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  • BJP की पहली लिस्ट में अधिकांशत: पुराने चेहरे
  • कन्नौज से सुब्रत पाठक और उन्नाव से साक्षी महराज
  • फतेहपुर से वर्तमान सांसद साध्वी निरंजन ज्योति प्रत्याशी
  • संतकबीर नगर की सीट से निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद उम्मींदवार
  • लखनऊ से राजनाथ सिंह को हाईकमान ने प्रत्याशी बनाया


 

Yogesh Tripathi

Lok Sabha Election 2024 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार शाम को प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में कानपुर लोकसभा के प्रत्याशी का नाम नहीं है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी का टिकट हाईकमान ने काट दिया है। वहीं कानपुर से सटी अकबरपुर (कानपुर) लोकसभा सीट से निवर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) पर हाईकमान ने एक बार फिर विश्वास जताते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है। सियासी गलियारों में पचौरी का नाम पहली सूची में फाइनल न होने पर तमाम तरह की आशंकाएं और चर्चाएं जोरों पर हैं।


चर्चा है कि Kanpur के एक "माननीय" और व्यापारी नेता के नामों पर आलाकमान काफी गंभीर है। "माननीय" के तार सीधे दिल्ली वाले सिस्टम से जुड़े हैं जब कि व्यापारी नेता के लिए संगठन और संघ लामबंद है। व्यापारी नेता करीब तीन दशक से भाजपा से जुड़े हैं। कई बार विधायकी के चुनाव में उनके नाम की चर्चाओं ने जोर पकड़ा लेकिन टिकट नहीं मिल सका। 90 के दशक में यह व्यापारी नेता सत्यदेव पचौरी के साथ लोहा व्यापार मंडल के महामंत्री हुआ करते थे। तब सत्यदेव पचौरी लोहा व्यापार मंडल के अध्यक्ष हुआ करते थे। जानकारों की मानें तो तो इन दो नामों को लेकर हाईकमान काफी विचार-विमर्श कर रहा है। संभावना है कि इन्हीं दोनों में से किसी का नाम देर-सबेर Final हो सकता है। गौरतलब है कि www.redeyestimes.com (News Portal) ने पांच दिन पहले ही सत्यदेव पचौरी की टिकट कटने को लेकर खबर प्रकाशित की थी। 

BJP की पहली लिस्ट में Uttar Pradesh से इन प्रमुख सीटों पर हाईकमान ने प्रत्याशी Final किए हैं। West Zone में मुज़फ़्फ़रनगर सीट से कद्दावर नेता संजीव बालियान को प्रत्याशी बनाया गया है। नगीना से ओम कुमार, रामपुर सीट से घनश्याम लोधी, अमरोहा से कंवर सिंह तोमर, भारी विरोध के बाद भी नोएडा से वर्तमान सांसद महेश शर्मा, मथुरा से हेमा मालिनी , आगरा से SP Baghel, एटा सीट से राजवीर सिंह, खीरी से केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा (टेनी), सीतापुर से राजेश वर्मा, हरदोई लोकसभा से जय प्रकाश रावत, उन्नाव से साक्षी महाराज, मोहनलालगंज सीट से कौशल किशोर ,लखनऊ सीट से केंद्रीय रक्षा मंत्री और वर्तमान सांसद राजनाथ सिंह , कन्नौज से सुब्रत पाठक, अकबरपुर से भोले सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। 

Bundelkhand Zone में झाँसी सीट से अनुराग शर्मा, हमीरपुर- पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, फ़तेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति को हाईकमान ने प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि अयोध्या से लल्लू सिंह, श्रावस्ती से साकेत मिश्रा , बस्ती से हरीश दिवेदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर से रविकिशन शुक्ला, संतकबीर नगर सीट से प्रवीण निषाद, जौनपुर सीट से कृपाशंकर सिंह, चंदौली लोकसभा सीट से MN Pandey समेत 51 प्रत्याशी BJP ने घोषित किए हैं। 

