Articles by "अखिलेश यादव"
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Agra के Most Wanted अपराधी को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UPSTF) ने Kanpur में Arrest कर लिया। 4 साल पहले लोहा कारोबारी के बेटे को अगवा करने के मामले में Wanted नसीम के सिर पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था।


https://twitter.com/redeyestimes/status/1129992987356860417

YOGESH TRIPATHI


4 साल से फरार था Wanted नसीम


STF (Kanpur Unit) के इंस्पेक्टर घनश्याम सिंह के मुताबिक सर्विलांस सेल की सटीक सूचना के बाद शातिर को पकड़ने के लिए मुखबिरों का भी संजाल बिछाया गया। सटीक मुखबिरी के बाद घेराबंदी कर थाना शमशाबाद जनपद आगरा निवासी उमरदराज के लड़के नसीम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में नसीम ने बताया कि साल 2015 में फिरौती के लिए आगरा के लोहा कारोबारी के 6 साल के बेटे प्रिंस को अगवा किया था। पुलिस ने कई दिन बाद प्रिंस (6) को झांसी जनपद से बरामद किया था। पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 445/15 पर IPC की धारा 363, 364 (A) के तहत शमशाबाद थाने में मुकदमा पंजीकृत किया था।

तत्कालीन CM ने दिया था पुलिस टीम को पांच लाख का इनाम


चार साल पहले जब प्रिंस का अपहरण किया गया था तब सपा की सरकार थी। इस कांड को लेकर आगरा पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। मामला गर्माया तो मुख्यमंत्री ने मातहतों को कड़े निर्देश दिए। कुछ दिन बाद पुलिस ने मासूम को झांसी जनपद से अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराया। पुलिस की इस बड़ी कामयाबी पर अखिलेश यादव ने पुलिस टीम को 5 लाख रुपए का तब पुरस्कार दिया था। नसीम उसके बाद से फरार था और लंबे समय से कानपुर में छिपकर रह रहा था।

 

 

 

Lok Sabha Election 2019 : भारतीय जनता पार्टी (BJP) में टिकट को लेकर काफी मारामारी है। शायद यही वजह है कि BJP हाईकमान अभी तक प्रत्याशियों की पहली लिस्ट भी Final नहीं कर सका है। कार्यकर्ता से लेकर क्षेत्र की जनता तक परेशान है कि आखिर कौन होगा उनका प्रत्याशी ? UP की VIP लोकसभा सीट इत्रनगरी कन्नौज से कौन होगा BJP का "सेनापति" ? यह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। क्या बीजेपी पिछली बार सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav की धर्मपत्नी Dimple Yadav को कड़ी टक्कर देने वाले शेर-ए-कन्नौज के नाम से चर्चित सुब्रत पाठक पर फिर से दांव लगाएगी या फिर किसी और चेहरे को "चुनावी रणभूमि" में उतारेगी ? इसकी तस्वीर अभी तक साफ नहीं है।सिर्फ और सिर्फ कयासों का दौर चल रहा है। www.redeyestimes.com से बातचीत में सुब्रत पाठक ने कहा कि "बीजेपी का सिपाही हूं। जहां से टिकट मिलेगा मैं वहीं से पूरी निष्ठा के साथ चुनाव लड़ूंगा"। उल्लेखनीय है कि सुब्रत पाठक को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं इन दिनों सोशल मीडिया में चल रही हैं।


[caption id="attachment_18926" align="alignnone" width="188"] Avinash Tiwari (Chhote Tiwari)[/caption]

सोशल मीडिया में Kanpur से भी चुनाव लड़ने की चर्चाएं


सुब्रत पाठक भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व प्रेसीडेंट रह चुके हैं। वर्तमान में वे बीजेपी के प्रदेश मंत्री हैं। साथ ही वे संगठन मंत्री सुनील बंसल के बेहद करीबी लोगों में भी हैं। सुब्रत पाठक के लिंक डायरेक्ट अमित शाह से भी हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में उनके कानपुर नगर की सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाएं सोशल मीडिया में काफी जोर-शोर से हैं। इससे पहले उनके झांसी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं थीं लेकिन वहां से किसी और को टिकट दिए जाने की खबरें आ रही हैं। Portal से बातचीत में सुब्रत पाठक ने कानपुर से चुनाव लड़ने के सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी जहां से चुनाव लड़ाएगी वो लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कन्नौज से क्या चुनाव लड़ेंगे ? के सवाल भी भी उनका जवाब गोलमोल ही रहा।

