November 2017

Kanpur शहर की पुलिस पस्त हो चुकी है। अपराधी और कातिल पूरी तरह से मस्त हैं। बुधवार को हिस्ट्रीशीटर छोटे बब्बन समेत दो लोगों की बेरहमी से दिनदहाड़े की गई हत्या का पुलिस पूरी तरह से पर्दाफाश भी नहीं कर सकी थी कि बेखौफ बदमाशों ने चौथे स्तंभ पर ही हमला कर दिया। "हिन्दुस्तान" अखबार के बिल्हौर तहसील के संवाददाता नवीन गुप्ता की देर शाम उनके दुकान पर पहुंचे कातिलों ने अंधाधुंध गोलियां दाग हत्या कर दी। 


[caption id="attachment_18458" align="aligncenter" width="695"] हिन्दुस्तान अखबार के बिल्हौर संवाददाता नवीन गुप्ता (फाइल फोटो)[/caption]

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। Kanpur के महेश्वरी मोहाल में 36 घंटे पहले हुए Double Murder का खुलासा शहर पुलिस पूरी तरह से कर भी नहीं पाई थी कि हत्या की एक और दुस्साहसिक वारदात से बिल्हौर एरिया थर्रा उठा। बाइक सवार बेखौफ बदमाशों ने सरेशाम बिल्हौर नगर पालिका के पास "हिन्दुस्तान" अखबार के संवाददाता नवीन गुप्ता पर अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर बेरहमी से मार डाला। सनसनीखेज वारदात की खबर मिलते ही बिल्हौर में हड़कंप मच गया। पुलिस के आला अफसर मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। कातिलों की गिरफ्तारी के लिए अफसरों ने पुलिस की कई टीमें बनाई हैं। "हिन्दुस्तान" अखबार के स्थानीय संपादक समेत कई वरिष्ठ पत्रकार दुःखद खबर मिलते ही बिल्हौर मौके पर पहुंच गए। 


बिल्हौर इंस्पेक्टर के मुताबिक नवीन गुप्ता (35) की एरिया में एक शॉप भी थी। वह "हिन्दुस्तान" अखबार के लिए तहसील स्तर पर रिपोर्टिंग भी करते थे। गुरुवार शाम को नवीन गुप्ता अपनी दुकान पर बैठे थे। तभी बाइक सवार दो हमलावर वहां पहुंचे। दोनों ने नवीन को दुकान से बाहर बुलाया। नवीन के बाहर आते ही बदमाशों ने असलहों से ताबड़तोड़ कई गोलियां दाग दीं। सीने और चेहरे पर गोलियां लगते ही नवीन नीचे गिरे।

Video देखें 


https://youtu.be/-Q0UuMwoPtc

हत्या के बाद बेखौफ बदमाश बाइक से भाग निकले


सरेशाम पत्रकार को गोलियों से भूनने के बाद बेखौफ कातिल बाइक से भाग निकले। आसपास के लोगों की निगाह जब नवीन पर गई तो वह खून से लथपथ हालत में जमीन पर गिरे मिले। लोग पुलिस को सूचना देकर नवीन को अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने नवीन को मृत घोषित कर दिया। स्थानीय पत्रकार के मर्डर की खबर जंगल में आग की तरह फैली। क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के साथ खबरनबीस भी पहुंच गए। पत्रकार के हत्या की खबर से अफसर भी सकते में आ गए। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह, एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा भी समाचार लिखे जाने तक मौका-ए-वारदात पर पहुंच चुके थे।


देखें Video ADG (L/O) आनंद कुमार


https://youtu.be/dmHK_0xcXXU

ADG (L/O) ने कहा, कुछ सुराग मिले हैं, जांच STF करेगी


हिन्दुस्तान अखबार के पत्रकार नवीन गुप्ता की हत्या के कुछ घंटे बाद ही लखनऊ में ADG (L/O) आनंद कु्मार ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि हत्याकांड से जुड़े कुछ सुराग मिले हैं। जल्द ही कातिल पुलिस की गिरफ्त में होंगे। वहीं देर रात लखनऊ में बैठे आला अफसरों ने पत्रकार नवीन गुप्ता मर्डर केस की जांच कानपुर पुलिस से न कराकर STF से कराने का निर्देश जारी कर दिया।


पत्रकार नवीन गुप्ता के कत्ल की वजह स्पष्ट नहीं


हिन्दुस्तान अखबार के बिल्हौर संवाददाता नवीन गुप्ता के "मर्डर की मिस्ट्री" पुलिस के लिए फिलहाल अभी पहेली ही बनी है। हत्या किसने और क्यों की ? पुलिस के लिए यह बड़ा यक्ष प्रश्न है ? क्या किसी सफेदपोश ने भाड़े पर पत्रकार की हत्या करवाई है ? यह भी जांच का बड़ा एंगल है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जिस तरह से फिल्मी स्टाइल में कातिलों ने नवीन गुप्ता पर बेरहमी से गोलियां दागी हैं वह शार्प शूटर ही करते हैं। सामान्य अपराधी इस तरह से वारदात नहीं कर सकता है। परिवार के लोग भी पुलिस को कोई खास जानकारी नहीं दे सके हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले नवीन गुप्ता का स्थानीय स्तर पर एक व्यक्ति से विवाद हुआ था। करीब एक महीना पहले नारामऊ के पास भी उसका किसी से विवाद हुआ था।

निर्भीक और बेबाक थी नवीन की पत्रकारिता


नवीन को करीब से जानने वाले लोगों से जब www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल ने बातचीत की तो सभी ने कहा कि वह किसी से दबते नहीं थे। बेखौफ लिखने के साथ उनकी बोली भी बेबाक थी। माना जा रहा है कि शायद इन्हीं सब बातों को लेकर किसी ने रंजिश में हत्या करवा दी हो। नवीन के घर में उनकी पत्नी के अलावा दो छोटे बच्चे हैं।

 

 

 

गुजरात में होने वाले विधान सभा चुनाव में केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच “सियासी शीतलहर” चल रही है। हाल अब ये हो चुका है कि कई मुख्यमंत्रियों और कैबिनेट मंत्रियों की फौज लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पूरे चुनाव को ऑपरेट कर रहे हैं। BJP की तरफ से हो रहे हर राजनीतिक हमले का जवाब कांग्रेस पूरे मुश्तैदी दे रही है। इन दोनों दलों के बीच मुद्दे जनता से जुड़े नहीं बल्कि राजनीतिक दल के मुखिया और उनके परिजनों से जुड़े हैं। राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर पहुंचे तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनेऊ के बाबत बड़ा सवाल दाग दिया।


[caption id="attachment_18453" align="aligncenter" width="695"] अपने पिता और पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद कर्मकांड में जनेऊ पहनकर संस्कार करते राहुल गांधी (फाइल फोटो)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। चुनाव, नगर निकाय का हो, विधान सभा का या फिर लोकसभा। जनता की मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान की चर्चा अब कोई राजनीतिक दल नहीं करता। जाति और धर्म की राजनीति पूरी तरह से हावी हो चुकी है। राजनीतिक दल मतदाताओं पर पकड़ बनाने के इस समय जाति-धर्म को सबसे बड़ा "हथियार" बनाए हुए हैं। प्रत्याशियों का चयन भी उसके रसूख के साथ अब जाति और धर्म पर निर्भर करने लगा है। इसके बाद ही मनी प्वाइंट आता है। गुजरात का चुनावी शोर इस समय पूरे शबाब पर पहुंच चुका है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी सभाओं में "सियासी तीर" छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के राहुल गांधी हर "सियासी तीर" का जवाब अब नए तेवर में देते दिखाई दे रहे हैं। 


[caption id="attachment_18454" align="aligncenter" width="751"] पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यह फोटो करीब 45 साल पुरानी है। इसमें वह अपनी पत्नी सोनिया गांधी के साथ अनुष्ठान कर रहे हैं। जनेऊ भी है और राहुल गांधी उसी जनेऊ से खेल रहे हैं।[/caption]

MODI को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने संदूक से निकाली पुरानी तस्वीर


नरेंद्र मोदी के इस हमले का जवाब देने में कांग्रेस ने बिल्कुल भी देर नहीं लगाई। कांग्रेस के दिग्गज संदूक में पड़ी कई दशक पुरानी तस्वीर बाहर निकाल लाए। तस्वीर पुरानी जरूर है लेकिन जवाब तगड़ा दे रही है। अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस ने तो PM नरेंद्र मोदी के सवालों का जवाब दे दिया लेकिन जनता के सवालों का जवाब और हिसाब कौन देगा ? जनता की मूलभूत समस्याओं रोटी, कपड़ा और मकान पर पड़ती मंहगाई की मार का जवाब क्या देश के राजनीतिक दलों के पास है। शायद नहीं, तभी तो पलटवार करते हुए कांग्रेस के वाइस प्रेसीडेंट राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा सवाल दागते हुए पूछ लिया कि गुजरात में विकास है तो 22 साल से हर गुजाराती के सिर पर 37 हजार रुपए का कर्ज क्यों है ?

GST के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने निकाला जुलूस तो फिल्म शोले की यादें हो गईं ताजा


सूरत में तो कांग्रेस एक विधान सभा प्रत्याशी ने ऐसा जुलूस निकाला, जिसे देखने के बाद शोले फिल्म की याद जेहन में तरोताजा हो गई। जुलूस में गब्बर के साथ उसकी पूरी टीम थी। जुलूस में शामिल लोग GST को (गब्बर सिंह टैक्स) कहते हुए कोस रहे थे।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस मोड़ पर हम आ गए हैं। चुनावी चर्चा बुनियादी जरूरतों से पूरी तरह से भटक चुकी है। गुजरात चुनाव में वोटिंग को महज कुछ ही दिन बाकी हैं लेकिन एक बात तय है कि आगे क्या-क्या होने वाला है ? यह भगवान को ही मालुम होगा।

 

मिसेज यूपी का खिताब जीतने वाली सुंदरी को इलीट इंडिया के मेगा फिनाले में डायरेक्ट एंट्री दी जाएगी। बुधवार को Kanpur के बेनाझाबर में कई प्रतिभागी पहुंची। आयोजकों के मुताबिक अब तक करीब 40 प्रतिभागियों का स्लेक्शन हो चुका है। सभी प्रतिभागी अपने सौंदर्य का जलवा मोहब्बत की नगरी कहे जाने वाले Agra City में फाइनल के दौरान बिखेरेंगी। 



कानपुर। मिसेज यूपी प्रतियोगिता का Final मोहब्बत की नगरी कहे जाने वाले Agra City में होगा। बुधवार को Kanpur के हर्ष नगर स्थित बेनाझाबर में प्रतिभागियों का आडिशन लिया गया। रिवाज संस्था की तरफ से आयोजित की जा रही इस प्रतियोगिता में प्रदेश भर के कई शहरों से प्रतिभागी भाग लेंगी। अब तक करीब 40 प्रतिभागियों का स्लेक्शन हो चुका है। 


प्रतियोगिता की आयोजक श्रीमती शगुन खट्टर ने बताया कि प्रतिभागियों को दो वर्गों में में बांटा गया है। पहला 21 से 35 की आयु और दूसरा 35 से 50 की आयु। 21 से 35 आयु में विजेता प्रतिभागी को मिसेज यूपी का खिताब दिया जाएगा। जबकि 35 से 50 की आयु में विजेता प्रतिभागी को मिसेज यूपी प्लेटिनियम के खिताब से नवाजा जाएगा।



इलीट इंडिया पेजेट के डॉयरेक्टर नरेश मदान ने बताया कि मिसेज यूपी का खिताब जीतने वाली प्रतिभागी को इलीट मिसेज इंडिया प्रतियोगिता 2018 के फिनाले में डॉयरेक्ट एंट्री दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इलीट इंडिया पेजेंट देश में सौंदर्य प्रतियोगिता कराने वाली नंबर एक कंपनी बन चुकी है।

यह कंपनी स्टेट लेवल से लेकर नेशनल और इंटरनेशनल स्तर तक प्रतियोगिता का आयोजन करवाने जा रही है। इस प्रतियोगिता में 20 अलग-अलग देशों की सुंदरियां भाग लेंगी। ऑडिशन के निर्णायक मंडल में रतन राठौर, चांदनी सिंह, नरेश मदान समेत कई प्रमुख लोग हैं। 