 

  • लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शह-मात का दौर Start
  • Congress के वजीरने बढ़ाई BJP की बेचैनी
  • कांग्रेस प्रत्याशी के बाद बीजेपी फाइनल करेगी प्रत्याशी का नाम
  • बड़े Media House ने BJP प्रत्याशी को लेकर किया सर्वे
  • सर्वे में सबसे ऊपर सतीश महाना का नाम
  • 51 फीसदी लोगों ने किया सतीश महाना के पक्ष में Vote


Yogesh Tripathi

Lok Sabha Election 24 का सियासी पाराचढ़ने लगा है। कांग्रेस और सपा के गठबंधन से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाईकमान भी चिंतित है। सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav ने तो तमाम सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी कर दी है। गठबंधन के तहत Akhilesh Yadav ने कांग्रेस को सूबे में 17 सीटें दी हैं। इन 17 सीटों में एक सीट Kanpur भी है। कानपुर से कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा...? यह फिलहाल किसी को नहीं मालुम है लेकिन शहर के एक दिग्गज ने सभी की धड़कने बढ़ा दी हैं। ये दिग्गज कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और बिहार कांग्रेस के प्रभारी Ex.MLA अजय कपूर हैं। लखनऊ और दिल्ली में चर्चा है कि Congress अपने इस वजीर को चुनाव मैदान में उतार सकती है। अजय कपूर संभावित प्रत्याशिता की दावेदारी में अन्य लोगों से काफी आगे हैं। देर-सबेर हाईकमान उनके नाम पर अपनी फाइनल मोहर लगा सकता है। www.redeyestimes.com (News Portal) ने इस बाबत उत्तर प्रदेश (कांग्रेस) के मीडिया प्रमुख डॉक्टर चंद्रप्रकाश राय से जब बातचीत की तो उन्होंने कहा कि अभी कानपुर सीट पर किसी का नाम फाइनल नहीं हुआ। लोकसभा प्रत्याशी का नाम दिल्ली में हाईकमान तय करेगा।

यूं तो कानपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस के कई नेता टिकट मांग रहे हैं लेकिन मजबूत और ठोस दावेदारी अभी तक कोई नहीं कर सका है। सभी अपने-अपने आकाओं के जरिए दिल्ली-लखनऊ में पैरवी करवा रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान इस बार Kanpur सीट को लेकर खासा गंभीर है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि Ex.MLA अजय कपूर के नाम पर खासा मंथन किया जा रहा है। अजय कपूर के नाम पर हाईकमान कितना गंभीर है...? इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि तीन दिन पहले जब Rahul Gandh की भारत जोड़ो न्याय यात्राशहर से निकली थी तो खुद Rahul Gandhi ने अजय कपूर को बुलाकर अपने वाहन में बैठाया और साथ लेकर चले। शायद शहर कांग्रेस कमेटी के लिए Rahul Gandhi का यह बड़ा संकेत था। दिल्ली में हलचल के बाद अब चर्चा कानपुर लोकसभा क्षेत्र में भी कांग्रेसी कर रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि पिछले दो दिनों से अजय कपूर भी दिल्ली में ही हैं। उनके Right & Left Hand लोगों ने पुराने कार्यकर्तां की चौखट पर दस्तक भी देना Start कर दिया है।

कांटे से कांटा निकालने की रणनीति बना रही है BJP

उधर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी कमर कस ली है। देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान ने कानपुर लोकसभा सीट पर BJP से प्रत्याशिता को लेकर एक सर्वे कराया है। इस सर्वे में एक दिग्गज नेता का नाम सबसे ऊपर है। ये नाम कोई और नहीं बल्कि भाजपा के कद्दावर नेता और विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना का है। सतीश महाना को सर्वे में 51 फीसदी वोट मिले। BJP हाईकमान भी इस बड़े Media House  के सर्वे को लेकर न सिर्फ गंभीर है बल्कि मंथन भी कर रहा है कि आखिर प्रत्याशी किसे बनाएं...? वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी 70 की आयु पार कर चुके हैं। हालांकि नमो एप पर वह सबसे चर्चित और अच्छे सांसद हैं। नमो एप पर उनकी रैंकिंग टॉप पाइव में है। हाईकमान को सत्यदेव पचौरी के मिजाज को भी बखूबी जानता है।

