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  • 21 फरवरी 1947 को लालता प्रसाद ने मौला बक्श को की थी मकान की रजिस्ट्री 
  • 19 मार्च 1967 को मौला बक्श ने रहमान को हिबानामा (Gift) किया 
  • 28 दिसंबर 1982 आबिद रहमान ने हाजरा खातून को रजिस्टर्ड बैनामा किया
  • 13 जुलाई 2009 को हाजी मुख्तार ने यह संपत्ति हाजरा खातून से क्रय की
  • 17 फरवरी 2002 को रामजानकी मंदिर यशोदा नगर में शिफ्ट किया गया 
  • न कोई Pakistan गया और न कोई आया तो फिर शत्रु संपत्ति कैसे...?
  • 20 वर्ष पहले रामजानकी मंदिर गुप्ता परिवार ने शिफ्ट कर लिया तो फिर विवाद क्यूं...?


Yogesh Tripathi

Kanpur के बेकनगंज एरिया में जिस भूमि पर मशहूर "बाबा स्वीट एंड रेस्टोरेंट" स्थित है, दरअसल उस मकान को भगवानदीन के लड़के लालता प्रसाद ने देश  आजाद होने से करीब छह महीना पहले 21 फरवरी 1947 को बेंच दिया था। लालता प्रसाद की इस प्रापर्टी को किसी और ने नहीं बल्कि हाजी मौला बक्श ने क्रय (खरीदी) की थी। मकान की रजिस्ट्री करते समय जो चौहद्दी अभिलेखों में दर्ज है उसके मुताबिक गर्बी (पश्चिमी तरफ) ठाकुरद्वारा (रामजानकारी मंदिर) और अहाता मोहम्मद आमीन दर्ज है। जबकि शर्की (पूरब की तरफ) दरवाजा हारा दुकानात, मकान मुबैइया व तबूतरा मुतालिक मकान हाजा बादहू फुटपाथ व सरकारी सड़क दर्ज है। जुनूबी (दक्षिण की तरफ) दीवार मकान हाजहा बादहू आराजी उफ्तादाता अंकित है। जबकि शुमली (उत्तर की तरफ) दरवाजा दुकान व रास्ता आमदो रफत अंदुरून मकान व चबूतरा मुताल्लिक मकान मुबैइया बादहू सड़क सरकारी दर्ज है। खास बात ये है कि मकान नंबर 99/14 का क्रय और विक्रय करने वाले जब कभी Pakistan or China जाकर बसे नहीं तो फिर प्रापर्टी को क्यूं और कैसे "शत्रु संपत्ति" बताया जा रहा है...? हां ये सच है कि हिबानामा (Gift Paper) के आधार पर हाजरा खातून को वर्ष 28 दिसंबर 1982 में रजिस्ट्री करने वाले आबिद रहमान (London) जाकर बस गए लेकिन उससे पहले उन्होंने अपने पुरखों से दान में मिली पैतृक संपत्ति की रजिस्ट्री कर दी थी। तो फिर "शत्रु संपत्ति" का राग अलापने की आखिर वजह क्या है...?


मकान नंबर 99/14 जिस रामजानकी मंदिर (ठाकुरद्वारा) के वर्षों पहले स्थापित होने की बात कही जा रही है वो भी सच है लेकिन 17 फरवरी 2002 को लालता प्रसाद के पौत्र और उनके परिवारीजन शोभायात्रा के बाद अपने पारिवारिक मंदिर को नौबस्ता के यशोदानगर स्थित शंकराचार्य नगर में शिफ्ट कर दिया यह भी हकीकत है। मौला बक्श को अपना मकान वर्ष 47 में बिक्री करने वाले लालता प्रसाद के पौत्र शिवशरण गुप्ता की तरफ से भू-माफिया सेल के प्रभारियों को दिए गए हलफनामें से ये बात पूरी तरह से पुख्ता है कि मंदिर को गुप्ता परिवार अपने नए घर में शिफ्ट कर चुका है तो फिर उक्त भूमि पर रामजानकारी मंदिर (ठाकुरद्वारा) मौजूद होने का "बवंडर" क्यों....? 


अपर नगर मजिस्ट्रेट (तृतीय) कानपुर नगर की तरफ से वर्ष 2019 में जारी Final Report के मुताबिक वर्तमान समय में मकान नंबर 99/14 A के Land Owner हाजी मुख्तार ने भू-माफिया सेल के दोनों पूर्व प्रभारियों प्रकाश स्वरूप पांडेय और सुरेंद्र नाथ तिवारी को जो कागजात सौंपे वह जांच में पूरी तरह से सही पाए गए। शिकायतकर्ता कैसरजहां ने पुराना मकान नंबर 99/14 में रामजानकी मंदिर (नगर निगम के अभिलेखों में ठाकुरद्वारा) अंकित है को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इस बाबत 51-A शंकराचार्य नगर (यशोदानगर) नौबस्ता निवासी शिवशरन गुप्ता ने खुद भू-माफिया सेल और ACM (3rd) को हलफमाना देकर बताया है कि मंदिर सार्वजनिक नहीं था बल्कि उनके परिवार का निजी था। इस मंदिर को वह शंकराचार्य स्थित अपने मकान में वर्ष 2002 में पूजा-अर्चना और मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद शिफ्ट कर चुके हैं। शिवशरन के बयानों और हलफमानों के आधार पर पुलिस की भूू-माफिया सेल ने उनके परबाबा (बाबा के पिता) भगवानदीन की वंशावली बनाते हुए Report के साथ संलग्न किया है। "यक्ष प्रश्न" ये है कि जब मंदिर वहां से अन्यंत्र स्थापित किया जा चुका है तो फिर इतनी हाय-तौबा क्यों और किसकी शह पर की जा रही है..? क्या तीन-तीन राजपत्रित अधिकारियों ने झूठी रिपोर्ट लगाकर शासन-प्रशासन को सौंपी थी...? यदि सौंपी थी तो उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं...? और यदि रिपोर्ट पूरी तरह से सच है तो फिर "शत्रु संपत्ति" और Old Temple होने का "सियासी खेल" क्यों खेला जा रहा है...?


