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 -22 साल की युवती के सिर में दरिंदों ने मारी दो गोलियां

-एसपी के बाद डीआइजी भी पहुंचे मौका-ए-वारदात पर

-एसपी ने कहा, पोस्टमार्टम के बाद गैंगरेप का पता चला सकेगा

-डीआइजी के निर्देश पर पुलिस ने बनाई कई टीमें


Yogesh Tripathi


UP के Bundelkhand स्थित Chitrakoot जनपद में झांसी-मिर्जापुर हाइ-वे पर बरगढ घाटी के रात्रिकालीन पुलिस सेवा केंद्र में हैवानियत और दरिंदगी का गंदा खेल बीती रात खेला गया। पुलिस चौकी (पिकेट केंद्र) के अंदर एक 22 साल के युवती की रक्त रंजित लाश मिली। युवती की गोली मारकर हत्या की गई। सिर में दो गोली मारे जाने के जाहिरा निशान मिले हैं। शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। मौका-ए-वारदात पर चित्रकूट एसपी और डीआइजी भी पहुंचे। 



मंगलवार को सूचना मिलने के बाद चित्रकूट जनपद के एसपी अंकित मित्तल और अपर पुलिस अधीक्षक बलवंत राय मौके पर पहुंचे। काफी देर तक दोनों अफसरों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। हत्याकांड से जुड़ा कोई सुराग अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है। एसपी के मुताबिक यह एरिया चित्रकूट के बरगढ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ये इलाका दस्यु प्रभावित है। 



SP (Chtrakoot) के मुताबिक रात्रिकालीन पुलिस सहायता केंद्र करीब 7-8 साल से निष्प्रयोजय पड़ा रहता है। पहले रात मे पुलिस यहां रहती थी। माना जा रहा है कि कातिलों ने युवतो को बुलाया होगा या फिर अगवा कर लाए होंगे। सिर पर दो गोली मारे जाने के निशान मिले हैं। एसपी का कहना है कि गैंगरेप की घटना हुई है या फिर नहीं। इसका खुलासा पोस्टमार्टम आने के बाद ही हो सकेगा। एसपी के मुताबिक कि सहायता केंद्र और आसपास रेप करने या फिर छीनाझपटी के प्रयास जैसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। शव की पहचान करवाने की कोशिश की जा रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री के भाई की हत्या के बाद खुला था सहायता केंद्र

Chitrakoot के बरगढ़ थाना एरिया स्थित इस सहायता केंद्र को करीब तीन दशक पहले खोला गया था। उस समय चित्रकूट जनपद पूरी तरह से दस्यु प्रभावित था। दस्यु सम्राट ददुआ का पूरी तरह से जनपद में खौफ था। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह के भाई का मर्डर होने के बाद अफसरों के निर्देश पर इस सहायता केंद्र को खोला गया। सूत्रों की मानें तो दस्यु प्रभावित एरिया होने की वजह से सहायता केंद्र में पुलिस का स्टाफ ठहरता नहीं था। खुद एसपी ने भी स्वीकार किया है कि कई साल से पुलिस सहायता केंद्र निष्प्रयोजित था।




-2015 बैच की आइपीएस अफसर हैं अपर्णा गुप्ता


-सहारनपुर एएसपी ट्रैफिक के पद पर थी तैनाती


-एसपी साउथ रवीना त्यागी अब SP (CBCID) कानपुर


-मंगलवार दोपहर शासन ने जारी की 12 अफसरों के तबादले की लिस्ट

फोटो साभार----Google

 Yogesh Tripathi

तेज तर्रार छवि की IPS अफसर अपर्णा गुप्ता अब Kanpur की SP South होंगी। अभी तक उनकी तैनाती सहारनपुर जनपद में एएसपी ट्रैफिक के पद पर थी। शासन ने मंगलवार दोपहर को 12 आइपीएस अफसरों के तबादले की लिस्ट जारी की। अभी तक SP South रहीं रवीना त्यागी कानपुर को Kanpur में SP (CBCID) बनाया गया है।


2015 बैच की आइपीएस अपर्णा गुप्ता की गिनती काफी तेज तर्रार अफसरों में होती है। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली अपर्णा गुप्ता इससे पहले आगरा, मुरादाबाद जनपद में अहम पदों पर तैनात रह चुकी हैं। आगरा के एक तहखाने में जिस्मफिरोशी के लिए बंधक बनाकर रखी गईं 150 लड़कियों को मुक्त कराने के बाद वे मीडिया की सुर्खियों में आई थीं। 

