Articles by "Vikas Dubey"
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  • कोर्ट ने सभी पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया
  • गुड्डन त्रिवेदी समेत 7 लोगों को कोर्ट ने किया बरी
  • Kanpur Dehat की ADJ-5 गैंगस्टर कोर्ट ने सुनाया फैसला




Yogesh Tripathi

करीब तीन साल पहले Kanpur के चौबेपुर थाना एरिया में हुए चर्चित Bikru Case में बंद 23 लोगों को Kanpur Dehat की ADJ-5 (गैंगस्टर कोर्ट ) ने 10-10 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने सभी लोगों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने साक्ष्य और सबूतों के अभाव में गुड्डन त्रिवेदी समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। खास बात ये रही कि इस चर्चित केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तरह रही। प्रशासन ने किसी भी तरह की अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती नहीं की थी। 


 

 Bikru Case में आरोपितों को सजा दिलाने के लिए पहले दिन से ही संघर्ष कर रहे अधिवक्ता सौरभ भदौरिया को लोगों ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में सौरभ भदौरिया ने कहा कि जिन 7 लोगों को कोर्ट ने बरी किया है उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। सौरभ भदौरिया ने पुलिस प्रशासन और विवेचक पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट में लिखकर दिया दिया गया था कि अधिकांश लोगों के खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं है। वह जल्द ही इसके खिलाफ ऊपर की अदालत में अपील करेंगे।

Kanpur Dehat की ADJ-5 (गैंगस्टर कोर्ट) के जज दुर्गेश कुमार पांडेय ने 23 लोगों के खिलाफ 10-10 साल की सजा मुकर्रर की। उन्होंने गैंग के सरगना Bikru गांव निवासी हीरू दुबे, जयकांत बाजपेयी उर्फ जय बाजपेयी, शिवा तिवारी, गोविंद सैनी समेत 23 लोगों को सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रशांत उर्फ डब्बू, गुड्डन त्रिवेदी, राजेंद्र मिश्रा, संजू दुबे, बाल गोविंद, रामेशचंद्र दुबे और सुशील तिवारी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। 


 

उल्लेखनीय है कि जज दुर्गेश कुमार पांडेय ने अभी कुछ महीना पहले ही पूर्वांचल के बाहुबली माफिया सरगना मुख्तार अंसारी और उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी को भी गैंगस्टर एक्ट के मामले में सजा सुना चुके हैं।

2/3 जुलाई 2020 को चौबेपुर के बिकरू गांव में जब बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा की अगुवाई में पुलिस फोर्स गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची थी तो विकास दुबे और उसके गुर्गों ने पुलिस को चारो तरफ से घेरकर स्वचालित हथियारों से गोलियां दागी थीं। इस हमले में सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस वालों की मौत हो गई थी। इस कांड के बाद STF ने विकास दुबे समेत 6 लोगों को Encounter में ढेर कर 32 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।

 


Yogesh Tripathi
Supreme Court ने शुक्रवार को Gangster Vikas Dubey और अन्य के Encounter की जांच के लिए आयोग के पुनर्गठन सहित राहत की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई Close कर दी। SC ने UP Government को पैनल की सिफारिशों पर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है। 
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय जांच पैनल की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।

न्यायमूर्ति चौहान पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जुलाई, 2020 में कानपुर में Bikru Case के बाद गैंगस्टर दुबे और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की मुठभेड़ों में हत्या के पुलिस संस्करण के बारे में कोई संदेह या संदेह नहीं है। क्योंकि जनता में से कोई भी नहीं है। या मीडिया पुलिस के दावे का खंडन करने आया था और खंडन में कोई सबूत दर्ज नहीं किया गया था।

याचिकाकर्ताओं में से एक घनश्याम उपाध्याय (अधिवक्ता) ने Gangster Vikas Dubey और अन्य Encounter केचलिए जांच आयोग के पुनर्गठन की मांग की थी। 19 August 2020 को Supreme Court ने न्यायिक आयोग को खत्म करने की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था। 

गौरतलब है कि Kanpur के चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में Dy.SP देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मियों की Gangster Vikas Dubey और उसके गुर्गों ने स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर हत्या कर दी थी। वारदात 2/3 July 2020 की मध्यरात्रि को हुई थी। उस समय Police Team विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने उसके घर पहुंची थी। 

