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  • Uttar Pradesh के पूर्वांचल स्थित 15 जिलों में Congress की कवायद Start
  • सभी जिलों के जिलाध्यक्षों से Congress की UP प्रभारी ने की बातचीत
  • पूर्वांचल के बाद Central & West UP पर फोकस करेंगी Priyanka Gandhi
  • मिशन 2022 के मद्देनजर हर विधान सभा में "जिताऊ" प्रत्याशियों की डिमांड


Yogesh Tripathi

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (INC) मिशन Uttar Pradesh (2022) के चुनावी अभियान में जुट गई है।  कुछ दिन पहले 15 (GRG War Room) में एक कांग्रेस दिग्गजों की Meeting में यूपी समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के संबंध में लंबा मंथन चला। इस बैठक में प्रमुख फोकस यूपी के चुनाव को लेकर रहा है। मीटिंग में संगठन के विस्तार को लेकर भी पदाधिकारियों के बीच चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में जल्द ही संगठन के अंदर व्यापक विस्तार और बदलाव दिख सकते हैं। 

इसी कड़ी में पूर्वांचल के 15 जिलों के जिलाध्यक्षों से Congress महासचिव और यूपी की प्रभारी Priyanka Gandhi ने मोबाइल पर बातचीत की। बताया जा रहा है कि प्रियंका ने सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश जारी किया है कि हर विधान सभा से चार "जिताऊ" प्रत्याशियों के नाम भेजे जाएं।   


संभावित प्रत्याशियों के नाम आने के बाद Congress हाईकमान लंबी प्रक्रिया के बाद अगस्त के महीने में प्रत्याशी के नाम पर करीब-करीब फाइनल मोहर लगा देगा। ताकि प्रत्याशी को भी चुनाव की तैयारियों से लेकर जनता के बीच में जाने का भरपूर मौका मिल सके। 

पूर्वांचल के जनपदों के तुरंत बाद ही Priyanka Gandhi सूबे के पश्चिमी और सेंट्रल जोन की हर विधान सभा से संभावित "जिताऊ" प्रत्याशियों के नामों पर सितंबर तक फाइनल कर सकती हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग दिसंबर महीने के अंत तक Uttar Pradesh में चुनाव तिथियों की घोषणा कर सकता है। 


 

सूत्रों की मानें तो Meeting में Uttar Pradesh के संगठन में व्यापक बदलाव और विस्तार को लेकर भी काफी तगड़ी चर्चा हुई। सोशल मीडिया पर भी इस बार कांग्रेस अधिक फोकस करेगी। 2022 चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस का फोकस ब्राम्हण, दलित और मुस्लिम वोट बैंक के साथ-साथ मल्लाह, निषाद और राजभर जाति के मतदाताओं के बीच भी रहेगा। इसी के मद्देनजर कई युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को कांग्रेस जल्द ही संगठन के विस्तार पर तरजीह दे सकती है। War Room में हुई इस मीटिंग में  राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल राव समेत कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के मौजूदगी की बात कही जा रही है। 

चर्चा है कि चुनावी रणनीति के साथ प्रियंका गांधी बहुत जल्द सूबे की सरकार पर सियासी हमले करने से नहीं चूकेंगी। BJP हर कीमत पर उनके टॉरगेट पर रहेगी। जनता के बीच वह प्रदेश सरकार की कमजोरियों और नाकामयाबियों को उजागर करेंगी। उनका फोकस कोरोना महामारी के दौरान सूबे में हुई हजारों लोगों की मौत, अस्पतालों में बदइंतजामी, दवाइयों और वैक्सीन के संकट पर जनता के बीच भाजपा को घेरेंगी। माना यह भी जा रहा है कि दिवाली से पहले प्रियंका गांधी विधान सभा स्तर पर अपना दौरा स्टार्ट कर देंगी। 

पिछले दिनों UP में हुई कई बड़ी घटनाओं में Priyanka Gandhi की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। पीड़ितों के घर पहुंचकर न सिर्फ वह उनके दुःख में शामिल हुईं बल्कि सीधे तौर पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों भी लिया। खास बात ये भी है कि सोशल मीडिया के प्लेटफार्म Twitter पर भी प्रियंका गांधी हर दिन बीजेपी की योगी सरकार पर सीधे Attack करती रहती हैं। फिर वह मामला चाहे अपराध जगत से जुड़़ा हो या राजनीतिक। प्रियंका बेबाकी से Tweet कर सरकार से सवाल पूछती रहती हैं।


