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  • महिला लेखपाल और राजस्व कर्मचारी की अब पुलिस भी करेगी जांच
  • जांच पूरी कर एक महीने में Report कमिश्नर को देंगे मातहत
  • पैरवी करने पर दबंगों ने कचहरी में रोककर पीड़ित को दी थी धमकी
  • दो दिन पहले DM ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई
  • पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लेकर गृहसचिव तक की शिकायत
  • रजिस्टर्ड वसीयत को दरकिनार कर रजिस्ट्री कराने का मामला


Central Desck (Kanpur)

रजिस्टर्ड वसीयत और दान-विलेख पत्र को दरकिनार कर अवैध तरीके से कृषि भूमि का बैनामा कराने और जानमाल की धमकी देने वाले सिस्टमबाजमहिला लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे व उनके गुर्गों की जांच अब Kanpur Police भी करेगी। पुलिस कमिश्नर (कानपुर) अखिल कुमार ने जांच Report एक महीने के अंदर देने का निर्देश मातहतों को दिया है। उल्लेखनीय है कि DM (Kanpur Nagar)  राकेश कुमार सिंह ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर 15 दिन के अंदर Report देने का आदेश दो दिन पहले ही दे चुके हैं। DM ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। SDM & ACP कमेटी में सदस्य हैं। पहले डीएम फिर पुलिस कमिश्नर की तरफ से प्रकरण में जांच का आदेश दिए जाने के बाद राजस्व विभाग में कार्यरत भ्रष्ट और सिस्टमबाजकर्मचारियों व लेखपालों के बीच हड़कंप का माहौल है।


ग्राम कला का पुरवा, (रामपुर भीमसेन), थाना सचेंडी, कानपुर निवासी संदीप सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी दादी स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा ने प्रार्थी व उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह को अपनी कृषि भूमि की रजिस्टर्ड वसीयत 31/05/2013 को की थी। स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला ने 17/07/2013 को पंजीकृत दान विलेख के जरिए अन्य भूमि/संपत्तियों के साथ-साथ एक और ग्राम सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या 207/1.0990 हेक्टेयर तथा रामपर भीमसेन स्थित आराजी संख्या 895/1.7580 हेक्टयर की भी लिखापढ़ी की थी। दादी की रजिस्टर्ड़ वसीयत और दान विलेख के जरिए मिली संपत्तियों का प्रार्थी संदीप सिंह, उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह निर्विवाद रूप से मालिक हैं और अभी तक उक्त संपत्तियों की देखरेख व कृषि योग्य भूमि पर खेती करते आ रहे हैं।

पीड़ित संदीप कुमार सिंह

संदीप सिंह का आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी W/O रघुवीर सिंह ने इस वसीयत के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिवीजन (कानपुर नगर) की कोर्ट में मूलवाद संख्या 2550/2013 राजपति देवी बनाम बीरेंद्र सिंह आदि का वाद दाखिल किया। बाद में श्रीमती राजपति ने खुद ही यह वाद कोर्ट में वापस ले लिया। राजपित देवी ने दादी स्वर्गीय मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा के पंजीकृत दान विलेख के खिलाफ सिविल जज (जूनियर डिवीजन) / एफ.टी.सी कोर्ट में मूलवाद संख्या 1368/2013 को प्रस्तुत किया। इस वाद को भी श्रीमती राजपति देवी ने कोर्ट में मौजूद रहकर वाद को वापस ले लिया।

संदीप सिंह का आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी और राजकुमारी देवी ने प्रार्थी की दादी स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला के रजिस्टर्ड वसीयत को छिपाकर धोखाधड़ी करते हुए उक्त कृषि योग्य भूमि को अपने नाम सरकारी अभिलेखों में चढ़वाने के लिए नायब तहसीलदार (बिठूर) की कोर्ट में वाद हल्का लेखपाल अरुणा दिवेदी मकान नंबर 14-B बाबा नगर नौबस्ता, कानपुर और तहसील राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे S/O स्वतंत्र कुमार दुबे R/O एलआइजी 17, दयानंद विहार फेस-1, कल्याणपुर, कानपुर नगर की साठगांठ से प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रार्थी के मुकदमें अलग कोर्ट में चल रहे थे। जिसे भी राजकुमारी और राजपित देवी ने नायब तहसीलदार (बिठूर) कोर्ट से छिपा लिया। नायब तहसीलदार (बिठूर) की कोर्ट ने एक पक्षीय आदेश 11/03/2024 राजपति देवी और राजकुमारी के पक्ष में सुनाते हुए भूमि को उनके नाम पर सरकारी अभिलेखों में अंकित करने का आदेश जारी किया।

