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STF और हापुड़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में धरा गया

UP के अलग-अलग जनपदों में दर्ज हैं दो दर्जन से अधिक मुकदमें

गिरोह के तमाम सदस्य पहले से ही जेल में हैं बंद

शातिर लुटेरे रोहित के पीछे करीब पांच महीने से लगी थी STF

Yogesh Tripathi


Uttar Pradesh Police की नाक में लंबे समय से दम करने वाले एक लाख रुपए के इनामिया बदमाश रोहित को STF  ने हापुड़ में Arrest कर लिया। शातिर लुटेरे रोहित की तलाश में STF की टीमें पिछले पांच महीने से लगी थीं लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। सोमवार को STF की टीम ने हापुड़ जनपद की पिलखुआ थाना पुलिस की मदद से लुटेरे को Arrest कर लिया। शातिर लुटेरे पर गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर,  गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई जनपदों में मुकदमें पंजीकृत हैं। गिरोह के तमाम बदमाशों को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।

वांछित और इनामिया बदमाशों की धरपकड़ के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स (STF) समय-समय पर विशेष अभियान चलाती है। एडीशनल एसपी (STF) के निर्देश पर STF इंस्पेक्टर घनश्याम यादव की अगुवाई में एक टीम शातिर लुटेरे और एक लाख के इनामिया रोहित को दबोचने के लिए बनाई गई। जिसमें इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार त्रिपाठी, इंस्पेक्टर ओम शंकर शुक्ला, हेड कांस्टेबल सरोज कुमार अवस्थी, गिरिजा शंकर यादव, दिलीप कुमार, कुलदीप सिंह, राजेश पाल, शिव भोला शुक्ला, मुकेश प्रजापति चालक दल के सुरेश सिंह, रईस अहमद और जैल यादव शामिल थे।

STF की इस भारी भरकम टीम ने हापुड़ जनपद में कुछ दिन पहले डेरा डाल दिया। सोमवार को जरिए मुखबिर सूचना मिली कि एक लाख का इनामी बदमाश रोहित कुमार पिलखुआ थाना एरिया के बंद फाटक के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही STF की टीम ने बंद फाटक के पास घेराबंदी की। टीम को पास आता देख लुटेरा रोहित भागने लगा तो टीम ने हल्का बल प्रयोग कर उसे दबोच लिया।

STF इंस्पेक्टर घनश्याम यादव ने लुटेरे रोहित से पूछताछ की तो उसने तमाम चौंकाने वाली जानकारियां टीम को दी। रोहित ने बताया कि उसने Uttar Pradesh के तमाम जिलों में लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया है। कुच वारदातों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई। सबसे अधिक वारदातें गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, अलीगढ़ और बुलंदशहर में की है। बुलंदशहर की पुलिस ने सबसे पहले 2012 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की थी। उसके बाद दो बार और बुलंदशहर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की। 2025 में गाजियाबाद की मुराद नगर पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की।

पूछताछ में लुटेरे रोहित कुमार ने इंस्पेक्टर घनश्याम यादव को बताया कि 9 जून 2025 को उसने अपने साथी छोटे, कुलदीप, संजय, सचिन के साथ मिलकर थाना पिलखुआ जनपद हापुड़ में लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। सभी ने मिलकर ईको कार में सवार पांच लोगों के साथ मारपीट कर लूटपाट की। वारदात के समय एक व्यक्ति की अंगुली में गंभीर चोट पहुंचाकर उसकी अंगूठी और करीब 56 हजार रुपए के नकदी लूट ली थी। युवकों से एटीएम का पासवर्ड पूछकर 10 हजार रुपए भी निकाल लिए थे। गिरफ्तारी के बाद STF ने लुटेरे को हापुड़ पुलिस को सौंप दिया गया।

 

  • पीड़ित की शिकायत और Portal की खबर को अफसरों ने लिया था संज्ञान में
  • तत्कालीन DM (Kanpur Naga) ने गठित की थी तीन सदस्यीय SIT (Team)
  • कानूनगो से लेखपाल बनाए गए Alok Dubey के खिलाफ दर्ज है FIR
  • जांच और छानबीन में करोड़ों रुपए की तीन दर्जन से अधिक संपत्तियों का पता चला



Yogesh Tripathi 

 

