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वार्ड नंबर-38 के मतदाता किसे अपना पार्षद चुनेंगे ? यह किसी को नहीं पता लेकिन एक बात तय है कि यहां का चुनाव काफी दिलचस्प होगा। दो प्रत्याशियों के बीच तनाव के हालात भी बने हुए हैं। यह रिपोर्ट स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की है। शायद यही वजह रही है कि दो दिन पहले रात में एक मीटिंग के दौरान पूर्व विधायक ज्यादा समय नहीं ठहरे। पांच मिनट के बाद वो चले गए। अभी तक के त्रिकोणीय संघर्ष वाले चुनाव में BSP प्रत्याशी मुकेश चौधरी अन्य प्रत्याशियों से 21 बैठ रहे हैं। वोटिंग को अभी 24 घंटे बाकी है। सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो एक दिसंबर को ही पता चलेगा। 


[caption id="attachment_18375" align="aligncenter" width="640"] क्षेत्र में मतदाताओं के बीच पहुंचकर जनसंपर्क करते BSP प्रत्याशी मुकेश चौधरी (चौधरी डेरी वाले)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। नगर निकाय चुनाव के वोटिंग की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। ठीक 24 घंटे बाद मतदाता अपने पसंद का पार्षद चुनने के लिए वोट की चोट करेंगे। Kanpur के किदवईनगर एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर 38 में चुनाव त्रिकोणीय बन चुका है। सपा प्रत्याशी अपने परंपरागत वोटरों के बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक की तरफ से किए गए “सियासी प्रहार” से परेशान हैं तो दूसरी तरफ BJP प्रत्याशी अपने चुनाव को वो गति नहीं दे पाए हैं जिसकी उम्मींद की जा रही थी। कांग्रेस प्रत्याशी को भी लोग हल्के में नहीं ले रहे हैं लेकिन इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) के हाथी की मस्तानी चाल से भी विरोधी प्रत्याशी खौफजदा हैं। बसपा के कैडर वोट के साथ मुस्लिम वोटरों के बीच तगड़ी पैठ होने और कई जगहों पर सेंधमारी की वजह से BSP प्रत्याशी की पोजीशन मजबूत बनी हुई है। चुनाव परिणाम क्या होगा ? यह किसी को नहीं पता लेकिन बसपा के प्रत्याशी को विरोधियों के साथ मतदाता भी हल्के में नहीं ले रहे हैं। सभी कह रहे हैं कि हाथी वोटिंग वाले दिन कई पोलिंग पर चिग्घाड़ सकता है।



वार्ड में हैं कुल 14,572 मतदाता


इस वार्ड में कुल मतदाता 14572 के करीब हैं। जूही सफेद कालोनी, लुधौरा, करपात्री नगर, नटवनटोला, बारादेवी, लक्ष्मणपुरवा समेत कई मोहल्ले इस वार्ड के अंतर्गत आते हैं।

ब्राम्हण और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब-करीब बराबर


इस वार्ड में मुस्लिम और ब्राम्हण मतदाता करीब-करीब बराबर हैं। 30 से 35 के बीच ब्राम्हण हैं तो लगभग इतने ही प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। वार्ड में कई मूलभूत समस्याएं हैं। गंदगी के साथ जलभराव यहां की हमेशा से बड़ी समस्या रही है। खास बात यह है कि यहां BSP का कैडर वोट करीब ढाई हजार से अधिक है।


BSP से मुकेश चौधरी (चौधरी डेरी वाले) है प्रत्याशी


बहुजन समाज पार्टी ने इस वार्ड से युवा और जुझारू चेहरे पर दांव खेलते हुए मुकेश चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया है। मुकेश चौधरी की गौशाला में चौधरी डेरी के नाम से प्रतिष्ठित फर्म है। स्थानीय लोग उनसे काफी भली-भांति परिचित हैं। मुकेश चौधरी के चुनाव में बसपा के पदाधिकारी भी अपनी ताकत झोंके हुए हैं। स्थानीय युवा वर्ग का उनको खास समर्थन तो मिल ही रहा है। अंदर ही अंदर दूसरे राजनीतिक दलों के लोग उनको समर्थन देकर चुनाव को काफी मजबूत किए हैं। सौम्य और मृदुभाषी स्वभाव के मुकेश चौधरी करीब-करीब हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। मुस्लिम वोटरों के बीच भी उन्होंने तगड़ी सेंधमारी की है। चुनाव प्रचार के मामले में भी वह अन्य प्रत्याशियों से पूरे चुनाव में 21 बैठे हैं। इन सबका वह चुनाव में तगड़ा एडवांटेज ले सकते हैं।


BJP ने शुभम बाजपेयी पर खेला हैं दांव


भारतीय जनता पार्टी ने इस वार्ड से शुभम बाजपेयी पर दांव लगाते हुए उनको अपना प्रत्याशी बनाया है। शुभम के लिए प्लस प्वाइंट यह है कि इस वार्ड में RSS और संगठन के तमाम कार्यकर्ता और नेता रहते हैं। जिसका फायदा उनको वोटिंग वाले दिन मतदाताओं को बाहर निकलवाने में मिलेगा। हालांकि शुभम को टिकट मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर कई नेताओं के विरोध का सामना भी उनको करना पड़ा था लेकिन बाद में हाईकमान की पहल पर डैमेज कंट्रोल को मैनेज कर लिया गया। शुभम बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के सहारे ही चुनावी लड़ाई में बने हैं। वह कहीं सेंधमारी नहीं कर सके।

कांग्रेस से सिद्धार्थ सिंह है मैदान में


कांग्रेस ने पूर्व पार्षद सिद्धार्थ सिंह को टिकट दिया है। सिद्धार्थ सिंह की सभा में ही अजय कपूर ने सीएम को देशद्रोही कहते हुए अपशब्द कहे। राजनीति के जानकार पंडितों की मानें तो वीडियो वायरल होने के बाद उनको एक वर्ग से तगड़ा नुकसान होने की प्रबल आशंका हैं तो दूसरी तरफ दूसरे वर्ग का वह कुछ प्रतिशत वोट वो काटेंगे। यह वोट काटने से सीधा नुकसान सपा को हो रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि दूसरे वर्ग में बसपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी पहले ही तगड़ी सेंधमारी कर चुके हैं।

सपा से नसरुद्दीन हैं प्रत्याशी


समाजवादी पार्टी ने इस वार्ड से नसरुद्दीन को प्रत्याशी बनाया है। नसरुद्दीन चुनाव के शुरुआत में ठीक चुनाव उठाए थे लेकिन तीन दिन पहले कांग्रेस प्रत्याशी की सभा में कांग्रेस के पूर्व विधायक की तरफ से यूपी सीएम के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का उनको सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सपा की तरफ से भी इस मुद्दे को लेकर कोई विरोध नहीं दर्ज कराया गया। सूत्रों की मानें तो विरोधी खेमा नसरुद्दीन की तरफ से आयोग को दिए गए शपथ पत्र के सत्यता की जांच में भी जुटा है। विरोधी उनके शैक्षणिक योग्यता के बाबत गहराई से छानबीन करवा रहे हैं।

