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  • Monday की दोपहर ACMM (3) कोर्ट में योगी आदित्यनाथ के मंत्री का सरेंडर
  • समर्थकों और मीडिया की भारी भीड़ को देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया
  • ACMM (3) कोर्ट के चारो तरफ भारी पुलिस बल तैनात
  • सुबह मंत्री के वकील ने हाजिरी का प्रार्थना पत्र देकर बहस के लिए मांगा था समय
  • 31 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं मंत्री राकेश सचान
  • शनिवार को दोषी करार दिए जाने के बाद आदेश का पन्ना लेकर भागने का है मंत्री पर आरोप
  • सरेंडर करने के दौरान कई दिग्गज वकीलों की मौजूदगी मंत्री के साथ दिखी 
  • कोर्ट ने 3.05 बजे राकेश सचान को एक साल की सजा मुकर्रर की
  • कोर्ट ने मंत्री पर 1500 रुपए का जुर्माना भी ठोंका 

Yogesh Tripathi 

योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री (MSME) Rakesh Sachan ने सोमवार दोपहर Kanpur की ACMM (3) कोर्ट में भारी गहमा-गहमी के बीच अंतत: सरेंडर कर दिया।  सरेंडर करते ही उन्हें कस्टडी में ले लिया गया। अदालत के अंदर राकेश सचान की तरफ से कई दिग्गज वकील मौजूद हैं। जो पूरे मामले पर राकेश सचान की तरफ से पक्ष रखते हुए पैरवी कर रहे हैं। इससे पहले सुबह राकेश सचान के अधिवक्ता ने कोर्ट में हाजिरी का प्रार्थना पत्र देते हुए बहस का समय मांगा था। जिला प्रशासन ने राकेश सचान के पहुंचने से पहले कचहरी को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया था। चूंकि राकेश सचान के साथ समर्थकों की भारी भीड़ कचहरी पहुंची है। इस लिए ACMM (3) कोर्ट की चारो तरफ से सुरक्षा के मद्देनजर घेराबंदी कर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। 


UPDATE.....


 

  1. अदालत के अंदर न्यायिक अभिरक्षा में खड़े हैं मंत्री राकेश सचान
  2. सजा पर बहस हो चुकी है पूरी, अब फैसले की घड़ी 
  3. राकेश सचान के साथ बार के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी भी पहुंचे
  4. कानपुर बार के अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी भी मौजूद पूरे समय मंत्री राकेश सचान के इर्द-गिर्द मौजूद रहे
  5. अभी-अभी खबर आ रही है कि मंत्री राकेश सचान को कोर्ट ने एक साल की सजा मुकर्रर कर दी है
  6. कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ 1500 रुपए का जुर्माना भी ठोंका है
  7. मंत्री की तरफ से मौजूद वकील उनकी जमानत के लिए बेल बांड दाखिल करने की तैयारी में जुटे  
  8. Court ने 20 हजार रुपए के निजी मुचलके पर मंत्री राकेश सचान को जमानत भी दे दी है

 

 

  • 31 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं राकेश सचान
  • शनिवार को पेशी के बाद आदेश का पन्ना लेकर भागने का लगा है आरोप 
  • ACMM (3) की कोर्ट में थोड़ी देर बाद सरेंडर करने की पूरी संभावना
  • कानपुर बार के पूर्व प्रेसीडेंट राकेश सचान के Case में करेंगे पैरवी 
  • राकेश सचान की गाड़ी के पीछे समर्थकों की कई गाड़ियां भी रवाना
कानपुर के किदवईनगर स्थित आवास से कचहरी के लिए रवाना होते MSME Minister राकेश सचान (लाल घेरे में)

Yogesh Tripathi

31 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद कोर्ट से भाग निकले Yogi Aditya Nath सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान कचहरी के लिए थोड़ी देर पहले घर से रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि मुसीबत में घिरे राकेश सचान ACMM (3) की कोर्ट में लंच से पहले सरेंडर कर देंगे। सूत्रों की मानें तो उनके Case की पैरवी कानपुर बार एसोशिएशन के एक पूर्व प्रेसीडेंट करेंगे। उनके साथ करीब आधा दर्जन वकील भी मौजूद रहेंगे। 

