Articles by "Murder Case"
Murder Case लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

  • Jhansi में शनिवार अलसुबह Encounter में मारा गया कुख्यात
  • Kanpur में तीन साल पहले हुई BSP नेता पिन्टू सेंगर की हत्या था आरोपी
  • भाड़े पर हत्याएं करने में Expert था राशिद कालिया उर्फ घोड़ा
  • मऊरानीपुर एरिया में शूटर ने STF पर भी दागीं गोलियां
  • Dy.SP & Inspector को लगीं लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाया
  • लंबे समय से Kanpur के चकेरी एरिया को बना रक्खा था अपना ठिकाना


Yogesh Tripathi

लंबे समय से आतंक का पर्याय बने खूंखार अपराधी राशिद उर्फ कालिया उर्फ घोड़ा उर्फ वीरू का शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) ने काम तमाम कर दिया। भाड़े पर हत्याएं करने के लिए कुख्यात इस शार्प शूटर को UPSTF ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। कालिया उर्फ घोड़ा पर 1.25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। Kanpur में तीन साल पहले चकेरी थाना एरिया में दिनदहाड़े BSP नेता पिन्टू सेंगर की हत्या के मामले में राशिद कालिया उर्फ घोड़ा का नाम आया। FIR में राशिद उर्फ कालिया आरोपी भी था। लंबे समय से शहर पुलिस को उसकी तलाश थी लेकिन सपेदपोशों से तगड़े नेटवर्क की वजह से राशिद कालिया हमेशा बचता रहा। मुखबिर की सटीक सूचना जब STF ने झांसी के मऊरानीपुर में उसकी घेराबंदी की तो कालिया ने STF Team पर ही गोलियों की बौंछार कर दी। गोलियां STF के Dy.SP संजीव दीक्षित और Inspector घनश्याम यादव को लगी। गनीमत ये रही कि दोनों Officer’s ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रक्खी थी, जिसकी वजह से कोई अनहोनी नहीं हुई। STF की क्रॉस फायरिंग में गोली राशिद कालिया को लगी। गंभीर हालत में उसे उपचार के लिए मऊरानीपुर सीएचसी ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। झांसी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने कालिया को मृत घोषित कर दिया। 



STF के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) अमिताभ यश के निर्देश पर मातहत इनामी और भाड़े पर हत्या करने वाले दुर्दांत अपराधियों की धरपकड़ के लिए लंबे समय से विशेष अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में जरिए मुखबिर सवा लाख रुपए के इनामी दुर्दांत अपराधी के बारे में मालुमात होने पर STF के Dy.SP संजीव दीक्षित और Inspector घनश्याम यादव ने टीम के साथ बुन्देलखंड के झांसी में डेरा डाल दिया। शनिवार सुबह मुखबिर के इशारे पर STF ने मऊरानीपुर के पास शातिर की घेराबंदी की तो उसने ताबड़तोड़ फायरिंग Start कर दी। बदमाश की तरफ से चलाई गई गोली टीम का नेतृत्व कर रहे Sanjeev Dixit (Dy.SP) और Ghanshyam Yadav (Inspector) को लगीं। दोनों ही अफसर चूंकि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने हुए थे, इस लिए गोलियां उनके शरीर को छू नहीं पाई। 


इसके बाद STF ने स्वचालित असलहों से फायरिंग की। गोली बदमाश को लगी और वह गिर पड़ा। लहूलुहान हालत में STF बदमाश को मऊरानीपुर सीएचसी लेकर पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद कालिया को झांसी मेडिकल कालेज ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मारे गए बदमाश की पहचान राशिद कालिया उर्फ घोड़ा उर्फ वीरू के रूप में हुई। STF के मुताबिक राशिद कालिया भाड़े पर हत्या करने के लिए झांसी पहुंचा था। राशिद कालिया के पास से एक फैक्ट्री मेड पिस्टल, दो मैग्जीन, .315 बोर का देशी कट्टा. एक मोटरसाइकिल और कुछ कारतूस बरामद हुए हैं।


