मिशन 2019 की तैयारियों में पूरे जोश के साथ कांग्रेस अपनी रणनीति बनाने में जुटी है। गुरुवार देर रात Uttar Pradesh की बागडोर संभाल रहीं प्रियंका गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर सूबे की 25 प्रमुख सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगा दी। सूत्रों की मानें तो जल्द ही कांग्रेस हाईकमान यूपी में पहली List के तौर पर इन नामों की सूची जारी कर सकता है। इस सूची को लेकर केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भी खासी बेचैनी है। बताया जा रहा है कि इनमें वो सीटें भी हैं जिनको 2009 के चुनाव में कांग्रेस जीत चुकी है।


[caption id="attachment_18854" align="alignnone" width="720"] गुरुवार देर रात कांग्रेस मुख्यालय में मीटिंग के लिए पहुंची प्रियंका गांधी।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


Mid-Night तक सचिवों के साथ मीटिंग करते रहे दोनों दिग्गज


कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा और दूसरे महासचिव व पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार रात 12 बजे तक अपने सचिवों के साथ मैराथन बैठक करते रहे। काफी माथापच्ची के बाद अंततः 25 नामों पर फाइनल मुहर दोनों नेताओं ने लगा दी।

[caption id="attachment_18855" align="alignnone" width="695"] मीटिंग के लिए कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया।[/caption]

25 सीटों पर जीत की उम्मींद लगाए बैठी है कांग्रेस


जानकार सूत्रों के मुताबिक, यूपी की 80 सीटों में से 25 पर मज़बूत उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करने के बाद नाम फाइनल किए गए। इन सीटों पर पूर्व में कांग्रेस जीत का स्वाद चख चुकी है। ऐसे में ताकतवर और जनाधार वाले नेता को मैदान में उतार कांग्रेस फिर से इन सीटों को जीतकर वापस पाना चाह रही है। कानपुर समेत कुछ सीटों पर कांग्रेस के दिग्गजों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही हैं। Kanpur में गुटबाजी के साथ कई-कई दावेदार भी हैं।

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इस रणनीति पर है कांग्रेस का पूरा फोकस


सूत्रों की मानें तो जहां कांग्रेस और बीजेपी में मुकाबला हो वहां सपा-बसपा गठबंधन उसी लिहाज से उम्मीदवार दे। लेकिन जहां बीजेपी के सामने मुकाबले में सपा-बसपा का उम्मीदवार टक्कर में हो वहां कांग्रेस बीजेपी को हराने में मदद करने वाला उम्मीदवार दे। पार्टी फिलहाल इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है। यूपी में दो कार्यवाहक प्रेसीडेंट बनाने के मुद्दे पर भी काफी देर तक चर्चा की गई। वहीं, कुछ दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर उन्हें समायोजित करने के लिए भी बातचीत कर चर्चा की गई।
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