Kanpur में सुब्रत के समर्थकों की लंबी फौज


जानकार सूत्रों की मानें तो Kanpur में सुब्रत पाठक के समर्थकों की संख्या काफी है। जब वे युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे तो उस दौरान छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े कई चर्चित नेता उनके काफी करीबी हो गए। अब वही लोग सुब्रत पाठक को कानपुर से चुनाव लड़ाने के लिए लामबंदी कर रहे हैं। सोशल मीडिया में उनको प्रत्याशी बनाए जाने की खबरें भी कई दिनो से चल रही हैं। उसके पीछे कई वजह हैं। पहली यह कि यहां से बीजेपी मुरली मनोहर जोशी को रिपीट करने के मूड में नहीं है। दूसरा यह कि कानपुर से दावेदारों की लंबी फौज है। तीसरी वजह ये है कि भाजपा भी "SKY LAB" (बाहरी और चर्चित) को चुनाव लड़ाने की ठान चुकी है। इसमें करीब नौ लोगों के नाम शामिल हैं। इन नौ लोगों में एक नाम सुब्रत पाठक का भी बताया जा रहा है। सुब्रत का दावा इस लिए भी मजबूत है कि ब्राम्हण होने के साथ-साथ कानपुर में उनके समर्थक भी ठीक-ठाक संख्या में हैं।

इत्रनगरी से लड़ने के मूड में नहीं हैं सुब्रत


सूत्रों की मानें तो सुब्रत पाठक खुद भी कन्नौज से लड़ने के मूड में नहीं हैं। प्रदेश नेतृत्व भी उनको कन्नौज की जगह किसी और VIP सीट से चुनाव लड़ाने के मूड में है। कन्नौज से चुनाव न लड़ने के पीछे कई वजहें भी हैं। पहली वजह पिछला चुनाव है। पहली वजह पिछले चुनाव में जीतकर "हार" जाना भी शामिल है। सुब्रत को भी पता है कि डिंपल यादव को चुनाव जिताने के लिए सपा साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाएगी। जो कि वो पिछली बार भी कर चुकी है। यही वजह है कि सुब्रत कन्नौज के बदले किसी और वीआइपी सीट चाह रहे हैं। जिसमें कानपुर नगर, झांसी और अकबरपुर की सीट भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सुब्रत पाठक का चुनाव लड़ना तो पक्का है लेकिन कहां से वे चुनाव लड़ेंगे ये "पक्का" नहीं है।

[caption id="attachment_19014" align="alignnone" width="695"] डिंपल यादव (लोकसभा प्रत्याशी कन्नौज, सपा)[/caption]

कन्नौज से Dimple Yadav फिर होंगी सपा प्रत्याशी


कन्नौज लोकसभा सीट से सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने एक बार फिर से अपनी धर्मपत्नी डिंपल यादव को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि इस बार चुनाव काफी दिलचस्प होगा। उसकी वजह शिवपाल सिंह की प्रगतिशील पार्टी बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो शिवपाल सिंह यहां से शराब का अवैध कारोबार करने वाली एक चर्चित महिला के पति को टिकट दे सकते हैं। एक खास एरिया में इस महिला का काफी प्रभाव है। प्रगतिशील पार्टी के प्रत्याशी से सपा को नुकसान होना तय बताया जा रहा है। तो वहीं बीजेपी की राह में शिवसेना कांटा बोने के बेताब है। खबर है कि यहां से शिवसेना की तरफ से चुनाव लड़ने का दावा ठोंक रहे प्रत्याशी ने होर्डिंग-बैनर से चुनाव जंग छेड़ दी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण और कांग्रेस की जनरल सेकेट्री प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद सूबे में नया राजनीतिक "समीकरण" बनने लगा है। अपने परंपरागत वोट बैंक में कांग्रेस की सेंधमारी होते देख BSP सुप्रीमों Mayawati काफी नाराज हैं। शायद यही वजह है कि कुछ घंटे बाद ही बुधवार शाम को उन्होंने सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav को बुलाकर बंद कमरे में काफी देर तक बातचीत की। सूत्रों की मानें तो मायावती ने दो टूक शब्दों में अखिलेश यादव से कह दिया कि रायबरेली और अमेठी से प्रत्याशी उतारें। दोनों ही नेताओं ने यूपी में कांग्रेस के साथ बन रहे भीम आर्मी के समीकरण से निपटने के लिए काफी देर तक चर्चा की। सूत्रों की मानें तो 48 घंटों में सपा और बसपा के प्रत्याशियों की सूची जारी हो सकती है। प्रत्याशियों के चयन पर गुरुवार सुबह एक बार फिर मायावती अपने विश्वास पात्र लोगों के साथ मीटिंग कर रही हैं। माना जा रहा है कि देर शाम तक बीएसपी की सूची आ सकती है।