अभी तक त्रिकोणीय रहे चुनाव में हो सकती है सीधी टक्कर


राजनीति के जानकर लोगों की मानें चुनाव मंडे तक यह चुनाव त्रिकोणीय संघर्ष की स्थित में था लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं को वोटिंग वाले दिन यह चुनाव सीधी टक्कर वाला भी बन सकता है। यह तब होगा जब यहां पर ध्रुवीकरण की राजनीति होगी। हालांकि कैडर के ढाई हजार वोट, मुस्लिम वोटरों में सेंधमारी कर बसपा प्रत्याशी का हाथी मस्तानी चाल में हैं। बाकी प्रत्याशी किसी न किसी समस्या से ही जूझ रहे हैं।

 

वार्ड नंबर 36 में निर्दलीय प्रत्याशी एहसान अली का चुनावी वादों वाला बैनर लोगों के लिए हंसी का साधन बन गया है। जो भी इस बैनर पर लिखे गए चुनावी वादों को पढ़ता है वो अपनी हंसी का फौव्वारा कुछ देर के लिए रोक ही नहीं पाता है। इस बैनर के माध्यम से अपने चुनावी वादे करते हुए एक सज्जन ने लिखा है कि वह चुनाव जीते तो GST खत्म कर देंगे। हालांकि यह बैनर कानपुर का नहीं है, लेकिन कहां का यह भी पता नहीं चल सका है।


[caption id="attachment_18357" align="aligncenter" width="695"] वार्ड नंबर 36 में लगाया गए इस बैनर को पढ़ने के बाद कोई अपनी हंसी रोक नहीं पा रहा है। भाई जब फेंकना है तो हम भी थोड़ी सी फेंक लें।[/caption]

महिलाओं के लिए फ्री मेकअप किट देंगे

अपने चुनावी वादे में निर्दलीय प्रत्याशी एहसान अली ने महिलाओं को फ्री में मेकअप किट दिए जाने की बात लिखी है। साथ ही उन्होंने यह भी वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वह पेट्रोल की कीमत 25 रुपए कर देंगे। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी वादा किया है कि बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करके वह पानी की लाइन ऊपर से निकाल देंगे। साथ ही इन्होंने हर परिवार को एक स्कूटी फ्री देने का वादा किया है।

सरकारी नौकरी के साथ तीन हवाई अड्डे भी मिलेंगे क्षेत्र की जनता को 

एहसान अली ने बैनर में क्षेत्रीय जनता से वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वह लद्धावाला में तीन हवाई अड्डे बनवाने के साथ वार्ड के सभी लोगों को सरकारी नौकरी भी मुहैया कराएंगे। उनका यह बैनर अब सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।

BJP से पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट जारी होन के बाद घमासान तेज हो चुका है। कांग्रेस जो कई दिनों से बीजेपी की लिस्ट का ही इंतजार कर रही थी, अब उसकी बांहे खिल सी गई हैं। सूत्रों की मानें तो एक पूर्व विधायक और एक पूर्व मंत्री की चौखट पर बीजेपी के उन कार्यकर्ताओं की भीड़ शनिवार रात से लगी है जिनके टिकट मंत्रियों और माननीयों के कारखासों ने कटवा दिए हैं। सूत्रों की मानें तो BJP के ये पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता अब सीधे तौर पर कांग्रेस का दामन थाम चुनाव निशान पंजे पर लड़नेकी तैयारी कर चुके हैं। करीब आधा दर्जन वार्डों में यह समीकरण बीजेपी को भारी पड़ेगा। 




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। केंद्र और यूपी की सत्ताधारी BJP ने शनिवार देर शाम को Kanpur नगर निगम के 109 वार्डों में अपने प्रत्याशियों की List जारी कर दी। BJP की सूची जारी होते ही दावेदारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया। इन सबके बीच टिकट कटने से मायूस कई दिग्गज दावेदारों ने कांग्रेस के एक Ex.MLA और एक Ex.Minister की चौखट पर रात में ही डेरा डाल दिया। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो करीब दर्जन भर वार्ड ऐसे हैं जहां “बागी” कांग्रेस के चुनाव निशान पंजा के जरिए भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों को “तमाचा” की तैयारी करीब-करीब पूरी कर चुके हैं। वहीं कुछ ऐसे भी दावेदार रहे जो थोड़ा विलंब हो गए, नहीं तो यह संख्या और अधिक हो सकती थी। www.redeyestimes.com से बातचीत में एक कार्यकर्ता ने तो यहां तक कह दिया कि हमारे नेता नरेंद्र मोदी हैं, हमने मोदी के नाम पर वोट दिया और मेहतन की। नरेंद्र मोदी का कहना है कि न खाएंगे और न खाने देंगे। इस लिए हम यही करने जा रहे हैं।


कांग्रेस से बागी प्रत्याशियों को लड़ाने का सपना देख रही थी BJP

बात महज तीन दिन पहले की है। बीजेपी के कई कद्दावर नेता कांग्रेस के एक पूर्व विधायक को चुनावी “चक्रव्यूह” में घेरने की तैयारी कर रहे थे। चूंकि कांग्रेस के पैनल से सिंगल-सिंगल नामों की लिस्ट हाईकमान के पास भेजी गई थी। इस लिए बीजेपी के कई विरोधी नेता कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को बगवात करा उनको अधिकृत प्रत्याशियों के समानांतर चुनाव लड़वाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुके थे। उसके पीछे तर्क यह था कि यदि बागी ने 100-200 वोट भी काट दिए तो बीजेपी प्रत्याशियों की राह बेहद आसान हो जाएगी लेकिन हो गया सबकुछ उल्टा-पुल्टा। अब यही काम बीजेपी के साथ Ex.MLA करने जा रहे थे।



किदवईनगर और गोविंदनगर विधान सभा की बनाई जा रही रणनीति

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के एक दिग्गज नेता जो विधायकी का चुनाव हार चुके हैं वो अपनी विधान सभा के साथ पड़ोस की विधान सभा को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरा ब्लूप्रिंट देर रात तक तैयार करते रहे। जिताई और दमदार प्रत्याशियों के नामों पर देर रात तक मंथन चला। माना जा रहा है कि विधान सभा चुनाव चार साल बाद है लेकिन यह दिग्गज नेता उसकी तैयारी अभी से कर रहे हैं ताकि आगे राह आसान हो सके।

कई जगहों पर निर्दलीय फूकेंगे बगावत का बिगुल

बीजेपी के बाद जिन दावेदारों को कांग्रेस से भी टिकट नहीं मिली वह निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से अपने वार्डों में बगावत का बिगुल फूंकेंगे। ऐसे प्रत्याशियों की संख्या करीब दर्जन भर के आसपास बैठ रही है। सबसे अधिक संख्या साउथ सिटी के गोविंदनगर और किदवईनगर एरिया में है। कुछ यही हाल यूपी सरकार के मंत्री सतीश महाना की विधान सभा में भी है। यहां भी आधा दर्जन सीटों पर “बागी” बगावत का डंका बजाएगें।

मंत्रियों और माननीयों के पेड कर्मचारियों ने किया बंटाधार

टिकट कटने से आक्रोशित दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की मानें तो “माननीय” और मंत्रियों के पेड कर्मचारियों (कारखास) ने बीजेपी की लुटिया डुबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आरोप है कि इन कारखासों ने मोटी रकम लेकर माननीयों और मंत्रियों को बरगला कर टिकट बाहर से आए लोगों को दिलवा दी। एक कार्यकर्ता ने www.redeyestimes.com से बातचीत में कहा कि हमारे नेता नरेंद्र मोदी जी है। हमने बीजेपी को नहीं नरेंद्र मोदी को वोट दिया था। नरेंद्र मोदी जी का कहना है कि “न खाएंगे न खाने देंगे”। इस लिए हम उनके निर्देश का पालन करेंगे।

