Articles by "Ramdas"
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  • खुफिया एजेंसियों की Report के बाद भी जूना अखाड़ा गद्दी पर जबरन काबिज
  • जिला प्रशासन को भी जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने दिखाया ठेंगा, बुलाया तक नहीं
  • प्रशासन और इंटेलीजेंस विभाग के अफसरों को अब तक कोई कागज नहीं दिखा सका जूना अखाड़ा 
  • श्यामगिरी ने शासन और प्रशासन को पत्र लिखकर SIT जांच की मांग की 
  • बुजुर्ग क्रिकेट खिलाड़ियों की सुरक्षा में व्यस्त अफसरों ने अभी तक श्रीआनंदेश्वर मंदिर प्रकरण की सुध नहीं ली
  • सोलसा भंडारा के बाद चार साधु-संतों की जूना अखाड़ा ने मंदिर में नियुक्ति की


Yogesh Tripathi

अंतत : वही हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी। लाखों भक्तों की आस्था के केंद्र श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) कानपुर के महंत की गद्दी पर जूना अखाड़ा ने गुरु-शिष्य परंपरा का लोप कर कब्जा कर लिया। महंत की गद्दी पर जूना अखाड़ा ने अपने चार पदाधिकारियों के नियुक्ति की घोषणा की। खास बात ये रही कि जूना अखाड़ा ने जिला प्रशासन के अफसरों को भी विश्वास में नहीं लिया। यहां तक की किसी भी प्रशासनिक अफसर को बुलाया तक नहीं गया। भक्तगणों को भी नहीं बुलाया गया। महंत की गद्दी को लेकर पकी "खिचड़ी" जूना अखाड़ा के बीच रही। उधर, इंटेलीजेंस ने भी इस पूरे प्रकरण की एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। खुफिया अफसरों की मानें तो तमाम बार जूना अखाड़े से मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर चल रहे प्रकरण के बाबत कागजात मांगे गए लेकिन जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने अभी तक कोई साक्ष्य, प्रमाण या फिर कागजत नहीं सौंपे। www.redeyestimes.com (News Portal) के पास जो जानकारियां हैं उसके मुताबिक दो प्रशासनिक अफसरों ने भी जूना अखाड़े से कागजात मांगे हैं लेकिन अखाड़ा अभी तक कोई कागज नहीं दे सका है। मंदिर के महंत की गद्दी पर कब्जा होने के बाद ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी के बड़े शिष्य रामदास  उर्फ अमरकंटक का कहना है कि उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत जिला प्रशासन के अफसरों से लेकर शासन में बैठे बड़े अफसरों से करते हुए SIT जांच की मांग की है। 


उधर, अंदरखाने से खबर ये भी है कि एक खुफिया विंग मंदिर से जुड़े तमाम कद्दावर और सफेदपोश माफियाओं की बड़ी लिस्ट तैयार कर चुकी है। ये संख्या करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की है। कुछ की "कुंडली" तो तीन दशक पुरानी बांची गई है। इसमें कई लोगों के खिलाफ देश की बड़ी एजेंसियां अन्य मामलों को लेकर जांच कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी इनमें शामिल हैं।

 


15 सितंबर यानि कल श्यामगिरी का सोलसा भंडारा था। जिसमें कार्यक्रम के बाद जूना अखाड़ा के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे। श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने सभी पुरानी व्यवस्थाओं को ताक पर रखते हुए चार साधु-संतों को मंदिर की देखरेख के लिए नियुक्ति कर दी। जिनकी नियुक्ति की गई है उसमें पहले नंबर पर हरिगिरी, प्रेमगिरी, उमाशंकर भारती, नारायण गिरी, केदार पुरी के नाम हैं। इसमें हरि गिरी मुख्य रहेंगे। उनके नीचे सभी चार-साधु संत कार्यभार देखेंगे। www.redeyestimes.com (News Portal) के पास सभी Video मौजूद हैं। जिसमें नियुक्ति के बाद सभी हरी गिरी को चादर ओढ़ा रहे हैं। इसके बाद जूना अखाड़ा की एक मीटिंग हुई। जिसको हरि गिरी ने संबोधित किया। इस दौरान Video में मंदिर का कोई कर्मचारी, भक्त या फिर प्रशासनिक अफसर दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है। News Portal के पास जो जानकारियां है उसके मुताबिक लखनऊ की सत्ता में बैठी एक "अदृश्य शक्ति" की शह पर जूना अखाड़ा की तरफ से पूरा "खेल" खेला जा रहा है। News Portal ने जब इस "अदृष्य शक्ति" के सभी Spcial Media Acount की छानबीन की तो कई चौंकाने वाली तस्वीरें भी मिली हैं। ये तस्वीरें जूना अखाड़ा के दिग्गज पदाधिकारियों की है। जो "अदृश्य शक्ति" के पास खुद पहुंचे थे। यही वजह है कि जूना अखाड़े की मनमानी के आगे जिला प्रशासन भी "मौन" है। 


 

इसे ऐसे समझा जा सकता है कि श्यामगिरी का पार्थिव शरीर आने से पहले ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (JCP) प्रशासनिक अफसरों के साथ मंदिर पहुंचते हैं और लंबी बातचीत के बाद वापस चले जाते हैं। श्यामगिरी का पार्थिव शरीर अगले दिन जब रात में 11 बजे पहुंचता है तो 9 बजे से ही मंदिर परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया जाता है ताकि परिंदा भी पर न मार सके। पूरी रात व्हील चेयर पर श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को लेकर जूना अखाड़ा के लोग श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में लेकर पहुंचते हैं। रात्रि 12 बजे के बाद मंदिर के पट खोलकर पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद गंगा स्नान तक करवाया जाता है। यह सारा काम पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में होता है लेकिन श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक व उनके गुरु भाइयों को मंदिर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जाता है। अगले दिन भू-समाधि में पुलिस का पहरा अफसर और भी गहरा कर देते हैं। 


 

सवाल यही है कि इतना सब होने के बाद भी जिला प्रशासन के अफसरों ने अभी तक दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत या फिर सवाल-जवाब क्यों नहीं किया...? एक पक्ष ने जब कागजातों का पुलिंदा सौंप दिया है तो दूसरे पक्ष जूना अखाड़ा से कागजात अफसर क्यों नहीं ले सके हैं...? यदि जूना अखाड़े के पास कोई ठोस कागजात नहीं है तो फिर मंदिर की गद्दी पर उनका कब्जा क्यूं और किसकी शह पर हो गया ...? आखिर क्या वजह है कि प्रशासन जूना अखाड़ा के लोगों को बुला तक नहीं पा रहा है...? जबकि जूना अखाड़ा के लोगो सारी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करने पर पूरी तरह से आमादा हैं। सवाल ये भी उठता है कि यदि सबकुछ निष्पक्ष हो रहा है तो प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी एक ऐसे अफसर को इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई...? जिससे पूरे प्रकरण की जांच जल्द हो सके। जबकि वर्ष 2011 में भी जब मंदिर प्रकरण का मुद्दा गर्माया था तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने ADM & ACM को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपते हुए उनसे रिपोर्ट मांगी थी। उस समय भी जूना अखाड़ा के पदाधिकारी प्रशासनिक अफसरों को कोई कागजात नहीं दे सके थे। BSP की सरकार थी जिसकी वजह से जूना अखाड़ा को "बैकफुट" होना पड़ा था लेकिन वर्तमान में हालात कुछ और हैं। सत्ता की सरपरस्ती में ही सबकुछ हो रहा है। 