ACM (3rd) की रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू ये है कि किरायेदारों, पड़ोसियों के साथ-साथ उन्होंने भू-माफिया सेल के दो पूर्व प्रभारियों प्रकाश स्वरूप पांडेय, सुरेंद्र नाथ तिवारी की रिपोर्ट के साथ-साथ नगर निगम की आख्या को भी प्रमुखता से आधार बनाया है। साथ ही बेकनगंज के पूर्व थानेदार के नजरी नक्शा, मौके पर कराई गई वीडियोग्राफी, मकान में अब तक हुए सभी रजिस्टर्ड बैनामा, हिबानामा के कागजातों को प्रमुख साक्ष्य माना है। साथ ही मंदिर के मालिक गुप्ता परिवार की वंशावली को उजागर करते हुए उसका प्रमुखता से उल्लेख इसी लिए किया कि भविष्य में किसी तरह का कोई विवाद उत्पन्न न हो। 


क्या होती है शत्रु या दुश्मन संपत्ति...?

भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन युद्धों के बाद देश को छोड़कर जाने वाले लोगों की चल और अचल संपत्तियों का स्वामित्तव सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। देस के विभिन्न प्रांतों में फैली इन बेशकीमती संपत्तियों को शत्रु संपत्ति या फिर दुश्मन संपत्ति के रूप में जाना जाता है। Uttar Pradesh में सबसे अधिक "शत्रु संपत्तियां" हैं। "द क्सटोडियन ऑफ एनमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया" (CEPI) भारत रक्षा अधिनियम 1939 के तहत स्थापित शत्रु संपत्तियों का एक कार्यालय है। सभी शत्रु संपत्तियां इसके कब्जे में हैं। 1968 में भारत ने शत्रु संपत्ति की हिरासत और नियंत्रण के लिए "शत्रु संपत्ति अधिनियम" बनाया था। हालांकि Modi Government के पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में 50 साल पुराने इस कानून में तमाम संशोधन किए गए हैं। करीब ढाई दशक पहले तत्कालन जिलाधिकारी अनीता जैन भटनागर ने शहर की तमाम शत्रु संपत्तियों का ब्यौरा संकलित करवाया था। उस समय शहर भर में मौजूद शत्रु संपत्तियों की कीमत सर्किल रेट के आधार पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की आंकी गई थी। शत्रु संपत्तियां Uttar Pradesh के कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी समेत सभी प्रमुख महानगरों में मौजूद हैं। लखनऊ का एक चर्चित कॉफी हाउस भी शत्रु संपत्ति ही है।

  • पुलिस और जिला प्रशासन अपनी जांच में पहले ही दे चुका है क्लीन चिट
  • मुख्तार बाबा की मां हाजरा बेगम ने वर्ष 1982 में खरीदी थी उक्त भूमि
  • वर्तमान समय में ब्रिटेन में रह रहे आबिद रहमान ने की थी भूमि की रजिस्ट्री
  • वर्ष 1947 में मोहम्मद मौला बक्श ने Court से खरीदी थी उक्त भूमि
  • भू-माफिया सेल (कानपुर) प्रभारी भी डेढ़ दशक पहले दे चुके हैं क्लीन चिट 
  • दशकों पहले यहां पर बना मंदिर नौबस्ता के यशोदा नगर में हो चुका है शिफ्ट
  • 2002 में शोभा यात्रा के बाद नौबस्ता में शिफ्ट किया गया था मंदिर 


Yogesh Tripathi 

Uttar Pradesh के Kanpur में घनी मुस्लिम आबादी के बीच स्थित "बाबा स्वीट एंड बिरयानी" (Restaurant) को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा पीड़ित पक्ष की तरफ से किया गया है। पीड़ित पक्ष की तरफ से जारी किए गए अभिलेखों पर यदि बारीकी से गौर किया जाये तो "बाबा स्वीट एंड बिरयानी" जिस बिल्डिंग में स्थित है वो "शत्रु संपत्ति" नहीं है। इस संपत्ति को हाजरा बेगम ने वर्ष 1982 में आबिद रहमान से लिखापढ़ी कर खरीदी थी। आबिद रहमान इन दिनों London में रहते हैं। अभिलेखों के मुताबिक आबिद रहमान के वालिद मोहम्मद मौला बक्श ने उक्त भूमि वर्ष 1947 में जरिए Court (अदालत) खरीदी थी। पीड़ित पक्ष का यह दावा सिर्फ जुबानी नहीं है बल्कि उसके दावे पर जिला प्रशासन और ढाई दशक पहले गठित पुलिस विभाग के भू-माफिया सेल के दो-दो प्रभारी भी अपनी मोहर लगा चुके हैं। अपर नगर मजिस्ट्रेट की कोर्ट (ACM) भी इस मामले की जांच करने के बाद रिपोर्ट मुख्तार के पक्ष में दे चुके हैं तो अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि भूमि को आखिर कैसे और किन लोगों के कहने पर "शत्रु संपत्ति" बताया जा रहा है...? यही नहीं जिस रामजानकी मंदिर का बार-बार जिक्र किया जा रहा है दरअसल उस मंदिर के मालिक और कर्ताधर्ता दो दशक पहले ही शोभायात्रा के बाद वर्ष 2002 में मंदिर को नौबस्ता के यशोदा नगर में शिफ्ट कर चुके हैं। मंदिर के शिफ्ट होने पर भी जिला प्रशासन अपनी जांच में मोहर लगा चुका है। 


क्या कहती है भू-माफिया सेल की रिपोर्ट ...?

