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@BJP4India ने सोमवार को Lok Sabha Election 2019 के मद्देनजर Uttar Pradesh की 8 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया। खास बात ये है कि BJP ने "जूताकांड" के बाद चर्चा में आए Sant Kabir Nagar (खलीलाबाद) के वर्तमान सांसद शरद त्रिपाठी का पत्ता साफ कर दिया है। उनकी जगह प्रवीण निषाद को भाजपा ने मैदान में उतारा है। बीजेपी ने शरद त्रिपाठी का टिकट काटने के साथ उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से प्रत्याशी बनाया है। 2014 की मोदी लहर में कलराज मिश्रा देवरिया से सांसद बने थे।


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Yogesh Tripathi


गोरखपुर से भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन को टिकट

काफी जद्दोजहद के बाद अंतत: बीजेपी हाईकमान ने गोरखपुर सीट पर भी अपनी मुहर लगा दी। भाजपा ने यहां से भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार रवि किशन को प्रत्याशी बनाया है। उल्लेखनीय है कि करीब सवा साल पहले हुए उपचुनाव में यहां से भाजपा प्रत्याशी को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। इस सीट से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सांसद थे। उससे पहले उनके गुरु महंत अवैद्य नाथ कई बार सांसद रहे।

संतकबीर नगर से प्रवीण निषाद होंगे प्रत्याशी

बीजेपी ने गोरखपुर से जुड़ी संतकबीर नगर की सीट पर चल रहे "महासंग्राम" के बाद यहां से भाजपा के वर्तमान सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट काट दिया है। उनकी जगह गोरखपुर के वर्तमान सांसद प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया है। प्रवीण निषाद गोरखपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के टिकट से चुनाव जीते थे। अभी कुछ दिन पहले उन्होंने पाला बदल बीजेपी ज्वाइन कर ली।

गौरतलब है कि टिकट को लेकर संतकबीर नगर में सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश बघेल के समर्थकों के बीच तनाव का माहौल है। करीब डेढ़ महीना पहले एक कार्यक्रम के दौरान सांसद ने मेंदावल विधायक को सरेआम जूतों से पीट दिया था। दो दिन पहले भी एक कार्यक्रम में दोनों के समर्थक भिड़ गए।


बीजेपी ने प्रतापगढ़ से संगम लाल गुप्ता, अंबेडकर नगर से मुकुट बिहारी, देवरिया से रमापति राम त्रिपाठी, जौनपुर से केपी सिंह और भदोही से रमेश बिन्द को टिकट दिया है।

 

 

 

लंबे इंतजार और जद्दोजहद के बाद आखिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने Kanpur के 110 वार्डों से लड़ने वाले प्रत्याशियों की List जारी कर दी। इस लिस्ट में बीजेपी के कई पुराने "योद्धा" चारो खाने चित्त हो गए। पुराने दिग्गजों मेें नीना अवस्थी ही अपनी टिकट बचाने में कामयाब हुईं। BJP ने चर्चित पार्षद रमापति झुनझुनवाला का टिकट काट दिया है। उनकी जगह प्रेम कुमार पांडेय को भाजपा ने टिकट दी है। प्रेम कुमार को प्रदेश महामंत्री सलिल विश्नोई के साथ RSS की शुरु से पहली पसंद बने हुए थे। शहर से कई और दिग्गजों के भी टिकट कटे हैं। पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट जारी होते ही आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर शुरु हो चुका है। लेकिन जिनकों टिकट मिली है वो एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं।


[caption id="attachment_18146" align="aligncenter" width="672"] उत्तर प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ वार्ड 106 से पार्षद प्रत्याशी प्रेम कुमार पांडेय (फाइल फोटो)[/caption]

YOGESH TRIPATHI 

कानपुर। BJP में टिकट को लेकर सबसे अधिक मारामारी थी। विधायक से लेकर मंत्री तक कई वार्डों में अपने करीबियों और रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग रहे थे। इसमें कई ऐसे भी आवेदक थे, जिन पर संगीन धाराओं में मुकदमें पंजीकृत हैं। पार्षदों की लिस्ट फाइनल होने के बाद भी कई बार दिग्गजों को बदलाव करना पड़ा। शुक्रवार को अंतिम मुहर लगने के बाद माना जा रहा था कि देर रात सूची जारी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शनिवार दोपहर बाद बीजेपी ने मीडिया को लिस्ट जारी की।  



गौरतलब है कि www.redeyestimes.com की खबरों को प्रमुखता से बीजेपी हाईकमान ने संज्ञान में लिया। चर्चित पार्षद नवीन पंडित की टिकट 93 से फाइनल होने के बाद कट गई थी। इस खबर को पोर्टल ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद हाईकमान ने वार्ड 93 की गणित समझने के बाद नवीन पंडित के लिए फिर से OK कर दी। इसका खुलासा करीब 20 घंटा पहले पोर्टल ने ब्रेकिंग न्यूज के जरिए कर दिया था, कि नवीन पंडित को फिर से 93 से टिकट दे दी गई है। गौरतलब है कि www.redeyestimes.com ने लिस्ट के बाबत कई प्रत्याशियों के फाइनल होने का खुलासा किया था।