-कानपुर, गोवा, उज्जैन, लखनऊ समेत कई शहरों में खरीदी गई थी प्रापर्टियां

-कई बेनामी संपत्तियों की रजिस्ट्री भी RTI Activist सौरभ भदौरिया ने ED को सौंपी

-ED ने पूछताछ के लिए अब तक कई लोगों को Notice देकर किया है तलब

-शहर के कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है ED की Team

सौरभ भदौरिया (अधिवक्ता एवं RTI Activist)

Yogesh Tripathi

Bikru Case के गुनहगार और Encounter में STF के हाथों मारे गए गैंगस्टर Vikas Dubey के खजांची जयकांत बाजपेयी समेत करीब 53 लोगों की बेनामी संपत्तियों की कुंडली प्रवर्तन निदेशालय (ED) बांच रही है। अब तक की छानबीन में ED ने जो जानकारियां जुटाई हैं उसके मुताबिक Uttar Pradesh के कई जनपदों और देश के दूसरे प्रांतों में करीब 682 करोड़ रुपए की प्रापर्टी खरीदी गई हैं। इनमें से कई बेशकीमती प्रापर्टियों की रजिस्ट्री खुद RTI Activist सौरभ भदौरिया ने प्रवर्तन दल के कार्यालय में टीम को मुहैया कराई है। माना जा रहा है कि देर-सबेर ही सही लेकिन ED शहर के कई सफेदपोश लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

अब तक की कार्रवाई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) कई सफेदपोश लोगों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब कर चुकी है। कई लोगों के नोटिस अभी रास्ते में ही हैं। जल्द ही ये नोटिस संबंधित तक पहुंच सकते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय की टीमें करीब तीन महीना पहले कानपुर में तमाम संपत्तियों की छानबीन कर उनका आंकलन भी कर चुकी हैं। 


RTI Activist सौरभ भदौरिया के मुताबिक उन्होंने जेल में बंद जयकांत बाजपेयी, उसके भाइयों, पत्नी, और जयकांत के गिरोह से ताल्लुक रखने वाले राजनीतिक दलों के कई नेता व तमाम सफेदपोश लोगों के पास पिछले कुछ सालों में जो बेनामी संपत्तियां जुटाई गई हैं, उसे अभिलेखों के साथ ED को सौंपा है। इसमें कानपुर, कानपुर देहात, गोवा, उज्जैन, मुंबई, नोएडा, कन्नौज और गाजियाबाद में खरीदी गई संपत्तियों के कागज शामिल हैं।

बकौल सौरभ भदौरिया जो संपत्तियां जयकांत बाजपेयी ने बेंच दी हैं, उनकी भी जांच प्रवर्तन निदेशालय कर चुका है। शहर में तैनात रहे IPS Officer अनंतदेव तिवारी समेत तीन लोगों के खिलाफ भी कई संपत्तियों की जांच अभी भी चल रही है।

सौरभ भदौरिया के मुताबिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जांचें अलग से की जा रही हैं। शासन को पत्र भी भेजा गया है। गुड्डन त्रिवेदी, प्रशांत शुक्ला के साथ-साथ जयकांत बाजपेयी के पत्नी व करीबी रिश्तेदार और सगे-संबधियों के संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा चुकी है।

सौरभ भदौरिया का कहना है कि तमाम जानकारियां इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक दूसरे से साझा कर रही हैं। इसके साथ ही 10 IPS Officer’s, 17 PPS Officer’s और 24 थानेदारों (SO,SHO) के संपत्तियों की जांच भी प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से की जा रही है। सौरभ भदौरिया का कहना है कि संभव है कि प्रवर्तन निदेशालय अभी एक-दो बार कागजों के संकलन और तमाम जानकारियां जुटाने के लिए उनको बुला सकता है। हालांकि अभी तक करीब-करीब सभी संबंधित अभिलेख उन्होंने ED को सौंप दिए हैं।

-BJP पर फिर भारी पड़ा मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS)

