Articles by "Juna Akhara"
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  • खुफिया एजेंसियों की Report के बाद भी जूना अखाड़ा गद्दी पर जबरन काबिज
  • जिला प्रशासन को भी जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने दिखाया ठेंगा, बुलाया तक नहीं
  • प्रशासन और इंटेलीजेंस विभाग के अफसरों को अब तक कोई कागज नहीं दिखा सका जूना अखाड़ा 
  • श्यामगिरी ने शासन और प्रशासन को पत्र लिखकर SIT जांच की मांग की 
  • बुजुर्ग क्रिकेट खिलाड़ियों की सुरक्षा में व्यस्त अफसरों ने अभी तक श्रीआनंदेश्वर मंदिर प्रकरण की सुध नहीं ली
  • सोलसा भंडारा के बाद चार साधु-संतों की जूना अखाड़ा ने मंदिर में नियुक्ति की


Yogesh Tripathi

अंतत : वही हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी। लाखों भक्तों की आस्था के केंद्र श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) कानपुर के महंत की गद्दी पर जूना अखाड़ा ने गुरु-शिष्य परंपरा का लोप कर कब्जा कर लिया। महंत की गद्दी पर जूना अखाड़ा ने अपने चार पदाधिकारियों के नियुक्ति की घोषणा की। खास बात ये रही कि जूना अखाड़ा ने जिला प्रशासन के अफसरों को भी विश्वास में नहीं लिया। यहां तक की किसी भी प्रशासनिक अफसर को बुलाया तक नहीं गया। भक्तगणों को भी नहीं बुलाया गया। महंत की गद्दी को लेकर पकी "खिचड़ी" जूना अखाड़ा के बीच रही। उधर, इंटेलीजेंस ने भी इस पूरे प्रकरण की एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। खुफिया अफसरों की मानें तो तमाम बार जूना अखाड़े से मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर चल रहे प्रकरण के बाबत कागजात मांगे गए लेकिन जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने अभी तक कोई साक्ष्य, प्रमाण या फिर कागजत नहीं सौंपे। www.redeyestimes.com (News Portal) के पास जो जानकारियां हैं उसके मुताबिक दो प्रशासनिक अफसरों ने भी जूना अखाड़े से कागजात मांगे हैं लेकिन अखाड़ा अभी तक कोई कागज नहीं दे सका है। मंदिर के महंत की गद्दी पर कब्जा होने के बाद ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी के बड़े शिष्य रामदास  उर्फ अमरकंटक का कहना है कि उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत जिला प्रशासन के अफसरों से लेकर शासन में बैठे बड़े अफसरों से करते हुए SIT जांच की मांग की है। 


उधर, अंदरखाने से खबर ये भी है कि एक खुफिया विंग मंदिर से जुड़े तमाम कद्दावर और सफेदपोश माफियाओं की बड़ी लिस्ट तैयार कर चुकी है। ये संख्या करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की है। कुछ की "कुंडली" तो तीन दशक पुरानी बांची गई है। इसमें कई लोगों के खिलाफ देश की बड़ी एजेंसियां अन्य मामलों को लेकर जांच कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी इनमें शामिल हैं।

 


15 सितंबर यानि कल श्यामगिरी का सोलसा भंडारा था। जिसमें कार्यक्रम के बाद जूना अखाड़ा के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे। श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों ने सभी पुरानी व्यवस्थाओं को ताक पर रखते हुए चार साधु-संतों को मंदिर की देखरेख के लिए नियुक्ति कर दी। जिनकी नियुक्ति की गई है उसमें पहले नंबर पर हरिगिरी, प्रेमगिरी, उमाशंकर भारती, नारायण गिरी, केदार पुरी के नाम हैं। इसमें हरि गिरी मुख्य रहेंगे। उनके नीचे सभी चार-साधु संत कार्यभार देखेंगे। www.redeyestimes.com (News Portal) के पास सभी Video मौजूद हैं। जिसमें नियुक्ति के बाद सभी हरी गिरी को चादर ओढ़ा रहे हैं। इसके बाद जूना अखाड़ा की एक मीटिंग हुई। जिसको हरि गिरी ने संबोधित किया। इस दौरान Video में मंदिर का कोई कर्मचारी, भक्त या फिर प्रशासनिक अफसर दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है। News Portal के पास जो जानकारियां है उसके मुताबिक लखनऊ की सत्ता में बैठी एक "अदृश्य शक्ति" की शह पर जूना अखाड़ा की तरफ से पूरा "खेल" खेला जा रहा है। News Portal ने जब इस "अदृष्य शक्ति" के सभी Spcial Media Acount की छानबीन की तो कई चौंकाने वाली तस्वीरें भी मिली हैं। ये तस्वीरें जूना अखाड़ा के दिग्गज पदाधिकारियों की है। जो "अदृश्य शक्ति" के पास खुद पहुंचे थे। यही वजह है कि जूना अखाड़े की मनमानी के आगे जिला प्रशासन भी "मौन" है। 