 

 

 

BJP कानपुर नगर की तरफ से अभी तक पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट नहीं जारी की गई है। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी का कहना है कि उनके पास अभी तक कोई लिस्ट नहीं आई है। वहीं RSS सूत्रों की मानें तो लखनऊ में लिस्ट फाइनल होने के बाद एक बड़े पदाधिकारी लेकर कानपुर आ चुके हैं। लिस्ट दो बड़े नेताओं के वाट्सअप पर भी भेजी गई है। एक भवन में लिस्ट के रखे होने की बात कही जा रही है। देर रात तक दावेदार लिस्ट के लिए परेशान रहे।




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। Kanpur शहर के माननीयों के कर्मचारियों की मनमानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। अपने माननीयों को बरगलाने वाले पेड कर्मचारियोंने कई निष्ठावान और बीजेपी को पूरा जीवन समपर्ण करने वाले दिग्गज दावेदारों की प्रत्याशिता का पत्ता पूरी तरह से साफ कर दिया है। अंदरखाने की मानें तो बीजेपी से टिकट नहीं पाए कई दिग्गज जल्द ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इसके लिए कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की तरफ से मुहिम भी चलाई जा रही है। जानकारों की मानें तो टिकट मिलने से जो कार्यकर्ता नाराज हैं, उन्हें धनबल के जरिए कांग्रेस के एक दिग्गज बागी प्रत्याशी बनाकर बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।

पार्षद प्रत्याशियों के टिकट को लेकर अभी तक हो रही छीछालेदर

बीजेपी में पार्षद प्रत्याशियों के टिकट वितरण में शुरु से ही किचकिच मची रही। एक-एक सीट पर दर्जन भर से अधिक दावेदारों ने आवेदन किया। मंडल अध्यक्षों ने पांच नामों की लिस्ट जिला कमेटी को दी। जिला कमेटी ने तीन नामों का चयन कर उसे हाईकमान तक आगे बढ़ाया। लेकिन सबसे मजेदार बात यह रही है कि कई जगहों पर जिन दावेदारों का नाम तीन की लिस्ट में भी शामिल नहीं था, उन्हें टिकट दे दी गई। उदाहरण के तौर पर वार्ड नंबर 16 जूही परमपुरवा। BJP और RSS सूत्रों की मानें तो यहां से दीपू का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर भेजा गया था लेकिन फ्राइ-डे को लखनऊ की मीटिंग में राकेश पासवान को टिकट मिल गई। www.redeyestimes.com ने जब इस वार्ड में जाकर पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली। दीपू का टिकट कटने से बीजेपी का कार्यकर्ता पूरी तरह से निराश है। ये वार्ड सिर्फ उदाहरण के तौर पर है, शहर के करीब दर्जन भर से अधिक वार्ड ऐसे हैं जहां सबकुछ “माननीयों” के “जेबी कर्मचारियों” ने सबकुछ उल्टा-पुल्टा करवा दिया है।

दो दिन का समय शेष और लिस्ट तक नहीं जारी कर रहे भाजपा के दिग्गज

दो दिन का समय शेष बचा है लेकिन बीजेपी के पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट तक बीजेपी की तरफ से फाइनल नहीं की गई है। दावेदार परेशान हैं, कोई अखबार के दफ्तर में फोन लगा रहा है तो कोई अपने आका को लेकिन लिस्ट फिर भी नहीं जारी की गई। RSS के कद्दावर पदाधिकारी की मानें तो लखनऊ में सूची फाइनल होने के बाद संगठन के एक बड़े पदाधिकारी सूची लेकर कानपुर पहुंचे। संदेश दिया गया कि शाम सात बजे लिस्ट जारी की जाएगी लेकिन देर रात तक ऐसा नहीं किया गया। www.redeyestimes.com ने जब बीजेपी के उत्तर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं अध्यक्ष हूं। मेरे पास लिस्ट की कोई जानकारी नहीं है। जो भी जानकारी आएगी वह पहले मेरे पास ही आएगी। लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि आखिर लिस्ट कब तक आएगी।

सिंबल के साथ चढ़ावे के तैयारी की चर्चा

BJP सूत्रों की मानें तो सबकुछ OK हो चुका है। लिस्ट भी आ चुकी है लेकिन उसे जानबूझकर कुछ “माननीयों” के कर्मचारियों की वजह से रोके रखा गया है। चर्चा है कि सिंबल के साथ चढ़ावे की तैयारी भी कुछ लोगों ने कर रखी हैं। हालांकि ऐसा होने पर कुछ नया नहीं होगा। वर्ष 20912 के चुनाव में भी सिंबल के साथ देर रात तक खूब चढ़ावा लिया गया था।

दर्जन भर सीटों पर बीजेपी के बागी बनेंगे जी का जंजाल

रिश्तेदारों, करीबियों और अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को टिकट दिलवाने के लिए कई दिनों से दिन-रात एक किए “माननीयों” की परेशान अभी और बढ़ेगी। यह परेशानी बीजेपी के बागी कार्यकर्ता चुनाव लड़कर देंगे। सूत्रों की मानें तो करीब दर्जन भर सीटें ऐसी हैं जहां पर बागियों का लड़ना फाइनल है। लेकिन चार से छह सीटें ऐसी भी हैं जहां से बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ता टिकट न मिलने की वजह से कांग्रेस का दामन थाम चुनाव लड़ेंगे।

 

"माननीयों" की मनमानी के चलते गोविंद नगर, किदवई नगर विधान सभा के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों के पार्षद प्रत्याशियों की सूची नहीं जारी की गई। अन्य विधानसभाओं में प्रत्याशियों के नाम तय हो चुके हैं लेकिन यहां पर यह काम भी नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो शुक्रवार दोपहर तक सूची जारी हो सकती है। कई सीटों पर विवाद इतना गहरा है कि संगठन के दिग्गज भी परेशान हैं।




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। पार्षदी के टिकट के लिए “माननीयों” की मनमानी से आखिर गोविंदनगर और किदवईनगर विधान सभा की करीब तीन दर्जन सीटों पर BJP में “सियासी रायता” फैल ही गया। “सियासी रायता” फैलते ही UPBJP के “चाणक्य” का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने दोनों ही विधान सभा की सूची पूरी तरह से रोक दी। RSS के पदाधिकारी की मानें तो कई सीटों पर “माननीयों” ने इसे मूंछ की लड़ाई बना ली है। अंदरखाने की मानें तो मंगलवार को जिन 27 दावेदारों की प्रत्याशिता पर मुहर लगी थी, उसमें कई का पत्ता भी इन “माननीयों” ने साफ कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच सबसे खास चर्चा यह रही कि दक्षिण बीजेपी की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता ने मीटिंग में न जाने की बात कह दी। सूत्रों की मानें तो यदि बीजेपी प्रेसीडेंट नहीं पहुंची तो किदवईनगर से एक दिग्गज का टिकट कटना करीब-करीब पक्का है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार दोपहर तक दोनों विधान सभाओं की लिस्ट फाइनल हो सकती है।

