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  •  UP Police की गाड़ियों का काफिला अतीक को लेकर रवाना
  • Umesh Pal अपहरण केस में 28 मार्च को है अतीक की पेशी
  • सजा का ऐलान कर सकती है प्रयागराज की अदालत 
  • 1300 Km. का सफर तय कर कल प्रयागराज पहुंचेगा डॉन



Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के बहुचर्चित उमेश पाल Murder Case  में माफिया डॉन अतीक अहमद (चकिया) को लेकर UP Police की गाड़ियों का काफिला संडे की दोपहर साबरमती जेल से रवाना हो गया। अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में सभी कागजी कार्रवाई पूर्ण करने के बाद अतीक अहमद को ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया। वज्र वाहन समेत यूपी पुलिस की कई गाड़ियां अतीक को लाने के लिए जेल गेट पर सुबह से ही खड़ी थीं। कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से बाहर निकालने के बाद अतीक को वज्र वाहन में बैठाया गया।


 अतीक अभी तक साबरमती जेल की हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में बंद था। उसे जून, 2019 में साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया था। 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या कर दी गई। हत्याकांड में अतीक अहमद, उसकी पत्नी, बेटे के साथ-साथ कई शूटर्स को नामजद किया गया था। जिसके बाद से ही अतीक अहमद को Uttar Pradesh लाए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। रास्ते में UP Police और अतीक  अहमद का इम्तिहान कई बार होगा। सूबे के सबसे बड़े डॉन को लेकर Police Officer’s हर एंगल पर मंथन करने के बाद बेहद Alert हैं। UP Police को सबसे बड़ी आशंका इस बात की है कि डॉन रास्ते में खुद पर ही न हमला करवा ले।   


रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ

Umesh Pal (Murder Case) में अतीक से पूछताछ के लिए प्रयागराज पुलिस अतीक को लेकर यूपी आ रही है। हालांकि पुलिस को ट्रांजिट रिमांड उमेश पाल अपहरण कांड में मिला है। अपहरण का यह केस काफी सालों से कोर्ट में विचाराधीन है। प्रयागराज की कोर्ट इस मामले में 28 मार्च को फैसला सुना सकती है। ऐसे में कोर्ट के अंदर अतीक अहमद की मौजूदगी रहेगी। UP Police  संडे की सुबह 11.30 बजे के करीब साबरमती जेल पहुंची और फिर वहां प्रयागराज कोर्ट का वारंट जमा किया। उमेश पाल हत्याकांड में अतीक अहमद पर साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने अतीक अहमद समेत उनके परिवार लोगों के हत्या समेत कई संगीन धाराओं में FIR रजिस्टर्ड कर रक्खी है। गौरतलब है कि इस केस में अतीक के बेटे और शूटर्स फरार चल रहे हैं।


24 फरवरी 2023 को हुई थी उमेश पाल की हत्या

24 फरवरी 2023 को प्रयागराज जिले के धूमनगंज इलाके में BSP के Ex.MLA राजू पाल Murder Case के इकलौते गवाह उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड में अतीक और उसके भाई की साजिश का सुराग मिलने के बाद उसे यूपी लाए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उमेश पाल पर हुए हमले में उनके दो अंगरक्षकों की भी बदमाशों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। UP Police हत्याकांड से जुड़े दो शूटरों को Encounter में ढेर कर चुकी है। 

  • Holi से 24 घंटा पहले ही अनंत देव को मिला STF का अतिरिक्त चार्ज
  • Social Media पर अनंत देव को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही
  • पाठा के जंगलों में ददुआ और ठोकिया जैसे दुर्दांत डाकुओं को ढेर कर चुके हैं अनंत देव 
  • Kanpur के बिकरू कांड में उनकी भूमिका को लेकर उठी थी अंगुलियां
  • माफिया डॉन अतीक अहमद को गुजरात से जल्द लाने की भी अटकलें