-RSS प्रमुख मोहन भागवत की कृपा से CM बने रहेंगे योगी आदित्यनाथ

-अतिशीघ्र होगा Uttar Pradesh के मंत्रीमंडल का विस्तार

-A.K Sharma & Jitin Prasad होंगे मंत्रीमंडल में शामिल

-डिप्टी सीएम का पद न देकर कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के संकेत

-ब्राम्हणों की नाराजगी दूर करने को मंत्रिमंडल और संगठन में मिलेगी तरजीह


 

Yogesh Tripathi

 

Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की कृपा पाने में पूरी तरह से सफल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब सवा घंटे की Meeting के बाद यह बात बिल्कुल फाइनल हो गई कि करीब साढ़े चार साल पहले RSS के आशीर्वाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को UP में जो सत्ता का सिंहासन मिला था वह  सुरक्षित रहेगा। 2022 का विधान सभा चुनाव भी उनके ही चेहरे पर लड़ा जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ संगठन में भी फेरबदल किया जाएगा। BJP के Old Worker’s को निगमों और बोर्डों में खाली पड़े तमाम पदों पर समायोजित किया जाएगा ताकि चुनाव में सीधा एडवांटेज मिले। ब्राम्हण वर्ग की नाराजगी को दूर करने के लिए कई Arvind Sharma & Jitin Prasad को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। बड़े सूत्रों की मानें तो दोनों को कैबिनेट मंत्री ही बनाया जाएगा। संघ सूत्रों की मानें तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डॉक्टर दिनेश शर्मा की कुर्सी के सलामत रहने के भी संकेत हैं। 


 

योगी के हठ योग से दिल्ली दरबार को भी छूटा पसीना

प्रधानमंत्री Narendra Modi के दूत बनकर Uttar Pradesh की सियासत में पांव जमाने की कोशिश कर रहे रिटायर्ड IAS Officer अरविंद शर्मा को सिर्फ दो सप्ताह के भीतर विधान परिषद सदस्य (MLC) बना दिया गया। यह भी सर्वविदित है कि सोशल मीडिया में श्रीशर्मा को डिप्टी सीएम बनाने और गृह एवं गोपन जैसा विभाग देने की खबरें Viral हुईं। इसका खंडन दिल्ली हाईकमान ने नहीं किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई बार दबाव बढ़ा लेकिन वह टालते रहे।

20 दिन पहले दिल्ली में UPBJP के संगठन मंत्री सुनील बंसल ने RSS के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के साथ एक अहम बैठ की। इसके बाद सुनील बंसल ने जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। फिर प्रधानंत्री के साथ भी मीटिंग की गई। दत्तात्रेय होसबोले इसके बाद बड़े संदेश को लेकर Lucknow पहुंचे लेकिन मुख्यमंत्री पूर्वांचल के दौरे पर रहे और उन्होंने दत्तात्रेय होसबोले से मुलाकात नहीं की।

दत्तात्रेय होसबोले के दिल्ली वापस लौटते ही BJP के राष्ट्रीय संगठन मंत्री B.L Santosh और प्रदेश प्रभारी Radha Mohan Singh लखनऊ में दो दिन के दौरे पर पहुंचे। दोनों ने योगी मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों से बातचीत कर फीडबैक लिया। क्षेत्रीय अध्यक्षों से भी बातचीत की। इसके बाद लखनऊ स्थित RSS के कार्यालय भारती भवन में B.L Santosh ने क्षेत्र चालक अनिल जी, कानपुर के प्रांत प्रचारक श्रीराम जी समेत संघ के तीन बड़े नेताओं से करीब पांच घंटे तक लंबी मंत्रणा की।

मुख्यमंत्री की तरफ से तब भी स्पष्ट तौर पर नाराजगी जाहिर की गई। दोनों नेताओं ने दिल्ली पहुंचकर रिपोर्ट RSS और BJP के शीर्ष नेताओं को सौंप दी। इस रिपोर्ट पर RSS ने सभी अनुभागों के दिग्गजों को बुलाकर तीन दिन अलग-अलग बैठक कर लंबी चर्चा की। इस बीच राधा मोहन सिंह फिर लखनऊ आए। उन्होंने गवर्नर और विधान सभा स्पीकर से अलग-अलग मुलाकात की। गवर्नर को उन्होंने एक बंद लिफाफा भी सौंपा। जिस पर तमाम तरह के कयास लगाए जाते रहे। योगी जी के योग हठ दिल्ली में बैठे बीजेपी हाईकमान के भी पसीने छूटने लगे कि कहीं दांव गलत न हो जाए। एक बड़ी गल्ती से यूपी चुनाव के साथ-साथ दिल्ली की सियासत पर भी फर्क पड़ेगा। उसकी वजह यूपी में लोकसभा की 80 सीटों का होना है। 


