला उन्होंने हिमांचाल प्रदेश के चुनाव में प्रत्याशी उतारने का लिया।


[caption id="attachment_17897" align="aligncenter" width="640"] अखिलेश सिंह यादव (Ex.CM UP)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख और यूपी के Ex.CM अखिलेश सिंह यादव ने अपनी “Team” (राष्ट्रीय कार्यकारिणी) का ऐलान कर दिया। इसमें चाचा शिवपाल सिंह यादव को उन्होंने बिल्कुल भी तरजीह नहीं दी। दूसरे चाचा प्रोफेसर रामगोपाल सिंह यादव का उन्होंने कद बढ़ाते हुए उन्हें पार्टी का मुख्य महासचिव बनाया। बसपा से हाल में आए कद्दावर नेता इंद्रजीत सरोज को भी सपा सुप्रीमों ने बड़ा तोहफा दिया है। इन सबके बाद जो सबसे बड़ा फैसला लिया वह काफी चौंकाने वाला रहा। अखिलेश सिंह यादव ने हिमांचाल प्रदेश चुनाव में अपने “योद्धाओं” (प्रत्याशियों) को उतारने का ऐलान किया।

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आक्रामक मूड में दिखाई दे रहे सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव

सपा सुप्रीमों अखिलेश सिंह यादव पार्टी का दोबारा प्रेसीडेंट बनने के बाद काफी आक्रामक मूड में दिखाई दे रहे हैं। सपा में चाचा शिवपाल सिंह को किनारे कर उन्होंने अपने तल्ख तेवर दिखाने के साथ प्रोफेसर रामगोपाल सिंह यादव के करीबी लोगों को काफी तरजीह भी दी।



प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, हिमांचल में लड़ेगी पार्टी चुनाव

कार्यकारिणी गठन के बाद सपा प्रवक्त राजेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हिमांचल प्रदेश से में अपने उम्मींदवार खड़ा करेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। पार्टी की तरफ से हिमांचल प्रदेश के चुनावों के लिए प्रभारी भी नियुक्त कर दिए गए हैं। सभी प्रभारी कांगड़ा समेत अन्य जनपदों में पहुंच चुके हैं। गौरतलब है कि हिमांचल प्रदेश में 68 विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव होने हैं। 16 अक्तूबर को चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। जो कि 23 अक्तूबर तक रहेगी।

करीब चार दशक की लंबी प्रैक्टिस के साथ मधुर व्यवहार के बल पर राधा कृष्ण पांडेय ने Kanpur बार एसोशिएसन के प्रेसीडेंट पद का चुनाव जीत लिया। पिछले वर्ष हुए बार के चुनाव में वह तीसरे पायदान पर थे। राधा कृष्ण पांडेय दि लायर्स के भी प्रेसीडेंट रह चुके हैं। 


[caption id="attachment_17681" align="aligncenter" width="640"]radha krishna pandey--, redeyestimes.com Kanpur बार प्रेसीडेंट का चुनाव जीतने के बाद समर्थकों के संग खुशी की मुद्रा में राधा कृष्ण पांडेय[/caption]

कानपुर। नवनिर्वाचित Kanpur बार एसोशिएसन के प्रेसीडेंट राधा कृष्ण पांडेय ने जीत के बाद कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान की रक्षा और सुरक्षा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। श्रीपांडेय ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़ेउन्होंने कहा कि रोजगार स्थापित होने के बाद युवा अधिवक्ताओं को खुद को स्थापित करने में काफी मदद मिलेगी। बार प्रेसीडेंट राधा कृष्ण पांडेय ने कहा कि कचहरी और अधिवक्ताओं को विकास के रास्ते पर ले जाना है।


Ch Harmohan Singh Para Medical Sciences & , Nursing Institutionपहले राउंड से ही एक-एक वोट के लिए होती रही जद्दोजहद


Kanpur बार एसोसिएशन के चुनाव में प्रेसीडेंट पद की मतगणना में शुरुआती रुझान में नसीरुद्दीन ने बढ़त बनाई लेकिन जैसे ही मतपत्रों के बंडल और खुले वह पीछे होते चले गए। इसके बाद राधा कृष्ण पांडेय और श्याम जी के बीच कांटे की टक्कर शुरु हो गई। दोनों के बीच आखिर दौर तक कांटे का संघर्ष रहा। अंत में एल्डर्स कमेटी ने राधा कृष्ण पांडेय को 109 वोटों से विजयी घोषित किया। कमोवेश कुछ ऐसे ही हालात सेकेट्री पद पर भी रहा। यहां विजयी भानुप्रताप सिंह और रनर रहे राकेश तिवारी के बीच शुरु से ही कांटे का संघर्ष रहा। कभी भानु आगे हुए तो कभी राकेश लेकिन अंत में भानुप्रताप सिंह को कमेटी ने 149 वोटों से विजयी घोषित किया।



40 साल से प्रैक्टिस कर रहे राधाकृष्ण लायर्स के रह चुके हैं प्रेसीडेंट

Kanpur बार एसोशिएसन के नवनिर्वाचित प्रेसीडेंट राधाकृष्ण पांडेय करीब चार दशक से प्रैक्टिस कर रहे हैं। वह लायर्स एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रह चुके है। पिछले साल बार एसोसिएशन के चुनाव में वह तीसरे पायदान पर थे। प्रैक्टिसशनर वकीलों के बीच अच्छी छवि के चलते अधिवक्ताओं ने उन पर भरोसा जताया। वह वर्ष 1977 से वकालत कर रहे हैं।