नवंबर 2018 में अपर्णा गुप्ता मुरादाबाद में एएसपी के पद पर तैनात थीं। तब उन्होंने आएएस अफसर जोगेंद्र सिंह से अरेंज मैरिज की थी। ये विवाह उन्होंने कोर्ट में किया था। उनके पति की तैनाती तब अलीगढ़ में एसडीएम के पद पर थीं।

मां की मेहनत से बनीं IPS


UP के मेरठ जनपद कोरल स्प्रिंग्स कॉलोनी में आइपीएस अपर्णा गुप्ता का परिवार रहता है। परिवार में पिता और उनकी दो बहनें अर्पिता-अर्चिता हैं। मां नीरा गुप्ता का निधन 2012 में हो गया था। अपर्णा गुप्ता आइपीएस बनने की सफलता का का श्रेय अपनी मां को देती हैं।  

उन्होंने कई इंटरव्यूज में कहा है कि उनकी मां ही उनकी रोल मॉडल हैं। मां के पॉजिटिव सोच और उनकी प्रेरणा से वो यहां तक पहुंची हैं। मां ने कभी भी मुश्किलों में हार नहीं मानी और यही हमें सिखाया भी। बेटों की तरह परवरिश की और हम तीनों बहनों को अपने लक्ष्य तक पहुंचाया। केंद्रीय विद्यालय हल्दिया से दसवीं और बारहवीं में टॉप करने के बाद अपर्णा गुप्ता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी की। 2015 की सिविल सर्विसेज परीक्षा में उन्हें सफलता मिली।

-उत्तर में सुनील बजाज, देहात में अविनाश, ग्रामीण में कृष्ण मुरारी को कमान

-1995 में बीजेपी के टिकट पर पार्षद बनीं थी डॉ.बीना आर्या

-जातिगत समीकरण का हाईकमान ने रखा पूरा ध्यान

 

 Yogesh Tripathi


काफी जद्दोजहद के बाद BJP हाईकमान ने Kanpur से जुड़े चार जिलाध्यक्षों के नाम पर देर रात्रि को अपनी फाइनल मुहर लगा दी। हाईकमान ने संगठन में लंबे समय से काम कर रहे खांटी के कार्यकर्ताओं की जिलाध्यक्ष के कुर्सी पर ताजपोशी की। सभी जिलाध्यक्ष तमाम माननीयोंकी इच्छा के विपरीत हाईकमान ने बनाए हैं। बड़े सूत्रों की मानें तो क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह और दोनों सांसदों की खूब चली। उनकी पसंद को वरीयता देकर हाईकमान ने शहर के बीजेपी नेताओं को कई संदेश दिए हैं। 


करीब एक सप्ताह पहले उत्तर और दक्षिण जिले की जिलाध्यक्षी के लिए करीब 69 दावेदारों ने नामांकन भरा था। इसमें एक वांटेड का नाम भी शामिल था। सभी नामों को चुनाव अधिकारी ने प्रदेश नेतृत्व के पास भेज दिया था। देर रात प्रदेश नेतृत्व ने सूबे के कई जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा की। कानपुर के उत्तर जिला की कमान सुनील बजाज को दी गई है। सुनील बजाज पिछले दो कार्यकाल से महामंत्री थे। 

दक्षिण में सामंजस्य बनाते हुए हाईकमान ने बीना आर्या पटेल को जिलाध्यक्ष बनाया है। इससे पहले अनीता गुप्ता दक्षिण की जिलाध्यक्ष थीं। इसी तरह कानपुर देहात में अविनाश सिंह को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अविनाश प्रदेश भाजयुमों को उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वे कानपुर-बुन्देलखंड के क्षेत्रीय मंत्री भी रहे हैं। कानपुर ग्रामीण में कृष्ण मुरारी शुक्ला को प्रदेश नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष बनाया है। कृष्ण मुरारी शुक्ला पुराने कार्यकर्ता हैं। देर रात्रि सभी नामों की घोषणा होते ही समर्थकों में खुशी का माहौल छा गया।