Old Kanpur City के महेश्वरी मोहाल की तंग गलियों में बुधवार सुबह बेखौफ कातिलों ने जिस तरह से दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देकर हिस्ट्रीशीटर समेत दो लोगों का बेरहमी से मर्डर किया है, उससे शहर पुलिस के कानून-व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुल गई। सिर्फ पुलिस की ही नहीं बल्कि शहर के दल्ले पत्रकारों की भी पोल खुली है। जी, हां यह बिल्कुल सच है। मारे गए हिस्ट्रीशीटर छोटे बब्बन के पास से पुलिस को एक प्रेस कार्ड भी मिला है। जिस तरह से पुलिस के लिए सबसे बड़ा सवाल कातिलों को खोजने का है ठीक उसी तरह से यह सवाल भी कम नहीं है कि आखिर हिस्ट्रीशीटर को प्रेस कार्ड किस आधार पर और क्यों जारी किया गया ? यह कोई पहला मामला नहीं है। खूंखार अपराधी रहे जावेद रिमवाला के पास से भी प्रेस कार्ड पुलिस कई साल पहले बरामद कर चुकी है।


[caption id="attachment_18438" align="aligncenter" width="860"] सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन (फाइल फोटो)[/caption]

 YOGESH TRIPATHI


कानपुर। Old Kanpur के महेश्वरी मोहाल की तंग गलियों में बुधवार सुबह डबल मर्डर की वारदात से सनसनी फैल गई। कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए बेखौफ हमलावरों ने फीलखाना थाने के हिस्ट्रीशीटर (HS) सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन और उसके साथ मौजूद नाबालिग लड़के को चाकुओं से गोदकर मार डाला। डबल मर्डर जैसी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने के बाद बेखौफ कातिल मौके से भाग निकले। वारदात की खबर मिलते ही पुलिस के तमाम बड़े अफसर मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। समाचार लिखे जाने तक पीड़ित के परिवारीजनों ने थाना पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी थी।


[caption id="attachment_18440" align="aligncenter" width="640"] कानपुर के महेश्वरी मोहाल में दोहरे हत्याकांड की खबर पर पहुंची फीलखाना पुलिस। [/caption]

एक नेता से मिलकर लौट रहा था हिस्ट्रीशीटर छोटे बब्बन


पुलिस के मुताबिक सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन बुधवार को महेश्वरी मोहाल में एक नेता से मुलाकात के बाद वापस लौट रहा था। तभी पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने छोटे बब्बन को रोका और चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार कर उसे मौत की नींद सुला दिया। बेखौफ हमलावरों ने छोटे बब्बन के साथ मौजूद ऋषभ (14) को भी मार डाला। ऋषभ को मारने के पीछे बताया जा रहा है कि कातिलों को लगा कि वह गवाह बनेगा, इस लिए उसे भी बेरहमी से मौत की नींद सुला दिया गया। डबल मर्डर के बाद महेश्वरी मोहाल की तंग गली में चारो तरफ खून ही खून फैल गया। तमाशबीन बने लोग अपने घरों में दुबक गए। कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए सूचना पुलिस को 100 नंबर पर दी। वायरलेस पर मैसेज मिलते ही थाना पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंच गई। थोड़ी ही देर में एसपी और क्षेत्राधिकारी भी मौके पर पहुंचे। समाचार लिखे जाने तक SSP अखिलेश कुमार मीणा भी पहुंच गए थे।

बिल्डिंग कांस्ट्रेक्शन का कारोबार कर रहा था छोटे बब्बन


जानकार सूत्रों की मानें तो चावल मंडी निवासी सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन का पुराना लंबा-चौड़ा अपराधिक इतिहास है। क्षेत्र के ही एक सफेदपोश से उसे पूरे समय छतरी मिली रही। उसके उपनाम को उसने अपने नाम के आगे जोड़कर काफी धाक भी जमाई। हत्या समेत कई संगीन मामले जब छोटे बब्बन पर दर्ज हुए तो करीब डेढ़ दशक पहले फीलखाना पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। बताया जा रहा है कि पुलिस से बचने के लिए पिछले कुछ सालों से वह बिल्डिंग कांस्ट्रैक्शन के कारोबार से जुड़ गया।

[caption id="attachment_18441" align="aligncenter" width="675"] शहर के दलाल पत्रकारों के गिरोह की तरफ से जारी ये प्रेस कार्ड भी है बड़ी चुनौती। आखिर अपराधियों कौन जारी करता है फर्जी प्रेस कार्ड ?[/caption]

शहर के दलाल पत्रकारों ने जारी कर दिया प्रेस कार्ड


हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद जब पुलिस ने सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन की घेराबंदी शुरु की तो शहर के कुछ दलाल और अपराधिक प्रवृत्ति वाले पत्रकारों के टच में छोटे बब्बन आ गया। कुछ दिनों तक उनकी जी, हुजूरी और पैलगी करके उसने अपना प्रेस कार्ड भी बनवा लिया। इस प्रेस कार्ड के जरिए वह पुलिस वालों के बीच हनक बनाने लगा। जो पुलिस कभी उसके पीछे भागती थी, प्रेस कार्ड बनने के बाद वही सिपाही और दरोगा उसे सलाम ठोंकने लगे। सवाल यह उठता है कि महज कुछ दर्जा तक ही पढ़े इस अपराधी को क्यों और किस आधार पर प्रेस कार्ड जारी किया गया ? यह भी एक जांच का विषय पुलिस के लिए बनेगा।

पहले भी हिस्ट्रीशीटरों के पास से मिल चुके हैं प्रेस के परिचय पत्र


हिस्ट्रीशीटर सतीश कश्यप उर्फ छोटे बब्बन के पास से प्रेस का जो परिचय पत्र मिला है वो पड़ोसी जनपद का है। शहर के क्रिमिनल्स के पास से प्रेस कार्ड बरामद होने की यह कोई पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी शहर के कई बड़े अपराधियों के पास से प्रेस कार्ड मिल चुके हैं। शहर के खूंखार अपराधी रहे जावेद रिमवाला के पास से भी पुलिस प्रेस कार्ड बरामद कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस समय शहर के मुस्लिम एरिया के तमाम बड़े बदमाशों के पास से किसी न किसी प्रेस के परिचय पत्र हैं। वह गाड़ियों पर फर्जी तरीके से प्रेस लिखवाने के बाद बेखौफ होकर अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में नहीं चूकते हैं। शहर के कुछ दलाल टाइप के पत्रकारों का ऐसे अपराधिक प्रवत्ति वाले बदमाशों का खुला संरक्षण रहता है। थानेदार और क्षेत्राधिकारी इस लिए खामोश रहते हैं कि इन अपराधियों को संरक्षण देने वाले दलाल पत्रकार शहर के आला अफसरानों के पास दरबार सजाते हैं।

[caption id="attachment_18439" align="aligncenter" width="640"] डबल मर्डर की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजन शवों को देखर बदहवाश हो गए। महिला पुलिस ने सांत्वना दी।[/caption]

शहर के दल्ले नेता भी पालते हैं ऐसे हिस्ट्रीशीटर 


सिर्फ पुलिस और पत्रकार ही नहीं शहर के दल्ले नेता भी पालते हैं हिस्ट्रीशीटर। यकीन न आए तो मारे गए हिस्ट्रीशीटर की इस फोटो को देखिए। सत्ताधारी बीजेपी के चुनाव चिन्ह को लगाकर यह भाजपा के लिए नगर निकाय के चुनाव में वोट मांगते भी कई बार देखा गया। जानकारों की मानें तो क्षेत्र के एक पुराने चर्चित सफेदपोश के लिए काम करने वाला छोटे बब्बन वर्तमान समय में कई बीजेपी नेताओं का करीबी भी था।

[caption id="attachment_18442" align="aligncenter" width="640"] क्रूर कातिलों ने हिस्ट्रीशीटर के साथ मौजूद नाबालिग बच्चे की जान को भी नहीं बख्शा और उसे बेरहमी से मार डाला। [/caption]

जर-जोरू और जमीन पर अटकी पुलिस की जांच


www.redeyestimes.com से बातचीत में फीलखाना इंस्पेक्टर ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि छोटे बब्बन पर कई संगीन धाराओं में मुकदमें दर्ज थे। थाने से उसकी हिस्ट्रीशीट भी खुली हुई है। हत्या क्यों और किसने की है ? इसकी छानबीन जारी है। वहीं एक पुलिस अफसर की मानें तो अभी तक की छानबीन में जो बात सामने आई है, उससे लग रहा है कि मामला आशनाई का है।

माना जा रहा है कि जिस तरह से दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया है उससे साफ है कि कातिल कहीं न कहीं एरिया के ही हैं। उनको तंग गलियों और रास्तों के बारे में पूरी जानकारी रही होगी। साथ ही यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कातिलों को शायद एरिया के लोग जानते-पहचानते होंगे इसी लिए किसी ने विरोध करने की कोशिश भी नहीं की।

 

 

आप ने इंसानों को तो जेल से बाहर आते देखा होगा लेकिन किसी गधे को नहीं। चौंकिए नहीं लेकिन यह सच है। यूपी के बुन्देलखंड स्थित जालौन जिला कारागार में 24 नवंबर को जेल में बंद किए गए 8 गधों को बीजेपी नेता की सिपाऱिश पर मंडे की शाम को रिहा कर दिया गया। इन गधों पर आरोप है कि जेल में प्लांटेशन के लिए लाए गए पांच लाख रुपए के कीमत के पौधों को चर लिया। 


[caption id="attachment_18434" align="aligncenter" width="670"] उरई की जिला कारागार से रिहाई के बाद बाहर आता 8 गधों का झुंड।[/caption]

जालौन। उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड स्थित जनपद जालौन में एक अजीबो-गरीब मामला प्रकाश में आया है। पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने के मामले में जेल भेजे गए 8 गधों (Donkey) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) लीडर की सिपारिश पर रिहा कर दिया गया। सभी गधे 24 नवंबर को जेल भेजे गए थे। बताया जा रहा है कि उरई के जिला कारागार में प्लांटेशन के लिए करीब पांच लाख रुपए के कीमत के पौधे लाए गए थे, जिन्हें इन गधों पर चर लिया था। इसके बाद पुलिस वालों ने गधों को जेल भेज दिया।


तो इस लिए जेल भेजे गए थे सारे गधे


जिला कारागार के हेड आरक्षी आरके मिश्रा के मुताबिक कुछ दिन पहले सुपरिंटेंडेंट सीताराम शर्मा ने करीब पांच लाख रुपए के कीमत के पौधे प्लांटेशन के लिए मंगवाए थे। इन पौधों को जिला कारागार के अंदर लगवाया जाना था। बताया जा रहा है कि बाहर घूमने वाले गधों ने इन कीमती पौधों को चर लिया। जब इन गधों के मालिक को सूचना देकर ले जाने के लिए कहा गया तो उसने नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद जेल सुपरीटेंडेंट की पहल पर उरई की कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई कर गधों को जेल भेज दिया।

गधों के जेल जाने के बाद मालिक ने मांगी BJP लीडर से मदद


पुलिस ने सभी आठ गधों को जेल भेज दिया। इसकी भनक जब गधों के मालिक को लगी तो वह परेशान हो गया। सोमवार को गधों के मालिक ने एक बीजेपी लीडर से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराते हुए मदद मांगी। इस पर बीजेपी नेता गधों के मालिक के साथ जिला कारागार पहुंचे और सुपरीटेंडेंट से गधों की रिहाई के लिए बात की।

पहली बार किसी जेल से बाहर आए गधे


जानकारों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जेल से इंसानों को आते हर रोज देखा जाता है लेकिन किसी जेल से गधों के रिहा होते पहली बार देखा गया। जिला कारागार से गधों के रिहा होने की खबर मिलने पर जनपद में खूब चर्चा हो रही है।