2020 में बसपा नेता पिन्टू सेंगर की हत्या की

भाड़े पर हत्याएं करने में Expert शातिर अपराधी राशिद कालिया उर्फ घोड़ा ने 2020 में Kanpur के चकेरी थाना एरिया में बड़ी वारदात कर सनसनी फैला दी थी। कालिया उर्फ घोड़ा ने हिस्ट्रीशीटर से राजनीति में एंट्री लेने वाले बसपा नेता पिन्टू सेंगर को उनके ही घर के बाहर गोलियों की बौंछार कर मौत की नींद सुला दिया था। इस हत्याकांड में कई आरोपी जेल में हैं। एक हाईकोर्ट से जमानत के बाद बाहर आ चुका है। पप्पू स्मार्ट की भी हाईकोर्ट से जमानत तो हो गई लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) में निरुद्ध होने की वजह से वह अभी भी जेल में ही है। Pintu Sengar Murder Case में आरोपी होने के बाद भी राशिद कालिया को Kanpur Police Arrest नहीं कर पाई थी। यही वजह रही कि उसके सिर पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित था। शहर के कई थानेदार लंबे समय से राशिद कालिया की तलाश कर रहे थे लेकिन किसी को कालिया उर्फ घोड़ा की परछाई तक देखने को नहीं मिली। करीब तीन साल चार महीने बाद STF ने न सिर्फ कालिया उर्फ घोड़ा को खोज निकाला बल्कि उसका खात्मा भी कर दिया।

कालिया उर्फ घोड़ा ने झांसी में किया 1St Murder

दर्जनों लोगों की भाड़े पर हत्या करने वाला खूंखार अपराधी राशिद उर्फ कालिया मूलत: बुन्देलखंड के महोबा जनपद का निवासी था। वर्ष 2009 में उसने झांसी जनपद में भाड़े पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। मुकदमा अपराध संख्या 261/2009 IPC की धारा 364-A, 302, 201, 12/14 UPDA Act में राशिद कालिया आरोपी है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से झांसी पुलिस उसे कभी Arrest नहीं कर सकी। राशिद कालिया को Arrest करने में नाकाम झांसी पुलिस ने बाद में उसके सिर पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। झांसी में सनसनी फैलाने के बाद राशिद कालिया ने Kanpur को अपना ठिकाना बनाया। यहां उसकी मुलाकात शहर पुलिस के लिए लंबे समय से मुखबिरी कर रहे D-2 गैंग को तबाह करने वाले शातिर बदमाश से हो गई। उसके बाद राशिद उर्फ कालिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने भाड़े पर Kanpur और आसपास के एरिया में कई हत्याएं की। खासियत ये रही कि किसी भी हत्या में उसका नाम तक नहीं आया। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो हत्या के समय राशिद कालिया के साथ जाने वाले शूटर्स भी नहीं जानते थे कि उसके साथ जो व्यक्ति मौजूद है वो आखिर है कौन...???

कालिया ने मारी थीं पिन्टू को सबसे अधिक गोलियां

20 जून 2020 को कानपुर के चकेरी थाना एरिया में बसपा नेता पिन्टू सेंगर को घेरकर गोलियां मारने वालों में राशिद कालिया प्रमुख था। उसने पिन्टू सेंगर को कई गोलियां मारी थीं। पिन्टू पर गोलियों की बौंछार के बाद जब हमलावर भागे तो राशिद कालिया ने पीछे मुड़कर देखा कि पिन्टू किसी तरह खड़ा होकर कार में बैठने की कोशिश कर रहा है। दुस्साहसी राशिद कालिया ने अपनी बाइक तुरंत मुड़वा दी और पिन्टू सेंगर पर फिर से फायरिंग की। पिस्टल की मैग्जीन खाली करने के बाद उसने अपना सबसे भरोसेंद असलहा .315 बोर का कट्टा निकाल लिया और पिन्टू के सीने पर गोली मार दी। बताया जा रहा है कि शरीर से ताकतवर पिन्टू ने राशिद का कट्टा हाथ से पकड़ लिया था। पिन्टू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके हाथों में जलने की पुष्टि हुई थी। 