बजाज के नाम पर सभी की मौन स्वीकृति

BJP (North) प्रेसीडेंट को लेकर संगठन में कश्मकश अधिक रही। यहां से कई बड़े और प्रबल दावेदारों ने नामांकन कराया था। लेकिन हाईकमान ने अंततः सुनील बजाज के नाम पर फाइनल मुहर लगाई। सुनील बजाज दो कार्यकाल से बीजेपी उत्तर के महामंत्री थे। पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्रा के साथ व्यापार मंडल की राजनीति शुरु करने वाले सुनील बजाज को सुरेंद्र मैथानी का करीबी माना जाता रहा है। यही वजह रही कि सुरेंद्र मैथानी के दोनों कार्यकाल में वे महामंत्री बने। दोनों की करीबी संगठन के लोगों से भी छिपी नहीं है। सुनील बजाज की पार्टी के सभी गुटों में बेहतर पैठ है। सुरेंद्र मैथानी से उनके दूरी की भी खूब चर्चा है।

वर्ष 95 में पार्षद रह चुकी हैं डॉ बीना आर्या 


BJP (South की प्रेसीडेंट बनीं डॉ. बीना आर्या (पटेल) का नाम तो प्रदेश नेतृत्व ने पैनल में खुद शामिल कराया था। डॉ. बीना आर्या वर्तमान में क्षेत्रीय कमेटी में पदाधिकारी हैं। चर्चा है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष और सांसद की पहल पर बीना आर्या को दक्षिण जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में डॉ. बीना आर्या पटेल ने बताया कि वर्ष 1995 में वे बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनीं थीं। जिलाध्यक्ष बनने से पहले बीना आर्या क्षेत्रीय बीजेपी की मंत्री रही हैं। उनके मृदुभाषी व्यवहार और संगठन के प्रति ईमानदारी को देखते हुए हाईकमान ने उनको ये जिम्मेदारी सौंपी है। 
 

अविनाश को कानपुर देहात और कृष्णमुरारी को ग्रामीण की कमान

कानपुर देहात की कमान युवा नेता अविनाश चौहान को सौंपी गई है। चर्चा है कि हाईकमान ने क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह और सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) का पूरा ख्याल रखा। दोनों की पसंद अविनाश सिंह ही थे। ग्रामीण जिलाध्यक्ष कृष्ण मुरारी शुक्ला को बनाकर बीजेपी ने ब्राम्हण कार्ड खेल सभी को खुश करने की पूरी कोशिश की।

Web Portal में पत्रकार थे डिप्टी पड़ाव निवासी विजय गुप्ता

बीवी ने लगाया देवर और करीबी लोगों पर Murder का इल्जाम

Unnao के जालीखेड़ा की खंती में मिला शव

दिवाली को मिलने पर 28 को पत्रकार ने दी थी तहरीर

Vijay Gupta सीने और सिर में गोली मारे जाने की चर्चा 

विजय गुप्ता जर्नलिस्ट (फोटो साभार----सोशल मीडिया)

Yogesh Tripathi

Web Portal में पत्रकारिता करने वाले जर्नलिस्ट Vijay Gupta की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद कातिलों ने शव को उन्नाव में फेंक दिया। देर शाम हत्या का पता चलने पर पत्रकार के परिजन रायपुरवा थाने पहुंच गए। शहर के तमाम जर्नलिस्ट भी थाने पहुंचे और कातिलों की तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की। देर रात्रि एसपी पूर्वी ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया को घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विजय गुप्ता की हत्या उनके ही सगे भाइयों ने की है। दो लोगों को Arrest किया जा चुका है। एक आरोपी की तलाश की जा रही है। CCTV की फुटेज को भी खंगाला गया है। हत्या में प्रयुक्त वैगन आर कार को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। www.redeyestimes.com  (News Portal) को मिली जानकारी के मुताबिक देर रात उन्नाव जिला प्रशासन की सहमति के बाद पत्रकार विजय गुप्ता के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है। खास बात ये रही कि शहर पुलिस पूरे दिन सघन वाहन चेकिंग अभियान छेड़े रही और बेखौफ कातिल कार के अंदर जर्नलिस्ट का शव लेकर सीमा पार कर गए। 
मंगलवार की देर रात्रि को मीडिया से बातचीत कर पत्रकार विजय गुप्ता हत्याकांड के बाबत जानकारी देते एसपी पूर्वी।

Diwali की रात मिली थी पत्रकार को धमकी

हत्या की पृष्ठभूमि में फिलहाल अभी तक की छानबीन में प्रापर्टी को लेकर पारिवारिक विवाद की बात सामने आ रही है। परिजनों के मुताबिक पत्रकार विजय गुप्ता को 27 अक्तूबर की रात्रि को परिवार के एक सदस्य ने धमकी दी थी। 28 की दोपहर पत्रकार विजय गुप्ता ने रायपुरवा थाने में धमकी देने वाले के खिलाफ शिकायती पत्र देते हुए अपनी हत्या की आशंका जाहिर की थी। शिकायती पत्र देने के कुछ घंटे बाद ही विजय गुप्ता लापता हो गए। परिजनों ने देर रात्रि तक छानबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