Note----तमाम खुफियां इकाइयां भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत की गद्दी पर छिड़े विवाद के पीछे अरबों रुपए की बेशकीमती संपत्ति को वजह मान रही हैं। एक खुफिया विंग तो इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तक सौंप चुकी है। इसमें कई अरब रुपए की संपत्ति तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर के आसपास ही स्थित है। श्रीआनंदेश्वर मंदिर और आनंदेश्वर ट्रस्ट के बीच मुकदमेंबाजी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक हुई है लेकिन हर जगह फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पक्ष में गया। हाईकोर्ट अपने आदेश में यह भी कह चुका है कि मंदिर में गुरु-शिष्य परंपरा है। मंदिर का महंत ही सभी संपत्तियों का स्वामी रहेगा। गौर करने वाली बात ये है कि इसी वजह से मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर जूना अखाड़ा उछलकूद मचाए हुए है। श्यामगिरी के शिष्य रामदास का आरोप है कि जूना अखाड़े के लोग अरबों-खरबों रुपए की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव ठिकाने लगाने के लिए सारा कुचक्र रच रहे हैं। चूंकि मंदिर की गद्दी पर जब जूना अखाड़ा रहेगा तो यह काम बेहद आसान हो जाएगा और किसी को संपत्ति बिकने की भनक तक नहीं लगेगी।


  • यूपी, उत्तराखंड समेत कई जगहों पर हैं श्रीआनंदेश्वर मंदिर की बेशकीमती संपत्तियां
  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पास भी स्थित हैं अरबों रुपए की कीमती संपत्तियां 
  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर की संपत्तियों का मालिक होता है मंदिर का महंत 
  • भू-माफियाओं ने लंबे समय से लगा रक्खी है "गिद्ध" सरीखी निगाह
  • कई सफेदपोशों और भू-माफियाओं की "कुंडली" बांच रही हैं खुफिया विंग
  • समय रहते पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो सरकार की भी होगी किरकिरी 
  • एक खुफिया विंग के कागज मांगते ही जूना अखाड़े के पदाधिकारी "अंडरग्राउंड"
  • मंदिर से जुड़ी अब तक की छानबीन में खुफिया इकाइयों ने तैयार की बेहद मोटी फाइल 

31 अगस्त को श्रीआनंदेश्वर मंदिर में मीटिंग के बाद जूना अखाड़े के लोग भूमिगत हैं---खुफिया इकाइयों ने जूना अखाड़े से दस्तावेज मांगे हैं

Yogesh Tripathi

लाखों भक्तों की आस्था के केंद्र Kanpur स्थित श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) में मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर चल रही खींचतान तो दरसल बहाना है...खुफिया एजेंसियों की मानें तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर के करीब 6 हजार करोड़ रुपए की बेशकीमती संपत्तियों पर भू-माफियाओं का "निशाना" है। यही वजह है कि मंदिर के अरबों रुपए की इन संपत्तियों को हथियाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का "खेल" जारी है। मंदिर की गद्दी मिलते ही कीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त कौड़ियों के भाव में Start होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इसमें करीब एक दर्जन संपत्तियां श्रीआनंदेश्वर मंदिर के आसपास की बताई जा रही हैं। सिर्फ कानपुर ही नहीं यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, मथुरा, कानपुर के घाटमपुर स्थित पतारा, उत्तराखंड में भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर की संपत्तियां हैं। "लोकल-वोकल" के तमाम "गिद्ध" अपने "राजनीतिक आकाओं" के सहारे इन संपत्तियों पर "निगाह" जमाए बैठे हैं। हालांकि इन सफेदपोशों और भू-माफियाओं की "कुंडली" भी खुफिया इकाइयां बांच रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक बेहद मोटी फाइल तैयार हो चुकी है। सबसे खास बात ये है कि मंदिर से जुड़े हर मामले को लखनऊ में बैठे आला अफसर बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। चर्चा तो ये भी है कि यदि प्रशासनिक अफसरों ने समय रहते प्रकरण में हस्तक्षेप यदि नहीं किया तो सरकार की किरकिरी होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी। उसकी वजह भू-माफियाओं और सफेदपोशों का हर कीमत पर श्रीआनंदेश्वर मंदिर की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव में खरीदने के लिए आतुर होना बताया जा रहा है। 


श्रीआनंदेश्वर मंदिर से जुड़ी संपत्तियों को खरीदना या हड़पना तभी संभव होगा जब मंदिर के महंत की "कृपा" होगी। "कृपा" जिस पर बरसेगी वही अरबों की संपत्तियों को ठिकाने लगा पाएगा। यही वजह है कि सदियों पुरानी मंदिर की गुरु-शिष्य परंपरा को भी पुलिस और प्रशासन की मदद से जूना अखाड़े के लोगों ने ताक पर रखते हुए बाबा घाट मंदिर के बाहर ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को भू-समाधि दे दी। इतना ही नहीं अगले दिन मंदिर में जूना अखाड़े के लोगों ने एक मीटिंग कर मंदिर की देखरेख और तमाम कार्यों के लिए पांच साधु-संतों के नाम की घोषणा भी कर दी। जबकि परंपरा के मुताबिक श्यामगिरी के किसी एक शिष्य को गद्दी पर बैठाना चाहिए। चर्चा तो ये भी हो रही है कि यदि शासन-प्रशासन का अधिक जोर पड़ा तो श्यामगिरी के ही एक नशेबाज शिष्य को गद्दी पर डमी महंत के तौर पर बैठाकर सारी बागडोर हाथ में रक्खी जाए। जूना अखाड़े का यह सबसे अंतिम विकल्प हो सकता है। 


वर्ष 1970 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आनंदेश्वर ट्रस्ट की तरफ से अपील प्रस्तुत की गई थी। जिसे हाईकोर्ट ने गुण और दोष के आधार पर खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद यह भी साफ हो गया कि आनंदेश्वर ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है और उसका वैधानिक अधिकार नहीं है। इसके इतर गौर करने वाली बात ये भी है कि मंदिर के महंत के पास ही सभी संपत्तियों का मालिकाना हक रहता है। मंदिर में आने वाले दान से लेकर चढ़ावे और अन्य तरह के की रकम का भी सर्वाधिकार महंत के पास रहता है। ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी ने कोर्ट में दिए हलफनामें में यह बताया है कि श्रीआनंदेश्वर मंदिर से जुड़ी संपत्तियां मकान नंबर 13/74, 13/205, 13/83, 13/70, 13/299-A, 13/78 परमट कानपुर के अलावा भी कई अन्य संपत्तियां हैं। ऐसा श्यामगिरी कोर्ट में दिए हलफनामे में कह चुके हैं। मतलब साफ है कि जो जो Power श्यामगिरी के पास था वो अब नए पास आ जाएगा। नया महंत मंदिर चाहेगा तो उन संपत्तियों का विक्रय या लीज डीड किसी को कर सकता है। 

 