Encounter के बाद UPSTF & Police ने कहा था कि विकास दुबे 10 जुलाई 2020 की सुबह Kanpur के बचेंगी थाना एरिया स्थित भौंती के पास  एक मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस उसे उज्जैन से कानपुर ला रही थी। पुलिस का ये भी कहना है कि जिस वाहन से 

Gangster Vikas Dubey को लाया जा रहा था, वह बारिश में दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया। मौका पाकर विकास दुबे ने भागने की कोशिश की। जिसके बाद Encounter में Vikas Dubey मारा गया। 
  • जयकांत बाजपेयी के करीबी प्रभात शुक्ला (डब्बू) पर भी लगा NSA
  • पहले भी तीन आरोपितों पर हो चुकी है NSA की कार्रवाई
  • DM की मंजूरी के बाद पुलिस ने जेल में नोटिस का तामीला करवाया
  • Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर विकास दुबे का खजांची था जयकांत

Bikru Case का आरोपी जयकांत बाजपेयी (फोटो साभार---Google)

Yogesh Tripathi

STF के हाथों Encounter में ढेर हो चुके Uttar Pradesh के सबसे बड़े इनामिया बदमाश Vikas Dubey के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी पर Police ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने विकास दुबे और जयकांत बाजपेयी के करीबी प्रभात शुक्ला उर्फ डब्बू के खिलाफ भी NSA की कार्रवाई की है। DM की परमीशन के बाद पुलिस ने Kanpur Dehat  जनपद के जिला कारागार में नोटिस का तामीला करवाया। उल्लेखनीय है कि Bikru Case में आरोपी जयकांत बाजपेयी और प्रभात शुक्ला जेल में बंद हैं। पुलिस इससे पहले बिकरू कांड से जुड़े तीन लोगों पर पहले ही NSA की कार्रवाई कर चुकी है। 

जयकांत बाजपेयी (फोटो साभार----Google)

जयकांत ने मुहैया कराए थे कारतूस और रुपए

गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी ने Bikru Case से पहले कारतूस और रुपए मुहैया कराए थे। 2/3 जुलाई 2020 की रात्रि को गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने दबिश के दौरान घेरकर अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर दी थी। जिसमें तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। देश और प्रदेश को झकझोर देने वाले इस बड़े कांड के बाद सक्रिय STF ने 10 दिन के अंदर विकास दुबे और उसके पांच गुर्गों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। Kanpur के काकादेव एरिया में एक ऑडी समेत दो लग्जरी कारों की लावारिस हालत में बरामदगी के बाद शक की सूई जयकांत बाजपेयी पर उठी तो STF ने उसे भी टांग लिया। Lucknow में पूछताछ के दौरान जयकांत बाजपेयी ने STF को कई चौंकाने वाली जानकारियां दीं। इसके बाद पुलिस ने उसे भी Arrest कर लिया।

क्या कहती है Police की Report ?

Police Report के मुताबिक जयकांत बाजपेयी ने वारदात से पहले विकास दुबे को .32 बोर के 25 कारतूस और दो लाख रुपए मुहैया कराए थे। उसे पता था कि विकास दुबे बड़े कांड को अंजाम देने जा रहा है फिर भी उसने पुलिस को सूचना देना मुनासिब नहीं समझा। जिसकी वजह से Bikru में बड़ा कांड हो गया। सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी गई। पुलिस रिपोर्ट की मानें तो जयकांत बाजपेयी की वजह से बिकरू कांड हो गया। Bikru Case के बाद दहशत फैल गई थी। तमाम लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा। पुलिस का कहना है कि घटना में प्रशांत शुक्ला उर्फ डब्बू भी शामिल रहा था। जिसकी वजह से उसके खिलाफ भी NSA की कार्रवाई की गई है।

पुलिस इससे पहले हीरू दुबे, बब्लू मुसलमान और शिवम उर्फ दलाल के खिलाफ NSA की कार्रवाई कर चुकी है। कानपुर आउटर पुलिस के चौबेपुर थानेदार ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी से NSA की कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी थी। जिलाधिकारी का परमीशन मिलने के बाद पुलिस ने NSA की कार्रवाई की।

सौरभ भदौरिया (अधिवक्ता एंव RTI Activist)