13 August 1991 को नौबस्ता थाने के तत्कालीन SO ब्रजमोहन उदैनिया ने राइफल समेत Arrest किया था। आरोप है कि उस समय राकेश सचान राइफल का लाइसेंस नहीं दिखा पाए थे। राइफल उनके किसी करीबी रिश्तेदार की थी। जिस दिन राइफल समेत उनको पकड़ा गया था, उसके कुछ घंटा पहले ही छात्र नेता नृपेंद्र सचान की हत्या की गई थी। यह मुकदमा न्यायालय में करीब 31 साल से विचाराधीन था। 

6 अगस्त 2022 को राकेश सचान पेशी पर पहुंचे थे। दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद कोर्ट ने राकेश सचान को दोषी करार देते हुए फाइल सुरक्षित रख ली। लेकिन इस बीच राकेश सचान और उनके साथ मौजूद कुछ वकील आदेश का पन्ना लेकर कोर्ट से भाग निकले। काफी देर तक डैमेज को कंट्रोल करने की कोशिश भी हुई लेकिन मीडिया में गिट्टी चोरी समेत तमाम तरह की खबरें वॉयरल होने के बाद देर रात स्पष्ट हो सका कि मामला आर्म्स एक्ट का है। रात में ही कोर्ट के रीडर की तरफ से राकेश सचान समेत तीन लोगों के खिलाफ कोर्ट से आदेश का पन्ना लेकर भागने की तहरीर भी दी गई। लेकिन मामला सत्ता और रसूख से जुड़ा होने की वजह से पुलिस ने 36 घंटे बाद भी FIR रजिस्टर्ड नहीं की। 

तमाम विधि विशेषज्ञों से राय लेने के बाद संडे को राकेश सचान ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि मैं भागा नहीं हूं, कल कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अपना पक्ष रक्खूंगा। सूत्रों की मानें तो बस थोड़ी देर बाद कचहरी पहुंचकर राकेश सचान सरेंडर कर सकते हैं। 


UPDATE ----मंत्री राकेश सचान के अधिवक्ता ने ACMM (3) की कोर्ट में हाजिरी की अर्जी देकर बहस के लिए समय मांगा है।  विधि विशेषज्ञों की मानें तो राकेश सचान दोषी करार दिए जा चुके हैं। ऐसे में उनको कोर्ट में सरेंडर करने के लिए कटघरे में खड़ा होकर पहले अपनी जमानत करवानी पड़ेगी। कचहरी में भारी रब-रब है।

  • तहरीर मिलने के 20 घंटे बाद भी Kanpur Police ने नहीं दर्ज की FIR
  • शनिवार रात्रि को कैमरे के सामने ज्वाइंट सीपी ने तहरीर मिलने की बात स्वीकार की थी
  • CRPC -154 में स्पष्ट है कि लिखित या मौखिक सूचना मिलते ही तुरंत दर्ज हो FIR
  • "यक्ष प्रश्न" ये है कि आखिर कौन सी अदृश्य शक्ति मंत्री राकेश सचान को बचा रही...?
  • 31 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में शनिवार को कोर्ट में पेशी पर पहुंचे थे राकेश सचान
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत कर अपना पक्ष रखते हुए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान

Yogesh Tripathi

सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है तो नियम-कानून और संविधान बौने हो जाते हैं। शायद इसी लिए एक मसल (कहावत) कही जाती है कि "सैंया भये कोतवाल तो फिर डर काहे का"...। सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक दल की हो नेता खासकर सत्ता पक्ष के उनके सामने शासन-प्रशासन और जिम्मेदार संवैधानिक संस्थाएं पता नहीं क्यों "पिलपिले" हो जाते हैं। जबकि आमजन (गरीब, बेसहारा) पर जरा सी बात को लेकर ऐसा कानूनी शिकंजा कसा जाता है जैसे मानों वो कोई आतंकवादी और देशद्रोही हो। Yogi Aditya Nath सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान पर CRPC की धारा 154 बेमायने साबित हो रही है। 