इन संपत्तियों की बिक्री होते ही भू-माफियाओं, सफेदपोशों और बिल्डर्स की चांदी हो जाएगी। खास बात ये है कि मंदिर की इन बेशकीमती जमीनों पर कई दर्जन लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं। ऐसा होते ही उनके सामने भी न सिर्फ घर का बल्कि जीविकापोर्जन का भी संकट मंडराने लगेगा। हालांकि यहां रह रहे कई परिवारों को इस संकट के बांदल अभी से मंडराते साफ दिखाई दे रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो खुफिया इकाइयों को इसकी भनक लग चुकी है। तमाम से सफेदपोश माफियाओं की कुंडली भी खुफिया बांच रही हैं। सूत्रों की मानें तो शासन स्तर से भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर से जुड़ी हर जानकारियों को मांगा जा रहा है। चर्चा है कि खुफिया अफसरों ने जब जूना अखाड़े के दावेदारी को देख जब उनसे दस्तावेज मांगे तो पदाधिकारी खामोश हो गए। चर्चा तो ये भी है कि उसके बाद से जूना अखाड़े के पदाधिकारी कानपुर से कहां रवाना हो गए ये भनक किसी को नहीं है। 


सोलशी भंडारा के बाद गहराएगा महंत की गद्दी का विवाद

30 अगस्त को बाबा घाट के बाहर श्यामगिरी को समाधि देने के बाद जूना अखाड़े के लोगों ने बाबा घाट के बाहर करीब 1000 वर्ग गज से अधिक की जमीन पर अवैध कब्जा कर चारो तरफ लोहे की ग्रिल और जाली लगवा दिया। शिवपुराण और गरुण पुराण का पाठ करवाया जा रहा है लेकिन सबसे अधिक सरगर्मी सोलशी भंडारा को लेकर है। बताया जा रहा है कि 15 सितंबर को श्यामगिरी का सोलशी भंडारा है। माना जा रहा है कि इस भंडारे के बाद मंदिर की गद्दी को लेकर विवाद काफी गहराएगा। खुफियां एजेंसियां भी कमोवेश ऐसा ही मान रही हैं। सोलशी भंडारे को लेकर मंदिर के आसपास होर्डिंग्स लगाई जा चुकी हैं। कल मंदिर से कलश यात्रा भी निकाली गई थी। जिसमें महिलाएं भी शामिल हुईं। 


 


"मेरी संपत्ति (श्रीआनंदश्वर मंदिर) को खुर्द-बुर्द करने पर तुला है जूना अखाड़ा : श्यामगिरी" (अगले अंक में ये स्टोरी पढ़िएगा )

  • बाबा घाट पर मंदिर के बाहर दी गई है ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी की भू-समाधि 
  • पहले ब्रम्हलीन हुए सभी महंतों को बाबा घाट मंदिर के अंदर दी गई थी भू-समाधि
  • पुलिस और प्रशासन की आंख के सामने करीब 1000 वर्ग से अधिक की जमीन पर कब्जा
  • कब्जा की गई अनाधिकृत भूमि की कीमत करोड़ों रुपए की बताई जा रही 
  • दो दिन से चल रहा है श्यामगिरी की समाधि के चारो तरफ लोहे की ग्रिल लगाने का कार्य
  • कुछ दिन बाद कब्जा की गई अनाधिकृत सरकारी भूमि को अपना बताएगा जूना अखाड़ा 
  • श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक बोले, "ये तो जूना अखाड़ा का पुराना इतिहास रहा है"

करीब दर्जन भर से अधिक मजदूर बाबा घाट के बाहर श्यामगिरी की समाधि स्थल के चारो तरफ लोहे की ग्रिल और जाली का निर्माण कर रहे हैं (Photo साभार Social Media)

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को बाबा घाट पर दी गई भू-समाधि के साथ-साथ जूना अखाड़े ने नया "खेल" कर दिया। श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक सोशल मीडिया पर फोटो वॉयरल करते हुए समाधिस्थल के चारो तरफ करीब 1000 वर्ग गज से अधिक की जमीन को लोहे की जाली और ग्रिल लगाकर उस पर अनाधिकृत करीके से कब्जा कर लिया गया है। ये कब्जा किसी और ने नहीं बल्कि जूना अखाड़े के लोगों ने किया है। बकौल रामदास उर्फ अमरकंटक ब्रम्हलीन महंत को पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने ही भू-समाधि दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि करोड़ों रुपए की सरकारी भूमि पर कब्जा हो गया और पुलिस व जिला प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। www.redeyestimes.com (news Portal) की छानबीन में जो जानकारियां मिली हैं, उसके मुताबिक भूमि पर कब्जे का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। कुछ काम ही शेष बचा है। स्थानीय लोगों ने दबी जुबान से कहा कि अभी सिर्फ लोहे की ग्रिल और जाली लगी है, आगे चलकर पूरा परिसर ही मंदिर में मिला दिया जाएगा। यह भूमि न तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर की है और न ही जूना अखाड़े की... फिर करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती जमीन पर क्यों और किसके इशारे पर कब्जा किया गया...? ये सबसे बड़ा "यक्ष प्रश्न" है...? 

 


श्यामगिरी के सबसे बड़े शिष्य और जूना अखाड़े से मोर्चा खोलने वाले महंत रामदास उर्फ अमरकंटक का कहना है कि ये जूना अखाड़े का पुराना इतिहास है। जब भक्त और शिष्य अपने पूज्यनीय गुरु के ब्रम्हलीन होने पर शोक में डूबा था तो जूना अखाड़े के लोग उनकी भू-समाधि के बहाने भू-भाग पर कब्जा करने की योजना बना रहे थे। रामदास उर्फ अमरकंटक का आरोप है कि सत्ता की एक "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव कानपुर पहुंचने से पहले योजना के तहत मंदिर परिसर को पूरी तरह से छावनी में क्यों तब्दील किया गया..? ये सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। रामदास का आरोप है कि क्या वहां पर कोई आतंकवादी घुसा था या फिर घुसने वाला था...? जो इतनी बड़ी तादाद में फोर्स लगा दी गई। रामदास का आरोप है कि फोर्स की तैनाती का प्रदर्शन कर भक्तों और शिष्यों को न सिर्फ खामोश रहने का संकेत दिया गया बल्कि उसी की आड़ में बाबा घाट के बाहर अनाधिकृत तरीके से जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। 


 

News Portal से बातचीत में अमरदास उर्फ कंटक महाराज ने कहा कि सदियो पुरानी परंपरा रही है कि मंदिर का महंत जब भी ब्रम्हलीन हुआ है तो उसके चेलों ने ही अंतिम संस्कार की रस्म को निभाया। सभी गुरुओं की समाधि बाबा घाट मंदिर परिसर के अंदर ही दी गई हैं तो फिर पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी की भू-समाधि क्यों और किसके इशारे पर बाबा घाट के बाहर दी गई। जबकि एक गड्ढा तो मंदिर के अंदर भी खोदा गया था तो वहां समाधि क्यों नहीं दी गई..? रामदास का आरोप है कि पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी के भू-समाधि की  आड़ में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा करना था इस लिए सदियों पुरानी परंपरा को ताक पर रखने के बाद प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने अपनी मनमानी की है। 

जूना अखाड़ा की मंदिर परिसर में हुई मीटिंग के दौरान मौजूद पदाधिकारी।

मंदिर की देखरेख के लिए पांच महंतों के नाम की घोषणा

श्यामगिरी को भू-समाधि देने के बाद जूना अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में ही Meeting की। इस अहम मीटिंग का Video (News Portal) के पास मौजूद है। मीटिंग में जूना अखाड़े के साथ-साथ मंदिर के कर्मचारी और "लोकल-वोकल" भी मौजूद थे। इस मीटिंग में आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख विस्थापन और देखरेख के लिए जूना अखाड़े की तरफ से पांच महंतों की नियुक्ति की गई। जूना अखाड़े की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करने वाले एक यू-ट्यूब चैनल ने फेसबुक पर इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए लिखा है कि आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख महंत हरिगिरी महाराज होंगे। उनके साथ चार और महंत होंगे। जिसमें महंत उमाशंकर भारती, महंत प्रेमगिरी, महंत केदार पुरी, महंत नारायाण गिरी के नाम शामिल हैं। खबर ये भी है कि इस मीटिंग के बाद जूना अखाड़े के सभी प्रमुख पदाधिकारी कानपुर से कहीं अन्यत्र के लिए रवाना हो गए। मंदिर का कामकाज अरुण पुरी के पास है। 

मंदिर में महंतों की नियुक्ति को लेकर Facebook पर Viral Post

श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट को जब शून्य मान चुका है हाईकोर्ट तो फिर दूसरे की इंट्री क्यूं..? 

