Articles by "Bikru Case"
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  • कोर्ट ने सभी पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया
  • गुड्डन त्रिवेदी समेत 7 लोगों को कोर्ट ने किया बरी
  • Kanpur Dehat की ADJ-5 गैंगस्टर कोर्ट ने सुनाया फैसला




Yogesh Tripathi

करीब तीन साल पहले Kanpur के चौबेपुर थाना एरिया में हुए चर्चित Bikru Case में बंद 23 लोगों को Kanpur Dehat की ADJ-5 (गैंगस्टर कोर्ट ) ने 10-10 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने सभी लोगों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने साक्ष्य और सबूतों के अभाव में गुड्डन त्रिवेदी समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। खास बात ये रही कि इस चर्चित केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तरह रही। प्रशासन ने किसी भी तरह की अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती नहीं की थी। 


 

 Bikru Case में आरोपितों को सजा दिलाने के लिए पहले दिन से ही संघर्ष कर रहे अधिवक्ता सौरभ भदौरिया को लोगों ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में सौरभ भदौरिया ने कहा कि जिन 7 लोगों को कोर्ट ने बरी किया है उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। सौरभ भदौरिया ने पुलिस प्रशासन और विवेचक पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट में लिखकर दिया दिया गया था कि अधिकांश लोगों के खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं है। वह जल्द ही इसके खिलाफ ऊपर की अदालत में अपील करेंगे।

Kanpur Dehat की ADJ-5 (गैंगस्टर कोर्ट) के जज दुर्गेश कुमार पांडेय ने 23 लोगों के खिलाफ 10-10 साल की सजा मुकर्रर की। उन्होंने गैंग के सरगना Bikru गांव निवासी हीरू दुबे, जयकांत बाजपेयी उर्फ जय बाजपेयी, शिवा तिवारी, गोविंद सैनी समेत 23 लोगों को सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रशांत उर्फ डब्बू, गुड्डन त्रिवेदी, राजेंद्र मिश्रा, संजू दुबे, बाल गोविंद, रामेशचंद्र दुबे और सुशील तिवारी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। 


 

उल्लेखनीय है कि जज दुर्गेश कुमार पांडेय ने अभी कुछ महीना पहले ही पूर्वांचल के बाहुबली माफिया सरगना मुख्तार अंसारी और उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी को भी गैंगस्टर एक्ट के मामले में सजा सुना चुके हैं।

2/3 जुलाई 2020 को चौबेपुर के बिकरू गांव में जब बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा की अगुवाई में पुलिस फोर्स गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची थी तो विकास दुबे और उसके गुर्गों ने पुलिस को चारो तरफ से घेरकर स्वचालित हथियारों से गोलियां दागी थीं। इस हमले में सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस वालों की मौत हो गई थी। इस कांड के बाद STF ने विकास दुबे समेत 6 लोगों को Encounter में ढेर कर 32 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।

 


  • SIT की जांच में दोषी ठहराए गए थे Anant Dev Tiwari समेत कई पुलिस कर्मी
  • SIT ने वृहद दंड दिए जाने की सिफारिश अपनी जांच रिपोर्ट में की थी 
  • IPS Officer नीलाब्जा चौधरी कर रहे थे Anant Dev की जांच 
  • Bikru Case में सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों की गोलियों से भूनकर की गई थी हत्या
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विकास दुबे के खजांची जय कांत बाजपेयी की जमानत खारिज की
  • हाईकोर्ट ने जयकांत की जमानत खारिज करने के पीछे उसके खिलाफ दर्ज अपराधिक मामलों को बनाया आधार