शहर में बड़े पैमाने पर शत्रु संपत्तियों, वक्फ संपत्तियों और सोसाइटी की जमीनों पर कब्जा कर उसकी अवैध तरीके से बिक्री की रोकथाम के लिए करीब तीन दशक पहले भू-माफिया सेल का गठन किया गया था। तब के गोविंद नगर (क्षेत्राधिकारी कार्यालय) में भू-माफिया सेल का कार्यालय खोला गया और क्षेत्राधिकारी गोविंद नगर को ही इस सेल का प्रभारी बनाया गया था। 25 अगस्त 2007 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी गोविंदनगर प्रकाश स्वरूप पांडेय ने कुमारी कैशर जहां की शिकायत पर इस पूरे प्रकरण की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कहीं भी शत्रु संपत्ति का जिक्र नहीं है। उसके बाद एक फरवरी 2009 में तत्कालीन गोविंदनगर क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने भी इस प्रकरण पर आख्या दी। यह आख्या भी मुख्तार बाबा के पक्ष में थी और कहीं भी शत्रु संपत्ति का जिक्र नहीं। अपनी जांच रिपोर्ट में इन दोनों ही क्षेत्राधिकारियों ने तमाम सरकारी अभिलेखों का परीक्षण करने और स्थानीय लोगों की गवाही के बाद लिखा कि शिकायतकर्ता के सभी आरोप निराधारा हैं। 


दोनों ही अफसरों की रिपोर्ट के बाद तत्ताकालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट (तृतीय) (ACM 3rd) ने अपनी जांच रिपोर्ट में राम जानकी मंदिर को लेकर जो बात कही है उसके मुताबिक "शिवशरण गुप्ता ने पुलिस को बयान दिया कि उसके चचेरे बाबा लालता प्रसाद ने 21 फरवरी 1947 में 99/14 का कुछ Part मौलबक्श को जरिए रजिस्ट्री बेंचा था। मकान नंबर 99/14 में ठाकुरद्वारा का एक घरेलू निजी मंदिर था। मंदिर बेहद पुराना और खस्ताहालत में था, साथ ही साथ वह अक्सर गिर  रहा था। सुरक्षा के मद्देनजर उपरोक्त मकान के घरेलू मंदिर में स्थित मूर्तियों को शिवशरण गुप्ता ने अपने स्वर्गीय भाई भगवान शरण गुप्ता के साथ मिलकर अपने नए मकान नौबस्ता स्थित यशोदानगर (शंकराचार्य नगर) में 17 फरवरी 2002 को पूजा-अर्चना और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद शिफ्ट कर दिया। जहां अब भी लगातार पूजा-अर्चना जारी है। शिवशरण गुप्ता के मुताबिक मकान नंबर 99/14 में अब कोई मंदिर या मूर्ति नहीं है। उक्त मकान खंडहर है, जो कि जर्जर और गिराऊ है। मकान शिवशरण गुप्ता के बड़े भाई भगवान शरण गुप्ता आदि के नाम पर नगर निगम के अभिलेखों में दर्ज है। इसकी पुष्टि जोनल अधिकारी नगर निगम (Zone 1st) की तरफ से भी प्रेषित की जा चुकी है।" रामजानकारी मंदिर सरकारी अभिलेखों में ठाकुरद्वारा के नाम से दर्ज है। 


शिकायत में हाजी मुख्तार पर ये भी आरोप लगाया कि तमाम अभिलेखों में छल और फरेब के साथ-साथ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए 99/14 के कुछ अंश को नगर निगम की पंचशाला में 99/14 A के नाम से दर्ज करा लिया। जिसमें वर्तमान समय में बाबा स्वीट हाउस निर्मित है। भू-माफिया सेल के दोनों पूर्व अफसरों ने इस शिकायत पर भी गहराई से छानबीन कर अपने जांच की रिपोर्ट शासन और प्रशासन को सौंपी। 


Report के मुताबिक " शिकायतकर्ता की तरफ से संलग्न पत्रों के आधार पर 99/14 बेकनगंज स्थित कानपुर नगर से नगर निगम पंचशाला 1 अप्रैल 1953 से 31 मार्च 1958 तक में 99/14 A नंबर मौला बक्श के नाम पर नाम पर दर्ज है। जबकि नगर निगम की पंचशाला में वर्ष 1948 से 1953 में 99/14 में ठाकुरद्वारा ऑफ लालता प्रसाद (पुराने कालम) में दर्ज है और नए कालम में नगर निगम के आदेश TCIS नंबर 49 (01/03/19449) दर्ज है। जिसे नगर निगम की तरफ से जारी पंचशाला 1953 से 1958 में संपत्ति का नाम अथवा संख्या के कालम में पुराने में 14 और नए में 14 A दर्ज है। गृहस्वामी के नाम व पता के कालम में मौला बक्श दर्ज है। 1968 से 73 की पंचशाला में संपत्ति का नंबर 14 A अंकित है जबकि गृहस्वामी के नाम और पता के कालम में आबिद रहमान नाबालिग पुत्र व संरक्षिका श्रीमती सबीहा रहमान दर्ज है। 1978 से 87 में पंचशाला में संपत्ति का नंबर 14 A अंकित है। गृहस्वामी के पुराने कालम में नाम व पता आबिद रहमान नाबालिग पुत्र एवं संरक्षिक सबीहा रहमान दर्ज है जबकि नए कालम में हाजरा खातून पत्नी स्व. हाजी मोहम्मद इसहाक का 15 अप्रैल 1983 का बैनामा दर्ज है। हाजरा खातून ने यह प्रापर्टी आबिद रहमान से 28/02/1982 जरिए रजिस्टर्ड बैनामा खरीदी थी।"


क्या कहती है ACM (3rd) की Report...?

