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  • Bikru Case से जुड़े दो परिवारों से भी हो चुकी है बातचीत
  • बिठूर और अकबरपुर-रनिया सीट के बीच फंसा है पेंच
  • खुशी दुबे की मां के भी संपर्क बनाए हुए है Congress
  • गोविंदनगर सीट से Karishma Thakur का नाम करीब-करीब Final
  • सीसामऊ से हरप्रकाश और कल्याणपुर से शैलेंद्र के नाम पर मंथन

Karishma Thakur & Har Prakash Agnihotri

Yogesh Tripathi

Kanpur की सियासत नित नए करवट बदल रही है। पहले लग रहा था कि Samazwadi Party सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन पर भारी पड़ रही है लेकिन अचानक अभी तक यहां तीसरे नंबर पर बताई जाने वाली Congress के तेवर तीखे होने लगे हैं। Priyanka Gandhi की महिलाओं के संग सक्रियता के साथ-साथ यहां की सीटों पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर जो खबरें मिल रही हैं। उससे BJP समेत Samazwadi Party गठबंधन की भी नींद उड़ती दिखाई आ रही है। चर्चा ये भी है कि भाजपा से नाराज ब्राम्हणों को अपनी ओर खींचने के लिए Congress बिकरू कांड के बाद कथित रूप से Encounter में मारे गए विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे और जेल में बंद खुशी दुबे की मां को टिकट देने पर मंथन कर रही है। 

www.redeyestimes.com (News Portal) को मिली जानकारी के मुताबिक Congress के शीर्ष नेतृत्व के सिग्नल पर लोकल नेता बराबर संपर्क में बने हुए हैं। तीन चक्र की बातचीत के बाद भी बिठूर और अकबरपुर-रनिया विधान सभा सीट को लेकर पेंच फंसा नजर आ रहा है। Uttar Pradesh Congress की एक टीम को आज दोपहर इस बाबत फाइनल मुहर लगाने के लिए पहुंचना भी था लेकिन शाम तक टीम नहीं पहुंची। यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो मतदान होने तक Kanpur में सियासी पंडितोंकी गणितकई विधान सभा की सीटों पर Fail भी हो सकती है और बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं। गौरतलब है कि Congress पहली लिस्ट में किदवईनगर से पूर्व विधायक अजय कपूर, कैंट से वर्तमान विधायक सोहैल अंसारी और आर्यनगर सीट पर प्रमोद जायसवाल का नाम पहले ही Final कर चुकी है। माना जा रहा है कि आज शाम या फिर कल तक कांग्रेस की अगली लिस्ट जारी हो सकती है।

 


करिश्मा ठाकुर को शीर्ष नेतृत्व गोविंदनगर सीट से ही प्रत्याशी घोषित करने का मूड पूरी तरह से बना चुका है। करिश्मा 2019 के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी थीं। बीजेपी के सुरेंद्र मैथानी से वह चुनाव हार गई लेकिन उसके बाद भी वह बराबर गोविंदनगर विधान सभा एरिया में मेहनत करती रहीं। यही वजह है कि हाईकमान उनकी दावेदारी को नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है। हालांकि कांग्रेस के एक दिग्गज अपने करीबी को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। लेकिन Portal के सूत्रों का कहना है कि करिश्मा की टिकट करीब-करीब पक्की है। अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है...? गोविंदनगर से कई अन्य नेताओं ने भी प्रत्याशिता को लेकर दावेदारी कर रक्खी है लेकिन नेतृत्व करिश्मा के नाम पर गंभीर है।

 



इसी तरह से सीसामऊ विधान सभा की सीट पर कई दावेदारों ने अपना दावा पेश कर रक्खा है लेकिन पिछले 24 घंटे के दौरान जो "समीकरण" बदले हैं, उसमें हरप्रकाश अग्निहोत्री रेस में आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं। दावा हाजी सोहैल और हाजी वसी का भी कमजोर नहीं है लेकिन विधान सभा के समीकरणऔर शीर्ष नेतृत्व के आपसी समीकरणमें हरप्रकाश अग्निहोत्री बिल्कुल मुफीद बैठ रहे हैं।

गोविंदनगर से दावेदारी पेश कर रहे दक्षिण जिलाध्यक्ष शैलेंद्र दीक्षित को लेकर चर्चा है कि यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो Congress का शीर्ष नेतृत्व उन्हें कल्याणपुर से टिकट दे सकता है। वैसे शैलेंद्र 2012 के विधान सभा चुनाव में गोविंदनगर से कांग्रेस प्रत्याशी रह चुके हैं। तब उन्हें सत्यदेव पचौरी ने भारी मतों के अंतर से चुनाव में हरा दिया था।

 

  

 

  •  बिल्हौर से स्वर्गीय काला बच्चा के बेटे राहुल बच्चा सोनकर को टिकट
  • किदवईनगर से महेश त्रिवेदी, गोविंदनगर से सुरेंद्र मैथानी ठोंकेगे ताल
  • महाराजपुर से सतीश महाना कैंट से रघुनंदन भदौरिया, बिठूर से सांगा पर फिर भरोसा
  • दो दिन पहले News Portal में प्रकाशित खबर पर BJP हाईकमान की मुहर
  • घाटमपुर, रसूलाबाद, भोगनीपुर सीट शीर्ष नेतृत्व ने Hold पर रक्खी