इलाहाबाद हाईकोर्ट श्रीआनंदेश्वर मंदिर बनाम श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट के मुकदमें में कई दशक पहले अपना फैसला सुना चुका है। यह फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पक्ष में है। इस फैसले में हाईकोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस S.N Dwivedi और C.D Parekh ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर के हक में फैसला देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की परंपरा पर न सिर्फ मोहर लगाया बल्कि सभी संपत्तियों का अधिकार भी मंदिर के महंत के पास रहने का अधिकार दिया। खुद श्यामगिरी ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि इस फैसले के बाद ही तय हो गया था कि ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है और उसका कोई वैधानिक अस्तित्व भी नहीं है। तो फिर सवाल अब ये उठता है कि जब आनंदेश्वर ट्रस्ट ही फर्जी करार दिया जा चुका है तो फिर किसी दूसरी संस्था की इंट्री क्यों, कैसे और किस "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर हो रही है...? जूना अखाड़ा भी एक संस्था ही है। 


 



  • पुलिस की मदद से बच्ची लाल उर्फ राम लाल ने किया था मंदिर पर कब्जा
  • 1920 में तत्कालीन महंत को भ्रमित कर भक्तों ने श्रंगार कमेटी गठित की
  • 1929 में इस कमेटी ने गैर कानूनी ढंग से ट्रस्ट भी बना लिया
  • 1948 में बच्ची लाल उर्फ राम लाल को कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी
  • तब बच्ची लाल श्रीआनंदेश्वर मंदिर का बन बैठा था स्वयं-भू सचिव
  • मंदिर की कई सौ करोड़ं की बेशकीमती संपत्ति पर निगाह जमाए रहते हैं "गिद्ध"



Yogesh Tripathi

 Kanpur में परमट स्थित श्रीआनंदेश्वर मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र सदियों से रहा है। इस मंदिर का इतिहास करीब 250 वर्ष के आसपास का है। सरकारी अभिलेखों की बात करें तो इस मंदिर का निर्माण सीसामऊ के जमींदार स्वर्गीय गोकुल प्रसाद मिश्र ने करवाया था। भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग के साथ-साथ मंदिर में उन्होंने अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी स्थापना करवाई थी। करीब 102 वर्ष पहले 1920 में बरतानिया हुकूमत के समय पहली बार श्रीआनंदेश्वर मंदिर पर कब्जे का प्रयास उस समय के दबंग छवि वाले बच्ची लाल उर्फ रामलाल ने किया था। लेकिन वह पूरी तरह से सफल नहीं हो सके लेकिन वर्ष 1946 में बच्ची लाल फर्जी अभिलेखों और तत्कालीन पुलिस की सरपरस्ती में मंदिर पर कब्जा करने में सफल हो गए। मंदिर और उसकी संपत्तियों के साथ-साथ दान-पात्र तक पर बच्ची लाल उर्फ रामलाल का कब्जा हो गया। हालांकि तत्कालीन महंत ने Court का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने वर्ष 1948 में फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर महंत के पक्ष में सुनाया। जिसके बाद बच्ची लाल को श्रीआनंदेश्वर मंदिर और उसकी तमाम बेशकीमती संपत्तियों से दखल किया गया। 

खबर वर्ष 2011 मई महीने की है लेकिन वर्तमान में जो विवाद है उसकी जड़ यही से निकली

श्रीआनंदेश्वर मंदिर पर कब्जे की "जंग" इसके बाद भी जारी रही। वर्ष 1955 में एक बार फिर निचली अदालत से  आनंदेश्वर ट्रस्ट के पक्ष में मुकदमा डिक्री हो गया। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तत्कालीन महंत दशरथ गिरी महाराज ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। वर्ष 1967 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैसला मंदिर और तत्कालीन महंत दशरथ गिरी के पक्ष में सुनाया। 

"श्रीआनंदेश्वर मंदिर बनाम आनंदेश्वर ट्रस्ट" की यह "अदालती जंग" हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी नहीं थमी। आनंदेश्वर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट (SC) का दरवाजा खटखटाते हुए अपील प्रस्तुत की लेकिन फर्जी और कूटरचित दस्तावेज के जरिए मंदिर पर कब्जा करने की जुगत भिड़ा रहे आनंदेश्वर ट्रस्ट के स्वयं-भू सचिव बच्ची लाल को सुप्रीम कोर्ट में भी मुंह की खानी पड़ी। तमाम दस्तावेजों के अवलोकन और गुण-दोष के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आनंदेश्वर ट्रस्ट की यह अपील 1970 में खारिज कर दी।



जिसके बाद यह तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई कि आनंदेश्वर ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है। इतना ही नहीं इस ट्रस्ट का कोई वैधानिक अस्तित्व भी नहीं है। वर्ष 1976 में श्रीआनंदेश्वर मंदिर के तत्कालीन महंत ने उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की। जिस पर उच्च न्यायालय ने करीब चार साल बाद फैसला सुनाया। इस अपील में यह निर्णीत किया गया है कि सभी संपत्तियों के जो मूलवाद वर्ष 1948 में दाखिल हुआ था की विषय वस्तु थी एवं जो प्रतिवादी गणों को इजरा में प्राप्त हुई थी...उसे पुनर्स्थापना में प्राप्त करने का अधिकार वादी श्रीआनंदेश्वर महराज को है। उक्त सभी बातें ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी हलफमाना देकर कोर्ट में कह चुके हैं।  


यहां पर गौर करने वाली बात ये भी है कि श्रीआनंदेश्वर मंदिर की सिर्फ कानपुर में ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी संपत्तियां हैं। कानपुर के पतारा स्थित बाणेश्वर मंदिर की बेशकीमती खेती। बाबा घाट की प्रापर्टी और गौशाला। शिवली स्थित प्रापर्टी और चर्चा तो ये भी है कि यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड में भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर की बेशकीमती संपत्तियां हैं। यही कारण है कि सिर्फ बाहरी शक्तियां ही नहीं बल्कि लोकल सफेदपोश माफिया भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी से लंबे समय तक मलाई खाते रहे हैं। कुछ लखपति तो कई करोड़पति हो गए। 

1937 में बच्ची लाल ने तत्कालीन महंत महेश गिरी को बना दिया था नौकर

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के खिलाफ साजिश कितनी गहरी की जाती है इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि वर्ष 1937 में श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट के स्वयं-भू सचिव बच्ची लाल उर्फ रामलाल और उनके सहयोगियों ने तत्कालीन महंत महेश गिरी के सीधे होने का फायदा उठाते हुए उनके अंगूठे के निशान कई जगहों पर लगवाकर एक फर्जी कागजात तैयार करवाया। जो लिखापढ़ी की गई उसमें तत्कालीन महंत महेश गिरी को 50 पैसे रोज का ट्रस्ट का नौकर घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं मंदिर की तमाम चल और अचल संपत्तियों को हड़पने की दुरभि संधि भी हुई। इसकी जानकारी जब महंत को हुई तो उन्हे गहरा आघात लगा लेकिन इसके बाद भी वह मंदिर के महंत की गद्दी पर विराजमान रहे और मंदिर की संपत्तियों पर अपना निर्विवाद तरीके से सर्वराहकाात्व स्थापित रक्खा।  

कौन बनेगा महंत की गद्दी का उत्ताराधिकारी ...?