 

अब देखना ये है कि बीजेपी Kanpur की सीट से किसे प्रत्याशी बनाएगा...? सत्यदेव पचौरी या फिर सतीश महाना...? हालांकि सतीश महाना की तरफ से अभी तक कोई दावेदारी खुलकर सामने नहीं आई है। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि Congress ने वजीर अजय कपूर को उम्मींदवार घोषित किया तो फिर BJP किसे अपना बादशाह बनाएगी।...? BJP ने यदि सतीश महाना को प्रत्याशी बनाया तो चुनावी दंगलदेखने लायक होगा। वजह ये है कि सतीश महाना और अजय कपूर की आपस में रिश्तेदारी है। शायद यही वजह है कि BJP ने कांटे से कांटा निकालने की रणनीति बनानी अभी से Start कर दी है। देखना अब ये दिलचस्प होगा कि बीजेपी कानपुर सीट पर सत्यदेव पचौरी को रिपीट करती है या फिर सर्वे को गंभीरता से लेते हुए सतीश महाना को प्रत्याशी बनाती है। या फिर दो पुराने दिग्गजों की नूराकुश्ती में कोई तीसरा बाजी मारता है...? क्यों कि कानपुर सीट से प्रबल दावेदारी BJP के एक चर्चित विधायक भी कर रहे हैं।  

कभी Congress का मजबूत किला था Kanpur

Kanpur कभी कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था लेकिन वर्ष 89 के लोकसभा चुनाव में कम्युनिस्ट नेत्री सुभाषिनी अली ने कांग्रेस के इस किले में सेंध लगा दी। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद केसरिया भगवा लहराया और कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण कई बार चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। समय ने एक बार फिर करवट बदली और कांग्रेस ने पूर्व मेयर श्रीप्रकाश जायसवाल को टिकट दे दिया। श्रीप्रकाश जायसवाल ने बीजेपी से यह सीट छीनकर वापस कांग्रेस को दे दी। 2009 में श्रीप्रकाश जायसवाल जब चुनाव जीतकर संसद पहुंचे तो कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें कोयला मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया।

Modi लहर में फिर हार गई Congress

2014 की मोदी लहर में BJP ने इस सीट से वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को चुनाव के मैदान में उतारा। मुरली मनोहर जोशी ब्राम्हण बाहुल्य कानपुर सीट से भारी वोटों के अंतराल से जीते। श्रीप्रकाश जायसवाल चुनाव हार गए। 2019 में BJP ने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के मंत्री और गोविंदनगर से विधायक सत्यदेव पचौरी को प्रत्याशी बनाया। सत्यदेव पचौरी ने 2019 के चुनाव में श्रीप्रकाश जायसवाल को भारी मतों से हराया।

तीन विधान सभा में हैं अजय कपूर का तगड़ा Network

अजय कपूर की प्रत्याशिता के पीछे कांग्रेस हाईकमान ने कई तरह के फीडबैक लिया हैं। राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद बिहार का प्रभार मिला तो अजय कपूर ने बेहद संजीदा ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया। साथ ही साथ वह कानपुर में भी Active रहे। तीन बार विधायक रहे अजय कपूर का Network शहर की तीन विधान सभाओं में ठीक है। किदवईनगर जहां से वह लगातार दो बार हारे हैं। गोविंदनगर और कैंट विधान सभा। पंजाबी होने के साथ-साथ व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग भी उनके परिवार से जुड़ा है। नब्बे के दशक में अजय कपूर ने सभासद का चुनाव जीतकर अपने सक्रिय राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी। उसके बाद वह गोविंदनगर सीट पर लगातार भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री बालचंद्र मिश्रा से कई बार चुनाव हारे। आखिर में अजय कपूर को जीत मिली और उन्होंने बालचंद्र मिश्रा को चुनाव में हरा दिया।