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Election 2022 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने फ्राइ-डे की शाम को प्रत्याशियों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में Kanpur की सभी सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की गई। बिल्हौर छोड़कर अन्य सभी सीटों पर BJP हाईकमान ने पुराने योद्धाओं पर जताते हुए उन्हें फिर से चुनावी रणभूमि में उतारा है। बिल्हौर सीट से भाजपा ने राहुल बच्चा सोनकर को प्रत्याशी बनाया है। राहुल बच्चा कानपुर-बुन्देलखंड (भाजपा अनुसूचित मोर्चा के प्रेसीडेंट हैं)। राहुल के पिता करीब तीन दशक पहले बिल्हौर सीट से भाजपा के टिकट पर शिवकुमार बेरिया के खिलाफ चुनाव लड़े थे। महज कुछ वोटों के अंतर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। राहुल लंबे समय से बिल्हौर सीट पर अपनी चुनावी सरजमीं तैयार कर रहे थे। जिसकी वजह से भाजपा संगठन ने उन पर विश्वास जताया। हालांकि यहां से Ex.DGP ब्रजलाल की पत्नी भी टिकट की दावेदारी पेश कर रही थीं। बिल्हौर से 2017 में भगवती प्रसाद सागर बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते थे। बीते दिनों उन्होंने सपा की सदस्यता ले ली। 

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले आपके विश्वसनीय www.redeyestimes.com (News Portal) ने बीजेपी के संभावित प्रत्याशियों की टिकटों और लिस्ट जारी करने को लेकर जो खबर प्रकाशित की थी। उस पर सटीक मुहर आज लग गई।  


BJP शीर्ष नेतृत्व ने किदवईनगर सीट से वर्तमान विधायक महेश त्रिवेदी, गोविंदनगर से सुरेंद्र मैथानी, महाराजपुर से योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, कल्याणपुर से राज्यमंत्री नीलिमा कटियार, बिठूर से अभिजीत सिंह सांगा को टिकट दिया है। कैंट सीट से संगठन ने पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया पर एक बार फिर विश्वास जताते हुए उन्हें टिकट दिया है। रघुनंदन भदौरिया 2017 के चुनाव में कांग्रेस के सोहैल अंसारी से चुनाव हार गए थे।

आर्यनगर और सीसामऊ सीट की शिफ्टिंग की गई है। 2017 में आर्यनगर से चुनाव हारे पूर्व विधायक और वर्तमान में विधान परिषद सदस्य(MLC) सलिल विश्नोई को सीसामऊ से प्रत्याशी बनाया गया है। सीसामऊ में 2017 का भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े सुरेश अवस्थी को हाईकमान ने इस बार आर्यनगर सीट से उम्मींदवार घोषित किया है। इसी तरह BJP ने अकबरपुर-रनिया सीट पर प्रतिभा शुक्ला और सिकंदरा से अजीत पाल को प्रत्याशी बनाया है।  

Hold पर हैं घाटमपुर, रसूलाबाद, भोगनीपुर सीटें

घाटमपुर, भोगनीपुर और रसूलाबाद विधान सभा सीटों को बीजेपी नेतृत्व ने फिलहाल Hold पर रक्खा है। घाटमपुर सीट पर संभावना है कि गठबंधन के तहत अपना दल को दी जा सकती है। क्षेत्र में इसके संकेत भी देखने को मिल रहे हैं। अपना दल की संभावित प्रत्याशी के तौर पर सरोज कुरील की लगातार मेहनत जारी है। वहीं भोगनीपुर सीट पर मंथन जारी है। माना जा रहा है कि इन दो में से कोई एक सीट बीजेपी सहयोगी अपना दल को दे सकती है। दोनों ही सीटें कुर्मी बहुल हैं। रसूलाबाद सीट को इस लिए Hold पर रक्खा गया है कि यदि शिवपाल से गठबंधन होता है तो उनके खाते में यह सीट दी जाएगी। ऐसा होने पर शिवपाल सिंह यादव के बेहद करीबी शिवकुमार बेरिया रसूलाबाद सीट से प्रत्याशी घोषित हो सकते हैं।

  • कैंट, आर्यनगर और सीसामऊ पर जिताऊ प्रत्याशी की तलाश
  • अकबरपुर-रनिया और बिल्हौर पर चल रहा है गहरा मंथन
  • अन्य सीटों पर पुराने योद्धाओं को करीब-करीब ग्रीन सिग्नल

Yogesh Tripathi

Kanpur का नाम जेहन में आते ही धूल-धुआं, गंदगी और जाम के दृश्य उभरने लगते हैं। कभी एशिया का मैनचेस्टर और मजदूरों का मक्काकहलाने वाले कंपू नगरियामें सियासी रंग चढ़ा हुआ है। Kanpur को Uttar Pradesh का Clock Tower City भी कहा जाता है। घंटाघर, लालइमली, बिजली घर, स्वरूप नगर और कोतवाली में अंग्रेजों की लगाई घड़ियां भले ही टिक-टिक न कर पा रही हों लेकिन गुजरे वक्त के सियासी दास्तां की ये मूक गवाह अवश्य हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि इस शहर के मजदूर बहुल खलासी लाइन में ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जन्म हुआ था। यही वजह रही कि मजदूरों का मक्का कहे जाने वाले Kanpur में लंबे समय तक लाल झंडा लहराता रहा था। 89 में सुभाषिनी अली को यहां की जनता (खासकर) मजदूरों ने चुनाव में विजयश्री दिलाकर संसद भवन भी भेजा। कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादियों और जनसंघ (अब भाजपा) का भी यह शहर गढ़ रहा है। समय के साथ-साथ नेता और राजनीति बदलती रही...चुनाव प्रचार के तौर-तरीके भी बदले लेकिन जो अभी तक नहीं बदली वो है Kanpur की अलमस्त तबीयत...मुंह फट्ट होना और चुनावी अड्डेबाजी...