मंत्री महोदय पर आरोप ये है कि वह Kanpur की ACMM (3) Court में लंबित एक पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मुकदमे की फाइल से आदेश का पन्ना लेकर भाग निकले। बाद में मंत्री जी मीडिया के सामने आकर कैमरे पर बोलते हैं कि "मैं भागा नहीं हूं...मैं कोर्ट गया था...कार्यक्रमों की व्यस्तता की वजह से मैं कोर्ट से चला आया"। इतने संगीन मामले में Kanpur Police का रवैया बेेहद ढुलमुल क्यों बना हुआ है...? ये बड़ा प्रश्न है। छात्रसंघ से राजनीति की शुरुआत करने वाले मंत्री जी को क्या यह नहीं पता था कि वह एक छोटे गुनाह से बचने के लिए दूसरा बड़ा गुनाह कर रहे हैं ...? ये लोकतंत्र, संविधान और जनभावना के पीठ पर छुरा घोंपना सा है। "योगीराज" का भले ही पूरे देश में डंका बज रहा हो पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के इस प्रकरण ने बता और जता दिया कि कानून कितना लचर और लाचार है...? इसे ऐसे समझिए कि 20 घंटे बाद भी FIR रजिस्टर्ड नहीं की गई है। जबकि यही गुनाह यदि किसी गरीब और मजबूर ने किया होता तो अब तक पुलिस उसके घर की खिड़की-दरवाजे उखाड़ने के साथ नींव तक खोद चुकी होती...तमाम उदाहरण मौजूद हैं। 


चंद्रमा का पर्यायवाची राकेश होता है। संयोग से मंत्री महोदय का नाम भी राकेश+सचान है। चंद्रमा 16 कलाएं दिखाता है...लोगों का कहना है कि कुछ ऐसी ही कला का परिचय मंत्री महोदय ने दिया है। उन्हें करीब से जानने वालों की मानें तो अभी कई कलाएं और भी देखने को मिल सकती हैं। चर्चा तो ये भी है कि राकेश सचान अपने "सिस्टम" के बराबर संपर्क में बने हुए हैं। लखनऊ से कहीं अधिक इस समय उनका "सिस्टम" दिल्ली में मजबूत है। अब देखना ये है कि दिल्ली में बैठे "सिस्टम" के अदृश्य हाथ मंत्री जी को कितना बचा पाते हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो काफी हद तक डैमेज को कंट्रोल किया जा चुका है। चर्चा ये भी है कि मंत्री राकेश सचान ने अपना वकील भी बदल दिया है। पूरी संभावना है कि सोमवार को सरेंडर के समय उनके साथ कानपुर बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष मौजूद रहें।

क्या है CRPC-154... ?

संज्ञेय अपराध के किए जाने से संबंधित प्रत्येक इतिला (सूचना) यदि पुलिस के भारसाधक अधिकारी को मौखिक रूप से दी गई है तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी। साथ ही इतिला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी। प्रत्येक ऐसी इतिला पर चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या फिर पूर्वोत्तक रूप में लेखबद्ध की गई हो। लेकिन मंत्री राकेश सचान के प्रकरण में ACMM Court की रीडर की तरफ से दी गई तहरीर को करीब-करीब 20 घंटे हो चुके हैं लेकिन अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। गौरतलब है कि शनिवार देर रात्रि को ही ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (JCP) ने मीडिया के कैमरों के सामने स्वीकार किया कि उनको तहरीर मिली है लेकिन कुछ साक्ष्य और सबूतों का वह संकलन वह कर रहे हैं। जबकि CRPC साफ-साफ कहती है कि सच-गलत और झूठा व सही यह जांच का विषय है। पहले पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए लेकिन मंत्री जी के प्रकरण में तो शहर का हर बड़ा Officer खामोश है। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। छोटे-मोटे अधिकारी तो ऊपर वाले हाकिम पर जिम्मेदारी डालकर बच रहे हैं। CRPC-154 को भी छोड़ दीजिए आप। योगी सरकार का सख्त आदेश है कि किसी भी छोटी-बड़ी घटना की FIR तुरंत रजिस्टर्ड की जाए। यहां तो 20 घंटे बीत चुके हैं लेकिन पुलिस के कान में जूं तक नहीं रेग रही है। 