प्रार्थना पत्र देने के कुछ घंटे बाद लापता Vijay Gupta

29 अक्तूबर मंगलवार की दोपहर विजय गुप्ता की लाश उन्नाव जनपद के अचलगंज थाना एरिया के बदरका चौकी के लिए जाने वाले आजाद नगर मार्ग चौराहे से महज 300 मीटर की दूरी पर ग्राम जालीखेड़ा स्थित नहर पुलिया की खंती में पड़ा मिला। सूचना कानपुर स्थित विजय गुप्ता के घर पहुंची तो कोहराम मच गया। परिवार के लोग रायपुरवा थाने पहुंचे और इंस्पेक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। थोड़ी देर में खबर सोशल मीडिया पर वॉयरल हुई तो शहर के तमाम पत्रकार भी रायपुरवा कोतवाली पहुंच गए। एसएसपी अनंत देव तिवारी ने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए इंस्पेक्टर को उन्नाव रवाना किया।
www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में अचलगंज थाना प्रभारी ने पत्रकार विजय गुप्ता के Murder की बात को स्वीकार करते हुए बताया कि कातिलों ने हत्या के बाद शव को Unnao जनपद में लाकर फेंक दिया। शव को रिकवर करने के बाद सूचना Kanpur Police और परिजनों को दे दी गई है। जाहिरा तौर पर विजय के सीने और सिर में गोली मारे जाने के निशान मिले हैं।

SSP (KNR) अनंत देव तिवारी का कहना है कि पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। रायपुरवा पुलिस Unnao में मौजूद है। पीड़ित परिवार ने करीबी लोगों पर संगीन इल्जाम लगे हैं। छानबीन की जा रही है। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।


Kanpur के D-2 गैंग लीडर अतीक का भाई था शफीक

70 के दशक में करीमलाला से जुड़ा था शफीक का गिरोह

90 के दशक में दाउद गिरोह से जुड़ गया था शफीक का गिरोह

आगरा की जेल में बंद है D-2 गैंग का सरगना अतीक अहमद

लंबे समय से UP Police को नहीं मिल रही थी शफीक की लोकेशन

नोट-----आगरा की जेल में बंद D-2 सरगना अतीक अहमद की ये लेटेस्ट फोटो खुफिया सूत्रों से प्राप्त की गई है।

Yogesh Tripathi


Uttar Pradesh के Kanpur Nagar और आसपास के जनपदों में करीब चार दशक तक आतंक के पर्याय रहे D-2 गिरोह के शातिर दिमाग Underworld Don शफीक की मुंबई में मौत होने की खबर आ रही है। पुलिस अफसरों और खुफिया सूत्रों की मानें तो शफीक की मौत हार्ट अटैक (Heart Attack) से पड़ने से हुई। शफीक पुणे की जेल से छूटने के बाद मुंबई में परिवार के साथ रह रहा था। Kanpur के कुलीबाजार निवासी शफीक कुछ साल पहले पुणे जेल से छूटा था। UP Police को लंबे समय से शफीक की कोई लोकेशन नहीं मिल रही थी। D-2 सरगना और शफीक का भाई अतीक अहमद आगरा की जेल में बंद है।

फहीम गैंग से 3 दशक तक चली D-2 की गैंगवार

कुलीबाजार निवासी शफीक का वालिद पहलवान था। नई सड़क निवासी शातिर बदमाश फहीम पहलवान और अकील के अब्बू भी पहलवानी करते थे। मूंछ की लड़ाई को लेकर दोनों के बीच 70 के दशक में गैंगवार पनप गया। इसके बाद दोनों के बेटों ने इस गैंगवार को आगे बढ़ाया। 70, 80, 90 के दशक में D-2 गिरोह के सरगना अतीक अहमद और नई सड़क निवासी फहीम पहलवान गैंग के बीच चली गैंगवार की जंगकिसी से छिपी नहीं है। जानकारों की मानें तो दोनों तरफ से करीब 100 से अधिक लोग मारे गए। यही वजह रही कि नई सड़क को "खूनी सड़क" भी कहा जाने लगा था।  पुलिस रिकॉर्ड में करीब तीन दर्जन मौतों का ही जिक्र है।