Yogesh Tripathi

इलाहाबादी डॉन अतीक अहमद के दिल की धड़कने और छटपटाहट यूं ही नहीं बढ़ी हुई हैं। Social Media पर चर्चा है कि अतीक को गुजरात के साबरमती सेंट्रल जेल से लाए जाने की जिम्मेदारी एक ऐसे IPS Officer के कंधों पर डाली गई है, जिसने अनेक दुर्दांत दस्यु डकैतों को Encounter के दौरान "काल के गाल" में डाल दिया। 100 से अधिक Encounter उनके खाते में दर्ज हैं। वर्ष 2017 में वह देश के Top Five एनकाउंटर स्पेशलिस्ट में भी शामिल रहे लेकिन Kanpur में Bikru Case के खलनायक विकास दुबे ने उनके चमकते रेकार्ड को धूमिल कर दिया गया था। उन पर तमाम तरह की अंगुलियां तब उठी थीं लेकिन अब वही अनंत देव अतीक अहमद को लाने जा रहे हैं। 


क्राइम की दुनिया से लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। पहला यह कि अतीक अहमद साबरमती सेंट्रल जेल से सुरक्षित Uttar Pradesh आएगा या फिर रास्ते में उसे छुड़ाने का प्रयास किया जाएगा..? अतीक भागने का प्रयास करेगा या फिर अचानक पुलिस टीम पर हमला होगा...? इसी के साथ डॉन अतीक के आतंक का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा...? या फिर अतीक को ऐसी सजा दी जाएगी कि वह पूरी जिंदगी हर पल अपनों के लिए तड़पे...? संभावनाएं और कयासबाजी कई तरह की हैं लेकिन इसके साथ कुछ लोगों का यह भी मानाना है कि यदि ऐसा होता है तो समझिए कि खाकी के "अनंत" दाग भी धुल जाएंगे। 


उधर देर रात शासन ने Umesh Pal Murder Case में आरोपित अतीक के बेटे असद समेत पांच शूटरों के सिर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 5-5 लाख ₹ कर दी है। इनाम की राशि बढ़ाने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि STF किसी भी समय अतीक अहमद का "मिडिल स्टंप" गिरा सकती है। 


अनंत देव 2006 में PPS से प्रमोट होकर IPS Officer बने। उसके बाद उन्होंने STF के तत्कालीन SP/SSP अमिताभ यश की अगुवाई में दस्यु सम्राट ददुआ और अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया जैसे दुर्दांत डाकुओं को Encounter में ढ़ेर कर दिया। लंबे समय तक SSP Kanpur भी रहे। उसके बाद वर्ष 2020 में जब वह STF (DIG) थे तो उसी समय चौबेपुर थाना एरिया में गैंगस्टर विकास दुबे ने बिल्हौर सीओ Devendra Mishra समेत करीब आधा दर्जन से अधिक पुलिस वालों की दबिश के दौरान घेराबंदी कर उनकी हत्या कर दी। शहीद सीओ का एक पत्र और Bikru Case के अभियुक्तों के साथ वाली फोटो सोशल मीडिया पर Viral हुई तो  अनतदेव को शासन ने देर किए बगैर STF (DIG) के पद से हटा दिया। अनंत देव को इस केस में जांच का सामना करना पड़ा। अभी कुछ दिन पहले शासन ने उनको DIG (GRP) की जिम्मेदारी सौंपी है।

गौरतलब है कि Uttar Pradesh के प्रयागराज में Umesh Pal और उनके दो अंगरक्षकों की हत्या के बाद FIR में बाहुबली माफिया डॉन अतीक अहमद, उसकी बीवी और बच्चों का नाम रजिस्टर्ड होने के बाद शासन-प्रशासन ने चारो तरफ से शिकंजा कस रक्खा है। हत्याकांड में शामिल असद के ड्राइवर और एक अन्य शूटर को प्रयागराज पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है। बांदा में अतीक के "हमदर्द" जफर अहमद और उसके बहनों के घर पुलिस और खुफिया की टीमें निगाहबनी के साथ कई बार पूछताछ कर चुकी हैं। लेकिन तमाम कवायदाों के बाद भी असद का सुराग नहीं मिला। लखनऊ के फ्लैट से STF को असद का IPhone मिला है। उससे भी तमाम जानकारियां STF के हाथ लगी हैं। STF के ADG अमिताभ यश की अगुवाई में कई टीमें अतीक गैंग के शार्प शूटरों की तलाश कर रही हैं। यूपी और आसपास के राज्यों के साथ-साथ STF की एक टीम नेपाल भी छापेमारी के लिए पहुंची। काठमांडू समेत कई जगहों पर दबिश दी गई लेकिन असद का सुराग नहीं मिला।