"मैं कल Court जाऊंगा और पक्ष रक्खूंगा" : राकेश सचान 

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि "कल हमारे मुकदमें की सुनवाई थी...मैं 11 बजे कोर्ट पहुंच गया था...मुझे बताया गया कि अभी और समय लगेगा....मैने छूट मांगी और कोर्ट से निकल गया...मैं कल कोर्ट जाऊंगा और अपना पक्ष रक्खूंगा..." गौरतलब है कि कल की घटना के बाद राकेश सचान के लिए यह कहा गया था कि कोर्ट के बाहर तबियत खराब होने की वजह से वह लौट आए। देर शाम तक पूरे मामले में जद्दोजहद के बाद कोर्ट की रीडर के तरफ से तहरीर दी गई। जिसमें राकेश सचान समेत तीन लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि आदेश का पन्ना लेकर कोर्ट से भाग निकले। जबकि राकेश सचान का कहना है कि वह भागे नहीं है। राकेश सचान ने कोर्ट के रीडर की तरफ से प्रार्थना पत्र देकर लगाए गए आरोप को बेबुनियाद बताया है। 

दो साल की सजा पर जाएगी विधायकी

विधि विशेषज्ञों की मानें तो यदि कोर्ट ने मंत्री राकेश सचान को 2 साल या उससे अधिक की सजा मुकर्रर की तो उनकी विधायकी तुरंत चली जाएगी। यदि कोर्ट ने मंत्री की सजा में थोड़ी नरमी बरतते हुए सजा कम मुकर्रर की तो थोड़ी देर बाद उन्हें जमानत मिल सकती है। लेकिन फिर ये भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोषी करार दिए जाने के बाद भी उनका मंत्री पद बरकरार रहेगा या नहीं ...?

 

Note---समाचार एजेंसी ANI से जो मंत्री राकेश सचान की बातचीत का जो लब्बोलुआब निकल रहा है, उससे स्पष्ट है कि वह किसी दूसरी कार्रवाई से बचने के लिए कोर्ट में सरेंडर करेंगे। यदि सजा हुई तो वह हाईकोर्ट या फिर जिला जज की अदालत में जाएंगे। मान लीजिए वो ऐसा नहीं करते हैं तो फिर IPC की धारा 223 समेत कई धाराओं के तहत एक और मुकदमा दर्ज हो सकता है।  


  • 31 वर्ष पुराने मामले में थी शनिवार को ACMM (3) Court में पेशी 
  • सजा मुकर्रर होने से पहले ही आदेश का पन्ना लेकर "नौ-दो-ग्यारह" हुए राकेश सचान
  • जिला जज ने प्रकरण को काफी गंभीरता से लेते Police Officer's से बातचीत की
  • ज्यूडीशियली की शाख बचाने को देर रात्रि रीडर (पेशकार) ने दी राकेश सचान के खिलाफ तहरीर
  • देर रात्रि तक तहरीर की बात से इनकार करती रही कोतवाली पुलिस 
  • कोर्ट से भागने के आरोप में IPC 223 समेत कई धाराओं में दर्ज हो सकता है राकेश सचान पर मुकदमा
  • यदि दो साल से अधिक की सजा मुकर्रर हुई तो चली जाएगी मंत्री जी की विधायकी भी 

 


Yogesh Tripathi 

Uttar Pradesh की Yogi Aditya Nath (Cabinet Minister) की शनिवार को कोर्ट में तबियत नहीं बिगड़ी थी बल्कि मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद वह अदालत से आदेश का एक पन्ना लेकर फरार हो गए थे। शनिवार शाम तक ज्यूडिशियली और प्रशासनिक अफसरों ने काफी देर तक पूरे मामले पर मंथन किया। न्यायपालिका की शाख पर कोई बट्टा न लगे इस लिए देर रात्रि को अपर मुख्य महानगरीय मजिस्ट्रेट (तृतीय) ACMM (3) कोर्ट की रीडर (पेशकार) कामिनी ने योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के खिलाफ कोतवाली पुलिस को तहरीर सौंप दी। इस संबंध में www.redeyestimes.com (News Portal) ने कोतवाली SHO से रात्रि करीब पौने एक बजे बातचीत की तो उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई तहरीर नहीं आई है। संभव है कि बड़े अधिकारियों के पास तहरीर आई हो। मेरे पास जैसे ही तहरीर आएगी, तत्काल FIR रजिस्टर्ड कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सूत्रों की मानें तो मामला सीधे-सीधे सत्ता से जुड़ा होने की वजह से Police Officer's भी बेहद फूंक-फूंक कर अपने कदम आगे बढ़ा रहे हैं।


 

उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह से लेकर देर रात्रि तक MSME Minister राकेश सचान के कोर्ट से भागने की खबरें Social Media पर खूब Viral होती रहीं। हालांकि इन खबरों में विरोधाभाष होने के साथ यह भी पक्का नहीं था कि आखिर मंत्री जी के खिलाफ मुकदमा गिट्टी चोरी का है या फिर आर्म्स एक्ट मामले का....लेकिन शाम होते ही Kanpur Dehat में राकेश सचान ने अपने खिलाफ वॉयरल हो रही खबरों को पूरी तरह से भ्रामक बताकर खुद को बेकसूर और बेगुनाह दर्शाने की कोशिश की। इस बीच मंथन के बाद ज्यूडिशियली के वरिष्ठ अफसरों ने पूरे मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम से काफी हद तक "पर्दा" उठा ही दिया। लेकिन पुलिस देर रात्रि तक पूरे मामले में गोलमोल जवाब मीडिया को देती रही। एक बड़े अधिकारी से जब मीडिया के लोगों ने तहरीर पर बातचीत की तो उन्होंने यह तो स्वीकार कर लिया कि तहरीर मिली है लेकिन तहरीर में क्या उल्लेख है, इस बात से वह बचते और आंखे चुराते नजर आए। अधिकारी ने कहा कि पुलिस CCTV फुटेज के साथ-साथ वहा मौजूद लोगों से भी पूछताछ कर साक्ष्य जुटाएगी।

दोषी करार दिए जाने के बाद सजा पर हुई थी बहस 

MSME Minister राकेश सचान शनिवार की सुबह 11:35 बजे वकीलों और सुरक्षा कर्मियों के साथ दीवानी न्यायालय परिसर के दूसरे तल पर स्थित ACMM (3) की Court में पेश हुए। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद मंत्री राकेश सचान को दोषी करार दे दिया। दोषी करार दिए जान के बाद सजा के बिन्दु पर कोर्ट को सुनवाई करनी थी। अभियोजन अधिकारी रिचा गुप्ता ने अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखते हुए कड़ी से कड़ी सजा मुकर्रर किए जाने की गुजारिश न्यायधीष आलोक यादव से की। जब कि मंत्री राकेश सचान के अधिवक्ताओं ने बहस से बचते हुए अधिक दंड न दिए जाने की मांग अदालत से की। सूत्रों की मानें तो कोर्ट ने समय न दिए जाने से इनकार किया तो मंत्री के साथ मौजूद तमाम वकीलों ने कोर्ट पर दबाव बनाने का हर संभव प्रयास किया। वकीलों के दबाव में कोर्ट झुकी नहीं। बताया जा रहा है कि इस बीच न्यायधीष आलोक यादव अपने चेंबर में चले गए। जिसके बाद मंत्री के साथ मौजूद कुछ वकीलों ने मंत्री के खिलाफ हुए आदेश की मूल प्रति पढ़ने के ली और मंत्री राकेश सचान को लेकर चले गए। 

31 साल पहले हुई थी छात्र नेता नृपेंद्र सचान की हत्या

करीब 31 साल पहले नौबस्ता के तत्कालीन SO ब्रजमोहन उदेनिया ने 13 अगस्त, 1991 को राकेश सचान के खिलाफ FIR रजिस्टर्ड की थी। राकेश सचान के पास से उनके रिश्तेदार की राइफल मिली थी। मौके पर राकेश लाइसेंस नहीं दिखा सके और न ही उनके रिश्तेदार ही मौजूद थे। इस मामले में पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। गौरतलब हो कि उसी दिन कुछ घंटा पहले ही नौबस्ता थाने से करीब 500 मीटर की दूरी पर में छात्र नेता नृपेंद्र सचान की हत्या हुई थी। पुलिस को शक था कि राकेश इसी मामले में अवैध असलहा लेकर निकले हैं हालांकि उनके खिलाफ असलहा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 

MSME Minister पर और भी मामले हैं दर्ज

MSME Minister राकेश सचान पर असलहा अधिनियम के अलावा तीन और मुकदमे भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। तीनों मुकदमे 90 दशक के आसपास के हैं। पहला मुकदमा IPC 323, 353 और 506 से जुड़ा है जिसमें राकेश सचान ने बिजली विभाग के अभियंता से विवाद किया था और सरकारी काम में बाधा डाली थी। दूसरा मुकदमा परमट के हिंदी भवन में डीएवी कालेज की छात्र नेता रहते हुए विवाद से जुड़ा है। तीसरा मुकदमा कोतवाली से जुड़ा है। वर्ष 1992 में नामांकन के दौरान राकेश सचान के पास असलहा मिला था जिसकी अनुमति चुनाव आयोग से नहीं ली गई थी। उक्त तीनों मुकदमे एसीएमएम तृतीय कोर्ट में ही लंबित हैं। बता दें कि सात साल से कम सजा वाले जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को सुनने का क्षेत्राधिकार जिला अदालतों के पास है। यही वजह है कि ACMM (3) राकेश सचान के खिलाफ दर्ज पुराने मामले की सुनवाई कर रहे हैं। 