Yogesh Tripathi

Kanpur में करीब तीन साल पहले हुए बहुचर्चित Bikru Case में IPS Officer Anant Dev Tiwari को बड़ी राहत मिली है।  Clean Chit मिलने से Anant Dev Tiwari के दामन पर लगे दाग अब धुल गए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में जब Bikru Case हुआ था तो अनंत देव उस समय DIG (STF) थे। कुछ समय पहले ही उनका ट्रांसफर STF में किया गया था। इससे पहले वे SSP कानपुर थे। Bikru Case के बाद शासन ने SIT जांच के आदेश दिए थे। SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाते हुए उनके खिलाफ वृहद दंड दिए जाने की संस्तुति की थी। इस जांच रिपोर्ट के आने पर शासन ने तत्काल प्रभाव से IPS Officer अनंत देव तिवारी को सस्पेंड कर दिया था। उनके सस्पेंशन के बाद जांच एक सीनियर IPS Officer नीलाब्जा चौधरी को सौंपी गई थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जांच चल रही थी कि इस बीच करीब तीन महीना पहले शासन ने Anant Dev Tiwari की बहाली करते हुए उन्हें DIG (GRP) के पद पर तैनात कर दिया। थोड़े ही दिन बाद उनको STF की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि रिटायरमेंट से कुछ महीना पहले ही अनंत देव तिवारी को क्लीन चिट मिलने से उनके दामन पर लगे दाग करीब-करीब धुल गए हैं। Anant Dev Tiwari मूल रूप से फतेहपुर जनपद के निवासी हैं। उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाना जाता है। वह लंबे समय तक STF में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पाठा के जंगलों में दस्यु सम्राट ददुआ और ठोकिया जैसे दस्यु सरदारों का Encounter उन्होंने STF में ASP रहते हुए किया था। वर्ष 1991 में Anant Dev Tiwari ने प्रांतीय पुलिस सर्विस (PPS) की नौकरी ज्वाइन की थी। वर्ष 2006 में वह IPS Officer बने।

2 जुलाई 2020 की आधी रात तत्कालीन बिल्हौर क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्रा की अगुवाई में पुलिस टीम खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने के लिए Bikru गांव पहुंची थी। बताया जाता है कि पुलिस टीम के दबिश देने की सूचना विकास दुबे और उसके गिरोह को काफी पहले ही मिल गई थी। लिहाजा उसने पहले से ही तैयारी कर रक्खी थी। पुलिस टीम के पहुंचने पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने घेराबंदी कर स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मी शहीद हो गए। 

वारदात के कुछ घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर तमाम आडियो और वीडियो वॉयरल हुए। जिसके बाद शक की सूई लोकल पुलिस और तमाम अफसरों पर भी घूमने लगी। यही वजह रही कि तत्कालीन चौबेपुर थाना प्रभारी (SO) विनय तिवारी को भी STF ने Arrest कर लिया था। उसके बाद STF ने विकास दुबे के दाहिने हाथ अमर दुबे समेत कई गुर्गों को Encounter में मार गिराया। विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरेंडर कर दिया। Kanpur लाते समय सचेंडी के पास गाड़ी पलटने के बाद भाग रहे विकास दुबे को भी STF ने ढेर कर दिया था। 

 

 


Vikas Dubey के खजांची जयकांत की जमानत हाईकोर्ट में खारिज

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस मयंक कुमार जैन ने Bikru Case मामले में जेल की सलाखों के पीछे कैद जयकांत बाजपेयी उर्फ जय बाजपेयी की जमानत याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार जैन ने अपने आदेश में कहा कि अपराध की प्रकृति और दोषी होने की डिग्री गंभीर और जघन्य है। जयकांत बाजपेयी का जघन्य मामलों का लंबा-चौड़ा अपराधिक इतिहास रहा है। जयकांत बाजपेयी उस घटना में सक्रिय रूप से शामिल है, जिसमें क्षेत्राधिकारी समेत 8 पुलिस कर्मियों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस कांड में 7 पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। मुख्य आरोपी विकास दुबे को दो लाख रुपए, वारदात में प्रयुक्त 25 कारतूस मुहैया कराए गए। इस लिए अपराधिक पृष्ठभूमि वाले याची को जमानत नहीं दी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि Bikru Case में STF ने विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी को भी लंबी पूछताछ के बाद Arrest किया था। जयकांत बाजपेयी के तार नौकराशाही से भी जुड़े थे। पूछताछ में जयकांत बाजपेयी ने STF को बताया था कि उसने विकास दुबे को कारतूस, नकदी और भागने के लिए कार मुहैया कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने चौबेपुर थाने में जयकांत बाजपेयी के खिलाफ IPC की धारा 147, 148, 149, 332, 353, 333, 307, 302, 3946, 412, 120-B, 34, 504, 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया था।
उधर, RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने पोर्टल से बातचीत में कहा कि SIT जांच में IAS, IPS & PPS Officr's शामिल थे। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में अनंत देव तिवारी समेत कई पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई थी। साथ ही SIT ने सभी के खिलाफ वृहद दंडात्मक कार्रवाई के लिए लिखा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सौरभ भदौरिया का कहना है कि जल्द ही वह विधिक परामर्श के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

  • कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद ने खुशी दुबे को बताया बेगुनाह
  • इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं Priyanka Gandhi
  • कांग्रेस ने खुशी दुबे की बहन Neha Tiwari को बनाया है प्रत्याशी
  • Bikru Case के सभी Encounter फर्जी थे, सरकार आने पर कांग्रेस जांच कराएगी

Kanpur में पत्रकारों से बातचीत करते कल्कि पीठाधीश्वर और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ।

Yogesh Tripathi

“Kanpur की कल्याणपुर विधान सभा सीट पर Congress Party “धर्मयुद्ध” की लड़ाई लड़ रही है। जेल में बंद नाबालिग खुशी दुबे बेगुनाह है। Bikru Case के बाद STF की तरफ से किए गए सभी Encounter Fake थे। सरकार बनने पर कांग्रेस इसकी जांच अवश्य कराएगी। खुशी दुबे के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए Priyanka Gandhi खुद लड़ाई लड़ रही हैं” ये बातें कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कानपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने कल्याणपुर विधान सभा से खुशी दुबे की मां गायत्री तिवारी को प्रत्याशी बनाया था लेकिन Voter List में नाम न होने की वजह से गायत्री की प्रत्याशिता पर पेंच फंस गया। आखिरी वक्त पर प्रियंका गांधी ने अहम निर्णय लेते हुए खुशी की बड़ी बहन Neha Tiwari को प्रत्याशी बनाते हुए तत्काल सिंबल भेजवाया।

मीडिया से बातचीच करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि वह कांग्रेस के समान विचाराधारा रखने वाली राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि वह लोग Congress प्रत्याशी Neha Tiwari के खिलाफ अपना प्रत्याशी न उतारें।

प्रमोद कृष्णम के साथ कांग्रेसी नेता संदीप शुक्ला, कृपेश त्रिपाठी, नरेश त्रिपाठी

 

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि Bikru Case में जो भी संलिप्त था उसे हर कीमत पर सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेगुनाह नाबालिग को डेढ़ साल से जेल में क्यों कैद करके रक्खा गया है ? प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कांग्रेस ने पहले खुशी की मां गायत्री को टिकट दिया था लेकिन मतदाता सूची में न होने की वजह से खुशी की बड़ी बहन Neha Tiwari को टिकट दी गई। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी इस परिवार के साथ हैं। हर तरह से वह परिवार की मदद कर रही हैं।

सरकार बनी तो Bikru Case की जांच कराएंगे

कल्कि पीठाधीश्वर और कांग्रेस के दिग्गज नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि Bikru Case में हुए सभी Encounter Fake थे। कांग्रेस की सरकार बनने पर सभी Encounter की जांच कराई जाएगी। प्रमोद कृष्णम ने कहा कि भारत समेत पूरे विश्व ने पाकिस्तानी आतंकी कसाब को गोली चलाते हुए देखा था लेकिन उसे न्यायिक प्रक्रिया में लाने के बाद ही कांग्रेस सरकार ने फांसी की सजा दी। UP Police को भी ऐसा ही करना चाहिए था। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कांग्रेस वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और अधिवक्ता संदीप शुक्ला, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष कृपेश त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश त्रिपाठी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

  • जयकांत बाजपेयी के करीबी प्रभात शुक्ला (डब्बू) पर भी लगा NSA
  • पहले भी तीन आरोपितों पर हो चुकी है NSA की कार्रवाई
  • DM की मंजूरी के बाद पुलिस ने जेल में नोटिस का तामीला करवाया
  • Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर विकास दुबे का खजांची था जयकांत

Bikru Case का आरोपी जयकांत बाजपेयी (फोटो साभार---Google)