धर अनंत देव को STF का अतिरिक्त चार्ज मिलते ही अटकलों का दौर शुरु हो गया। Social Media पर चर्चा है कि अनंत देव को रणनीति के तहत गुजरात की साबरमती जेल अतीक से पूछताछ और उसको Uttar Pradesh लाए जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। Media Report's की मानें तो STF की टीम संडे को गुजरात के अहदमदाबाद पहुंची है। Monday को एक बड़े Officer ने "वन टू वन" अतीक से पूछताछ की। प्रयागराज में पकड़े गए अतीक के करीबी सुधांशु त्रिपाठी उर्फ बल्ली पंडित को लेकर भी अतीक से पूछताछ की गई। कयास लगाए जा रहे हैं कि पूछताछ के दौरान कई तरह से अतीक के मनोबल को तोड़ने का भी प्रयास किया गया ताकि वह अपने बेटे और असद के बारे में सटीक जानकारी दे दे। माना जा रहा है कि पूछताछ अभी अगले कुछ घंटों और की जाएगी। इसके बाद अतीक को साबरमती जेल से यूपी लाने की कवायद Start होगी। 

वहीं www.redeyestimes.com (News Portal) को गुजरात के स्थानीय सीनियर जर्नलिस्ट ने बताया है कि उनसे जेलर की लगातार बातचीत हो रही है लेकिन अभी तक उन्होंने UPSTF के पहुंचने की बात से साफ इनकार किया है। यहां तक की जेलर ने पत्रकार से यह भी कहा कि अभी तक उन्हें किसी भी प्रकार की सूचना, मैसेज या फिर ईमेल नहीं मिला है।

 

  • तेजी से असर दिखा रही प्रदेश की योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति
  • दो ठेकेदारों के घर छापामारी, असलहा, कारतूस व लाखों का कैश बरामद
  • बुलडोजर की कार्रवाई से पहले अफसरों की मौजूदगी में पीटी गई मुनादी  


Yogesh Tripathi

अंतत: उत्तर प्रदेश शासन ने बांदा के माफिया कनेक्शन का खुलासा कर दिया। मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी की अगुवाई में मंडल कारागार में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी दो ठेकेदारों रफीकुस्समद और इफ्तिखार अली के घरों पर बाबा के बुलडोजर ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। देरशाम दोनों ठेकेदारों के घर पर पुलिस ने छापा मार कार्रवाई की और घर से लाइसेंसी असलहों के साथ भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया है। वहीं मंगलवार की सुबह बाबा का बुलडोजर एक्शन मोड पर आ गया और शहर के खाईपार और अलीगंज माेहल्लों माफिया के हमदर्दों के घर धराशायी कर दिए। पूरे मामले पर एसपी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा है कि कार्रवाई का सिलसिला लगातार चलता रहेगा और किसी मददगार को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई शहर के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।


मंगलवार की सुबह बांदा विकास प्राधिकरण और नगर पालिका की संयुक्त टीम के साथ भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अफसरों की अगुवाई में बाबा के तीन बुलडोजर सड़क पर निकले तो अासपास के इलाकों में हड़कंप का माहौल हो गया। बुलडोजर के साथ पैदल चल रही पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की टीम सबसे पहले शहर के खाईपार माेहल्ला स्थित पीडब्लूडी ठेकेदार इख्तिखार अहमद पुत्र इम्त्याज अहमद के घर पहुंची और वहां काईवाई शुरू कर दी। एतिहात के तौर पर अगल बगल के घरों को खाली कराया गया और घर के अगले हिस्से पर बुलडोजर गरजने लगा। 

इख्तिखार के घर के बाहर बनी दुकान और बाउंड्रीवाल को धराशायी कर दिया गया और बुलडोजर काफिला आगे बढ़ गया। इसके बाद पूरा लाव लश्कर ईदगाह रोड स्थित ठेकेदार रफीकुस्समद निर्माणाधीन शाॅपिंग काम्प्लेक्स पर पहुंचा। ऐतिहाती कदम उठाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार ने माइक पर उद्घोषणा की और अगल बगल के मकानों को खाली कराने की हिदायत दे डाली। 


कार्रवाई पूरी होने के बाद बुलडोजर निर्माणाधीन शॉपिंग कांप्लेक्स पर भी गरजने लगा। इस मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा एसडीएम सदर सुरभि शर्मा, सीओ गवेंद्र पाल गौतम, शहर कोतवाल श्यामबाबू शुक्ला समेत कई थानों की फोर्स और पीएसी बल तैनात रहा। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया है कि रफीकुस्समद और इख्तिखार अहमद आपस में सगे रिश्तेदार हैं और दाेनों ही माफिया मुख्तार अंसारी और उसके परिजनों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, शेल्टर उपलब्ध कराने के साथ अन्य कई तरह की मदद की जाती रही है। जिसके संबंध में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