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत श्यामगिरी रविवार की अलसुबह ब्रम्हलीन हो गए। वे लंबे समय से बीमार  थे और उनका इलाज जूना अखाड़े के लोग देहरादून में करवा रहे थे। मंगलवार सुबह बाबा घाट के बाहर गंगा किनारे जूना अखाड़ा के साधु-संतों ने मंदिर की वंशावली और गुरु-शिष्य परंपरा को ताक पर रखते हुए श्यामगिरी को भू-समाधि दे दी। श्यामगिरी को भू-समाधि दे दी गई है लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि आखिर मंदिर का महंत कौन बनेगा..? श्यामगिरी का कोई शिष्य या फिर "Power Bank" की "कृपा" से जूना अखाड़ा मंदिर पर काबिज रहकर किसी को मंदिर के व्यवस्था का जिम्मेदारी देगा। ये अभी भविष्य के गर्त में है। विधि विशेशज्ञों की मानें तो जूना अखाड़ा कागडी लिखापढ़ी में बिल्कुल भी मजबूत नहीं है। ऐसे में यदि वह साम-दाम-दंड और भेद के जरिए मंदिर पर काबिज भी हो गया तो अदालत में न सिर्फ उसे मुंह की खानी पड़ेगी बल्कि जिला प्रशासन की भी कोर्ट में जवाब देना पड़ेगा। 

अमरकंटक और चैतन्य गिरी ने बताया अपनी जान को खतरा

मंगलवार सुबह ब्रम्हलीन महंत को भू-समाधि दे दी गई। जिला प्रशासन ने सुरक्षा का घेरा ऐसा बनाया था कि किसी भी तरह का टकराव या फिर बवाल न हो सके। श्यामगिरी के दोनों शिष्यों अमरकंटक और चैतन्य गिरी को बैरीकेडिंग के पास ही रोक लिया गया। काफी देर बाद अधिकारियों के कहने पर पुलिस अफसर दोनों को समाधि स्थल ले गए। जहां दोनों शिष्यों ने अपने गुरु को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अमरकंटक और चैतन्य गिरी ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपना पक्ष रखते हुए जूना अखाड़े के पदाधिकारियों पर तमाम तरह के गंभीर आरोप लगाए। इतना ही नहीं अमरकंटक और चैतन्य गिरी ने ये भी आरोप लगाया कि उनके गुरु की रहस्यमय तरीके से जान चली गई। अब उन दोनों की जान को भी खतरा है।



  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर और बाबा घाट के चप्पे-चप्पे पर रहा Kanpur Police का पहरा
  • श्यामगिरी के शिष्यों अमरकंटक और चैतन्य गिरी को बैरीकेडिंग पर अफसरों ने रोका
  • पुलिस के एक बड़े अफसर से बातचीत के बाद दोनों शिष्यों को समाधि स्थल तक ले जाया गया
  • अमरकंटक और चैतन्य गिरी ने भी अपने भक्तों के साथ मिलकर गुरु को दी श्रद्धांजलि
  • सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा का हो गया लोप, जूना अखाड़े के साधु-संतों ने दी श्यामगिरी को भू-समाधि
  • निर्धारित समय से तीन घंटा पहले ही ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को दी गई भू-समाधि
  • श्यामगिरी की भू-समाधि के बाद शहर के बड़े पुलिस अफसरों ने ली चैन की सांस

भू-समाधि के बाद ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को पुष्प और श्रद्धासुमन अर्पित करते जूना अखाड़े के साधु-संत।

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट), कानपुर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को बाबा घाट मंदिर के बाहर गंगा के तीरे भू-समाधि दे दी गई। श्यामगिरी को जूना अखाड़ा के साधु-संतों ने भू-समाधि दी। किसी भी बवाल से निपटने के लिए जिला पुलिस प्रशासन ने मुकम्मल इंतजाम Monday Night से ही कर रक्खा था। सुरक्षा का तीन स्तरीय घेरा ऐसा था कि कोई भी परिंदा पर न मार सके। श्यामगिरी के शिष्यों रामदास उर्फ अमरकंटक महराज और चैतन्य गिरी जब अपने भक्तों के साथ बाबा घाट जाने की कोशिश करने लगे तो बैरीकेडिंग पर पैरामिलेट्री फोर्स के साथ मौजूद पुलिस अफसरों ने सभी को रोक लिया। पुलिस और श्यामगिरी के शिष्यों के बीच बाबा घाट पर जाने को लेकर काफी देर तक जद्दोजहद मची रही। 

गंगा किनारे श्यामगिरी को भू-समाधि देते साधु-संत और भक्तगण (लाल घेरे  में)

इस बीच मौके पर मौजूद पुलिस के अफसर ने बड़े हाकिम से बातचीत कर पूरे मामले से अवगत कराया। किसी तरह की कोई टकराहट न हो सके। इस लिए बड़े हाकिम के निर्देश पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच अमरकंटक और चैतन्य गिरी समेत कई लोगों को बाबा घाट पर ले जाया गया। श्यामगिरी के चेलों के पहुंचने से पहले उन्हें भू-समाधि दी जा चुकी थी। मौके पर पहुंचे अमरकंटक और चैतन्य गिरी व उनके भक्तों ने अपने गुरु को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें प्रणाम किया। इस दौरान पुलिस बल चारो तरफ से साधु-संतों को घेरे रहा। 

बाबा घाट से पहले प्रशासन ने बैरीकेडिंग पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर रक्खी थी।

 www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में अमरकंटक और चैतन्य गिरी महाराज ने कहा कि श्रीआनंदेश्वर मंदिर की सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा को आज जूना अखाड़े के लोगों ने लोप कर दिया। दोनों शिष्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो सूचना दी गई और न ही बुलाया गया। जब वह लोग अपने भक्तों के साथ बाबा घाट जाने लगे तो पुलिस प्रशासन की मदद से उन्हें बैरीकेडिंग पर ही रुकवा लिया गया। ताकि वह लोग भू-समाधि देने से वंचित रह जाएं और ऐसा हो भी गया। वह लोग अंतिम में पहुंचे। सिर्फ पुष्प अर्पित कर ब्रम्हलीन महाराज को प्रणाम कर पाए। 

 

श्यामगिरी के शिष्यों को समाधि स्थल जाने से रोकते पुलिस के अधिकारी।

अमरकंटक ने जूना अखाड़े पर तमाम तरह के आरोपों की बौंछार करते हुए कहा कि भू-समाधि का जो समय दिया गया था उससे करीब ढाई घंटा पहले 8.30 बजे ही समाधि दे दी गई। आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई ...? बकौल अमरकंटक उन्हें अपने गुरु के ब्रम्हलीन होने की खबर तक नहीं दी गई। जूना अखाड़ा उनके गुरु की भू-समाधि से कहीं अधिक उन लोगों को पुलिस प्रशासन से रुकवाने के लिए पूरे समय व्याकुल और आतुर रहा। 

 

अंतत: अपने गुरु श्यामगिरी को श्रद्धासुमन देने में कामयाब हो गए उनके बड़े शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक।

कौन बनेगा श्यामगिरी की गद्दी का उत्तराधिकारी...?

