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  • बाबा घाट पर मंदिर के बाहर दी गई है ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी की भू-समाधि 
  • पहले ब्रम्हलीन हुए सभी महंतों को बाबा घाट मंदिर के अंदर दी गई थी भू-समाधि
  • पुलिस और प्रशासन की आंख के सामने करीब 1000 वर्ग से अधिक की जमीन पर कब्जा
  • कब्जा की गई अनाधिकृत भूमि की कीमत करोड़ों रुपए की बताई जा रही 
  • दो दिन से चल रहा है श्यामगिरी की समाधि के चारो तरफ लोहे की ग्रिल लगाने का कार्य
  • कुछ दिन बाद कब्जा की गई अनाधिकृत सरकारी भूमि को अपना बताएगा जूना अखाड़ा 
  • श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक बोले, "ये तो जूना अखाड़ा का पुराना इतिहास रहा है"

करीब दर्जन भर से अधिक मजदूर बाबा घाट के बाहर श्यामगिरी की समाधि स्थल के चारो तरफ लोहे की ग्रिल और जाली का निर्माण कर रहे हैं (Photo साभार Social Media)

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी को बाबा घाट पर दी गई भू-समाधि के साथ-साथ जूना अखाड़े ने नया "खेल" कर दिया। श्यामगिरी के शिष्य रामदास उर्फ अमरकंटक सोशल मीडिया पर फोटो वॉयरल करते हुए समाधिस्थल के चारो तरफ करीब 1000 वर्ग गज से अधिक की जमीन को लोहे की जाली और ग्रिल लगाकर उस पर अनाधिकृत करीके से कब्जा कर लिया गया है। ये कब्जा किसी और ने नहीं बल्कि जूना अखाड़े के लोगों ने किया है। बकौल रामदास उर्फ अमरकंटक ब्रम्हलीन महंत को पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने ही भू-समाधि दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि करोड़ों रुपए की सरकारी भूमि पर कब्जा हो गया और पुलिस व जिला प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। www.redeyestimes.com (news Portal) की छानबीन में जो जानकारियां मिली हैं, उसके मुताबिक भूमि पर कब्जे का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। कुछ काम ही शेष बचा है। स्थानीय लोगों ने दबी जुबान से कहा कि अभी सिर्फ लोहे की ग्रिल और जाली लगी है, आगे चलकर पूरा परिसर ही मंदिर में मिला दिया जाएगा। यह भूमि न तो श्रीआनंदेश्वर मंदिर की है और न ही जूना अखाड़े की... फिर करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती जमीन पर क्यों और किसके इशारे पर कब्जा किया गया...? ये सबसे बड़ा "यक्ष प्रश्न" है...? 

 


श्यामगिरी के सबसे बड़े शिष्य और जूना अखाड़े से मोर्चा खोलने वाले महंत रामदास उर्फ अमरकंटक का कहना है कि ये जूना अखाड़े का पुराना इतिहास है। जब भक्त और शिष्य अपने पूज्यनीय गुरु के ब्रम्हलीन होने पर शोक में डूबा था तो जूना अखाड़े के लोग उनकी भू-समाधि के बहाने भू-भाग पर कब्जा करने की योजना बना रहे थे। रामदास उर्फ अमरकंटक का आरोप है कि सत्ता की एक "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव कानपुर पहुंचने से पहले योजना के तहत मंदिर परिसर को पूरी तरह से छावनी में क्यों तब्दील किया गया..? ये सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। रामदास का आरोप है कि क्या वहां पर कोई आतंकवादी घुसा था या फिर घुसने वाला था...? जो इतनी बड़ी तादाद में फोर्स लगा दी गई। रामदास का आरोप है कि फोर्स की तैनाती का प्रदर्शन कर भक्तों और शिष्यों को न सिर्फ खामोश रहने का संकेत दिया गया बल्कि उसी की आड़ में बाबा घाट के बाहर अनाधिकृत तरीके से जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। 