ढाेल बजाकर गिराया अवैध निर्माण

शहर के खाईपार और ईदगाह रोड स्थित दो ठेकेदारों के घराें पर बुलडोजर गरजा तो शहर के आसपास चर्चा का माहौल बना रहा। पूरे लाव लश्कर के साथ पहुंची पुलिस प्रशासन की टीम ने सबसे पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए ढोल बजाकर मुनादी कराई और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार ने माइक पर एनाउंसमेंट करके अवैध निर्माण गिराए जाने का ऐलान किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने यह भी ऐलान किया कि अगल बगल के घर के लोग भी अपना घर खाली कर दें, ताकि किसी को बेवजह नुकसान न उठाना पड़े। सिटी मजिस्ट्रेट के ऐलान के बाद बाबा का बुलडोजर बेरोक टोक गरजने लगा।

नकदी और लाइसेंसी असलहे बरामद

शहर के अलीगंज स्थित ठेकेदार रफीकुस्समद और इख्तिखार अहमद के घर पर पुलिस ने देररात छापा मारा और लाखों का कैश व असलहों के साथ भारी मात्रा में कारतूस बरामद किया। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन की अगुवाई में पुलिस टीम ने छापा मारा। एसपी अभिनंदन ने बताया है कि दोनों ठेकेदारों के घर से एक-एक लाइसेंसी दोनाली बंदूक और करीब एक सैकड़ा से अधिक कारतूस बरामद किए गए हैं। बताया है कि शस्त्र लाइसेंस की शर्तों के अनुसार एक शस्त्र पर 40 कारतूस रखे जा सकते हैं, जबकि ठेकेदार रफीकुस्समद के पास 60 और इख्तिखार अहमद के घर से 47 कारतूस पाए गए हैं। शस्त्र लाइसेंस की शर्तों के विपरीत अधिक कारतूस मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं रफीकुस्समद के घर से करीब सात लाख रुपए कैश बरामद किया गया है, जिसके संबंध में वह ठोस जानकारी नहीं दे सका। पुलिस ने आयकर विभाग के अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी है।

Harshit Mishra 

 

मॉडलिंग की दुनिया में कब आना हुआ...? 

हमेशा से ही यह मेरे लिए पहला पैशन रहा है। मैंने कंप्यूटर साइंस से B.Tech किया। बचपन में डीडी नेशनल चैनल के सीरियल मुझे काफी प्रभावित करते थे। मेरा रूझान इस क्षेत्र में ही रहा है। इस सपने को पूरा करने के लिए ही पेशे से इंजीनियर होने के साथ- साथ साल 2017 में मैंने अपने एक्टिंग / मॉडलिंग करियर की शुरुआत की । मुझे बीटेक - कोर्स के दौरान यह एहसास हो गया था कि मैं 9 से 5 वाली जॉब के लिए नही , क्रिएटिविटी के लिए बनी हूं"

 

अब तक का करियर की यात्रा कैसा रहा है...? 

2017 में इंदौर के 'क्रिएटिव विजन प्रोडक्शन हाउस' से शुरुआत की थी।  अमिताभ चौहान सर ने मुझे बेसिक ट्रेनिंग दी थी कैमरे के सामने करने की।  उसके बाद मैंने डांस की, वर्कआउट की, एक्टिंग की ट्रेनिंग ली, मैंने का पैजेंट शो, स्टेज शो, रैंप शो, मैगजीन शूट्स किए हैं।  मैं  करते हुए सीखने पर यकीन रखती हूं। कानपुर गॉट टैलेंट, कानपुर सीजन के सुपरस्टार -2, मिस्टर मिस मिसेज टीन एंड किड्स इंडियाज फैशन रेडियंस,शुभांजलि, मिस्टर मिसेज मिसेज एंड किड्स सिग्निफिकेंट फेस ऑफ इंडिया 2023 और भी कई शो का हिस्सा रही हूँ। कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए तैयारी चल रही है। मैं आशा करती हूं कि मैं आगे और बेहतर काम कर सकूं।


वैसे तो मैं निज़ी जिंदगी के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नही करती  पर मेरी फैमिली मेरे इस करियर के चुनाव के लिए कभी भी बहुत सहयोगी और खुश नही रही। कभी कभी ये निराशाजनक हो जाता है जब  पूरा परिवार आपके साथ न हो । अपने आपको मजबूत रखते हुए सिर्फ काम पर फोकस किया। अब मैं ज्यादा नही सोचती हूं। इन सब चीजों को नजरअंदाज करती हूँ और अपने मुकाम को हासिल करने के लिए मेहनत कर रही हूँ।

आपका रोल मॉडल कौन रहा है...?