YOGESH TRIPATHI




अखिलेश और मायावती के बीच काफी देर तक मीटिंग


प्रियंका गांधी और चंद्रशेखर के बीच मुलाकात के बाद बुधवार शाम बीएसपी सुप्रीमों मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने करीब डेढ़ घंटे बैठक की। मायावती के आवास पर हुई बैठक में प्रियंका-चंद्रशेखर की मुलाकात का जवाब देने की रणनीति पर विचार किया गया। दोनों ही मुलाकातों को एक-दूसरे पर दबाव बनाने की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार अगर कांग्रेस चुनावों में चंद्रशेखर को साथ लेती है, तो सपा-बसपा अमेठी और रायबरेली में उम्मीदवार उतार कर कांग्रेस पर दवाब बनाएंगे। इस बात को मायावती ने साफ-साफ शब्दों में अखिलेश यादव से भी कह दिया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने भी मुलायम सिंह यादव, डिंपल यादव और अखिलेश यादव के खिलाफ प्रत्याशी न उतारने का फैसला लिया था। सूत्रों की मानें तो यदि अखिलेश और माया ने अमेठी और रायबरेली में प्रत्याशी उतारे तो कांग्रेस भी अपने मजबूत उम्मींदवार उतार सकती है। ऐसे में कई नेता हारने की स्थित में भी आ जाएंगे।


चंद्रशेखर ने किया वाराणसी से चुनाव लड़ने का ऐलान


वहीं मुलाकात के लिए पहुंची कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से बातचीत के दौरान ही भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण ने ऐलान कर दिया कि वो वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आचार संहिता उल्लंघन करने के बाद पुलिस ने रावण को गिरफ्तार किया है। स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कांग्रेस से गठजोड़ के बाद बिगड़ जाएगा बीएसपी का "समीकरण"


राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस और भीम आर्मी का गठजोड़ हो गया तो निश्चित तौर पर यूपी के पश्चिमी हिस्से में बसपा का न सिर्फ समीकरण बिगड़ेगा बल्कि वो कई सीटों पर चुनाव भी हार जाएगी। यही वजह है कि मायावती के तेवर काफी तल्ख हैं। उनको ये अहसास हो गया है कि कांग्रेस ने इस बड़े सियासी समर में काफी तगड़ी घेराबंदी कर ली है।

 
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Lok Sabha Election 2019 में अधिक से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करें, इसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Twitter का सहारा लिया है। Modi ने अपने Tweet में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती, ममता बनर्जी समेत कई नेताओं, बॉलीवुड और खेल जगत की हस्तियों को टैग किया। लेकिन खास बात ये रही है कि Delhi के CM अरविंद केजरीवाल को उन्होंने “Out” रखा।


YOGESH TRIPATHI


https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1105706631378034688

UP के Ex.CM अखिलेश यादव ने PM पर कसा तंज


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोट डालने की अपील पर सपा सुप्रीमों और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया। अखिलेश यादव ने लिखा कि, '' दिल ख़ुश हुआ कि प्रधानमंत्री जी भी महागठबंधन से महापरिवर्तन की अपील कर रहे हैं। मैं भी सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध करता हूं कि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में मतदान करें और नया प्रधानमंत्री चुनें।

https://twitter.com/narendramodi/status/1105687403770068992

PM ने Delhi के CM को नहीं किया टैग


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस प्रेसीडेंट राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी, NCP प्रेसीडेंट शरद पवार, BSP सुप्रीमों मायावती, SP ,सुप्रीमों अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी यादव और DMK नेता एमके स्टालिन को टैग करते हुए ट्वीटर पर लिखा कि सभी लोग मतदाताओं से वोट देने की अपील करें। खास बात ये रही कि इन बड़े नेताओं की फेहरिस्त में Delhi के CM अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं है।

https://twitter.com/narendramodi/status/1105687535546716160

NDA के नेताओं से भी PM ने की अपील


प्रधानमंत्री मोदी ने BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन NDA में शामिल नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, हरसिमरत कौर, चिराग पासवान, आदित्य ठाकरे से वोटरों को मतदान के लिए जागरुक करने की अपील की। उन्होंने दक्षिण भारत के अभिनेता मोहनलाल और नागर्जुन से भी आगे आने के लिए अपील की है। साथ ही उन्होंने RSS, नेहरू युवा केंद्र से जागरुकता फैलाने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी, पुडुचेरी की गवर्नर किरण बेदी और सुरदर्शन पटनायक, अध्यातम गुरु श्रीश्री रविशंकर, सदगुरु और योग गुरु बाबा रामदेव को भी Twitter पर टैग कर मतदाताओं को जागरुक करने की अपील की है।