 

मुख्यंत्री ने RSS प्रमुख के पाले में डाल दी थी गेंद

दिल्ली दरबार की तरफ से अपने तल्ख तेवरों को देख मुख्यमंत्री ने भी तुरंत फील्डिंग सजानी शुरु कर दी। संघ सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने RSS प्रमुख मोहन भागवत से तत्काल संपर्क किया। मुख्यमंत्री ने बीते चार साल में जो भी कुछ उनके साथ घटित हुआ, उसे काफी विस्तृत तौर पर बताया। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते चार साल से अधिक समय में उन्होंने केंद्र के हर आदेश का पालन किया है। राज्यसभा और विधान परिषद के सदस्यों की सूची तक उनसे पूछे बगैर फाइनल की गई। कई मौके ऐसे भी आए जब केंद्र सरकार की तरफ से राज्य के अफसरों को सीधे दिशा-निर्देश जारी कि गएइतना ही नहीं संगठन के नाम पर तमाम सरकारी कार्यों और नियुक्तियों में हमेशा दखल दिया गया। अब जब चुनाव की बेला सिर पर है तो नाकामयाबी और असफलता का सारा ठीकरा उन पर फोड़ा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया की मानें तो मुख्यमंत्री ने RSS प्रमुख से बातचीत के बाद स्पष्ट तौर पर कह दिया कि यदि  उनके पास से गृह एवं गोपन जैसा विभाग भी ले लिया जाएगा तो वह किस बात के मुख्यमंत्री ? इससे बेहतर तो आप (संघ प्रमुख) उन्हें निर्देश दे दें तो वह खुद ही अपना इस्तीफा दे देंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह सिंहासन आप के आशीर्वाद से ही साढ़े चार साल पहले मिला था।

UPCM की बातों को RSS प्रमुख ने गंभीरता से लिया

खबर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से कही गई इन तमाम बातों को RSS प्रमुख ने काफी गंभीरता से लेते हुए BJP के शीर्ष नेतृत्व से कई चक्र लंबी बातचीत की। Delhi में संघ के सभी प्रकल्पों और अनुषांगिक संगठनों के प्रभारी और अन्य शीर्ष पदाधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक में एक दिन Uttar Pradesh में बढ़े सियासी तापमान पर भी लंबी चर्चा की गई। दत्तात्रेय होसबोले और बीएल संतोष की रिपोर्ट भी मंथन किया गया। खबर है कि उसके बाद RSS में कई बड़े पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से तय किया कि यूपी में 2022 का चुनाव यदि जीतना है तो मुख्यमंत्री की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में ही रहेगी। खबर तो यह भी है कि इसके बाद RSS प्रमुख ने मुख्यमंत्री से बातचीत कर कहा कि वह भी अरविंद शर्मा को राज्यमंत्री बनाने की जिद का त्याग करें। संघ प्रमुख ने कैबिनेट मंत्री बनाने की बात कही। कुल मिलाकर संघ प्रमुख की कवायद, रणनीति की वजह से अंततः एक बीच का रास्ता निकल गया है। इसमें योगी आदित्यनाथ थोड़ा पीछे हटे लेकिन दिल्ली दरबार को कुछ अधिक ही पीछे हटना पड़ा। क्यों कि वहां तो सिंहासनतक हिलाने की तैयारी कर ली गई थी।