 

  • Jhansi में शनिवार अलसुबह Encounter में मारा गया कुख्यात
  • Kanpur में तीन साल पहले हुई BSP नेता पिन्टू सेंगर की हत्या था आरोपी
  • भाड़े पर हत्याएं करने में Expert था राशिद कालिया उर्फ घोड़ा
  • मऊरानीपुर एरिया में शूटर ने STF पर भी दागीं गोलियां
  • Dy.SP & Inspector को लगीं लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाया
  • लंबे समय से Kanpur के चकेरी एरिया को बना रक्खा था अपना ठिकाना


Yogesh Tripathi

लंबे समय से आतंक का पर्याय बने खूंखार अपराधी राशिद उर्फ कालिया उर्फ घोड़ा उर्फ वीरू का शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) ने काम तमाम कर दिया। भाड़े पर हत्याएं करने के लिए कुख्यात इस शार्प शूटर को UPSTF ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। कालिया उर्फ घोड़ा पर 1.25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। Kanpur में तीन साल पहले चकेरी थाना एरिया में दिनदहाड़े BSP नेता पिन्टू सेंगर की हत्या के मामले में राशिद कालिया उर्फ घोड़ा का नाम आया। FIR में राशिद उर्फ कालिया आरोपी भी था। लंबे समय से शहर पुलिस को उसकी तलाश थी लेकिन सपेदपोशों से तगड़े नेटवर्क की वजह से राशिद कालिया हमेशा बचता रहा। मुखबिर की सटीक सूचना जब STF ने झांसी के मऊरानीपुर में उसकी घेराबंदी की तो कालिया ने STF Team पर ही गोलियों की बौंछार कर दी। गोलियां STF के Dy.SP संजीव दीक्षित और Inspector घनश्याम यादव को लगी। गनीमत ये रही कि दोनों Officer’s ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रक्खी थी, जिसकी वजह से कोई अनहोनी नहीं हुई। STF की क्रॉस फायरिंग में गोली राशिद कालिया को लगी। गंभीर हालत में उसे उपचार के लिए मऊरानीपुर सीएचसी ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। झांसी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने कालिया को मृत घोषित कर दिया। 



STF के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) अमिताभ यश के निर्देश पर मातहत इनामी और भाड़े पर हत्या करने वाले दुर्दांत अपराधियों की धरपकड़ के लिए लंबे समय से विशेष अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में जरिए मुखबिर सवा लाख रुपए के इनामी दुर्दांत अपराधी के बारे में मालुमात होने पर STF के Dy.SP संजीव दीक्षित और Inspector घनश्याम यादव ने टीम के साथ बुन्देलखंड के झांसी में डेरा डाल दिया। शनिवार सुबह मुखबिर के इशारे पर STF ने मऊरानीपुर के पास शातिर की घेराबंदी की तो उसने ताबड़तोड़ फायरिंग Start कर दी। बदमाश की तरफ से चलाई गई गोली टीम का नेतृत्व कर रहे Sanjeev Dixit (Dy.SP) और Ghanshyam Yadav (Inspector) को लगीं। दोनों ही अफसर चूंकि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने हुए थे, इस लिए गोलियां उनके शरीर को छू नहीं पाई। 