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को भू-समाधि दे दी गई है लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर उनकी गद्दी का उत्तराधिकारी कौन बनेगा ...? गुरु-शिष्य की परंपरा (वंशावली) चलेगी या फिर जूना अखाड़ा शासन-प्रशासन की कृपा से मंदिर के महंत की गद्दी पर काबिज होगा...? इसे लेकर मंदिर और ब्रम्हलीन महंत के भक्तों के बीच चर्चा और बहस जारी है। 

 

एक बड़े अधिकारी का निर्देश मिलने के बाद श्यामगिरी के कृपा पात्र शिष्य चैतन्य गिरी को समाधि स्थल लेकर जाते पुलिस के अफसर

क्या मंदिर पर बैठेगा रिसीवर ..?

महंत के उत्तराधिकारी के साथ-साथ रिसीवर को बैठाने की भी चर्चा तेज हो रही है। श्रीआनंदेश्वर मंदिर के भक्तों के एक WhatsApp ग्रुप में रिसीवर बैठाने की पोस्ट देखने को मिल सकती है। तमाम भक्तों का कहना है कि मंदिर में काफी मोटा चढ़ावा आता है। जिसका लंबे समय से बंदरबांट हो रहा है। मंदिर के जीर्णोद्धार में एक पैसा भी नहीं लगता है। मंदिर में कई अन्य तरह से भी पैसा (श्रंगार) आदि का आता है। कुछ ऐसा ही विवाद वर्ष 2011 में ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी और उनके सबसे बड़े शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक के बीच हुआ। जिसके बाद गोली तक चली थी और ब्रम्हलीन महंत को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। जिला प्रशासन तब डेढ़ महीने तक हलकान था। जूना अखाड़ा के प्रभाव में अफसर कार्रवाई करने के बजाय बैकफुट पर खड़े नजर आ रहे थे लेकिन जब कई साधु-संतों के अपराध की "कुंडली" मिली तो तत्कालीन अफसरों ने श्यामगिरी को Arrest कर लिया। 

गंगा किनारे जहां भू-समाधि दी गई उसके चारो तरफ भी पुलिस का पहरा काफी गहरा रहा

तत्कालीन ACM ने बनाई थी एक विस्तृत रिपोर्ट 

श्रीआनंदेश्वर मंदिर में वर्ष 2011 विवाद जब बढ़ा तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर नगर मजिस्ट्रेट (ACM) राजकुमार को पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराई थी। जिसके बाद उन्होंने मंदिर में अब तक हुए सभी अपराधिक मुकदमों का ब्यौरा संकलित करने के साथ-साथ कुछ साधु-संतों की अपराधिक कुंडली का इंतिहास भी खंगालकरक रिपोर्ट सौंपी थी। यह रिपोर्ट तत्कालीन BSP सरकार के पास भी भेजी गई थी लेकिन उसी के कुछ महीने बाद विधान सभा चुनाव में BSP की हार हुई और अखिलेश यादव की अगुवाई वाली SP की सरकार बन गई। जिसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों की मानें तो उस समय भी विवाद को शांत करने के लिए रिसीवर बैठाने की बात जिला प्रशासन ने रक्खी थी। 

रार फिर भी देखने को मिली, जूना अखाड़ा के लोग अमरकंटक को हटाते नजर आए

कागजों पर बेहद मजबूत हैं श्यामगिरी के शिष्य

मंदिर में चली आ रही सदियों पुरानी गुरु-शिष्य की परंपरा हो या फिर अब तक मंदिर के संबंध में लड़े गए सिविल के मुकदमें...सभी में जीत मंदिर के महंतों की ही हुई है। जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक मंदिर के महंतों को जीत मिली। लेकिन दूसरी सच्चाई ये है कि श्यामगिरी के सभी शिष्यों को मंदिर से Out किया जा चुका है। वहीं जूना अखाड़ा अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर मंदिर पर पूरी तरह से काबिज है। अब देखने वाली बात ये है कि जूना अखा़ड़ा अपने किसी साधु को मंदिर की गद्दी पर बैठाएगा है ..? या फिर व्यवस्थापकों की नियुक्ति कर पूरे मामले से बचने की कोशिश करेगा..? मंदिर पर यदि किसी की नियुक्ति भी जूना अखाड़ा करता है तो किस आधार पर करेगा ..? देखना ये भी होगा कि श्यामगिरी के सभी शिष्य अदालत की चौखट पर जाएंगे या फिर कानपुर के अफसरों की ड्योढी पर चक्कर लगाएंगे।  

  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर और बाबा घाट पुलिस की छावनी में तब्दील 
  • व्हीलचेयर पर महंत के पार्थिव शरीर को श्रीआनंदेश्वर मंदिर में ले जाया गया 
  • जूना अखाड़े के साधु-संतों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आरंभ की 
  • श्यामगिरी के चेलों को श्रीआनंदेश्वर मंदिर के आसपास फटकने भी नहीं दिया गया

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को व्हील चेयर पर लेकर श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में जाते जूना अखाड़ा के साधु-संत

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट), कानपुर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी महाराज का पार्थिव शरीर Monday की रात्रि करीब 11 बजे Kanpur पहुंचा। एंबुलेंस के जरिए उनके पार्थिव शरीर को लाया गया। व्हील चेयर पर ब्रम्हलीन महंत के पार्थिव शरीर को रखकर श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में ले जाया गया। इससे पहले किसी भी बवाल और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कानपुर कमिश्नर रेट पुलिस की तरफ से श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर और बाबा घाट को छावनी में तब्दील कर दिया। श्यामगिरी के शिष्यों को मंदिर परिसर के आसपास तक फटकने नहीं दिया गया। 12 बजे के बाद पार्थिव शरीर को भू-समाधि देने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। 

 

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव शरीर

गौरतलब है कि दो दिन पहले श्याम गिरि की देहरादून के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को सबसे पहले हरिद्वार स्थित श्रीजूना अखाड़ा ले जाया गया था। यहां पर साधु-संतों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को एबुंलेंस के जरिए Kanpur लाया गया। पार्थिव शरीर के साथ श्यामगिरी का नाती राहुल और श्रीजूना अखाड़ा के साधु-संत ही मौजूद रहे। www.redeyestimes.com (News Portal) महंत के ब्रम्हलीन होने की खबर सबसे पहले प्रकाशित करते हुए श्रीआनंदेश्वर मंदिर में जूना अखाड़ा और श्यामगिरी के शिष्यों के बीच चल रही पुरानी "महाभारत" को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। News Portal की खबर को संज्ञान में लेते हुए पुलिस के आला अफसरों ने पूरे हालात समझा और सुरक्षा व्यवस्था को चौकस कर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी ताकि किसी भी प्रकार के टकराव को टाला जा सके।

 