UP में 20 दिनों से चल रहा था शीतयुद्ध

दिल्ली और लखनऊ दरबारके बीच करीब 20 दिनों से शीतयुद्धचल रहा था। दोनों तरफ से कई बार ऐसे संकेत मिले कि Uttar Pradesh की सियासत में जल्द बड़ा भूचाल आ जाएगा। RSS के साथ-साथ BJP का शीर्ष नेतृत्व भी यूपी को लेकर काफी गंभीर हो गया। बैठकों के दौर के साथ लखनऊ में दिग्गजों के दौरे भी शुरु हो गए। मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से सरकार के बाबत फीडबैक लिया गया। बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह जब गवर्नर और विधान सभा स्पीकर से मिले तो सियासी तापमान काफी हद तक बढ़ गया। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। अब दिल्ली में योगी आदित्यनाथ की गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह, शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद शीतयुद्ध”, तमाम चर्चाओं, अटकलों पर विराम लग चुका है। 


 

कैबिनेट मंत्री बनेंगे अरविंद शर्मा, जितिन प्रसाद

RSS सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ मीटिंग के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल कर विस्तार किया जाएगा। अरविंद शर्मा और कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद को मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद देकर ठीक-ठाक विभाग से नवाजा जा सकता है। वहीं, योगी मंत्रिमंडल के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा की कुर्सी पूरी तरह से बचे रहने की संभावना है। उनके विभागों में बदलाव नहीं किया जाएगा। ब्राम्हणों की नाराजगी को दूर करने के लिए विशेष तरजीह दी जाएगी। मंत्रिमंडल में दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों को भी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर समायोजित किया जाएगा। लंबे समय से उपेक्षित अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के पति को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हालांकि गृहमंत्री से मुलाकात कर अनुप्रिया पटेल ने यूपी और केंद्र में मंत्रि पद देने और पांच जनपदों में जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की मांग रखी है।

 


Saurabh Bajpai

Assistant Professsor 

(Delhi University)

कई प्रभाव अक्सर अनजाने और अनायास आते  हैं। Uttar Pradesh (Congress) के ऊपर धुर कम्युनिज्म का यह प्रभाव भी संभवतः अनजाना और अनायास है। अनजाना इसलिए कि शायद इसकी प्रामाणिक ख़बर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचने नहीं दी जाती है, या फिर पहुँचने पर उसकी भ्रामक व्याख्या कर दी जाती है।

 

अनायास इस लिए कि भले ही ऐसा करना किसी का सायास उद्देश्य न हो, लेकिन बेहद यांत्रिक तरीके से यह होता चला जा रहा है। हो सकता है कि Uttar Pradesh (Congress) में यह हस्तक्षेप एक सुषुप्त संगठन में फ़ौरी तौर पर कुछ हरकत पैदा करे, आख़िरकार यह आत्मघाती सिद्ध होगा। जिस संगठन को लंबे समय तक पोषण और उपचार की जरूरत है, स्टेरॉयड देकर उसके शरीर को कृत्रिम रूप से फुलाना ख़तरे से ख़ाली नहीं है।

 

कम्युनिस्ट पार्टियों से कांग्रेस में आये तमाम युवाओं का स्वागत करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस सौरमंडल (पिछली पोस्ट में वर्णित) में उन्हें एक निश्चित समयतक किसी पेरिफ़ेरी (परिधि) पर ही रखना चाहिए था। यह निश्चित समय दरअसल एक मेटामॉर्फ़ोसिस या कायापलट की प्रक्रिया है जिसमें कोई भी नए संगठन की ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद की कंडीशनिंग करता है।

 

जिन लोगों को कम्युनिस्ट पार्टियों के डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म का अंदाज़ा है, वो जानते हैं कि इसने ख़ुद कम्युनिस्ट पार्टियों का कितना नुकसान किया है। इस तरह की तमाम अन्य प्रवृत्तियाँ कांग्रेस में आने वाले लोगों में अगर बची रह गयी हो तो कांग्रेस संगठन का भी बेड़ाग़र्क कर सकती हैं।  

 

स्वाभाविक रूप से एक ख़ास किस्म की राजनीतिक ट्रेनिंग आपका समूचा व्यक्तिव गढ़ती है। इसका प्रभाव कैडर की राजनीतिक विचारधारा पर ही नहीं बल्कि दुनिया को समझने के नज़रिये, रोजमर्रा की भाषा, राजनीतिक तेवर और सामाजिक व्यवहार पर भी बहुत गहराई से पड़ता है।

 