बताते हैं कि कालिया को फैक्ट्री मेड पिस्टल पर कम विश्वास रहता था। इसी लिए वह अपने साथ .315 बोर का तमंचा हमेशा रखता था। पिन्टू की हत्या के बाद राशिद उर्फ कालिया फरार हो गया। पिन्टू हत्याकांड में पप्पू स्मार्ट और तीन भाड़े के हत्यारों समेत कई लोगों को पुलिस ने उठाया। कुछ को पुलिस ने छोड़ भी दिया। इसके बाद D-2 गैंग के जानी दुश्मन टायसन को भी पुलिस ने Arrest कर जेल भेजा लेकिन राशिद कालिया को पुलिस छू भी नहीं पाई। चर्चाओं पर विश्वास करें तो Kanpur में कई साल पहले काकादेव थाना एरिया में एक मुस्लिम कोचिंग संचालक की हत्या समेत कई बड़ी घटनाओं में राशिद उर्फ कालिया शामिल था लेकिन न तो कभी उसका नाम उजागर हुआ और न ही चेहरा। पिन्टू सेंगर हत्याकांड में पहली बार उसका चेहरा सामने आया और नाम भी उजागर हुआ।  

 

 

 

 

 

  • Murder Case में वर्ष 2020 से फरार था राम किशोर
  • आशनाई में हत्या कर शव घाघरा नदी में फेंका था
  • Gonda के उमरी बेगमगंज थाना एरिया में STF ने दबोचा
  • STF के इंस्पेक्टर Ghanshyam Yadav की अगुवाई में टीम को सफलता

 


Yogesh Tripathi

उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) टीम ने हत्या के मामले में करीब ढाई साल से फरार चल रहे 50 हजार के इनामी Wanted को गोंडा जनपद में Arrest कर लिया। STF ने इनामिया के पास से नकदी, फोन, एटीएम कार्ड और बैंक का ग्रीन कार्ड बरामद किया है। गोंडा जनपद के उमरी बेगमगंज थाने में STF की टीम उससे पूछताछ कर रही है।

STF के हत्थे चढ़ा राम किशोर तिवारी

 

UPSTF को यह सफलता ADG (STF) अमिताभ यश के निर्देश पर  DIG (STF) अनंत देव तिवारी के कुशल पर्यवेक्षण में DSP (STF) संजीव दीक्षित की देखरेख में मिली। STF इनामिया Wanted की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चला रही है।  

 

 

50 हजार के इनामी को Arrest करने वाली टीम के साथ STF इंस्पेक्टर घनश्याम यादव

वर्ष 2020 में अवैध संबंधों के चक्कर में अभियुक्त राम किशोर तिवारी ने सह अभियुक्तों के साथ मिलकर राजवीर उर्फ राजू निवासी परास पट्टी मझवार, थाना उमरी बेगमगंज जनपद (गोंडा) का Murder कर उसके शव को घाघरा नदी में फेंक दिया था। परिजनों की तहरीर के आधार पर गोंडा जनपद की पुलिस ने 1/9/2020 को मुकदमा अपराध संख्या 184/2020 IPC की धारा 302/201 के तहत FIR रजिस्टर्ड कर शव को नदी से रिकवर कर लिया।

गोंडा पुलिस ने हत्याकांड में शामिल सभी अभियुक्तों को Arrest कर जेल भेज दिया लेकिन रामकिशोर तिवारी पकड़ में नहीं आया। STF के मुताबिक हत्याकांड के बाद रामकिशोर तिवारी फरार हो गया। Delhi (NCR) क्षेत्र में वह चोरी छिपे रहकर गार्ड की नौकरी करने लगा। बीच-बीच में वह गोंडा आता-जाता रहा लेकिन पुलिस को भनक नहीं लगी। वकील के जरिए वह मुकदमें की पैरवी भी करवा रहा था। इस बीच उसकी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस ने रामकिशोर के सिर पर इनाम घोषित कर दिया।

लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब गोंडा पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी तो STF Team को सक्रिय किया गया। इंस्पेक्टर घनश्याम यादव की अगुवाई में STF ने मुखबिरों का तंत्र सक्रिय किया। जरिए मुखबिर सूचना मिली कि हत्यारोपित राम किशोर तिवारी मुकदमें की पैरवी के लिए वकील से मिलने पहुंचा है। मुखबिर की सूचना पर विश्वास कर STF इंस्पेक्टर घनश्याम यादव अपनी टीम के साथ गुरुवार शाम को घेराबंदी कर Arrest करने पहुंचे। STF की सूचना पर उमरी बेगम थाने के थानाध्यक्ष संजीव वर्मा भी फोर्स के साथ पहुंच गए।

STF Team ने उमरी बेगमगंज थाना पुलिस के सहयोग से दानपुर चौराहा के निकट पी.डी बंधा (हनुमानगढ़ी मंदिर) के सामने चबूतरे पर बैठे राम किशोर तिवारी को धर दबोचा। राम किशोर ने बताया कि वह वकील से मिलने के बाद गांव जाने के लिए किसी साधन का इंतजार कर रहा था। राम किशोर तिवारी को Arrest करने वाली टीम में STF इंस्पेक्टर घनश्याम यादव, हेड कांस्टेबल दिलीप यादव, हेड कांस्टेबल कुलदीप सिंह, मुकेश प्रजापति और गिरिजा शंकर शामिल रहे।

 

 

  • Crime Branch Team ने सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा को भी किया गिरफ्तार
  • दोनों हत्यारोपितों से Crime Branch (Gorakhpur) कर रही है पूछताछ
  • फरार हत्यारोपित पुलिस कर्मियों की तलाश में Kanpur Police भी दे रही है दबिश


Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Gorakhpur जनपद के होटल में Kanpur के कारोबारी Manish Gupta की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या करने वाले Wanted सस्पेंड इंस्पेक्टर J.N Singh और फलमंडी चौकी इंचार्ज रहे सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा को Crime Branch (Gorakhpur) ने Arrest कर लिया है। Crime Branch दोनों को गोपनीय जगह रखकर पूछताछ कर रही है। जल्द ही दोनों हत्यारोपियों को Kanpur (SIT) के सुपुर्द कर दिया जाएगा ताकि मामले की जांच आगे बढ़ सके। फरार चल रहे चार अन्य हत्यारोपी पुलिस कर्मियों की तलाश में Gorakhpur के साथ-साथ Kanpur Police की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। सूत्रों की मानें तो दोनों पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी शासन के कड़े निर्देश के बाद की गई है।

 


सरेंडर करने की फिराक में था "नगद नारायण सिंह"

नगद नारायण सिंह के नाम से कुख्यात हत्यारोपी सस्पेंड इंस्पेक्टर J.N Singh गिरफ्तारी के भय से कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी कर चुका है। गिरफ्तार सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा भी समर्पण की तैयारी में था। इस बीच शासन ने हत्यारोपी पुलिस कर्मियों को हर कीमत पर गिरफ्तार करने का निर्देश जारी किया। जिसके बाद कानपुर और गोरखपुर पुलिस की टीमें सक्रिय हो गईं। सर्विलांस सेल से लोकेशन ट्रेस होने के बाद दोनों को गोरखपुर में Crime Branch ने धर दबोचा। सूत्रों की मानें तो जे.एन सिंह ने सरेंडर करने से पहले कई बड़े वकीलों से संपर्क भी किया था। चर्चा है कि कई अधिवक्ताओं ने तो उसका केस लड़ने से ही मना कर दिया था जिसकी वजह से वह तय समय पर सरेंडर नहीं कर सका। बताया जा रहा है कि शातिर दिमाग इंस्पेक्टर जेएन सिंह कोर्ट की छुट्टी वाले दिन सरेंडर करने की फिराक में था ताकि वह वकीलों के गुस्से से बच सके।  

गिरफ्तार हत्यारोपी सस्पेंडर इंस्पेक्टर J.N Singh

होटल कृष्णा पैलेस में वसूली करने पहुंची थी पुलिस

Kanpur के बर्रा-2 निवासी रियल स्टेट कारोबारी Manish Gupta गुरुग्राम निवासी अपने दो दोस्तों के साथ गोरखपुर कारोबार के सिलसिले में गए थे। मनीष अपने दोस्तों के साथ होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात रामगढ़ ताल कोतवाल जेएन सिंह फोर्स के साथ होटल पहुंचे। तलाशी और छानबीन के दौरान मनीष की कहासुनी पुलिस वालों से हुई। जिसके बाद पुलिस वालों ने मनीष को अलग कमरे में लेकर जाकर मारपीट की। सिर में भारी वस्तु के प्रहार से मनीष की मौत हो गई।

