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वार्ड नंबर 84 जूही कलॉ से सपा, कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों के खिलाफ "बागी" प्रत्याशी बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं। ये सभी "बागी" काफी ताकतवर हैं, शायद यही वजह है कि अधिकृत प्रत्याशियों के रातों की नींद गायब हो चुकी है। बागियों की बगावत के बीच ही बसपा का हाथी काफी खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं। क्षेत्र के लोगों की मानें तो बसपा प्रत्याशी आरफा खातून के चुनाव प्रचार का शोर तो नहीं है लेकिन जोर काफी है। इकलौती मुस्लिम प्रत्याशी होने का उनको सीधा लाभ मिल रहा है। मुस्लिम वोटर का उनके साथ जाना तय भी माना जा रहा है। 


[caption id="attachment_18315" align="aligncenter" width="640"] किदवईनगर विधायक महेश त्रिवेदी के साथ जनसंपर्क कर वोट मांगती बीजेपी प्रत्याशी अल्पना जायसवाल।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। किदवईनगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-84 (जूही कलॉ) में BJP, कांग्रेस,सपा के “बागी” प्रत्याशियों की “बगावत” ने अधिकृत प्रत्याशियों का “बैंड” बजा दिया है। बगावत की आंधी में कांग्रेस औ और बीजेपी के प्रत्याशियों के रातों की नींद और दिन का सुकून गायब कर दिया है। चुनाव प्रचार से अधिक जोर इस बात पर लगाया जा रहा है कि “बागी” कहां शह और मात की सियासी चौसर सजाए हैं। छात्र राजनीति के गढ़ वाले इस वार्ड में हर कदम पर प्रत्याशियों के लिए कांटे बिछे हैं। कुल मिलाकर यहां मुकाबाल चतुष्कोणीय दिखाई दे रहा है। इन सबके बीच BSP प्रत्याशी आरफा खातून खामोशी की चादर ओढ़े नजर आ रही हैं। चुनावी प्रचार का शोर कहीं नहीं है लेकिन अंदर ही अंदर उन्होंने पूरा जोर लगा रखा हैं। विश्वस्त्र सूत्रों की मानें तो यदि यहां मुस्लिम वोटर सेंट्रालाइज्ड हो गया तो हाथी कि चिघाड़ सुनाई दे सकती है।


वार्ड नंबर-84 में हैं करीब 23 हजार मतदाता

वार्ड नंबर-84 जूही कलॉ में करीब 23 हजार के आसपास मतदाता हैं। इसमें लाल कालोनी, पीली कालोनी, हरी कालोनी, रामलाल का तालाब, कच्ची बस्ती, गोविंदनगर का जे ब्लाक समेत कई मोहल्ले आते हैं। इस वार्ड में भी सर्वाधिक मतदाता ब्राम्हण हैं। यहां ब्राम्हण वोटर करीब 35 फीसदी है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटर हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब चार हजार के आसपास है।



BJP प्रत्याशी अल्पना जायसवाल का समीकरण बिगाड़ रहीं बागीशिवकांती शुक्ला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से निवर्तमान पार्षद बिल्लू जायसवाल की पत्नी अल्पना जायसवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के सहारे और RSS कार्यकर्ताओं की आस लेकर अल्पना अपना चुनावी अभियान तेज किए हुए हैं। पति बिल्लू के साथ युवा समर्थक भी भारी संख्या में प्रचार के दौरान नजर आ रहे हैं लेकिन यहां से बीजेपी की बागी शिवकांती शुक्ला अधिकृत प्रत्याशी का पूरा समीकरण बिगाड़ने में जुटी हैं। वार्ड के लिए शिवकांती शुक्ला नया नाम बिल्कुल भी नहीं है। शिवकांती शुक्ला पूर्व में यहां से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। बाद में वह बीजेपी में चली गई थीं। इस बार वह टिकट की प्रबल दावेदार थीं लेकिन टिकट नहीं मिली। इस लिए उन्होंने बगावत का बिगुल बजा दिया है। जानकारों की मानें तो अल्पना को पहले शिवकांती से ही निपटना होगा।

 

रचना त्रिपाठी ने बिगाड़ दी कांग्रेस प्रत्याशी निधी दीक्षित की गणित

कांग्रेस ने वार्ड नंबर 84 से निधि दीक्षित को अपना प्रत्याशी बनाया है लेकिन किदवईनगर विधान सभा के EX.MLA अजय कपूर ने रचना त्रिपाठी को मैदान में उतार कर कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के सपनों पर पानी फेरने का काम कर दिया। रचना त्रिपाठी के कार्यालय का शुभारंभ कर अजय कपूर ने सार्वजनिक तौर पर वोट और सपोर्ट की अपील करते हुए निधि का चुनाव काफी हल्का कर दिया। इस बात की खबर कांग्रेस हाईकमान तक भी है। जानकारों की मानें तो रचना त्रिपाठी अधिकृत प्रत्याशी की तुलना में कहीं बेहतर चुनाव लड़ रही हैं। यहां कांग्रेस से एक और बागी तारा सिंह भी काफी अच्छा चुनाव लड़ रही हैं।

सपा की अधिकृत प्रत्याशी को पानी पिला रही हैं बागी राजकुमारी

सपा ने यहां से रानी यादव को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। रानी यादव के मुकाबले सपा के मोनू वर्मा की मां राजकुमारी ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। राजकुमारी अपने बैनर और होर्डंग्सि में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्रा की फोटो और नाम लिखकर वोट मांग रही हैं। माना जा रहा है कि निश्चित तौर पर वह अधिकृत प्रत्याशी का काफी नुकसान करेंगी।

[caption id="attachment_18318" align="aligncenter" width="585"] क्षेत्र की मुस्लिम महिलाओं के साथ बसपा प्रत्याशी आरफा खातून जनसंपर्क के दौरान समर्थन की अपील करती हुईं।[/caption]