 

इसे ऐसे समझा जा सकता है कि श्यामगिरी का पार्थिव शरीर आने से पहले ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (JCP) प्रशासनिक अफसरों के साथ मंदिर पहुंचते हैं और लंबी बातचीत के बाद वापस चले जाते हैं। श्यामगिरी का पार्थिव शरीर अगले दिन जब रात में 11 बजे पहुंचता है तो 9 बजे से ही मंदिर परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया जाता है ताकि परिंदा भी पर न मार सके। पूरी रात व्हील चेयर पर श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को लेकर जूना अखाड़ा के लोग श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में लेकर पहुंचते हैं। रात्रि 12 बजे के बाद मंदिर के पट खोलकर पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद गंगा स्नान तक करवाया जाता है। यह सारा काम पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में होता है लेकिन श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक व उनके गुरु भाइयों को मंदिर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जाता है। अगले दिन भू-समाधि में पुलिस का पहरा अफसर और भी गहरा कर देते हैं। 


 

सवाल यही है कि इतना सब होने के बाद भी जिला प्रशासन के अफसरों ने अभी तक दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत या फिर सवाल-जवाब क्यों नहीं किया...? एक पक्ष ने जब कागजातों का पुलिंदा सौंप दिया है तो दूसरे पक्ष जूना अखाड़ा से कागजात अफसर क्यों नहीं ले सके हैं...? यदि जूना अखाड़े के पास कोई ठोस कागजात नहीं है तो फिर मंदिर की गद्दी पर उनका कब्जा क्यूं और किसकी शह पर हो गया ...? आखिर क्या वजह है कि प्रशासन जूना अखाड़ा के लोगों को बुला तक नहीं पा रहा है...? जबकि जूना अखाड़ा के लोगो सारी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करने पर पूरी तरह से आमादा हैं। सवाल ये भी उठता है कि यदि सबकुछ निष्पक्ष हो रहा है तो प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी एक ऐसे अफसर को इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई...? जिससे पूरे प्रकरण की जांच जल्द हो सके। जबकि वर्ष 2011 में भी जब मंदिर प्रकरण का मुद्दा गर्माया था तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने ADM & ACM को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपते हुए उनसे रिपोर्ट मांगी थी। उस समय भी जूना अखाड़ा के पदाधिकारी प्रशासनिक अफसरों को कोई कागजात नहीं दे सके थे। BSP की सरकार थी जिसकी वजह से जूना अखाड़ा को "बैकफुट" होना पड़ा था लेकिन वर्तमान में हालात कुछ और हैं। सत्ता की सरपरस्ती में ही सबकुछ हो रहा है। 


Note----तमाम खुफियां इकाइयां भी श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत की गद्दी पर छिड़े विवाद के पीछे अरबों रुपए की बेशकीमती संपत्ति को वजह मान रही हैं। एक खुफिया विंग तो इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तक सौंप चुकी है। इसमें कई अरब रुपए की संपत्ति तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर के आसपास ही स्थित है। श्रीआनंदेश्वर मंदिर और आनंदेश्वर ट्रस्ट के बीच मुकदमेंबाजी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक हुई है लेकिन हर जगह फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पक्ष में गया। हाईकोर्ट अपने आदेश में यह भी कह चुका है कि मंदिर में गुरु-शिष्य परंपरा है। मंदिर का महंत ही सभी संपत्तियों का स्वामी रहेगा। गौर करने वाली बात ये है कि इसी वजह से मंदिर के महंत की गद्दी को लेकर जूना अखाड़ा उछलकूद मचाए हुए है। श्यामगिरी के शिष्य रामदास का आरोप है कि जूना अखाड़े के लोग अरबों-खरबों रुपए की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव ठिकाने लगाने के लिए सारा कुचक्र रच रहे हैं। चूंकि मंदिर की गद्दी पर जब जूना अखाड़ा रहेगा तो यह काम बेहद आसान हो जाएगा और किसी को संपत्ति बिकने की भनक तक नहीं लगेगी।