पुलिस ने गंभीर धाराओं को हटाया” : सौरभ भदौरिया

अधिवक्ता और RTI Activist सौरभ भदौरिया का आरोप है कि Bikru Case की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग और SIT की संस्तुतियों के बाद भी पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के मुकदमों 268/20 और 383/20 में फर्जी वोटर आइडी, कूटरचित और साक्ष्य मिटाने, फर्जी आधार कार्ड, शपथपत्र एवं अन्य दस्तावेज के प्रमाणित साक्ष्य की मौजूदगी के बाद भी मुकदमें की विवेचना कर रहे विवेचकों ने जयकांत बाजपेयी पर लगी गंभीर धाराओं में खेल करते हुए उसे हटा दिया है।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उसकी बिक्री तक की जा चुकी है। सारे साक्ष्य वह जांच एजेंसियों को सौंप चुके हैं लेकिन उसके बाद भी इन सरकारी जमीनों को बने भूखंडों को अभी तक ध्वस्त नहीं किया गया है। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि पुलिस ने अभी तक जयकांत बाजपेयी के भाइयों पर भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि लालबत्ती गिरोह के सरगना पियूष दिवेदी और जयकांत बाजपेयी का गठजोड़ किसी से छिपा नहीं है। आडियो रिकार्डिंग समेत कई प्रमाण वह जांच एजेंसिय़ों को दे चुके हैं लेकिन कार्रवाई अभी तक शून्य है। बकौल सौरभ भदौरिया Bikru Case के बाद काकादेव में जो लावारिस गाड़ियां पुलिस ने बरामद की थीं। उसमें एक गाड़ी का मालिक राहुल सिंह है। उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत है लेकिन अभी तक पुलिस राहुल को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। सौरभ का ये भी आरोप है कि गैंगस्टर एक्ट मामले जयकांत बाजपेयी की तमाम संपत्तियों को अभी तक जब्त नहीं किया गया। इतना ही नहीं अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे जयकांत बाजपेयी और उसके तमाम गुर्गों के गिरोह को पुलिस ने अभी तक सूचीबद्ध नहीं किया है।

सौरभ का कहना है कि वह Bikru Case के एक मात्र इकलौते गवाह हैं। सुरक्षा के नाम पर उनको एक गनर जिला प्रशासन ने मुहैया कराया था लेकिन बाद में उसे भी छीन लिया गया। जिसकी वजह से उनकी जान को खतरा बना हुआ है।

 

 

  • 67 दोषी पुलिस कर्मियों के संपत्तियों की होगी जांच
  • Delhi में अफसरों ने गवाह सौरभ भदौरिया से पूछताछ की
  • इंटेलीजेंस ब्यूरो ने कार्रवाई के लिए शासन से मांगी अनुमति

फोटो साभार (Google)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Kanpur स्थित शिवली थाना एरिया के गांव Bikru में दबिश देने पहुंची Police Team पर Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर Vikas Dubey ने अपने गुर्गों के साथ स्वचालित हथियारों से लैस होकर अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर उनकी हत्या कर दी थी। हमले में तत्कालीन CO (बिल्हौर) देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हुई थी। लंबे समय तक देश में सुर्खियां बटोरने वाले चर्चित Bikru Case की कई एजेंसियों ने जांच की। इसमें शासन की तरफ से गठित SIT जांच भी शामिल है। Bikru Case को बीती 2/3 जुलाई को एक वर्ष हो गए। 

फोटो साभार (Google)
 

इस बीच इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) ने भी अपनी जांच Complete कर ली है। IB Officer’s की टीम ने इकलौते गवाह सौरभ भदौरिया को Delhi में बुलाकर काफी देर तक पूछताछ की। सौरभ ने अफसरों को बताया कि दोषी पाए गए अफसरों पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। इतना ही नहीं उनकी सुरक्षा तक छीन ली गई। जिसकी वजह से उनकी जान को बराबर खतरा बना हुआ है। सौरभ भदौरिया का कहना है कि IB के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि दोषी पुलिस कर्मियों के संपत्तियों की जांच के साथ उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। माना जा रहा है कि अगले दो हफ्ते में IB अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी।