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के बाहर मौजूद भारी पुलिस बल

इस बीच जैसे ही सूचना मिली कि श्यामगिरी का पार्थिव शरीर श्रीआनंदेश्वर मंदिर पहुंचने वाला है। जिला पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती मंदिर परिसर के आसपास पुख्ता कर दी। पार्थिव शरीर व्हील चेयर से श्रीआनंदेश्वर महाराज के दरबार में ले जाया गया। वहां दर्शन कराने के बाद उनके पार्थिव शरीर को गंगा दर्शन को घाट ले जाया गया। उसके बाद एंबुलेंस से सिविल लाइंस स्थित बाबा घाट ले जाया गया। यहां पर शव आश्रम में अंतिम दर्शन को रखा गया। ब्रम्हलीन महंत के पार्थिव शरीर पहुंचने की सूचना मिलते ही भक्त उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। जूना अखाड़ा की तरफ से बताया जा रहा है कि वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोपहर बाद ब्रम्हलीन महंत को भू-समाधि दी जाएगी। इस दौरान श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पट सोमवार तक बंद रक्खा गया है। 

 


  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव शरीर आज लाए जाने की उम्मींद
  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर बढ़ रही है जूना अखाड़े और श्यामगिरी के शिष्यों में रार 
  • Sunday की शाम ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (JCP) ने सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था के मद्देनजर बातचीत की
  • ब्रम्हलीन महंत को भू-समाधि देने के लिए बाबा घाट पर खोदे गए दो बड़े गड्ढे
  • जिला प्रशासन के साथ-साथ खुफिया इकाइयां भी Alert
  • 31 August तक श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पट भक्तों के लिए रहेंगे पूरी तरह से बंद
  • एक पक्ष का कागज तो दूसरे पक्ष का "Power Bank" है बेहद मजबूत


Yogesh Tripathi

Kanpur में लाखों भक्तों की आस्था के केंद्र श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) के महंत श्यामगिरी के ब्रम्हलीन होने के बाद मंदिर के महंत की गद्दी पर विराजमान होने के लिए जूना अखाड़े और श्यामगिरी के शिष्यों के बीच बढ़ती रार को देखते हुए इंटेलीजेंस और जिला प्रशासन Alert हो गया है। यही वजह रही कि Sunday को शहर के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (JCP) आनंद प्रकाश तिवारी ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर की वर्तमान समय में व्यवस्था संभाल रहे जूना अखाड़े के लोगों से बातचीत कर शांति व्यवस्था और सुरक्षा के बाबत तमाम जानकारियां लीं। सूत्रों की मानें तो देर रात्रि तक खुफिया एजेंसियां भी मोबाइल पर दोनों पक्ष के लोगों से बातचीत कर तमाम सूचनाएं और जानकारियां एकत्र करते रहे। कुछ के अपराधिक इतिहास की भी "कुंडली" खंगाली जा रही है। उधर, बाबा घाट पर आनन-फानन में दो बड़े गड्ढे भी समाधि देने के लिए जूना अखाड़े की तरफ से खोदवा दिए गए। एक गड्ढा मंदिर परिसर  के अंदर और दूसरा मंदिर के बाहर खोदा गया है। 

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को भू-समाधि देने के लिए बाबा घाट मंदिर के अंदर खोदा गया गड्ढा

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी के सबसे बड़े शिष्य रामदास उर्फ अमर कंटक और कृपा पात्र शिष्य चैतन्य गिरी महराज का कहना है कि मंदिर में सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा रही है। इस परंपरा के तहत ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का अंतिम संस्कार करने का हक उनके शिष्यों का है। दोनों ही शिष्यों ने ये भी दावा किया है कि महंत के ब्रम्हलीन होने के बाद मंदिर की गद्दी पर उनका ही कोई शिष्य विराजमान होना चाहिए। अमरकंटक और चैतन्य गिरी का आरोप है कि सत्ता के "Power Bank" की बदौलत कुछ महीना पहले श्यामगिरी के शिष्यों पर दानपात्र चोरी करने का झूठा इल्जाम लगाकर न सिर्फ जेल भेजा गया था बल्कि उन सभी लोगों के मंदिर प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया। 

बाबा घाट मंदिर के बाहर खोदा गया गड्ढा

उल्लेखनीय है कि www.redeyestimes.com (News Portal) ने महंत के ब्रम्हलीन होने की सबसे पहले खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर मंदिर में लंबे समय से चल रही गद्दी की खीचतान को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। शायद यही वजह रही कि शहर पुलिस के आला अफसरों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तुरंत संज्ञान में लिया। News Portal के अभी तक की छानबीन में एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि एक पक्ष कागजों पर बेहद मजबूत है। जिला कोर्ट से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक चले सभी मुकदमों में उसकी जीत हुई है जबकि दूसरे पक्ष यानि जूना अखाड़ा की एंट्री मंदिर में कब हुई...? इसके मजबूत पेपर संभव है कि अधिकारियों को देखने के लिए मिल जाएं। 

Court में लिखित दे चुके हैं श्यामगिरी.....

वर्ष 80 में कानपुर के सिविल जज सीनिय डिवीजन (दितीय) की अदालत में चल रहे (श्रीआनंदेश्वर महादेव बनाम श्रीआनंदेश्वर ट्र्स्ट) के मुकदमें ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी ने हलफमाना देकर अदालत को भी बता चुके हैं कि मंदिर के महंत गुरु के चेला ही होते रहे हैं। महंत के गोलोकवासी होने पर परंपार के मुताबिक महंत का चेला ही महंत होता है। कोर्ट में दिए गए उनके हलफमानमें के मुताबिक महंत आनंद गिरी के बाद उनके शिष्य कृपाल गिरी तथा कृपाल गिरी के बाद उनके शिष्य जुगराज गिरी, उसके बाद उनके शिष्य हरिहर गिरी, फिर उसके बाद उनके चेला गोकुल गिरी, शिवराम गिरी, बल्देव गिरी, मोहन गिरी, माधव गिरी, महेश गिरी, दशरथ गिरी, लहर गिरी और फिर उनके शिष्य चतुर गिरी मंदिर के महंत की गद्दी पर शोभामान हुए। चतुर गिरी ने इसके बाद अपने शिष्य श्यामगिरी को श्रीआनंदेश्वर मंदिर का महंत बनाया था। श्यामगिरी ने पहरा 4 में लिखा है कि महंत चतुर गिरी के बाद शपथकर्ता उनका चेला होने की वजह से महंत हुआ। शपथकर्ता की नियुक्ति बतौर पंचनाम जूना अखाड़ा ने की थी। 

दो दशक पहले कोर्ट में श्यामगिरी की तरफ से दिया गया हलफनामा

(यक्ष प्रश्न यही है कि जूना अखाड़ा ने श्यामगिरी की नियुक्ति क्यों की थी...? क्या उसी समय से मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर कोई साजिश रची जा रही थी....? इसका जवाब श्यामगिरी ही जानते होंगे...जो अब दुनिया में नहीं हैं और गोलोकवासी हो चुके हैं...जानकारों की मानें तो श्यामगिरी जूना अखाड़े से जुड़े थे और महामंडलेश्वर थे...) सवाल यही है कि जूना अखाड़े से जुड़े होने की वजह से क्या मंदिर पर जूना अखाड़ा के साधु-संत विराजमान होंगें ...? या फिर 225 वर्ष से चली आ रही मंदिर के महंत की गद्दी पर विराजमान होने की गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करवाया जाएगा। यह तो जिला प्रशासन को देखना और तय करना है। समाचार लिखे जाने तक ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव शरीर Kanpur नहीं लाया जा सका था। उधऱ विश्व्स्त सूत्रों की मानें तो दूसरे पक्ष (श्यामगिरी के शिष्यों) का पक्ष जानने और शांति सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक बड़े अफसर का बुलावा आया है। संभव है कि थोड़़ी देर में बातचीत का दौर शुरु होगा। 