"माननीयों" पर भारी पड़े संगठन के पदाधिकारी

पार्षद प्रत्याशियों के चयन में शहर के मंत्रियों और विधायकों पर संगठन और RSS के कद्दावर नेता अंततः भारी पड़े। गोविंदनगर में मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कई सीटों पर अपने करीबियों को उतारने के लिए नाक का सवाल बना लिया था। सबसे अहम वार्ड नंबर 33 की लड़ाई थी, जिसे वह हार गए। इस वार्ड से संगठन ने घनश्याम गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है। घनश्याम गुप्ता को आवेदन से पहले धमकी तक दी गई थी। इस मामले को यूपी बीजेपी ने भी काफी गंभीरता से लिया। वार्ड 86 काकादेव और वार्ड नंबर 34 रतनलाल नगर समेत करीब आधा दर्जन वार्ड ऐसे हैं जहां से मंत्री सत्यदेव पचौरी के करीबियों का पत्ता संगठन ने पूरी तरह से साफ कर दिया। कुछ यही हाल किदवईनगर विधान सभा का भी रहा। यहां से विधायक महेश त्रिवेदी सिर्फ चार करीबी लोगों को टिकट दिलाने में सफल हुए। बाकी सीटों पर RSS और संगठन के क्षेत्रीय "चाणक्य" भारी पड़े। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वार्ड नंबर 16 परमपुरवा से राकेश पासवान का टिकट होना। राकेश का नाम ही लिस्ट में नहीं भेजा गया था। दीपू का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर गुरुवार की रात तक था लेकिन बाद में पत्ता साफ हो गया। वहीं इन सबसे उलट मामला आर्यनगर में रहा, यहां पूर्व विधायक सलिल विश्नोई की खूब चली। सूत्रों की मानें तो विधान सभा के चुनाव में भीतरघात करने वाले कई पूर्व पार्षदों के टिकट संगठन और RSS ने काट दिए।



 

 

 

 

 

"माननीयों" की मनमानी के चलते गोविंद नगर, किदवई नगर विधान सभा के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों के पार्षद प्रत्याशियों की सूची नहीं जारी की गई। अन्य विधानसभाओं में प्रत्याशियों के नाम तय हो चुके हैं लेकिन यहां पर यह काम भी नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो शुक्रवार दोपहर तक सूची जारी हो सकती है। कई सीटों पर विवाद इतना गहरा है कि संगठन के दिग्गज भी परेशान हैं।




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। पार्षदी के टिकट के लिए “माननीयों” की मनमानी से आखिर गोविंदनगर और किदवईनगर विधान सभा की करीब तीन दर्जन सीटों पर BJP में “सियासी रायता” फैल ही गया। “सियासी रायता” फैलते ही UPBJP के “चाणक्य” का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने दोनों ही विधान सभा की सूची पूरी तरह से रोक दी। RSS के पदाधिकारी की मानें तो कई सीटों पर “माननीयों” ने इसे मूंछ की लड़ाई बना ली है। अंदरखाने की मानें तो मंगलवार को जिन 27 दावेदारों की प्रत्याशिता पर मुहर लगी थी, उसमें कई का पत्ता भी इन “माननीयों” ने साफ कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच सबसे खास चर्चा यह रही कि दक्षिण बीजेपी की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता ने मीटिंग में न जाने की बात कह दी। सूत्रों की मानें तो यदि बीजेपी प्रेसीडेंट नहीं पहुंची तो किदवईनगर से एक दिग्गज का टिकट कटना करीब-करीब पक्का है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार दोपहर तक दोनों विधान सभाओं की लिस्ट फाइनल हो सकती है।

किदवईनगर की विवादित सीटें

-वार्ड नंबर 100 पर काफी उहापोह की स्थित बनी हुई है। यहां से मंगलवार को प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगने के बाद अंदरखाने से चर्चा है कि प्रत्याशी का टिकट काटकर एक "माननीय" के बेहद करीबी को टिकट दी जा रही है। जिसे टिकट दी जा रही है उसके बारे में बताया जा रहा है कि वह बसपा के एक कद्दावर नेता के काफी करीबी रहे हैं।

-वार्ड नंबर 38 में सबसे तगड़े दावेदार बीजेपी दक्षिण के एक पूर्व प्रेसीडेंट के सगे भतीजे बताए जा रहे हैं। यह ऐसा वार्ड है जहां से बीजेपी ने कभी चुनाव नहीं जीता। संगठन की नजर में पूर्व प्रेसीडेंट का भतीजा सबसे ताकतवर और मजबूत प्रत्याशी है लेकिन बीजेपा का एक धड़ा इस मजबूत प्रत्याशी का पत्ता साफ कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए है। जिलाध्यक्ष की तरफ से भेजी गई तीन दावेदारों की लिस्ट में पूर्व प्रेसीडेंट के भतीजे का नाम सबसे ऊपर है। इस सीट से एक आवेदक अपनी टिकट पक्की मान पूरे दिन मिठाई बांटते रहे। माना जा रहा है कि मिठाई खिलाकर लोगों का मुंह मीठा कराने वाले आवेदक को सिग्नल मिल चुका है।