https://twitter.com/narendramodi/status/1105689849670053888

तेंदुलकर, कुंबले, लक्ष्मण, सहवाग, कोहली, रोहित से भी अपील


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण, विरेंद्र सहवाग, एमएस धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा, किदांबी श्रीकांत, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, गीता फोगाट, बबिता फोगाट, रितु फोगाट, बजरंग पुनिया से भी अपील की।

https://twitter.com/narendramodi/status/1105698661672062977

बॉलीवुड जगत की इन हस्तियों को Twitter पर किया टैग



PM नरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर, अमिताभ बच्चन, ए आर रहमान, रणवीर कपूर, वरुण धवन, विक्की कौशल, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट और अनुष्का शर्मा समेत कला जगत की हस्तियों से भी कहा कि वे मतदाताओं से मतदान केंद्रों में आने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मदद करने की अपील करें।

 

International Womens Day (विश्व महिला दिवस) पर सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav ने अपनी पार्टी की 3 महिलाओं को बड़ा तोहफा देते हुए उनके लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा कर दी। इसमें एक नाम उनकी धर्मपत्नी और कन्नौज की सांसद Dimple Yadav का भी है। डिंपल यादव एक बार फिर इत्रनगरी कन्नौज से ही चुनाव लड़ेंगी। हालांकि कुछ दिन पहले ही अखिलेश यादव ने कन्नौज से खुद चुनाव लड़ने की बात मीडिया से कही थी। वहीं, शुक्रवार सुबह सपा की तरफ से पहली सूची जारी की गई। जिसमें 6 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए थे।


Avinash Chandra Tiwari


https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1103959406033530880


https://twitter.com/samajwadiparty/status/1104000756728897537

महिला दिवस पर इन महिलाओं के नाम की घोषणा


सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने खीरी लोकसभा (28) से डॉ. पूर्वी वर्मा, हरदोई (सुरक्षित) से श्रीमती ऊषा वर्मा (31) और कन्नौज (42) से अपनी पत्नी डिंपल यादव को सपा प्रत्याशी घोषित कर उनके साथ वाली फोटो अपने Twitter अकाउंट से शेयर की।


पहली सूची में 6 लोगों के नाम का किया था ऐलान


शुक्रवार सुबह सपा की तरफ से जारी की गई सूची में 6 लोगों के नाम थे। इसमें मैनपुरी से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया गया है। जबकि बदांयू से धर्मेंद्र यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, इटावा (सुरक्षित) से कमलेश कठेरिया, राबर्ट्सगंज (सुरक्षित) से भाई लाल कोल और बहराइच से शब्बीर बाल्मीकि को प्रत्याशी बनाया गया।

UP के Ex.CM और सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav इत्रनगरी कन्नौज से ही लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनकी धर्मपत्नी और वर्तमान में कन्नौज की सांसद डिंपल यादव चुनाव के प्रचार-प्रसार की कमान संभालेंगी। सपा संस्थापक और संरक्षक मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। ये बातें मीडिया से खुद Akhilesh Yadav ने अपने गृह जनपद इटावा में पत्रकारों से कहीं।


[caption id="attachment_18926" align="alignleft" width="150"] A Report By Avinash Chandra Tiwari [/caption]

 

कन्नौज से प्रदीप यादव के चुनाव लड़ने की थी अफवाह


सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के कन्नौज से चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद तमाम अफवाहों और अटकलों पर विराम लग गया। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ये खबर आई थी कि सपा सुप्रीमों आजमगढ़ से चुनाव लड़ेंगे। उसके बाद ये सवाल खड़ा हो गया कि कन्नौज से कौन होगा सपा प्रत्याशी ? इसी के बाद इटावा के भरथना निवासी और पूर्व सांसद प्रदीप यादव के कन्नौज से चुनाव लड़ने की चर्चाएं होने लगीं थीं।