Yogesh Tripathi

STF के हाथों Encounter में ढेर हो चुके Uttar Pradesh के सबसे बड़े इनामिया बदमाश Vikas Dubey के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी पर Police ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने विकास दुबे और जयकांत बाजपेयी के करीबी प्रभात शुक्ला उर्फ डब्बू के खिलाफ भी NSA की कार्रवाई की है। DM की परमीशन के बाद पुलिस ने Kanpur Dehat  जनपद के जिला कारागार में नोटिस का तामीला करवाया। उल्लेखनीय है कि Bikru Case में आरोपी जयकांत बाजपेयी और प्रभात शुक्ला जेल में बंद हैं। पुलिस इससे पहले बिकरू कांड से जुड़े तीन लोगों पर पहले ही NSA की कार्रवाई कर चुकी है। 

जयकांत बाजपेयी (फोटो साभार----Google)

जयकांत ने मुहैया कराए थे कारतूस और रुपए

गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी ने Bikru Case से पहले कारतूस और रुपए मुहैया कराए थे। 2/3 जुलाई 2020 की रात्रि को गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने दबिश के दौरान घेरकर अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर दी थी। जिसमें तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। देश और प्रदेश को झकझोर देने वाले इस बड़े कांड के बाद सक्रिय STF ने 10 दिन के अंदर विकास दुबे और उसके पांच गुर्गों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। Kanpur के काकादेव एरिया में एक ऑडी समेत दो लग्जरी कारों की लावारिस हालत में बरामदगी के बाद शक की सूई जयकांत बाजपेयी पर उठी तो STF ने उसे भी टांग लिया। Lucknow में पूछताछ के दौरान जयकांत बाजपेयी ने STF को कई चौंकाने वाली जानकारियां दीं। इसके बाद पुलिस ने उसे भी Arrest कर लिया।

क्या कहती है Police की Report ?

Police Report के मुताबिक जयकांत बाजपेयी ने वारदात से पहले विकास दुबे को .32 बोर के 25 कारतूस और दो लाख रुपए मुहैया कराए थे। उसे पता था कि विकास दुबे बड़े कांड को अंजाम देने जा रहा है फिर भी उसने पुलिस को सूचना देना मुनासिब नहीं समझा। जिसकी वजह से Bikru में बड़ा कांड हो गया। सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी गई। पुलिस रिपोर्ट की मानें तो जयकांत बाजपेयी की वजह से बिकरू कांड हो गया। Bikru Case के बाद दहशत फैल गई थी। तमाम लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा। पुलिस का कहना है कि घटना में प्रशांत शुक्ला उर्फ डब्बू भी शामिल रहा था। जिसकी वजह से उसके खिलाफ भी NSA की कार्रवाई की गई है।

पुलिस इससे पहले हीरू दुबे, बब्लू मुसलमान और शिवम उर्फ दलाल के खिलाफ NSA की कार्रवाई कर चुकी है। कानपुर आउटर पुलिस के चौबेपुर थानेदार ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी से NSA की कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी थी। जिलाधिकारी का परमीशन मिलने के बाद पुलिस ने NSA की कार्रवाई की।

सौरभ भदौरिया (अधिवक्ता एंव RTI Activist)

“पुलिस ने गंभीर धाराओं को हटाया” : सौरभ भदौरिया

अधिवक्ता और RTI Activist सौरभ भदौरिया का आरोप है कि Bikru Case की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग और SIT की संस्तुतियों के बाद भी पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के मुकदमों 268/20 और 383/20 में फर्जी वोटर आइडी, कूटरचित और साक्ष्य मिटाने, फर्जी आधार कार्ड, शपथपत्र एवं अन्य दस्तावेज के प्रमाणित साक्ष्य की मौजूदगी के बाद भी मुकदमें की विवेचना कर रहे विवेचकों ने जयकांत बाजपेयी पर लगी गंभीर धाराओं में खेल करते हुए उसे हटा दिया है।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उसकी बिक्री तक की जा चुकी है। सारे साक्ष्य वह जांच एजेंसियों को सौंप चुके हैं लेकिन उसके बाद भी इन सरकारी जमीनों को बने भूखंडों को अभी तक ध्वस्त नहीं किया गया है। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि पुलिस ने अभी तक जयकांत बाजपेयी के भाइयों पर भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि लालबत्ती गिरोह के सरगना पियूष दिवेदी और जयकांत बाजपेयी का गठजोड़ किसी से छिपा नहीं है। आडियो रिकार्डिंग समेत कई प्रमाण वह जांच एजेंसिय़ों को दे चुके हैं लेकिन कार्रवाई अभी तक शून्य है। बकौल सौरभ भदौरिया Bikru Case के बाद काकादेव में जो लावारिस गाड़ियां पुलिस ने बरामद की थीं। उसमें एक गाड़ी का मालिक राहुल सिंह है। उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत है लेकिन अभी तक पुलिस राहुल को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। सौरभ का ये भी आरोप है कि गैंगस्टर एक्ट मामले जयकांत बाजपेयी की तमाम संपत्तियों को अभी तक जब्त नहीं किया गया। इतना ही नहीं अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे जयकांत बाजपेयी और उसके तमाम गुर्गों के गिरोह को पुलिस ने अभी तक सूचीबद्ध नहीं किया है।