इसके बाद STF ने स्वचालित असलहों से फायरिंग की। गोली बदमाश को लगी और वह गिर पड़ा। लहूलुहान हालत में STF बदमाश को मऊरानीपुर सीएचसी लेकर पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद कालिया को झांसी मेडिकल कालेज ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मारे गए बदमाश की पहचान राशिद कालिया उर्फ घोड़ा उर्फ वीरू के रूप में हुई। STF के मुताबिक राशिद कालिया भाड़े पर हत्या करने के लिए झांसी पहुंचा था। राशिद कालिया के पास से एक फैक्ट्री मेड पिस्टल, दो मैग्जीन, .315 बोर का देशी कट्टा. एक मोटरसाइकिल और कुछ कारतूस बरामद हुए हैं।


2020 में बसपा नेता पिन्टू सेंगर की हत्या की

भाड़े पर हत्याएं करने में Expert शातिर अपराधी राशिद कालिया उर्फ घोड़ा ने 2020 में Kanpur के चकेरी थाना एरिया में बड़ी वारदात कर सनसनी फैला दी थी। कालिया उर्फ घोड़ा ने हिस्ट्रीशीटर से राजनीति में एंट्री लेने वाले बसपा नेता पिन्टू सेंगर को उनके ही घर के बाहर गोलियों की बौंछार कर मौत की नींद सुला दिया था। इस हत्याकांड में कई आरोपी जेल में हैं। एक हाईकोर्ट से जमानत के बाद बाहर आ चुका है। पप्पू स्मार्ट की भी हाईकोर्ट से जमानत तो हो गई लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) में निरुद्ध होने की वजह से वह अभी भी जेल में ही है। Pintu Sengar Murder Case में आरोपी होने के बाद भी राशिद कालिया को Kanpur Police Arrest नहीं कर पाई थी। यही वजह रही कि उसके सिर पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित था। शहर के कई थानेदार लंबे समय से राशिद कालिया की तलाश कर रहे थे लेकिन किसी को कालिया उर्फ घोड़ा की परछाई तक देखने को नहीं मिली। करीब तीन साल चार महीने बाद STF ने न सिर्फ कालिया उर्फ घोड़ा को खोज निकाला बल्कि उसका खात्मा भी कर दिया।

कालिया उर्फ घोड़ा ने झांसी में किया 1St Murder

दर्जनों लोगों की भाड़े पर हत्या करने वाला खूंखार अपराधी राशिद उर्फ कालिया मूलत: बुन्देलखंड के महोबा जनपद का निवासी था। वर्ष 2009 में उसने झांसी जनपद में भाड़े पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। मुकदमा अपराध संख्या 261/2009 IPC की धारा 364-A, 302, 201, 12/14 UPDA Act में राशिद कालिया आरोपी है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से झांसी पुलिस उसे कभी Arrest नहीं कर सकी। राशिद कालिया को Arrest करने में नाकाम झांसी पुलिस ने बाद में उसके सिर पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। झांसी में सनसनी फैलाने के बाद राशिद कालिया ने Kanpur को अपना ठिकाना बनाया। यहां उसकी मुलाकात शहर पुलिस के लिए लंबे समय से मुखबिरी कर रहे D-2 गैंग को तबाह करने वाले शातिर बदमाश से हो गई। उसके बाद राशिद उर्फ कालिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने भाड़े पर Kanpur और आसपास के एरिया में कई हत्याएं की। खासियत ये रही कि किसी भी हत्या में उसका नाम तक नहीं आया। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो हत्या के समय राशिद कालिया के साथ जाने वाले शूटर्स भी नहीं जानते थे कि उसके साथ जो व्यक्ति मौजूद है वो आखिर है कौन...???