डिंपल यादव के हाथों में रहेगी चुनाव की कमान


सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव की पत्नी वर्तमान में कन्नौज से सांसद हैं। 2014 के चुनाव में सपा ने मोदी लहर में जो पांच सीटें जीती थीं। उसमें एक कन्नौज की भी थी। अब डिंपल यादव चुनाव के प्रचार-प्रसार के साथ तमाम जिम्मेदारियां निभातें नजर आएंगीं। गौरतलब है कि करीब साल भर पहले ही अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि वो इस बार डिंपल को चुनाव नहीं लड़ाएंगे।

तेज प्रताप यादव का कहीं और होगा समायोजन


सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने मैनपुरी के सांसद तेज प्रताप यादव की सराहना करते हुए कहा कि वो काफी मेहनती हैं। उनको कहीं और एडजेस्ट किया जाएगा। मैनपुरी से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को लड़ाया जाएगा। माना जा रहा है कि तेज प्रताप को कहीं और से प्रत्याशी बनाया जा सकता है या फिर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।

BJP में प्रत्याशिता को लेकर चल रहा है “शीतयुद्ध”


सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव और डिंपल यादव की वजह से कन्नौज की लोकसभा सीट यूपी की VVIP सीट में एक है। बीजेपी समेत सभी विरोधी दलों की निगाह भी इस सीट पर बनी है। मोदी लहर के बाद भी 2014 में सुब्रत पाठक ये सीट हार गए थे। हालांकि उसके बाद बीजेपी ने उनको युवा मोर्चा का यूपी प्रेसीडेंट बनाया। वर्तमान में वे बीजेपी के प्रदेश मंत्री हैं। हालांकि उनकी प्रत्याशिता को लेकर संशय बना हुआ है। कन्नौज के रहने वाले एक पत्रकार का नाम भी बीजेपी की तरफ से चर्चा में है। पत्रकार के समर्थक उनको टिकट पक्का मिलने की बात कह रहे हैं। प्रत्याशिता को लेकर बीजेपी में “शीतयुद्ध” सा नजारा है। वहीं अखिलेश के ऐलान के बाद अब ये देखना है कि बीजेपी लोकल के ही किसी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाती है या फिर बाहर से किसी बड़े नाम को कन्नौज में उतारती है।

2017 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने 2 सीट जीती


2017 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने कन्नौज की 3 विधानसभा सीटों में से 2 सीटों पर जीत हासिल की। कन्नौज सदर विधानसभा पर सपा के अनिल दोहरे जीते। छिबरामाऊ से बीजेपी की अर्चना पाण्डेय और तिर्वा विधानसभा से बीजेपी के कैलाश राजपूत जीते। बीजेपी में इसी बात को लेकर उत्साह है कि वो कन्नौज लोकसभा सीट को भी जीत सकती है। सपा के इस गढ़ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा होने की बात कही जा रही है।

चुनाव आयोग ने अभी 2019 के लोकसभा चुनाव का “शंखनाद” नहीं किया है लेकिन SP हो या फिर BSP, दोनों दलों में दिग्गजों ने बगावत का “शंखनाद” शुरु कर दिया है। गठबंधन के तहत Fatehpur की लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई है। अंदर की खबर ये है कि बीएसपी सुप्रीमों यहां से अपनी सरकार में पूर्व मंत्री रहे एक दिग्गज को टिकट दे सकती हैं। लेकिन तगड़ा झटका सपा के पूर्व सांसद राकेश सचान को लगा है। 2014 में हार के बाद वे लगातार न सिर्फ फतेहपुर में सक्रिय थे बल्कि कार्यकर्ताओं और जनता का दुःख दर्द बांट रहे थे। खबर आ रही है कि जल्द ही जल्द ही वे कांग्रेस का “हाथ” थाम सकते हैं। हालांकि उनको ऑफर BJP की तरफ से भी है।


[caption id="attachment_18897" align="aligncenter" width="650"] राकेश सचान पूर्व सांसद (समाजवादी पार्टी, फतेहपुर)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


5 साल से बूथ पर कार्यकर्ताओं की टीम खड़ी की


फतेहपुर प्रतिनिधि के मुताबिक राकेश सचान 2014 का चुनाव हारने के बाद घर पर नहीं बैठे बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ हमेशा खड़े रहे। जनता के बीच में रहे। सभी के सुख-दुःख में शामिल होते रहे। सपा हाईकमान ने भी उनको चुनाव लड़ने के लिए आश्वास्त कर रखा था। जब ये सीट बसपा के खाते में गई तो राकेश सचान ने सपा सुप्रीमों से बात की। कहा जा रहा है कि इसके बाद भी उनको यही आश्वासन मिला कि सबकुछ ठीक हो जाएगा।