 

News Portal से बातचीत में अमरदास उर्फ कंटक महाराज ने कहा कि सदियो पुरानी परंपरा रही है कि मंदिर का महंत जब भी ब्रम्हलीन हुआ है तो उसके चेलों ने ही अंतिम संस्कार की रस्म को निभाया। सभी गुरुओं की समाधि बाबा घाट मंदिर परिसर के अंदर ही दी गई हैं तो फिर पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी की भू-समाधि क्यों और किसके इशारे पर बाबा घाट के बाहर दी गई। जबकि एक गड्ढा तो मंदिर के अंदर भी खोदा गया था तो वहां समाधि क्यों नहीं दी गई..? रामदास का आरोप है कि पूज्यनीय गुरु श्यामगिरी के भू-समाधि की  आड़ में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा करना था इस लिए सदियों पुरानी परंपरा को ताक पर रखने के बाद प्रशासन की मौजूदगी में जूना अखाड़े ने अपनी मनमानी की है। 

जूना अखाड़ा की मंदिर परिसर में हुई मीटिंग के दौरान मौजूद पदाधिकारी।

मंदिर की देखरेख के लिए पांच महंतों के नाम की घोषणा

श्यामगिरी को भू-समाधि देने के बाद जूना अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में ही Meeting की। इस अहम मीटिंग का Video (News Portal) के पास मौजूद है। मीटिंग में जूना अखाड़े के साथ-साथ मंदिर के कर्मचारी और "लोकल-वोकल" भी मौजूद थे। इस मीटिंग में आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख विस्थापन और देखरेख के लिए जूना अखाड़े की तरफ से पांच महंतों की नियुक्ति की गई। जूना अखाड़े की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करने वाले एक यू-ट्यूब चैनल ने फेसबुक पर इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए लिखा है कि आनंदेश्वर मंदिर के प्रमुख महंत हरिगिरी महाराज होंगे। उनके साथ चार और महंत होंगे। जिसमें महंत उमाशंकर भारती, महंत प्रेमगिरी, महंत केदार पुरी, महंत नारायाण गिरी के नाम शामिल हैं। खबर ये भी है कि इस मीटिंग के बाद जूना अखाड़े के सभी प्रमुख पदाधिकारी कानपुर से कहीं अन्यत्र के लिए रवाना हो गए। मंदिर का कामकाज अरुण पुरी के पास है। 

मंदिर में महंतों की नियुक्ति को लेकर Facebook पर Viral Post

श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट को जब शून्य मान चुका है हाईकोर्ट तो फिर दूसरे की इंट्री क्यूं..? 

इलाहाबाद हाईकोर्ट श्रीआनंदेश्वर मंदिर बनाम श्रीआनंदेश्वर ट्रस्ट के मुकदमें में कई दशक पहले अपना फैसला सुना चुका है। यह फैसला श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पक्ष में है। इस फैसले में हाईकोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस S.N Dwivedi और C.D Parekh ने श्रीआनंदेश्वर मंदिर के हक में फैसला देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की परंपरा पर न सिर्फ मोहर लगाया बल्कि सभी संपत्तियों का अधिकार भी मंदिर के महंत के पास रहने का अधिकार दिया। खुद श्यामगिरी ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि इस फैसले के बाद ही तय हो गया था कि ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है और उसका कोई वैधानिक अस्तित्व भी नहीं है। तो फिर सवाल अब ये उठता है कि जब आनंदेश्वर ट्रस्ट ही फर्जी करार दिया जा चुका है तो फिर किसी दूसरी संस्था की इंट्री क्यों, कैसे और किस "अदृश्य शक्ति" के इशारे पर हो रही है...? जूना अखाड़ा भी एक संस्था ही है। 


 