70 के दशक में करीमलाला से जुड़ा D-2 गैंग

वक्फ संपत्तियों पर कब्जा, रंगदारी, भाड़े पर हत्या और मादक पदार्थ की तस्करी के लिए कुख्यात D-2 गिरोह के जुर्म की कहानीकरीब चार दशक पुरानी है। 70 के दशक में करीमलाला गिरोह की अंडरवर्ल्ड में तूती बोलती थी। तब Kanpur के कई अपराधी युवक करीमलाला गिरोह से जुड़े। उसमें D-2 सरगना अतीक अहमद और शफीक भी शामिल थे।

नब्बे के दशक में दाउद से जुड़ा D-2 गिरोह

जानकार सूत्रों की मानें तो नब्बे के दशक में दाउद इब्राहिम गिरोह की तूती अंडरवर्ल्ड की दुनिया में बोलने लगी थी। शातिर दिमाग अतीक अहमद और शफीक ने देर नहीं की। अतीक अपने पांच भाइयों शफीक, बिल्लू, बाले, अफजाल और रफीक के साथ मिलकर यूपी में दाउद के लिए काम करने लगा। ये वो दौर था जब वक्फ बोर्ड की तमाम बेशकीमती संपत्तियों पर गिरोह ने कब्जा जमाया। कई बेगुनाह लोगों की जानें भी लीं। इसी दौर में D-2 गिरोह ने Kanpur समेत यूपी के कई जनपदों में मादक पदार्थों की तस्करी भी बड़े पैमाने पर शुरु कर दी।  

बिल्लू का Encounter और रफीक के Murder से टूटा गिरोह

वर्ष 2000 की शुरुआत होते ही Kanpur Police गिरोह पर कहर बनकर D-2 गिरोह पर टूट पड़ी। कोलकाता से रिमांड पर Kanpur लाए गए रफीक अहमद की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई। इल्जाम D-34 गैंग लीडर परवेज, बहार खान और गुलाम नबी पर आया। बहार खान को कुछ दिन पहले कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2005 में बर्रा के मेहरबान सिंह का पुरवा के पास पुलिस ने अतीक के भाई तौफीक अहमद उर्फ बिल्लू को Encounter में मार गिराया। बिल्लू को कई मामलों में सजा हुई थी और जेल से उसने पार्षदी के लिए पर्चा भी भरा था। सूत्रों की मानें तो बिल्लू गिरोह के लिए मादक पदार्थों की तस्करी का काम संभालता था। यही वजह रही थी कि वो भी स्मैक का लती हो गया था।

16 साल पहले इंदौर में पकड़ा गया था अफजाल

अतीक के भाई अफजाल को Kanpur के तेज तर्रार और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे तत्कालीन सब इंस्पेक्टर विनय गौतम ने इंदौर में पकड़ा था। कड़ी सुरक्षा के बीच अफजाल को विनय गौतम की अगुवाई में पुलिस Kanpur लाई थी। खुफिया सूत्रों की मानें तो अफजाल भी कुछ साल पहले जेल से छूट चुका है। बेहद गोपनीय तौर पर वो गैंग को मजबूत करने में जुटा है। चर्चा है कि परिवार की एक महिला फिलहाल बिखर चुके D-2 गिरोह को मजबूती देकर उसे ऑपरेट कर रही है। परिवार का एक युवा लड़के पर भी खुफिया की नजरे काफी दिनों से पैनी हैं।

80 के दशक में D-2 पर भारी पड़ा था फहीम गिरोह

77 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी थी। चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी की पराजय हुई और जनता पार्टी की सरकार बनी। इस सरकार ने नशाबंदी कर दी। पुलिस विभाग के बड़े सूत्रों के मुताबिक तब Kanpur में एक चर्चित IPS अफसर की तैनाती थी। उनके एक करीबी की Unnao जनपद में हत्या कर दी गई। हत्यारों को निपटाने के लिए तब उक्त चर्चित IPS अफसर ने फहीम पहलवान और अकील पर हाथ रख दिया। दोनों भाइयों ने इसका भरपूर लाभ उठाया और मादक पदार्थों की बिक्री कानपुर समेत कई जनपदों में शुरु कर दी। ये क्रम 80 के दशक में भी चला। जुर्म की दुनिया में अपनी जड़ेंगहरी करने के बाद फहीम गुट ने अतीक के कई लोगों को मार डाला। कई हत्याएं दिनदहाड़े की गईं। 32 साल पहले शहर में तैनात रहे इंस्पेक्टर ब्रजराज सिंह (जिनको लोग बघर्रा) नाम से भी बुलाते थे। उन्होंने फहीम को पकड़ा और उसकी गिरेबांन पकड़ घसीटते हुए ले गए। बस यहीं से फहीम गिरोह के अंत की शुरुआत हो गई और अतीक का D-2 गिरोह हावी होता चला गया।