कालिया ने मारी थीं पिन्टू को सबसे अधिक गोलियां

20 जून 2020 को कानपुर के चकेरी थाना एरिया में बसपा नेता पिन्टू सेंगर को घेरकर गोलियां मारने वालों में राशिद कालिया प्रमुख था। उसने पिन्टू सेंगर को कई गोलियां मारी थीं। पिन्टू पर गोलियों की बौंछार के बाद जब हमलावर भागे तो राशिद कालिया ने पीछे मुड़कर देखा कि पिन्टू किसी तरह खड़ा होकर कार में बैठने की कोशिश कर रहा है। दुस्साहसी राशिद कालिया ने अपनी बाइक तुरंत मुड़वा दी और पिन्टू सेंगर पर फिर से फायरिंग की। पिस्टल की मैग्जीन खाली करने के बाद उसने अपना सबसे भरोसेंद असलहा .315 बोर का कट्टा निकाल लिया और पिन्टू के सीने पर गोली मार दी। बताया जा रहा है कि शरीर से ताकतवर पिन्टू ने राशिद का कट्टा हाथ से पकड़ लिया था। पिन्टू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके हाथों में जलने की पुष्टि हुई थी। 

बताते हैं कि कालिया को फैक्ट्री मेड पिस्टल पर कम विश्वास रहता था। इसी लिए वह अपने साथ .315 बोर का तमंचा हमेशा रखता था। पिन्टू की हत्या के बाद राशिद उर्फ कालिया फरार हो गया। पिन्टू हत्याकांड में पप्पू स्मार्ट और तीन भाड़े के हत्यारों समेत कई लोगों को पुलिस ने उठाया। कुछ को पुलिस ने छोड़ भी दिया। इसके बाद D-2 गैंग के जानी दुश्मन टायसन को भी पुलिस ने Arrest कर जेल भेजा लेकिन राशिद कालिया को पुलिस छू भी नहीं पाई। चर्चाओं पर विश्वास करें तो Kanpur में कई साल पहले काकादेव थाना एरिया में एक मुस्लिम कोचिंग संचालक की हत्या समेत कई बड़ी घटनाओं में राशिद उर्फ कालिया शामिल था लेकिन न तो कभी उसका नाम उजागर हुआ और न ही चेहरा। पिन्टू सेंगर हत्याकांड में पहली बार उसका चेहरा सामने आया और नाम भी उजागर हुआ।  

 

 

 

 

  • पिछले तीन सप्ताह से वेंटीलेटर पर थे त्रिपुरारी पांडेय
  • आंतों में संक्रमण के बाद Lucknow के प्राइवेट अस्पताल में थे भर्ती
  • लीवर और किडनी में भी हो गया था इन्फेक्शन
  • त्रिपुरारी पांडेय के निधन की खबर से शोक की लहर




Yogesh Tripathi

चर्चित Dy.SP त्रिपुरारी पांडेय का लंबी बीमारी के बाद Monday को राजधानी Lucknow के एक प्राइवेट अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई। अपने अजब-गजब कारनामों और समाज सेवा के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाले त्रिपुरारी पांडेय ने UP Police की नौकरी का एक बड़ा हिस्सा कानपुर और आसपास के जनपदों में ही पूरा किया। वर्तमान समय में उनकी तैनाती जालौन के PTS (पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) में थी। 2022 में Kanpur में हुए दंगों के बाद उनकी कथित भूमिका को लेकर एक शिकायत शासनस्तर पर हुई थी। जिसको संज्ञान में लेकर DGP ने त्रिपुरारी पांडेय का तबादला कर दिया था।



प्रांतीय पुलिस सर्विस (PPS) अधिकारी त्रिपुरारी कुछ महीने से बीमार थे। चिकित्सकों ने उनके आंतों में संक्रमण बताया था। करीब एक महीना पहले उन्होंने लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में आंतों की सर्जरी करवाई थी। बताया जा रहा है कि सर्जरी के बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। www.redeyestimes.com (News Portal) को मिली जानकारी के मुताबिक त्रिपुरारी पांडेय करीब दो हफ्ते से वेंटीलेटर पर थे। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। Monday को त्रिपुरारी पांडेय ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पुलिस जगत में शोक की लहर दौड़ गई। Social Media पर उनके करीबी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