Uttar Pradesh Election 2022 का शंखनाद हो चुका है। कुछ सीटों पर सीधी फाइट के आसार हैं तो कुछ पर त्रिकोणीय संघर्ष अभी से दिख रहा है। कुछ सीटें एकतरफा मानी जा रही हैं। हालांकि अभी काफी वक्त बाकी है, सो फिज़ा बदल भी सकती है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिष्ठा दांव पर है तो कांग्रेस और सपा का भी कड़ा इम्तिहान है। अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए BJP हाईकमान कानपुर नगर और देहात की पांच सीटों पर तगड़ी माथापच्ची कर रहा है। बाकी सीटों पर हाईकमान ने करीब-करीब पुराने योद्धाओं को ही ग्रीन सिग्नल देने का मन बना लिया है। 21 जनवरी से 23 की सुबह तक भाजपा कभी भी अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है।

 

कैंट विधान सभा

Kanpur की कैंट विधान सभा सीट पिछले कई चुनाव से भाजपा के पास रही थी लेकिन 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के टिकट पर लड़े तत्कालीन विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया को कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी सोहैल अंसारी ने हरा दिया था। इस बार फिर से बीजेपी यह सीट वापस पाना चाहती है। इस सीट पर कई दिग्गजों ने टिकट के लिए अपनी दावेदारी कर रक्खी है। सूत्रों की मानें तो हाईकमान रघुनंदन सिंह भदौरिया और दक्षिण जिला के महामंत्री शिवराम सिंह (बाउवा ठाकुर) के नामों को लेकर काफी गंभीर है। वहीं राजनीति के जानकारों की मानें तो इस सीट पर प्रत्याशी वही घोषित होगा, जिस पर कैबिनेट मंत्री सतीश महाना की कृपा होगी।

आर्यनगर विधान सभा

आर्यनगर विधान सभा सीट भी बीजेपी के गढ़ वाली सीट मानी जाती है। हालांकि यहां पर 2017 के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी अमिताभ बाजपेयी ने भाजपा के दिग्गज सलिल विश्नोई को चुनाव में पराजित कर दिया था। सलिल विश्नोई विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बन चुके हैं। संघ और भाजपा के सूत्रों की मानें तो हाईकमान अमिताभ बाजपेयी को चुनावी चक्रव्यूह में घेरने के लिए किसी ब्राम्हण चेहरे पर दांव खेलने की कवायद में है। यहां पर कई नामों की चर्चा हो रही है। एक नाम बसपा के पूर्व मंत्री का भी चर्चा में है लेकिन उन्होंने अभी तक भाजपा ज्वाइन नहीं की है। पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी की भी दावेदारी कमजोर नहीं मानी जा रही है। दो पूर्व छात्र नेताओं के नाम की भी चर्चा हो रही है। माना ये जा रहा है कि हाईकमान बिल्कुल आखिर में इस सीट पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा करेगा।

सीसामऊ विधान सभा

सीसामऊ विधान सीट पर जीत के लिए भाजपा लंबे समय से प्रयासरत है लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिली है। सपा के हाजी इरफान सोलंकी यहां से विधायक हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस सीट को जीतने के लिए करीब सवा साल पहले राज्यसभा सांसद और पूर्व डीजीपी ब्रजलाल को प्रभारी बनाया है। वह यहां के कार्यकर्ताओं से कई बार मीटिंग कर तमाम त्रुटियों के बारे में जानकारी हासिल कर चुके हैं। इस सीट पर पिछली बार भाजपा के सुरेश अवस्थी चुनाव हार गए थे। इस बार यहां से आर्यनगर से पूर्व विधायक रहे सलिल विश्नोई का नाम चर्चा में हैं। चर्चा इस बात की भी है कि हाईकमान आर्यनगर और सीसामऊ सीटों की शिफ्टिंग भी कर सकता है। मतलब साफ है कि सुरेश अवस्थी को ब्राम्हण होने की वजह से आर्यनगर सीट भी दी जा सकती हैं हालांकि वहां पर कई दावेदार पहले से मौजूद हैं। सीसामऊ की सीट पर ही चार्टेड अकाउंटेंट का नाम भी चर्चा में है। चार्टेड अकाउंटेंट RSS से जुड़े हैं और श्याम नगर में रहते हैं।

अकबरपुर-रनिया विधान सभा

इस विधान सभा पर हाईकमान के पास सिर्फ एक नाम प्रतिभा शुक्ला का भेजा गया है लेकिन उसके बाद भी माथापच्ची हो रही है। उसकी वजह Kanpur के रतनलाल नगर निवासी सतीश शुक्ला बताए जा रहे हैं। Portal के पास जो जानकारी है उसके मुताबिक सतीश शुक्ला ने एड़ी-जोटी का जोर लगा रक्खा है। प्रतिभा शुक्ला की टिकट यदि कटी तो उसके पीछे कई वजहें होंगी। इसमें एक बड़ी वजह कुछ दिनों पहले सांसद के खिलाफ उनका मुखर होना भी शामिल है।

बिल्हौर विधान सभा

बिल्हौर विधान सभा सीट 2017 में भगवती प्रसाद सागर ने भाजपा के टिकट पर जीती थी। कुछ दिन पहले भगवती प्रसाद सागर ने भाजपा से इस्तीफा देकर सपा ज्वाइन कर लिया। इस लिए इस सीट पर भाजपा को किसी नए जिताऊ चेहरे की तलाश है। हालांकि यहां पर तगड़ी दावेदारी पूर्व में शिवकुमार बेरिया के खिलाफ लड़ चुके काला बच्चा सोनकर के बेटे राहुल सोनकर की है। बीजेपी हाईकमान उनके नाम पर गंभीर है। लेकिन पेंच फंसा है पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का। सूत्रों की मानें तो ब्रजलाल के बेहद करीबी इस सीट से टिकट मांग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राहुल सोनकर के पिता काला बच्चा बिल्हौर सीट पर शिवकुमार बेरिया के खिलाफ तीन दशक पहले चुनाव लड़े थे और करीबी अंतर से चुनाव हार गए थे। उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद दंगा भी हुआ था।