लेफ़्ट और राईट यानी दोनों ही कैडर आधारित संगठनों, जहाँ बहुत कड़ा राजनीतिक प्रशिक्षण होता है, पर ख़ासतौर से यह बात लागू होती है। थोड़े समय तक वामपंथ या दक्षिणपंथ के प्रभाव में आये लोगों पर यह बात लागू नहीं होती है। लेकिन जिनका समूचा वैचारिक विकास इन सगठनों के साए में होता है, उनके व्यक्तित्व में उनकी ट्रेनिंग दूध और पानी की तरह घुल जाती है।

 

कोई भी व्यक्ति नयी पार्टी कब ज्वाइन करता है ? पहली वजहकिसी अच्छे अवसर की तलाश में कोई अपने मूल्यों, आस्थाओं और विचारों से समझौता कर ले। सामान्य भाषा में इसे अवसरवाद तथा वामपंथी शब्दावली में समझौतावादया संशोधनवाद कहा जाता है।

 

दूसरी, जब उसे अहसास हो जाये कि उसकी मूल पार्टी अपनी समकालीन चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है या हो चुकी है। ऐसी स्थिति में वो एक नयी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करने का निश्चय करता है। नए राजनीतिक परिवेश, संस्कृति और परंपरा के साथ तारतम्य बिठाने के लिए वो या तो अपनी मूल स्थापनाओं को तिलांजलि देता है या फिर उनको चुनौती देते हुए एक नयी विचारधारात्मक यात्रा पर निकल पड़ता है।

 

इस यात्रा की बुनियादी शर्त ही यह है कि व्यक्ति नया सोचने और नया सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार है। राजनीतिक दृष्टि से कहें तो यही उसके मेटामॉर्फ़ोसिस या कायापलट की शुरुआत है। कई लोग इस प्रक्रिया का सामना करने से हिचकते हैं और राजनीतिक रूप से निष्क्रिय हो जाते हैं।

 

कम्युनिस्ट पॉलिटिक्स के कई लोग इस डॉग्माको तोड़ नहीं पाते और ख़ुद को महज़ बौद्धिक गतिविधियों तक समेट लेते हैं। क्योंकि लम्बे समय तक गाँधीजी को मैस्कॉट ऑफ़ बुर्जुआज़ीऔर जोनाह ऑफ़ रेवोलुशनमानने के बाद अचानक उनमें एक क्रांतिकारी की खोज एक जटिल और लम्बी बौद्धिक प्रक्रिया है।

 

इसलिए धुर कम्युनिज्म की रेडिकल ट्रेनिंग से निकलकर वाया अन्ना आन्दोलन और आम आदमी पार्टी Uttar Pradesh (Congress)  पर कब्ज़े की कोशिशों की इंटेलेक्चुअल ट्रेजेक्टरी (वैचारिक प्रक्षेपपथ), गाँधी-नेहरू का प्रतिबद्ध शिष्य होने के नाते, ट्रेस करना एक ख़ालिस राजनीतिक सवाल है, व्यक्तिगत नहीं। यह तय है वैचारिक कायापलट के बिना किसी पार्टी संगठन पर आकर प्रभुत्व जमाने की कोई सतही कोशिश अर्थ का अनर्थ कर देती है।

 

ऐसे समझिये कि कोई पुरानी पार्टी का दिल-दिमाग और गुर्दा लाकर नयी पार्टी के शरीर में ज़बरदस्ती फिट करने की कोशिश करे और मरीज़ की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली जाए। कांग्रेस की गाँधीवादी और नेहरूवादी छवि के नीचे जाने-अनजाने Uttar Pradesh (Congress)  की एक ऐसी सर्जरी चल रही है जो दरअसल पोस्टमॉर्टेम न बन जाए, यही चिंता है।

 

Note---ये लेखक के निजी विचार हैं।

-3.30 बजे दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

-फ्राइ-डे की सुबह PM संग होगी CM की Meeting

-Uttar Pradesh में होने वाले तमाम बदलावों के मद्देनजर अंतिम Meeting

-तमाम कयासबाजी और अटकलों पर लग सकता है अगले दो-तीन में विराम

 