Police Officer’s ने पहले मातहतों को बचाने के लिए कहानी गढ़कर कहा कि भागते समय गिरकर मनीष की मौत हो गई। मनीष शराब के नशे में था लेकिन मनीष की पत्नी के मोबाइल और होटल में लगे CCTV ने मनीष के खून से सने हत्यारी रामगढ़ पुलिस के करतूतों की पोल खोलकर रख दी। सोशल मीडिया पर किरकिरी होने के बाद अफसरों ने इंस्पेक्टर समेत छह पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर पत्नी की तहरीर पर सभी के खिलाफ हत्या की FIR रजिस्टर्ड करवाई। अब तक की छानबीन में स्पष्ट हो चुका है कि होटल के कर्मचारियों की मिलीभगत से हत्यारोपी इंस्पेक्टर फोर्स के साथ वसूली करने पहुंचा था लेकिन मनीष से विवाद के बाद पुलिस कर्मियों ने उसकी पिटाई कर दी। जिससे मनीष की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर केस की विवेचना कानपुर ट्रांसफर हो चुकी है। Kanpur (SIT) अब मनीष मर्डर केस की जांच कर रही है। हत्यारोपी पुलिस कर्मियों पर दो दिन पहले 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। 24 घंटा पहले ही यह इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी गई थी।

  • Police ने गैर इरादतन हत्या की धारा 304 को 302 में किया तरमीम
  • गैर इरादतन हत्या में नामजद आरोपी पत्नी Preeti को मिली क्लीन चिट
  • लाइसेंसी राइफल से Manoj Dwivedi ने बेटे पर दागी थी गोली
  • फरार हत्यारोपित पिता को जल्द Arrest करेगी बिधनू पुलिस

लाल घेरे में Kamal Dwivedi की हत्या का आरोपी उसका ही पिता Manoj Dwivdi

Yogesh Tripathi

करीब दो सप्ताह बाद Kanpur Police ने बिधनू थाना एरिया में Kamal Dwivedi के मौत की मिस्ट्री को सुलझा लिया।  Forensic Expert Team की जांच के बाद बिल्कुल साफ हो गया कि लाइसेंसी राइफल से Kamal पर गोली किसी और ने नहीं बल्कि उसके पिता Manoj Dwivedi ने ही दागी थी। पुलिस ने गैरइरादतन हत्या की धारा IPC 304 को 302 में तरमीम करते हुए कमल की पत्नी को क्लीन चिट दे दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच में कमल की पत्नी Preeti की कोई भूमिका नहीं मिली है। बेटे की हत्या का आरोपी Manoj Dwivedi फिलहाल फरार है। पुलिस का दावा है कि उसे जल्द से जल्द Arrest कर लिया जाएगा। 

Kamal Dwivedi (File Photo)

धोखे से नहीं, जानबूझकर दागी गोली

बिधनू पुलिस की जांच में एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई कि वारदात की रात लाइसेंसी राइफल से गोली छीनाझपटी के दौरान नहीं बल्कि जानबूझकर मारी गई थी। बिधनू के पहाड़पुर में 23 सितंबर की रात प्रॉपर्टी डीलर Manoj Dwivedi (Bablu का घर में विवाद हुआ था। विवाद के दौरान मनोज के बेटे Kamal Dwivedi (28) की गोली लगने से मौत हो गई थी। कमल की मौत के बाद मनोज मौके से फरार हो गया था। मनोज की पत्नी ने पति मनोज और बहू प्रीति के खिलाफ तहरीर देकर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा पंजीकृत कराया था।