-वार्ड नंबर 84 इस सीट पर तीन सबसे मजबूत दावेदार हैं। ठाकुर बिरादरी की मजबूत प्रत्याशी को संगठन पहली पसंद बनाए है लेकिन यहां पर BJP की पसंद कोई और है। वर्तमान पार्षद की पैरवी में बीजेपी का एक गुट है। वहीं एक बीजेपी पार्षद की पत्नी के लिए “माननीय” लगे हैं। कुल मिलाकर माहौल यहां पर भी बिल्कुल ठीक नहीं है।

-वार्ड नंबर 88 और 65 में जातिगत समीकरण को लेकर ऊहापोह की स्थित बनी है। BJP के बड़े सूत्रों की मानें तो यहां पर एक से ठाकुर और एक से ब्राम्हण बिरादरी को टिकट देने के लिए प्लान तैयार किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर वह भी बिगड़ गया था। हालांकि यहां पर यही समीकरण ही बैठेगा। दो वार्डों में से एक में पंडित और एक में ठाकुर प्रत्याशी बनाया जाएगा।

-वार्ड नंबर 93 इस वार्ड से मंगलवार को नवीन पंडित के नाम पर सहमति बनी। बुधवार को नवीन पंडित से कह दिया गया कि तुम अपनी पत्नी नीतू पंडित को वार्ड 67 से लड़वाओ। 93 से बीजेपी के राजेश श्रीवास्तव को उतार दिया गया। गौरतलब है कि यह सीट पंजाबी बाहुल्य मतदाताओं वाली है। देवेंद्र सब्बरवाल का टिकट कांग्रेस से बिल्कुल तय है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी के ही एक बड़े सिंडीकेट ने यह सीट कांग्रेस के एक बड़े नेता को फायदा पहुंचाने के लिए “हाईजैक” करवाई है। उसके पीछे तर्क यह है कि नवीन पंडित से बेहतर फाइट देवेंद्र सब्बरवाल को और कोई दे नहीं सकता था। इस लिए सबसे बड़े रोड़े को पूरी प्लानिंग के तहत साफ कर दिया गया।

-वार्ड नंबर 48 इस सीट से बीजेपी ने एक कांग्रेसी नेता के बिजनेस पार्टनर के नाम पर करीब-करीब मुहर लगा दी है। चर्चा है कि इस सीट से राजेश श्रीवास्तव ने काफी मेहनत की थी। लेकिन उनको योजना के तहत 93 में शिफ्ट कर दिया गया। वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर अश्वनी चड्ढा का नाम करीब-करीब फाइनल है। जानकारों की मानें तो यह सीट भी बेजीपी ने वॉकओवर में दे दी।

गोविंदनगर विधान सभा की विवादित सीटें

वार्ड नंबर-33 यह सीट एक माननीय के लिए नाक का सवाल बनी हुई है। RSS सूत्रों की मानें तो जिसके लिए पैरवी की जा रही है, संगठन उसे कतई पसंद नहीं कर रहा है। उसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि आवेदक के खिलाफ संगीन धाराओं में कई मुकदमें पंजीकृत हैं। साथ ही सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कुछ दिन पहले एक आवेदक को धमकी देने का मामला। यूपी बीजेपी नेतृत्व के पास इसकी शिकायत संगठन ने पहुंचाई है। लेकिन “माननीय” नाम को फाइनल कराने में अड़े हुए हैं। कुल मिलाकर इस सीट पर “रायता” अधिक फैल चुका है।

-वार्ड नंबर 86 पर एक साल के बुजुर्ग के लिए माननीय ने तो प्रतिष्ठा फंसाई ही है साथ ही कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने भी इसी नाम पर सहमति देकर सभी को अचंभे में डाल दिया है। यहां संगठन की पहली पसंद एक पुराने कार्यकर्ता की पत्नी बनी हैं। इस कार्यकर्ता के बारे में कहा जाता है कि करीब 25 बरस से वह संघ और बीजेपी के सेवा करते आ रहे हैं। सपा के शासनकाल में उन पर कई मुकदमें भी इसी खुन्नस में दर्ज हुए।

-वार्ड नंबर 60 रावतपुर गांव इस वार्ड से RSS के प्रांतीय स्तर के बेटे ने दावा ठोका हैं। उनकी पैरवी संघ के लोग कर रहे हैं, जबकि “माननीय” की पैरवी अपन करीबी के लिए है। लेकिन दावा मजबूत मौजूदा पार्षद रामऔतार प्रजापति का बन रहा है।

-रतनलाल नगर वार्ड- इस वार्ड से “माननीय” ने अपनी साली के लिए टिकट मांगा है। जिनके लिए टिकट मांगा गया है वह पार्षद मनीष शर्मा की धर्मपत्नी है। लेकिन यहां पर संगठन की  पहली पसंद कोई और है।  

नोट- दोनों ही विधान सभाओं में करीब 10 और सीटें ऐसी हैं, जहां पर विवाद तगड़ा है।