रोल मॉडल तो  नही कहूंगी पर जो इस सफर में पूरी तरह से हमारे साथ रहेंगे और हमेशा  रहेंगे वो हैं हमारे ' भगवान '  इनके बिना मैं बेहतर नहीं कर सकती।  बाकी कुछ लोग हैं जिनकी दरियादिली , अच्छा काम, मेहनत दिल को प्रभाव करने वाली होती है।  जैसे - 'स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत';  'मल्लिका सिंह';  'दर्शन कुमार' और आदि ।  मैं समझती हूं इन लोगो से काफी कुछ बेहतर सीख सकता है।

एक्टिंग के अलावा क्या शौक रखती हैं ? 

खुद में रहना, गाने सुनना और एन्जॉय करना पसंद करती हूं  और स्पिरिचुअलिटी के बारे में, ओल्ड स्टोरीज,  टैरो रीडिंग्स का अध्ययन और रिसर्च करना काफी पसन्द करती हूं। मैं उभरते हुए कलाकारों से कहना चाहूंगी कि हम सभी अपने में बेहतर हैं। अपने सपनों को किसी के लिए भी बलिदान ना करे। जितना हो सके अपना बेस्ट दें और  'मेंटल हेल्थ' को कभी भी नजरंदाज ना करें। करियर पर फोकस के साथ- साथ जिंदगी में खुश रहना भी बहुत जरूरी है।

माफिया डॉन अतीक के "हमदर्द" जफर के घर पुलिस अफसरों का छापा
जफर के माफिया कनेक्शन पर तथ्य जुटाने में लगी खुफिया एजेंसी
काम नही आई जफर की सफाई, धीरे धीरे तेज हो रही पुलिसिया कार्रवाई
Yogesh Tripathi
Uttar Pradesh के प्रयागराज में BSP (MLA) राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उनके दो गनरों की हत्या के मामले में माफिया डॉन अतीक चकिया के Banda कनेक्शन पर अब पुलिसिया कार्रवाई तेज होती दिख रही है। Monday Night पुलिस के आला अफसर पूरे लाव-लश्कर के साथ जफर की बहनों के छावनी और गुलरनाका स्थित घर पहुंच। पुलिस ने काफ़ी देर तक छानबीन की। हालांकि Police Officer इस सम्बंध में कुछ भी बोलने से साफ-साफ बचते नजर आए।  
माफिया डॉन अतीक अहमद की पत्नी और उसके बेटों को अपने घर में किराए पर शरण देकर पचड़े में फंसे पत्रकार जफर अहमद की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। जफर का प्रयागराज के चकिया स्थित मकान धराशायी होने के बाद अब प्रशासन की नजर बांदा कनेक्शन पर लग गई हैं। दो दिन पहले जहां जफर की स्विफ्ट डिजायर कार समेत दो गाड़ियों को यातायात पुलिस की क्रेन ने उठा लिया था, वहीं जफर की बहनों के घर बांदा विकास प्राधिकरण की ओर नोटिस भेज कर आगाह किया जा चुका है। हालांकि पुलिसिया सूत्र बताते हैं कि सोमवार को जफर के बांदा पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन वह यहां नहीं पहुंचा। जिसके बाद पुलिस ने शिकंजा कसना तेज कर दिया। 
Monday Night पुलिस अधीक्षक अभिनन्दन की अगुवाई में भारी पुलिस बल जा पहुंचा और अफसरों ने जफर की बहनों के घर में जाकर पूछताछ की है। हालांकि पुलिस अभी तक पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। उधर प्रशासन की ओर से जफर की सम्पतियों को जांच के लिए नगर पालिका, विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग की टीम लगाई गई है। सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में गोपनीय बैठक किये जाने और आगामी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार किये जाने की खबर है। 




  • 15 सितंबर 2004 को में BJP MLA पर हुआ था लाठीचार्ज 
  • लाठीचार्ज में विधायक का पैर टूटा था, कई कार्यकर्ता हुए थे घायल 
  • बिजली कटौती के खिलाफ भाजपा के विधायक कर रहे थे प्रदर्शन
  • मामले में 19 साल बाद विधान सभा की विशेष अदालत ने दी सजा 
उत्तर प्रदेश विधान सभा की विशेष अदालत में बावर्दी झुके इन जवानों के कंधों से क्या UP Police का इकबाल बुलंद होगा...? 