  • बाबा घाट पर मंदिर के बाहर दी गई है ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी की भू-समाधि 
  • पहले ब्रम्हलीन हुए सभी महंतों को बाबा घाट मंदिर के अंदर दी गई थी भू-समाधि
  • पुलिस और प्रशासन की आंख के सामने करीब 1000 वर्ग से अधिक की जमीन पर कब्जा
  • कब्जा की गई अनाधिकृत भूमि की कीमत करोड़ों रुपए की बताई जा रही 
  • दो दिन से चल रहा है श्यामगिरी की समाधि के चारो तरफ लोहे की ग्रिल लगाने का कार्य
  • कुछ दिन बाद कब्जा की गई अनाधिकृत सरकारी भूमि को अपना बताएगा जूना अखाड़ा 
  • श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक बोले, "ये तो जूना अखाड़ा का पुराना इतिहास रहा है"

करीब दर्जन भर से अधिक मजदूर बाबा घाट के बाहर श्यामगिरी की समाधि स्थल के चारो तरफ लोहे की ग्रिल और जाली का निर्माण कर रहे हैं (Photo साभार Social Media)

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को बाबा घाट पर दी गई भू-समाधि के साथ-साथ जूना अखाड़े ने नया "खेल" कर दिया। श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक सोशल मीडिया पर फोटो वॉयरल करते हुए समाधिस्थल के चारो तरफ करीब 1000 वर्ग गज से अधिक की जमीन को लोहे की जाली और ग्रिल लगाकर उस पर अनाधिकृत करीके से कब्जा कर लिया गया है। ये कब्जा किसी और ने नहीं बल्कि जूना अखाड़े के लोगों ने किया है। बकौल रामदास उर्फ अमरकंटक ब्रम्हलीन महंत को पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने ही भू-समाधि दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि करोड़ों रुपए की सरकारी भूमि पर कब्जा हो गया और पुलिस व जिला प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। www.redeyestimes.com (news Portal) की छानबीन में जो जानकारियां मिली हैं, उसके मुताबिक भूमि पर कब्जे का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। कुछ काम ही शेष बचा है। स्थानीय लोगों ने दबी जुबान से कहा कि अभी सिर्फ लोहे की ग्रिल और जाली लगी है, आगे चलकर पूरा परिसर ही मंदिर में मिला दिया जाएगा। यह भूमि न तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर की है और न ही जूना अखाड़े की... फिर करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती जमीन पर क्यों और किसके इशारे पर कब्जा किया गया...? ये सबसे बड़ा "यक्ष प्रश्न" है...? 

 


श्यामगिरी के सबसे बड़े शिष्य और जूना अखाड़े से मोर्चा खोलने वाले महंत रामदास उर्फ अमरकंटक का कहना है कि ये जूना अखाड़े का पुराना इतिहास है। जब भक्त और शिष्य अपने पूज्यनीय गुरु के ब्रम्हलीन होने पर शोक में डूबा था तो जूना अखाड़े के लोग उनकी भू-समाधि के बहाने भू-भाग पर कब्जा करने की योजना बना रहे थे। रामदास उर्फ अमरकंटक का आरोप है कि सत्ता की एक "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव कानपुर पहुंचने से पहले योजना के तहत मंदिर परिसर को पूरी तरह से छावनी में क्यों तब्दील किया गया..? ये सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। रामदास का आरोप है कि क्या वहां पर कोई आतंकवादी घुसा था या फिर घुसने वाला था...? जो इतनी बड़ी तादाद में फोर्स लगा दी गई। रामदास का आरोप है कि फोर्स की तैनाती का प्रदर्शन कर भक्तों और शिष्यों को न सिर्फ खामोश रहने का संकेत दिया गया बल्कि उसी की आड़ में बाबा घाट के बाहर अनाधिकृत तरीके से जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। 


 