इस शादी की नौकरशाही के गलियारों में खासी चर्चा हो रही है। चर्चा इस बात की अधिक है कि IAS अफसर चाहते तो करोड़ों रुपए का दहेज मिल सकता था लेकिन उन्होंने एक सामान्य परिवार की लड़की को अपनाकर एक नई मिशाल पेश की है। रायबरेली के DM  संजय खत्री ने 19 नवंबर को नई दिल्ली में ब्याह रचाया। 


[caption id="attachment_18429" align="aligncenter" width="650"] नई दिल्ली में ब्याह रचाने के बाद अपनी धर्मपत्नी के साथ रायबरेली के जिलाधिकारी संजय खत्री।[/caption]

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के IAS अफसर संजय खत्री एक बार फिर से चर्चा में हैं। वह इन दिनों मीडिया की सुर्खियां भी बने हैं। उसके पीछे वजह उनकी अलबेली शादी है। बताया जा रहा है कि जो लड़की कभी उनके पास इंसाफ मांगने पहुंची थी, IAS अफसर संजय खत्री उसी लड़की को अपना दिल दे बैठे। सामान्य परिवार की लड़की से उन्होंने दिल्ली में जाकर ब्याह रचाया। उनकी यह शादी इन दिनों मीडिया के साथ नौकरशाही में चर्चा-ए-खास है।



यूपी के गाजीपुर में हुई मुलाकात


IAS अफसर संजय खत्री यूपी के गाजीपुर में जिलाधिकारी रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनकी तैनाती के दौरान एक युवती उनके पास इंसाफ की गुहार लगाने पहुंची थी। इंसाफ मांगने पहुंची युवती डीएम साहब को काफी पसंद आई तो वह उसे दिल दे बैठे। दोनों के बीच प्यार की पीगें बढ़ीं। यूपी के गाजीपुर से शुरू हुआ मोहब्बत का सफर अब दिल्ली में ब्याह के बाद जाकर थमा। संजय खत्री इन दिनों रायबरेली में तैनात हैं।

NEW DELHI में गुपचुप रचाया ब्याह


संजय खत्री ने 19 नवंबर को गाजीपुर की इस युवती से नई  दिल्ली में शादी की। शादी के मौके के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की जयंती को चुना गई। नौकरशाही के गलियारे में इस शादी की खूब चर्चा हो रही है। चर्चा इस बात की अधिक है कि सामान्य परिवार की युवती से शादी कर डीएम संजय खत्री ने बड़ी मिशाल पेश की है।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ पहुंचने के बाद मेयर और पार्षद प्रत्याशी के लिए वोट किया। लेकिन उनके वोट की चोट करते ही उनका मतदान केंद्र विवादों की सुर्खियां बन गया। दरअसल इसके पीछे जो सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है वो है EVM के ठीक पीछे भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल का फूल का दीवार पर बना होना। बसपा की मेयर प्रत्याशी बुलबुल गोडियाल ने कहा कि यह आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। इस मामले वह कोर्ट ले जाएंगी। 


[caption id="attachment_18424" align="aligncenter" width="850"] राजनाथ सिंह ने जिस मतदान केंद्र पर वोट डाला, वहां मतपेटी के ठीक पीछे कमल का फूल बना दीवार पर साफ नजर आ रहा है (लाल घेरे में)[/caption]

लखनऊ।  केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंचकर संडे को अपने मताधिकार का प्रयोग किया लेकिन उनके वोट डालते ही मतदान केंद्र विवादों में आ गया। विवाद की वजह EVM के ठीक पीछे मतदान केंद्र के अंदर बने “कमल के फूल” का निशान बताया जा रहा है। मीडिया में यह खबर वायरल होते ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरु कर दिया।


BSP की मेयर प्रत्याशी बोलीं, कोर्ट जाऊंगी मैं

बसपा की मेयर प्रत्याशी और हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता बुलबुल गोडियाल ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल सत्ता की ठसक के बल पर खुल्लम-खुल्ला आदर्श चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहा है। हैरतअंगेज बात यह है कि चुनाव आयोग पूरी तरह से आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। शिकायत का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। बुलबुल गोडियाल ने कहा कि वह इस मामले को कोर्ट ले जाएंगी।

आखिर सेक्टर मजिस्ट्रेट और पीठासीन अधिकारी का क्यों नहीं गया ध्यान ?

गृह मंत्री और राजधानी से सांसद राजनाथ सिंह ने लखनऊ के  मॉल एवेन्यू में मौजूद म्युनिसिपल नर्सरी स्कूल के पोलिंग बूथ पर  लखनऊ के  महापौर और पार्षद पदों के लिए अपने मत का प्रयोग किया। राजनाथ सिंह जिस स्थान पर खड़े होकर मतदान कर रहे थे, उस जगह पर  पीछे कमल का निशान बना दिखाई दिया।

केंद्रीय मंत्री के ठीक पीछे कमल का  निशान बना दिखाई दिया लेकिन पोलिंग बूथ पर तैनात किसी मजिस्ट्रेट ने इस पर ध्यान नहीं दिया। लोग यहां लगातार आकर वोट डालते रहे। इस मामले में प्रतिक्रिया जानने  के लिए लखनऊ के जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका।

अभी तक सिर्फ EVM को लेकर ही विपक्षी दल परेशान थे लेकिन दूसरे चरण के मतदान के दौरान बुन्देलखंड के ललितपुर जनपद में जो नजारा देखने को मिला है उससे विपक्षी दलों के होश उड़ गए हैं। यहां बैलेट पेपर पर पहले से ही बीजेपी प्रत्याशी के खाने में मुहर लगी मिली है। सपा की प्रवक्ता और नेत्री ने इस बात की जानकारी फोटो के साथ अपनी फेसबुक वॉल  के साथ-साथ Twitter पर भी शेयर किया है। 


 

[caption id="attachment_18420" align="aligncenter" width="532"] नगर निकाय के दूसरे चरण में ललितपुर जिले के तालबेहट स्थित एक बूथ पर बैलट पेपर में पहले से लगी मिली कमल के फूल पर मुहर।[/caption]

ललितपुर : उत्तर प्रदेश में नगर निकाय का चुनाव सिर्फ तमाशा बन कर रह गया है। आदर्श चुनाव आचार संहिता की न सिर्फ जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं बल्कि EVM को लेकर एक बार तमाम तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। हद तो तब हो गई जब यूपी के बुन्देलखंड स्थित ललितपुर जनपद में एक पूथ पर कमल के फूल पर मुहर लगे कई बैलेट पेपर मिले। मुहर लगे बैलट पेपर मिलते ही विपक्षी दलों में हड़कंप मच गया।


https://twitter.com/pankhuripathak/status/934668440291368960

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हरीश चंद्र रावत है बीजेपी के प्रत्याशी, बैलेट पेपर पर पहले से मुहर होने से राजनैतिक दलों में हड़कम्प,नगर पंचायत तालबेहट के भाग संख्या 2 के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का मामला। इस खबर की जानकारी समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पंखुरी पाठक ने अपने फेसबुक वॉल पर शेयर की है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रथम चरण के मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथ पर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ की खबरें आईं थीं। सिर्फ कानपुर में ही 97 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यहां के वार्ड नंबर 58 में तो यह हाल था कि बटन कोई भी दबाव लेकिन वोट कमल के फूल को जा रहा था।

UP नगर निकाय चुनाव का पहला चरण काफी शांतिपूर्वक संपन्न हो गया था लेकिन दूसरे चरण में कई जगहों से तमाम गंभीर शिकायतें मिल रही हैं। EVM को लेकर कई जगहों से शिकायतें आई हैं। फर्जी वोटिंग को लेकर हाथापाई तक हो गई। मथुरा में तो करीब डेढ़ लाख वोटरों के नाम ही लिस्ट से गायब हो गए हैं। सपा नेत्री पंखुरी पाठक ने ट्वीट करते हुए कहा कि इसकी सीबीआइ या फिर न्यायिक जांच होनी चाहिए।



लखनऊ नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के कई बूथों से गंभीर शिकायतें आ रहीं हैं। पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद वार्ड और काकारी क्षेत्र में मतदाताओं ने जमकर फर्जी वोटिंग कराए जाने का आरोप लगाया है। फर्जी वोटिंग को लेकर खासा आक्रोश भी है। लखनऊ में ही एक जगह बसपा प्रत्याशी के समर्थकों की कुछ लोगों ने पिटाई कर दी। अलीगढ़ से भी मारपीट और बवाल की खबरें हैं। 




लखनऊ के जिलाधिकारी का कहना है कि मतदान शांतिपूर्वक चल रहा है। गड़बड़ी करने वालों पर नजर रखी जा रही है। काकोरी में शबनम नाम की एक महिला ने बताया कि बूथ पर पहुंचने से पहले उसका वोट पड़ चुका था। शबनम के मुताबिक “स्वर्गवासी” हो चुके चार लोगों के नाम से भी वोट डाले गए हैं। इसी तरह पुरान लखनऊ के हुसैनाबाद वार्ड में कई लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं थे। कई जगहों पर तो पूरे के पूरे मोहल्ले के मतदाताओं के नाम गायब मिले हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत उनके नाम सूची से हटवाए गए हैं। जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर इस बाबत कुछ भी बोलने से कतराते रहे।

VIDEO : साभार, तहलका न्यूज

https://youtu.be/nJH92t0uf2s

मथुरा में 1.5 लाख मतदाताओं का नाम सूची से गायब, पंखुरी पाठक ने किया Tweet

समाजवादी पार्टी की कद्दावर नेत्री पंखुरी पाठक ने सोशल मीडिया Twitter पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि मथुरा में 1.5 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाना बेहद गंभीर मामला है। इस पर सरकार CBI या फिर न्यायिक जांच क्यों नहीं करवा रही है ?

फर्रुखाबाद में सपाइयों और भाजपाइयों के बीच मारपीट

वहीं फर्रुखाबाद में फर्जी वोटिंग को लेकर दूसरे चरण की वोटिंग में सपाइयों और भाजपाइयों के बीच जमकर जूता-लात चले। पूरे उत्तर प्रदेश से मारपीट और हिंसक झड़प की खबरें मिल रही हैं। कई जगहों पर EVM में गड़बड़ी की शिकायतें भी आ रही हैं।

उल्लेखनीय है कि पहले चरण की वोटिंग में मारपीट और हिंसक वारदातें नहीं हुई थीं। लेकिन EVM को लेकर तमाम जगहों से शिकायतें आईं थीं। कानपुर में तो वार्ड नंबर -58 में यह हाल था कि बटन किसी को दबाओ और वोट कमल के फूल को ही जा रहा था। यही हाल वार्ड नंबर 72 दबौली का भी था। यहां प्रकाश मंदिर की पोलिंग में एक बार बटन दबाने पर नौ लोगों को वोट जा रहा था।

 

 

Kanpur के अर्मापुर थाने के पास बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक विजय यादव का Murder किए जाने की खबर मिलते ही कई हिन्दू संगठनों के नेता और कार्यकर्ता पहुंच गए। सभी ने जल्द से जल्द हत्यारोपितों को गिरफ्तार करने की मांग करते हुए काफी देर तक हंगामा भी किया। पुलिस अफसरों के सांत्वना देने के बाद सभी लोग शांत हुए। समाचार लिखे जाने तक काफी भीड़ थाने पर जमा थी। 


[caption id="attachment_18408" align="aligncenter" width="679"] विजय यादव (बजरंग दल पूर्व जिला संयोजक, कानपुर), (फाइल फोटो)[/caption]

कानपुर। Kanpur के अर्मापुर थाने से चंद कदम की दूरी पर फ्राइ-डे की शाम बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक का बेरहमी से मर्डर कर दिया गया। दुस्साहसिक वारदात की खबर मिलते ही पुलिस के आला अफसर मौका-ए-वारदात पर पहुंच गए। परिजनों ने थाना पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस के मुताबिक पुरानी रंजिश के चलते हत्या की बात फिलहाल अभी तक सामने आई है। छानबीन की जा रही है। जल्द ही कातिलों को Arrest कर लिया जाएगा।