मुस्लिम बन सकते हैं BSP के हाथी के साथी 

बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने यहां से आरफा खातून को टिकट दिया है। इतना ही नहीं इस वार्ड से आरफा इकलौती मुस्लिम प्रत्याशी भी हैं। वार्ड में करीब चार हजार से अधिक वोटर मुस्लिम हैं। www.redeyestimes.com को मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक मुस्लिम वोटर पूरी तरह से आरफा खातून के पक्ष में करीब-करीब एक राय बना चुका है। यदि ऐसा होता है तो आरफा के जीत की राह बेहद आसान हो जाएगी, क्यों कि यहां बीएसपी के कैडर का वोटबैंक भी लगभग 2 हजार के आसपास है। साथ ही सबसे खास बात यह है कि यहां पर बीएसपी का कोई विद्रोही प्रत्याशी भी नहीं है। हालांकि चुनाव प्रचार-प्रसार में आरफा खातून काफी पीछे हैं लेकिन राजनीति के जानकार उनके चुनाव को अंदर ही अंदर काफी मजबूत मान रहे हैं।

DBS के पूर्व अध्यक्ष की पत्नी भी लड़ रहीं निर्दलीय चुनाव

डीबीएस कालेज छात्रसंघ के पूर्व प्रेसीडेंट रहे भूपेंद्र सिंह की पत्नी ममता सिंह भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों में वह एक मजबूत प्रत्याशी हैं। माना जा रहा है कि ममता सिंह एक बिरादरी का वोट बैंक अपने पाले में निश्चित तौर पर ले जाएंगी।

 

गोविंदनगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-34 (रतनलाल नगर) का चुनाव में कांटे का संघर्ष होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यहां से बीजेपी ने विधि राजपाल पर दांव लगाया है तो कांग्रेस ने पुराने कांग्रेसी दिग्गज अन्ना दिवेदी की धर्मपत्नी अर्चना दिवेदी को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन यहां जो नाम सबसे अधिक प्रभाव छोड़ रहा है वो है सांत्वना शर्मा का। सांत्वना निवर्तमान पार्षद मनीष शर्मा की पत्नी हैं। वो अपने पति मनीष, जेठ पंडित योगेश शर्मा और भरत शर्मा के जरिए विरोधियों पर सियासी तीर चला रही हैं। अभी तक की लड़ाई में वह अन्य प्रत्याशियों की तुलना में आगे बनी हैं। लेकिन राजनीति के जानकार मान रहे हैं चुनाव के अंत तक बाजी पलटेगी अवश्य। यहां आखिरी में चुनाव के त्रिकोणीय होने की गणित लगाई जा रही है। 


[caption id="attachment_18308" align="aligncenter" width="640"] निवर्तमान पार्षद और अपने पति मनीष शर्मा के साथ वार्ड नंबर 34 की प्रत्याशी सांत्वना शर्मा[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। गोविंदन नगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर-34 (रतनलाल नगर) का चुनाव बेहद दिलचस्प होगा। इस वार्ड में चुनाव कौन जीतेगा ? यह किसी को नहीं पता लेकिन एक बात तय है कि यहां सांत्वना शर्मा के धनुष से निकले तीर से हर प्रत्याशी कोई खुद को बचा रहा है। सभी प्रत्याशी अपनी टक्कर सांत्वना शर्मा से ही मान रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि यहां का चुनाव काफी दिलचस्प और कांटे के संघर्ष वाला होगा।


22,700 हजार से अधिक मतदाता चुनेंगे अपना पार्षद

वार्ड नंबर 34 रतनलाल नगर में करीब 22 हजार 700 से अधिक मतदाता अपने पसंद का पार्षद चुनेंगे। इस वार्ड के अंतर्गत गुजैनी A, B, दबौली HIG, MIG, रतनलाल नगर, महादेव नगर, बर्रा भाग 7, स्टेट बैंक कालोनी, बर्रा 3, माली प्लाट समेत कई मोहल्ले आते हैं। यहां सर्वाधिक मतदाता ब्राम्हण हैं। उसके बाद सिंधी समुदाय का वोटर है।

शिवसेना के टिकट से चुनावी रणभूमि में हैं सांत्वना शर्मा

निवर्तमान पार्षद मनीष शर्मा की धर्मपत्नी सांत्वना शर्मा को शिवसेना ने अपना प्रत्याशी बनाया है। सांत्वना के पति मनीष शर्मा दो बार से पार्षद हैं। पहला चुनाव वह कांग्रेस के टिकट पर जीते थे दूसरी बार वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीते। परशीमन बदलने के साथ यह सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। गुजैनी A, B ब्लाक के साथ रतनलाल नगर के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा सांत्वना के खाते में जा सकता है। साथ ही बर्रा भाग 7 और 3 में भी वह बेहतर चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो वह बीजेपी के वोटबैंक में भी तगड़ी सेंधमारी कर सकती हैं।

विधि राजपाल हैं BJP की प्रत्याशी

केंद्र और यूपी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से विधि राजपाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। विधि के पिता लंबे समय से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं। विधान सभा चुनाव में उन्होंने टिकट की दावेदारी भी ठोंकी थी। अंदरखाने की मानें तो विधि राजपाल के चुनाव में संगठन अभी तक पूरे मन से चुनाव में नहीं लगा है। विधि अपनी दम पर चुनाव की गाड़ी को खींच रही हैं। बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के साथ सिंधी समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उनके खाते में जा सकता है। क्षेत्र के कई जगहों पर अभी भी उनका चुनाव गति नहीं पकड़ सका है। यह उनका माइनस प्वाइंट बन सकता है।