“शासन और प्रशासन हमारे अंगुलियों पर नाचता है… पैरवी करना छोड़ दो नहीं तो तुम लोगों को दुनिया छोड़नी पड़ेगी... अगर फिर तुम लोग कचहरी या वकीलों के बस्ते पर दिखे...मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां... तुम्हारे परिवार को बर्बाद कर दूंगा...तेरी लाश का पता नहीं चलेगा... चल यहां से चला जा तू अब नहीं तो जान से जाएगा...” फिल्मी स्टाइल में अधिवक्ता संदीप सिंह को धमकी देने वाले Kanpur के राजस्व कर्मचारी Alok Dubey पर अंतत: कार्रवाई का “हंटर” चल गया। DM (Kanpur Nagar) के आदेश पर इस राजस्व कर्मचारी (कानूनगो) का डिमोशन कर उसे लेखपाल बना दिया गया है। खास बात ये है कि इस भ्रष्ट “सरकारी कर्मचारी” के पास करोड़ों रुपए के कीमत की करीब 40 संपत्तियों का भी पता चला है। कानूनगो से लेखपाल बने इस भ्रष्टाचारी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR पहले से ही दर्ज है। जल्द ही पुलिस Case की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर सकती है। रडार पर लेखपाल Aruna Dwivedi भी हैं। देर सबेर ही सही कार्रवाई उन पर भी तय मानी जा रही है।



उल्लेखनीय है कि 3 दिसंबर 2024 को www.redeyestimes.com (News Portal) ने राजस्व कर्मचारी Alok Dubey और लेखपाल Aruna Dwivedi के सरकारी पदों पर बैठकर दान-विलेख की संपत्ति के अभिलेखों में हेरफेर कर बेशकीमती जमीनों को खरीदने और बेचने की खबर को प्रकाशित किया था। News Portal की खबर को तत्कीलन जिलाधिकारी ने संज्ञान में लेते हुए तीन सदस्यीय SIT गठित की थी।  इस टीम में एडीएम (न्यायिक), एसडीएम सदर और एसीपी कोतवाली शामिल थे। तीनों अफसरों ने लंबी जांच के बाद Report जिला मजिस्ट्रेट को सौंपी थी। जिसके बाद सबसे पहले संलिप्त सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR रजिस्टर्ड हुई और अब उसका डिमोशन कर लेखपाल बना दिया गया है।

 

ग्राम कला का पुरवा, (रामपुर भीमसेन), थाना सचेंडी (कमिश्नरेट पुलिस) कानपुर निवासी अधिवक्ता संदीप सिंह ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी और बाद में जानमाल की धमकी मिलने के पूरे प्रकरण की शिकायत सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंह, गृहसचिव, उत्तर प्रदेश के पुलिस मुखिया, जिलाधिकारी, कमिश्नर को पत्र लिखकर की थी। तत्कालीन जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। अपर जिलाधिकारी न्यायिक (अध्यक्ष), उप जिलाधिकारी (सदर) (सदस्य) और सहायक पुलिस आयुक्त (कोतवाली) सदस्य थे।

  


अधिवक्ता संदीप सिंह जुबानी, ये है फर्जीवाड़े की पूरी कहानी

ग्राम कला का पुरवा, (रामपुर भीमसेन), थाना सचेंडी, कानपुर निवासी संदीप सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि उनकी दादी स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा ने प्रार्थी व उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह को अपनी कृषि भूमि की रजिस्टर्ड वसीयत 31/05/2013 को की थी। स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला ने 17/07/2013 को पंजीकृत दान विलेख के जरिए अन्य भूमि/संपत्तियों के साथ-साथ एक और ग्राम सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या 207/1.0990 हेक्टेयर तथा रामपर भीमसेन स्थित आराजी संख्या 895/1.7580 हेक्टयर की भी लिखापढ़ी की थी। दादी की रजिस्टर्ड़ वसीयत और दान विलेख के जरिए मिली संपत्तियों का प्रार्थी संदीप सिंह, उसके भाई प्रदीप सिंह, पिता बीरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ भोला सिंह, चाचा जंगबहादुर सिंह व अशोक सिंह निर्विवाद रूप से मालिक हैं और अभी तक उक्त संपत्तियों की देखरेख व कृषि योग्य भूमि पर खेती करते आ रहे हैं।

संदीप सिंह का आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी W/O रघुवीर सिंह ने इस वसीयत के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिवीजन (कानपुर नगर) की कोर्ट में मूलवाद संख्या 2550/2013 राजपति देवी बनाम बीरेंद्र सिंह आदि का वाद दाखिल किया। बाद में श्रीमती राजपति ने खुद ही यह वाद कोर्ट में वापस ले लिया। राजपित देवी ने दादी स्वर्गीय मोहन लाला उर्फ लाल साहिबा के पंजीकृत दान विलेख के खिलाफ सिविल जज (जूनियर डिवीजन) / एफ.टी.सी कोर्ट में मूलवाद संख्या 1368/2013 को प्रस्तुत किया। इस वाद को भी श्रीमती राजपति देवी ने कोर्ट में मौजूद रहकर वाद को वापस ले लिया।