चूंकि स्थानीय लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्माचारी आलोक दुबे की की साठगांठ पहले से थी, इस लिए नायब तहसीलदार (बिठूर) कोर्ट ने 11/03/2024 जब एक पक्षीय आदेश दिया तो राजपति देवी, राजकुमारी ने स्थानीय लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे को उसी दिन अर्थात 11/03/2024 को फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आराजी संख्या 895 का जुज रक्बा 0.3070 का दोनों के हक में बैनामा कर दिया। 12/03/2024 को राजकुमारी देवी ने राजपति के हक में अवैध तौर पर दानपत्र भी निष्पादित कर दिए। इतना ही नहीं श्रीमती राजपति ने अन्य आराजियों का भी अवैध तौर पर विक्रय अनुबंध पत्र अरुणा व आलोक के हक में कर दिया।

संदीप सिंह का आरोप है कि करीब पांच महीने बाद स्थानीय लेखपाल रहीं अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे ने उपरोक्त सभी भूमि 06/08/2024 को कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी करते हुए सभी कागजातों को वैध बताकर मालिकाना हक आर.एन.जी इंफ्रा R/O 15/78 सिविल लाइंस कानपुर नगर के भागीदार अमित गर्ग S/O स्वर्गीय प्रेम नारायण गर्ग से साठगाठ करके एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत फर्जी विक्रयनामा आर.एन.जी इंफ्रा के पक्ष में विक्रयनामा निष्पादित कर विक्रय कर दिया।

आरोप है कि इसी तरह लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्माचारी आलोक दुबे ने प्रार्थी संदीप सिंह व अन्य परिजनों की ग्राम सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या 207 रक्बा 0.5495 हेक्टेयर का कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से दिनांक 16/05/2024 को अपने हक में फर्जी विक्रय पत्र निष्पादित करवा लिया। जबकि उपरोक्त आराजी संख्या 207 पर श्रीमती राजपति देवी और राजकुमारी का किसी भी प्रकार का मालिकाना हक नहीं था।

Sandeep Singh का आरोप है कि राजपति देवी, राजकुमारी देवी ने अपने परिजनों और लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्मचारी आलोक दुबे व अमित गर्ग ने आपसी सांठगांठ कर सुनियोजित षडयंत्र के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त करने की नीयत से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों को तैयार कर उपरोक्त सभी भूमि का बैनामा करवा लिया। सभी लोगों ने गिरोह बनाकर कूटरचित कागजातों के जरिए न सिर्फ फर्जी बैनामा करवाया बल्कि प्रार्थी व उसके परिजनों को आर्थिक और मानसिक अपूर्णनीय भी पहुंचाई है। जिसके लिए उपरोक्त सभी लोग जिम्मेदार हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में Sandeep Singh ने आरोप लगाया है कि लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्मचारी आलोक दुबे एक संगठित गिरोह बनाकर सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए भू-माफियाओं और सफेदपोश लोगों का रुपया लगवा कर जमीनों की खरीद-फरोक्त का धंधा भी करते हैं। आलोक दुबे ने बिठूर में रिंगरोड के पास कई बीघा भूमि अपने परिजनों के नाम पर पहले खरीदी और बाद में उसकी बिक्री की। कुछ जगहों का मुआवजा भी उठा लिया।