RTI Activist सौरभ भदौरिया ने की थी शिकायत

Bikru Case में सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों के शहीद होने पर Kanpur के ब्रम्हनगर निवासी RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने तमाम जांच एजेंसियों से पूरे मामले की शिकायत की। सौरभ ने गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची जयकांत बाजपेयी, उसके भाइयों, तमाम सफेदपोश नेताओ व विकास दुबे के गुर्गों के कनेक्शन और कई बेनामी संपत्तियों से जुड़े कागजात सौंपते हुए इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर IB Officer’s की एक टीम ने Kanpur पहुंचकर लंबी जांच-पड़ताल की। इस दौरान सौरभ भदौरिया ने कई और अहम दस्तावेज भी टीम को सौंपे। बकौल सौरभ भदौरिया IB की प्रारंभिक जांच करीब-करीब पूरी हो चुकी है। जुलाई महीने में ही IB अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी। शुक्रवार को दिल्ली में IB के अधिकारियों ने एक बार फिर सौरभ भदौरिया को बुलाकर पूछताछ कर उनके बयानों को दर्ज किया। 

दोषी पुलिस कर्मियों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई

 

Bikru Case के बाद गैंगस्टर विकास दुबे समेत 6 बदमाशों को Police और STF ने एनकाउंटर में मार गिराया। करीब 43 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसमें विकास दुबे का खजांची जयकांत बाजपेयी भी शामिल है। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि जयकांत बाजपेयी के संबंध पूर्व एसएसपी अनंत देव समेत कई अफसरों से रहे हैं। कई थानेदार और सीओ से भी जयकांत बाजपेयी की दोस्ती थी। तमाम से दरोगा और थानेदार जयकांत बाजपेयी के घर में ही रहते थे। इस बात का खुलासा भी हो चुका है। कांड के बाद IG की तरफ से भेजी गई पुलिस टीम को कई दरोगा घर में रहते मिले थे। कुछ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई भी हुई थी। सौरभ भदौरिया का कहना है कि अब तक 67 पुलिस कर्मी दोषी पाए गए हैं लेकिन किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

सौरभ भदौरिया (RTI Activist & Advocate)

सौरभ भदौरिया ने CBI को भी दर्ज कराए बयान

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। सौरभ ने बिकरु कांड की जांच में अनियमितता होने की शिकायत दर्ज कराई। सौरभ का आरोप है कि जयकांत बाजपेयी के फर्जी पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के मामले में Kanpur Police ने जांच के दौरान गंभीर धाराएं हटा दी हैं। जिसका सीधा लाभ आरोपी को मिला। सौरभ ने जय बाजपेई के सूदखोरी समेत अवैध और गोरखधंधों में संलिप्त पुलिस कर्मियों पर अब तक कार्रवाई न होने की बात अफसरों से कही। सौरभ का आरोप है कि विभागीय अफसर ही दोषी पाए गए अपने मातहतों को बचाने में जुटे हुए हैं।

सिक्योरिटी को लेकर सौरभ भदौरिया ने जताई चिंता

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने अपनी सिक्योरिटी को लेकर अफसरों के सामने चिंता व्यक्त की। सौरभ का कहना है कि वह Bikru Case से जुड़े तमाम मामलों के इकलौते गवाह हैं जो हर जांच एजेंसी को कागजात से लेकर तमाम सबूत और साक्ष्य अब तक मुहैया करवाते आ रहे हैं लेकिन इन सबके बाद भी शासन को उनके जान की चिंता नहीं है। सौरभ का आरोप है कि कुछ महीना पहले जो एक गनर मिला था वह भी अफसरों की तरफ से छीन लिया गया। बकौल सौरभ 20 जून 2021 से गवाह सुरक्षा अधिनियम भी लागू हो गया है।

सौरभ का कहना है कि 10 दिसंबर 2020 को उन्हें सुरक्षा मुहैया हुई थी। 14 जून 2021 को सुरक्षा हटा ली गई। सौरभ ने आशंका जताई है कि उनकी शिकायत पर ही जयकांत वाजपेयी और दोषी पुलिस कर्मियों पर जांच बैठी है। सभी रसूखदार लोग हैं। इस लिए कभी भी उनकी हत्या होने की आशंका है।