कांग्रेस ने अन्ना दिवेदी की पत्नी को दिया है टिकट

कांग्रेस पार्टी ने पुराने कांग्रेसी नेता अन्ना दिवेदी की धर्मपत्नी अर्चना दिवेदी को वार्ड नंबर 34 से अपना प्रत्याशी बनाया है। पुराने कांग्रेसी होने के नाते अन्ना दिवेदी की क्षेत्र में पकड़ है। कुछ जगहों पर कांग्रेस प्रत्याशी का पंजा भारी दिखा। लेकिन मतदाताओं में कांग्रेस के पंजे को लेकर जो उत्साह होना चाहिए वह अभी तक नहीं दिखाई दे रहा है। जानकारों की मानें तो यदि अन्ना ने ब्राम्हण वोट में यदि तगड़ी सेंधमारी कर दी तो वह अंत तक चुनाव के मुख्यधारा में आ सकते हैं। कहा यह भी जा रहा है कि अर्चना दिवेदी जितना बढ़िया चुनाव लड़ेंगी तो उसका सीधा नुकसान बीजेपी को ही होगा।

सपा प्रत्याशी लड़ाई की मुख्य धारा में नहीं

वार्ड नंबर 34 से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी अभी तक चुनावी लड़ाई की मुख्यधारा में नहीं आ सकी हैं। गुजैनी को दो ब्लाकों में उनका चुनाव थोड़ा-बहुत नजर आ रहा है। हालांकि इन ब्लाकों में भी सांत्वना शर्मा सब पर भारी पड़ रही हैं।

ब्राम्हण वोटर जिधर झुकेगा, वही प्रत्याशी चुनाव जीतेगा

वार्ड नंबर-34 रतनलाल नगर में ब्राम्हण वोट बैंक करीब 35 से 40 फीसदी के बीच है। इसके बाद सिंधी समुदाय का सबसे अधिक वोटर है। ये दोनों ही वोटर बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक माने जाते हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो इसमें निर्णायक भूमिका ब्राम्हण वोटरों की रहेगी। यह वोटर जिधर झुकेगा, उसी प्रत्याशी की जीत होगी। माना यह भी जा रहा है कि अर्चना दिवेदी ब्राम्हण वोट बैंक में आखिर तक अच्छी खासी सेंधमारी कर सकती हैं।

गोविंदनगर विधान सभा एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर 67-बर्रा (पश्चिम) की इस सीट पर भाजपा नेता और कार्यकर्ता बड़ी जीत के दावे कर रहे हैं। यहां से कांग्रेस और सपा के प्रत्याशियों का चुनाव काफी हल्का है। सिर्फ आम आदमी पार्टी (AAP) की उम्मींदवार निशा निगम संघर्ष करती दिख रही हैं। शिवसेना ने भी यहां से प्रत्याशी खड़ा किया है। इस सीट पर पिछली बार चर्चित पार्षद नवीन पंडित ने काफी बड़ी जीत दर्ज की थी। अब देखना यह है कि इस बार जीत का अंतर कम होता है या फिर अधिक।


[caption id="attachment_18291" align="aligncenter" width="680"] पार्षद नवीन पंडित के साथ एरिया में संपर्क करतीं बीजेपी प्रत्याशी दीपा दिवेदी।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। करीब 18 हजार मतदाताओं वाले वार्ड नंबर 67 (बर्रा पश्चिम) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) बड़ी जीत दर्ज करने को आतुर है। BJP की इस राह में आम आदमी पार्टी (AAP) की निशा निगम अभी तक बाधा बनती दिखाई दे रही हैं। इस सीट से पिछली बार शहर के चर्चित पार्षद नवीन पंडित भारी मतों (1999) से जीत दर्ज मोतीझील पहुंचे थे। महिला सीट होने से BJP ने इस बार यहां से दीपा दिवेदी को प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी के साथ ही नवीन पंडित की भी प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी हुई है, वो अपने वार्ड नंबर 93 के साथ यहां भी सक्रिय हैं। अभी तक के जो समीकरण बने हुए हैं उसके हिसाब से बीजेपी को यदि कोई टक्कर दे रहा है तो वह AAP प्रत्याशी निशा हैं। बुधवार को AAP के दिग्गज संजय सिंह के पहुंचने से निशा के चुनावी अभियान में और गति आ गई।


वार्ड नंबर 67 में हैं 50 फीसदी ब्राम्हण मतदाता

करीब 18 हजार मतदाताओं वाले वार्ड नंबर 67 (बर्रा पश्चिम) में सर्वाधिक वोटर ब्राम्हण हैं। 50 फीसदी ब्राम्हण मतदाता ही चुनाव का रुख तय करेंगे। इस वार्ड के अंतर्गत बर्रा भाग 4,5,6 के साथ गुंजन बिहार का इलाका भी आता है। वार्ड में ब्राम्हण वोटरों के बाद बैकवर्ड वोटरों की संख्या है। दलित मतदाता यहां काफी कम हैं।

BJP मान रही है अपनी सबसे सुरक्षित सीट

BJP के दिग्गज वार्ड 67 को सबसे सुरक्षित सीट मान रहे हैं। उसके पीछे कई तर्क हैं। सबसे अहम ब्राम्हण वोट बैंक। बीजेपी ने यहां से दीपा दिवेदी को प्रत्याशी बनाया है। विधान सभा के चुनाव में भी बीजेपी ने यहां पर जीत दर्ज की थी। तब यहां से पार्षद रहे नवीन पंडित ने बागी होकर सत्यदेव पचौरी को खुलकर चुनाव लड़ाया था। महिला सीट होने से भाजपा ने नवीन को उनके पुराने गढ़ वार्ड नंबर 93 से चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया। नवीन ने यहां पर रिकार्ड वोटों से पिछला चुनाव जीता था। बीजेपी प्रत्याशी के लिए यहां पर नवीन पंडित ने भी जनसंपर्क कर वोट मांगे हैं।

[caption id="attachment_18292" align="aligncenter" width="720"] समर्थकों के साथ क्षेत्र के व्यापारियों से संपर्क करतीं AAP की प्रत्याशी निशा निगम।[/caption]