Note----किदवईनगर से वर्तमान विधायक महेश त्रिवेदी, गोविंदनगर से सुरेंद्र मैथानी, महराजपुर से सतीश महाना, बिठूर से अभिजीत सिंह सांगा के साथ-साथ घाटमपुर, रसूलाबाद, सिकंदरा, भोगनीपुर के विधायकों को फिर से टिकट मिलना करीब-करीब Final बताया जा रहा है। इन सभी के बाबत खुफिया इनपुट भी संगठन और शीर्ष नेतृत्व ने लिया है। सूत्रों की मानें तो एक-दो नामों को न चाहते हुए भी संगठन वर्तमान परिदृश्य को देखकर टिकट देने का मूड बना चुका है।

 


  • स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान समेत 14 ने BJP छोड़ी
  • कुछ और दिग्गज मंत्रियों के भी देर-सबेर BJP छोड़ने की चर्चाएं
  • टिकट वितरण में होने वाली महाभारत की आशंका से भयभीत है भाजपा
  • जिन विधायकों के टिकट कटने थे अब उनको प्रत्याशी बना सकता है हाईकमान

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Election 2022 की चुनावी पिचइस कदर “Turn” लेगी इसका अंदाजा राजनीतिक पंडित नहीं लगा पाए। सियासी मैचके शुरुआत में ही BJP के दर्जन भर से अधिक दिग्गज खिलाड़ी “Out” हो जाएंगे इसकी कल्पना तो BJP के चाणक्य ने भी नहीं की होगी। भाजपा के चाणक्यऔर उनकी पूरी टीम फिलहाल कुछ समझ नहीं पा रही है कि वह क्या करें और क्या न करें...बीजेपी में मची भगदड़ को कैसे रोककर डैमेज को कंट्रोल किया जाए, सभी का ध्यान इसी पर लगा है। सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav अपनी गुगली में फंसाकर BJP के दर्जन भर से अधिक विकेटगिरा चुके हैं। उनकी गुगुली को RSS के दिग्गज भी नहीं समझ पा रहे हैं।

एक पुरानी कहावत है कि आखिर मरता न तो करता क्या....??? शायद यही वजह है कि बीजेपी ने फिलहाल 75 विधायकों के टिकट काटने पर पाबंदी लगा दी है। मतलब साफ है कि जिन योद्धाओ के 2022 के चुनावी संग्राम में हारने की Report संगठन के पास आई थी। उन्हीं योद्धाओं को BJP का शीर्ष नेतृत्व एक बार फिर से टिकट देकर चुनावी रणभूमि में उतारने को बेबस नजर आता दिखाई दे रहा है। बीजेपी में पड़ी बगावत की दरारों को भरने का जो जिम्मा गुजरात भाजपा संगठन मंत्री रत्नाकर पांडेय (काशी पांडेय) को सौंपा गया था वो करीब-करीब Fail साबित हो रहा है। हाल अब ये हो गया है कि जो नेता अभी तक 300+ सीटें जीतने का दंभ भर रहे थे वो अब मीडिया के सवालों से बच रहे हैं। चौराहे पर पान-चाय की दुकानों पर बहस करने वाले BJP Wprkers भी सन्नपात हैं। 

रही-सही कसर Congress महासचिव Priyanka Gandhi पूरा कर रही हैं। कांग्रेस की पहली लिस्ट में उन महिलाओं को भी प्रियंका गांधी ने प्रत्याशी बनाया है, जिनके परिवार के साथ अत्याचार हुए हैं। इसमें उन्नाव रेप पीड़िता की मां और हाथरस पीड़िता के परिवार के सदस्य को कांग्रेस ने टिकट देकर भाजपा की बेचैनी को कई गुना बढ़ा दिया है। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने उन्नाव रेप पीड़िता के सामने अपना प्रत्याशी न उतराने का फैसला लेकर BJP को "बैकफुट" पर ढकेल दिया है।

देर-सबेर गिर सकते हैं और विकेट

चुनाव आयोग की तरफ से चुनावी शंखनादहोते ही सबसे अधिक भगदड़ सत्ताधारी दल भाजपा में हुई। BJP का शीर्ष नेतृत्व जब तक कुछ समझ पाता, उससे पहले कद्दावर मंत्री और पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान ने भी इस्तीफा दे दिया। तमाम मनुहार के बाद भी इन दोनों नेताओं ने अपना निर्णय नहीं बदला। समाचार लिखे जाने तक दोनों दिग्गज करीब दर्जन भर भाजपा विधायकों के साथ सपा को ज्वाइन कर चुके हैं। बड़े सूत्रों की मानें तो योगी मंत्रीमंडल के दो और बड़े विकेट भी देर-सबेर गिर सकते हैं। दोनों ही ब्राम्हण वर्ग के बताए जा रहे हैं। पिछले चुनावों में इन दोनों ने बीजेपी ज्वाइन कर चुनाव लड़ा था। दोनों की गिनती बड़े नेताओं में होती है लेकिन भाजपा में जाने के बाद दोनों के पास सिर्फ मंत्रीमंडल का पोर्टफोलियो भर था। दोनों की पांच साल बिल्कुल भी नहीं चली। दोनों ही मंत्रियों के पास स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह ही कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है। ऐसे में यदि दोनों ने भाजपा को बॉय-बॉय बोला तो सीधा नुकसान चुनाव में बीजेपी को मिलेगा। 

सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी ज्वाइन करते स्वामी प्रसाद मौर्य, भगवती प्रसाद सागर, दारा सिंह चौहान व अन्य भाजपा नेता।

BJP के ये खिलाड़ी हो चुके हैं “Out”

स्वामी प्रसाद मौर्य, भगवती प्रसाद सागर, धर्म सिंह सैनी, दारा सिंह चौहान, रोशनलाल वर्मा, विनय शाक्य, अवतार सिंह भड़ाना, बृजेश प्रजापति, मुकेश वर्मा, राकेश राठौर, जय चौबे, माधुरी वर्मा, आरके शर्मा, बाला अवस्थी BJP की नीतियो से खफा होकर उनका साथ छोड़ चुके हैं। दो को छोड़कर सभी ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली है। खास बात ये है कि सपा ने सभी की प्रत्याशिता को भी करीब-करीब Final कर दिया है।