  • श्रीआनंदेश्वर मंदिर और बाबा घाट पुलिस की छावनी में तब्दील 
  • व्हीलचेयर पर महंत के पार्थिव शरीर को श्रीआनंदेश्वर मंदिर में ले जाया गया 
  • जूना अखाड़े के साधु-संतों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आरंभ की 
  • श्यामगिरी के चेलों को श्रीआनंदेश्वर मंदिर के आसपास फटकने भी नहीं दिया गया

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को व्हील चेयर पर लेकर श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में जाते जूना अखाड़ा के साधु-संत

Yogesh Tripathi

श्रीआनंदेश्वर मंदिर (परमट), कानपुर के ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी महाराज का पार्थिव शरीर Monday की रात्रि करीब 11 बजे Kanpur पहुंचा। एंबुलेंस के जरिए उनके पार्थिव शरीर को लाया गया। व्हील चेयर पर ब्रम्हलीन महंत के पार्थिव शरीर को रखकर श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर में ले जाया गया। इससे पहले किसी भी बवाल और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कानपुर कमिश्नर रेट पुलिस की तरफ से श्रीआनंदेश्वर मंदिर परिसर और बाबा घाट को छावनी में तब्दील कर दिया। श्यामगिरी के शिष्यों को मंदिर परिसर के आसपास तक फटकने नहीं दिया गया। 12 बजे के बाद पार्थिव शरीर को भू-समाधि देने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। 

 

ब्रम्हलीन महंत श्यामगिरी का पार्थिव शरीर

गौरतलब है कि दो दिन पहले श्याम गिरि की देहरादून के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को सबसे पहले हरिद्वार स्थित श्रीजूना अखाड़ा ले जाया गया था। यहां पर साधु-संतों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद श्यामगिरी के पार्थिव शरीर को एबुंलेंस के जरिए Kanpur लाया गया। पार्थिव शरीर के साथ श्यामगिरी का नाती राहुल और श्रीजूना अखाड़ा के साधु-संत ही मौजूद रहे। www.redeyestimes.com (News Portal) महंत के ब्रम्हलीन होने की खबर सबसे पहले प्रकाशित करते हुए श्रीआनंदेश्वर मंदिर में जूना अखाड़ा और श्यामगिरी के शिष्यों के बीच चल रही पुरानी "महाभारत" को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। News Portal की खबर को संज्ञान में लेते हुए पुलिस के आला अफसरों ने पूरे हालात समझा और सुरक्षा व्यवस्था को चौकस कर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी ताकि किसी भी प्रकार के टकराव को टाला जा सके।

 

श्रीआनंदेश्वर मंदिर के बाहर मौजूद भारी पुलिस बल

इस बीच जैसे ही सूचना मिली कि श्यामगिरी का पार्थिव शरीर श्रीआनंदेश्वर मंदिर पहुंचने वाला है। जिला पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती मंदिर परिसर के आसपास पुख्ता कर दी। पार्थिव शरीर व्हील चेयर से श्रीआनंदेश्वर महाराज के दरबार में ले जाया गया। वहां दर्शन कराने के बाद उनके पार्थिव शरीर को गंगा दर्शन को घाट ले जाया गया। उसके बाद एंबुलेंस से सिविल लाइंस स्थित बाबा घाट ले जाया गया। यहां पर शव आश्रम में अंतिम दर्शन को रखा गया। ब्रम्हलीन महंत के पार्थिव शरीर पहुंचने की सूचना मिलते ही भक्त उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। जूना अखाड़ा की तरफ से बताया जा रहा है कि वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोपहर बाद ब्रम्हलीन महंत को भू-समाधि दी जाएगी। इस दौरान श्रीआनंदेश्वर मंदिर के पट सोमवार तक बंद रक्खा गया है। 

 