AAP ने निशा निगम को मैदान में है उतारा

आम आदमी पार्टी (AAP)  ने इस सीट से सक्रिय महिला कार्यकर्ता निशा निगम को टिकट दिया है। महिलाओं की टोली के साथ निशा निगम चुनाव को रोचक बनाए हैं। बुधवार को उनके समर्थन में AAP के राष्ट्रीय नेता संजय सिंह ने वाहन जुलूस निकाल स्थानीय जनता से वोट और सपोर्ट की अपील की। निशा कुछ मोहल्लों में अन्य प्रत्याशियों की तुलना में बेहतर चुनाव लड़ रही हैं।

सपा-बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उठा पा रहे हैं अपना चुनाव

यहां से समाजवादी पार्टी ने मुन्नी देवी और कांग्रेस ने विभा श्रीवास्तव को टिकट दिया है लेकिन दोनों ही दलीय प्रत्याशी अभी तक चुनाव को उठा नहीं पाए हैं। खास बात ये है कि ब्राम्हण बाहुल्य इस वार्ड में शिवसेना ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। शिवसेना ने शशिप्रभा शुक्ला को टिकट दिया है। बसपा ने यहां से अपना कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया है।

वार्ड नंबर 74 श्याम नगर छावनी विधान सभा एरिया के अंतर्गत आता है। यहां मुस्लिम के साथ सभी जाति के मतदाता हैं लेकिन ब्राम्हण वोटर सर्वाधिक हैं। यहां ब्राम्हण वोटर करीब सात हजार के आसपास है। इस वार्ड से यूपी विधान सभा के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी रघुनंदन सिंह भदौरिया को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशी सोहेल अंसारी को यहां वोटरों ने पसंद किया था। 


[caption id="attachment_18281" align="aligncenter" width="585"] बुजुर्गों और युवाओं के साथ वार्र्ड नंबर 74 के एरिया में संपर्क करते निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। करीब 24 हजार की आबादी वाले वार्ड नंबर-74 में राजनीतिक दल के प्रत्याशियों के प्रति मतदाताओं का “मूड” करीब-करीब “Off ” है। उसके पीछे सबसे बड़ी वजह वार्ड की कई मूलभूत समस्याए हैं। इस वार्ड में कई पॉश इलाके भी शामिल हैं। यही वजह है कि मतदाताओं का समर्थन पूरी तरह से न मिलने के कारण राजनीतिक दल के  प्रत्याशियों का चुनाव अभी पूरे शबाब पर नहीं पहुंच सका है। निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव का चुनाव प्रचार के साथ मतदाताओं में भी ठीक-ठाक पकड़ बनाए हुए अभी तक दिख रहे हैं।  इनको टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस प्रत्याशी राजीव सेतिया। सपा और बीजेपी के प्रत्याशी चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुटे हैं। संभव है कि वोटिंग से पहले यहां पर चुनाव त्रिकोणीय हो सकता है लेकिन अभी तक की लड़ाई सीधी दिख रही है। 


करीब 24 हजार मतदाता चुनेंगे अपना पार्षद

वार्ड नंबर-74 श्यामनगर में करीब 24 हजार मतदाता हैं। ये मतदाता 22 नवंबर को अपना पसंदीदा पार्षद चुनेंगे। वार्ड में रक्षा बिहार, श्यामनगर के कई ब्लाक, कृष्णानगर, गिरिजा नगर, गदियाना, रामपुरम समेत कई मोहल्ले हैं। इसमें तीन यादव बाहुल्य एरिया भी हैं।



ब्राम्हण वोट बैंक तय करेगा प्रत्याशी का भविष्य

यूं तो वार्ड में करीब 24 हजार वोटर हैं लेकिन 33 फीसदी के करीब ब्राम्हण वोट बैंक इस वार्ड में हैं। राजनीति के पंडितों की मानें तो सात हजार के करीब ब्राम्हण मतदाता जिस तरफ झुकेगा। वही प्रत्याशी मोतीझील पहुंचेगा। इसके बाद यादव वर्ग का नंबर आता है। यहां यादव वोटर भी काफी अधिक संख्या में है।

निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव बने हैं युवाओं की पहली पसंद

लंबे समय से क्षेत्र के सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दे रहे निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव वार्ड के युवाओं की पहली पसंद बने हैं। सामाजिक सेवा से हमेशा जुड़े रहने वाले वरुण को क्षेत्र के युवाओं के साथ पढ़े लिखे वर्ग का भी तगड़ा समर्थन मिल रहा है। शायद यही वजह है कि उनका चुनाव दलीय प्रत्याशियों के मुकाबले काफी आगे दिख रहा है। कई मोहल्लों में उन्हें तगड़ा समर्थन मिल रहा है। वरुण का मृदुभाषी व्यवहार और सामाज के हर वर्ग में तगड़ी पकड़ चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि पिछले चुनावों के ट्रैक को देखें तो साफ है कि यहां के मतदाता निर्दलीय प्रत्याशियों को भी पसंद करते हैं। यह बात वरुण के पक्ष में जाती दिख रही है। उल्लेखनीय है कि यहां से पहले भी मतदाता निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव में विजयश्री की माला पहना चुके हैं।

दलीय प्रत्याशियों में कांग्रेस प्रत्याशी राजीव सेतिया हैं भारी

कांग्रेस ने राजीव सेतिया को इस वार्ड से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। राजीव सेतिया के पिता मदन लाल सेतिया भी पार्षद रहे थे। पिता की छवि के साथ राजीव अपने व्यवाहर और चुनाव प्रचार से चुनाव को गति दिए हुए हैं। अभी तक चुनाव प्रचार में निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव से उनकी सीधी टक्कर दिखाई दे रही है। राजीव को इस बात का भी एडवांटेज मिल रहा है कि विधान सभा के चुनाव में इस वार्ड से कांग्रेस प्रत्याशी सोहैल अहमद ने जीत दर्ज की थी।

