• तहरीर मिलने के 20 घंटे बाद भी Kanpur Police ने नहीं दर्ज की FIR
  • शनिवार रात्रि को कैमरे के सामने ज्वाइंट सीपी ने तहरीर मिलने की बात स्वीकार की थी
  • CRPC -154 में स्पष्ट है कि लिखित या मौखिक सूचना मिलते ही तुरंत दर्ज हो FIR
  • "यक्ष प्रश्न" ये है कि आखिर कौन सी अदृश्य शक्ति मंत्री राकेश सचान को बचा रही...?
  • 31 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में शनिवार को कोर्ट में पेशी पर पहुंचे थे राकेश सचान
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत कर अपना पक्ष रखते हुए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान

Yogesh Tripathi

सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है तो नियम-कानून और संविधान बौने हो जाते हैं। शायद इसी लिए एक मसल (कहावत) कही जाती है कि "सैंया भये कोतवाल तो फिर डर काहे का"...। सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक दल की हो नेता खासकर सत्ता पक्ष के उनके सामने शासन-प्रशासन और जिम्मेदार संवैधानिक संस्थाएं पता नहीं क्यों "पिलपिले" हो जाते हैं। जबकि आमजन (गरीब, बेसहारा) पर जरा सी बात को लेकर ऐसा कानूनी शिकंजा कसा जाता है जैसे मानों वो कोई आतंकवादी और देशद्रोही हो। Yogi Aditya Nath सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान पर CRPC की धारा 154 बेमायने साबित हो रही है। 


मंत्री महोदय पर आरोप ये है कि वह Kanpur की ACMM (3) Court में लंबित एक पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मुकदमे की फाइल से आदेश का पन्ना लेकर भाग निकले। बाद में मंत्री जी मीडिया के सामने आकर कैमरे पर बोलते हैं कि "मैं भागा नहीं हूं...मैं कोर्ट गया था...कार्यक्रमों की व्यस्तता की वजह से मैं कोर्ट से चला आया"। इतने संगीन मामले में Kanpur Police का रवैया बेेहद ढुलमुल क्यों बना हुआ है...? ये बड़ा प्रश्न है। छात्रसंघ से राजनीति की शुरुआत करने वाले मंत्री जी को क्या यह नहीं पता था कि वह एक छोटे गुनाह से बचने के लिए दूसरा बड़ा गुनाह कर रहे हैं ...? ये लोकतंत्र, संविधान और जनभावना के पीठ पर छुरा घोंपना सा है। "योगीराज" का भले ही पूरे देश में डंका बज रहा हो पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के इस प्रकरण ने बता और जता दिया कि कानून कितना लचर और लाचार है...? इसे ऐसे समझिए कि 20 घंटे बाद भी FIR रजिस्टर्ड नहीं की गई है। जबकि यही गुनाह यदि किसी गरीब और मजबूर ने किया होता तो अब तक पुलिस उसके घर की खिड़की-दरवाजे उखाड़ने के साथ नींव तक खोद चुकी होती...तमाम उदाहरण मौजूद हैं। 


चंद्रमा का पर्यायवाची राकेश होता है। संयोग से मंत्री महोदय का नाम भी राकेश+सचान है। चंद्रमा 16 कलाएं दिखाता है...लोगों का कहना है कि कुछ ऐसी ही कला का परिचय मंत्री महोदय ने दिया है। उन्हें करीब से जानने वालों की मानें तो अभी कई कलाएं और भी देखने को मिल सकती हैं। चर्चा तो ये भी है कि राकेश सचान अपने "सिस्टम" के बराबर संपर्क में बने हुए हैं। लखनऊ से कहीं अधिक इस समय उनका "सिस्टम" दिल्ली में मजबूत है। अब देखना ये है कि दिल्ली में बैठे "सिस्टम" के अदृश्य हाथ मंत्री जी को कितना बचा पाते हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो काफी हद तक डैमेज को कंट्रोल किया जा चुका है। चर्चा ये भी है कि मंत्री राकेश सचान ने अपना वकील भी बदल दिया है। पूरी संभावना है कि सोमवार को सरेंडर के समय उनके साथ कानपुर बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष मौजूद रहें।

क्या है CRPC-154... ?