सौरभ का कहना है कि वह Bikru Case के एक मात्र इकलौते गवाह हैं। सुरक्षा के नाम पर उनको एक गनर जिला प्रशासन ने मुहैया कराया था लेकिन बाद में उसे भी छीन लिया गया। जिसकी वजह से उनकी जान को खतरा बना हुआ है।

 

 

  • सरगना और गुर्गों के बारे में कानपुर, औरैया और रायबरेली में जानकारी जुटाई
  • Bikru Case के गवाह सौरभ भदौरिया ने की थी CBI से शिकायत
  • Bikru Case के कई आरोपितों की भी सीबीआइ ने की गुपचुप छानबीन
  • कार्मिक मंत्रालय के निर्देश पर गृह मंत्रालय करवा रहा है मामले की जांच

 


Yogesh Tripathi

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने पिछले दिनों बेहद गुपचुप ढंग से Bikru Case के कुछ आरोपितों के बारे में तमाम जानकारियां जुटाईं। सीबीआइ की टीम ने करीब एक दशक पहले लालबत्ती बांटने वाले गिरोह के सरगना और उसके कुछ गुर्गों के बाबत भी कानपुर, औरैया और रायबरेली में काफी पड़ताल की। उधर, Bkru Case के गवाह और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत की थी। जिसके बाद PMO ने मामला “The Ministry Of Home Affairs” को सौंप दिया। “The Ministry Of Home Affairs” ने पूरे प्रकरण पर गृह मंत्रालय से 45 दिनों के अंदर जवाब मांगा। गृहमंत्रालय के निर्देश पर सीबीआइ और तमाम जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण पर छानबीन कर रही हैं। यही वजह है कि सीबीआइ की टीम ने पिछले दिनों दो बार आकर तमाम जानकारियां जुटाई हैं। 


 

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने यह शिकायत जून महीने के आखिरी सप्ताह में की थी। शिकायती पत्र में सौरभ भदौरिया ने आरोप लगाया था कि कानपुर जिला प्रशासन ने गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई तो की है लेकिन उसके गिरोह को अब तक रजिस्टर्ड नहीं किया है। 76 दागी पुलिस कर्मियों (जिसमें कई आइपीसीएस और पीपीएस) अफसरों के साथ दरोगा और थानेदार तक शामिल हैं उनके संपत्तियों की जांच अब तक नहीं कराई गई है।

शिकायती पत्र में सौरभ भदौरिया ने कानपुर में SSP के पद पर तैनात रह चुके IPS Officer अनंत देव के कार्यकाल में तमाम भ्रष्टाचारों और एक भाजयुमों नेता की हिस्ट्रीशीट को खत्म किए जाने का उल्लेख करते हुए अब तक कार्रवाई न होने की शिकायत की है। 

 

सौरभ भदौरिया (RTI Activist& Advocate)

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि वर्ष 2016 में गैंगस्टर विकास दुबे अपने खजांची जयकांत बाजपेयी और तमाम गुर्गों के साथ विदेश यात्रा पर गया था। वहां पर भी दोनों ने संपत्तियां बनाई हैं। उसकी जांच अभी तक नहीं हुई है। साथ ही जो लोग विदेश यात्रा पर साथ गए थे। न तो उनसे अभी तक कोई पूछताछ हुई है और न ही कोई कार्रवाई।