किदवईनगर की विवादित सीटें

-वार्ड नंबर 100 पर काफी उहापोह की स्थित बनी हुई है। यहां से मंगलवार को प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगने के बाद अंदरखाने से चर्चा है कि प्रत्याशी का टिकट काटकर एक "माननीय" के बेहद करीबी को टिकट दी जा रही है। जिसे टिकट दी जा रही है उसके बारे में बताया जा रहा है कि वह बसपा के एक कद्दावर नेता के काफी करीबी रहे हैं।

-वार्ड नंबर 38 में सबसे तगड़े दावेदार बीजेपी दक्षिण के एक पूर्व प्रेसीडेंट के सगे भतीजे बताए जा रहे हैं। यह ऐसा वार्ड है जहां से बीजेपी ने कभी चुनाव नहीं जीता। संगठन की नजर में पूर्व प्रेसीडेंट का भतीजा सबसे ताकतवर और मजबूत प्रत्याशी है लेकिन बीजेपा का एक धड़ा इस मजबूत प्रत्याशी का पत्ता साफ कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए है। जिलाध्यक्ष की तरफ से भेजी गई तीन दावेदारों की लिस्ट में पूर्व प्रेसीडेंट के भतीजे का नाम सबसे ऊपर है। इस सीट से एक आवेदक अपनी टिकट पक्की मान पूरे दिन मिठाई बांटते रहे। माना जा रहा है कि मिठाई खिलाकर लोगों का मुंह मीठा कराने वाले आवेदक को सिग्नल मिल चुका है।



-वार्ड नंबर 84 इस सीट पर तीन सबसे मजबूत दावेदार हैं। ठाकुर बिरादरी की मजबूत प्रत्याशी को संगठन पहली पसंद बनाए है लेकिन यहां पर BJP की पसंद कोई और है। वर्तमान पार्षद की पैरवी में बीजेपी का एक गुट है। वहीं एक बीजेपी पार्षद की पत्नी के लिए “माननीय” लगे हैं। कुल मिलाकर माहौल यहां पर भी बिल्कुल ठीक नहीं है।

-वार्ड नंबर 88 और 65 में जातिगत समीकरण को लेकर ऊहापोह की स्थित बनी है। BJP के बड़े सूत्रों की मानें तो यहां पर एक से ठाकुर और एक से ब्राम्हण बिरादरी को टिकट देने के लिए प्लान तैयार किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर वह भी बिगड़ गया था। हालांकि यहां पर यही समीकरण ही बैठेगा। दो वार्डों में से एक में पंडित और एक में ठाकुर प्रत्याशी बनाया जाएगा।

-वार्ड नंबर 93 इस वार्ड से मंगलवार को नवीन पंडित के नाम पर सहमति बनी। बुधवार को नवीन पंडित से कह दिया गया कि तुम अपनी पत्नी नीतू पंडित को वार्ड 67 से लड़वाओ। 93 से बीजेपी के राजेश श्रीवास्तव को उतार दिया गया। गौरतलब है कि यह सीट पंजाबी बाहुल्य मतदाताओं वाली है। देवेंद्र सब्बरवाल का टिकट कांग्रेस से बिल्कुल तय है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी के ही एक बड़े सिंडीकेट ने यह सीट कांग्रेस के एक बड़े नेता को फायदा पहुंचाने के लिए “हाईजैक” करवाई है। उसके पीछे तर्क यह है कि नवीन पंडित से बेहतर फाइट देवेंद्र सब्बरवाल को और कोई दे नहीं सकता था। इस लिए सबसे बड़े रोड़े को पूरी प्लानिंग के तहत साफ कर दिया गया।

-वार्ड नंबर 48 इस सीट से बीजेपी ने एक कांग्रेसी नेता के बिजनेस पार्टनर के नाम पर करीब-करीब मुहर लगा दी है। चर्चा है कि इस सीट से राजेश श्रीवास्तव ने काफी मेहनत की थी। लेकिन उनको योजना के तहत 93 में शिफ्ट कर दिया गया। वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर अश्वनी चड्ढा का नाम करीब-करीब फाइनल है। जानकारों की मानें तो यह सीट भी बेजीपी ने वॉकओवर में दे दी।

गोविंदनगर विधान सभा की विवादित सीटें

वार्ड नंबर-33 यह सीट एक माननीय के लिए नाक का सवाल बनी हुई है। RSS सूत्रों की मानें तो जिसके लिए पैरवी की जा रही है, संगठन उसे कतई पसंद नहीं कर रहा है। उसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि आवेदक के खिलाफ संगीन धाराओं में कई मुकदमें पंजीकृत हैं। साथ ही सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कुछ दिन पहले एक आवेदक को धमकी देने का मामला। यूपी बीजेपी नेतृत्व के पास इसकी शिकायत संगठन ने पहुंचाई है। लेकिन “माननीय” नाम को फाइनल कराने में अड़े हुए हैं। कुल मिलाकर इस सीट पर “रायता” अधिक फैल चुका है।

-वार्ड नंबर 86 पर एक साल के बुजुर्ग के लिए माननीय ने तो प्रतिष्ठा फंसाई ही है साथ ही कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने भी इसी नाम पर सहमति देकर सभी को अचंभे में डाल दिया है। यहां संगठन की पहली पसंद एक पुराने कार्यकर्ता की पत्नी बनी हैं। इस कार्यकर्ता के बारे में कहा जाता है कि करीब 25 बरस से वह संघ और बीजेपी के सेवा करते आ रहे हैं। सपा के शासनकाल में उन पर कई मुकदमें भी इसी खुन्नस में दर्ज हुए।

-वार्ड नंबर 60 रावतपुर गांव इस वार्ड से RSS के प्रांतीय स्तर के बेटे ने दावा ठोका हैं। उनकी पैरवी संघ के लोग कर रहे हैं, जबकि “माननीय” की पैरवी अपन करीबी के लिए है। लेकिन दावा मजबूत मौजूदा पार्षद रामऔतार प्रजापति का बन रहा है।

-रतनलाल नगर वार्ड- इस वार्ड से “माननीय” ने अपनी साली के लिए टिकट मांगा है। जिनके लिए टिकट मांगा गया है वह पार्षद मनीष शर्मा की धर्मपत्नी है। लेकिन यहां पर संगठन की  पहली पसंद कोई और है।  

नोट- दोनों ही विधान सभाओं में करीब 10 और सीटें ऐसी हैं, जहां पर विवाद तगड़ा है।

 

नगर निकाय चुनाव को लेकर एक तरफ जहां सत्ताधारी दल BJP में टिकट के लिए मारामारी मची है तो दूसरी तरफ कांग्रेस में सन्नाटा पसरा है। बेहद गोपनीय तरीके से नगर निकाय चुनाव में अपनी तैयारियों को अंजाम दे रही कांग्रेस के लिए जल्द ही बेचैनी भरी खबर आ सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस के खिलाफ साउथ सिटी के 18 वार्डों में बागी प्रत्याशियों को खड़ा करने की पूरी तरह से तैयारी की जा चुकी है। ऐसा एक दिग्गज को हाशिए पर लाने के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन 18 वार्डों से पैनल के पास सिर्फ सिंगल नाम ही प्रत्याशिता के लिए भेजे गए हैं अब तक। 




 

 