इस तरह टूटा फहीम के मेयर बनने का ख्वाब

80 दशक के आखिर में नगर निगम के चुनाव हुए। कांग्रेस की केंद्र और यूपी में सरकार थी। खूंखार अपराधी फहीम पहलवान ने कांग्रेस की राजनीतिक छतरी ओढ़ रखी थी। तब जीते हुए पार्षद ही मेयर का चुनाव करते थे। करीब दो दर्जन मुस्लिम पार्षद चुनाव जीतकर आए। टाटमिल के पास एक होटल में फहीम ने सभी पार्षदों अपने पास बुला लिया और मेयर बनने के लिए लामबंदी शुरु कर दी। उसके पास कुछ पार्षद ही कम थे और उसका मेयर बनना पक्कामाना जा रहा था। एक पार्षद की बोली 5 से 10 लाख पहुंच चुकी थी। विक्रम सिंह तब Kanpur के SSP थे। फहीम पहलवान के करीबी और अंडरवर्ल्ड डॉन रहे हाजी मस्तान की आमदरफ्त भी Kanpur में थी। इस बीच मीडिया में एक बड़ी खबर फहीम पहलवान को लेकर आई। इस खबर ने कांग्रेस के हाईकमान को संजीवनी दे दी। यूपी सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित ने बड़े अखबार में छपी इस खबर को संज्ञान में लिया और तुरंत फहीम पहलवान को Arrest करने का निर्देश दिया। SSP विक्रम सिंह ने फहीम की गिरफ्तारी के लिए कई थानेदारों को लगा दिया। कांग्रेस को मौका मिला और श्रीप्रकाश जायसवाल को प्रत्याशी घोषित कर पार्षदों के जरिए उनका चयन करवा मेयर बनवाया।      

UPSTF को लगाया गया लेकिन सफलता SOG को मिली

D-2 गैंग लीडर अतीक ने नब्बे का दशक आते-आते अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद का हाथ पकड़ लिया और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद फहीम गुट के कई अपराधी मारे गए। इसके बाद करीब 15 साल तक अतीक गिरोह ने Kanpur समेत यूपी के कई शहरों में आतंक के बल पर अपराध का साम्राज्य खड़ा किया।

यही वजह रही कि उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) को D-2 गिरोह के खात्में के लिए लगाया गया। मौका पाकर अतीक अहमद ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) ज्वाइन कर शहर उपाध्यक्ष का पद ले लिया। लेकिन मीडिया में फजीहत के बाद BSP ने उसे पार्टी से निकाल दिया। STF की टीमें D-2 गिरोह के पीछे पड़ी रहीं। हीर पैलेस के पास मुठभेड़ हुई। जिसमें अतीक गिरोह के दो शूटर मारे गए और STF का एक कमांडों शहीद हो गया।  अफसरों ने शहर के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ऋषिकांत शुक्ला को D-2 गिरोह के सफाए की कमान सौंप दी। ऋषिकांत शुक्ला इससे पहले पूर्वांचल के बाहुबली माफिया सरगना अभय सिंह को शहर के कांग्रेसी नेता ताहिर के साथ कलक्टरगंज की नयागंज चौकी में तैनाती के दौरान Arrest कर अफसरों को भरोसेमंद सब इंस्पेक्टर बन चुके थे। ऋषिकांत शुक्ला ने महज कुछ साल में ही डी-2 गिरोह की कमर पूरी तरह से तोड़कर रख दी।

UNNAO के शुक्लागंज पर हैं खुफिया निगाह

शफीक की मुंबई में हार्ट अटैक से हुई मौत के बाद Unnao जनपद के शुक्लागंज में खुफिया की निगाहें लगी हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो वर्तमान समय में अतीक और उसके भाइयों के परिवार के कई सदस्य यहीं पर रह रहे हैं। चूंकि इस गिरोह के तार सीधे अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैं इस लिए खुफिया भी Alert है।