• मुख्तार बाबा, बिल्डर हाजी वसी और D-2 गैंग के अतीक खिचड़ी समेत कई पर गैंगस्टर की कार्रवाई 
  • पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस में दी कार्रवाई की जानकारी 
  • BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद शहर में हुआ था दंगा
  • दंगा भड़काने के आरोप में पुलिस पांच दर्जन लोगों को कर चुकी है Arrest 
  • दंगे की जांच फिलहाल शासन की तरफ से गठित SIT Team कर रही है 

Yogesh Tripathi

BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद Uttar Pradesh के Kanpur में 3 जून 2022 को हुए दंगे के मॉस्टर माइंड हयात जफर हाशमी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कार्रवाई पुलिस ने की है। Kanpur Police ने दंगे में फंडिंग करने वाले बाबा बिरयानी, बिल्डर हाजी वसी, D-2 गैंग के शूटर अतीक खिचड़ी और शफीक के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई की है। सभी आरोपी जेल में बंद हैं। जिला प्रशासन ने कार्रवाई के दस्तावेजों का तामीला जिला कारागार में करवा दिया है। यह जानकारी कानपुर पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा और जिलाधिकारी विशाख जी ने यह जानकारी मीडिया से साझा की। पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने कहा कि दंगे के अन्य आरोपितों के खिलाफ भी जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

दंगे में दंगाइयों को रकम फंडिंग करने वाला बिल्डर हाजी वसी
SIT कर रही है कानपुर दंगे की जांच

3 जून 202 को कानपुर के दादामिया चौराहे और नई सड़क पर हुए दंगे की जांच में दर्जन भर से अधिक लोग घायल हुए थे। दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव करने के बाद फायरिंग कर बमबाजी तक की थी। जिस दिन यह दंगा हुआ था, उस समय शहर की सीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी Kanpur Dehat जनपद में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी थी। देश भर की बड़ी खुफिया एजेंसियों ने शहर और आसपास के जिलों में डेरा डाल रक्खा था। उसके बाद भी किसी को दंगे के साजिश की हवा तक नहीं लगी। हालांकि कुछ घंटे में ही जिला प्रशासन ने बड़े डैमेज को किसी तरह कंट्रोल कर लिया लेकिन पुलिस और तमाम खुफिया एजेंसियों की कार्यशैली पर अंगुलियां उठीं। मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल दो IPS Officer's कानपुर रवाना किए गए। दोनों अफसरों ने कई दिन तक हिंसाग्रस्त एरिया में डेरा डालकर तमाम जानकारियां एकत्र की। इस बीच मुख्यमंत्री ने SIT गठित कर दी।  SIT ने जांच शुरु की तो साजिश के पीछे कई बड़े नाम निकलकर आए। मुख्तार उर्फ बाबा बिरयानी से लेकर शहर के चर्चित बिल्डर हाजी वसी तक का कनेक्शन निकला। रही-सही कसर D-2 गैंग के गुर्गों का नाम आने से पूरी हो गई। पुलिस ने सभी को Arrest कर सलाखों के पीछे भेज दिया। जांच के दौरान एक बात ये भी निकलकर सामने आई कि Kanpur के तमाम सफेदपोश लोगों के कनेक्शन इन दंगाइयों और उनको रकम फंडिंग करने वाले कुख्यात लोगों से हैं। हालांकि उनकी गिरेबान तक पुलिस के हाथ अभी तक नहीं पहुंचे हैं। 

दंगे का मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी
माहौल बिगाड़ने के पीछे था चंद्रेश्वर हाते को खाली कराना 

SIT ने जांच की तो दंगे के पीछे की तमाम साजिशों की परतें उधड़ने लगीं। जांच में इस बात का पता चला कि उपद्रव के पीछे मुस्लिम आबादी में स्थित चंद्रेश्वर हाते को खाली कराना भी साजिशकर्ताओं की प्राथमिकता में था। चंद्रेश्वर हाते पर पिछले कई साल से मुस्लिम बिल्डरों की निगाहें "गिद्ध" सरीखी जमीं हैं। दूसरा यह कि मुस्लिम आबादी के बीच स्थित चंद्रेश्वर हाते में अधिकांशतः हिन्दू वर्ग के लोग रहते हैं। सजिश यह थी कि दंगे के बाद जब कत्लेआम होगा तो हाते में रह रहे हिन्दू वर्ग के लोग डर की वजह से औने-पौने दामों पर अपना हिस्सा बिक्री कर देंगे। यही वजह रही कि दंगा करने के लिए चंद्रेश्वर हाते के पास की सड़क को मुफीद माना गया। यहीं पर पत्थरबाजी कर बवाल की शुरुआत की गई थी।  

मुख्तार बाबा, वसी और D-2 की तिकड़ी ने दिया दंगे को अंजाम 

SIT Team की जांच में इस बात का भी पता चला कि शहर का चर्चित बाबा बिरयानी वाला लंबे समय से शत्रु संपत्ति की खरीद-फरोख्त कर रहा है। शहर के कुछ सफेदपोश के जरिए वह चंद्रेश्वर हाते पर लंबे समय से टॉरगेट कर रहा था लेकिन सफल नहीं हो सका। इस लिए उसने बिल्डर हाजी वसी से हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर शहर के सबसे खतरनाक और खूंखार D-2 गैंग के अतीक खिचड़ी और शफीक को भी जोड़ लिया। इसके बाद दंगे का "ब्लूप्रिंट" तैयार किया गया। शहर को दंगे की आग में कैसे झोंकना है इसकी कमान जौहर फैंस एसोशिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी को सौंपी गई। BJP प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद सभी को मौका मिला। हयात जफर ने बंदी का ऐलान कर उसे वापस ले लिया लेकिन इस बीच जुमा के बाद बाजार को बंद कराने के लिए हजारों की भीड़ जमा हो चुकी थी। दरसल ये भीड़ किराए की थी। मोटी रकम देकर इस भीड़ को एकत्र करने का काम हयात जफर करने के बाद बवाल होते ही हयात जफर भाग निकला था। लेकिन बाद में उसे Locknow में एक यू-ट्यूबर के दफ्तर से धर दबोचा गया। 



 

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