News Portal से बातचीत में अमरदास उर्फ कंटक महाराज ने कहा कि सदियो पुरानी परंपरा रही है कि मंदिर का महंत जब भी ब्रम्हलीन हुआ है तो उसके चेलों ने ही अंतिम संस्कार की रस्म को निभाया। सभी गुरुओं की समाधि बाबा घाट मंदिर परिसर के अंदर ही दी गई हैं तो फिर पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी की भू-समाधि क्यों और किसके इशारे पर बाबा घाट के बाहर दी गई। जबकि एक गड्ढा तो मंदिर के अंदर भी खोदा गया था तो वहां समाधि क्यों नहीं दी गई..? रामदास का आरोप है कि पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी के भू-समाधि की  आड़ में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा करना था इस लिए सदियों पुरानी परंपरा को ताक पर रखने के बाद प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने अपनी मनमानी की है। 

जूना अखाड़ा की मंदिर परिसर में हुई मीटिंग के दौरान मौजूद पदाधिकारी।

मंदिर की देखरेख के लिए पांच महंतों के नाम की घोषणा

श्यामगिरी को भू-समाधि देने के बाद जूना अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में ही Meeting की। इस अहम मीटिंग का Video (News Portal) के पास मौजूद है। मीटिंग में जूना अखाड़े के साथ-साथ मंदिर के कर्मचारी और "लोकल-वोकल" भी मौजूद थे। इस मीटिंग में आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख विस्थापन और देखरेख के लिए जूना अखाड़े की तरफ से पांच महंतों की नियुक्ति की गई। जूना अखाड़े की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करने वाले एक यू-ट्यूब चैनल ने फेसबुक पर इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए लिखा है कि आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख महंत हरिगिरी महाराज होंगे। उनके साथ चार और महंत होंगे। जिसमें महंत उमाशंकर भारती, महंत प्रेमगिरी, महंत केदार पुरी, महंत नारायाण गिरी के नाम शामिल हैं। खबर ये भी है कि इस मीटिंग के बाद जूना अखाड़े के सभी प्रमुख पदाधिकारी कानपुर से कहीं अन्यत्र के लिए रवाना हो गए। मंदिर का कामकाज अरुण पुरी के पास है। 

मंदिर में महंतों की नियुक्ति को लेकर Facebook पर Viral Post

श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट को जब शून्य मान चुका है हाईकोर्ट तो फिर दूसरे की इंट्री क्यूं..? 

इलाहाबाद हाईकोर्ट श्रीआनंदेश्वर मंदिर बनाम श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट के मुकदमें में कई दशक पहले अपना फैसला सुना चुका है। यह फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पक्ष में है। इस फैसले में हाईकोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस S.N Dwivedi और C.D Parekh ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर के हक में फैसला देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की परंपरा पर न सिर्फ मोहर लगाया बल्कि सभी संपत्तियों का अधिकार भी मंदिर के महंत के पास रहने का अधिकार दिया। खुद श्यामगिरी ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि इस फैसले के बाद ही तय हो गया था कि ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है और उसका कोई वैधानिक अस्तित्व भी नहीं है। तो फिर सवाल अब ये उठता है कि जब आनंदेश्वर ट्रस्ट ही फर्जी करार दिया जा चुका है तो फिर किसी दूसरी संस्था की इंट्री क्यों, कैसे और किस "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर हो रही है...? जूना अखाड़ा भी एक संस्था ही है। 


 



  • तीन नामजद और 9 अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की थी लूट की FIR
  • Police ने लूट की धारा 392 को चोरी की धारा 380 में किया तरमीम
  • अब जिला जज की अदालत में होगी कंटक और चेतन गिरि की जमानत पर सुनवाई
  • सत्ता और प्रशासन की मदद से मंदिर पर कब्जा करना चाहता है अखाड़ा : श्यामगिरि

श्रीआनंदेश्वर मंदिर में अपने समर्थकों के साथ महंत श्यामगिरि महाराज

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Kanpur स्थित श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट) में महंत की गद्दी को लेकर जूना अखाड़ा और महंत श्यामगिरि व उनके शिष्यों के बीच चल रही “नूरा-कुश्ती” में पर्दे के पीछे का “खेल” सत्ता के धुरंधर “खिलाड़ी” का है। इस सत्ताधारी धुरंधर “खिलाड़ी” के एक इशारे पर Kanpur Commissionerate Police ग्वालटोली थाने में श्यामगिरि के शिष्यों समेत कई लोगों के खिलाफ IPC की धारा 147, 392, 504, 506 के तहत 7 जुलाई 2021 की शाम 4.53 मिनट पर अपने रोजनामजा Deneral Diary (GD) लिखापढ़ी कर FIR रजिस्टर्ड करती है। 6 दिन बाद पुलिस श्यामगिरि को दो करीबी शिष्यों रामदास उर्फ कंटक महाराज और चेतनगिरि को Arrest कर उनके कब्जे से लूटे गए सिक्कों की बरामदगी दर्शा कर लिखापढ़ी के बाद कोर्ट में पेश करती है। जहां से निचली अदालत दोनों ही महंतों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज देती है।