अपर नगर मजिस्ट्रेट (तृतीय) कानपुर ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी गोविंदनगर प्रकाश स्वरूप पांडेय की 25 अगस्त 2007 और सुरेंद्र नाथ तिवारी की 1/02/2009 की जांच रिपोर्ट के बाद अपनी रिपोर्ट में लिखा कि "मेरे द्वारा उपरोक्त आरोप की जांच के दौरान लिए गए बयानात और अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत सभी आरोप निराधार पाए गए। शिकायतरक्ता कैसरजहां वर्तमान समय में 91/146 हाता हफीज हलीम में अपने भाई-बहन और मां के साथ किराये पर रह रही हैं। आदि हलीम ब्रिटिश नागरिकता ग्रहण करने से पहले अपने मित्र गुलमोहिद्दीन को उक्त मकान की देखरेख के लिए छोड़ गए थे। बाद में इस मकान का मुख्तारअहमद मुख्तार बाबा को 21/12/1999 को नियुक्त किया गया। मुख्तार बाबा द्वारा यह मकान 11/07/2000 को रजिस्टर्ड बैनामा किया गया। इस मकान के जुज भाग पर शिकायतकर्ता कैसरजहां अपने परिवार के साथ रहती है। वर्ष 2002 में सटलर आदि लगाकर शिकायतकर्ता ने कब्जा करने की कोशिश की। बेकनगंज ने शिकायकर्ता के अवैध अतिक्रमण को हटवा दिया। कैसरजहां की मां अमीना बेगम की तरफ से कानपुर न्यायालय में वांद संख्या 501/2000 दायर कर रक्खा है। जो कि कोर्ट में विचाराधीन है।" रिपोर्ट में रामजानकारी मंदिर को लेकर की गई शिकायत पर मंदिर के कर्ताधर्ताओं की वंशावली तक का भी हवाला दिया गया है।

Report में "ACM (3rd) ने आखिरी में लिखा है कि वाहिद अलीम द्वारा अपने मकान नंबर 91/146  को गुलमोहिद्दीन की देखरेख में देना और मुख्तार बाबा को नियुक्त करना और उसके बाद मुख्तार बाबा की तरफ से गुलमोहिद्दीन को मकान की रजिस्ट्री करने इसके बाद शिकायतकर्ता की तरफ से छत पर कब्जा करने से रोकने पर शिकायतकर्ता कैसरजहां ने मुख्तार बाबा के खिलाफ मंदिर की जगह पर "बाबा स्वीट एंड बिरयानी" बनाने और अवैध कब्जा कर अवैध बिक्री करने व साहिद हलीम को पाकिस्तानी होने के आरोप पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर असत्य एवं निराधार पाया गया है। इसकी पुष्टि भू-माफिया सेल के प्रभारियों की जांच रिपोर्ट में भी है।"

  • 50 हजार रुपए के इनामी बदमाश को Arrest करने पहुंची थी UP Police
  • काशीपुर के भरतपुर गांव में ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख के घर दबिश देते ही ग्रामीणों ने किया Attack
  • पथराव और फायरिंग से बैकफुट पर आई UP Police की टीम ने भी की फायरिंग
  • ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख की पत्नी गुरप्रीत कौर की मौत के बाद ग्रामीण हुए उग्र 
  • नेशनल हाइवे को जाम कर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की
  • डैमेज को कंट्रोल करने के लिए उत्तराखंड के चार जिलों की फोर्स मौके पर पहुंची

Yogesh Tripathi

 Video देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें------   https://youtu.be/nXUhvSUkxUk

Uttarakhand के काशीपुर में 50 हजार रुपए इनामी बदमाश को पकड़ने गई UP Police की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया । पथराव और फायरिंग के बीच एक महिला की मौत हो गई। जिसके बाद ग्रामीण उग्र हो गए । हमले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के 5 जवान भी घायल हुए हैं। सभी को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक SHO और कांस्टेबल के लापता होने की भी खबर है। इस बड़ी वारदात के बाद DIG मुरादाबाद समेत कई पुलिस अफसरों की अगुवाई में भारी पुलिस बल Uttarakhand के बार्डर पर मौजूद है। फायरिंग में मरी महिला ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख गुरताज भुल्लर की पत्नी गुरप्रीत कौर बताई जा रही है।


Uttarkhand Police के मुताबिक उधम सिंह नगर के कुंडा थाना एरिया स्थित भरतपुर गांव में ग्रामीणों और पुलिस के बींच हुई हिंसा में महिला की मौत के बाद लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने  नारेबाजी करते हुए हाइवे को जाम कर दिया है। बड़ी वारदात के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, मुरादाबाद रेंज के DIG शलभ माथुर के मुताबिक "पुलिस की टीम 50 हजार रुपए के इनामी बदमाश को पकड़ने के लिए पहुंची थी। ग्रामीणों ने यूपी पुलिस को बंधक बना लिया और उनके हथियार छीन लिए। श्रीमाथुर ने फायरिंग में एक महिला के मौत होने की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस के पांच जवान भी घायल हुए हैं। पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है"  