कल्याणपुर थाना एरिया के रावतपुर गांव का निवासी थे विजय यादव

बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक विजय यादव कल्याणपुर थाना एरिया के रावतपुर गांव का रहने वाले थे। विजय ने फर्नीचर की दुकान खोल रखी थी। फ्राइ-डे की शाम को अर्मापुर थाने के पीछे मजार के पास रक्तरंजित हालत में विजय को पड़ा देख राहगीरों ने सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस के अफसर मौके पर पहुंचे। रक्तरंजित हालत में विजय यादव को रीजेंसी ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को विश्वास न होने विजय को लहूलुहान हालत में ही हैलट अस्पताल ले जाया गया। यहां भी चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

बजरंग दल नेता के हत्या की खबर मिलते ही हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं की भीड़ पहुंची

बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक विजय यादव के मर्डर की खबर मिलते ही भारी संख्या में हिन्दू संगठनों के नेता और कार्यकर्ता पहुंच गए। सभी ने पुलिस से कातिलों को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग शुरु कर दी। कुछ नेताओं ने पुलिस अफसरों से बहस की। समाचार लिखे जाने तक पुलिस परिजनों से जानकारी एकत्र कर रही थी। इस बाबत जब अर्मापुर थानेदार समेत कई अफसरों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो किसी का फोन नहीं उठा।

SSP भी अखिलेश कुमार मीणा भी पहुंचे मौके पर

बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक के मर्डर की खबर मिलते ही SSP कानपुर अखिलेश कुमार मीणा भी मौके पर पहुंचे। SSP के मुताबिक हत्यारों ने धारदार हथियार से विजय यादव का मर्डर किया है। प्रारंभिक इंट्रोगेशन में अभी तक पुरानी रंजिश की बात सामने आ रही है।

कातिलों ने पुलिस की थकावट का पूरा फायदा उठाया

शहर समेत यूपी का पुलिस बल नगर निकाय के चुनावों में व्यस्त है। 48 घंटा पहले कानपुर पुलिस भी नगर निकाय चुनाव की ड्यूटी में थी। चुनाव खत्म होने के बाद कुछ स्टाफ बाहर ड्यूटी करने चला गया। जो स्टाफ है वह इतना थका है कि उसे थोड़ा आराम की भी आवश्यकता है। माना जा रहा है कि थाने के पीछे वारदात करने में कातिलों ने इस बात का भी पूरा फायदा उठाया।

किदवई नगर से BJP के विधायक महेश त्रिवेदी सुबह से ही विधान सभा एरिया के अंतर्गत पड़ने वाले सभी पोलिंग पर पहुंचे। प्रत्याशियों से वोटिंग के साथ-साथ होने वाली दिक्कतों के बारे में भी उन्होंने पूछा। कई जगहों पर संतुष्ट दिखे तो कई जगहों पर थोड़े से मायूस भी दिखे। वार्ड 93, 67 समेत कई वार्डों में कमल का फूल खिलता देख वह काफी खुश थे।


[caption id="attachment_18403" align="aligncenter" width="695"] स्कूटी चलाते हुए गोविंदनगर के खालसा ब्वायज कालेज पहुंचे भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी[/caption]

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कानपुर। नगर निकाय चुनाव के प्रथम चरण में Kanpur में Voting के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तमाम पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने एरिया की पोलिंग पर भ्रमण करते नजर आए। किदनईनगर से बीजेपी के MLA महेश त्रिवेदी स्कूटी ड्राइव करते हुए खालसा ब्वायज इंटर कालेज पहुंचे तो समर्थक उत्साह में नारेबाजी करने लगे। इस दौरान गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन सरदार राजेंद्र सिंह (जिन्दी) भी समर्थकों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने चार दिन पहले ही बीजेपी को ज्वाइन किया है। 


नवीन से बोले, बगल वाली दो सीटें भी चाहिए पंडित जी तुमसे


महेश त्रिवेदी स्कूटी से उतर भी नहीं पाए थे कि समर्थकों ने उनको घेर लिया। नारेबाजी का शोर सुनकर पार्षद प्रत्याशी नवीन पंडित बाहर आए। नवीन पंडित को देख विधायक महेश त्रिवेदी ने पूछा कि कैसा हो रहा है मतदान। जवाब मिला उम्मींद से काफी बेहतर। लेबर कालोनी का एकतरफा वोट पड़ रहा है विधायक जी। जीत रहे हो कि नहीं ? इस सवाल पर नवीन पंडित ने कहा कि बाबा के आशीर्वाद से जीत सुनिश्चित लग रही है। इसके बाद महेश त्रिवेदी ने कहा कि मुझको बगल वाली दोनों सीटें भी चाहिए। इशारा साफ था वार्ड 48 के सुनील नारंग की तरफ। विधायक ने कहा कि वहां पर भी देखते रहो तुम।

गांधी स्मारक इंटर कॉलेज भी पहुंचे MLA


MLA महेश त्रिवेदी इससे पहले किदवई नगर के कई पोलिंग पर भ्रमण करने के बाद गांधी स्मारक पहुंचे। यहां पहले से ही बीजेपी प्रत्याशी सुनील नारंग मौजूद थे। उन्होंने सुनील से पूछा कि कितने प्रतिशत वोटिंग हुई है। इस पर सुनील ने जवाब दिया दोपहर दो बजे तक 40 फीसदी मतदान हो चुका था। इसके बाद विधायक ने वहां बैठे सब इंस्पेक्टर को कुछ निर्देश भी दिए। इस दौरान डीबीएस कालेज छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष गुड्डन दुबे भी समर्थकों के साथ मौजूद रहे।

 

जिसकी उम्मींद और आशंका राजनीति के धुरंधर पंडित जाहिर कर रहे थे आखिर किदवईनगर विधान सभा के वार्ड नंबर 93 में वही हुआ। BJP प्रत्याशी नवीन पंडित ने अपने राजनीतिक "गुरु" और कांग्रेस से पार्षद प्रत्याशी के दो गढ़ में सेंधमारी कर दी। ये वो गढ़ है जिन्हें कांग्रेस का वोट बैंक कहा जाता था। विधायक महेश त्रिवेदी और नवीन पंडित की मौजूदगी में गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन सरदार राजेंद्र सिंह (जिन्दी) समेत सिख समुदाय के सैकड़ों लोगों ने बीजेपी ज्वाइन कर नवीन पंडित का नारा बुलंद किया। यहां चुनाव अब टक्कर का नहीं बल्कि करीब-करीब एकतरफा हो चुका है


 

[caption id="attachment_18395" align="aligncenter" width="774"] सिख समुदाय की बुजुर्ग महिला ने नवीन पंडित को माला पहनाया तो नवीन ने उनको भी माला पहनाकर आशीर्वाद लिया[/caption]

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कानपुर। Kanpur के किदवईनगर विधान सभा एरिया के वार्ड नंबर 93 (गोविंदनगर) के चुनाव में Voting की पूर्व संध्या पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी नवीन पंडित ने अपने राजनीतिक “गुरु” और कांग्रेस प्रत्याशी के दो मजबूत किलों को पूरी तरह से ढहा दिया। फर्राटेदार पंजाबी बोलने वाले नवीन पंडित को सिख समुदाय के बड़े वर्ग का समर्थन मिल गया। साथ ही कांग्रेस के एक और परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम समुदाय में भी नवीन पंडित ने तगड़ी सेंधमारी कर दी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जलपा नगर एरिया में झाड़ू लेकर गंदगी साफ कर रहे नवीन पंडित को गले लगा लिया। युवाओं ने कहा भाई हो तुम तो बुजुर्गों ने कहा कि बेटा हो तुम। गौरतलब है कि कांग्रेस प्रत्याशी के ये दो मजबूत किले थे।


[caption id="attachment_18396" align="aligncenter" width="857"] बीजेपी विधायक महेश त्रिवेदी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद बातचीत करते गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन सरदार राजेंद्र सिंह (जिन्दी)[/caption]

 गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र सिंह (जिंदी) ने कांग्रेस छोड़ ज्वाइन की BJP


फर्राटेदार पंजाबी बोलने वाले नवीन पंडित ने अपने राजनीतिक “गुरु” के सबसे मजबूत किले में न सिर्फ तगड़ी सेंधमारी की बल्कि उसे पूरी तरह से ढहा भी दिया। गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र सिंह (जिन्दी) ने कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सिर्फ राजेंद्र सिंह ही नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में सिख समुदाय के लोग नवीन के समर्थन में आए और बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक महेश त्रिवेदी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। राजनीति के जानकारों की मानें तो राजेंद्र सिंह (जिन्दी) के बीजेपी में आने से नवीन पंडित को काफी मजबूती मिली है।

खालसा कॉलेज में पढ़ाई करने का भी पंडित को मिल रहा तगड़ा एडवांटेज


नवीन पंडित ने अपनी पढ़ाई खालसा कॉलेज से की है। पंजाबी बेल्ट वाले इस एरिया में नवीन पंडित को यूथ लाबी और उसके साथ पढ़ने वाले दोस्तों ने हाथों-हाथ ले लिया। जनसंपर्क के दौरान सैकड़ों की संख्या में सिख समुदाय के लोग नवीन के साथ रहे। इस दौरान दर्जनों महिलाओं ने नवीन पंडित को माला पहनाकर स्वागत करते हुए आशीर्वाद भी दिया।

[caption id="attachment_18397" align="aligncenter" width="640"] कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद सिख समुदाय का आभार व्यक्त करते भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी।[/caption]

बीर जी, परेशान मत होइए, गुंडों से मुक्त कर दूंगा गोविंद नगर एरिया


नवीन पंडित ने जनसंपर्क के दौरान मतदाताओं से कहा कि गरीब का बेटा हूं। आप लोगों की सेवा पिछले दो दशक से करता आ रहा हूं। लाठी खाया जेल भी गया लेकिन किसी बात की परवाह नहीं की। एक बार आप सभी ने निर्दलीय चुनाव जिताकर मोतीझील भेजा। इस बार कमल वाला बटन दबाकर मोतीझील भेजिए। एक महिला मतदाता ने पूछा कि जीतने के बाद क्या करोगे ? नवीन ने समस्या पूछी तो जवाब मिला कि 8 साल से बिजली का पोल झूल रहा है। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इस पर नवीन पंडित ने पोर्टल के संवाददाता के सामने ही फोन किया। थोड़ी ही देर में पोल को दुरुस्त करने के लिए एक टीम पहुंची। बेहद जर्जर हो चुके इस बिजली के पोल को तत्काल ठीक कराते ही वहां नवीन पंडित जिंदाबाद के नारे लगने लगे। एक बुजुर्ग ने कहा कि गुंडई नहीं रुकेगी। इस पर नवीन ने कहा कि बीर जी, एक बार फिर से मोतीझील भेजिए। गुंडई रोकूंगा नहीं बल्कि जड़ से खत्म कर दूंगा। इशारा बिल्कुल साफ था। वहां मौजूद लोग इशारे को समझ गए।

[caption id="attachment_18399" align="aligncenter" width="640"] बूढ़ा हो या नौजवान सभी ने किया नवीन पंडित से वोट और सपोर्ट देने का वादा।[/caption]

 

मुस्लिम बाहुल्य एरिया जलपा नगर नवीन ने कई घंटे तक की सफाई


गंदगी से जूझ रहे मुस्लिम बाहुल्य एरिया जलपा नगर में नवीन पंडित अपने साथ DBS College छात्रसंघ के पूर्व Vice President सूर्यकांत मिश्रा (निराला), गुड्डन दुबे, योगेश त्रिवेदी, केके सिंह जैसे दिग्गज छात्र नेताओं के साथ संपर्क करने पहुंचे। यहां कुछ मतदाताओं ने गंदगी की समस्या बताई तो नवीन पंडित ने तत्काल कई दर्जन झाड़ू मंगवा ली। समर्थकों के साथ उन्होंने झाड़ू लगाना शुरु कर दिया। जब पौन घंटे बीत गए तो एरिया में नवीन पंडित और उनके समर्थकों की तरफ से गंदगी साफ किए जाने की चर्चा होने लगी। कई दर्जन मुस्लिम महिलाएं, पुरुष और युवा टीम मौके पर पहुंची। सभी ने नवीन को गले लगाते हुए कहा कि विश्वास दिखाया है तो कायम रखना। वोट तुमको ही देंगे।