महाभारत को लेकर भयभीत BJP के दिग्गज

जानकारों की मानें तो बीजेपी के अंदरखाने में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। Uttar Pradesh (BJP) में तीन धड़े जगजाहिर हैं। टिकट वितरण में ये तीनों धड़े अपने अधिक से अधिक समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। संगठन मंत्री सुनील बंसल पर अमित शाह की छतरी है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली बुलाकर वन टू वन गुफ्तगू करने के बाद बड़ा संदेश दे चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल के करीब दर्जन भर से अधिक जिलों में अपने करीबी लोगों को टिकट दिलाने के लिए कमर कसे बैठे हैं। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और दूसरे डिप्टी सीएम डॉक्टर दिनेश शर्मा के पास भी कुछ दावेदारों की लिस्ट है।  

 

 

 

  • Uttar Pradesh में गुटबाजी की आशंका से भयभीत है BJP
  • प्रदेश की 403 सीटों पर 806 प्रवासी पदाधिकारियों की तैनात
  • गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड के संगठन पदाधिकारियों का कैम्प Start
  • हर सीट पर जिताऊ प्रत्याशियों का फीडबैक ले रहा BJP हाईकमान

रत्नाकर पांडेय (काशी), संगठन मंत्री गुजरात (भाजपा)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Election 2022 का शंखनाद हो चुका है। सभी राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदार Lucknow से लेकर Delhi तक अपने आकाओं के चौखट की "परिक्रमा" कर रहे हैं। सबसे अधिक घमासान केंद्र और प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में देखने को मिल रहा है। UP (BJP) में अंदरखाने की गुटबाजी भी किसी से छिपी नहीं हैं। गुटबाजी की वजह से दरारें काफी मोटी हो गई हैं। इन दरारों को भरने के लिए हाईकमान ने हर विधान सभा में संगठन के प्रवासी पदाधिकारियों की तैनाती कर दी है। सभी से जिताऊ प्रत्याशियों के बाबत फीडबैक लिया जा रहा है। बड़े सूत्रों की मानें तो Uttar Pradesh की 403 विधान सभा सीटों पर 806 प्रवासी पदाधिकारियों की भारी-भरकम फौजको उतारा गया है। 

चर्चा है कि गुजरात के संगठन मंत्री रत्नाकर पांडेय (काशी) को शीर्ष नेतृत्व ने गुटबाजी से आई दरारों को भरने का जिम्मा सौंपा है। आशंका है कि टिकट बंटवारे को लेकर गुटबाजी कभी भी बाहर आ सकती है। शायद यही वजह है कि डैमेज को कंट्रोल करने के लिए संगठन ने पहले से ही कवायद Start कर दी है। संगठन का फोकस पूर्वांचल के गोरखपुर, काशी और अवध क्षेत्रों पर अधिक है। सूत्रों की मानें तो करीब पांच दर्जन से अधिक वर्तमान विधायकों का टिकट कटना "पक्का" माना जा रहा है। दो दर्जन के करीब MLA को हाईकमान किसी दूसरी सीट पर भी शिफ्ट कर सकता है।   

Uttar Pradesh के मूल निवासी हैं रत्नाकर पांडेय

 

चुनावी शंखनाद से पहले ही BJP संगठन के सैकड़ों प्रवासी पदाधिकारियों ने Uttar Pradesh में अपना कैम्प Start कर दिया। पिछले 7 दिनों में कई Meeting हो चुकी हैं। एक बैठक में रत्नाकर पांडेय के साथ यूपी के संगठन मंत्री समेत कई दिग्गज रहे। सभी ने विधान सभा चुनाव के अभियान को बढ़ाने के साथ-साथ संपर्क अभियानों को व्यापक स्तर पर तेज करने की ताकीद बैठक में Worker’s को दी है।

बड़े सूत्रों की मानें तो रत्नाकर पांडेय को Uttar Pradesh के चुनावी अभियान में उतारने के पीछे कई वजहें हैं। पहला यह कि पूर्वांचल के एक जनपद के रत्नाकर मूल निवासी हैं। दूसरा यह कि वह लंबे समय तक काशी प्रांत के संगठन मंत्री रहने के साथ-साथ कई अहमद पदों पर रह चुके हैं। संगठन को हर संकट के समय काशी ने उबारा है। यही वजह है कि उन पर अधिक विश्वास शीर्ष नेतृत्व को रहता है।

संगठन में निचले स्तर के कार्यकर्ताओं तक उनकी गहरी पकड़ है। वह यूपी में कई चुनावों का सफलतापूर्वक संगठन के लिए निर्वाहन कर चुके हैं। वहीं रत्नाकर के साथ चुनावी संग्राममें उतारे गए झारखंड प्रांत के संगठन महामंत्री धर्मपाल लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रभारी रह चुके हैं। धर्मपाल की भी बूथस्तर तक कार्यकर्ताओं के बीच तगड़ी पकड़ है। मध्य प्रदेश के संगठन महामंत्री हितानंद को अवध क्षेत्र की कमान सौंपी गई है।

 

BJP शासित राज्यों के MP-MLA का UP में डेरा

Uttar Pradesh का चुनावी किलाफतेह करने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने काफी पहले ही कमर कस ली थी। शायद यही वजह रही कि चुनावी शंखनाद से काफी पहले ही गुजरात, मध्य प्रदेश समेत करीब-करीब सभी भाजपा शासित प्रदेशों के तमाम विधायकों-सांसदों और महापौर ने उत्तर प्रदेश में अपना ड़ेरा जमा लिया है। संगठन स्तर पर सभी को जिम्मेदारियां भी सौंपी जा चुकी हैं। कोई जनसंपर्क अभियान को तेजी से गति देने में जुटा है तो कोई बूथ स्तर पर वोटर्स को कैसे निकालना है इसकी रणनीति बना रहा है।  