सपा ने दिया है एहसान खां को टिकट

समाजवादी पार्टी ने इस सीट से एहसान खां को टिकट दिया है। एहसान खां की बेगम पिछले चुनाव में यहां रनर थी लेकिन इसके बाद भी अभी तक वह क्षेत्र की जनता में पकड़ नहीं बना पा रहे हैं। एहसान खां के खिलाफ एक निगेटिव बात यह सामने आ रही है कि उनके खिलाफ कई अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। जहां पर उनका तगड़ा वोट बैंक है वहां अंदर ही अंदर विरोध भी चल रहा है। गदियाना एरिया जो सपा का वोट बैंक माना जाता है वहां पर सपा प्रत्याशी को लेकर जनता के बीच कई तरह की राय बनी है। अभी तक के चुनाव में सपा प्रत्याशी नंबर तीन पर मतदाताओं के बीच आंके जा रहे हैं। चुनाव के अंत तक वह त्रिकोणीय लड़ाई में आ जाएं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

दिनेश दिवेदी हैं BJP के प्रत्याशी

बीजेपी ने इस वार्ड से दिनेश दिवेदी को टिकट दिया। दिनेश का क्षेत्र में गेस्ट हाउस है। यहां बीजेपी के नेताओं की मीटिंग होती है। यहां से पुराने कार्यकर्ताओं की टिकट काटने के बाद बीजेपी ने दिनेश को टिकट दिया है। बीजेपी प्रत्याशी का चुनाव अभी तक पूरी गति नहीं पकड़ सका है। संगठन के साथ RSS भी अभी तक दिनेश के चुनाव प्रचार में नहीं उतरी है। यहां एक बात और उल्लेखीय है कि विधान सभा के चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे रघुनंदन भदौरिया को करारी हार मिली थी। हालांकि जब वह विधायक बने थे तो इस वार्ड से लीड भी लिए थे लेकिन इस बार कांग्रेस प्रत्याशी सोहैल अंसारी ने जीत दर्ज की।

अंत में हो सकता है त्रिकोणीय घमासान !

अभी तक के चुनावी हलचल में निर्दलीय प्रत्याशी वरुण यादव के साथ कांग्रेस प्रत्याशी की सीधी टक्कर है लेकिन चुनाव से ठीक पहले यहां त्रिकोणीय घमासान मच जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। सपा और बीजेपी प्रत्याशी इस पूरी कोशिश में लगे हैं कि चुनाव को त्रिकोणीय बनाया जाए लेकिन यह कब हो पाएगा ? इसका पता नहीं। शायद यही वजह है कि सपा और बीजेपी के प्रत्याशी नाराज लोगों को मनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। लेकिन गुस्साए कार्यकर्ता और वोट के ठेकेदार हैं कि मानने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नाराज कार्यकर्ता यदि बाहर निकल आए तो त्रिकोणीय घमासान इस सीट पर पक्का है।

Kanpur के South City स्थित वार्ड नंबर-72 की सीट पर सिर्फ पार्षद प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा ही नहीं फंसी है बल्कि इन प्रत्याशियों के राजनीतिक "गुरु" कहे जाने वाले दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी फंस चुकी है। कांग्रेस प्रत्याशी जेपी पाल के लिए जहां कांग्रेस के Ex.MLA अजय कपूर सम्मान लगाए हुए हैं तो दूसरी तरफ अजय पाल को टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी ने भी अपनी ताकत लगा रखी है। चुनाव को और भी अधिक दिलचस्प बना दिया है कांग्रेस के "पुराने चावल" कैलाश पाल ने। गौरतलब यह है कि कैलाश चार बार पार्षद रह चुके हैं। इस लिए राजनीति के पंडित उनको हल्के में लेने की गल्ती बिल्कुल भी नहीं कर रहे हैं। 


[caption id="attachment_18260" align="aligncenter" width="960"] समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार करते कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। गोविंदनगर विधान सभा के वार्ड नंबर 72 के पार्षदीय चुनाव की “सियासी दाल” पक रही है। इस दाल में “तड़का” लगाकर कौन चुनाव जीतेगा ? यह तो वक्त बताएगा लेकिन एक बात यह बिल्कुल तय मानी जा रही है। कि पार्षद P3 में कोई एक P ही बनेगा। कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP) और कांग्रेस के ही पुराने दिग्गज व निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल (KP) के “सियासी चक्रव्यूह” में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी अजय पाल (AP) फंस गए हैं। हालांकि दबौली कालोनी के मतदाताओं के सहारे वो JP और KP को शह-मत देने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। राजनीति के पंडितों की मानें तो नतीजा चाहे जो भी हो लेकिन एक बात पक्की है कि चुनाव दिलचस्प होने के साथ ही बेहद कांटे का भी होगा। यहां प्रत्याशियों के साथ उन्हें चुनाव लड़े रहे पुराने दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। एक-एक वोट के लिए संघर्ष हो रहा है। सुबह से शाम तक जनसंपर्क के बाद प्रत्याशियों के दिग्गज देर रात सेटिंग-गेटिंग का फार्मूला तय करने में भी पीछे नहीं हैं।


वार्ड नंबर-72 में हैं 26 हजार से अधिक मतदाता

वार्ड नंबर-72 में करीब 26 हजार से अधिक मतदाता हैं। सर्वाधिक वोटर पाल बिरादरी के हैं। पाल बिरादरी के मतदाता करीब 40 फीसदी के आसपास हैं। दूसरे नंबर 30 फीसदी के करीब ब्राम्हण वोटर हैं। इसके बाद नुनिया ठाकुर, यादव, कुर्मी समेत अन्य पिछड़ी जाति के वोटर हैं। दलित वोटों का प्रतिशत कम है।