DIG शलभ माथुर ने बताया कि ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र में खनन माफियाओं ने खनन विभाग के अफसरों की टीम पर हमला बोलकर उनके वाहन छीनने और SDM को बंधक बनाकर मारपीट की थी। जिसकी FIR रजिस्टर्ड की गई थी। इस पूरे मामले में अब तक 13 लोग Arrest किए जा चुके हैं। इसी क्रम में पुलिस 50 हजार रुपए के एक इनामी को Arrest करने के लिए उत्तराखंड पहुंची थीं। 


उधर, Uttarakhand Police का कहना है कि यूपी पुलिस बगैर किसी सूचना के दबिश देने के लिए पहुंची थी। महिला की मौत किसकी गोली से हुई है...?? इसकी जांच कराई जा रही है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि यूपी पुलिस ने महिला को गोली मार दी। जबकि यूपी पुलिस का दावा है कि ग्रामीणों ने पुलिस फोर्स को बंधक बनाकर उनके हथियार छीन लिए और पुलिस दल पर पथराव भी किया। जिसमें पांच पुलिस कर्मी घायल हैं। एक SHO और कांस्टेबल अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।


चर्चा है कि यूपी पुलिस की टीम ज्येष्ठ ब्लाक प्रमुख गुरताज भुल्लर के घर पर दबिश देने के लिए पहुंची थी। यूपी पुलिस के साथ लोकल पुलिस नहीं थी। ग्रामीणों ने मोर्चा खोल पथराव कर दिया। खुद को बचाने के लिए फोर्स ने फायरिंग की, जिसमें महिला की मौत हो गई। जिसके बाद उग्र ग्रामीणों ने चार पुलिस कर्मियों को पकड़ने के बाद उन्हें कुंडा पुलिस के हवाले कर हाइवे को जाम कर दिया। समाचार लिखे जाने तक उग्र भीड़ ने हाइवे को जाम कर रक्खा था। उत्तराखंड पुलिस ने अगल-बगल के चार जिलों की फोर्स को बुलाकर किसी तरह बढ़ते बवाल पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सकी।



  • तेज रफ्तार डंपर ने सवारियों से भरी ऑटो में मारी जोरदार टक्कर
  • टक्कर मारने के बाद ऑटो पर चढ़ा डंपर, सवारियां दबी
  • Accident के बाद कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा जाम
  • कई थानों की फोर्स के साथ पहुंचे पुलिस के अफसर
  • गैस कटर और JCB की मदद से ऑटो में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया
  • सवा घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा रहा भीषण जाम 
  • Naubasta स्थित SBI Bank के सामने हुआ हादसा 
कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग पर Accident के बाद ऑटो में फंसे घायल युवक को निकालने की जद्दोजहद

Yogesh Tripathi
 

Kanpur के नौबस्ता थाना एरिया स्थित कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार सुबह तेज रफ्तार डंपर ने सवारियों से भरी ऑटो में जोरदार टक्कर मार दी। ऑटो में टक्कर मारने के बाद डंपर के चालक ने स्टेयरिंग से नियंत्रण खो दिया और डंपर ऑटो के ऊपर चढ़ गया। पांच सवारियां ऑटो में दब गई। Accident के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। Public की सूचना पर नौबस्ता थाना की फोर्स और ट्रैफिक पुलिस मौक पर पहुंची। प्रशासन ने गैस कटर व ग्राइंडर से आटो कटवाया। JCB से डंपर हटवाने के बाद पुलिस ने ऑटो में फंसे घायल लोगों को किसी तरह बाहर निकलवाने के बाद उन्हें उपचार के लिए LLR Hospital में भर्ती कराया। चिकित्सकों के मुताबिक दो घायलों की हालत काफी नाजुक है। Accident के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ करीब सवा घंटे तक भीषण जाम लगा रहा। बवाल की आशंका के मद्देनजर DCP South प्रमोद कुमार भी आसपास के थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचें। 


हादसा गुरुवार की सुबह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) बैंक से 20 मीटर की दूरी पर हुआ। पुलिस के मुताबिक तौधकपुर निवासी राहुल की आटो है। राहुल की ऑटो को क्षेत्र का रहने वाला मन्नू किराए पर ड्राइव करता है।  गुरुवार सुबह मन्नू, अपने साथी नंदी, महाजन और दो अन्य सवारी को लेकर गल्लामंडी से नौबस्ता बाईपास जा रहा था। नौबस्ता-हमीरपुर रोड पर स्थित आनंद बिहार की तरफ जाने वाले कट के पास मन्नू दोनों साथियों को उतारने के लिए ऑटो को हाईवे से दूसी तरफ मोड़ रहा था। इस बीच पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने ऑटो में टक्कर मार दी। टक्कर मारने के बाद डंपर ऑटो पर चढ़ गया। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर नौबस्ता पुलिस पहुंची। थोड़ी देर में ट्रैफिक पुलिस भी पहुंच गई। गैस कटर, ग्राइंडर और JCB की मदद से ऑटो को काटने के बाद उसमें फंसे घायल लोगों को किसी तरह बाहर निकाला गया। घायलों को पुलिस ने तत्काल LLR Hospital में भर्ती कराया। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस जाम को खुलवा सकी। 

 