संदीप सिंह का आरोप है कि लेखपाल अरुणा दिवेदी पूर्व में अपने इस तरह के क्रियाकलापों की वजह से निलंबित भी की जा चुकी हैं। शिकायती पत्र में संदीप सिंह ने आरोप लगाया है कि जब अपने भूमि से संबंधित मामलों की पैरवी के लिए जब दो महीना पहले कचेहरी सदर तहसील पहुंचे तो लेखपाल अरुणा दिवेदी, तहसील कर्मचारी आलोक दुबे ने अपने करीब दर्जन भर अपराधिक मानसिकता वाले गुर्गों के साथ उसे रोक लिया। सभी ने प्रार्थी को मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए कहा कि पैरवी करना छोड़ दो वर्ना जान से हाथ धो बैठेगो। 

शासन और प्रशासन हमारा है और हमारे ही इशारों पर नाचता है। भविष्य में यदि फिर कचहरी या तहसील के आसपास दिख गए तो लाश का भी पता नहीं चलेगा। उसके बाद तुम्हारे परिवार को बर्बाद कर दूंगा। दबंगों की धमकी के बाद प्रार्थी को काफी सदमा लगा और वह काफी समय तक बीमार रहा। प्रार्थी का चिकित्सकीय इलाज अब भी चल रहा है। प्रार्थी ने इस बाबत एक शिकायती पत्र 16/10/2024 को कोतवाली थाना (कानपुर नगर) में दिया लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। जिसकी वजह से दबंगों के हौसले बुलंद हैं।

  • UP Government ने 7 सीनियर EPS Officer's का किया ट्रांसफर 
  • वर्ष 1991 बैच के IPS Officer हैं नए पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड
  • Kanpur में बतौर SSP काम कर चुके हैं बीपी जोगदंड
  • कानपुर के निवर्तमान पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा को प्रतीक्षारत रखा गया
  • राजधानी Lucknow के पुलिस कमिश्नर D.K Thakur को भी शासन ने हटाया 

बीपी जोगदंड (पुलिस कमिश्नर ऑफ कानपुर)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Government ने शासन स्तर पर बड़ा भारी फेरबदल करते हुए 7 सीनियर IPS Officer's के ट्रांसफर कर दिए। शासन ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर D.K Thakur और कानपुर के पुलिस कमिश्नर Vijay Singh Meena का ट्रांसफर करते हुए दोनों को वेटिंग (प्रतिक्षा) सूची में डाल दिया है। वर्ष 1991 बैच के IPS Officer बीपी जोगदंड को कानपुर कमिश्रनर रेट पुलिस की कमान सौंपी गई है। श्रीजोगदंड अभी तक पुलिस मुख्यालय में (अपर पुलिस महानिदेशक ) के पद पर कार्यरत थे। बीपी जोगदंड Kanpur से पूर्व परिचित हैं। वह करीब दो दशक पहले SSP (Kanpur) रह चुके हैं। उनका कार्यकाल बेहद बढ़िया था। तब उन्होंने बेसिक पुलिसिंग पर फोकस किया था। कानपुर में बतौर SSP तैनाती के दौरान श्रीजोगदंड ने उस समय नकारा और रिश्वतखोर पुलिस कर्मियों को कभी बख्शा नहीं, फिर वो चाहे सत्ता या किसी अफसर का खास रहा हो। बीपी जोगदंड ने अपनी तैनाती के दौरान तमाम शातिर अपराधियों के खिलाफ भी अभियान छेड़ा रक्खा था। बिना किसी सिफारिश के वह मेहनती मातहतों को थाने और चौकी का चार्ज दे देते थे। श्रीजोगदंड मृदुभाषी होने के साथ-साथ अपनी बेहद खास मुस्कान के लिए् भी जाने जाते हैं। उनकी यह मुस्कान उनके मातहतों के बीच चर्चा का विषय रहती है। BP Jogdand की गिनती Uttar Pradesh के Best IPS Officer में होती है। 

 