10 ने कराया था नामांकन, एक ने पर्चा वापस लिया

दबौली वार्ड नंबर-72 से कुल 10 प्रत्याशियों ने नामांकन करवाया था। बाद में एक प्रत्याशी ने अपना पर्चा वापस ले लिया है। अब इस वार्ड में कुल नौ प्रत्याशी ही बचे हैं।

ब्राम्हण मतदाता की कृपा से पार होगी चुनावी नाव

राजनीति के धुरंधरों की मानें तो पाल बिरादरी का सर्वाधिक वोट बैंक इस वार्ड में है। लेकिन तीन प्रत्याशियों के मैदान में कूदने की वजह से पाल बिरादरी का वोट बिखरेगा। ऐसे में यहां ब्राम्हण वोट बैंक काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो ब्राम्हण वोटरों की कृपा जिस प्रत्याशी पर ठीक ढंग से हो गई उसकी चुनावी “नाव” पार हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि तीनों ही प्रत्याशियों को ब्राम्हण लाबी का समर्थन हासिल है। इस लिए ऊंट किस करवट बैठेगा यह किसी को नहीं मालुम।



अजय पाल (AP) (BJP)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अजय पाल (AP) को दबौली कालोनी से तगड़ा समर्थन है। दबौली में तगड़ा वोट बैंक हैं। कई अन्य एरिया में भी वह सेंधमारी करते नजर आ रहे हैं। अजय पाल के लिए प्लस प्वाइंट यह है कि बीजेपी जैसे संगठन से उनको आखिरी दौर में काफी मदद मिल सकती है। नौरैयाखेड़ा में भी ठीक-ठाक वोटों की सेंधमारी अजयपाल कर सकते हैं। लेकिन माइनस फैक्टर MIG। नए परशीमन के मुताबिक MIG अब रतनलाल नगर वार्ड 34 में शिफ्ट कर गया। यहां करीब चार हजार मतदाता थे। ये सभी मतदाता बीजेपी के माने जाते थे। राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि थोड़ा नुकसान हो सकता है लेकिन इसकी भरपाई दूसरी जगहों से की जा रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि योगी की सभा के बाद चुनावी तस्वीर पलटेगी।



 

जय प्रकाश पाल (JP) (कांग्रेस)

ये नाम भी दबौली वार्ड-72 के मतदाताओं के लिए नया नहीं है। जय प्रकाश की पत्नी सोनी पाल वर्तमान में पार्षद हैं। जय प्रकाश को कांग्रेस से जुड़े हुए एक लंबा वक्त हो गया है। कांग्रेस के Ex.MLA अजय कपूर से उनकी निकटता किसी से छिपा नहीं है। दो दिन पहले अजय कपूर ने कार्यालय का शुभारंभ भी किया है। जय प्रकाश क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों के बल पर जनता से एक बार फिर मोतीझील भेजने का आशीर्वाद मांग रहे हैं। दबौली गांव के वोटरों का सबसे बड़ा भाग उनके ही खाते में जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। दबौली कालोनी के वोट बैंक में भी वह तगड़ी सेंधमारी करने में जुटे हैं। जेपी का चुनाव करीब-करीब सभी जगहों पर दिख रहा है। जेपी का चुनाव अंदर के साथ बाहर भी मजबूत नजर आ रहा है।

[caption id="attachment_18261" align="aligncenter" width="640"] समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार करते निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल (KP)[/caption]

कौन है कैलाश पाल (KP) (निर्दलीय)

दबौली गांव के रहने वाले कैलाश पाल कांग्रेस के पुराने नेता है। वह चार बार पार्षद बन चुके हैं। इसें एक बार निर्दलीय भी वह चुनाव जीत चुके हैं। पिछला चुनाव वह हार गए थे। राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कैलाश पाल के बारे में कहा जा रहा है उनका चुनाव शोर नहीं है। लेकिन चुनाव भारी है। पाल बिरादरी के एक खास वर्ग में उनकी घुसपैठ ठीक है। साथ ही पुराने संबध भी उनके काम आ रहे हैं। कुल मिलाकर यूं कह सकते हैं कि कैलाश पाल अभी तक स्लीपिंग मॉड्यूल्स की भूमिका में बने हुए हैं। उनका चुनाव अंदर ही अंदर है।

आखिरी दौर में पलट सकती है बाजी

राजनीति के पंडितों की मानें तो चुनाव के अंतिम दौर में बाजी पलट सकती है। कई नाराज लोगों को मनाने का काम चल रहा है। कुछ जगहों पर वोटरों की नाराजगी भी दूर की जा रही है। ऐसे में दो-तीन दिन के बाद चुनावी तस्वीर कुछ अलग भी हो सकती है।

सपा-बसपा अभी तक मुख्य लड़ाई में नहीं

वार्ड नंबर-72 में सपा प्रत्याशी राजनाथ यादव और बसपा प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह (भानू) अभी तक अपना चुनाव पूरी तरह से उठा नहीं पाए हैं। शायद यही वजह है कि ये दोनों प्रत्याशी फिलहाल अभी तक मुख्य लड़ाई में नहीं हैं। आखिरी दौर में इनमें से कोई चुनावी लड़ाई में यदि आ जाए तो यह भी बड़ी बात ही होगी।

वार्ड नंबर-7 निराला नगर में सर्वाधिक वोटरों की संख्या दलितों की है। यहां मलिन बस्ती के साथ झुग्गी-झोपड़ी वाले वोटरों की तादात काफी अधिक है। कालोनी के नाम पर सिर्फ रेलवे और पीली कालोनी ही है। कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों के बाहरी होने की वजह से मतदाता उन पर पूरा मन नहीं बना पा रहे हैं। जिसकी वजह से सीधा लाभ निर्दलीय और AAP प्रत्याशी उठा रहे हैं। 