कहते हैं कि "लत्ता को सांप" बनाने वाली पुलिस हमेशा आंय-बांय-सांय चलती है। मामला जब कोर्ट का हो तो Police की चाल बिल्कुल सीधी हो जाती है। यहां भी Police ने यही किया। दो महंतों की Arresting के बाद जब उसे अहसास हो गया कि Court में उसकी फजीहत होगी तो उसने तुरंत अपनी भूल में सुधार कर लिया। कहने को तो ये Police की भूल है या फिर विवेचना (जांच) का पार्ट है लेकिन हकीकत में जब आप इसे समझेंगे तो “श्रीआनंदेश्वर मंदिर” पर कब्जे को लेकर चल रही पूरी “सियासी कहानी” आपको समझ में आ जाएगी।

 

मंदिर का दानपात्र लूटने के आरोप में दो दिन पहले Arrest महंत रामदास उर्फ कंटक और चेतनगिरि।
5 दिन बाद पुलिस ने रजिस्टर्ड की FIR

श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री और मंडलेश्वर Prem Giri की तहरीर पर ग्वालटोली पुलिस ने पांच दिन बाद FIR रजिस्टर्ड की। FIR के मुताबिक 2 जुलाई 2021 वेद प्रकाश दीक्षित, हरिओम शास्त्री, मनीष शर्मा अपन 8-9 साथियों के साथ मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित मंदिर की गौशाला पहुंचते हैं और वहां पर मौजूद अखाड़ा के महंत इच्छागिरि, अरुण भारती और दीपेश्वर को धमकी देते हुए मंदिर छोड़कर भागने के लिए कहते हैं। इसके बाद सभी वापस चले जाते हैं।

FIR के मुताबिक उपरोक्त सभी आरोपित लोग मंदिर के 14 दानपात्रों को और कोठार कक्ष का ताला तोड़ कर लाखों रुपए की नकदी और सोना लूट लेते हैं। यह घटना दिनदहाड़े अंजाम दी जाती है। साथ ही वहां पर मौजूद महंतों को सभी आरोपी धमकी भी देते हैं। (जैसा की प्राथमिक रिपोर्ट में दर्ज है)।

FIR से साफ स्पष्ट है कि आरोपितों ने जो भी घटना की है वह चोरी-छिपकर नहीं की है। धमकी देना या फिर दानपात्रों को दिनदहाड़े लूट लेना मतलब साफ है कि तमाम लोगों ने इस बड़ी घटना को देखा भी होगा। तमाम से साक्ष्य भी होंगे। संभव है कि CCTV के फुटेज में भी यह वारदात कैद हुई होगी....????

अपने ही बुने “जाल” में फंस  रही Police...

विधि विशेषज्ञों के मुताबिक IPC की धारा 392 (लूट) की लिखापढ़ी तब होती है जब वारदात में दो-तीन-चार लोग शामिल रहे हों। पांच या फिर उससे अधिक लोगों के शामिल होने पर IPC की धारा 395 (डकैती) के तहत लिखापढ़ी की जाती है। साफ है कि यहां पर पुलिस से जल्दबाजी के चक्कर में चूक हुई। घटना के पांच दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने वाली पुलसि को शायद अपनी भूल का अंदाजा हो चुका था। इस लिए उसने दोनों शिष्यों को Arrest करने के बाद जब कोर्ट में पेश किया तो जांच को आधार बनाकर “कहानी” बदल दी। पुलिस ने IPC की धारा 392 को डकैती की धारा 395 में तरमीम करने के बजाय IPC की धारा 380 (चोरी) में तरमीम कर दिया। सिर्फ 392 ही नहीं पुलिस ने दर्ज की गई सभी धाराओं को तरमीम कर दिया। कोर्ट में अब पुलिस ने जो अभिलेख प्रस्तुत किए हैं उसके मुताबिक अभियुक्तों के खिलाफ IPC की धारा 380, 454, 411 120-B की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर “श्रीआनंदेश्वर मंदिर” (परमट) पर कब्जे के पीछे की “सियासी कहानी” ये है कि घटना की रिपोर्ट पुलिस 5 दिन बाद दर्ज करती है। विश्वस्त्र सूत्रों की मानें तो 6 दिन बाद 13 जुलाई को दोनों महंतों को समझौते की बात कहकर विश्वास में लिया जाता है। फिर दोनों के पहुंचते ही उनको गिरफ्तार कर लिया जाता है। इन दोनों के खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत नहीं है। दोनों के पास से पुलिस सिक्कों की बरामदगी भी कर लेती है।