Yogesh Tripathi

आजादी के बाद हमें अपना संविधान मिला...संवैधानिक व्यवस्थाएं मिलीं...अधिकारों की पोटली के साथ-साथ दायित्वों का थैला भी मिला...शासन प्रशासन को लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के रूप में संवैधानिक स्तंभ भी मिले... हम भारत के लोगों को संवैधानिक अधिकारों का तोहफा मिला। वहीं कर्तव्य निर्वाहन की फेहरिस्त भी मिली। सबसे बड़ी ताकत आमजन को सरकारें बनाने व उसे बदलने की शक्ति मिली लेकिन असल ताकत तीनों संवैधानिक संस्थाओं के पास ही निहित रही। हाल में ही Uttar Pradesh की विधान सभा में एक विशेष अदालत लगी। जिसमें Police Officer's और उनके मातहतों के साथ-साथ PPS की सेवा देने के बाद IAS की सेवा से रिटायर्ड हो चुके अधिकारी को एक दिन के कारावास की सजा मुकर्रर की। यह घटना वाकई बेहद चौंकाने वाली थी। साथ में एक बडा संदेश देने वाली भी ।

तत्कालीन SO ऋषीकांत शुक्ला (वर्तमान में CO)

हमारे "माननीयों" (विधान सभा सदस्यों और संवैधानिक पदासीन जनप्रतिनिधियों को इससे अपमान का बदला लिया जाने का गर्व छलका हो, उनकी जीत हुई हो, लेकिन ऐसे हालात क्यूं पनपते हैं...? आगे से ऐसी स्थितियां न उत्पन्न हों इसका रास्ता भी इन्हें ढूंढना होगा। वहीं पुलिस प्रशासन के लिए भी यह एक संदेश है कि वे भी ऐसी ताकत का प्रयोग दुर्दांत अपराधियों एवं राष्ट्र विरोधी तत्वों पर ही प्रयोग करें। अंत में एक बात और देश में दुर्दांत अपराधी, डकैत, राष्ट्रविरोधी तत्व कैसे सदनों में सुशोभित हो रहे हैं...? उनका ठिकाना सिर्फ जेल है और वहीं पर होना चाहिए। माननीय (जनप्रतिनिध) अपना कार्य करें। मीलार्ड न्याय दें, सजा दें तथा कार्य पालिका अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करें। यदि विधान सभा, लोकसभा, (न्यायपालिका की भूमिका) निभाएगी तो ज्यूडीशियरी आखिर क्या करेगी...? क्या इससे पुलिस का मनोबल कमजोर नहीं होगा...? 19 साल पहले जिस समय लाठीचार्ज की यह घटना हुई थी उस समय अब्दुल समद (PPS Officer) थे, मतलब राजपत्रित अधिकारी, अब्दुल समद के बाद ऋषिकांत शुक्ला (Statiom Officer) के पद पर थे बाकी चार पुलिस कर्मी कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। क्या सारा दोष इन्हीं पुलिस कर्मियों का था...??? SSP/SP की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए थी कि आखिर किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर लाठीचार्ज बीजेपी विधायक और उनके समर्थकों पर किया गया।  

तत्कालीन कांस्टेबल विनोद मिश्रा (वर्तमान में SHO)