2 साल की सजा मुकर्रर हुई तो जा सकती है विधायकी

MSME Minister राकेश सचान पर असलहा अधिनियम की धारा 20, 25 और 30 के तहत मुकदमा दर्ज है। जिसमें अवैध तरीके से बिना लाइसेंस दूसरे का शस्त्र रखने और उसे लेकर घूमने और प्रदर्शन करने का आरोप है। इस आरोप में अधिकतम तीन साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। उल्लेखनीय है कि कोर्ट इस मामले में दो वर्ष की सजा भी सुनाता है तो राकेश सचान की विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी।


 




-चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव में शिरकत करने पहुंचे मंत्री भूपेंद्र चौधरी

-तहसील परिसर में बने शहीद स्मारक में शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Raja Katiyar

"देश के सपूतों की शहादत के बाद हम आज स्वतंत्र जीवन-यापन कर रहे हैं। स्वाधीनता के उस दौर में पुरुषों के साथ महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी आजादी की जंग में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था"। ये बातें चौरी-चौरा आंदोलन के 100 वर्ष पूरा होने पर Uttar Pradesh की इत्रनगरी Kannauj में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान प्रदेश सरकार के Minister Bhupendra Chaudhary ने कहीं। इस मौक पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया।

Uttar Pradesh के पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने तहसील परिसर में बने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित करने के बाद दीप प्रज्जवलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर राष्ट्र गान भी गाया गया। 1998 में कारगिल युद्ध मे शहीद जसपुरापुर सरैया निवासी शहीद राजेश कुमार की वीर पत्नी सुधा दिवेदी को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। 

अपने संबोधन में मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि वीर सपूतों की शहादत को इस समारोह के माध्यम से सजोने और क्षेत्रीय स्तर पर उनको याद कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने का काम UP की Yogiadityanath सरकार कर रही है। 

उन्होंने चौरी-चौरा की घटना को याद करते हुए कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय के सहयोग से ही उस समय कई व्यक्तियों की जान बच पाई थी। उन्होंने कहा कि हमें उन शहीदों और अपने देश को दुश्मनों से बचाने में शहीद हुए सभी वीर सपूतों के महत्वपूर्ण योगदान को याद रखते हुए उन्हें नमन करना चाहिए। साथ ही उनके याद में बनाई गईं स्मृतियों पर श्रद्धा सुमन अर्पित करना चाहिए।

Video

सैकड़ों की भीड़ के साथ पीड़ित परिवार का थाने के बाहर हंगाम

सड़क जाम कर Police और Minister के खिलाफ नारेबाजी

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का काफिला ग्रामीणों ने रोका

"Minister की शह पर पूर्व ग्राम प्रधान को बचा रही पुलिस"

अधिवक्ता सत्येंद्र भदौरिया केस का 48 घंटे पहले हुआ है खुलासा

घाटमपुर में काफिला रोके जाने के बाद गाड़ी से उतकर केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने पीड़ितों से बातचीत की।

Yogesh Tripathi

13 सिंतबर को हुई थी सत्येंद्र भदौरिया की हत्या

Kanpur के Ghatampur स्थित रामसारी (ऊसर) गांव में 13 सितंबर की रात अधिवक्ता सत्येंद्र सिंह भदौरिया Murder Case का 48 घंटा पहले Police ने भले ही खुलासा कर दिया हो लेकिन पीड़ित परिवार और ग्रामीण संतुष्ट नहीं है। आक्रोश गुरुवार को सड़कों पर दिखा। सैकड़ों ग्रामीणों ने घाटमपुर कोतवाली के बाहर सड़क जामकर नारेबाजी की। आक्रोशित लोगों ने केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का काफिला तक रोक लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के एक पूर्व प्रधान को यूपी सरकार के मंत्री की पैरवी में पुलिस बचा रही है। उसके खिलाफ कहने के बाद भी FIR रजिस्टर्ड नहीं की गई। वहीं, अंदरखाने में जो चर्चा है कि उसके मुताबिक पीड़ित परिवार की पैरवी BJP के ही एक सांसद कर रहे हैं। दो दिग्गजों की पैरवी के बीच पीड़ित परिवार “पिस” रहा है।
घाटमपुर कोतवाली के बाहर सड़क के बीचो-बीच बैठकर धरना देती महिलाएं।