जयकांत बाजपेयी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत होने के बाद भी लोकल इंटेलीजेंस (LIU) और संबंधित थाने के पुलिस कर्मियों ने पासपोर्ट को जारी किया। साथ ही शस्त्र लाइसेंस का रिन्यूवल भी करते रहे। सौरभ ने वर्ष 2008 से लेकर 2020 तक तैनात रहे बीट दरोगाओं और अफसरों की जांच कराने की मांग की है। 

सौरभ ने कानपुर में तैनात रहे पूर्व एसएसपी अनंत देव के कार्यकाल में हुए तमाम भ्रष्टाचारों और एक भाजयुमों नेता की हिस्ट्रीशीट खत्म कराने के मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं होने की भी शिकायत की है। सौरभ का कहना है कि हिस्ट्रीशीट इतनी आसानी से खत्म नहीं होती है। हिस्ट्रीशीटर की हिस्ट्रीशीट क्यों और किसके आदेश पर खत्म की गई ? ये बड़ा अपराधिक मामला है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सौरभ भदौरिया ने करीब डेढ़ दशक पहले बर्रा थाना एरिया में पकड़े गए “लालबत्ती” बांटने वाले गिरोह के बाबत भी शिकायत की है। सौरभ का कहना है कि “लालबत्ती” बांटने वाले गैंग का सरगना भी विकास दुबे और उसके खजांची जयकांत बाजपेयी से जुड़ा रहा था। ऐसे में उसकी जांच भी आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में कानपुर की क्राइम ब्रांच टीम ने बर्रा थाना एरिया में एक ऐसा गिरोह पकड़ा था। जो कि 25 से 50 लाख रुपए लेकर लालबत्ती बांटता था। इस गिरोह के ताल्लुक शहर के एक बड़े ड्रग माफिया से भी थे। गिरोह ने उसे भी “लालबत्ती” बांट दी थी। कथित तौर पर लालबत्ती मिलने के बाद ड्रग माफिया ने शहर के तमाम मोहल्लों और गलियों में जब अपना स्वागत करवाया तो मामले का भंडा फूट गया था। क्राइम ब्रांच ने बर्रा में लालबत्ती लगी सैंत्रो कार तो बरामद कर ली थी लेकिन सरगना फरार हो गया था। गिरोह से एक पूर्व छात्र नेता, एक सिपाही समेत कई सफेदपोश लोगों के जुड़े होने की जानकारी तब उजागर हुई थी।

 सौरभ का कहना है कि इस शिकायत के बाद सीबीआइ की टीम पिछले दो हफ्तों में दो बार बेहद गोपनीय ढंग से छानबीन करने आ चुकी है। कानपुर के साथ-साथ औरैया और रायबरेली में भी टीम ने तमाम जानकारियां जुटाई हैं।

 

 

  • 67 दोषी पुलिस कर्मियों के संपत्तियों की होगी जांच
  • Delhi में अफसरों ने गवाह सौरभ भदौरिया से पूछताछ की
  • इंटेलीजेंस ब्यूरो ने कार्रवाई के लिए शासन से मांगी अनुमति

फोटो साभार (Google)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Kanpur स्थित शिवली थाना एरिया के गांव Bikru में दबिश देने पहुंची Police Team पर Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर Vikas Dubey ने अपने गुर्गों के साथ स्वचालित हथियारों से लैस होकर अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर उनकी हत्या कर दी थी। हमले में तत्कालीन CO (बिल्हौर) देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हुई थी। लंबे समय तक देश में सुर्खियां बटोरने वाले चर्चित Bikru Case की कई एजेंसियों ने जांच की। इसमें शासन की तरफ से गठित SIT जांच भी शामिल है। Bikru Case को बीती 2/3 जुलाई को एक वर्ष हो गए। 

फोटो साभार (Google)
 

इस बीच इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) ने भी अपनी जांच Complete कर ली है। IB Officer’s की टीम ने इकलौते गवाह सौरभ भदौरिया को Delhi में बुलाकर काफी देर तक पूछताछ की। सौरभ ने अफसरों को बताया कि दोषी पाए गए अफसरों पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। इतना ही नहीं उनकी सुरक्षा तक छीन ली गई। जिसकी वजह से उनकी जान को बराबर खतरा बना हुआ है। सौरभ भदौरिया का कहना है कि IB के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि दोषी पुलिस कर्मियों के संपत्तियों की जांच के साथ उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। माना जा रहा है कि अगले दो हफ्ते में IB अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी।