जरा सोचिए एक Police Officer 2005 में Kanpur के दुर्दांत (D-2 गैंग के सूचीबद्ध क्रिमिनल) रफीक को कोलकाता Arrest करने के लिए पहुंचता है तो वहां उसकी मुठभेड़ होती है। तंग गलियों में स्वचालित असलहों से गोलियां दागी जाती हैं। ये ईश्वर की ही कृपा थी कि किसी गोली पर Police Officer का नाम नहीं लिखा था...जाबांज अफसर उस अपराधी को अपनी छोटी सी पुलिस टुकड़ी के बल बूते उसे Arrest कर लेता है। कोलाकात की कोर्ट में पेशी कर अदालती कार्यवाही के बाद किसी तरह Kanpur लेकर पहुंचता है। अखबारों में सुर्खियां तो मिलती हैं लेकिन किसी माननीय या नेता ने यह सोचा है कि यदि बदमाश की गोली उस Officer के लग जाती तो फिर क्या होता...? उसके परिवार का क्या होता...? क्या तब भी इंसाफ दिलाने के लिए ऐसे ही "विधान सभा" में विशेष अदालत लगाई जाती...? शायद नहीं....कोलकाता जाने का पैसा क्या सरकार और शासन ने दिया होगा ...? बिल्कुल नहीं...मुखबिरों के संजाल पर जो खर्चा आया होगा क्या वह भी शासन से मिला होगा...? कतई नहीं...

तत्कालीन विधायक सलिल विश्नोई पर लाठीचार्ज करते पुलिस कर्मी

UP Police के इस Officer को वर्ष 2002 में कलक्टरगंज थाने की नयागंज चौकी में तैनाती मिली। उस समय पुलिस की संचार प्रणाली आज की तरह बेहतर नहीं थी। स्मार्ट फोन नहीं थे। सर्विलांस सिस्टम का प्रयोग तब अधिकांशत: STF ही करती थी। शहर के SSP थे राजेंद्र पाल सिंह (R.P Singh) चार दिन पहले ही सेवानिवृत हुए हैं। चौकी इंचार्ज को जरिए मुखबिर सूचना मिली कि पूर्वांचल के एक बड़े गिरोह की शहर में मौजूदगी है। गिरोह जेलर की हत्या करने आया है। लग्जरी गाड़ियों से गिरोह के लोग थोड़ी देर में निकलेंगे। लेकिन चौकी इंचार्ज ने देरी किए बगैर ही अपने चार सिपाहियों के साथ कार की घेराबंदी कर ली। मुठभेड़ के बाद सभी की गिरफ्तारी हुई। थाने में उतरते ही पूर्वांचल के इस बाहुबली के तेवर से न सिर्फ बड़े-बड़े अफसरों ने पसीना छोड़ दिया बल्कि मीडिया भी उसके तू-तड़ाके से बैकफुट पर आ गई। यह बाहुबली कोई और नही अभय सिंह था। जो बाद में अयोध्या से विधायक भी बना। अभय सिंह कुछ समय पहले ही बाहुबली धनंजय सिंह पर कातिलाना हमला करके फरार हुआ था। अभय सिंह को छुड़ाने के लिए पूरी रात हर राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं के फोन घनघनाते रहे। दूसरे प्रांत के दो पूर्व मख्यमंत्रियों तक ने अभय की रिहाई के लिए उस समय फोन किया था। जरा सोचिए उस समय समय उस Officer के दिल पर क्या बीती होगी...? जिसे उसने जान की बाजी लगाकर पकड़ा था, और यदि न पकड़ता तो वह एक बड़ी वारदात को अंजाम देकर भाग निकलता। 

तत्कालीन SSP से इस बाहुबली का संवाद भी काफी कड़क था। संवाद से पहले उसे शहर की मशहूर लस्सी पिलाई गई फिर इंसपेक्टर के कक्ष में ही गिरदा मंगवाया गया ताकि वह माफिया आराम से बैठकर बातचीत कर सके। करीब-करीब सभी राजनीतिक दलों के आकाओं का फोन आने के बाद पुलिस विभाग के मातहत लाचार हो गए। लिखापढ़ी कर कोर्ट में पेशी तो की गई लेकिन माफिया की आवभगत किसी दामाद से कमतर नहीं थी। अभय सिंह के साथ मुख्तार अंसारी का सगा भांजा मोहम्मद ताहिर भी Arrest हुआ था...SSP के यह कहने पर लोकल हीरो को लॉकअप से बाहर लाकर आवभगत करो...इसके बाद ताहिर के साथ जो हुआ वो लिखा नहीं जा सकता...लेकिन अभय का कुछ भी नहीं बिगड़ा था. आखिर क्यूं...? क्यों कि न सिर्फ तमाम माननीय बल्कि उस समय दो प्रांतों के ताकतवर मुख्यमंत्रियों के फोन घनघनाए थे...सोचिए तब क्या बीती होगी उस पुलिस अधिकारी के दिल पर...?