संज्ञेय अपराध के किए जाने से संबंधित प्रत्येक इतिला (सूचना) यदि पुलिस के भारसाधक अधिकारी को मौखिक रूप से दी गई है तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी। साथ ही इतिला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी। प्रत्येक ऐसी इतिला पर चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या फिर पूर्वोत्तक रूप में लेखबद्ध की गई हो। लेकिन मंत्री राकेश सचान के प्रकरण में ACMM Court की रीडर की तरफ से दी गई तहरीर को करीब-करीब 20 घंटे हो चुके हैं लेकिन अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। गौरतलब है कि शनिवार देर रात्रि को ही ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (JCP) ने मीडिया के कैमरों के सामने स्वीकार किया कि उनको तहरीर मिली है लेकिन कुछ साक्ष्य और सबूतों का वह संकलन वह कर रहे हैं। जबकि CRPC साफ-साफ कहती है कि सच-गलत और झूठा व सही यह जांच का विषय है। पहले पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए लेकिन मंत्री जी के प्रकरण में तो शहर का हर बड़ा Officer खामोश है। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। छोटे-मोटे अधिकारी तो ऊपर वाले हाकिम पर जिम्मेदारी डालकर बच रहे हैं। CRPC-154 को भी छोड़ दीजिए आप। योगी सरकार का सख्त आदेश है कि किसी भी छोटी-बड़ी घटना की FIR तुरंत रजिस्टर्ड की जाए। यहां तो 20 घंटे बीत चुके हैं लेकिन पुलिस के कान में जूं तक नहीं रेग रही है। 

"मैं कल Court जाऊंगा और पक्ष रक्खूंगा" : राकेश सचान 

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि "कल हमारे मुकदमें की सुनवाई थी...मैं 11 बजे कोर्ट पहुंच गया था...मुझे बताया गया कि अभी और समय लगेगा....मैने छूट मांगी और कोर्ट से निकल गया...मैं कल कोर्ट जाऊंगा और अपना पक्ष रक्खूंगा..." गौरतलब है कि कल की घटना के बाद राकेश सचान के लिए यह कहा गया था कि कोर्ट के बाहर तबियत खराब होने की वजह से वह लौट आए। देर शाम तक पूरे मामले में जद्दोजहद के बाद कोर्ट की रीडर के तरफ से तहरीर दी गई। जिसमें राकेश सचान समेत तीन लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि आदेश का पन्ना लेकर कोर्ट से भाग निकले। जबकि राकेश सचान का कहना है कि वह भागे नहीं है। राकेश सचान ने कोर्ट के रीडर की तरफ से प्रार्थना पत्र देकर लगाए गए आरोप को बेबुनियाद बताया है। 

दो साल की सजा पर जाएगी विधायकी

विधि विशेषज्ञों की मानें तो यदि कोर्ट ने मंत्री राकेश सचान को 2 साल या उससे अधिक की सजा मुकर्रर की तो उनकी विधायकी तुरंत चली जाएगी। यदि कोर्ट ने मंत्री की सजा में थोड़ी नरमी बरतते हुए सजा कम मुकर्रर की तो थोड़ी देर बाद उन्हें जमानत मिल सकती है। लेकिन फिर ये भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोषी करार दिए जाने के बाद भी उनका मंत्री पद बरकरार रहेगा या नहीं ...?

 

Note---समाचार एजेंसी ANI से जो मंत्री राकेश सचान की बातचीत का जो लब्बोलुआब निकल रहा है, उससे स्पष्ट है कि वह किसी दूसरी कार्रवाई से बचने के लिए कोर्ट में सरेंडर करेंगे। यदि सजा हुई तो वह हाईकोर्ट या फिर जिला जज की अदालत में जाएंगे। मान लीजिए वो ऐसा नहीं करते हैं तो फिर IPC की धारा 223 समेत कई धाराओं के तहत एक और मुकदमा दर्ज हो सकता है।  


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