RTI Activist सौरभ भदौरिया ने की थी शिकायत

Bikru Case में सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों के शहीद होने पर Kanpur के ब्रम्हनगर निवासी RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने तमाम जांच एजेंसियों से पूरे मामले की शिकायत की। सौरभ ने गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची जयकांत बाजपेयी, उसके भाइयों, तमाम सफेदपोश नेताओ व विकास दुबे के गुर्गों के कनेक्शन और कई बेनामी संपत्तियों से जुड़े कागजात सौंपते हुए इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर IB Officer’s की एक टीम ने Kanpur पहुंचकर लंबी जांच-पड़ताल की। इस दौरान सौरभ भदौरिया ने कई और अहम दस्तावेज भी टीम को सौंपे। बकौल सौरभ भदौरिया IB की प्रारंभिक जांच करीब-करीब पूरी हो चुकी है। जुलाई महीने में ही IB अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी। शुक्रवार को दिल्ली में IB के अधिकारियों ने एक बार फिर सौरभ भदौरिया को बुलाकर पूछताछ कर उनके बयानों को दर्ज किया। 

दोषी पुलिस कर्मियों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई

 

Bikru Case के बाद गैंगस्टर विकास दुबे समेत 6 बदमाशों को Police और STF ने एनकाउंटर में मार गिराया। करीब 43 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसमें विकास दुबे का खजांची जयकांत बाजपेयी भी शामिल है। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि जयकांत बाजपेयी के संबंध पूर्व एसएसपी अनंत देव समेत कई अफसरों से रहे हैं। कई थानेदार और सीओ से भी जयकांत बाजपेयी की दोस्ती थी। तमाम से दरोगा और थानेदार जयकांत बाजपेयी के घर में ही रहते थे। इस बात का खुलासा भी हो चुका है। कांड के बाद IG की तरफ से भेजी गई पुलिस टीम को कई दरोगा घर में रहते मिले थे। कुछ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई भी हुई थी। सौरभ भदौरिया का कहना है कि अब तक 67 पुलिस कर्मी दोषी पाए गए हैं लेकिन किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

सौरभ भदौरिया (RTI Activist & Advocate)

सौरभ भदौरिया ने CBI को भी दर्ज कराए बयान

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। सौरभ ने बिकरु कांड की जांच में अनियमितता होने की शिकायत दर्ज कराई। सौरभ का आरोप है कि जयकांत बाजपेयी के फर्जी पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के मामले में Kanpur Police ने जांच के दौरान गंभीर धाराएं हटा दी हैं। जिसका सीधा लाभ आरोपी को मिला। सौरभ ने जय बाजपेई के सूदखोरी समेत अवैध और गोरखधंधों में संलिप्त पुलिस कर्मियों पर अब तक कार्रवाई न होने की बात अफसरों से कही। सौरभ का आरोप है कि विभागीय अफसर ही दोषी पाए गए अपने मातहतों को बचाने में जुटे हुए हैं।

सिक्योरिटी को लेकर सौरभ भदौरिया ने जताई चिंता

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने अपनी सिक्योरिटी को लेकर अफसरों के सामने चिंता व्यक्त की। सौरभ का कहना है कि वह Bikru Case से जुड़े तमाम मामलों के इकलौते गवाह हैं जो हर जांच एजेंसी को कागजात से लेकर तमाम सबूत और साक्ष्य अब तक मुहैया करवाते आ रहे हैं लेकिन इन सबके बाद भी शासन को उनके जान की चिंता नहीं है। सौरभ का आरोप है कि कुछ महीना पहले जो एक गनर मिला था वह भी अफसरों की तरफ से छीन लिया गया। बकौल सौरभ 20 जून 2021 से गवाह सुरक्षा अधिनियम भी लागू हो गया है।

सौरभ का कहना है कि 10 दिसंबर 2020 को उन्हें सुरक्षा मुहैया हुई थी। 14 जून 2021 को सुरक्षा हटा ली गई। सौरभ ने आशंका जताई है कि उनकी शिकायत पर ही जयकांत वाजपेयी और दोषी पुलिस कर्मियों पर जांच बैठी है। सभी रसूखदार लोग हैं। इस लिए कभी भी उनकी हत्या होने की आशंका है।