BJP के भी संपर्क में है राकेश सचान


जानकार सूत्रों की मानें तो राकेश सचान सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बराबर हैं। समर्थकों के साथ वे दिल्ली में ही डटे है। चर्चा ये भी है कि शिवपाल सिंह यादव की तरफ से भी उनको कुछ दिन पहले ऑफर मिला था लेकिन राकेश सचान ने हामी नहीं भरी। इसके बाद बीजेपी की तरफ से उनसे संपर्क किया गया लेकिन किसी दूसरी सीट के लिए।

डीएवी छात्रसंघ का चुनाव नहीं जीते लेकिन विधायक पहली बार में ही बने


राकेश सचान ने नब्बे के दशक में कानपुर के डीएवी कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की। महामंत्री पद पर वे कई बार चुनाव लड़े लेकिन जीत नसीब नहीं हुआ। वर्ष वे जनता दल के टिकट पर घाटमपुर से पहली बार विधायक बने। जनता दल के टूटने के बाद वे सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह के करीब आ गए। 2002 में वह फिर विधायक बने। 2009 में मुलायम सिंह ने उनको फतेहपुर से लोकसभा का टिकट दिया और राकेश चुनाव जीतकर पहली बार संसद में पहुंचे। 2014 लोकसभा चुनाव में उनको मोदी लहर में करारी शिकस्त मिली थी।

सियासत की जड़ें और गहरी करने को आतुर माननीयों ने गाड़ी धुलने वालों से लेकर कारखास के रिश्तेदारों तक को पार्षदी के चुनाव में उतार दिया है। प्रतिष्ठा और मान-सम्मान को ताक पर रखकर ये माननीय कई दिनों से करीबियों को चुनाव जिताने के लिए उनके क्षेत्रों में डेरा जमाए हैं। नीचता की सारी पराकाष्ठा को लांघते हुए नेता अब संवैधानिक पदों पर बैठे VVIP को गालियां बकने के साथ उन्हें देशद्रोही भी करार देने लगे हैं। एक तरफ जहां बीजेपी के मंत्री शहर के MOST WANTED  को चुनाव जिताने के लिए रोड-शो कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय कपूर अपने करीबियों को पार्षदी का चुनाव जितवाने के लिए मुख्यंत्री को गाली बकते हुए उनको देशद्रोही तक कह दिया। 


[caption id="attachment_18326" align="aligncenter" width="645"] अजय कपूर Ex.MLA किदवईनगर विधान सभा (कानपुर)[/caption]

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कानपुर। गुलाबी ठंड के साथ चुनावी बयार भी चल रही है। नेताओं के बीच शीतयुद्ध से लेकर सियासी “नूराकुश्ती” भी जारी है। नेताओं की जुबान भी अब गंदी होने लगी है। सड़क छाप और मोहल्ले वाले टपोरियों की भाषा में यह नेता अब बेहद गंदी गालियां बकते हुए न सिर्फ आदर्श चुनाव आचार संहिता को तार-तार कर रहे हैं बल्कि कानून एवं व्यवस्था का पूरी तरह से माखौल भी उड़ा रहे हैं। कांग्रेस के Ex.MLA अजय कपूर ने पार्षद प्रत्याशी सिद्धार्थ सिंह की चुनावी मीटिंग में “वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गाली (साला) कहते हुए उन्हें देशद्रोही तक कह दिया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने करीबी और खास पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए कहा कि उसे तो मैं जेब में रखता था”।  


VIRAL VIDEOकांग्रेस के Ex. MLA सैकड़ों की भीड़ के सामने UP के सीएम को देशद्रोही टाइप का बताते हुए।

https://youtu.be/IVwppQrYdOc

 

"बागी" प्रत्याशियों को समर्थन देकर कांग्रेस की बैंड बजा रहे हैं अजय कपूर

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को साला जैसा अमर्यादित शब्द कह उनको देशद्रोही टाइप कहने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय कपूर नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ “बागी” प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर कांग्रेस पार्टी का तगड़ा नुकसान कर रहे हैं। अजय कपूर वार्ड नंबर 77 में अपने करीबी जितेंद्र सचान की पत्नी सुधा को समर्थन कर रहे हैं। जबकि यहां से सत्यभामा तिवारी कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। वार्ड नंबर 84 में वह कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी निधि दीक्षित के खिलाफ निर्दलीय रचना त्रिपाठी को चुनाव लड़वा रहे हैं। रचना त्रिपाठी के कार्यालय का शुभारंभ कर उन्होंने जनता से वोट और सपोर्ट की अपील भी की। वार्ड नंबर 14 में वह कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी सुनील कनौजिया के समर्थन में वोट मांग चुके हैं। सुनील कनौजिया निवर्तमान पार्षद प्रत्याशी हैं और इस बार हाईकमान ने उनकी टिकट काट दी है।