1988 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे त्रिपुरारी पांडेय


त्रिपुरारी पांडेय 1988 बैच के सिपाही थे। करीब 10 साल बाद 1998 में पहला आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला तो वह हेड कांस्टेबल बने। दरअसल त्रिपुरारी ने उस समय Kanpur के एक बड़े इनामिया बदमाश लाला हड्डी (गोदाम) को 80 फिट रोड के पास दिनदहाड़े फिल्मी स्टाइल में हुई नूराकुश्ती के बाद Arrest कर लिया था। 2002 में परीक्षा पास करने के बाद त्रिपुरारी पांडेय सब इंस्पेक्टर (SI) बन गए। 2005 में दोबारा ऑफ टर्न प्रमोशन मिला और त्रिपुरारी पांडेय के कंधे पर दो गोल्डन स्टार की जगह तीन स्टार हो गए। मतबल कि वह इंस्पेक्टर बन गए। तय समय बाद डीपीसी हुई और त्रिपुरारी पांडेय Dy.SP बने।

  चंदौली में जब सीओ थे तो पटेल समाज की गरीब लड़की का विवाह अपने पैसों से करवाया था।

त्रिपुरारी पांडेय ने अपने जीवन में करीब 35 वर्ष तक UP Police की नौकरी की। इसमें वह सिपाही के पद से डिप्टी एसपी के पद तक पहुंचे। जिसमें करीब 25 साल वह कानपुर और आसपास के जनपदों में ही तैनात रहे। त्रिपुरारी पांडेय को करीब से जानने वाले लोगों की मानें तो पांडेय जी का सिस्टमबेहद टाइट था। DGP रैंक के अधिकारी त्रिपुरारी पांडेय को जानते थे। यही वजह थी कि वह हमेशा मनचाही पोस्टिंग पाते रहे। एक बार आगरा जनपद में तैनात रहे थे। कुछ समय के लिए वाराणसी, लखनऊ, मुगलसराय जीआरपी में भी त्रिपुरारी पांडेय तैनात रहे। Kanpur (GRP) में भी त्रिपुरारी पांडेय ने लंबा वक्त गुजारा। तीन साल पहले लखनऊ कमिश्नरी में त्रिपुरारी का तबादला हुआ था लेकिन अपने सिस्टमके बल पर त्रिपुरारी पांडेय कुछ दिन में ही जुगाड़ लगाकर कानपुर वापस आ गए। त्रिपुरारी पांडेय के साथ सिपाही रहे लोग अभी भी HCP और SI के पद पर ही कार्यरत हैं। त्रिपुरारी पांडेय किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते थे। उनकी आंखों में लगे काजल की चर्चा हर किसी पत्रकार और पुलिस वाले की जुबान पर रहती थी।

समाजसेवा में भी आगे रहते थे त्रिपुरारी पांडेय

त्रिपुरारी पांडेय समाज सेवा में आगे रहते थे। अपनी तैनाती के दौरान त्रिपुरारी पांडेय ने एक गरीब महिला को ई-रिक्शा खरीदकर दिया था। इतना ही नहीं कानपुर के चर्चित संजीत यादव अपहरण और मर्डर केस के बाद त्रिपुरारी पांडेय संजीत यादव की बहन की पढ़ाई का खर्च उठा रहे थे। वह संजीत की बहन से राखी भी बंधवाते थे। कई बेटियों की शादी और कन्यादान भी त्रिपुरारी पांडेय ने किया था। उनके सामाजिक सरोकार से जुड़े तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर आज भी वॉयरल हैं।