सूत्रों की मानें तो 3 जून 2022 को शहर में हुए दंगे के बाद से ही पूर्व पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा का ट्रांसफर तय माना जा रहा था। www.redeyestimes.com (News Portal) ने दंगे के बाद ही पुलिस कमिश्नर के देर-सबेर ट्रांसफर किए जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस दंगे को खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया था। यही वजह रही कि उन्होंने दंगे के कुछ घंटे बाद ही Lucknow से IPS Officer डॉक्टर अजय पाल शर्मा को Kanpur का डैमेज कंट्रोल करने के लिए रवाना कर दिया था। इस दंगे में कई पुलिस वालों की भूमिका को लेकर तमाम तरह की अंगुलियां उठी थीं। शहर का माहौल ठंडा होते ही पूर्व कमिश्ननर को शासन ने हटाकर उन्हें वेटिंग (प्रतिक्षा सूची) में डाल दिया। इसी तरह लखनऊ के पुलिस कमिश्नर D,K Thakur को भी शासन ने हटाते हुए उन्हें वेटिंग में रखा है। उनकी जगह वर्ष 93 बैच के IPS Officer सीबी शिरोडकर को लखनऊ का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है।

  • मुख्तार बाबा, बिल्डर हाजी वसी और D-2 गैंग के अतीक खिचड़ी समेत कई पर गैंगस्टर की कार्रवाई 
  • पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस में दी कार्रवाई की जानकारी 
  • BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद शहर में हुआ था दंगा
  • दंगा भड़काने के आरोप में पुलिस पांच दर्जन लोगों को कर चुकी है Arrest 
  • दंगे की जांच फिलहाल शासन की तरफ से गठित SIT Team कर रही है 

Yogesh Tripathi

BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद Uttar Pradesh के Kanpur में 3 जून 2022 को हुए दंगे के मॉस्टर माइंड हयात जफर हाशमी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कार्रवाई पुलिस ने की है। Kanpur Police ने दंगे में फंडिंग करने वाले बाबा बिरयानी, बिल्डर हाजी वसी, D-2 गैंग के शूटर अतीक खिचड़ी और शफीक के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई की है। सभी आरोपी जेल में बंद हैं। जिला प्रशासन ने कार्रवाई के दस्तावेजों का तामीला जिला कारागार में करवा दिया है। यह जानकारी कानपुर पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा और जिलाधिकारी विशाख जी ने यह जानकारी मीडिया से साझा की। पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने कहा कि दंगे के अन्य आरोपितों के खिलाफ भी जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

दंगे में दंगाइयों को रकम फंडिंग करने वाला बिल्डर हाजी वसी
SIT कर रही है कानपुर दंगे की जांच

3 जून 202 को कानपुर के दादामिया चौराहे और नई सड़क पर हुए दंगे की जांच में दर्जन भर से अधिक लोग घायल हुए थे। दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव करने के बाद फायरिंग कर बमबाजी तक की थी। जिस दिन यह दंगा हुआ था, उस समय शहर की सीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी Kanpur Dehat जनपद में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी थी। देश भर की बड़ी खुफिया एजेंसियों ने शहर और आसपास के जिलों में डेरा डाल रक्खा था। उसके बाद भी किसी को दंगे के साजिश की हवा तक नहीं लगी। हालांकि कुछ घंटे में ही जिला प्रशासन ने बड़े डैमेज को किसी तरह कंट्रोल कर लिया लेकिन पुलिस और तमाम खुफिया एजेंसियों की कार्यशैली पर अंगुलियां उठीं। मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल दो IPS Officer's कानपुर रवाना किए गए। दोनों अफसरों ने कई दिन तक हिंसाग्रस्त एरिया में डेरा डालकर तमाम जानकारियां एकत्र की। इस बीच मुख्यमंत्री ने SIT गठित कर दी।  SIT ने जांच शुरु की तो साजिश के पीछे कई बड़े नाम निकलकर आए। मुख्तार उर्फ बाबा बिरयानी से लेकर शहर के चर्चित बिल्डर हाजी वसी तक का कनेक्शन निकला। रही-सही कसर D-2 गैंग के गुर्गों का नाम आने से पूरी हो गई। पुलिस ने सभी को Arrest कर सलाखों के पीछे भेज दिया। जांच के दौरान एक बात ये भी निकलकर सामने आई कि Kanpur के तमाम सफेदपोश लोगों के कनेक्शन इन दंगाइयों और उनको रकम फंडिंग करने वाले कुख्यात लोगों से हैं। हालांकि उनकी गिरेबान तक पुलिस के हाथ अभी तक नहीं पहुंचे हैं। 