  • आंसू और सिसकियां बरकरार, इंसाफ का है इंतजार
  • न पीड़ित और न ही आरोपितों के परिजन संतुष्ट
  • Bikru Case में 44 आरोपित सलाखों के पीछे कैद
  • गैंगस्टर विकास दुबे समेत 6 आरोपी Encounter में ढेर
  • सिर्फ तीन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कार्रवाई 

 

खजांची जय बाजपेयी और विकास दुबे (फोटो साभार-गूगल)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Kanpur स्थित Bikru Case की आज बरसी है। प्रदेश और देश को हिलाकर रख देने वाले चर्चित Bikru Case में आंसू और सिसकियां अब भी बरकरार हैं। शहीदों के परिजनों को इंसाफ का इंतजार है। CO देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद गैंगस्टर Vikas Dubey समेत उसके 6 गुर्गे Encounter में ढेर हुए। 44 आरोपितों को बाद में पुलिस ने अलग-अलग जगहों से Arrest कर जेल की सलाखों के पीछे कैद किया। इसमें गैंगस्टर का खजांची जयकांत बाजपेयी भी शामिल है। जयकांत बाजपेयी और उसके भाइयों के खिलाफ पुलिस ने 24 घंटे पहले ही गैंगस्टर एक्ट के मामले में चार्जशीट Court में दाखिल कर दी लेकिन NSA की कार्रवाई अब तक नहीं की गई। जबकि तमाम से दूसरे मामलों में बंद आरोपितों के खिलाफ NSA की कार्रवाई हो चुकी है। खास बात ये रही कि Bikru Case के बाद तमाम सत्ताधारी दल के नेताओं और बड़े नौकरशाहों का अपराधियों से गठजोड़ का खुलासा भी हुआ। वो एक अलग बात है कि ठोस कार्रवाई किसी पर अब तक नहीं हो सकी है।  

Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर विकास दुबे के साथ जय कांत बाजपेयी (लाल घेरे में) (फोटो-गूगल)

2/3 जुलाई की रात गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्राया था Bikru

 

Kanpur के शिवली थाना एरिया के अंतर्गत आने वाले Bikru गांव में गैंगस्टर Vikas Dubey को Arrest करने के लिए तीन थानों की फोर्स पहुंची थी। टीम का नेतृत्व क्षेत्राधिकारी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे। पुलिस टीम के गांव में पहुंचते ही थर्टी स्प्रिंग फील्ड राइफल जैसे स्वचालित हथियारों से लैस Vikas Dubey और उसके गुर्गों ने चारो तरफ से घेकरर अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी। हमलावर मकान के ऊपर से फायरिंग कर रहे थे। जिसकी वजह से पुलिस को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई। करीब आधा दर्जन पुलिस कर्मी घायल हुए। STF ने 10 दिन के अंदर Vikas Dubey समेत 6 बदमाशों को Encounter में ढेर कर दिया। विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी समेत 44 आरोपितों को अलग-अलग जगहों से Arrest कर पुलिस ने जेल भेजा।

30 साल बाद Bikru गांव में लोकतंत्र की बहाली

 

Bikru गांव में लोकतंत्र करीब तीन दशक तक बंधक बना रहा। विकास दुबे और उसके गुर्गे के खिलाफ ग्रामीण कभी मुंह नहीं खोल पाए। प्रधानी से लेकर जिला पंचायत के चुनाव में विकास दुबे का ही सिक्का चलता था। इस बार पंचायत चुनाव में लोकतंत्र की बहाली हो गई। ग्रामीणों ने पहली बार अपने मन के नेता को वोट देकर चुना है। 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद Bikru गांव में करीब 6 महीने तक PAC का पहरा रहा लेकिन अब वह भी हट चुका है।  

 

जय बाजपेयी पर खूब बरसी मेहरबानी

 

सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक अमले में तगड़ी पैंठ रखने वाले  गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी पर अफसरों ने खूब कृपाबरसाई। Bikru Case के कुछ घंटे बाद जब Kanpur के काकादेव थाना एरिया में दो लावारिस कार पुलिस ने बरामद की तो Bikru Case के तार सीधे जय बाजपेयी तक जा पहुंचे। STF ने जय बाजपेयी को टांग लिया। दर्जनों टीमें विकास दुबे की तलाश कर रही थीं तो दूसरी तरफ एक टीम Lucknow में जय बाजपेयी से पूछताछ में जुटी थी लेकिन जय ने कोई राज नहीं उगले। उस पर कृपाबरस रही थी लेकिन जैसे ही STF के DIG बदले गए जय बाजपेयी की घिग्घी बंध गई। अगले कुछ घंटों के दौरान उसने तमाम राज STF के सामने उगल दिए लेकिन फिर भी उसे शासन स्तर से बचाने की कवायद जारी रही। हालांकि सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव की वजह से जय बाजपेयी को Arrest कर जेल भेजा गया। बाद में जय बाजपेयी और उसके भाइयों के खिलाफ Kanpur की नजीराबाद पुलिस ने गैगस्टर एक्ट की कार्रवाई की। फरार भाइयों पर इनाम तक घोषित किया गया। सभी सरेंडर कर जेल गए।

 

सौरभ भदौरिया (Advocate & RTI Activist)

ED, IT से लेकर IB तक ने की जांच

 

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया की तमाम शिकायतों के बाद ED & IB भी जय बाजपेयी को लेकर सक्रिय हो गई। बकौल सौरभ भदौरिया उन्होंने शपथ पत्र देकर जय बाजपेयी, उसके भाइयों और पत्नी की शिकायतें की थीं। पूर्व एसएसपी अनंत देव समेत कई पुलिस वालों के जय बाजपेयी से साठगांठ का आरो लगाकर शिकायत की। तमाम बेनामी चल और अचल संपत्तियों के कागजात भी मुहैया कराए लेकिन अभी तक तमाम संपत्तियों को जब्त नहीं किया गया। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि SIT की जांच रिपोर्ट में दोषी करार दिए गए पूर्व एसएसपी अनंत देव पर अब तक शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, आखिर क्यों ? सौरभ भदौरिया का आरोप है कि जय बाजपेयी के तमाम कारोबार अब भी संचालित हो रहे हैं।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि ASP केसी गोस्वामी की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए 17 पुलिस कर्मियों के खिलाप अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है। तमाम पुलिस कर्मी अब भी मलाईदार जगहों पर चार्ज पर हैं। अधिकांश थानेदार वही पुराने हैं जिनको SIT संदिग्ध बता चुकी है। सौरभ का कहना है कि Bikru Case में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की शहादत के बाद भी अपराधियों और पुलिस का गठजोड़ अफसर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए हैं। अनंतदेव का सस्पेंशन तो कर दिया गया लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? आरोप है कि जेल की सलाखों के पीछे कैद जय बाजपेयी पर अब भी कृपाबरस रही है। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों में चालान के समय धाराओं में खेलकिया गया। सौरभ ने अपनी जान को खतरा बताते हुए कहाकि उन्हें शासन और प्रशासन स्तर से अभी तक समुचित सुरक्षा नहीं मिली है। सौरभ का कहना है कि दर्जनों बार वह सुरक्षा के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। मेरी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।

SIT को तमाम दस्तावेज मुहैया कराने के बाद गवाही देने वाले सौरभ भदौरिया का कहना है कि Uttar P{radish में तमाम बड़े माफियाओं की संपत्तियों को ढहाने के बाद बेनामी संपत्तियों को जब्त किया गया। लेकिन 8 पुलिस कर्मियों की हत्या करने वाले विकास दुबे और उसके खजांची की संपत्तियों को प्रशासन अब तक छू नहीं पाया है।

682 करोड़ की संपत्तियों के दस्तावेज सौंपे

सौरभ भदौरिया का कहना है कि विकास दुबे  और उससे जुड़े अपराधी, नेताओं, पुलिस-प्रशासन के अफसरों से लेकर विकास के खजांची जय वाजपेयी की 682 संपत्तियों की सूची मय दस्तावेजों के SIT, ED,IT को सौंप दी है लेकिन एक साल बाद भी अभी तक जांच ही चल रही है। अब सबूत देने वाले लोग अपराधियों से लेकर अधिकारियों के निशाने पर हैं। SIT की जांच में शामिल अधिकारी साफ कहते हैं कि हमने अपनी जांच करके सरकार को सौंप दी है। जब सरकार को दोषी अधिकारी ही पसंद हैं तो हम क्या कर सकते हैं ? सरकार ने अभी ईडी-आयकर को जांच के लिए क्यों नहीं लिखा ?