दो दशक पहले कोर्ट में श्यामगिरी की तरफ से दिया गया हलफनामा

Note----करीब 11 वर्ष पूर्व जब ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी और उनके शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक के बीच "महाभारत" हुई थी तो तब भी जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। तब रामदास ने बंदूक से फायर करने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया लेकिन थाने से ही श्यामगिरी को छोड़ दिया लेकिन 28 दिन बाद पुलिस को मजबूर होकर श्यामगिरी की Arresting करनी ही पड़ी। 14 दिन से अधिक समय तक श्यामगिरी जेल में रहे। तब तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर नगर मजिस्ट्रेट (ACM) राजकुमार को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में अब जब एक बार फिर "कुरुक्षेत्र" में "महाभारत" के आसार यदि बन रहे हैं तो जिला प्रशासन और खुफिया इकाइयों को तत्कालीन ACM की रिपोर्ट भी खंगालकर पढ़नी चाहिए।


  • देहरादून में ब्रम्हलीन हो गए श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत श्यामगिरी
  • गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बाबा घाट पर शिष्य करते हैं अंतिम कर्म
  • जूना अखाड़े की तरफ से पत्र जारी कर महंत श्यामगिरी की समाधि देने की घोषणा 
  • बवाल और सुरक्षा के मद्देनजर जूना अखाड़े ने फोर्स की मांग भी पत्र में की 
  • श्याम गिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक गुरु भाइयों के साथ करना चाहते हैं अंतिम संस्कार
  • अमरकंटक ने जूना अखाड़े पर लगाया पुलिस और प्रशासन से साठगांठ का आरोप


Yogesh Tripathi

 करीब 27 साल से श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) कानपुर के महंत की गद्दी पर विराजमान श्यामगिरी महाराज ने Sunday की सुबह उत्तराखंड के देहरादून में अंतिम सांस ली। उनके ब्रम्हलीन होने की खबर मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई। मंदिर प्रशासन की तरफ से महंत के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा गया कि 31 अगस्त तक श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पट बंद रहेंगे। इन सबके बीच एक पुराने विवाद का "जिन्न" फिर बोतल से बाहर आ गया। यह "जिन्न" मंदिर के मंहत की गद्दी को लेकर है। करीब 225 वर्ष पुराने श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत की गद्दी उसके शिष्य को दिए जाने की परंपरा हमेशा से रही है। इतना ही नहीं महंत के ब्रम्हलीन होने पर उनके शिष्य बाबा घाटम पर अंतिम क्रिया कर्म कर उनको समाधि देते हैं। साथ ही महंत की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। तमाम से महंतों की मूर्ति स्थापित भी है। 


www.redeyyestimes.com (News Portal) की छानबीन में पता चला है कि इस बार संभवतः गुरु-शिष्य की परंपरा को खत्म करने का "ब्लूप्रिंट" तैयार किया जा चुका है। इस बात की पुष्टि खुद श्यामगिरी महाराज के परम शिष्य अमरनाथ उर्फ कंटक महाराज ने News Portal के साथ बातचीत में की। कंटक महराज ने श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े पर तमाम आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा मंदिर पर कब्जा करने की नीयति से किया जा रहा है। चोरी के इल्जाम में पहले उन्हें गुरु भाइयों के साथ जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया गया फिर महंत को कैप्चर करके रक्खा गया। उन्हें न तो अपने गुरु श्यामगिरी से मिलने दिया गया और न ही उनके निधन की सूचना दी गई। अब जूना अखाड़े के लोग उन्हें और उनके गुरु भाइयों को अपने गुरु का अंतिम संस्कार भी रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार नहीं करने दे रहे हैं। 

ब्रम्हलीन महंत चतुरगिरी के शिष्य श्यामगिरी के कई शिष्य थे। इसमें अमरदास उर्फ कंटकट महराज, महंत चैतन्य गिरी, (ये कृपा पात्र शिष्य थे), केवल गिरी, कुरुक्षेत्र गिरी, स्वर्गीय करन गिरी, महंत बाबू गिरी, महंत आजाद गिरी प्रमुख हैं। मथुरा जनपद के निवासी ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी पहले गृहस्थ थे। श्यामगिरी के कोई बेटा नहीं था सिर्फ तीन बेटियां ही थीं। मथुरा में ब्याही बेटी संगीता का निधन हो चुका है। दूसरी  बेटी आगरा में और तीसरी बेटी पूनम कानपुर में ब्याही है। 

मंदिर की गुरु-शिष्य परंपरा के मुताबिक श्यामगिरी के चेलों को न सिर्फ उनके अंतिम संस्कार करने का अधिकार प्राप्त है बल्कि मंदिर के महंत की कुर्सी पर भी किसी एक शिष्य को बैठने का अधिकार है। यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है और अनवरत चली आ रही है। अमरदास उर्फ कंटक महराज का कहना है कि जूना अखाड़े का इस मंदिर से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। 10-20 रुपयों के फर्जी स्टांप पेपरों पर जूना अखाड़े ने तमाम मनगढ़ंत कहानियां रच रक्खी हैं। इसका पर्दाफाश जल्द ही जिला प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष किया जाएगा। Social Media पर कंटक महराज का एक Video भी वायरल हो रहा है जिसमें वह साफ-साफ सभी आरोप जूना अखाड़े पर लगाते हुए कह रहे हैं कि उनके गुरु की रहस्यमयी मौत का जिम्मेदार जूना अखाड़ा है। यह वीडियो पोर्टल के पास मौजूद है। 

उधर, जूना अखाड़े की तरफ से एक पत्र WhatsApp ग्रुपों में पोस्ट किया गया। जिसमें महंत श्यामगिरी के निधन की जानकारी देने के साथ पत्र में यह भी लिखा गया है कि हरिद्वार में जूना अखाड़े के साधु परंपरा के मुताबिक 13 अखाड़ों के साधु-सन्यासी उनको पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। पत्र में यह भी लिखा है कि शाम तक श्यामगिरी का पार्थिव शरीर कानपुर पहुंचेगा। 30 अगस्त को श्यामगिरी की शोभा यात्रा मंदिर परिसर से बाबा घाट तक ले जाई जायेगी। पत्र की अंतिम लाइन में लिखा है कि सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल अति आवश्यक है।  


अब देखना यह है कि कानपुर की पुलिस और जिला प्रशासन  क्या रुख अख्तियार करता है..? सिर्फ जूना अखाड़े का पक्ष सुनेगा या फिर लंबे समय से मंदिर में मंहत श्यामगिरी के साथ साए की तरह रहने वाले उनके शिष्यों की ...? प्रशासन क्या गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वाहन करवाएगा या फिर जूना अखाड़ा के लोग ही श्यामगिरी का अंतिम संस्कार करेंगे। 

श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) कानपुर के गुरु-शिष्य परंपरा को चार्ट के जरिए समझिए------

चार्ट नंबर-2------

चार्ट नंबर-3-----