दंगे का मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी
माहौल बिगाड़ने के पीछे था चंद्रेश्वर हाते को खाली कराना 

SIT ने जांच की तो दंगे के पीछे की तमाम साजिशों की परतें उधड़ने लगीं। जांच में इस बात का पता चला कि उपद्रव के पीछे मुस्लिम आबादी में स्थित चंद्रेश्वर हाते को खाली कराना भी साजिशकर्ताओं की प्राथमिकता में था। चंद्रेश्वर हाते पर पिछले कई साल से मुस्लिम बिल्डरों की निगाहें "गिद्ध" सरीखी जमीं हैं। दूसरा यह कि मुस्लिम आबादी के बीच स्थित चंद्रेश्वर हाते में अधिकांशतः हिन्दू वर्ग के लोग रहते हैं। सजिश यह थी कि दंगे के बाद जब कत्लेआम होगा तो हाते में रह रहे हिन्दू वर्ग के लोग डर की वजह से औने-पौने दामों पर अपना हिस्सा बिक्री कर देंगे। यही वजह रही कि दंगा करने के लिए चंद्रेश्वर हाते के पास की सड़क को मुफीद माना गया। यहीं पर पत्थरबाजी कर बवाल की शुरुआत की गई थी।  

मुख्तार बाबा, वसी और D-2 की तिकड़ी ने दिया दंगे को अंजाम 

SIT Team की जांच में इस बात का भी पता चला कि शहर का चर्चित बाबा बिरयानी वाला लंबे समय से शत्रु संपत्ति की खरीद-फरोख्त कर रहा है। शहर के कुछ सफेदपोश के जरिए वह चंद्रेश्वर हाते पर लंबे समय से टॉरगेट कर रहा था लेकिन सफल नहीं हो सका। इस लिए उसने बिल्डर हाजी वसी से हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर शहर के सबसे खतरनाक और खूंखार D-2 गैंग के अतीक खिचड़ी और शफीक को भी जोड़ लिया। इसके बाद दंगे का "ब्लूप्रिंट" तैयार किया गया। शहर को दंगे की आग में कैसे झोंकना है इसकी कमान जौहर फैंस एसोशिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी को सौंपी गई। BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद सभी को मौका मिला। हयात जफर ने बंदी का ऐलान कर उसे वापस ले लिया लेकिन इस बीच जुमा के बाद बाजार को बंद कराने के लिए हजारों की भीड़ जमा हो चुकी थी। दरसल ये भीड़ किराए की थी। मोटी रकम देकर इस भीड़ को एकत्र करने का काम हयात जफर करने के बाद बवाल होते ही हयात जफर भाग निकला था। लेकिन बाद में उसे Locknow में एक यू-ट्यूबर के दफ्तर से धर दबोचा गया। 



 

-CRPC की कुछ धाराओं में मिले हैं Police को मजिस्ट्रेटी अधिकार

-सहायक पुलिस आयुक्त और अपर पुलिस आयुक्त को दी गई ट्रेनिंग

-Lucknow में ट्रेनिंग के बाद Police Line में बनी अस्थाई अदालत


 

Yogesh Tripathi

 

Kanpur में पुलिस आयुक्त प्रणाली (Kanpur Commissionerate) लागू है। CRPC की कुछ धाराओं में ACP और उससे बड़े पद के अफसरों को मजिस्टिरियल अधिकार (Magisterial Authority) भी दिए गए हैं। इसे क्रियान्यिवत कराने के लिए आलोक सिंह (सहायक पुलिस आयुक्त), बसंत लाल (सहायक पुलिस आयुक्त) और चार हेड कांस्टेबल (HC) को Lucknow में तीन दिन की ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के दौरान Court से संबंधित प्रक्रिया, प्रपत्र आदि के बारे में जानकारी दी गई।

Police Line में अस्थाई कोर्ट में 31/3/2021 (आज से) कार्यवाही Start होगी। CRPC की धारा 151 के तहत Arrest व्यक्तियों को पुलिस अब इस कोर्ट में पेश करेगी। अभी तक शांतिभंग की धारा में गिरफ्तार व्यक्तियों को कलेक्ट्रेट परिसर में अपर नगर मजिस्ट्रेट (ACM) अदालतों में पेश किया जाता था।

जल्द ही Kanpur Commissionerate के CP & ACP स्तर के सभी Police Officer’s को भी CRPC और अन्य धाराओं में न्यायिक प्रक्रिया के बाबत ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही सभी के Office में Court की व्यवस्था भी की जाएगी। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, सभी ACP & DCP कोर्ट कार्य करना Start कर देंगे।

 

Kanpur Commissionerate में नियुक्त Police Officer’s के Mobile No.