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh में सियासी तापमान पिछले करीब 20 दिनों से बढ़ा हुआ है। दिल्ली और लखनऊ दरबारके बीच हल्की-फुल्की तल्खी के बीच अंदर ही अंदर चल रहा शीतयुद्धअब किसी से छिपा नहीं है। UPCM योगी आदित्यनाथ गुरुवार दोपहर अचानक Delhi के लिए रवाना हो गए। 3.30 बजे मुख्यमंत्री दिल्ली पहुंचे। खबर है कि शाम को उनकी मुलाकात गृहमंत्री अमित शाह के साथ होनी है। रात में योगी आदित्यनाथ बीजेपी के नेशनल प्रेसीडेंट जेपी नड्डा समेत कई पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। फ्राइ-डे की सुबह उनकी Meeting प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संग होनी बताई जा रही है। तमाम ब्यूरोक्रेट्स, विधायक, मंत्री और संगठन के पदाधिकारियों की नजरें एक बार फिर दिल्ली दरबार की तरफ केंद्रित हो गई हैं। संकेत मिल रहे हैं कि Uttar Pradesh में कैबिनेट विस्तार और संगठन में व्यापक फेरबदल के मद्देनजर संभवत: यह अंतिम Meeting हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सारा पेंच Narendra Modi के "दूत" कहे जा रहे रिटायर्ड IAS Officer और विधान परिषद सदस्य (MLC) अरविंद शर्मा को लेकर फंसा। अरविंद शर्मा के बाबत मुख्यमंत्री अभी भी पुराना स्टैंड ही लिए हुए हैं। माना जा रहा है कि इस प्वाइंट को किसी तरह "दिल्ली दरबार" हल करना चाहता है। 

बताया जा रहा है कि Apna Dal की प्रेसीडेंट अनुप्रिया पटेल भी गृहमंत्री के घर पहुंच गई हैं। वहां UPCM पहले से ही मौजूद हैं। इस त्रिकोणीय मीटिंग के कई मायने निकाले जा रहे हैं।  यूपी की राजनीति पर टिप्पणी कर रहे तमाम वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि "यूपी की हंडिया" में कुछ तो है। खेल कब होगा, यह देखना दिलचस्प है।

PM संग कल होगी Meeting

मुख्यमंत्री का यह दौरा 48 घंटे का बताया जा रहा है। आज शाम 4:00 बजे पहली मीटिंग गृहमंत्री के साथ होनी तय है। इस बीच मुख्यमंत्री भाजपा के कुछ और बड़े नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं। कल सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री की Meeting होनी है।

बुधवार को प्रदेश कार्यालय में चला बैठकों का दौर

सूत्रों की मानें तो बुधवार को देर रात तक Uttar Pradesh के BJP Office में बैठकों का दौर चला। UPBJP के प्रेसीडेंट स्वतंत्र देव सिंह ने प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों और कार्यकारिणी से काफी देर तक बातचीत की।

BJP प्रदेश प्रभारी कर चुके हैं दो दिन का दौरा

Uttar Pradesh (BJP) के प्रभारी Radha Mohan Singh पिछले सप्ताह ही दो दिन का दौरा कर Lucknow से जा चुके हैं। उन्होंने गवर्नर आनंदीबेन पटेल से बातचीत कर एक बंद लिफाफा सौंपा था। उसके बाद विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के संग Meeting की थी। दोनों ही मुलाकातों को उन्होंने सामान्य बताया था लेकिन राजनीति के जानकारों ने तमाम तरह के कयास तभी लगा लिए थे।

संगठनमंत्री B.L Santosh ले चुके हैं फीडबैक

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री B.L Santosh और Radha Mohan Singh इससे पहले संयुक्त रूप से लखनऊ दौरे पर आए थे। दिल्ली दरबारके निर्देश पर पहुंचे दोनों नेताओं ने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के करीब दर्जन भर मंत्रियों के साथ One 2 One बातचीत की थी। सूबे के सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों से भी मुलाकात कर संगठन और सरकार के बाबत तमाम फीडबैक लिए थे। इस दौरे के बाद ही कयास लगाए जाने लगे थे कि UP में बदलाव की बयार बह रही है, हालांकि बीजेपी के दिग्गज नेता मौनरहे। उन्होंने किसी भी तरह के बदलाव की बात को एक सिरे से खारिज किया। इससे पहले RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी Locknow में दो दिनों का प्रवास कर वापस गए थे। उन्होने भारती भवन में कुछ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर फीडबैक लिया था। 