  • चकेरी में मालिक को जेल भेजवाया फिर मकान पर कब्जा करवाया
  • जेल में बंद मकान मालिक की बेटी को भी उठवाया, अब तक सुराग नहीं
  • Court के आदेश पर दर्ज मुकदमें में चकेरी पुलिस चुकी है Final Report
  • पीड़ित लड़की ने कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए 164 के बयान
  • पहले भी कई बार यौन शोषण कर चुका है आरोपी दिनेश त्रिपाठी

 

Rape का आरोपी रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी (फोटो साभार--Google)

Yogesh Tripathi

13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ Rape के मामले में Arrest होकर सलाखों के पीछे गए चर्चित रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर Dinesh Tripathi ने गुनाहों की लंबी चादर ओढ़ रखी है। दिनेश त्रिपाठी ने जिस रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मचारी को चरस के आरोप में जेल भेजवाने के बाद मकान पर कब्जा किया था, उसकी नाबालिग बेटी पिछले कई साल से “गुमशुदा” है। पीड़ित ने Court के आदेश पर बेटी का अपहरण करने की रिपोर्ट दिनेश त्रिपाठी के खिलाफ दर्ज कराई थी लेकिन चकेरी पुलिस Dinesh Triparhi के रसूख के आगे पस्त हो गई। पुलिस ने मामले में Final Report लगाकर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। तमाम खुलासे होने के बाद पुलिस कमिश्नर (CP) असीम अरुण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी केसों की समीक्षा कराने के बाद दोबारा फाइलों को खोलने की बात कही है।

मामला करीब 18 साल पुराना है। Kanpur Dehat निवासी शिव सिंह एयरफोर्स के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। शिव सिंह का चकेरी में एक मकान है। आरोप है कि दिनेश त्रिपाठी ने वर्ष 2003 में उसके मकान पर कब्जा कर लिया। मकान बचाने के लिए जब उन्होंने कानूनी लड़ाई का सहारा लिया तो दिनेश त्रिपाठी ने पुलिसिया रसूख के दम पर उनके खिलाफ एक के बाद एक करीब दर्जन भर मुकदमें दर्ज करवा दिए। वह खुद को बचाने के लिए बैकफुट पर आ गए। आरोप है कि वर्ष 2013 में दिनेश त्रिपाठी ने उसे 10 किलो चरस के साथ जेल भेजवा दिया था। भारी मात्रा में चरस उसके पास से फर्जी ढंग से पुलिस ने बरामद करवा दी थी।

 


शिव सिंह का आरोप है कि उनके जेल जाने के कुछ महीना बाद ही उनकी 8 साल की बेटी भी लापता हो गई। चूंकि वह जेल में थे और कोई पैरवी करने वाला था नहीं। इस लिए बेटी की सुरागरशी नहीं हो पाई। बकौल शिव सिंह 2018 में कोर्ट के आदेश पर चकेरी थाने में दिनेश त्रिपाठी के खिलाफ अपहरण का मुकदमा पंजीकृत करवाया। आरोप है कि चकेरी पुलिस Dinesh Tripathi के रसूख के आगे नतमस्तक हो गई और Final Report लगाकर फाइल बंद कर दी। शिव सिंह का आरोप है कि उनकी बेटी को गायब कराने में दिनेश त्रिपाठी का ही हाथ है। 


 

नाबालिग बच्ची से पहले भी किया था Rape

Rape पीड़ित नाबालिग लड़की ने गुरुवार को कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने CRPC 164 का बयान दर्ज करवाया। बताया जा रहा है कि पीड़िता ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। जिसमें दिनेश त्रिपाठी पर लंबे समय से यौन शोषण की बात भी शामिल है। पीड़ित परिवार की मानें तो जान से मारने की धमकी देकर दिनेश त्रिपाठी लड़की के साथ लंबे समय से अश्लीलता कर रहा था। कई बार उसने रेप भी किया। लड़की के विरोध करने पर उसने जान से मारने और जिंदगी को बर्बाद करने की धमकी भी दी। घटना वाले दिन पीड़िता की मां ने शोर सुनकर दिनेश त्रिपाठी को रंगे हाथ पकड़ लिया।