 


-Agra Range के IG ए. सतीश गणेश होंगे वाराणसी के पुलिस कमिश्नर

-चार और IPS Officer’s की Kanpur Police Commissionerate में तैनाती की

-94 बैच के IPS Officer है Police Commissioner Of Kanpur 

-पिता श्रीराम अरुण रह चुके हैं UP Police के Ex.DGP

 


Yogesh Tripathi

वर्ष 1994 बैच के IPS Officer असीम अरुण को Uttar Pradesh की Yogiadityanath सरकार ने Police Commissioner Of Kanpur बनाया है। असीम अरुण Kanpur के पहले पुलिस कमिश्नर होंगे। Agra (Range) के IG ए.सतीश गणेश को शासन ने Varanasi का पुलिस कमिश्नर बनाया है। शासन ने कई IPS Offcer’s के ट्रांसफर भी किए हैं। Kanpur Commissionerate में चार IPS Officer’s के नामों की घोषणा फ्राइ-डे की सुबह शासन ने कर दी है।

ए. सतीश गणेश (पुलिस कमिश्नर) वाराणसी 
UP Police की रीढ़ कहे जाने वाले IPS Officer असीम अरुण का जन्म 1970 में बदांयू जनपद में हुआ था। इत्रनगरी Kannauj के मूल निवासी असीम अरुण के पिता श्रीराम अरुण UP Police के Ex.DGP रह चुके हैं। मां शशि अरुण जानी-मानी Writer हैं। असीम अरुण ने Lucknow के सेंट फ्रांसिस कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। Delhi के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन (BSC) की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद असीम अरुण ने सिविल सर्विसेज की तैयारी कर परीक्षा दी। सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) में हो गया। 

Ex. PM मनमोहन सिंह की सुरक्षा में रहे हैं तैनात

असीम अरुण Ex. PM मनमोहन सिंह के सुरक्षा की जिम्मेदारी को भी संभाल चुके हैं। वह SPG के Close Protection Team के Head थे। इसके अलावा असीम अरुण SPG, NSG और CBI जैसी एजेंसियों में भी अपनी सेवाएं देश के लिए दे चुके हैं।

SWAT Team का किया गठन

2009 में अलीगढ़ जनपद में तैनाती के दौरान असीम अरुण न देश की पहली जिला स्तरीय Special Weapons and Tactics Team (SWAT) गठित की। स्वॉट टीम आतंकी और खतरनाक मिशन के मद्देनजर गठित की जाती है। इसके बाद आगरा में जब DIG बनकर पहुंचे तो वहां भी असीम अरुण ने Swat Team गठित की।

असीम अरुण Uttar Pradesh के हाथरस,बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, आगरा, अलीगढ़ और गोरखपुर में SP City/DIG भी रह चुके हैं। Lucknow लखनऊ एटीएस में भी कार्यभार संभाला। Police Commissioner Of Kanpur बनने से पहले वह UP-112 में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) थे।

ISIS आतंकी सैफुल्लाह का किया Encounter

असीम अरुण कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्कॉवयड (UP ATS) में तैनात थे। Kanpur के चकेरी थाना एरिया स्थित KDA Colony निवासी ISIS आतंकी सैफुल्लाह बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए राजधानी Lucknow के एक मकान में छिपा था। ATS की कमांडो टीम के साथ असीम अरुण ने सैफुल्लाह को लखनऊ के ठाकुरगंज मोहल्ले में घेरकर मार गिराया। सैफुल्लाह को Encounter में ढेर करने के बाद असीम अरुण खासे चर्चा में आ गए।