  • अपराध की पाठशाला का प्रिंसिपल है D-2 सरगना अतीक
  • 15 साल पहले रेलवे के विश्रामालय लगती थी D-2 सरगना अतीक की पंचायत
  • तत्कालीन ADG (L/O) ब्रजलाल ने Lucknow रेलवे स्टेशन पर मारा था छापा
  • सरगना से मिलीभगत की वजह से कई पुलिस कर्मचारी हुए थे सस्पेंड
  • सिद्धार्थनगर जेल से आते समय लखनऊ स्टेशन के विश्रामालय में ठहरता था अतीक
  • गिरोह के अपराधिक कृत्यों को देख D-2 को IS-273 (इंटर स्टेट) पर पंजीकृत किया  
 D-2 गैंग सरगना अतीक अहमद (फोटो साभार-पुलिस)

Yogesh Tripathi

पहले तौफीक उर्फ बिल्लू का Encounter फिर रफीक की न्यायिक रिमांड के दौरान पुलिस कस्टडी में हत्या के बाद D-2 गैंग बैकफुट पर आ गया। एनकाउंटर के खौफ से अतीक भागा-भागा फिर रहा था। राजधानी दिल्ली के लक्ष्मीनगर को उसने महफूज ठिकाना बनाया। दिल्ली में बैठकर उसने गैंग को फिर से खड़ा करने की कोशिश Start की। STF & Crime Branch के सर्विलांस सेल के साथ मुखिबर तंत्र के Active रहने से वह अधिक दिनों तक महफूज नहीं रह सका। लोकेशन महज कुछ महीने में ही ट्रेस हो गई। Kanpur के तत्कालीन SSP आलोक कुमार सिंह ने तेजेंद्र सिंह और ऋषिकांत शुक्ला की अगुवाई में एक पुलिस टीम गठित कर D-2 सरगना की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली रवाना की। इस टीम ने दिल्ली क्राइम ब्रांच के स्पेशल सेल की मदद से लक्ष्मी नगर एरिया में अतीक को Arrest कर लिया गया। कानूनी झंझावतों से बचने के लिए अतीक को दिल्ली की कोर्ट में पेश किया गया। उसके बाद Kanpur Police बी-वारंट के जरिए अतीक को शहर लाई। जेल में अतीक और उसके गिरोह की धमक को देखते हुए उसे सिद्धार्थनगर की कारागार में शिफ्ट किया गया।

रेलवे के विश्रामालयको बना लिया अपना अड्डा

जानकार पुलिस अफसरों की मानें तो शातिर दिमाग अतीक ने सिद्धार्थनगर की जेल में रहने के दौरान अपनी हनक बना ली। कानपुर लेकर आने वाले पुलिस कर्मचारियों से साठगांठ कर वह लखनऊ रेलवे स्टेशन के विश्रामालयमें ठहने लगा। यहां पर उसके गुर्गे पहुंचते थे और अपराध जगत की तमाम बड़ी पंचायत अतीक निपटाने लगा। कई बार उसने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए भी अपनी पेशी करवाई। विश्रामालय में भी वह सिस्टम के जरिए ठहरता था। 

 इसकी भनक जब तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) ब्रजलाल को लगी तो वह खुद को मातहतों के साथ छापा मारने पहुंच गए। गुर्गे तो भाग निकले लेकिन अतीक और उसको लाने वाले कई पुलिस कर्मचारी मौके पर मिल गए। पुलिस कर्मियों को तत्काल सस्पेंड किया गया। छानबीन में पता चला कि अतीक न सिर्फ तमाम बड़ी पंचायतों को निपटाता था बल्कि वह वहीं से पूरे गैंग को ऑपरेट करने लगा था। कई पुलिस अफसरों को भी उसने रडार पर लेने का निर्देश गुर्गों को दे रक्खा था। सिर्फ Uttar Pradesh ही नहीं बल्कि दूसरे प्रातों के तमाम बड़े गिरोहों से भी उसके कनेक्शन मिले। गैंग के खतरनाक मंसूबों और अपराधिक गतिविधियों को देख अफसरों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। बस यहीं से Kanpur का D-2 गिरोह अंतर्राज्यीय गैंग बन गया। तत्कालीन ADG (L/O) ब्रजलाल के निर्देश पर इस गिरोह को इंटर स्टेट (IS-273) के तौर पर पंजीकृत किया गया।  

आगरा जेल में शिफ्ट किया गया सरगना अतीक

Lucknow रेलवे स्टेशन के विश्रामालयमें छापेमारी के बाद अफसरों ने आनन-फानन में अतीक को सिद्धार्थनगर से आगरा की जेल में शिफ्ट कर दिया। लंबे समय से अतीक आगरी की जेल में ही बंद है। अतीक का एक भाई बाले कानपुर की जेल में है, गिरफ्तारी के बाद अफजल को भी कानपुर जेल भेजा गया है।

अपराध की पाठशाला का प्रिंसिपल है अतीक

www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में एक Police Officer’s ने गिरोह से जुड़ी तमाम जानकारियों को साझा करते हुए बताया कि अतीक को आप अपराध की पाठशाला का प्रिंसिपल है। या यूं कहें कि अतीक के पास किसी को बदमाश बनाने का जादू है। ब्रेन को वाश करने में भी एक्सपर्ट है। अतीक का हैदराबादी सिस्टम बेजोड़ है। यही वजह रही कि इस गिरोह में एक से बढ़कर एक खूंखार अपराधी और शार्प शूटर्स हुए। समीम दुरंगा, संजय गुप्ता, शानू बॉस, हसीन टुंडा, मोनू पहाड़ी, रईस बनारसी, अमजद बच्चा समेत दर्जन भर से अधिक शूटर्स अतीक के अपराध की पाठशाला से ही निकले। हालांकि बाद में ये सभी पुलिस के हाथों मारे भी गए। 