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। नगर निकाय के चुनाव का शंखनाद होने के बाद जहां सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मेयर से लेकर पार्षदी तक का टिकट पाने के लिए मारामारी मची है तो दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में जोरदार सन्नाटा पसरा है। लेकिन शहर की राजनीति के कुशल पंडित कहे जाने वाले कुछ “चाणक्य” कांग्रेस में छाए सन्नाटे को दूर करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल को मिली एक बेहद अहम जानकारी के मुताबिक Kanpur के South City के अंतर्गत आने वाले करीब 18 वार्डों में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के समानांतर “बागी” भी जोरदार अजमाइश करेंगे। इसके लिए पूरा “ब्लूप्रिंट” तैयार हो चुका है। “बागी” प्रत्याशियों को टानिक देने के लिए कांग्रेस का एक खेमा पूरी तरह से कमर कसकर तैयार है।

अधिकांश सीटों पर हाईकमान को सिंगल नाम ही भेजे गए

कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा है कि साउथ के करीब डेढ़ दर्जन वार्डों में अधिकांश पर सिंगल नाम ही भेजे गए। दूसरे किसी ने या तो आवेदन नहीं किया या फिर करने नहीं दिया गया। इन 18 सीटों पर कांग्रेस करीब 4 वार्ड पूरी तरह से जीतने की स्थित में है। दो वार्डों में तो उसके पास वर्तमान में पार्षद हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस का एक धड़ा पूरी तरह से एक दिग्गज का समीकरण बिगाड़ने की तैयारी कर चुका है। इसकी कवायद पिछले करीब एक सप्ताह से चल रही थी। “बागी” प्रत्याशियों की लिस्ट भी करीब-करीब फाइनल हो चुकी है। जल्द ही इनके नामांकन भी होंगे।

बागी प्रत्याशी बिगाड़ देंगे कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का खेल

राजनीति में सियासी चौसर बिछा रहे चाणक्यों की मानें तो बागी प्रत्याशी कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का पूरा खेल बिगाड़ेंगे। इसका सीधा एडवांटेज BJP प्रत्याशियों को मिलेगा। कई सीटों पर बागी प्रत्याशी अधिकृत प्रत्याशियों से कहीं अधिक भारी बैठेगें।

तीन सीटों पर BJP चलेगी अपने तुरुप का इक्का

BJP के अंदरखाने में जो चर्चा है उसके मुताबिक पार्टी तीन सीटों पर अपने “तुरुप का इक्का” ही चलेगी। मतलब साफ है कांग्रेस के दिग्गजों के खिलाफ दबंग लोगों को टिकट देने का पूरा प्लान बन चुका है। सिर्फ औपरचारिकता मात्र ही बाकी है।

 

कानपुर मेयर की प्रत्याशिता को लेकर अंदरखाने में बहुत कुछ चल रहा है। संगठन के "चाणक्य" कहे जाने वाले एक पदाधिकारी ने करीबी विधायक के जरिए कानपुर दक्षिण की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता के नाम को आगे बढ़वाया है। सौम्य स्वभाव और मृदुभाषी अनीता गुप्ता को प्रेसीडेंट बनवाने में संगठन के इसी बड़े पदाधिकारी का अहम रोल रहा था। जानकारों की मानें तो संगठन और शीर्ष नेतृत्व में काफी मजबूत पकड़ रखने वाले पदाधिकारी ने बेहद गोपनीय तौर से अनीता के नाम को आगे बढ़वाने के लिए लामबंदी करवाई है। जो काफी हद तक सफल भी रही।


[caption id="attachment_18012" align="aligncenter" width="720"]anita gupta, redeyestimes.com अनीता गुप्ता (प्रेसीडेंट, भारतीय जनता पार्टी, कानपुर दक्षिण)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। Kanpur मेयर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अंदर पनप रहे असंतोष के बीच एक नया नाम उभर कर सामने आया है। ये नाम है BJP कानपुर दक्षिण की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता का। बड़े सूत्रों की मानें तो यूपी सरकार के एक मंत्री, और कई विधायकों के साथ-साथ भाजपा की धरोहर कहे जाने वाले कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने भी करीब-करीब अपनी “मौन” स्वीकृति दे दी है। BJP के धुरंधरों की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो अनीता गुप्ता के नाम पर हाईकमान अपनी मुहर लगा सकता है। हालांकि वहीं दूसरा धड़ा शैक्षणिक कारोबारी के घराने के लिए अभी भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए है।




चाणक्य की चली तो अनीता के नाम पर ही लगेगी मुहर

BJP सूत्रों की मानें तो संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके बड़े पदाधिकारी को लोग किसी “चाणक्य” से कम नहीं आंकते हैं। इसी चाणक्य के जरिए ही अनीता गुप्ता कानपुर दक्षिण बीजेपी की प्रेसीडेंट बनीं। जानकारों की मानें तो “चाणक्य” की अगुवाई में यूपी विधान सभा का इलेक्शन लड़ने वाली भाजपा ने कानपुर-बुन्देलखंड की 54 में से 42 सीटें अपनी झोली में डाली थी। इसमें अहम रोल “चाणक्य” का ही रहा था। अंदरखाने की मानें तो संगठन के इस पदाधिकारी पर भाजपा हाईकमान एक बार फिर नगर निकाय के चुनाव में अपना भरोसा दिखा रहा है। एक बड़े पदाधिकारी की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो अनीता गुप्ता के नाम पर आम सहमति बननी करीब-करीब तय है। चर्चा तो यह भी है कि निर्विवाद छवि और सौम्य व्यवहार की धनी अनीता गुप्ता का नाम “चाणक्य” ने खुद ही अपने करीबी एक विधायक के जरिए आगे बढ़वाया है।



पितामह, तीन विधायकों, एक मंत्री की तरफ से ग्रीन सिग्नल

अनीता गुप्ता की निर्विवाद छवि उनकी प्रत्याशिता का सबसे बड़ा हथियार बनाकर बीजेपी का एक धड़ा उनके नाम को हाईकमान तक पहुंचा चुका है। अनीता के नाम की अंदर ही अंदर पैरवी कर रहे बीजेपी के एक विधायक ने गोपनीय तौर पर नाम को संगठन, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच आगे किया। गोपनीय तौर पर नाम आगे करने की सबसे बड़ी वजह यह रही है कि विधायक की मंत्रीजी से बिल्कुल भी नहीं बनती। यदि विधायक खुलकर सामने आते तो संभव था कि मंत्री जी सीधे सहमति नहीं देते। यही वजह रही है कि अंदर ही अंदर सबकुछ मजबूत करने के बाद अनीता गुप्ता का नाम आगे किया गया। सूत्रों की मानें तो अनीता गुप्ता के नाम पर कानपुर के सांसद, तीन विधायक, एक वर्तमान विधायक और एक मिनिस्टर की मौन स्वीकृति बन चुकी है। आगे की रणनीति और प्रत्याशिता पर फाइनल मुहर संगठन के “चाणक्य” पर निर्भर है। चूंकि चाणक्य की पकड़ सीधे हाईकमान तक है इस लिए बीजेपी का यह खेमा पूरी तरह से आश्वस्त है कि टिकट अनीता गुप्ता की ही फाइनल होगी।



अनीता गुप्ता के नाम पर RSS की भी लगेगी मुहर

माना जा रहा है कि मेयर सीट पर अनीता गुप्ता के नाम को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) कतई विरोध नहीं करेगा। उसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि महिला कार्यकर्ताओं में कमलावती को छोड़कर और कोई दूसरा गंभीर प्रत्याशी नहीं है। लेकिन कमलावती की पैरवी में कोई बड़ा दिग्गज न होने की वजह से यह उनके लिए अभी तक माइनस फैक्टर भी साबित हो रहा है।

एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं BJP के दिग्गज

बात मेयर की प्रत्याशिता को लेकर हो रही है लेकिन अनीता गुप्ता के नाम को बेहद गोपनीय तौर से आगे बढ़ा रहे दिग्गज भविष्य की राजनीति को लेकर एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। जानकारों की मानें तो अनीता गुप्ता को टिकट दिलाने के बाद यदि भाजपा नेता उनको चुनाव जितवा लेते हैं तो वह शहर और आसपास की सबसे ताकतवर वैश्य नेता बन जाएंगी। इससे कानपुर के ही एक दिग्गज वैश्य नेता का कद घटेगा और विरोधी धड़ा उन पर हावी हो पाएगा। फिलहाल जनप्रतिनिधि रह चुके इस वैश्य नेता की संगठन और शीर्ष नेतृत्व में सीधी पकड़ है।

[caption id="attachment_18013" align="alignleft" width="507"] सुरेंद्र मैथानी (प्रेसीडेंट, भारतीय जनता पार्टी, कानपुर उत्तर )[/caption]

BJP कार्यकर्ताओं के बीच से ही किसी को मिलेगी टिकट : सुरेंद्र मैथानी

कानपुर भाजपा उत्तर जिला के प्रेसीडेंट सुरेंद्र मैथानी ने www.redeyestimes.com से बातचीत करते हुए कहा कि अभी तक किसी के नाम पर मुहर नही लगी है। बाहरी को टिकट देने के सवाल पर सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि BJP हाईकमान कार्यकर्ताओं के बीच से ही किसी को टिकट देगा। भाजपा के सभी कार्यकर्ता मिलकर प्रत्याशी को मेयर का चुनाव जिताएंगे। उन्होंने कहा कि मेयर के लिए कई लोगों के नाम चल रहे हैं लेकिन अभी तक किसी का नाम हाईकमान ने फाइनल नहीं किया है। गुटबाजी और धड़ेबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं।

 

लंबे समय से पार्षद की तैयारी कर रहे कई दिग्गज दावेदारों ने टिकट पक्की करवाने के लिए "बाजरा" खोल दिया है। उनके "बाजरा" खोलते ही अन्य दावेदारों में खलबली मच गई है। सभी दावेदार अब अपने-अपने आकाओं की चौखट पर सुबह से लेकर शाम तक डेरा जमाए हैं। इन दावेदारों के डेरा जमाने की वजह से BJP के कई बड़े नेताओं के लिए परेशानी की वजह बन चुकी है। कई नेता अब दावेदारों के फोन तक नहीं उठा रहे हैं।




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कानपुर। नगर निकाय चुनाव के तिथियों का शंखनाद होने में महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं। जिला प्रशासन चुनाव की तैयारियों में व्यस्त है तो प्रत्याशी अपनी टिकट पक्की करने में जुटे हैं। सबसे अधिक मारामारी सत्ताधारी BJP में मची है। पार्षद की टिकट पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे तमाम दावेदारों की सुबह और शाम आकाओं की चौखट पर बीत रही है, और आका हैं कि उनके पास मिलने का वक्त ही नहीं। कई प्रत्याशी हर कीमत पर टिकट चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने बाकायदा बाजरा भी खोल दिया है। भाव खुला है सीधे 10 लाख पर। ये हम नहीं कह रहे बल्कि कई दावेदार खुल्लम-खुल्ला महफिलों और चौराहों पर चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं। गुजैनी और दबौली से तो दो दावेदारों ने अपना टिकट पक्का करने के लिए 10 लाख रुपए की बोली लगा दी है। इन प्रत्याशियों का कहना है कि बाजरा का भाव बढ़ा तो वह और भी दे सकते हैं लेकिन हर कीमत पर टिकट चाहिए।



चर्चित मंत्री तो चहेते के लिए किसी और को आवेदन तक नहीं करने दे रहे

यूपी सरकार में एक चर्चित मंत्री अपने करीबी का टिकट पक्का करने के लिए दूसरे दावेदारों को प्रत्याशिता से हटाने के लिए तरह-तरह के हथकंडों को अपना रहे हैं। वह अब तक तीन दावेदारों भगा चुके हैं। नाम न खोलने की शर्त पर एक प्रत्याशी ने बताया कि “दबंग पांडेय जी” मंत्री के करीबी हैं। मंत्री जी हर कीमत पर उनकी टिकट फाइनल कराने में जुटे हुए हैं। क्षेत्र के तीन पुराने कार्यकर्ता जब आवेदन करने पहुंचे तो मंत्री ने फटकार लगा दी। चर्चा है कि हर दावेदार के लिए मंत्री जी यह कह रहे हैं कि इसने यूपी विधान सभा इलेक्शन में बसपा प्रत्याशी को चुनाव लड़वाया था।



दो माननीयोंपुत्र खुल्लम-खुल्ला बांट रहे टिकट

शहर के दो “माननीय” जिसमें एक मंत्री भी हैं, दोनों हर कीमत पर अधिक से अधिक अपने करीबी लोगों को टिकट देने के लिए लंबे समय से कवायद छेड़े थे। दोनों काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं। दबी जुबान से ही सही लेकिन कार्यकर्ताओं ने बताया कि “बाजरा” खुलने के बाद दोनों के परिवारीजन ही टिकट “फाइनल” करने में व्यस्त हैं। कोई भी हो, पैसा देकर टिकट ले सकता है। दोनों ही “माननीयों” की चौखट पर टिकट के लिए कार्यकर्ताओं से अधिक भीड़ बाहरी लोगों की इस समय मौजूद रहती है।  

  “बाजरा खुलने पर आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्याशियों में निराशा

पार्षद के टिकट पाने के लिए “बाजरा” खुल जाने से सबसे अधिक निराशा और हताशा का भाव उन दावेदारों के चेहरों पर है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इन दावेदारों का कहना है कि लंबा समय बीत गया। पार्टी के लिए दरी और चादरें तक बिछाई हैं। अब जब समय आया है तो पार्टी में ऊंचे पदों पर बैठे “आका” पूंजीपतियों को टिकट देने की तैयारी कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है।

चुनाव जीतने के लिए मंत्र और फार्मूला भी बता रहे प्रत्याशी

आर्थिक रूप से बेहद कमजोर प्रत्याशी पार्षदी का चुनाव जीतने के लिए अपने करीबी नेताओं को फार्मूला और मंत्री भी बता रहे हैं कि वह इस तरह से चुनाव हर कीमत पर जीत लेंगे। साथ ही वह नेताओं को यह बताना भी नहीं भूल रहे हैं कि विधान सभा के चुनाव में उन्होंने प्रत्याशी के लिए बूथ पर क्या-क्या नहीं किया ? दावेदारों की सबसे अधिक मारामारी साउथ सिटी के करीब दर्जन भर वार्डों में अधिक है।