YOGESH TRIPATHI


कानपुर। गोविंदनगर और किदवईनगर की सीमा रेखा को छूने वाले वार्ड नंबर-7 के 28 हजार मतदाता इस बार अहम फैसला ले सकते हैं। सभी की जुबां पर बस एक ही बात है बाहरी प्रत्याशी के सिर पर जीत का सेहरा नहीं बाधेंगे इस बार। चुनाव की लड़ाई भी कम रोचक नही है। एक निर्दलीय प्रत्याशी ने बाहरी बनाम घर का नारा दे दिया है। तो वहीं AAP प्रत्याशी ने झुग्गी-झोपड़ी बनाम बंगला का नारा देकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। यह सत्य है कि जीतेगा कोई एक लेकिन चुनाव बेहद रोचक होगा। www.redeyestimes.com ने वार्ड के अंतर्गत आने वाली कई बस्ती के लोगों से बातचीत की तो सभी ने कहा कि इस बार बाहरी बिल्कुल भी नही चलेगा, खासतौर पर बंगले में रहने वाला तो बिल्कुल भी नहीं। हम बस्ती के बीच का ही कोई नेता चुनेंगे।


वार्ड से ये है प्रमुख प्रत्याशी

इस वार्ड से कुल 10 प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में बचे हैं। पिछली बार यह सीट सामान्य थी लेकिन इस बार आरक्षित की गई है। संगठन की कृपा से टिकट पाए बीजेपी से गिरीशचंद्रा, कांग्रेस से वीरेंद्र कुमार, बसपा से मनीष कठेरिया और समाजवादी पार्टी से प्रीतम सिंह, निर्दलीय विनय वर्मा, आम आदमी पार्टी के मुन्ना भारत प्रमुख हैं। बीजेपी के गिरीशचंद्रा और कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार का निवास वार्ड के अंतर्गत नहीं है। इन दोनों प्रत्याशियों का निवास वार्ड से कई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

[caption id="attachment_18250" align="aligncenter" width="960"] दिल्ली से आए AAP विधायक ने प्रत्याशी मुन्ना भारत के लिए मांगा बस्ती में पहुंचकर वोट।[/caption]

निर्दलीय और AAP प्रत्याशी को मिल रहा है सीधा फायदा

बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के बाहरी होने का सीधा फायदा निर्दलीय विनय वर्मा और AAP प्रत्याशी मुन्ना भारत उठा रहे हैं। पोर्टल की पड़ताल में जो प्रमुख बात सामने यह आई है कि निर्दलीय विनय वर्मा बाहरी बनाम घर का नारा बुलंद कर मतदाताओं को काफी हद तक रिझाने में कामयाब हो रहे हैं। कई वोटरों ने इस बात को स्वीकार किया है उनको अपने ही बीच का पार्षद चाहिए। कई युवा वोटरों ने कहा कि बाहर वाले की चौखट पर जाने से बेहतर है कि हम अपने बीच का ही गरीब प्रत्याशी चुने, ताकि वह आसानी से हम लोगों के लिए सुलभ रहे।

वहीं AAP प्रत्याशी मुन्ना भारत ने “झुग्गी-झोपड़ी बना बंगला” का नारा बुलंद कर रखा है। वह खुद भी बस्ती के बीच बने बेहद जर्जर मकान में रहते हैं। लंबे समय से जुड़े होने की वजह से AAP ने मुन्ना को टिकट दे दिया। शनिवार को मुन्ना के समर्थन में दिल्ली से आए विधायक ने कई बस्तियों के बीच जाकर संपर्क भी किया।

जीत-हार के प्रमुख फैक्टर

चुनाव में जीत किसकी होगी यह तो नहीं पता लेकिन जो समीकरण बैठ रहे हैं वह राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा सकते हैं। करीब 28 हजार से अधिक मतदाताओं वाले इस वार्ड में सर्वाधिक संख्या दलित वोटरों की है। यह संख्या करीब 14 से 15 हजार के बीच बैठती है। उसके बाद जो बैकवर्ड वोटर और सबसे कम संख्या सामान्य जाति के वोटरों की है। राजनीति के जानकारों की मानें तो ऐसे में जिस प्रत्याशी ने झुग्गी-झोपड़ी के साथ मलिन बस्तियों में रहने वाले वोटरों के बीच तालमेल बैठा लिया, उसकी जीत की राह आसान हो सकती है।

इस समीकरण में निर्दलीय विनय वर्मा और मुन्ना भारत ही अभी तक के चुनाव प्रचार में फिट बैठ रहे हैं। वोटरों के साथ राजनीति के क्षेत्रीय पंडितों का भी कहना है कि कालोनी वाले वोट डालने कम ही जाते हैं। निर्णायक वोट बस्ती का रहेगा। ऐसे में निर्दलीय या फिर AAP प्रत्याशी के बीच यदि टक्कर हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। चुनाव लड़वा रहे कई राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राष्ट्रीय दल के प्रत्याशियों के वोटर यहां कम हैं। जो हैं भी वो वोटिंग वाले दिन कम ही निकलेंगे। ऐसे में यहां निर्दलीय और AAP प्रत्याशी का ही बोलबाला रहने की उम्मींद है।

इन क्षेत्रों के मतदाता डालेंगे वोट

वार्ड नंबर-7 के अंतर्गत अंबेडकर नगर, निराला नगर, कैनाल कालोनी (पीली कालोनी), रेलवे कालोनी, हलुवा खाड़ा, चरनजीत सिंह कालोनी, विद्युत कालोनी, राम आसरे नगर, जेपी कालोनी, संजय नगर कालोनी, धर्मेंद्र नगर समेत कई प्रमुख बस्तियां भी हैं।