Accident को लेकर क्षेत्रीय लोगों में खासा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि Metro निर्माण की वजह से कानपुर-कबरई राष्ट्रीय राजमार्ग पर नौबस्ता बाईपास से लेकर मछरिया तिराहे तक सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ को खोद दिया गया है। Metro इस फुटपाथ पर अस्थाई सड़क का निर्माण कर रहा है। फुटपाथ को खोदने के बाद अब तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं किया गया। बारिश की वजह से काफी पानी भी भर चुका है। लोगों का पैदल निकलना भी दुश्वार हो चुका है। सड़क से चूंकि हजारों की संख्या में भारी वाहनों की आमदरफ्त 24 घंटे रहती है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने अभी तक भारी वाहनों खासतौर पर मौरंग-गिट्टी लादकर फर्राटा भरने वाले डंपरों की नो इंट्री नहीं की है। सुबह से लेकर पूरी रात तक भारी वाहन संकरी हो चुकी रोड पर फर्राटा भरते रहते हैं। जिसकी वजह से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। 
 
इतना ही नहीं बसंत बिहार में लगने वाली सब्जी मंडी को भी स्थानीय पुलिस अभी तक वहां से नहीं हटवा सकी है। फुटपाथ खोदने के बाद उस पर सब्जी के ठेले दर्जनों की संख्या में लगते हैं। शाम को यहां की स्थित और भी भयावह हो जाती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिला प्रशासन ने भारी वाहनों की नो इंट्री दिन में नहीं की और सब्जी मंडी को अन्यत्र शिफ्ट नहीं कराया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। 
 
खास बात ये है कि जिस जगह पर Accident हुआ है वहीं सड़क के किनारे एक बड़े प्लाट पर मौरंग को डंप किया जाता है। जिसकी वजह से यहां दिन हो या फिर रात मौरंग लदे डंपर को चालक बेतरतीब ढंग से अंदर ले जाते हैं और Back भी करते हैं। जिसकी वजह से हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जिस जगह पर मौरंग डंप की जाती है वो स्थान बैंक ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक के बीच में पड़ता है। इन दोनों ही बैंकों में सैकड़ों ग्राहकों की आमदरफ्त रहती है। इन सबके बाद भी पुलिस प्रशासन की तरफ से ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। 
 
  • अध्यक्ष, महामंत्री समेत कई पदों के लिए 68 प्रत्याशियों ने कराया नामांकन
  • 7 अक्तूबर तक पर्चा वापसी कर सकेंगे लायर्स एसोशिएशन के प्रत्याशी
  • 18 अक्तूबर को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे अधिवक्ता
  • अध्यक्ष और महामंत्री पद के लिए "चुनावी रणभूमि" में कई दिग्गज
  • शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने कसी कमर
  • खुफिया इकाइयां भी लायर्स चुनाव के मद्देनजर कर रही हैं "निगाहबनी"

Yogesh Tripathi 

नामांकन प्रक्रिया के खत्म होते ही लायर्स एसोशिएशन (कानपुर) का चुनावी "महासंग्राम" अचानक गर्मा गया है। प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित कराने के लिए समर्थक और "मठाधीश" अब खुलकर मैदान में आ गए हैं। पांव छूने और प्रणाम करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। देर रात्रि तक प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदाताओं की चौखट पर भी दस्तक दे रहे हैं। कसमों और वादों की दुहाई दी और ली जा रही है। Monday को नामांकन प्रक्रिया का अंतिम दिन था। कई दिग्गजों ने अंतिम दिन नारेबाजी के बीच प्रत्याशिता का पर्चा भरकर चुनावी लड़ाई को और रोचक बना दिया। 7 अक्तूबर पर्चा वापसी की तारीख मुकर्रर है। 18 अक्तूबर को हजारों अधिवक्ता मतदाता अपने प्रत्याशियों के लिए वोट की चोट करेंगे। 


उधर, लायर्स चुनाव के मद्देनजर खुफिया इकाइयां भी Alert हो गई हैं। पुरानी हिंसक वारदातों को देखते हुए खुफिया इकाइयां "पैनी निगाहबनी" कर रही हैं, ताकि मतदान और उससे पहले किसी तरह की अशांति न फैल सके। जिला प्रशासन ने भी लायर्स चुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए कमर कसनी शुरु कर दी है। 


एक बड़े अधिकारी की मानें तो भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ही लायर्स के चुनाव होंगे। जिला प्रशासन बार चुनाव से पहले कचहरी परिसर में गोली लगने से मरे अधिवक्ता के मामले को भूला नहीं है। एल्डर्स कमेटी ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि चुनाव आचार संहिता का पालन न करने वाले प्रत्याशियों की प्रत्याशिता रद्द कर दी जाएगी। सभी को कचहरी परिसर से बैनर, होर्डिंग और पोस्टर हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।


लायर्स के 20 पदों की कार्यकारिणी के लिए अंतिम दिन तक 68 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन दाखिल किया। सबसे दिलचस्प मुकाबाल महामंत्री के पद पर है। चुनावी चर्चा ये है कि महामंत्री पद पर त्रिकोणीय मुकाबाला देखने को मिल सकता है। जबकि अध्यक्ष पद पर चुनावी पंडित सीधी फाइट बता रहे हैं।


अंतिम दिन महामंत्री पद पर डीसी ऑफ लॉ कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष राजीव यादव ने भी समर्थकों के साथ पर्चा भरा। राजीव यादव के नामांकन में जुलूस में वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष शुक्ला, सुरेंद्र यादव, भारी नाथ शर्मा, जितेंद्र नारायण त्रिपाठी, रविकांत पांडेय, ब्रजेश प्रजापति, नरेंद्र मिश्रा, दीपक शुक्ला और डीसी लॉ कालेज के पूर्व अध्यक्ष सुखबीर यादव, शिवाकांत दीक्षित, धीरेंद्र उत्तम, अजय कश्यप, कुलदीप यादव, अनूप अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, रमाशंकर गुप्ता उर्फ रामा, ब्रजेंद्र दिवेदी और सुरेंद्र यादव समेत कई अधिवक्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे। नामांकन जुलूस में महिला अधिवक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।