बाकी दलों में नहीं है पार्षद प्रत्याशियों के दावेदारों की भीड़

कांग्रेस, सपा और बसपा में पार्षद का टिकट मांगने वाले प्रत्याशियों की संख्या तो है लेकिन भीड़ और मारामारी बिल्कुल भी नहीं है। मुस्लिम एरिया के तीन-चार वार्ड ही ऐसे हैं जहां सपा और कांग्रेस में होड़ मची है। बाकी जगहों पर सामान्य से हालात हैं। बसपा में भी दावेदारों की संख्या शून्य जैसी ही है। यहां पार्टी के कार्यकर्ताओं में प्रत्याशिता को लेकर उत्साह भी नहीं है। एक पदाधिकारी की मानें तो कुछ वार्डों में तो दावेदार ही नहीं हैं। इन सबके पीछे तर्क चुनाव का मंहगा होना भी है।

कई दावेदार स्लीपिंग सेल की तरह सक्रिय

टिकट के लिए दावेदारों की मचमच के बीच कई दावेदार ऐसे भी हैं जो बिल्कुल स्लीपिंग सेल की तरह सक्रिय हैं। ये वो दावेदार हैं जो हर तरह से संपन्न और सक्षम भी हैं। सूत्रों की मानें तो ये टिकट नहीं मांग रहे हैं लेकिन ऐन वक्त पर ये रायता फैला सकते हैं। विवादित सीटों पर स्लीपिंग माड्यूल्स की तरह सक्रिय कई अघोषित दावेदारों को टिकट भी मिल सकती है।

 

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो दिन पहले लखनऊ से मेयर सीट पर प्रियंका महेश्वरी को प्रत्याशी बनाने के साथ 19 पार्षद प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की थी। बुधवार को Kanpur AAP (South) ने 8 पार्षद प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर विरोधी दलों को चौंका दिया है। घोषित किए गए सभी प्रत्याशी पार्टी के पुराने वर्कर हैं।


[caption id="attachment_17933" align="aligncenter" width="640"]kanpur nagar nigam, redeyestimes.com नगर निकाय चुनाव के लिए पार्षद प्रत्याशियों की पहली list जारी करते Kanpur AAP (South) के पदाधिकारी।[/caption]

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कानपुर। नगर निकाय चुनाव के लिए “शंखनाद” हो चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फिलहाल अभी चुनाव की तिथियों का ऐलान नहीं किया है लेकिन सभी राजनीतिक दलों में प्रत्याशिता को लेकर दावेदारी कर रहे दिग्गजों के दिलों की धड़कन बढ़ी है। इन सब के बीच राजधानी दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) बुधवार को चुनावी समर में कूद पड़ी। Kanpur AAP (South) के संयोजक सोम भारत ने प्रेस कांफ्रेंस में शहर के 8 वार्डों में अपने प्रत्याशियों की पहली List जारी कर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है।


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ये हैं Kanpur AAP (South) की पहली List के प्रत्याशी

58 तिवारीपुर, (रामादेवी) साजन वर्गिश, जयंती श्रीवास्तव वार्ड 63 हंसपुरम(नौबस्ता), मनीष वर्मा वार्ड (91) शास्त्री नगर, मुन्ना कुमार वार्ड (7) निराला नगर, निशा निगम वार्ड (67) बर्रा, लक्ष्मी श्रीवास वार्ड (21) खाड़ेपुर, निर्गुण कुमार वार्ड (12) चकेरी, सतीश चंद्र गुप्ता वार्ड 69 सरोजनी नगर।



दिल्ली की मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर करेंगे Work

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान Kanpur AAP (South) के प्रवक्ता शरद यादव ने कहा कि यूपी में यदि AAP जीतती है तो हम हाउस टैक्स हाफ करेंगे। शहर में फैली गंदगी के लिए पार्टी क्रांतिकारी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर शहर के सरकारी अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। जनता की सुविधाओं के मद्देनजर नए मोहल्ला क्लीनिक भी खोले जाएंगे।

मेयर प्रत्याशी को लेकर AAP में “उलझन”

मेयर सीट पर किन्ही वजहों से फिलहाल अभी तक सहमित नहीं बन पाई है। सूत्रों की माने तो जिस प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनी थी, उसके समानांतर शहर के एक पूर्व पार्षद दिल्ली में रही अपनी बेटी का नाम आगे कर दिए। सूत्रों की मानें तो पार्टी के तमाम वर्कर पूर्व छात्रसंघ के एक पदाधिकारी की धर्मपत्नी के नाम पर सहमति बना चुके हैं। लेकिन ऐन वक्त पर पेंच फंसने की वजह से मेयर कंडीडेट के नाम का ऐलान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि एक या दो दिन अभी और लग सकते हैं।

Kanpur AAP (South) की पूरी कार्यकारिणी रही मौजूद

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान Kanpur AAP (South) के प्रशांत त्रिपाठी, योगेश दीक्षित, चिन्टू फौजी, विनय अवस्थी, संजय झा, नवीन तिवारी, अमित मिश्रा, शंकर श्रीवास, जीतू फेरवानी, राजेश अग्निहोत्री, संदीप शुक्ला, मुकेश, छोटेलाल, नागेंद्र राणा, प्रमोद बाबा, पियूष अग्रवाल, धर्मेंद्र कुमार, देवेश दीक्षित समेत कई जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

BJP का शीर्ष नेतृत्व नगर निकाय के चुनाव की तैयारी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कर रहा है। RSS के सूत्रों की मानें तो भाजपा हिन्दुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ सकती है। Kanpur में बीजेपी के दिग्गज लीडर पार्षद से लेकर मेयर प्रत्याशी के चयन पर अपना पूरा फोकस "जिताऊ और टिकाऊ" प्रत्याशियों पर किए हुए हैं।


[caption id="attachment_17875" align="aligncenter" width="670"] प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन मंत्री सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और यूपी बीजेपी प्रभारी ओम माथुर (फाइल फोटो)[/caption]

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कानपुर। नगर निकाय के चुनाव की रणभेरी करीब-करीब बज चुकी है, सिर्फ राज्य चुनाव आयोग की तरफ से चुनावी तिथि का ऐलान होना बाकी रह गया है। Kanpur के 110 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर सबसे अधिक मचमच केंद्र और यूपी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मची हुई है। हाल के दिनों में कई मुद्दों पर मुंह की खा चुका BJP का शीर्ष नेतृत्व हर कीमत पर नगर निकाय चुनाव में पार्षदों से लेकर मेयर तक के प्रत्याशी पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। भाजपा के बड़े सूत्रों की मानें तो फोकस “जिताऊ और टिकाऊ” प्रत्याशियों पर अधिक है। विधान सभा के चुनाव में दागी रहे प्रत्याशी हाईकमान के सीधे रडार पर हैं। बीजेपी के दिग्गज इस बार “दागी और बागी” वर्तमान पार्षदों को हर कीमत पर Out करने का मन बना चुके हैं।



हिन्दुत्व के मुद्दे पर निकाय चुनाव लड़ सकती है BJP ! 