विवादों से भी था त्रिपुरारी पांडेय का गहरा नाता

अपने तगड़े सिस्टम की वजह से त्रिपुरारी पांडेय की तैनाती कानपुर और आसपास के जनपदों में ही रही। कई कथित एनकाउंटर भी किए। नई सड़क पर हुए दंगों की विवेचना के खेल में पांडेय जी फंस गए। सिर्फ फंसे ही नहीं बल्कि उसी में नप भी गए। रातों-रात उनका ट्रांसफर (जालौन पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) कर दिया गया। नई सड़क बवाल के मामले में गठित SIT में त्रिपुरारी पांडेय शामिल थे। वह मुख्य विवेचक थे। सूत्रों के मुताबिक इसमें कई बड़े खेल पांडेय जी एक पार्षद के जरिए किए। सूचनाएं लीक करना और कुछ नामों को जोड़ने व घटाने की बात सामने आई। इसके अलावा कई और गंभीर मसलों की शिकायतें शासन को पहुंची। DGP ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उनका तबादला कर दिया। कानपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया गया कि तुरंत Dy.SP त्रिपुरारी पांडेय को रिलीव करें।

जब बर्रा-6 में त्रिपुरारी पांडेय ने दी दबिश

वर्ष 2004-05 में सपा की सरकार थी। सूबे के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। Kanpur में चर्चित IPS Officer रामेंद्र विक्रम सिंह की तैनाती हुई। रामेंद्र विक्रम सिंह की तैनाती से कुछ पुलिस वालों की किस्म का पिटारा खुल गया। उसमें एक त्रिपुरारी पांडेय भी थे। त्रिपुरारी पांडेय को कोहना थाने में बतौर थानेदार पोस्टिंग मिली। पांडेय जी की तैनाती कोहना थाने में थी लेकिन उनके गुप्तचर” (मुखबिर) Kanpur के South एरिया में सक्रिय रहते थे। 

सटीक लोकेशन और सूचना के बाद एक रात पांडेय जी कोहना थाने की फोर्स लेकर बर्रा भाग-6 एरिया में दबिश देने पहुंच गए। यहां जमीन के नीचे एक चर्चित शुक्ला जी ने चोरी के पेट्रोल और डीजल को भरने के लिए टैंक बना रक्खा था। पांडेय जी ने लंबे समय से चल रहे शुक्ला जीके तेल के खेल का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। खास बात ये रही कि इसकी भनक न तो बर्रा थानेदार को लगी थी और न ही क्षेत्राधिकारी गोविंदनगर को खबर मिली। इसके अलावा शहर में पहली बार RDX पकड़ने का काम भी त्रिपुरारी पांडेय ने ही किया था। थाना नौबस्ता में उन्होंने खटारा कार के अंदर से RDX बरामद करने का तब दावा किया था। हालांकि रिपोर्ट में क्या निकला...? ये किसी को नहीं मालुम।


सांप भी मार दिया और लाठी भी नहीं टूटी

त्रिपुरारी पांडेय के किस्से और कहानियां भी कम नहीं है। ताजा किस्सा कोरोना के समय का है। पांडेय जी की तैनाती सीसामऊ में थी। पांडेय जी के गुप्तचरों ने बड़े पैमाने पर शराब बिक्री की खबर दी। जाहिर है कि पांडेय जी को ये भी बताया गया होगा कि कोरोना काल में आखिर कौन सफेदपोश शराब की बिक्री करवा रहा है...? लेकिन इन सबके बाद भी पांडेय जी ने शराब तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त कर कई लोगों को दबोच लिया। सफेदपोश सिंडीकेट बेनकाम हुआ तो अफसरों की सांसे भी अटक गई। लिखापढ़ी तो पुलिस के अभिलेखों में हुई लेकिन चंद घंटे में ही पांडेय जी ने सबकुछ मैनेज कर अफसरों को राहत दे दी। सिंडीकेट बेपर्दा न हो सका। कहने का मतलब ये कि पांडेय जी ने सामने वाले सफेदपोश की कुंजी अपने पास हमेशा के लिए रख ली थी।

 

विशेष----त्रिपुरारी पांडेय अपने पास एक पट्टा रखते थे। जिसकी मुठिया लकड़ी की होती थी। उसके दोनों तरफ लिखा होता था "आन मिलो सजना...." । शातिर अपराधियों पर यह पट्टा वह खूब चलाते थे।