Mobile पर गिड़गिड़ाता रहा Dinesh Tripathi

जिस चकेरी थाने में एक दशक पहले तैनाती के दौरान दिनेश त्रिपाठी हेकड़ी और रंगबाजी के साथ मकानों पर कब्जा करता था, उसी थाने में जब वह रेप का आरोपी बना तो उसकी सारी खुमारी उतर गई। पीड़ित परिवार के मुताबिक घटना के बाद वह मौके से चला गया। उसके बाद उसने पीड़िता की मां को मोबाइल कर माफी मांगनी शुरु कर दी। उसने पैर छूने और दोबारा ऐसी हरकत न करने की कसम भी खाई। चकेरी पुलिस का कहना है कि आडियो की रिकार्डिंग पुलिस के पास है। पुलिस विवेचना के दौरान उसे साक्ष्य के तौर पर न्यायालय में पेश करेगी।

“पुलिस कमिश्नर (CP) असीम अरुण का कहना है कि कई पुराने मामले प्रकाश में आ रहे हैं। सभी की समीक्षा कराने के बाद इन केसों की फाइल दोबारा खोली जाएगी। ताकि नए सिरे से मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही इसके लिए विशेष टीम का गठन किया जाएगा। जिसकी निगरानी DCP रैंक के अधिकारी करेंगे”।

 


Saurabh Bajpai

Assistant Professsor 

(Delhi University)

कई प्रभाव अक्सर अनजाने और अनायास आते  हैं। Uttar Pradesh (Congress) के ऊपर धुर कम्युनिज्म का यह प्रभाव भी संभवतः अनजाना और अनायास है। अनजाना इसलिए कि शायद इसकी प्रामाणिक ख़बर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचने नहीं दी जाती है, या फिर पहुँचने पर उसकी भ्रामक व्याख्या कर दी जाती है।

 

अनायास इस लिए कि भले ही ऐसा करना किसी का सायास उद्देश्य न हो, लेकिन बेहद यांत्रिक तरीके से यह होता चला जा रहा है। हो सकता है कि Uttar Pradesh (Congress) में यह हस्तक्षेप एक सुषुप्त संगठन में फ़ौरी तौर पर कुछ हरकत पैदा करे, आख़िरकार यह आत्मघाती सिद्ध होगा। जिस संगठन को लंबे समय तक पोषण और उपचार की जरूरत है, स्टेरॉयड देकर उसके शरीर को कृत्रिम रूप से फुलाना ख़तरे से ख़ाली नहीं है।

 

कम्युनिस्ट पार्टियों से कांग्रेस में आये तमाम युवाओं का स्वागत करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस सौरमंडल (पिछली पोस्ट में वर्णित) में उन्हें एक “निश्चित समय” तक किसी पेरिफ़ेरी (परिधि) पर ही रखना चाहिए था। यह “निश्चित समय”  दरअसल एक मेटामॉर्फ़ोसिस या कायापलट की प्रक्रिया है जिसमें कोई भी नए संगठन की ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद की कंडीशनिंग करता है।

 

जिन लोगों को कम्युनिस्ट पार्टियों के डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म का अंदाज़ा है, वो जानते हैं कि इसने ख़ुद कम्युनिस्ट पार्टियों का कितना नुकसान किया है। इस तरह की तमाम अन्य प्रवृत्तियाँ कांग्रेस में आने वाले लोगों में अगर बची रह गयी हो तो कांग्रेस संगठन का भी बेड़ाग़र्क कर सकती हैं।  

 

स्वाभाविक रूप से एक ख़ास किस्म की राजनीतिक ट्रेनिंग आपका समूचा व्यक्तिव गढ़ती है। इसका प्रभाव कैडर की राजनीतिक विचारधारा पर ही नहीं बल्कि दुनिया को समझने के नज़रिये, रोजमर्रा की भाषा, राजनीतिक तेवर और सामाजिक व्यवहार पर भी बहुत गहराई से पड़ता है।