कैबिनेट और संगठन में बड़े बदलाव की संभावना

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री इस दौरे के बाद जब लखनऊ वापस आएंगे तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी होगी। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ संगठन में जो व्यापक परिवर्तन किए जाने हैं उससे भी अवगत कराया जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक-दो बड़े नेताओं को दिल्ली भी शिफ्ट किया जा सकता है। संगठन में ऊपर से लेकर छंटाई कार्यक्रम चलने की संभावना है। 

 Update News

 

-Bikru Case के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा अधिवक्ता को दिया

-जयकांत बाजपेयी के सभी मामलों में उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन

-इंटेलीजेंस की जांच रिपोर्ट के बाद कड़ी कार्रवाई का संकेत 



 

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh में 2020 के बेहद चर्चित Bikru Case के गैंगस्टर Vikas Dubey और उसके खजांची जयकांत बाजपेयी के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता सौरभ भदौरिया (RTI Activist) ने मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने शपथ पत्र के साथ तमाम दस्तावेज भी सौंपे। सौरभ भदौरिया ने (News Portal) को बताया कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से आए मैसेज के बाद मुलाकात के लिए पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने हर बिन्दु पर जानकारी लेने के बाद Bikru Case के गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया है। सौरभ भदौरिया का कहना है कि IG रैंक के एक सीनियर IPS Officer’s के खिलाफ भी उन्होंने शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की किसी रिटायर्ड जज या फिर बड़ी जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। 

इंटेलीजेंस की जांच रिपोर्ट के बाद होगी कड़ी कार्रवाई

तमाम दस्तावेजों को साझा करते हुए अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से मैसेज आने के बाद वह मंगलवार की दोपहर पहुंचे। सौरभ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से Bikru Case के आरोपी और गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी व उसके भाइयो के खिलाफ दर्ज मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही। जयकांत बाजपेयी और उसके गिरोह की आर्थिक अपराध शाखा व मदगार रहे पुलिस कर्मियों की विजलेंस जांच का आश्वासन मिला। बकौल सौरभ जयकांत बाजपेयी और उसके करीबियों की इंटेलीजेंस जांच जारी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 


 

धारा में "खेल" करने पर विवेचक की शिकायत 

सौरभ का कहना है कि मुख्यमंत्री ने शहर के एक बड़े अफसर से जयकांत बाजपेयी और उसके भाइयों व गिरोह के लोगों से संबंधित लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 24 घंटे में मांगी है। SIT रिपोर्ट में पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के मामलों में जिन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया था, उसमें भी विवेचना के दौरान खेल कर दिया गया। शिकायत पर विवेचना करने वाले विवेचक के खिलाफ विजलेंस जांच का आश्वासन मिला। 

सरकारी भूमि पर कब्जा कर बिक्री करने में कार्रवाई नहीं

सौरभ का आरोप है कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर उसकी बिक्री करने के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने की शिकायत भी की। साथ ही जयकांत बाजपेयी की तमाम संपत्तियों को अब तक जब्त न किए जाने की शिकायत भी मुख्यमंत्री से की। सौरभ ने आरोप लगाया कि कई मुकदमा दर्ज होने के बाद भी वह कई अफसरों का दुलाराथा। अफसरों से निकटता की वजह से वह अपने गोरखधंधों का अंजाम देता था। बकौल सौरभ इस पर मुख्यमंत्री ने जयकांत बाजपेयी से करीबी संबंध रखने वाले तीन अफसरों के खिलाफ कमिश्नर की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच कराए जाने का भरोसा दिया है। 

सीनियर IPS Officer's की लिखित शिकायत

सौरभ ने आइजी स्तर के एक सीनियर IPS Officer’ और एक एसपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। सौरभ का कहना है कि इन दोनों अफसरों की आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच गृह विभाग की तरफ से की जा रही है। सौरभ ने ये जांच किसी रिटायर्ड जज से कराने की मांग की। बकौल सौरभ भदौरिया उन्होंने ये सभी शिकायतें लिखित तौर पर शपथ पत्र देकर कहीं है। जिस पर मुख्यमंत्री की तरफ से आश्वस्त किया गया है कि Bikru Case से जुड़े हर गुनाहगार को वह कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरपूर प्रयास करेंगे ताकि समाज में एक नजीर पेश। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार में माफिया और अपराधी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।