DBS छात्रसंघ के पदाधिकारी और छात्रनेता भी समर्थन में कूदे


डीबीएस कालेज छात्रसंघ के पूर्व दिग्गज छात्र नेता और कई पदाधिकारी भी नवीन पंडित के समर्थन में आ चुके हैं। सभी ने खुलकर जनसंपर्क के दौरान नवीन पंडित के लिए नारे लगाते हुए जनता से वोट भी मांगे।

 

शहर में अपनी सबसे मजबूत सीटों में एक वार्ड नंबर-106 (कलक्टरगंज) "विभीषणों" के सक्रिय होने की खबर पाते ही BJP हाईकमान Alert हो गया। बीजेपी के प्रदेश संगठन मंत्री व पूर्व विधायक सलिल विश्नोई और धाकड़ बीजेपी लीडर और Ex.MLA नीरज चतुर्वेदी पार्षद प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय के कार्यालय जा पहुंचे। अपने कार्यकर्ताओं को एक्टिव रहने की ताकीद देने के साथ बीजेपी के ये दोनों ही दिग्गज देर रात तक कैम्प करते रहे। साथ ही अपने स्तर पर पल-पल की अपडेट भी अपने खास लोगों से लेते रहे। गौरतलब है कि यह बीजेपी के गढ़ वाली सीट है। साथ ही यहां पूर्व विधायक सलिल विश्नोई की प्रतिष्ठा भी पूरी तरह से लगी है। यह वार्ड उनके विधान सभा एरिया में आता है।  


[caption id="attachment_18390" align="aligncenter" width="640"] विभीषणों पर नकेल कसने के लिए BJP के  Ex.MLA सलिल विश्नोई और Ex.MLA नीरज चतुर्वेदी प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय के कार्यालय पहुंचे।[/caption]

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कानपुर। आर्यनगर विधान सभा के वार्ड नंबर-106 कलक्टरगंज में "विभषण" के सक्रिय होने की खबर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने दो बड़े “योद्धा” वार्ड में उतार दिए हैं। ये दोनों पुराने “योद्धा” “अंगद” की तरह पांव जमा चुके हैं। Ex.MLA नीरज चतुर्वेदी और सलिल विश्नोई पार्षद प्रत्याशी के लिए कैम्प करते रहे।  www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल पर खबर प्रकाशित होने के बाद BJP हाईकमान ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। शायद यही वजह रही कि शहर के दो चर्चित Ex.MLA तत्काल प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय के कार्यालय जा पहुंचे। दोनों ही दिग्गज नेताओं ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं, प्रत्याशी और चुनाव संचालक व संयोजक को खास ऐहतियात बरतने की ताकीद दी। इतना ही नहीं इन दोनों दिग्गजों ने खुद भी क्षेत्रीय जनता से प्रत्याशी को जिताने की अपील पूरे समय की।


क्षेत्र की जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं कुछ विभीषण  

बीजेपी सूत्रों की मानें तो क्षेत्र की जनता को कुछ “विभीषण” भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। इसकी पुख्ता और प्रमाणित खबर मिलने के बाद बीजेपी हाईकमान अपनी इस “Hot” सीट को सुरक्षित रखने के लिए Alert हो गया। अंदरखाने की मानें तो पूर्व विधायक सलिल विश्नोई ने पूरी प्रतिष्ठा इस सीट पर पहले से ही लगा रखी है। जनरलगंज से पूर्व विधायक रह चुके नीरज चतुर्वेदी जैसे धाकड़ नेता के पहुंचने से कुछ “विभीषण” तत्काल मांद में घुस गए। इस बीच देर शाम तक संगठन के नेता और कार्यकर्ता भी “विभीषणों” की घेराबंदी को पहुंचे। पार्षद प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय का चुनाव संभाले बीजपी लीडर अनूप अवस्थी ने www.redeyestimes.com से बातचीत में बताया कि हम बड़ी जीत दर्ज कर रहे हैं। प्रत्याशी की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाए विरोधी और कुछ कतिपय लोग दुष्प्रचार कर रहे थे। जिनको ताकीद दे दी गई है।

[caption id="attachment_18391" align="aligncenter" width="640"] प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय, चुनाव संचालक अनूप अवस्थी को खास निर्देश देते पूर्व विधायक सलिल विशनोई।[/caption]

इस सीट पर Kanpur की बड़ी जीत दर्ज करने की स्थित में है BJP


RSS सूत्रों की मानें तो संगठन की निगाह में इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी बड़ी जीत दर्ज कर सकते हैं। कानपुर शहर में कुछ ऐसे वार्ड हैं जहां बीजेपी अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है। उसकी वजहें कई हैं। पहला तो यह बीजेपी का गढ़ है, साथ ही यहां भाजपा का परंपरागत वोटर है, जो हर कीमत पर कमल पर ही “वोट की चोट” करता है। ऐसे हालात में यदि जीत का अंतर कम होता है तो भी बीजेपी के लिए यह चिंता वाली बात होगी, क्यों कि यह गढ़ है।

कैम्प करने को देर रात संगठन के और पदाधिकारी पहुंच सकते हैं कलक्टरगंज


अपनी सबसे मजबूत सीट को मुट्ठी में करने के लिए बीजेपी संगठन ने “विभीषणों” पर नकेल कसने के साथ कई पदाधिकारियों को देर रात तक कैम्प करने का निर्देश दिया है। जानकारी के मुताबिक देर रात तक यहां और भी पदाधिकारी व कार्यकर्ता कैम्प करने के लिए पहुंच सकते हैं। भ्रम की स्थित फैला रहे “विभीषणों” को वॉच करने के लिए लोकल कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय किया गया है।

 

 

आर्यनगर विधान सभा एरिया के वार्ड नंबर-106 में ब्राम्हण-वैश्य मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। यहां करीब साढ़े चौदह हजार मतदाताओं में 60 प्रतिशत आबादी इन दोनों जातियों की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां पर प्रेम शंकर पांडेय को अपने "योद्धा" के तौर पर "चुनावी रणभूमि" में उतारा है। यहां से कांग्रेस और सपा ने एक ही नाम और एक ही राशि के प्रत्याशी उतारे हैं। ये दोनों ही प्रत्याशी पूरे चुनाव में ठीक ढंग से प्रचार-प्रसार भी नहीं कर सके। यहां अंतिम दौर में मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ रोड-शो करने पहुंची।  


[caption id="attachment_18386" align="aligncenter" width="720"] मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय और जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के साथ रोड-शो करते वार्ड नंबर-106 के पार्षद प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय[/caption]

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कानपुर।  Kanpur City की सबसे “Hot” सीट कही जा रही वार्ड नंबर-106 (कलक्टरगंज) का चुनाव पूरे शबाब पर पहुंच चुका है। यह वार्ड पूरी तरह से भाजपामय नजर आ रहा है। झंडा हो या बैनर या फिर पंपलेट। हर गली और चौराहे पर सिर्फ कमल का फूल नजर आ रहा है। हाल ये है कि कांग्रेस और सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे दो “तिवारियों” पर BJP के प्रेम शंकर पांडेय पूरी तरह से भारी हैं। राजनीति के पंडितों की मानें तो यह बीजेपी बाहुल्य इस सीट पर भाजपा का परंपरागत मतदाता (ब्राम्हण, वैश्य) की भागेदारी सबसे अधिक है। इस वार्ड के चुनाव में जहां BJP अन्य दलों पर 25 बैठ रही तो उसे नुकसान पार्टी के एक “विभीषण” से हो रहा है।


14,500 से अधिक मतदाता चुनेंगे अपनी पसंद का पार्षद


वार्ड नंबर-106 में करीब साढ़े चौदह हजार मतदाता हैं। इसमें सर्वाधिक संख्या वैश्य और ब्राम्हण जाति की है। ये दोनों ही जातियां बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक मानी जाती हैं। साथ ही यहां अन्य जातियों का भी मिश्रण है। व्यापारी वर्ग यहां खासी तादात में है।

इन मोहल्लों के मतदाता करेंगे वोट की चोट


परशीमन चेंज होने के बाद कुछ नए मोहल्ले इस वार्ड में जुड़े हैं तो कुछ हट गए हैं। नए परशीमन के तहत अब यहां नौघड़ा (50), रामगंज (51), 52,53,54,60, नयागंज, 70,71,72,73 सुतरखाना, 74, 75,76 धनकुट्टी के मतदाता वोट की चोट करेंगे।


BJP से प्रेम शंकर पांडेय हैं प्रत्याशी


भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से प्रेम शंकर पांडेय को टिकट दिया है। प्रेम शंकर पांडेय संगठन के साथ RSS की भी पहली पसंद थे। इस लिए संगठन ने पूर्व पार्षद का टिकट काटकर प्रेम शंकर पांडेय पर विश्वास जताया है। युवा होने के साथ मृदुभाषी स्वभाव के प्रेमशंकर पांडेय अधिवक्ता भी हैं। शहर के कई नामचीन अधिवक्ता भी उनके चुनाव में दिन-रात एक किए हुए हैं। www.redeyestimes.com से बातचीत में प्रेमशंकर पांडेय ने कहा यहां व्यापारियों का वार्ड है। वार्ड में तमाम समस्याएं हैं। इन समस्याओं के निराकरण के लिए वह सबसे पहले कार्य करेंगे। प्रेमशंकर पांडेय ने कहा कि व्यापारी हितों के साथ वह क्षेत्र की जनता के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।

कांग्रेस और सपा ने एक राशि एक नाम के प्रत्याशी उतारे


कांग्रेस ने यहां कुलीबाजार एरिया से पूर्व पार्षद रहे सुशील तिवारी को टिकट दिया है। सपा ने भी इसी नाम और राशि के व्यक्ति को चुनावी समर में उतारा है। बसपा ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी का कार्ड खेला है। यह तीनों प्रत्याशी पूरे चुनाव में अपना प्रचार-प्रसार तक ठीक से नहीं कर पाए।

शहर के अधिवक्ताओं ने भी झोंक रखी है ताकत


बीजेपी प्रत्याशी प्रेम शंकर पांडेय के लिए शहर के अधिवक्ता भी समर्थन में उतर आए हैं। खुद प्रेम शंकर पांडेय भी अधिवक्ता हैं। दो दिन क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित वकीलों ने भी प्रेम पांडेय के समर्थन में व्यापारियों और क्षेत्र की जनता से वोट और सपोर्ट की अपील की।

BJP को विभीषण के खतरे से बचना होगा अपना प्रत्याशी


News Portal की छानबीन में यहां एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है। दबी जुबान से क्षेत्र के कई भाजपाइयों ने बताया कि प्रत्याशी का चुनाव तो एक नंबर पर है लेकिन एक “विभीषण” हमारे लिए खतरा बने हैं। “विभीषण” का नाम पूछने पर सभी कन्नी काटने लगे लेकिन एक कार्यकर्ता ने कहा कि बताने में कोई गुरेज नहीं। साहस दिखाते हुए उसने कहा कि पूर्व पार्षद रमापति झुनझुनवाला अंदर ही अंदर भीतरघात करने में जुटे हैं। पिछले दो दिन से वह खुलकर विरोध कर रहे हैं।

विभीषण बर्दाश्त नहीं, हर कीमत पर होगी कार्रवाई


इस बाबत जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी से जब पोर्टल ने बात की तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। इसे मैं अपने स्तर से दिखवाता हूं। यदि पार्टी में रहकर कोई प्रत्याशी के लिए भीतरघात कर रहा है तो यह गंभीर मामला है।

 