 

लेफ़्ट और राईट यानी दोनों ही कैडर आधारित संगठनों, जहाँ बहुत कड़ा राजनीतिक प्रशिक्षण होता है, पर ख़ासतौर से यह बात लागू होती है। थोड़े समय तक वामपंथ या दक्षिणपंथ के प्रभाव में आये लोगों पर यह बात लागू नहीं होती है। लेकिन जिनका समूचा वैचारिक विकास इन सगठनों के साए में होता है, उनके व्यक्तित्व में उनकी ट्रेनिंग दूध और पानी की तरह घुल जाती है।

 

कोई भी व्यक्ति नयी पार्टी कब ज्वाइन करता है ? पहली वजह— किसी अच्छे अवसर की तलाश में कोई अपने मूल्यों, आस्थाओं और विचारों से समझौता कर ले। सामान्य भाषा में इसे “अवसरवाद” तथा वामपंथी शब्दावली में “समझौतावाद” या “संशोधनवाद” कहा जाता है।

 

दूसरी, जब उसे अहसास हो जाये कि उसकी मूल पार्टी अपनी समकालीन चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है या हो चुकी है। ऐसी स्थिति में वो एक नयी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करने का निश्चय करता है। नए राजनीतिक परिवेश, संस्कृति और परंपरा के साथ तारतम्य बिठाने के लिए वो या तो अपनी मूल स्थापनाओं को तिलांजलि देता है या फिर उनको चुनौती देते हुए एक नयी विचारधारात्मक यात्रा पर निकल पड़ता है।

 

इस यात्रा की बुनियादी शर्त ही यह है कि व्यक्ति नया सोचने और नया सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार है। राजनीतिक दृष्टि से कहें तो यही उसके मेटामॉर्फ़ोसिस या कायापलट की शुरुआत है। कई लोग इस प्रक्रिया का सामना करने से हिचकते हैं और राजनीतिक रूप से निष्क्रिय हो जाते हैं।

 

कम्युनिस्ट पॉलिटिक्स के कई लोग इस ‘डॉग्मा’ को तोड़ नहीं पाते और ख़ुद को महज़ बौद्धिक गतिविधियों तक समेट लेते हैं। क्योंकि लम्बे समय तक गाँधीजी को “मैस्कॉट ऑफ़ बुर्जुआज़ी” और “जोनाह ऑफ़ रेवोलुशन” मानने के बाद अचानक उनमें एक क्रांतिकारी की खोज एक जटिल और लम्बी बौद्धिक प्रक्रिया है।

 

इसलिए धुर कम्युनिज्म की रेडिकल ट्रेनिंग से निकलकर वाया अन्ना आन्दोलन और आम आदमी पार्टी Uttar Pradesh (Congress)  पर कब्ज़े की कोशिशों की इंटेलेक्चुअल ट्रेजेक्टरी (वैचारिक प्रक्षेपपथ), गाँधी-नेहरू का प्रतिबद्ध शिष्य होने के नाते, ट्रेस करना एक ख़ालिस राजनीतिक सवाल है, व्यक्तिगत नहीं। यह तय है वैचारिक कायापलट के बिना किसी पार्टी संगठन पर आकर प्रभुत्व जमाने की कोई सतही कोशिश अर्थ का अनर्थ कर देती है।

 

ऐसे समझिये कि कोई पुरानी पार्टी का दिल-दिमाग और गुर्दा लाकर नयी पार्टी के शरीर में ज़बरदस्ती फिट करने की कोशिश करे और मरीज़ की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली जाए। कांग्रेस की गाँधीवादी और नेहरूवादी छवि के नीचे जाने-अनजाने Uttar Pradesh (Congress)  की एक ऐसी सर्जरी चल रही है जो दरअसल पोस्टमॉर्टेम न बन जाए, यही चिंता है।