नगर निकाय चुनाव में जिला निर्वाचन और जिला प्रशासन पूरी तरह से आंख बंद किए बैठा है। प्रत्याशी और उनके समर्थक बेखौफ होकर आदर्श चुनाव आचार संहिता की बखिया उधेड़ने में जुटे हैं। इसमें सबसे आगे बीजेपी के प्रत्याशी हैं।बीजेपी के प्रत्याशियों को तो ऐसा लग रहा है कि जैसे प्रशासन ने गोद ले रखा है। यकीन नहीं आता तो वार्ड नंबर 60 से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी जितेंद्र गांधी को ले लीजिए। तीन साल से वह Police के अभिलेखों में WANTED है। कोर्ट से 82 की नोटिस जारी है। फिर भी नामांकन करवाने के बाद वह बेखौफ होकर जनता के बीच वोट मांग रहा है। सबकुछ जानने के बाद भी जिला पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से खामोशी की चादर ओढ़े हुए है। इन सबके बीच कई पार्षद प्रत्याशी हर रोज आचार संहिता का उल्लंघन कर पूड़ी-तरकारी बांट मतदाताओं को रिझा रहे हैं। 



YOGESH TRIPATHI


कानपुर। नगर निकाय का चुनाव धीरे-धीरे अपने शबाब पर पहुंच रहा है। इसके साथ ही प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कई जगहों पर प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के चक्कर में आदर्श आचार संहिता को भी तार-तार कर रहे हैं। Kanpur के South City की सबसे चर्चित सीट वार्ड नंबर 93 है। यहां पर बामुश्किल BJP से टिकट पाए नवीन पंडित ने एक बार फिर शिगूफा छोड़ते हुए पुरानी नौटंकी चालू कर दी है। नवीन 10 रुपए के कीमत वाले स्टांप पेपर पर विकास के तमाम वादे कर उसकी फोटो कापी चुनाव प्रचार के दौरान बांट रहे है। यह स्टांप पेपर अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। जानकारों की मानें तो यह नवीन की पुरानी नौटंकी है। पहले वह वोटिंग वाले दिन वोटर के घर में ऐसे ही स्टांप की फोटो कापी फेंकवाते थे लेकिन इस बार वह बांट रहे हैं।


विधि विशेषज्ञों की राय में यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है

बीजेपी प्रत्याशी नवीन पंडित ने 10 रुपए के स्टांप पेपर में लिखा है कि वह वार्ड 93 से बीजेपी के प्रत्याशी हैं। पूर्व में वह यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने स्टांप पेपर पर तमाम लोक-लुभावने वादे भी किए हैं। साथ ही अंत में यह भी लिखा है कि यदि वह इन कार्यों पर खरे नहीं उतरे तो उनका इस्तीफा क्षेत्र की जनता स्वयं ले सकती है।

आखिर स्टांप पेपर की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

कई बार पार्षद रह चुके नवीन पंडित की तरफ से स्टांप पेपर पर विकास के वादे कर उसे बांटने की बात पर क्षेत्र के वोटरों का कहना है कि यह गलत है। कुछ लोगों का कहना है कि नवीन को अब खुद पर भरोसा नहीं रह गया है। इसी लिए वह इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। स्टांप पेपर पर आचार संहिता को तार-तार करना भी काफी गलत है। सवाल यह भी उठता है कि जिन विकास कार्यों की बात वह स्टांप पेपर पर लिख वोटरों के बीच बांट रहे हैं, उसे अपने पुराने कार्यकाल में क्यों नहीं कराया ? बीजेपी के ही एक नेता का कहना है कि यदि काम कराए होते तो यह नौबत क्यों आती ?। एक कार्यकर्ता ने कहा कि यह नवीन पंडित की पुरानी परंपरा है। वोट वाले दिन वह स्टांप पेपर पर ऐसे ही लिखकर लोगों के घरों में फेंकवाते हैं। कुछ मतदाताओं ने कहा कि फोटो कापी क्यों बांट रहे हैं ? कल को मुकर जाएं तो हम किससे इस्तीफा मांगेगे ?

10 रुपए के स्टांप की नोटरी भी नहीं कराई

वादों वाले स्टांप पेपर की नोटरी भी नहीं कराई गई है। सूत्रों की मानें तो स्टांप पेपर पर चुनाव आचार संहिता लगने के बाद हाथ से लिखकर उसकी फोटो करा बांटा जा रहा है। जानकारों की राय मे नियमतः यह विधि विरुद्ध होने के बाद साथ ही आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी है।

हाईटेक चुनाव लड़ रहे गुरु देवेंद्र सब्बरवाल से है मुकाबला

नवीन पंडित के सामने कांग्रेस ने अपने पुराने “योद्धा” देवेंद्र सब्बरवाल पर विश्वास जताते हुए प्रत्याशी बनाया है। देवेंद्र सब्बरवाल वैसे तो नवीन के गुरु हैं। नवीन को राजनीति में लाने वाले वही हैं। चेले को सामने देख देवेंद्र ने अपना चुनाव हाईटेक करते हुए सोशल मीडिया पर जंग छेड़ दी है। देवेंद्र अब जहां जा रहे हैं वहीं से लाइव वीडियो फेसबुक पर अपलोड कर वोटरों से वोट और सपोर्ट की अपील कर रहे हैं।

पंजाबी वोटर तय करेगा अपना पार्षद

वार्ड नंबर-93 में वैसे तो सभी जाति और धर्म के मतदाता हैं लेकिन निर्णायक वोटर पंजाबी है। आंकड़ों पर गौर करें तो पंजाबी बाहुल्य इस सीट पर जिधर पंजाबी मतदाता झुकेगा, चुनाव वही प्रत्याशी जीतेगा। देवेंद्र सब्बरवाल पंजाबी हैं। उनको पूर्व विधायक अजय कपूर चुनाव लड़ा रहे हैं। कई अन्य पंजाबी नेता भी देवेंद्र सब्बरवाल के लिए खुलकर वोट मांगते दिखाई दे रहे हैं।