महामंत्री पद पर शरद शुक्ला और अजय प्रकाश अग्निहोत्री समेत नौ लोगों ने पर्चा भरा है। जबकि अध्यक्ष पद के लिए सुरेंद्र पांडेय, रवींद्र शर्मा, राम ओंकार विश्वकर्मा, रमेशचंद्र वर्मा और श्याम नारायण सिंह ने नामांकन कराया है। श्याम नारायण सिंह पूर्व में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं। 

इसी तरह वरिष्ठ उपाध्यक्ष के लिए हर्ष कुमार, देव नारायण दिवेदी, सर्वेंद्र यादव, सुधीर अवस्थी और रमाकांत मिश्रा ने पर्चा भरा। जबकि कनिष्ठ उपाध्यक्ष के लिए विवेक मेहरोत्रा, ब्रजनारायण निषाद, संजीव तिवारी, चंदन पांडेय, अमितेश सिंह सेंगर और संजीव शर्मा ने अपना नामांकन कराया। कोषाध्यक्ष पद के लिए अनीता पांडेय, अजय प्रताप सिंह गौतम, नरेंद्र नाथ, राकेश प्रसाद शाहू और विकास शुक्ला समेत 6 लोगों ने नामांकन कराया। 


संयुक्त मंत्री प्रशासन के लिए आशीष पांडेय, संतोष धीवान, दीपा जायसवाल, नीतीश मिश्रा, रवींद्र भूषण, संतोष यादव, मनीष कुरील, ने पर्चा भरा। वहीं संयुक्त मंत्री प्रकाशन के लिए मधुर शाहू, आकाश तिवारी और आलोक दुबे ने नामांकन कराया। संयुक्त मंत्री पुस्तकालय के पद पर उमेश सिंह कुशवाहा, अचल सिंह यादव, प्रदीप नारायण, अनुज मिश्रा, भगवत दास, मुकेश तिवारी, राजेश सिंह परिहार, सचिन अवस्थी ने पर्चा भरा।

  • Congress अब हर मोर्चे पर BJP को जवाब देती दिखाई दे रही है : खाबरी
  • Rahul Gandhi को पप्पू बनाने के पीछे भाजपा ने खर्च कर डाले 65 हजार करोड़
  • जगजीवनराम को अध्यक्ष बनाकर इंदिरा गांधी ने दिखाई थी दूरदर्शिता
  • अब मल्लिका अर्जुन खड़गे की है बारी : खाबरी

 

उरई स्थित अपने आवास पर बेबाकी से बातचीत करते UPCC के New President ब्रजलाल खाबरी

Dr. Rakesh Dwivedi

DS-4 (दलित, शोषित, समाज संघर्ष समिति) की नीतियों ने एक किशोर के मन में ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उसने दलितों को न्याय दिलाने वाली विचारधारा को आलिंगनबद्ध कर लिया। समय के चक्र के साथ इस युवा मन में भी परिवर्तन आते और बढ़ते रहे। BSP के संस्थापक कांसीराम की नजरों ने उसी वक्त भांप लिया कि बृजलाल अहिरवार ( खाबरी नाम बाद में जुड़ा) नाम का यह युवा उनकी विचार धारा के मुफीद रहेगा। Delhi के बाद होशियारपुर से Start यह कहानी राजनीति का उपन्यासबन गई। कई पड़ाव आए पर यात्रा जारी रही। अब नया पड़ाव Uttar Pradesh Congress के President के रूप में आया है। अपने स्वभाव के अनुरूप ही खाबरी बोले, न डरेंगे, न दबेंगे”… BJP को उसी रूप में जवाब जिले से लेकर प्रदेश तक दिया जाएगा, जैसा जरूरी होगा। कांशीराम सिर उठाकर और मुखर होकर जीना बता गए हैं। बृजलाल खाबरी President (UPCC) से उनके उरई स्थित आवास पर www.redeyestimes (News Portal) के सीनियर जर्नलिस्ट Dr. Rakesh Dwivedi  ने उनसे बातचीत की और श्रीखाबरी ने काफी बेबाकी से हर सवाल का जवाब भी दिया....

9th Class के Student के मन में किसी को न्याय दिलाने का विचार कैसे आया?

यह बात अप्रैल 1977 की है। तब मैं कक्षा नौ में कोंच के SRP Inter College में पढ़ता था। खाबरी से कोंच तक की यात्रा साइकिल से तय होती थी। बिरादरी का एक व्यक्ति दबंग के यहां बंधुआ मजदूर था। वह घर पिता जी के पास मदद के लिए आया। मैंने दूध-रोटी खाते-खाते उसकी पूरी बात सुन ली और कहा तुम केलिया थाने पहुंचो। दो घंटे पढ़ने के बाद मैं भी थाने पहुंच गया। वहां के थानेदार ने मदद कर मेरे उत्साह को काफी बढ़ाया। यहीं से राजनीति के क्षेत्र में आने का मन बन गया।

BSP में आपका प्रभाव कैसे बढ़ाउस वक्त जिले में कई दिग्गज नेता थे

DV College में दो छात्रसंघ चुनाव लड़े पर कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद नये नारे और सिद्धांतों को लेकर उभरी BSP से जुड़ा। जिम्मेदारी पूरी करने की भूख रहती थी तो कांशीराम की नजरों में आ गया। 1992 तक कांशीराम और बहन मायावती  अच्छी तरह से मुझे जानने लगे थे। 1995 में मुझे BSP का जालौन जिलाध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में BSP ने प्रत्याशी घोषित कर दिया। मैं BJP के भानुप्रताप को हराकर सांसद भी बन गया। 


BSP में कई बड़े ओहदों पर रहे फिर पार्टी छोड़ने की नौबत क्यों आई...?