गीता का दावा था कि उनका बेटा कमल Suicide करने के लिए लाइसेंसी राइफल निकाल लाया था। पति और बहू ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन छीनाझपटी में गोली चल गई। जिससे कमल की मौत हो गई। वहीं, गीता की बहू प्रीति ने भी पुलिस को तहरीर देकर ससुर पर पति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया था।

Forensic Report के बाद पुलिस ने तरमीम की धारा

कमल की हत्या के बाद से बिधनू पुलिस और अफसरों की तरफ से की जा रही कार्रवाई को लेकर तमाम तरह के सवाल खड़े हो रहे थे। आरोपी ने भी खुद को बचाने के लिए अपने Power का भरपूर इस्तेमाल किया। लेकिन Forensic Expert Team की Report के बाद बिल्कुल साफ हो गया कि कमल की मौत एक हादसा नहीं बल्कि जान बूझकर किया गया Murder था। फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक जिस एंगल से गोली कमल के शरीर में गोली लगी थी, वो झीनाझपटी में नहीं लग सकती थी। सबसे अहम बात ये रही कि जिस राइफल से गोली चलना बताया गया था, उस पर कमल के फिंगरप्रिंट तक नहीं मिले। इससे बिल्कुल साफ हो गया था कि राइफल से गोली किसी और ने ही चलाई है। ASP (Outer) Aditya Shukla के मुताबिक पुलिस ने हर बिन्दु पर बारीकी से तफ्तीश की है। कमल की पत्नी प्रीति के खिलाफ कोई साक्ष्य और सबूत नहीं मिले। फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी अहम माना गया। जिसके बाद गैरइरादतन हत्या की धारा 304 को हत्या की धारा 302 में तरमीम कर हत्यारोपित मनोज की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

विवादों से Manoj Dwivedi का है पुराना नाता

बेटे की हत्या का आरोपी Manoj Dwivedi का विवादों से काफी पुराना और गहरा नाता रहा है। www.redeyestimes.com (News Portal) को छानबीन में पता चला है कि करीब दो दशक पहले पंडित गयाप्रसाद दिवेदी इंटर कॉलेज में एक छात्रा के साथ रेप की वारदात हुई थी। जिसमें मनोज का नाम उछला था। इस कांड के बाद यह स्कूल भी बंद हो गया। स्कूल मनोज दिवेदी के पिता प्रेमा नंद दिवेदी ने अपने पिता (मनोज के बाबा) के नाम पर दिवेदी नगर में खुलवाया था। सुरा और सुंदरी का शौकीन मनोज बेटे की हत्या के बाद से फरार है। सूत्रों की मानें तो इस दौरान उसने अपने एक समधी के पॉवर का भरपूर इस्तेमाल किया। ये समधी सत्ताधारी दल से जुड़े नेता बताए जा रहे हैं। उन्होंने मनोज को बचाने के लिए अब तक एड़ी-चोटी का जोर लगाए रक्खा है।

पिता Prema Nand Dwivedi भी रहे हैं विवादित

बेटे की हत्या के जुर्म में फरार Manoj Dwivedi के पिता Prema Nand Dwivedi का भी विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। 70 के दशक में दूध का कारोबार करने वाले प्रेमा नंद 80 के दशक में पेट्रोल पंप मालिक बन बैठे थे। स्थानीय लोगों और पीड़ित रिश्तेदारों की मानें तो बीना फिलिंग पेट्रोल पंप प्रेमा नंद के बहन-बहनोई का था। जो किन्ही वजहों से रायबरेली में शिफ्ट हो गए थे। चर्चा ये भी है कि कुछ समय पहले ही ये पेट्रोल पंप भी बिक गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक 80 के दशक में ही प्रेमानंद ने सोसाइटी रजिस्टर्ड कराने के बाद प्लाटिंग शुरु की। दिवेदी नगर में सैकड़ों प्लाट उन्होंने बेंच दिए। www.redeyestimes.com (News Portal) को यहां छानबीन करने पर पता चला कि कई प्लाट ऐसे हैं जिनकी प्रेमानंद ने दो से तीन बार रजिस्ट्री कर दी। कुछ ऐसे भी पीड़ित मिले जिनको कब्जा कहीं दिया और रजिस्ट्री कहीं की कर दी। हाल ये है कि इस एरिया में पीड़ित लोगों की संख्या एक-दो नहीं बल्कि कई दर्जन की है।