वार्ड नंबर 38 में मीटिंग के दौरान यूपी सीएम को दी गाली

कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय कपूर का यह VIRAL VIDEO वार्ड नंबर 38 का है। यहां पर वह कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ सिंह के समर्थन में मीटिंग कर रहे हैं। माइक हाथ में लेकर अजय कपूर ने कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता है, सरकार चाहे जिसकी हो। पिछला वाला मुख्यमंत्री (अखिलेश यादव) के लिए उन्होंने हाथ से इशारा करते हुए कहा कि उसे जेब में रखते थे। भाजपाइयों की सरकार है, ये देशद्रोही टाइप का है। साथ ही उससे पहले उन्होंने साला शब्द भी मुख्यमंत्री के लिए कहा। हालांकि यह वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अजय कपूर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है लेकिन देखना यह है कि क्या कानपुर पुलिस पूर्व विधायक को गिरफ्तार करती है या फिर एक बार फिर कानून गंदी राजनीति करने वालों के सामने बौना पड़ता है ? हालांकि सूत्र बताते हैं कि पूरे मामले को प्रदेश सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। अंदरखाने की मानें तो नगर निकाय चुनाव के बाद इस मुद्दे पर यूपी सरकार कोई बड़ा और कठोर फैसला ले सकती है।



 

[caption id="attachment_18327" align="aligncenter" width="583"] वार्ड नंबर 60 से बीजेपी प्रत्याशी जितेंद्र गांधी। जितेंद्र पर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत है। Crime Branch को जितेंद्र की तलाश है लेकिन सत्ता की हनक और "माननीयों" की कृपा से वह वह खुलेआम चुनाव लड़ रहे हैं। [/caption]

BJP के Minister लड़ा रहे हैं Kanpur के MOST WANTED को पार्षदी का चुनाव

बात सिर्फ कांग्रेस की ही नहीं बल्कि BJP की भी है। सूबे की योगी सरकार के दो बड़े मंत्री दंगे के आरोपी और कानपुर पुलिस के Most Wanted को वार्ड नंबर 60 से चुनाव लड़वा रहे हैं। जी, हां जितेंद्र गांधी नाम के इस आरोपी को बीजेपी ने पहले पार्टी से टिकट दिया। यह टिकट एक मंत्री की कृपा से जितेंद्र गांधी को मिला। जितेंद्र के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमें दर्ज हैं। कोर्ट से NBW जारी होने के बाद भी जब वह अदालत में हाजिर नहीं हुआ तो उसके खिलाफ 82 की नोटिस जारी हुई। 82 की नोटिस का मतलब साफ है कि वह भगोड़ा है। पुलिस ने जितेंद्र के घर पर नोटिस चस्पा कर यह कहा कि वह फरार है। अब सवाल यह उठता है कि जो अपराधी कोर्ट से भगोड़ा घोषित है वह बीजेपी जैसी पार्टी से टिकट कैसे पाया ? सवाल कानपुर पुलिस की कार्यशैली पर भी है कि जिसे वह गिरफ्तार नहीं कर पा रही है वह बड़े पुलिस अधिकारियों के सामने पर्चा दाखिल कैसे कर गया ? इससे बड़ा सवाल यह है कि यूपी के एक डिप्टी सीएम उसके लिए बाकायदा रोड-शो तक करने आए। सभी अफसर मौजूद रहे लेकिन जितेंद्र गांधी को गिरफ्तार करने का साहस पुलिस नहीं कर सकी।



डिप्टी सीएम को भेंट किया गुलदस्ता

वार्ड नंबर 60 से बीजेपी के प्रत्याशी और वाटेंड जितेंद्र गांधी ने दो दिन पहले कानपुर में रोड-शो करने आए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का स्वागत किया। जितेंद्र ने समर्थकों के साथ डिप्टी सीएम को बुके और गुलदस्ता भेंट किया। PHOTO पोर्टल के पास उपलब्ध है।