"बागी" जहां-जहां BJP के अधिकृत प्रत्याशियों के छक्के छुड़ा रहे हैं उसमें एक वार्ड 86 भी है। यहां से चुनाव लड़ रहीं निर्दलीय ज्योतिका मिश्रा के पति मनोज मिश्रा पुराने बीजेपी कार्यकर्ता होने के साथ-साथ संघ से भी जुड़े हैं। यही वजह है कि टिकट कटने के बाद भी संगठन और RSS के एक बड़े वर्ग का उनको तगड़ा समर्थन मिल रहा है। बीजेपी प्रत्याशी सुमन त्रिवेदी के लिए प्रतिष्ठा लगाए हैं। तो दूसरी तरफ मुस्लिम वोटरों के सहारे सपा प्रत्याशी सुमन शुक्ला निर्दलीय ज्योतिका मिश्रा को टक्कर देती नजर आ रही हैं। बीजेपी प्रत्याशी भरपूर कोशिश कर रही हैं कि चुनाव को किसी तरह से त्रिकोणीय बनाया जा सका। लेकिन यह तो एक दिसंबर को ही पता चलेगा कि कौन किस पर कितना भारी पड़ा। 


[caption id="attachment_18381" align="aligncenter" width="640"] महिलाओं की टोली के साथ चुनाव में संपर्क के लिए निकलती BJP की "बागी" ज्योतिका मिश्रा।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। यूं तो नगर निकाय के चुनाव में कई बागी प्रत्याशी BJP के अधिकृत प्रत्याशियों को पानी पिला रहे हैं लेकिन सबसे रोचक स्थित वार्ड नंबर 86 काकादेव की है। यहां से संघ के पुराने कार्यकर्ता और अधिवक्ता मनोज मिश्रा (गुड्डू) की धर्मपत्नी ज्योतिका मिश्रा भाजपा समेत तमाम प्रत्याशियों के लिए का जंजाल बन चुकी हैं। चुनाव का परिणाम चाहे जो लेकिन BJP की अधिकृत प्रत्याशी सुमन त्रिवेदी को वह हर मोर्चे पर पीछे छोड़ती नजर आ रही हैं। RSS के साथ संगठन के तमाम पुराने कार्यकर्ता और युवाओं की टीम ज्योतिका के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रही है। राजनीति के धुरंधरों की मानें तो बागी ज्योतिका मिश्रा के कार की टक्कर साइकिल से होनी तय मानी जा रही है। कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी यहां बीजेपी प्रत्याशी के लिए खुद मोर्चे पर लगे हैं।


करीब 23 हजार मतदाता करेंगे वोट की चोट


काकादेव वार्ड नंबर 86 में करीब 23 हजार के आसपास मतदाता हैं। यहां सात से आठ हजार के बीच सर्वाधिक ब्राम्हण वोटर है। दूसरे नंबर पर करीब पांच हजार मुस्लिम मतदाता हैं। इसके बाद ठाकुर और कायस्थ मतदाता हैं। दोनों की संख्या करीब डेढ़-डेढ़ हजार के आसपास है। बैकवर्ड वोटर भी ठीक-ठाक है।

वार्ड के अंतर्गत ये है मोहल्ला और बस्ती


शहर का सबसे अतिसंवेदनशील एरिया रोशन नगर इसी वार्ड के अंतर्गत आता है। यह इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। इसके साथ ही राम बिहार, राधा बिहार, शिवपुरी, कृष्णापुरी, बी-1 काकादेव, हितकारी नगर, आवास विकास का आंशिक एरिया इस वार्ड के अंतर्गत आते हैं। रोशन नगर के अतिसंवदेनशील होने की वजह से यहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। रोशन नगर एरिया में सपा प्रत्याशी की स्थित मजबूत मानी जा रही है लेकिन यहां बसपा और कांग्रेस की सेंधमारी जारी है।

ये है वार्ड नंबर 86 के प्रमुख प्रत्याशी


समाजवादी पार्टी ने सुमन शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी ने प्रबल दावेदार ज्योतिका मिश्रा की टिकट काटकर कैबिनेट मंत्री के करीबी पूर्व पार्षद कमलेश दद्दा की पत्नी सुमन त्रिवेदी को प्रत्याशी घोषित किया। कांग्रेस ने रेखा मिश्रा और बसपा ने शैल कटियार को उम्मींदवार बनाया।


BJP कार्यालय में लगे जिंदाबाद के नारे, भाजपाई बोले वोट कार को ही देंगे


निर्दलीय प्रत्याशी ज्योतिका मिश्रा के पति मनोज मिश्रा करीब तीन दशक से भाजपा की राजनीति कर रहे हैं। अधिवक्ता होने के साथ-साथ वह पत्रकारिता भी करते हैं। संघ से उनका पुराना नाता किसी से छिपा नहीं है। प्रत्याशिता की दावेदारी में वह पहले नंबर पर थे लेकिन बीजेपी हाईकमान ने उनको टिकट नहीं दी। सूत्रों की मानें तो टिकट कटने की स्थित में ज्योतिका चुनाव नहीं लड़ रही थीं। लेकिन संगठन और RSS की तरफ से बल मिलने पर वह चुनावी समर में कूद पड़ीं।

शायद उसी का परिणाम रहा कि तीन दिन पहले जनसंपर्क के दौरान भाजपा प्रत्याशी के कार्यालय में भी ज्योतिका मिश्रा जिंदाबाद के नारे बुलंद हो गए। कट्टर भाजपाई और पूर्व वार्ड अध्यक्ष ने सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में कह दिया कि वोट तो ज्योतिका मिश्रा को ही डालेंगे। यह सुनते ही भाजपाइयों के होश उड़ गए।

राजनीति के धुरंधर मान रहे कार और साइकिल में हो सकती है भीषण टक्कर


क्षेत्र की राजनीति में तगड़ी दखल रखने वाले धुरंधरों की मानें तो संगठन और RSS से बल मिलने की वजह से ज्योतिका चुनाव की मुख्यधारा में बनी हैं। मुस्लिम वोटरों के सहारे सपा प्रत्याशी उनको तगड़ी टक्कर दे रही हैं। बीजेपी के परंपरागत मतदाताओं के सहारे बीजेपी प्रत्याशी सुमन त्रिवेदी चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही हैं। यहां बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी अभी तक पूरी तरह से चुनाव को उठा नहीं पाए हैं।

हार के बाद मैसेज ऊपर तक जाएगा


सूत्रों की मानें तो यदि बीजेपी को यहां हार मिली तो इसका मैसेज सीधे ऊपर तक जाएगा। टिकट मिलने से दो दिन पहले ज्योतिका के पति मनोज मिश्रा खुद लखनऊ जाकर सुनील बंसल से मिले थे। इतना ही नहीं उन्होंने पूरा कच्चा चिट्ठा भी सुनील बंसल को सौंप दिया था। ऐसे में यदि उनकी पत्नी चुनाव जीतती हैं तो ये बीजेपी की बड़ी हार होगी।

वार्ड नंबर-38 के मतदाता किसे अपना पार्षद चुनेंगे ? यह किसी को नहीं पता लेकिन एक बात तय है कि यहां का चुनाव काफी दिलचस्प होगा। दो प्रत्याशियों के बीच तनाव के हालात भी बने हुए हैं। यह रिपोर्ट स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की है। शायद यही वजह रही है कि दो दिन पहले रात में एक मीटिंग के दौरान पूर्व विधायक ज्यादा समय नहीं ठहरे। पांच मिनट के बाद वो चले गए। अभी तक के त्रिकोणीय संघर्ष वाले चुनाव में BSP प्रत्याशी मुकेश चौधरी अन्य प्रत्याशियों से 21 बैठ रहे हैं। वोटिंग को अभी 24 घंटे बाकी है। सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो एक दिसंबर को ही पता चलेगा। 


[caption id="attachment_18375" align="aligncenter" width="640"] क्षेत्र में मतदाताओं के बीच पहुंचकर जनसंपर्क करते BSP प्रत्याशी मुकेश चौधरी (चौधरी डेरी वाले)[/caption]

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कानपुर। नगर निकाय चुनाव के वोटिंग की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है। ठीक 24 घंटे बाद मतदाता अपने पसंद का पार्षद चुनने के लिए वोट की चोट करेंगे। Kanpur के किदवईनगर एरिया के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर 38 में चुनाव त्रिकोणीय बन चुका है। सपा प्रत्याशी अपने परंपरागत वोटरों के बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक की तरफ से किए गए “सियासी प्रहार” से परेशान हैं तो दूसरी तरफ BJP प्रत्याशी अपने चुनाव को वो गति नहीं दे पाए हैं जिसकी उम्मींद की जा रही थी। कांग्रेस प्रत्याशी को भी लोग हल्के में नहीं ले रहे हैं लेकिन इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) के हाथी की मस्तानी चाल से भी विरोधी प्रत्याशी खौफजदा हैं। बसपा के कैडर वोट के साथ मुस्लिम वोटरों के बीच तगड़ी पैठ होने और कई जगहों पर सेंधमारी की वजह से BSP प्रत्याशी की पोजीशन मजबूत बनी हुई है। चुनाव परिणाम क्या होगा ? यह किसी को नहीं पता लेकिन बसपा के प्रत्याशी को विरोधियों के साथ मतदाता भी हल्के में नहीं ले रहे हैं। सभी कह रहे हैं कि हाथी वोटिंग वाले दिन कई पोलिंग पर चिग्घाड़ सकता है।



वार्ड में हैं कुल 14,572 मतदाता


इस वार्ड में कुल मतदाता 14572 के करीब हैं। जूही सफेद कालोनी, लुधौरा, करपात्री नगर, नटवनटोला, बारादेवी, लक्ष्मणपुरवा समेत कई मोहल्ले इस वार्ड के अंतर्गत आते हैं।

ब्राम्हण और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब-करीब बराबर


इस वार्ड में मुस्लिम और ब्राम्हण मतदाता करीब-करीब बराबर हैं। 30 से 35 के बीच ब्राम्हण हैं तो लगभग इतने ही प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। वार्ड में कई मूलभूत समस्याएं हैं। गंदगी के साथ जलभराव यहां की हमेशा से बड़ी समस्या रही है। खास बात यह है कि यहां BSP का कैडर वोट करीब ढाई हजार से अधिक है।


BSP से मुकेश चौधरी (चौधरी डेरी वाले) है प्रत्याशी


बहुजन समाज पार्टी ने इस वार्ड से युवा और जुझारू चेहरे पर दांव खेलते हुए मुकेश चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया है। मुकेश चौधरी की गौशाला में चौधरी डेरी के नाम से प्रतिष्ठित फर्म है। स्थानीय लोग उनसे काफी भली-भांति परिचित हैं। मुकेश चौधरी के चुनाव में बसपा के पदाधिकारी भी अपनी ताकत झोंके हुए हैं। स्थानीय युवा वर्ग का उनको खास समर्थन तो मिल ही रहा है। अंदर ही अंदर दूसरे राजनीतिक दलों के लोग उनको समर्थन देकर चुनाव को काफी मजबूत किए हैं। सौम्य और मृदुभाषी स्वभाव के मुकेश चौधरी करीब-करीब हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। मुस्लिम वोटरों के बीच भी उन्होंने तगड़ी सेंधमारी की है। चुनाव प्रचार के मामले में भी वह अन्य प्रत्याशियों से पूरे चुनाव में 21 बैठे हैं। इन सबका वह चुनाव में तगड़ा एडवांटेज ले सकते हैं।


BJP ने शुभम बाजपेयी पर खेला हैं दांव


भारतीय जनता पार्टी ने इस वार्ड से शुभम बाजपेयी पर दांव लगाते हुए उनको अपना प्रत्याशी बनाया है। शुभम के लिए प्लस प्वाइंट यह है कि इस वार्ड में RSS और संगठन के तमाम कार्यकर्ता और नेता रहते हैं। जिसका फायदा उनको वोटिंग वाले दिन मतदाताओं को बाहर निकलवाने में मिलेगा। हालांकि शुभम को टिकट मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर कई नेताओं के विरोध का सामना भी उनको करना पड़ा था लेकिन बाद में हाईकमान की पहल पर डैमेज कंट्रोल को मैनेज कर लिया गया। शुभम बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के सहारे ही चुनावी लड़ाई में बने हैं। वह कहीं सेंधमारी नहीं कर सके।