20 साल पहले पहुंचा था KDA का बुलडोजर

जानकारी के मुताबिक Dwivedi Nagar के जिस मकान में प्रेमानंद दिवेदी का परिवार रहता है और उसके इर्द-गिर्द कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) भूमि है। पेट्रोल पंप भी उसी दायरे में आता है। सूत्रों की मानें तो सिस्टम के तहत सरकारी अभिलेखों में पहाड़पुर गांव के रक्बा को हमीरपुर रोड पर दर्शा कर चार दशक पहले बड़ा खेल खेला गया था। यही वजह रही कि 20 साल पहले KDA का दस्ता बुलडोजर लेकर ध्वस्तीकरण के लिए पहुंच गया। चर्चा है कि उस समय सपा की सरकार थी और तत्कालीन समय के मिनी सीएमने मोटी कीमत वसूलते हुए केडीएम टीम को वापस लौटने का निर्देश जारी करवा दिया था। सूत्रों की मानें तो Kanpur में एसपी ग्रामीण, एसपी क्राइम के पद पर तैनात रहे एक चर्चित अधिकारी को एक बीघा भूमि न्यौछावर की गई थी। यह IPS Officer अब गिफ्ट में मिली जमीन की बिक्री कर चुके हैं। इतना ही नहीं एक करीबी रिश्तेदार की करीब 19.5 बीघा खेती पर जब प्रेमानंद की गिद्धसरीखी निगाह लगी तो पीड़ित ने पैरवी की। लंबे समय तक पैरवी के बाद हाईकोर्ट से आदेश पीड़ित के पक्ष में हो गया लेकिन आरोप है कि रसूख और पैसे के बल पर प्रेमानंद (Kanpur) में तैनात एक SDM को मैनेज किए हुए हैं, जिसकी वजह से पीड़ित को उसकी भूमि नहीं मिल पा रही है।  

 

  • Media के सामने बेखौफ अंदाज में बोला, सपा नेता का हत्यारोपी Shivendra
  • Court ले जाते समय थाना परिसर में बापू के चित्र को किया प्रणाम
  • परिजनों का दावा हत्यारोपी की मानसिक स्थित ठीक नहीं, चल रहा इलाज
  • शुक्रवार रात बर्रा-2 में हुई थी सपा नेता Harsh Yadav की गोली मारकर हत्या
बर्रा थाना परिसर में पुलिस कस्टडी के दौरान मीडिया से बेखौफ अंदाज में बात करता हत्यारोपी Shivendra

Yogesh Tripathi

वो पुलिस कस्टडी में था लेकिन बेखौफ और बेअंदाज था। कुर्ता-पायजामा और सदरी पहने वो खुद को किसी बड़े नेता या गैंगस्टर से कम नहीं आंक रहा था। मीडिया के फोटो सेशन के लिए पुलिस ने सीलबंद आला कत्ल उसके हाथ में थमा दिया। Media के सवालों पर उसने कहा कि नशे में था, गाली-गलौज की तो गोली मार.... शिवेंद्र ने कहा कि वह चाहता तो हर्ष पर गाड़ी चढ़ा सकता था लेकिन उसे हर्ष को चौराहे पर मारना था। इसके बाद वह मुड़ा और दो कदम की दूरी पर रखी महात्मा गांधी जी के चित्र के सामने झुककर प्रणाम किया और आगे बढ़ गया। युवजन सभा के नेता Harsh Yadav Murder Case में Arrest हत्यारोपी Shivendra Singh के चेहरे पर पश्चाताप के कोई भाव नहीं दिखा। एक Video सोशल मीडिया पर Viral हो रहा है, जिसमें शिवेंद्र यह सब बोल रहा है। पुलिस ने हत्यारोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा है। 

मीडिया से बात करने के बाद जाते समय गांधी जी की प्रतिमा के सामने झुककर प्रणाम भी किया।

हत्यारोपी के परिजनों का दावा है कि शिवेंद्र की मानसिक स्थित ठीक नहीं है। उसका इलाज चल रहा है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्नये उठता है कि यदि शिवेंद्र की मानसिक स्थित ठीक नहीं थी और उसका इलाज चल रहा था तो परिजनों ने उसे सड़क पर खुला क्यों छोड़ रखा था ? ऐसे मनोरोगियों की जगह अस्पताल होती या फिर उसे घर की चहारदीवारी के भीतर कैद कर रखा जाता है ताकि वह किसी को नुकसान न पहुंचा सके। शिवेंद्र ने तो एक घर का चिराग ही बुझा दिया है। उसकी भरपाई भला अब कोई कर सकता है ?