कोतवाली के बाहर जमकर आक्रोशित ग्रामीणों की नारेबाजी

गुरुवार दोपहर को घाटमपुर कोतवाली के बाहर पीड़ित परिवार के साथ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे और सड़क जाम कर दी। ट्रैफिक बाधित होने से दोनों तरफ वाहनों के पहिए थम गए। बीच सड़क पर महिलाएं और पुरुष बैठकर घाटमपुर पुलिस और यूपी सरकार के एक मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हत्याकांड में गांव का एक पूर्व प्रधान शामिल था लेकिन मंत्री के दबाव में पुलिस ने उसे बचाते हुए FIR में आरोपित नहीं किया। जबकि पीड़ित परिवार शुरु से ही उसी परिवार पर शक कर रहा था। 
हंगामा और जाम के दौरान सड़क के दोनों तरफ भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई।

मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का काफिला भी रोका

कोतवाली के बाहर जिस समय ग्रामीण हंगामा कर रहे थे, उसी बीच फतेहपुर की सांसद और मोदी सरकार में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का काफिला निकला। वह हमीरपुर जा रही थीं। भीड़ ने उनका काफिला रोक लिया। जिसकी वजह से साध्वी निरंजन ज्योति को गाड़ी से नीचे उतरना पड़ा। पूछने पर ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी मंत्री को दी। इस पर केंद्रीय मंत्री ने पुलिस अफसरों से बात की। काफी देर बाद मंत्री के काफिले को पुलिस ने किसी तरह रवाना करवाया।

48 घंटे पहले Police ने किया Murder Case का खुलासा

Ghatampur Police ने 17 सितंबर को कोतवाली में प्रेस कांफ्रेंस कर हत्याकांड के खुलासे का दावा करते हुए एक आरोपी को मीडिया के सामने पेश किया। संदीप उर्फ गुरु नाम के इस व्यक्ति ने बताया कि ग्राम प्रधान बनने की चाह में उसने सत्येंद्र भदौरिया की हत्या कर दी। हत्या कर वो भूरा सिंह नाम के हिस्ट्रीशीटर को फंसाना चाहता था। लड़की की वेश-भूषा धारण करने के बाद उसने हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस ने संदीप के पास से तमंचा भी बरामद किया। प्रेस कांफ्रेंस में SSP अनंत देव तिवारी भी पहुंचे थे।

ग्रामीणों ने यूपी के Minister पर उठाई उंगली

थाने के बाहर हंगामा कर नारेबाजी कर रहे ग्रामीणों और वकील के परिजनों ने यूपी सरकार के एक मंत्री पर उंगली उठाते हुए कहा कि उनकी पैरवी से ही पुलिस पूर्व ग्राम प्रधान को बचा रही है। कई बार कहने के बाद भी पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान के खिलाफ नामजद रिपोर्ट नहीं दर्ज की। वहीं, अंदरखाने में चर्चा है कि मंत्री जहां पूर्व ग्राम प्रधान की पैरवी में हैं तो एक सांसद पीड़ित परिवार के पक्ष में खड़े हैं। सत्येंद्र सिंह भदौरिया सांसद का खास था। इंस्पेक्टर का कहना है कि मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। किसी के पास कोई साक्ष्य नहीं है। संदीप नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उसने जुर्म स्वीकार करते हुए हत्या की वजह भी बताई। उसके पास से आला कत्ल भी पुलिस ने बरामद किया।