दरअसल इस Officer का नाम ऋषिकांत शुक्ला है। वर्तमान में उनकी तैनाती क्षेत्राधिकारी सफीपुर (उन्नाव) के पद पर है। ऋषिकांत शुक्ला ने अंडरवर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम से ताल्लुक रखने वाले D-2 गैंग के न सिर्फ नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म किया बल्कि शहर और प्रदेश के तमाम कुख्यात बदमाशों के Encounter भी किए। इसमें वर्ष 2004 को किदवईनगर थाना एरिया के तार बंगलिया रोड पर मुन्ना बजरंगी गैंग के दो शार्प शूटरों अमित राय और चिन्टू का भी एनकाउंटर शामिल है। ये दोनों अपराधी मुख्तार अंसारी गिरोह से भी जुड़े थे। पूर्वांचल की एक जेल में इन दोनों शूटर्स ने एक पार्षद को 26 गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद दोनों ने शहर में पनाह ले ली थी।

 क्या कहते हैं सीनियर जर्नलिस्ट ...?

 

अनूप बाजपेयी (पूर्व अध्यक्ष, कानपुर प्रेस क्लब)

"विधायिका और कार्यपालिका के बीच में हमेशा संतुलन बनाए रखने वाली न्यायपालिका की अनुपस्थिति इस पूरे प्रकरण में समझ से परे है। ये पूरा प्रकरण पुलिस के बुलंद इकबाल को शर्मशार करने वाला है। क्यों कि बावर्दी फोर्स के झुके कंधे कभी किसी को पसंद नहीं आते हैं। इस पूरे प्रकरण में सजा सुनाने और सजा भोगने दोनों पक्षों को पता है कि असली दोषी कौन था।...? "प्यादों" को कटघरे में खढ़ा करना पचा नहीं। ये सब एक Formality जैसा लगा। आशा करते हैं कि भविष्य में कभी ऐसा खराब दृष्य दोबारा देखने को नहीं मिलेगा। इसके लिए शासन को एक मजबूत कानून बनाना होगा। Police Officer's को भी चाहिए कि वह सत्ता के दबाव में अपने कर्तव्यों और कार्यशैली को बिल्कुल भी न भूलें..."

 

 

 

 

 

शैलेंद्र शर्मा (फ्री लांस जर्नलिस्ट)
" हमारे संविधान विदों ने देश के लिए जो संविधान बनाया, उसमें कोई भी व्यक्ति विशेष नहीं है। सवाल यह उठता है कि तब "विशेषाधिकार" की व्यवस्था क्यों बनीं...?Kanpur में 15 सितंबर 2004 को तत्कालीन BJP MLA सलिल विश्नोई के साथ जो हुआ, क्या उसके लिए सिर्फ और सिर्फ छोटे अधिकारी ही दोषी हैं..? तत्कालीन SSP/SP की भूमिका जांची गई...? बल प्रयोग का आदेश आखिर किसने दिया था...? निश्चित ही विधायक सलिल विश्नोई के साथ जो बल प्रयोग हुआ, उसे कम कर कानून की सम्मत धाराओं में Arrest किया जा सकता था। ऐसे प्रकरण दोबारा न हो पाएं इसके लिए ठोस नियम-कानून बने। विरोध करना जनप्रतिनिधि का हक है,यदि वे इसमें हद तोड़ते हैं तो पुलिस-प्रशासन को कानून सम्मत कार्यवाही करनी चाहिए साथ ही प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना चाहिए। Police को 24 घंटे लगातार कार्य करना पड़ता है। इसका असर उसकी कार्यशैली पर भी पड़ता है। रही बात नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के बयान की तो वह ऐसा इस लिए बोल रहे हैं क्यों कि घटना उनके पिता स्वर्गीय मुलायम सिंह के कार्यकाल में हुई थी। यदि ऐसा ही उनकी पार्टी के किसी विधायक या उनके साथ पुलिस करती तब भी क्या वे पुलिस के पक्ष में ही खड़े होते...? ऐसे प्रकरणों का हल ढूंढना होगा, सियासत से कुछ हासिल नहीं होगा। शासन को भी पुलिस की समस्याओं, कार्य दशाओं, सियासी दबाव को समझना होगा। वो भी इंसान हैं, हमारे और आपके घर के ही सदस्य हैं। हर बात को प्रेस्टीज इश्यू नहीं बनाना चाहिए।"