Kanpur समेत यूपी के सभी जगहों पर BJP का शीर्ष नेतृत्व हिन्दुत्व के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ना चाहता है। इसके लिए ग्रीन सिग्नल भी पदाधिकारियों को जारी किए जा चुके हैं। इसका एक प्रमाण सोमवार को तब देखने को मिला जब पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान साफ-साफ शब्दों में कह दिया कि अगले वर्ष यूपी की जनता अयोध्या में भगवान रामलला के दर्शन कर दीवाली मनाएगी। उनके इस बयान से राजनीति के जानकार कई मायने निकाल रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि आखिर चुनाव से ठीक पहले ही सुब्रमण्य स्वामी ने यह बयान क्यों दिया ? BJP के बड़े सूत्रों की मानें तो अयोध्या में भगवान रामलला के मंदिर का निर्माण कराने के लिए कई ट्रक ईंटों और पत्थरों की खेप पहुंचाई जा चुकी है। सारा कार्य बजरंगदल और विहिप के नेताओं की अगुवाई में चल रहा है।



जिताऊ और टिकाऊ ही चाहिए, फिर चाहे बाहर से ही लाना पड़े

Kanpur में BJP जिताऊ और टिकाऊ पार्षद प्रत्याशियों पर दांव लगाने का मूड बना चुकी है। इसके लिए यदि आवश्यकता पड़ी तो बीजेपी का नेतृत्व दूसरे दलों या फिर निर्दलीय प्रत्याशियों को “आयात” भी कर सकता है। तस्वीर बिल्कुल साफ है कि जिस तरह से हाईकमान ने विधान सभा का इलेक्शन लड़ा था, ठीक उसी पैर्टन पर ही चुनाव नगर निकाय का भी लड़ा जाएगा। गौरतलब है कि यूपी विधान सभा के चुनाव में भाजपा ने दूसरे दलों, बसपा, सपा और कांग्रेस के दिग्गजों को चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल कर सभी को टिकट बांटे थे। इसमें करीब-करीब सभी चुनाव जीत भी गए। इस लिए यह फार्मूला बीजेपी को काफी पसंद आ रहा है।

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40 बसंत पार कर चुके प्रत्याशियों पर BJP नहीं लगाएगी दांव

BJP सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व 2019 को ध्यान में रखते हुए नगर निकाय का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पूरा फोकस प्रत्याशियों को लेकर ही है। हाईकमान का मानना है कि प्रत्याशियों की उम्र 40 से अधिक की न हो। शायद यही वजह है कि कुछ अधिक उम्र के वर्तमान प्रत्याशियों का टिकट इन्हीं वजहों से काटा जाएगा।

प्रत्याशियों के चयन पर खुफिया की भी ली जा सकती है रिपोर्ट

भाजपा हाईकमान किसी भी सूरत में हारने वाला प्रत्याशी नहीं चाह रही है। बिल्कुल साफ है कि यदि नगर निकाय चुनाव में करारी हार मिली तो 2019 के लोकसभा की डगर काफी मुश्किल भरी हो सकती है। Kanpur में यदि आवश्यकता पड़ी तो बीजेपी के दिग्गज प्रत्याशियों के चयन पर खुफिया रिपोर्ट भी ले सकते हैं। मतलब साफ है कि हर कीमत पर जिताऊ प्रत्याशी ही चलेगा।



कई पार्षदों का परशीमन में ही बिगड़ चुका है खेल

लंबे समय से बीजेपी के लिए संघर्ष कर रहे तमाम दावेदारों और वर्तमान पार्षदों का “खेल” पहले ही बिगड़ चुका है। सूत्रों की मानें तो जिन सीटों पर अधिक मारामारी थी उसे रिजर्व कर दिया गया। ऐसा होने से तमाम दावेदार खुद ब खुद ही बाहर हो गए। वर्तमान पार्षदों में कई का टिकट उम्र की वजह से कटना पक्का माना जा रहा है। तो दूसरी तरफ से यूपी विधान सभा के इलेक्शन में भीतरघात करने वाले कुछ दिग्गज पार्षदों का टिकट भी करीब-करीब कटने के संकेत दिए जा चुके हैं। बवाल की स्थित से बचने के लिए बीजेपी इन जगहों पर बिल्कुल नए और युवा चेहरों को तरजीह देने में जुटी हुई है। कुछ जगहों पर तो विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों ने चेहरों पर अंदर ही अंदर मुहर भी लगा दी है, इन सीटों पर सिर्फ औपचारिकता ही बाकी बची है।

70 और 30 की गणित से हो सकता है टिकटों का बंटवारा

Kanpur BJP में इस समय एक अनार और सौ बीमार वाली कहावत चल रही है। सूत्रों की मानें तो एक-एक वार्ड पर आधा दर्जन से अधिक दावेदार अपना दावा ठोंक रहे हैं। जो परशीमन की वजह से बाहर हो गए वो अब अपने घर की महिलाओं के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। वहीं टिकटों के बंटवारे को लेकर अभी तक का जो फार्मूला बनाया गया है, उसके हिसाब से गणित 70 और 30 की हो सकती है। विधायक की विधान सभा के अंतर्गत आने वाली सीटों पर MLA को 70 प्रतिशत सीटें दी जा सकती हैं। ऐसी करीब 30 फीसदी सीटें हैं जहां मारामारी अधिक होगी। उसका फैसला संगठन के पदाधिकारी लेंगे।

High Court की सख्त ताकीद के बाद आखिर यूपी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय के चुनावों को जल्द से जल्द कराने का फैसला ले लिया है। सूत्रों की मानें तो 25 अक्तूबर को ही राज्य चुनाव आयोग शेड्यूल का शंखनाद करेगा। माना जा रहा है कि चुनाव तीन या फिर चार चारणों में होंगे। 



लखनऊ। दीपावली पर पटाखों के धूम-धड़ाके के बाद यूपी में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी काफी तेज रफ्तार से बढ़ेगी। High Court की सख्त ताकीद के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (UPEC) नगर निकाय के चुनाव का ऐलान अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह में करने का मूड बना चुका है। सूत्रों की मानें तो 25 अक्तूबर को राज्य चुनाव आयोग निकाय चुनावों की तिथि का ऐलान करीब-करीब कर सकता है। चुनाव तीन से चार चरणों में होंगे। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट भी 25 अक्तूबर को चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दे चुका है।


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वार्डों के परिसीमन के साथ आरक्षण भी हो चुका है तय

वार्डों के परिसीमन के साथ आरक्षित सीट तय कर ली गई। वहीं दूसरी तरफ नगर निकाय के मतदाताओं की सूची को भी अंतिम रूप देकर उनके वेरी​फिकेशन की प्रक्रिया भी राज्य​ निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम चरण में है। सूत्रों की मानें तो राज्य चुनाव आयोग निकाय चुनावों की घोषणा का ऐलान 25 अक्टूबर को करने का मसौदा लगभग पूरा कर चुका है।



तीन से चार चरणों में चुनाव होने की उम्मींद

मंडे को राज्य के संयुक्त निर्वाचन आयुक्त जेपी सिंह ने कहा कि 25 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नगर निकाय के चुनाव तीन या चार चरण में कराए जा सकते हैं। चुनाव तारीखों की अधिसूचना जारी होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त जेपी सिंह के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से 25 अक्टूबर तक अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग भी अधिसूचना जारी कर देगा। निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार सुरक्षाकर्मियों की उपलब्धता के आधार पर ही चुनाव के चरण तय करने पर विचार कर रही है।

आगरा और मेरठ जोन में हो चुकी हैं मीटिंग

​संयुक्त निर्वाचन आयुक्त जेपी सिंह के मुताबिक नगर निकाय चुनाव के बाबत आगरा और मेरठ जोन में राज्य निर्वाचन आयुक्त और स्थानीय अधिकारियों के साथ मीटिंग हो चुकी हैं। मंगलवार को इसकी अगली कड़ी के तहत बरेली जोन में बैठक होगी। राज्य निर्वाचन आयोग निकाय चुनाव को निष्पक्ष एवं पारदर्शी कराने की बात कह रहा है। उसके मुताबिक चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।