जीतने के बाद भी निरस्त हो सकता है चुनाव 

वार्ड नंबर 60 से मोस्ट वांटेड जितेंद्र गांधी यदि चुनाव जीत भी जाता है तो उसका चुनाव निरस्त होना तय माना जा रहा है। www.redeyuestimes.com के पास पुख्ता और प्रमाणित दस्तावेज हैं। यह दस्तावेज जितेंद्र गांधी ने नामांकन के समय संलग्न किया है। शपथ-पत्र में जितेंद्र गांधी ने अपने ऊपर दर्ज अपराधिक मुकदमों का कहीं पर भी जिक्र नहीं दिया है। ये भी एक संगीन अपराध है। विधि विशेषज्ञों की मानें तो यदि वह चुनाव जीत भी जाता है तो विरोधी कोर्ट की शरण में जाएंगे। ऐसे हालात में न सिर्फ उसका चुनाव रद्द होगा बल्कि IPS की धारा 420 के तहत उसके खिलाफ FIR भी दर्ज हो सकती है। इतना ही नहीं शहर में तीन और ऐसे वार्ड हैं जहां बीजेपी प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद भी हर कीमत पर अपनी बाजी हारेंगे।

 

 

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब Akhilesh Yadav ने मीडिया कर्मियों का मजाक उड़ाया है। इससे पहले भी वह कई बार मीडिया के लोगों को दूसरे दलों से जुड़े होने का आरोप लगाते रहे हैं। मंडे को जब उन्होंने एक बुजुर्ग पत्रकार का मजाक उड़ाया तो वहां मौजूद मीडिया कर्मियों को यह रास नहीं आया और सभी ने सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री को आड़े हाथों ले लिया। 



कानपुर। निकाय चुनाव प्रचार को लेकर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस विवादों की भेंट चढ़ गई। अखिलेश यादव और पत्रकारों के बीच काफी देर तक तू-तू मै-मै हुई। आखिरकार अखिलेश यादव को बैकफुट पर आना पड़ गया। इसके बाद कहीं जाकर मामला शांत हो सका।


अखिलेश के आरोपों पर भड़क गए पत्रकार

प्रेस कांफ्रेस के दौरान अखिलेश यादव अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रहे थे। साथ ही साथ वह योगी सरकार की बखिया भी उधेड़ने में जुटे थे। जब अखिलेश की बात खत्म हुई तो पत्रकारों के सवालों का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान सीधे जवाब देने की बजाय अखिलेश ने पत्रकारों पर ही आरोप मढ़ने शुरु कर दिए। उन्होंने कहा कि  'बीजेपी के खिलाफ कई ऐसी खबरें उनके पास हैं जिसे मीडिया ने जगह नहीं दी।

https://youtu.be/xJeh9-56xlY

वीडियो साभार: इनाडु इंडिया

पत्रकारों का मजाक बनाने लगे सपा सुप्रीमों

अखिलेश यादव ने कई ऐसे सवालों पर जवाब देने के बजाय पत्रकारों का मजाक बनाते हुए माखौल उड़ाना शुरु कर दिया। इसी बीच एक बुजुर्ग पत्रकार ने जब अखिलेश से सवाल पूछा तो पूर्व मुख्‍यमंत्री ने उनका मजाक बना दिया। इसपर वहां मौजूद सपा कार्यकर्ता ठहाके लगाने लगे।

अखिलेश के इस व्यवहार को देख पत्रकार भड़क गए और खुद उनपर कानपुर के एक पूर्व कांग्रेस विधायक के साथ व्यक्तिगत व्यवहार होने पर सवाल पूछ बैठै। पत्रकारों ने कहा कि यदि कानपुर में कांग्रेस के Ex.MLA से आपका व्यक्तिगत संबंध है तो आपने वहां मेयर के लिए सपा का प्रत्याशी क्यूं उतारा ? क्यों नहीं आपने कांग्रेस को समर्थन दे दिया ? जिस पर अखिलेश ने पलटवार करते हुए पत्रकार को कांग्रेस और पूर्व विधायक का प्रवक्ता कह दिया।

अखिलेश ने कहा 'डोंट क्रॉस योर लाइन' एक के बाद हो रहे सवालों से परेशान अखिलेश ने पत्रकारों से कहा कि 'डोंट क्रॉस योर लाइन', जिस पर पत्रकारों ने पलटवार करते हुए कहा कि 'आप हमेशा हम लोगों को एक पार्टी विशेष का प्रवक्ता कह देते हैं क्या आप अपनी लाइन नहीं क्रॉस कर रहे हैं।'

कुछ देर तक अखिलेश और पत्रकारों में हॉट-टॉक होती रही फिर अखिलेश ने दोबारा अपने मुद्दे पर आकर निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी के जीत का भरोसा देते हुए किसी तरह प्रेस वार्ता को खत्म किया।