 

Note---ये लेखक के निजी विचार हैं।

-BJP की फजीहत कराने के बाद “गहरी नींद” से जागा हाईकमान

-गुरुवार को जिला मंत्री पद से हटाया गया था नारायण भदौरिया

-नोएडा में गिरफ्तारी के बाद BJP ने किया “नारायण” निष्कासित

Yogesh Tripathi

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अंतत: अपने “नारायण” से मुंह मोड़ना ही पड़ गया। BJP संगठन पर धब्बा लगाने वाला नारायण सिंह भदौरिया अब पुलिस के शिकंजे में है। फ्राइ-डे की दोपहर पुलिस ने उसे नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। उसके गिरफ्तारी की खबर मिलते ही भाजपा ने भी अपने “नारायण” से हाथ छुड़ा लिया। हाईकमान का फरमान आया और दक्षिण जिलाध्यक्ष ने लैटर पैड पर पेन से निष्कासन की चार लाइनें लिखकर सोशल मीडिया में वॉयरल कर दीं। निष्कासन का यह पत्र Viral होते ही थेथरई और बेशर्मी के साथ कल तक नारायण भदौरिया के साथ खड़े रहने वाले उसके समर्थकों के खेमें में मानों “वज्रपात” गिर गया। लेकिन BJP के अंदर एक खेमे में खुशी की लहर भी दौड़ गई।

आरोपितों के खिलाफ विरोधी खेमे ने की जोरदार "बैटिंग"

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दरअसल यह खेमा घटना वाले दिन से नारायण भदौरिया समेत सभी आरोपितों की घेराबंदी कर उनका “शिकार” करने में जुट गया था। काफी हद तक भाजपा का यह खेमा सफल भी रहा। उसके पीछे की वजह ये है कि इस कांड में शहर पुलिस की काफी फजीहत हो रही थी, लिहाजा गिरफ्तारी तो बनती थी। वो एक अलग बात है कि धाराओं में “बाजीगरी” पहले ही दिन हो गई थी। घटना के 24 घंटे बाद भी बीजेपी और उसके तमाम नेता व कार्यकर्ता मजबूती के साथ नारायण सिंह भदौरिया के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। घटना के बाद यह बताया गया कि नारायण भदौरिया मौजूद ही नहीं था लेकिन जब वीडियो में वह दिखा तो कहानी में तमाम तरह के ट्विस्ट आए। सोशल मीडिया की वजह से यह कांड नेशनल टीवी चैनलों पर भी छाया रहा। राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने मामले को संज्ञान में लिया। तल्ख तेवरों में नाराजगी जाहिर की गई तो निष्कासन कर दिया गया। 


 

हाईकमान के "सिग्नल" पर जिलाध्यक्ष ने किया निष्कासित

चर्चाओं और खबरों की माने तो UPBJP के कई नेता दिल्ली हाईकमान को तर्क-कुतर्क के साथ पिछले 24 घंटे से बचाव में “कहानी” गढ़ते नजर आए। हालांकि प्रदेश नेतृत्व अपनी गढ़ी “कहानी” से दिल्ली हाईकमान को संतुष्ट नहीं कर पाया। नतीजा अब सबके सामने है। इस बीच कई Video सोशल मीडिया में Viral हुए। जिसकी वजह से गढ़ी “कहानी” में छेद साफ नजर आने लगा। हाईकमान की फटकार के बाद लोकल संगठन बैकफुट पर आ गया। यही वजह रही कि पुलिस ने नारायण सिंह भदौरिया समेत अब तक पांच लोगों को Arrest कर लिया। अभी तक पुलिस की दबिशों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। उसके गिरफ्तारी की भनक लगते ही तुरंत BJP (South) की प्रेसीडेंट डॉक्टर बीना आर्या ने नारायण के निष्कासन का पत्र जारी कर दिया।