सरगना पर बॉलीवुड में फिल्म बाबरभी बन गई

D-2 गिरोह सरगना अतीक की जड़ें मुंबई में किस कदर फैली हैं कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गिरोह पर एक फिल्म भी बॉलीवुड में बन गई। फिल्म का नाम था बाबर। जानकारों की मानें तो फिल्म में तमाम से गलत तथ्यों को भी प्रस्तुत किया गया। फिल्म में सरगना की छवि को अलग तरह से पेश कर उसके साथ बचपन में ज्यादती दिखाई गई है। जानकारों की मानें तो बाबर फिल्म की पूरी कहानीसरगना के इशारे पर लिखी गई। बाद में इसी पर फिल्म भी बन गई। इस फिल्म के तमाम हिस्सों को कानपुर में ही शूट किया गया। शहर के मुस्लिम एरिया की तमाम तंग गलियों में शूटिंग इसकी गवाही है। फिल्म में शक्ति कपूर, ओमपुरी और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया।

 


  • 40 वर्ष पुराना है D-2 गैंग का अपराधिक इतिहास
  • 30 साल बाद मारा गया था गैंग का पहला सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू
  • 90 के दशक में ही गिरोह के तार अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम से जुड़े
  • D-2 गिरोह ने Pakistan निर्मित स्टार मार्का पिस्टलों की तस्करी भी की
  • अफजाल की गिरफ्तारी से D-2 गिरोह का जिन्न फिर से बोतल से बाहर आया

D-2 गिरोह का सरगना अतीक अहमद (Photo----साभार---पुलिस विभाग)

Yogesh Tripathi

Kanpur के जरायम इतिहास में नई सड़क का जिक्र सबसे पहले आता है। यहां 70 के दशक में पहलवानी को लेकर बाबू पहलवान और दुन्नू पहलवान के बीच वर्चस्व की जंग Start हुई थी। इसके बाद तो बाबू पहलवान के फहीम, अतीक पहलवान और शम्मू कुरैशी के बीच हुए खूंरेंजी में करीब 80 से अधिक हत्याएं हुईं। 

दरअसल अनवरगंज थाना एरिया के कुलीबाजार में फतेहपुर जनपद के (कोड़ा जहानाबाद) के अच्छे दहाना का गैंग ठेक (पनाह) खाता था। इस गिरोह के सदस्यों से कुलीबाजार के ही लूलूबक्श नाम के अपराधी ने अपना लोकल गैंग Active कर लिया। दुश्मनी अधिक हो जाने और पुलिस के रडारपर आने के बाद लूलूबक्श” Lucknow शिफ्ट कर गया और वहां से अपने गिरोह को ऑपरेट करने लगा। 

लूलूबक्श के एरिया छोड़ते ही 80/46 कुलीबाजार निवासी अतीक अहमद, रफीक, तौफीक उर्फ बिल्लू और अन्य भाई एरिया में छोटे-मोटे अपराध करने लगे। अतीक और उसके भाइयों का एक सौतेला भाई वशी था। वशीकी अपने सौतेले भाइयों से रंजिश थी। इसी वशीका बेटा टॉयसन बड़ा होकर अपराधी बना और बाद में पुलिस का मुखबिर भी हो गया। टॉयसन चकेरी के चर्चित पिन्टू सेंगर मर्डर केस में आरोपी है। D-2 गैंग का सबसे बड़ा दुश्मन टॉयसन ही है। गिरोह के सफाए के लिए अतीक और उसके भाई टॉयसन को ही जिम्मेदार मानते हैं। 

इस बीच वर्ष (2000) D-2 गैंग के एक नए दुश्मनका उदय हो गया। नाम था परवेज निवासी चमनगंज। जानकारों की मानें तो होटल में काम करने वाले परवेज के बहनोई के मकान पर अतीक के एक करीबी रिश्तेदार ने कब्जा कर लिया था। परवेज ने विरोध किया तो D-2 गिरोह ने परवेज की काफी बेइज्जती कर पिटाई की थी। इसका बदला परवेज ने न्यायिक रिमांड पर लाए गए रफीक की हत्या करके ली। इससे पहले परवेज दिनदहाड़े कचहरी परिसर में D-2 सरगना पर बमो से हमला कर सनसनी फैला चुका था।

 D-2 गैंग की नादिर और साबिर गिरोह से दुश्मनी भी खूब चली थी। दोनों के बीच कई बार गैंगवार में गोलियां और बम भी चले। बात D-2 गैंग की करें तो अकील और फहीम से जमीनों पर कब्जे, असलहों की अवैध बिक्री, रंगदारी, वसूली और शूटर्स को लेकर लंबे समय तक खूनी रंजिश चली। नब्बे के दशक में D-2 गिरोह की जड़ें मुंबई बम धमाकों के आरोपी Most Wanted अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद अहमद के अपराधिक कुनबे Connect हो गईं। Sunday को सुपारी किलर अफजल की राजस्थान प्रांत के मुरलीपुरा थाना एरिया में STF की तरफ से की गई गिरफ्तारी के बाद से कनपुरिया अंडरवर्ल्ड को फिर से चर्चा में ला दिया है।

अफजल उर्फ जावेद (फोटो-साभार-STF)

Encounter में मारा गया सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू

वर्ष 2004 तक D-2 गैंग आतंक का पर्याय बन चुका था। गैंग के सरगना अतीक अहमद समेत तमाम गुर्गों की दहशतगर्दी Kanpur से बाहर आसपास के जनपदों में भी बढ़ गई। वर्ष 2004 किदवई नगर थाने के तत्कालीन SO ऋषिकांत शुक्ला ने Encounter में गिरोह के सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू को मार गिराया। तब तक यह गिरोह करीब 30 साल पुराना हो चुका था। बिल्लू के मारे जाने के बाद गिरोह बैकफुट पर आ गया। बिल्लू का मारा जाना गिरोह के लिए बड़े सदमें की तरह था। बिल्लू का Encounter करने के बाद ऋषिकांत शुक्ला गिरोह के पीछे पड़ गए। गैंग के कई बदमाश उन्होंने उठाए लेकिन रफीक और अतीक लगातार बचते रहे। यूं कहें कि दोनों काफी समय के लिए अंडरग्राउंड रहे।