कांग्रेस से सिद्धार्थ सिंह है मैदान में


कांग्रेस ने पूर्व पार्षद सिद्धार्थ सिंह को टिकट दिया है। सिद्धार्थ सिंह की सभा में ही अजय कपूर ने सीएम को देशद्रोही कहते हुए अपशब्द कहे। राजनीति के जानकार पंडितों की मानें तो वीडियो वायरल होने के बाद उनको एक वर्ग से तगड़ा नुकसान होने की प्रबल आशंका हैं तो दूसरी तरफ दूसरे वर्ग का वह कुछ प्रतिशत वोट वो काटेंगे। यह वोट काटने से सीधा नुकसान सपा को हो रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि दूसरे वर्ग में बसपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी पहले ही तगड़ी सेंधमारी कर चुके हैं।

सपा से नसरुद्दीन हैं प्रत्याशी


समाजवादी पार्टी ने इस वार्ड से नसरुद्दीन को प्रत्याशी बनाया है। नसरुद्दीन चुनाव के शुरुआत में ठीक चुनाव उठाए थे लेकिन तीन दिन पहले कांग्रेस प्रत्याशी की सभा में कांग्रेस के पूर्व विधायक की तरफ से यूपी सीएम के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का उनको सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सपा की तरफ से भी इस मुद्दे को लेकर कोई विरोध नहीं दर्ज कराया गया। सूत्रों की मानें तो विरोधी खेमा नसरुद्दीन की तरफ से आयोग को दिए गए शपथ पत्र के सत्यता की जांच में भी जुटा है। विरोधी उनके शैक्षणिक योग्यता के बाबत गहराई से छानबीन करवा रहे हैं।

अभी तक त्रिकोणीय रहे चुनाव में हो सकती है सीधी टक्कर


राजनीति के जानकर लोगों की मानें चुनाव मंडे तक यह चुनाव त्रिकोणीय संघर्ष की स्थित में था लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं को वोटिंग वाले दिन यह चुनाव सीधी टक्कर वाला भी बन सकता है। यह तब होगा जब यहां पर ध्रुवीकरण की राजनीति होगी। हालांकि कैडर के ढाई हजार वोट, मुस्लिम वोटरों में सेंधमारी कर बसपा प्रत्याशी का हाथी मस्तानी चाल में हैं। बाकी प्रत्याशी किसी न किसी समस्या से ही जूझ रहे हैं।

 

करीब 13 महीना पुराने इस चर्चित मर्डर केस की जांच सबसे पहले Kanpur Police ने शुरु की थी। एक के बाद एक कई विवेचक बदले लेकिन पुलिस के हाथ खाली रहे। यूपी की राजधानी Lucknow में जब ATS ने आतंकी सैफुल्लाह को एनकाउंटर में मार गिराया तो उसके बाद उसके कई संदिग्ध साथी भी Arrest किए गए। इंट्रोगेशन में सभी ने बताया कि रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ला की हत्या सभी ने पिस्टल की टेस्टिंग के लिए की थी। इसके बाद सितंबर 2017 में मामले की जांच ATS को सौंप दी गई। अब गृह मंत्रालय ने मामले की जांच NIA को सौंप दिया है। 


[caption id="attachment_18370" align="aligncenter" width="943"] रमेश चंद्र शुक्ला (रिटायर्ड प्रिंसिपल) (फाइल फोटो)[/caption]

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कानपुर। Kanpur के रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ला के “मर्डर मिस्ट्री” से पर्दा उठाने के लिए गृह मंत्रालय ने जांच देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी को सौंप दी है। महज दो महीना पहले ही इस मर्डर केस की जांच UP की ATS को दी गई थी। जांच के दौरान पता चला कि मर्डर के पीछे ISIS जैसे क्रूर और खूंखार आतंकी संगठन का हाथ था।


आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद खुला था राज


करीब आठ महीना पहले यूपी की राजधानी लखनऊ में आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद ATS के हत्थे चढ़े संदिग्धों ने इंट्रोगेशन के दौरान बताया था कि कानपुर के चकेरी में रिटायर्ड प्रिंसिपल की हत्या उन लोगों ने की थी। छानबीन के दौरान ATS को यह पता चला था कि ISIS के आकाओं को विश्वास दिलाने के लिए संदिग्ध ISIS आतंकियों ने चकेरी एरिया में स्कूल से घर लौट रहे रिटायर्ड प्रिंसिपल को गोली मार दी थी। संदिग्ध आतंकियों ने जांच एजेंसी को बताया था कि पिस्टल की टेस्टिंग के लिए सभी ने प्रिंसिपल को गोली मारी थी। प्रिंसिपल की हत्या के बाद सभी ने इसकी खबर अपने आकाओं को भी दी थी।

24 अक्तूबर 2016 को Kanpur के चकेरी एरिया में हुआ था Murder


रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ला नवाबगंज थाना एरिया के विष्णुपुरी में रहते थे। वह चकेरी थाना एरिया के प्यौंदी गांव स्थित स्वामी आत्मप्रकाश ब्रह्मारी जूनियर हाईस्कूल में प्रिंसिपल थे। रिटायरमेंट के बाद वह अपने जरूरी कामकाज निपटाने के लिए स्कूल गए थे। 24 अक्तूबर को वापस लौटते समय उनकी पीछे से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस ब्लाइंड मर्डर केस में कानपुर पुलिस के हाथ लंबे समय तक खाली रहे। आठ महीना पहले ATS ने आतंकी सैफुल्लाह का एनकाउंटर करने के बाद जब उसके साथियों को Arrest किया तो हत्याकांड की “मिस्ट्री” से पर्दा उठ गया। इंट्रोगेशन में सैफुल्लाह के साथियों ने प्रिंसिपल के हत्या का जुर्म स्वीकार किया।

UAPA की धारा बढ़ाकर सौंपी गई थी ATS को जांच


इस मामले में अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) की धारा बढ़ाने के बाद जांच ATS को सौंपी गई थी। ATS कानपुर यूनिट मामले की जांच दो महीने भी नहीं कर पाई थी कि गृह मंत्रालय ने जांच देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी NIA को सौंप दी। माना जा रहा है कि NIA अब इस केस से जुड़े कई और संदिग्धों को दबोच सकती है।

फॉरेंसिक जांच में हो चुकी है पुष्टि


Encounter में मारे जा चुके सैफुल्लाह के हाजी कॉलोनी स्थित ठिकाने से मिली पिस्टल और Kanpur के चकेरी में प्रिंसिपल को मारी गई गोलियों की फॉरेंसिक जांच कराई गई तो मिलान हो गया।

नगर निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब महज 36 घंटे ही शेष बचे हैं लेकिन Kanpur का "सियासी पारा" इस बीच काफी गर्म हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप को छोड़ नेता और उनके गुर्गे अब विरोधियों के समर्थकों को धमकी देने लगे हैं। ताजा मामला गोविंदनगर का है। पीड़ित का आरोप है कि दबंगों की धमकी से परेशान होकर जब घटनाक्रम की जानकारी उसने अपने भाई को दी तो सदमें से उसे हार्टअटैक पड़ा और थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। पीड़ित गुरुद्वारे का प्रधान है। उसने थाने में तीन नामजद लोगों समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। 


[caption id="attachment_18362" align="aligncenter" width="630"] मृतक चरनजीत सिंह ओबराय (फाइल फोटो)[/caption]

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कानपुर। गुलाबी ठंड में Kanpur का “सियासी पारा” चढ़ने लगा है। आरोप-प्रत्यारोप दौर के बाद अब धमकियों का दौर शुरु हो चुका है। इस धमकी की भेंट एक बेगुनाह चढ़ गया। सदमें में उसे हार्ट अटैक पड़ा और बाद में उसकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने तीन नामजद समेत करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ गोविंदनगर थाने में तहरीर दी है। गोविंदनगर इंस्पेक्टर ने www.redeyestimes.com से बातचीत के दौरान पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि तहरीर मिल गई है। मामले की छानबीन की जा रही है। एक आरोपी के घर दबिश दी गई लेकिन वह मौके से फरार मिला।


क्या है पूरा मामला


शरनजीत सिंह ओबराय गुरुद्वारा माता गुजरी लेबर कालोनी के प्रधान हैं। बकौल शरनजीत सिंह वह पहले कांग्रेस से जुड़े थे। दो दिन पहले उन्होंने गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन राजेंद्र सिंह (जिन्दी) की अगुवाई में वार्ड नंबर 93 से BJP प्रत्याशी नवीन पंडित को समर्थन देने का ऐलान करते हुए सिख समुदाय के कई लोगों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वाइन कर ली। इसके बाद सभी ने नवीन पंडित के समर्थन में भारी भीड़ के साथ क्षेत्र में जनसंपर्क कर वोट भी मांगा।



 

 

BJP ज्वाइन करने पर दबंगों ने धमकी देकर लिखवाया इस्तीफा

शरनजीत का आरोप है कि इस बात से आक्रोशित क्षेत्र के दबंग गुरविंदर सिंह उर्फ गप्पी, जगमोहन सिंह (बप्पी सरदार) और डिंपल सरदार अपने कई साथियों के साथ संडे को उसके पास पहुंचे और अभद्रता कर उसे जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि दबंगों ने असलहों के बल पर उससे जबरन गुरुद्वारे की प्रधानी से इस्तीफा लिखवा लिया। यह बात शरनजीत ने अपने भाई चरनजीत सिंह ओबराय को बताई। दबंगों की धमकी और भाई से इस्तीफा लेने की खबर सुनते ही चरनजीत को दिल का दौरा पड़ गया। परिवार के लोग उसे अस्पताल ले गए लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। यह खबर जैसे ही भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिली सभी थाने पहुंच गए। बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में पीड़ित शरनजीत ने थाने में तहरीर दी।

[caption id="attachment_18363" align="aligncenter" width="528"] गप्पी सरदार[/caption]

कौन है गप्पी सरदार ?


9/4 लेबर कालोनी गोविंदनगर का रहने वाला गुरविंदर सिंह उर्फ गप्पी पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि कई साल पहले उसने RTO में गोली चलाई थी। पुलिस ने उसे विदेशी रिवाल्वर के साथ Arrest किया था। विधान सभा चुनाव में भी उसके खिलाफ पुलिस ने गोविंदनगर थाने में संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। बताया जा रहा है कि गप्पी सरदार कांग्रेस के एक पूर्व विधायक का बेहद करीबी है। वह उनके कई कामकाज भी संभालता है। इस मामले में गोविंदनगर क्षेत्राधिकारी ने www.redeyestimes.com से बातचीत में कहा कि तहरीर मिली है। मामले की छानबीन की जा रही है। दोषी पाए जाने पर आरोपित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कार्रवाई की जाएगी।

अंतिम संस्कार में विधायक महेश त्रिवेदी भी पहुंचे


चरनजीत सिंह ओबराय के अंतिम संस्कार में क्षेत्रीय विधायक महेश त्रिवेदी और पार्षद प्रत्याशी नवीन पंडित समेत कई भाजपा के नेता पहुंचे। मामले की भनक लगते ही पुलिस के तमाम अफसर भी पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने गप्पी सरदार के घर पर दबिश भी दी लेकिन वह पहले ही घर से भाग निकला।

वार्ड नंबर 36 में निर्दलीय प्रत्याशी एहसान अली का चुनावी वादों वाला बैनर लोगों के लिए हंसी का साधन बन गया है। जो भी इस बैनर पर लिखे गए चुनावी वादों को पढ़ता है वो अपनी हंसी का फौव्वारा कुछ देर के लिए रोक ही नहीं पाता है। इस बैनर के माध्यम से अपने चुनावी वादे करते हुए एक सज्जन ने लिखा है कि वह चुनाव जीते तो GST खत्म कर देंगे। हालांकि यह बैनर कानपुर का नहीं है, लेकिन कहां का यह भी पता नहीं चल सका है।


[caption id="attachment_18357" align="aligncenter" width="695"] वार्ड नंबर 36 में लगाया गए इस बैनर को पढ़ने के बाद कोई अपनी हंसी रोक नहीं पा रहा है। भाई जब फेंकना है तो हम भी थोड़ी सी फेंक लें।[/caption]

महिलाओं के लिए फ्री मेकअप किट देंगे

अपने चुनावी वादे में निर्दलीय प्रत्याशी एहसान अली ने महिलाओं को फ्री में मेकअप किट दिए जाने की बात लिखी है। साथ ही उन्होंने यह भी वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वह पेट्रोल की कीमत 25 रुपए कर देंगे। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी वादा किया है कि बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करके वह पानी की लाइन ऊपर से निकाल देंगे। साथ ही इन्होंने हर परिवार को एक स्कूटी फ्री देने का वादा किया है।