जिला जज की Court करेगी जमानत पर सुनवाई

ग्वाटोली पुलिस की तरफ से गिरफ्तार कर जेल भेजे गए महंत रामदास उर्फ कंटक महाराज और चेतन गिरि की जमानत अर्जी निचली अदालत में खारिज हो गई। दोनों के अधिवक्ता ने अब जिला जज की अदालत में जमानत के ले अर्जी दाखिल की है। अधिवक्ता का कहना है कि निश्चित तौर पर ये पुलिस की तरफ से की गई बड़ी चूक है। जमानत पर बहस के दौरान वह पुलिस के इस “खेल” को उजागर करेंगे।

कौन हैं हरिओम शास्त्री और मनीष शर्मा ...???

मनीष शर्मा और हरिओम शास्त्री को मंदिर परिसर से लेकर आने वाले हजारों भक्त बखूबी जानते और पहचानते हैं। दोनों करीब 20 साल से अधिक समय से मंदिर परिसर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 10 साल पहले जब विवाद हुआ था तब तत्कालीन ADM (City) अबरार अहमद और ACM राजकुमार ने दोनों को कर्मचारी बताते हुए उनके वेतन भी बढवाए थे। मतलब साफ है कि दोनों मंदिर के कर्मचारी हैं। तीसरे आरोपी वेद प्रकाश दीक्षित उर्फ कब्बड़ के बाबत छानबीन में पता चला है कि उनका मंदिर से कोई लेना देना नहीं है। वेद प्रकाश दीक्षित मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर रहते हैं। छानबीन में पोर्टल को पता चला है कि वेद प्रकाश मंदिर के महंत श्यामगिरि के करीबी हैं। उनकी उम्र भी करीब 65 वर्ष से अधिक है।

बीमार है महंत श्यामगिरि

करीब 25 साल पहले मंदिर के महंत नियुक्त किए गए श्यामगिरि का स्वास्थ्य पिछले कई साल से खराब है। वह चलने फिरने में भी असमर्थ हैं। उनका चिकित्सकों से परमार्श लेकर उपचार करवाया जा रहा है। जूना अखाड़े की तरफ से मंदिर पर कब्जे की जानकारी पर श्यामगिरि के तमाम भक्त और समर्थक लगातार उनसे मुलाकात कर उनका साथ देने की बात भी कह रहे हैं। कुछ दिन पहले तमाम भक्त उनसे मंदिर परिसर में आकर मुलाकात भी कर चुके हैं।

गुरु-शिष्य परंपरा के तहत “कंटक” बन सकते हैं महंत

बीमार महंत श्यामगिरि के बाद श्रीआनंदेश्वर मंदिर के महंत की गद्दी पर परंपरा के तहत उनके शिष्य को ही गद्दी मिलेगी। रामदास उर्फ कंटक महाराज श्यामगिरि के शिष्यों में सबसे बड़े हैं। ऐसे में वह गद्दी के सबसे तगड़े दावेदार हैं। खबरों और चर्चाओं की मानें तो जूना अखाड़ा इसी लिए श्यामगिरि के शिष्यों और करीबी कर्मचारियों को टॉरगेट पर लिए हुए है। “सत्ता” की “कृपा” से Power और बढ़ गई है। सत्ता का यह Power सर्वोच्च बताया जा रहा है। मंदिर में आने वाले भक्तों और क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक आस्था के केंद्र श्रीआनंदेश्वर मंदिर में कब्जे को लेकर सुलग रही “चिंगारी” जल्द ही “ज्वालामुखी” का स्वरूप ले सकती है।

 

Note---- खबर के अगले अंक में जूना अखाड़ा की उत्पत्ति और मंदिर में क्या है उसके अधिकार …????

(यदि बीच में कोई डेवलमेंट नहीं हुआ तो...)