तौफीक उर्फ़ बिल्लू को Encounter में ढेर करने वाले इंस्पेक्टर (Rishi Kant Shukla)

मुखबिरी के शक में गैंग ने किए ताबड़तोड़ 5 Murder

सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू का Encounter में मारा जाना गिरोह के लिए बड़ा झटका था। बिल्लू के भाई अतीक और रफीक कई लोगों पर मुखबिरी की आशंका करने लगे। इसी चक्कर में गिरोह ने महज कुछ महीनों में ताबड़तोड़ हत्या की पांच बड़ी वारदातें कीं। इसमें सलीम मुसईवाला, नफीस मछेरा और कुलीबाजार की एक चर्चित महिला की हत्या में सभी नामजद भी हुए। कुछ ऐसी भी हत्याएं हुईं जिसमें गिरोह के लोगों के नाम उजागर नहीं हो सके। बिल्लू के मारे जाने के बाद गिरोह की कमान रफीक और अतीक ने संभाल ली।

इसके बाद गिरोह ने शहर के प्रापर्टी डीलरों से उगाही Start कर दी। बेबीज कंपाउंड परिसर तक को इस गैंग ने मोटी रकम के बदले खाली करवा दिया। इस बीच गिरोह के ताल्लुक हैदराबाद के एक बड़े तंबाकू कारोबारी से हो गए। गिरोह के बारे में जानकारी रखने वाले Police Officer’s की मानें तो इस कारोबारी से गिरोह को मोटी रकम की फंडिंग होने लगी। जिसके बाद दोनों भाइयों ने गिरोह को और मजबूत कर उसकी जड़ें देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक नगरी मुंबई तक फैला दीं। दाउद गैंग से लिंक होने के बाद बिल्लू का एक भाई दिल्ली में Pakistan निर्मित स्टार मार्का पिस्टलों की खेप के साथ पकड़ गया। लंबे समय तक वह तिहाड़ जेल में बंद भी रहा। तब खुफिया इकाइयों ने बड़ी लंबी छानबीन की थी। जिसमें पता चला था कि Pakistan निर्मित पिस्टलों की खेप इसके पहले भी कई बार लाई गई थी। Uttar Pradesh के Kanpur समेत कई जनपदों में इन पिस्टलों को तब बेंचा भी गया था।

हीरपैलेस में STF सिपाही की गिरोह ने हत्या की

करीब 16 साल पहले हीर पैलेस टॉकीज में फिल्म देखने पहुंचे नादिर और साबिर गैंग के लोग फिल्म देखने के लिए पहुंचे। वहां पर D-2 गैंग के समीम दुरंगा, संजय गुप्ता, अमजद उर्फ बच्चा, रफीक, नफीस समेत कई लोग हत्या के लिए पहुंच गए। सटीक मुखिबरी पर UPSTF ने घेराबंदी की तो गिरोह के समीम दुरंगा और तमाम गुर्गों ने सीधी गोलियां दागनी शुरु कर दीं। एक गोली STF के सिपाही धर्मेंद्र को लगी और वह शहीद हो गए। STF ने जवाबी कार्रवाई कर दो बदमाशों को Encounter में ढेर कर दिया।

रफीक ने कोलकाता में ली थी पनाह

STF सिपाही धर्मेंद्र की हत्या करने के बाद रफीक और अतीक दोनों ही अंडरग्राउंड हो गए। गिरोह के लोग भी भागते फिर रहे थे। STF सिपाही की हत्या के बाद अतीक और रफीक के सिर पर इनामी राशि बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी गई। संजय गुप्ता पर भी 50 हजार रुपए का इनाम घोषित हो गया। सर्विलांस सेल की मदद से कई महीने बाद रफीक की लोकेशन West Bengal के कोलकाता में मिली। Rishi Kant Shukla की अगुवाई में पुलिस की एक टीम कोलकाता पहुंची। दबिश के दौरान वहां पर रफीक से मुठभेड़ हो गई। वहां पर भी गोलियां चलीं लेकिन गनीमत रही कि Police Team का कोई भी जवान हताहत नहीं हुआ। मशक्कत के बाद अंतत: रफीक को Arrest कर कोलकाता की Court में पेश किया गया। इसके बाद बी-वारंट के जरिए पुलिस रफीक को Kanpur लाई।

न्यायिक रिमांड में हो गया रफीक का Murder

पुलिस ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर रफीक को पूछताछ और A.K-47 की बरामदगी के लिए रिमांड ली। कोर्ट ने पुलिस के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर रफीक की न्यायिक रिमांड दे दी। पुलिस टीम रफीक को लेकर जूही यार्ड जा रही थी कि वहीं पर रफीक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या के पीछे D-2 गैंग के परवेज का हाथ होना बताया था। हालांकि इस मामले में रफीक के परिजनों ने पुलिस पर ही कस्टडी में हत्या का इल्जाम लगाकर सनसनी फैला दी। यह मामला लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में भी बना रहा। रफीक के मरने के बाद मानों D-2 गिरोह की कमर टूट गई। रफीक की हत्या के बाद पुलिस ने परवेज का गिरोह D-34 पंजीकृत किया। परवेज के सिर पर इनाम की राशि 50 कर दी गई। इसके बाद परवेज STF के "रडार" पर आ गया। 2008 में STF ने परवेज का बिठूर में Encounter कर मार गिराया।

 

अगले अंक में पढ़िए.....

अतीक के लिए क्यों मारना पड़ा था Ex. ADG L/O ब्रजलाल को छापा