सरकारी नौकरी के साथ तीन हवाई अड्डे भी मिलेंगे क्षेत्र की जनता को 

एहसान अली ने बैनर में क्षेत्रीय जनता से वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वह लद्धावाला में तीन हवाई अड्डे बनवाने के साथ वार्ड के सभी लोगों को सरकारी नौकरी भी मुहैया कराएंगे। उनका यह बैनर अब सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।

मामला गोविंदनगर विधान सभा एरिया के वार्ड नंबर-72 (दबौली) का है। यहां से चुनाव ड्यूटी में लगाए गए BLO के पास से जो मतदाता पर्चियां मिली हैं उसमें निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल (KP) के चुनाव चिन्ह की मुहर लगी मिली। इस मामले की शिकायत कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP) ने चुनाव आयोग से की है। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय को भी सूचना देने की कोशिश की लेकिन वहां का फोन नहीं उठा। इस मामले पर जब www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल ने अफसरों से बात करने की कोशिश की तो किसी ने मोबाइल रिसीव नहीं किया। 


[caption id="attachment_18353" align="aligncenter" width="640"] BLO के पास से मतदाता पर्चियों पर लगी मिली निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल के चुनाव चिन्ह की मुहर।[/caption]

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कानपुर। चुनाव ड्यूटी में लगाए गए सरकारी कर्मचारी गुलाबी ठंड में अपनी जेबों को गर्म कर पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं। मतदाता पर्चियों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी के पंपलेट और उस पर लगी मुहर बांट रहे BLO की करतूतों का विरोधी प्रत्याशियों के समर्थकों ने पर्दाफाश कर दिया। चुनाव आयोग से शिकायत करने के बाद जिलाधिकारी कार्यालय पर भी फोन किया गया। वार्ड के पर्यवेक्षक ने शिकायतकर्ताओं के फोन तक नहीं उठाए। इस करतूत का भंडाफोड़ होने के बाद बाकी वार्डों में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के कान खड़े हो गए हैं।


वार्ड नंबर-72 दबौली से प्रत्याशी हैं कैलाश पाल (KP)

कांग्रेस के पुराने नेता और कई बार पार्षद रह चुके कैलाश पाल इस बार निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से चुनाव मैदान में हैं। वार्ड में चुनावी ड्यूटी पर लगाए गए BLO के पास से एक बंद लिफाफा मंडे की सुबह को मिला। इसमें क्षेत्रीय मतदाताओं की पर्चियां थी। इन पर्चियों के पीछे निर्दलीय प्रत्याशी कैलाश पाल के नाम की मोहर लगी थी। साथ ही उनका पंपलेट भी रखा था।

[caption id="attachment_18260" align="aligncenter" width="960"] कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश पाल (JP) ने पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में भी फोन किया। [/caption]

JP ने KP और BLO की शिकायत चुनाव आयोग से की

कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जय प्रकाश पाल (JP) ने निर्दलीय प्रत्याशी KP और BLO की शिकायत चुनाव आयोग से की है। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में भी फोन किया लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने वार्ड नंबर 72 के पर्यवेक्षक को मोबाइल लगाया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।

आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के साथ निष्पक्षता पर भी उठ रहे सवाल

चुनावी ड्यूटी में लगे BLO के पास से निर्दलीय प्रत्याशी के नाम की मुहर और पंपलेट मतदाता पर्चियों में मिलने से न सिर्फ आचार संहिता तार-तार हुई बल्कि अब निष्पक्ष चुनाव को लेकर भी संदेह पैदा होने लगे हैं। फिलहाल अभी तक इस मामले में जिला प्रशासन और चुनाव आयोग से किसी भी प्रकार के कार्रवाई की खबर नहीं है।

 

Kanpur नगर निकाय का चुनाव अब अपन पूरे शबाब पर पहुंच चुका है। कुछ घंटे बाद ही चुनाव प्रचार भी बंद हो जाएगा। प्रत्याशी न तो जुलूस निकाल सकेंगे और न ही उनके प्रचार वाहन शोर मचा सकेंगे। सिर्फ चरण वंदना का दौर ही चलेगा। भाजपा के अधिकांश पार्षद प्रत्याशियों ने अपने चुनाव प्रचार की सामग्री पर BJP की तीन धरोहरों में एक मुरली मनोहर जोशी (सांसद, कानपुर) की फोटो और नाम का उल्लेख करना भी मुनासिब नहीं समझा। पार्षद प्रत्याशी ही नहीं मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय के चुनाव सामग्री पर भी मुरली मनोहर जोशी कहीं नहीं दिखे। सिर्फ अखबारों में दिए गए विज्ञापनों पर ही वर्तमान सांसद मुरली मनोहर जोशी की फोटो लगी है। मुरली मनोहर जोशी के साथ ही निवर्तमान मेयर कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण भी निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार सामग्री से गायब हैं। 



YOGESH TRIPATHI


कानपुर। BJP की तीन धरोहर। अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर। नब्बे के दशक में भाजपा का यह नारा न सिर्फ बीजेपी के कार्यकर्ताओं बल्कि बच्चे-बच्चे की जुबां पर होता था लेकिन समय के करवट बदलने के साथ भाजपा के कार्यकर्ता और नेता इस नारे को भूल चुके हैं। सिर्फ नारा ही नहीं Kanpur के भाजपाई इन तीन धरोहरों में एक मुरली मनोहर जोशी को भी पूरी तरह से भुला चुके हैं। मुरली मनोहर जोशी बीजेपी के वरिष्ठ लीडर होने के साथ-साथ Kanpur से लोकसभा सदस्य भी हैं। नगर निकाय का चुनाव लड़ रहे 109 पार्षद प्रत्याशियों में इक्का-दुक्का को छोड़कर किसी प्रत्याशी ने BJP के इस “पितामह”  की PHOTO को अपने पंम्पलेट, बैनर या पोस्टर में लगाना उचित नहीं समझा।




निवर्तमान मेयर जगतवीर सिंह द्रोण की PHOTO भी नहीं दिख रही

सिर्फ कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ही नहीं Kanpur के भाजपाइयों ने शहर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय निवर्तमान मेयर कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण को भी हाशिए पर रख दिया। अधिकांश पार्षद प्रत्याशियों ने उनकी फोटो या नाम को अपने पंपलेट और बैनर में जगह नहीं दी। सिर्फ पार्षद ही नहीं मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय की तरफ से सभी अखबारों में छपे विज्ञापनों में मुरली मनोहर जोशी की फोटो तो है लेकिन निवर्तमान मेयर की फोटो और नाम गायब है। कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण सिर्फ मेयर ही नहीं बल्कि कानपुर के पूर्व सांसद भी रहे हैं। शहर के नेताओं में उनका अपना एक अलग स्थान और मुकाम है। अब सवाल यह उठता है कि बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता आखिर दो बड़े दिग्गज नेताओं के साथ ऐसा सौतेला बर्ताव क्यों कर रहे हैं ? यह सवाल बीजेपी के कई बड़े नेताओं से किया गया लेकिन किसी ने इस मुद्दे पर बेबाकी से जवाब न देते हुए गोलमोल बात कही।

 

 

[caption id="attachment_18345" align="aligncenter" width="640"] मुरली मनोहर जोशी (पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद कानपुर)[/caption]

पहले भी हो चुका है “पितामह” का अपमान

बीजेपी की तीन धरोहरों में एक मुरली मनोहर जोशी (पितामह) के साथ यह सौतेला व्यवहार पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी समय-समय पर बीजेपी के कार्यकर्ता, नेता और संगठन के कई पदाधिकारी उनके साथ इस तरह का व्यवहार कर चुके हैं। एक महीना पहले प्रांतीय अधिवेशन में भी मुरली मनोहर जोशी को कोई तवज्जो नहीं दी गई थी। उसके पहले जब सीएम कानपुर आए थे तो बीजेपी की तरफ से बांटे गए आमंत्रण पत्र में शहर के दो मंत्रियों का स्थान सांसद मुरली मनोहर जोशी से काफी ऊपर रखा गया था।

मोदी मैजिक गायब, वोट अटल को, वोट कमल को पुराना नारा चला रहे भाजपाई

देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैजिक नगर निकाय के चुनाव में देखने को नहीं मिल रहा है। लोकसभा और विधान सभा के चुनाव में भाजपाइयों की जुबां पर सिर्फ मोदी-मोदी ही रहते थे। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी का नारा भाजपाई अब भूल चुके हैं। करीब दर्जन भर से अधिक बीजेपी पार्षद प्रत्याशियों के जुलूस और जनसंपर्क के दौरान www.redeyestimes.com पोर्टल ने काफी बारीकी से इन बातों को गौर किया। जनसंपर्क के दौरान कार्यकर्ता काफी पुराना नारा ही लगाते नजर आ रहे हैं। वोट अटल को. वोट कमल को। इसके बाद दूसरा नारा जयश्रीराम।

विकास कार्यों की उपलब्धियां भी नहीं गिना पा रहे पार्षद प्रत्याशी

भारतीय जनता पार्टी की मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय समेत तमाम पार्षद प्रत्याशी Kanpur की जनता के सामने वोट तो मांग रहे हैं लेकिन नगर निगम के पिछले कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों का ब्यौरा वह जनता के सामने नहीं रख पा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि कुछ पार्षद प्रत्याशियों को यदि छोड़ दें तो अधिकांश प्रत्याशी जनता के सामने अपने वादे भी ठीक ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता के लिए वह क्या काम करेंगे ? क्षेत्र की जनता को क्या सौगात दिलाएंगे ? कौन सी बड़ी समस्या को वह दूर करेंगे ? यह भी नहीं बता पा रहे हैं। सिर्फ कमल का फूल ही बता रहे हैं।

अपने ही गढ़ में मात खा सकती हैं मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय

मेयर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय को कांग्रेस प्रत्याशी बंदना मिश्रा कड़ी टक्कर दे रही हैं। चुनाव से पहले जिस चुनाव को भाजपाई बेहद हल्के में ले रहे थे वो अब काफी भारी दिख रहा है। चुनाव पूरे शबाब पर पहुंच चुका है। लेकिन अभी भी बीजेपी के कई ऐसे प्रमुख गढ़ हैं जहां मेयर प्रत्याशी या फिर उनके समर्थक जनसंपर्क करने या फिर वोट मांगने नहीं पहुंचे हैं। साउथ सिटी के तमाम मोहल्ले और बस्तियां ऐसी हैं जहां बीजेपी के बड़ी संख्या में मतदाता हैं। लेकिन सभी में निराशा के साथ आक्रोश भी है। आक्रोश इस बात का है कि जब चुनाव से पहले नहीं आईं तो चुनाव के बाद क्या आएंगी ? राजनीति के जानकार पंडितों की मानें तो यदि वोटर ने वोट के दौरान अपना आक्रोश दिखा दिया तो बीजेपी प्रत्याशी का चुनाव फंस भी सकता है।

कई मोहल्लों में तो BJP के पार्षद प्रत्याशी भी नहीं पहुंचे मतदाताओं के पास 

मेयर प्रत्याशी का तो एरिया काफी बड़ा होता है। उसे पूरे शहर की कई विधान सभा को कवर करना रहता है लेकिन छोटे से वार्डों में कई जगहों पर पार्षद प्रत्याशी भी अपने मतदाता के बीच नहीं पहुंच सके हैं। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशी यह सोच रहे हैं कि यह वोटर तो भाजपा का ही है आखिर कछ भी वोट तो बीजेपी को ही देगा। शायद यही वजह है कि प्रत्याशी अपने परंपरागत मतादाता के बीच नहीं पहुंच पाए। अब वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पाएंगे। क्यों कि आज ही देऱ शाम से चुनाव प्रचार खत्म हो रहा है। ऐसे में यह बिल्कुल तय है कि कई प्रत्याशियों को उनकी आराम तलबी वोटिंग के दौरान भारी पड़ेगी।