कानपुर के पूर्व एसएसपी के साथ विकास दुबे का खजांची जय बाजपेयी (फोटो साभार-गूगल)

 

तत्कालीन DIG का करीबी था जय बाजपेयी

 Bikru Case के बाद जब STF ने छानबीन शुरु की तो तमाम चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। पूछताछ के दौरान जयकांत बाजपेयी ने खुद तमाम जानकारियां साझा कीं। जयकांत बाजपेयी की अफसरों और विकास दुबे के साथ वाली तमाम फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। छानबीन में पता चला कि जय बाजपेयी पूर्व डीआइजी अनंत देव का बेहद करीबी था। जय बाजपेयी के मकान में दर्जन भर से अधिक पुलिस कर्मी बतौर किराएदार रहते थे। इसमें कई पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच में सबूत मिले और उन पर कार्रवाई भी हुई।

44 Arrest, 6 Encounter में ढेर, तीन पर NSA

Bikru Case में अब तक 44 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने शिवम दुबे उर्फ दलाल, बब्लू मुस्लमान और रमेशचन्द्र के खिलाफ NSA की कार्रवाई की है। मामला माती की गैंगस्टर कोर्ट में विचाराधीन है। जहां पर ज्यादातर आरोपितों की जमानत अर्जी दाखिल होने के बाद कोर्ट ने उसे खारिज भी कर दिया है। नाबालिग के जमानत की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है।

पुलिस ने 3 जून की सुबह प्रेम प्रकाश पाण्डेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। 8 जुलाई को हमीरपुर में अमर दुबे, 9 जुलाई को पनकी में प्रभात मिश्रा, इटावा में प्रवीन दुबे उर्फ बउआ और 10 जुलाई को सचेंडी में विकास दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया। 

उसके बाद विष्णुपाल उर्फ जिलेदार, राम सिंह, गोपाल सैनी, हीरू दुबे, उमाकांत उर्फ गुड्डन, शिवम दलाल, शिवम बीडीसी, रामू बाजपेई, श्यामू बाजपेई, छोटू शुक्ला, राहुल पाल, जहान सिंह, दयाशंकर अग्निहोत्री, शशिकांत उर्फ सोनू, शिव तिवारी, बाल गोविंद, क्षमा, रेखा, शांति, संजय दुबे उर्फ संजू, सुरेश वर्मा, विनय तिवारी, केके शर्मा, गुड्डन त्रिवेदी, जय बाजपेई, प्रभात शुक्ला, वीरू दुबे, धीरू दुबे, रमेश चन्द्र , गोविंद सैनी, नन्हू यादव, बब्लू मुस्लमान, राजेन्द्र कुमार, सोनू उर्फ सुशील तिवारी और अखिलेश दीक्षित को जेल भेजा।

 हीरू दुबे बना गैंग का नया लीडर


आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इन सभी को लेकर नया गैंगचार्ट तैयार किया। इस गैंग को नंबर D-179 दिया गया। इस नए गैंग का लीडर हीरू दुबे को बनाया गया। इससे पहले विकास दुबे के हाथ में गैंग की कमान थी। गैंग में करीब दर्जन भर सदस्य हैं।

 नाबालिग खुशी दुबे की रिहाई के लिए संघर्ष

Bikru Case के बाद STF ने विकास दुबे के दाहिने हाथ अमर दुबे को हमीरपुर जनपद में Encounter कर ढेर कर दिया। अमर दुबे की पांच दिन पहले ही शादी हुई थी। पुलिस ने अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को Arrest कर जेल भेज दिया। चूंकि खुशी नाबालिग थी, इस लिए उसे बाराबंकी के बाल सुधार गृह में भेजा गया। खुशी की तबियत कई बार बिगड़ चुकी है। खुशी की रिहाई को लेकर कई संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी का कहना है कि पांच दिन पहले जो लड़की ब्याह कर आई थी वो भला इतना बड़ा कांड कैसे कर सकती है ? मैं ब्राम्हण हूं संगठन के दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने खुशी की रिहाई के लिए सबसे पहले बिगुल बजाया था। उनका यह संघर्ष अब धीरे-धीरे बड़े आंदोलन की तरफ तब्दील हो रहा है। तमाम और संगठन के लोग भी उनसे जुड़ रहे हैं।