ये सच है कि खूब महत्व मिला। 2004 में भितरघात की वजह से चुनाव हारा तो बहन जी ने फोन पर पूछा कि तू तो जीत रहा था, फिर हारा क्यों ?  हार की वजह बताई। उन्होंने मुझे बुंदेलखंड से हटाकर गोरखपुर मंडल बतौर कोआर्डिनेटर भेज दिया।  इसके बाद  आगरा, मेरठ मण्डल की भी जिम्मेदारी मिली। एक वक्त ऐसा भी आया जब दिल्ली प्रदेश प्रभारी के अतिरिक्त, झारखंड मप्र, आंध्रा, कर्नाटक का भी प्रभारी के रूप में कामकाज देखा।

फिर वहां से हटने की नौबत भला क्यों आ गई…?

मैं जिसके साथ भी रहता हूँ तो पूरी निष्ठा के साथ रहता हूँ। मेरे विरोधियों ने जब कान भरने शुरु किए तो मेरा राजनीतिक नुकसान किया जाने लगा। यदि कोई पीठ पर छुरा भोंके तो यह मैं बर्दाश्त नहीं करता। यह मेरा स्वभाव है। इसके बाद 10 अक्टूबर 2016 को Congress ज्वाइन कर ली।

कुछ सवालों पर ब्रजलाल खाबरी अपनी हंसी को रोक नहीं पाए।

कांशीराम क्यों छाए ?  इस विषय पर बातचीत में Rahul Gandhi प्रभावित हो गए, आपने ऐसा क्या कह दिया…?

( हंसते हुए आपको कैसे पता…?) मैंने Rahul Ji से कुछ बुनियादी बातें की। कहा कि ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम यह Congress का कभी मूल वोट था। पूरा दलित ( चौधरी) Congress के साथ था। ये क्यों था?  इसकी मूल वजह बाबू जगजीवनराम थे। Indira Ji ने उन्हें हमेशा अपने साथ बैठाया। फिर अध्यक्ष भी बनाया। इस निर्णय ने दलितों पर प्रभाव छोड़ा। जब तक आप दूसरा जगजीवन राम पैदा नहीं करोगे, Congress का भला नहीं होने वाला। फिर एक प्लम्बर का उदारण देकर भी समझाया। कहा कि, जो प्लम्बर  फिटिंग करता है, उसी को पता रहता है कि उसने कहां पर कौन सी कमी की है। इसलिए राजनीति में अनुभव को ही जब तरजीह मिलेगी तो कमी दूर होगी

इन उदाहरणों से Rahul Gandhi कितना समझे…?

बड़ी गंभीरता से सुना। कहा कि कांशीराम के साथ मिलकर उनके कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार से Congress को खत्म किया अब वही लोग Congress को जीवित करें। इसके बाद उन्होंने मुझे SC प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया।

बहन जी के तो आप काफी करीब रहे, क्या उन्होंने बधाई दी...?

 ( मुस्कुराते हुए ) अभी तक तो नहीं मिली। फिर भला अब उनसे बधाई क्यों मिलेगी..? मुझे भी अलग दल में आकर ऐसी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। 

कार्यकर्ता ऐसा क्यों कह रहे हैं कि Congress अब खड़ी हो जाएगी...?

Rahul Gandhi & Priyanka Gandhi 2016 से मेरी कार्यक्षमता और कार्य प्रणाली को देख रहे हैं। कुछ सोचकर ही मुझे दायित्व दिया गया है। उनके निर्णय को सही ठहराने की चुनौती अब मेरे लिए है। देखिएगा, बदली हुई Congress अब Uttar Pradesh में  दिखेगी। Congress को अब लड़ता हुआ बनाएंगे। Congress हर मोर्चे पर BJP को मुंहतोड़ जवाब देगी। न डरेंगे न दबेंगे।

BJP तो Rahul Gandhi को पप्पू कहती और मजाक बनाती है...?

BJP की यह रणनीति है। यदि वह किसी से डर रही है तो वह Rahul Gandhi ही हैं। उन्हें पप्पू साबित करने के लिए अब 65 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा से भाजपा में खलबली है। मीडिया भी उनके हाथों खेल रही है, इसलिए यात्रा को सही कवरेज नहीं हो रहा है। Rahul Gandhi के पैरों में पड़े छाले मीडिया नहीं देख पा रही है। महात्मा गांधी के बाद दूसरे राहुल हैं, जो पैदल चलकर इतनी दूरी तय करेंगे।

Social Media पर BJP काफी आगे है...कांग्रेस क्यों पिछड़ी है...?

अब हम भी मजबूत हुए हैं। Uttar Pradesh में यदि आवश्यकता हुई तो इसे और मजबूत किया जाएगा। वैसे अब BJP भागती हुई नजर आ रही है। बड़े तगड़े जवाब मिल रहे हैं। झूठ को भी उजागर किया जा रहा है।

 

Note----Dr. Rakesh Dwivedi ने करीब दो दशक तक तक अमर उजाला अखबार में डेस्क और मुरादाबाद के साथ-साथ हिन्दुस्तान अखबार में अपनी सेवाएं दी हैं। वह लंबे समय तक हिन्दुस्तान अखबार में  ब्यूरो चीफ रहे हैं...वर्तमान में वह "अरविंद माधुरी तिवारी महाविद्यालय" के प्राचार्य हैं।