गिरफ्तारी की पुष्टि के लिए मीडिया के पास घनघनाए फोन

नारायण सिंह भदौरिया की समेत 4 लोगों के Arresting की खबर सोशल मीडिया में फ्राइ-डे की दोपहर ही वॉयरल होने लगी। पुष्टि के लिए बीजेपी नेता मीडिया के लोगों को फोन करते नजर आए। www.redeyestimes.com (News Portal) ने बीजेपी के खांटी कार्यकर्ताओं और नेताओ से बातचीत की। सबका सिर्फ एक ही जवाब था, “खांटी के कार्यकर्ताओं को पिछले कई साल से खूंटी पर टांग दिया गया है”। कार्यकर्ता निराश और हताश है। सपा, बसपा जैसे विपक्षी दलों से आए नेता और कार्यकर्ता वर्तमान समय में “मलाई” खा रहे हैं। 20-25 और 30 साल तक भाजपा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने के बाद भी भाजपा के मूल कैडर के कार्यकर्ताओं को अब तरजीह ही नहीं दी जाती है। 


 

दबी जुबान से ही सही लेकिन कई नेताओं ने यह अवश्य कहा कि भाजपा में नारायण जैसे कई और भी हैं। जिनके पास पद तो नहीं है लेकिन वह नेताओं के ईर्द-गिर्द डेरा जमाए रहते हैं। उनकी हनक किसी बड़े नेता से कम नहीं दिखती। नारायण के बाबत कई नेताओं ने कहा कि एक “क्षत्रप” की “छतरी” के नीचे खूब फला और फूला नारायण। एक बड़े नेता ने कहा कि बर्रा, चकेरी और नौबस्ता समेत कई जगहों पर विवादित प्रापर्टी का कारोबार किसी से छिपा नहीं है। आखिर “छतरी” नहीं रही तो वह कैसे यह कारनामें लंबे समय से कर रहा था ? भाजपा में और भी नेता है लेकिन वो जहां पर थे वहीं पर हैं। 


 

आखिर “नारायण” पर ही पिछले एक दशक से इतनी मेहरबानी क्यों और किसने दिखाई ? BJP में कोई तो होगा इस “नारायण” का “गुरु” ? शीर्ष नेतृत्व को इसकी भी जांच करानी चाहिए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। खबरों और चर्चाओं की मानें तो घटना के तुरंत बाद से ही BJP का एक ताकतवर और मजबूत धड़ा प्रशासन के साथ खड़ा नजर आया। परोक्ष और अपरोक्ष तौर पर लामबंदी कर इस धड़े ने आरोपितों की करतूतों और उनके अपराधिक इतिहास के साथ कमजोर कड़ियों को उजागर किया। 

कुल मिलाकर यूं कहें कि “क्षत्रप” के विरोधी खेमे ने बेहद ही शातिराना अंदाज में अंदर ही अंदर आरोपितों के खिलाफ शासन और प्रशासन स्तर पर जोरदार “बैटिंग” की। दिल्ली हाईकमान तक पूरे घटनाक्रम के बाबत न सिर्फ जानकारियां साझा की बल्कि कई कारगुजारियों के आडियो और वीडियो भी Send किए गए। कुछ वीडियो तो सोशल मीडिया पर तेजी से वॉयरल हो रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद से इस खेमें के अंदर काफी खुशी की लहर है। सूत्रों की मानें तो लंबे समय से यह खेमा “बैकफुट” पर था। लेकिन विधान सभा चुनाव से पहले इस खेमे को मानो “संजीवनी” मिल गई है।

कट्टरवादी हिन्दू छवि के एक दिग्गज नेता ने कहा इस घटना से पार्टी शर्मशार हुई है। जनता के पास खराब मैसेज चला गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में शीर्ष नेतृत्व को आत्ममंथन अवश्य करना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई दूसरा नारायण पार्टी के अंदर रहकर इस तरह की शर्मनाक और अपराधिक वारदात को अंजाम न दे सके।