सफारी पर लगा रखा था दो-दो हूटर

दूसरा प्रश्न ये कि मानसिक रोगी Shivendra को परिजनों ने चमचमाती सफेद रंग की लग्जरी सफार कार दे रखी थी। जिससे वह अपने दोस्तों के साथ शान से फर्राटा भरता था। खास बात ये है कि इस सफारी कार पर एक नहीं दो-दो हूटर भी लगे मिले हैं। जो कि कानून का खुलेआम उल्लंघन है। गाड़ी में हूटर लगे होने से साफ है कि उसे न तो पुलिस का डर था और न ही कानून का...। भाजपा के शासनकाल में भी वह सपा में होते हुए हूटर लगाकर सड़क पर निश्चित तौर पर रौब ही झाड़ता रहा होगा। 


 

पुलिस कस्टडी में भी उसने बेखौफ होकर अपना गुनाह स्वीकार किया। अब देखना ये है कि हत्यारोपी शिवेंद्र अदालत में भी अपना जुर्म स्वीकार करेगा या फिर शातिर अपराधियों की तरफ से कोर्ट में खुद को बेनुगाह बताएगा। पुलिस सूत्रों की मानें तो बिगड़ैल किस्म के शिवेंद्र के तमाम किस्से और कहानियां हैं, जो अब मोहल्ले के लोगों की जुबान पर चर्चा बने हुए हैं। 

मृत सपा नेता Harsh Yadav (फाइल फोटो)

चर्चा-ए-आम ये भी है कि Harsh Yadav और Shivendra के बीच काफी गहरी दोस्ती थी। शिवेंद्र की जुबानी ये है कि उसने शराब के नशे में गाली दी तो मैने...। अब सवाल ये उठता है कि दोस्ती के बीच आखिर गाली कहां से आ गई...? गाली देने के पीछे भी तो कई बड़ी वजह रही होगी..? हर्ष की मौत और शिवेंद्र के जेल जाने के बाद वो वजह शायद अब राज बनकर रह जाएगी। हालांकि जो लोग दोनों को बेहद करीब से जानते हैं उन्हें पूरी कहानी मालुम है। इस कहानी के चर्चे दबी जुबान से हो रहे हैं। 

सफारी पर चस्पा मिला सचिवालय का पास

Harsh Yadav की हत्या में प्रयुक्त सफारी कार पर पुलिस को सचिवालय का पास चस्पा मिला है। शिवेंद्र की गाड़ी पर सचिवालय का पास कैसे लगा ? पुलिस को अब इसकी भी जांच करनी होगी। पुलिस के मुताबिक शिवेंद्र बर्रा दो का रहने वाला है। उसके पिता कांशीराम अस्पताल में फार्मासिस्ट थे। दो साल पहले उनको ब्रेन हैमरेज हो गया। जिसके बाद से वह बिस्तर पर ही हैं।  

मां को घर से निकाला, भाई ने किया Suicide

शिवेंद्र  के पड़ोसियों की मानें तो वह साइको की तरह हरकत करता था। करीब दो महीना पहले उसने अपनी मां सुरेखा को मारपीट कर घर से निकाल दिया था। घर से निकाले जाने के बाद शिवेंद्र की मां गजनेर के गिनौरा गांव स्थित अपने मायके में रह रही हैं। शिवेंद्र की हरकतों से तंग आकर उसकी पत्नी भी कई बार जान देने की कोशिश कर चुकी है। शिवेंद्र के भाई ने कुछ महीना पहले ही सुसाइड कर लिया था।