"जहरीली शराब" को लेकर देश का सबसे बड़ा राज्य Uttar Pradesh  एक बार फिर सुर्खियों में है। बाराबंकी में ठेके से देशी शराब खरीदकर पीने वाले 5 लोग अभी तक अपनी जान गवां चुके हैं। 3 लोगों की हालत नाजुक है। मरने वालों में एक परिवार के 4 लोग शामिल हैं। ये आंकड़े Twitter पर पुलिस की तरफ से दिए गए हैं, हालांकि वास्तविक हालात बिल्कुल उलट हैं। खबर है कि अब तक करीब 10 लोग मर चुके हैं। जबकि करीब डेढ़ दर्जन लोग अस्पताल में भर्ती हैं। सभी आला अफसर बाराबंकी के रामनगर स्थित रानीगंज में मौजूद हैं। UP Police के DGP ने मामले में लापरवाही बरतने वाले इंस्पेक्टर रामनगर राजेश कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी पवन गौतम पर कार्रवाई करते हुए दोनों को सस्पेंड कर दिया है। UPCM योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुःख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं।


[caption id="attachment_19531" align="alignnone" width="695"] जहरीली शराब कांड में अपनों की मौत के बाद जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते स्थानीय और पीड़ित परिवार के सदस्य।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


रामनगर के रानीगंज में चारो तरफ कोहराम


बाराबंकी के रामनगर एरिया स्थित रानीगंज इलाके में चारो तरफ कोहराम और मातम पसरा है। हजारों की भीड़ जमा है। कोई शव पर विलाप कर रहा है तो कोई अपनों की जिंदगी बचाने के लिए अफसरों के हाथ-पांव जोड़ रहा है। अधिकारी है कि कुछ भी बोलने से साफ-साफ बच रहे हैं।

[caption id="attachment_19532" align="alignnone" width="1102"] जहरीली शराब कांड में मौत के ये आंकड़े ट्वीटर पर बाराबंकी पुलिस की तरफ से दिए गए हैं जबकि कहानी बिल्कुल उलट है।[/caption]

दानवीर सिंह के ठेके से खरीदी गई थी शराब


स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस शराब के ठेके से लोगों ने शराब खरीदी थी वो दानवीर सिंह नाम के व्यक्ति को आवंटित है। बताया जा रहा है कि शराब पीने के महज थोड़ी देर बाद ही सभी लोगों की हालत बिगड़ने लगी। परिवारीजन अपने करीबी लोगों को आनन फानन में अस्पताल ले गए। जहां से सभी को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया।


https://twitter.com/Barabankipolice/status/1133255698794418177

मृतकों में तीन सगे भाई रमेश पुत्र छोटे लाल (35) व सोनू (25) ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इन युवकों के पिता छोटेलाल (60) की भी थोड़ी देर बाद मौत हो गई। छोटेलाल के एक अन्य लड़के मुकेश (28) की घर पर ही मौत हो गई।


जिला आबकारी अधिकारी सस्पेंड


बड़े सूत्रों की मानें तो बाराबंकी में जहरीली शराब कांड के बाद पंचम तल के एयर कंडीशन वाले कमरों में बैठे अफसरों ने पसीना छोड़ दिया। खबर है कि विभाग के Minister जय कुमार सिंह (जैकी) ने बाराबंकी के जिला आबकारी अधिकारी एस.एन दुबे को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही आबकारी विभाग के 5 हेड कांस्टेबल और 5 कांस्टेबल भी सस्पेंड किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कानपुर समेत कई जगहों पर जहरीली शराब अपना कहर बरपा चुकी है। लेकिन यूपी सरकार के जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेंगती। हर घटना के बाद कार्रवाई का झुनझुना बजता तो है लेकिन मोटी मलाई खाने के चक्कर में इसे फिर शुरु करवा दिया जाता है।

 जहरीली शराब से इन लोगों ने अब तक दम तोड़ा

  1. सोनू पुत्र सुरेश (25)।
    2. राजेश (35) पुत्र सालिक राम।
    3. रमेश (35) पुत्र छोटेलाल।
    4. सोनू (25) पुत्र छोटेलाल।
    5. मुकेश (28)
    पुत्र छोटे लाल।
    6. छोटेलाल (60) पुत्र घूरू। (राजेश, रमेश, सोनू व छोटेलाल एक ही परिवार के हैं।)
    7. सूर्यभान पुत्र सूर्य बख्श।
    8. राजेंद्र वर्मा पुत्र जगमोहन निवासी उमरी।
    9. महेंद्र पुत्र कप्तान सिंह निवासी सेमराय।
    10. महेंद्र पुत्र दलगंजन निवासी ततेहरा।