संदीप सिंह का आरोप है कि उनकी बुआ राजपति देवी और राजकुमारी देवी ने प्रार्थी की दादी स्वर्गीय श्रीमती मोहन लाला के रजिस्टर्ड वसीयत को छिपाकर धोखाधड़ी करते हुए उक्त कृषि योग्य भूमि को अपने नाम सरकारी अभिलेखों में चढ़वाने के लिए नायब तहसीलदार (बिठूर) की कोर्ट में वाद हल्का लेखपाल अरुणा दिवेदी मकान नंबर 14-B बाबा नगर नौबस्ता, कानपुर और तहसील राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे S/O स्वतंत्र कुमार दुबे R/O एलआइजी 17, दयानंद विहार फेस-1, कल्याणपुर, कानपुर नगर की साठगांठ से प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रार्थी के मुकदमें अलग कोर्ट में चल रहे थे। जिसे भी राजकुमारी और राजपित देवी ने नायब तहसीलदार (बिठूर) कोर्ट से छिपा लिया। नायब तहसीलदार (बिठूर) की कोर्ट ने एक पक्षीय आदेश 11/03/2024 राजपति देवी और राजकुमारी के पक्ष में सुनाते हुए भूमि को उनके नाम पर सरकारी अभिलेखों में अंकित करने का आदेश जारी किया।

 

चूंकि स्थानीय लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्माचारी आलोक दुबे की की साठगांठ पहले से थी, इस लिए नायब तहसीलदार (बिठूर) कोर्ट ने 11/03/2024 जब एक पक्षीय आदेश दिया तो राजपति देवी, राजकुमारी ने स्थानीय लेखपाल अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे को उसी दिन अर्थात 11/03/2024 को फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आराजी संख्या 895 का जुज रक्बा 0.3070 का दोनों के हक में बैनामा कर दिया। 12/03/2024 को राजकुमारी देवी ने राजपति के हक में अवैध तौर पर दानपत्र भी निष्पादित कर दिए। इतना ही नहीं श्रीमती राजपति ने अन्य आराजियों का भी अवैध तौर पर विक्रय अनुबंध पत्र अरुणा व आलोक के हक में कर दिया।

संदीप सिंह का आरोप है कि करीब पांच महीने बाद स्थानीय लेखपाल रहीं अरुणा दिवेदी और राजस्व कर्मचारी आलोक दुबे ने उपरोक्त सभी भूमि 06/08/2024 को कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी करते हुए सभी कागजातों को वैध बताकर मालिकाना हक आर.एन.जी इंफ्रा R/O 15/78 सिविल लाइंस कानपुर नगर के भागीदार अमित गर्ग S/O स्वर्गीय प्रेम नारायण गर्ग से साठगाठ करके एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत फर्जी विक्रयनामा आर.एन.जी इंफ्रा के पक्ष में विक्रयनामा निष्पादित कर विक्रय कर दिया।

आरोप है कि इसी तरह लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्माचारी आलोक दुबे ने प्रार्थी संदीप सिंह व अन्य परिजनों की ग्राम सिंहपुर कठार स्थित आराजी संख्या 207 रक्बा 0.5495 हेक्टेयर का कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से दिनांक 16/05/2024 को अपने हक में फर्जी विक्रय पत्र निष्पादित करवा लिया। जबकि उपरोक्त आराजी संख्या 207 पर श्रीमती राजपति देवी और राजकुमारी का किसी भी प्रकार का मालिकाना हक नहीं था।

Sandeep Singh का आरोप है कि राजपति देवी, राजकुमारी देवी ने अपने परिजनों और लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्मचारी आलोक दुबे व अमित गर्ग ने आपसी सांठगांठ कर सुनियोजित षडयंत्र के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त करने की नीयत से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों को तैयार कर उपरोक्त सभी भूमि का बैनामा करवा लिया। सभी लोगों ने गिरोह बनाकर कूटरचित कागजातों के जरिए न सिर्फ फर्जी बैनामा करवाया बल्कि प्रार्थी व उसके परिजनों को आर्थिक और मानसिक अपूर्णनीय भी पहुंचाई है। जिसके लिए उपरोक्त सभी लोग जिम्मेदार हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में Sandeep Singh ने आरोप लगाया है कि लेखपाल अरुणा दिवेदी और तहसील कर्मचारी आलोक दुबे एक संगठित गिरोह बनाकर सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए भू-माफियाओं और सफेदपोश लोगों का रुपया लगवा कर जमीनों की खरीद-फरोक्त का धंधा भी करते हैं। आलोक दुबे ने बिठूर में रिंगरोड के पास कई बीघा भूमि अपने परिजनों के नाम पर पहले खरीदी और बाद में उसकी बिक्री की। कुछ जगहों का मुआवजा भी उठा लिया।


  • SIT की जांच में दोषी ठहराए गए थे Anant Dev Tiwari समेत कई पुलिस कर्मी
  • SIT ने वृहद दंड दिए जाने की सिफारिश अपनी जांच रिपोर्ट में की थी 
  • IPS Officer नीलाब्जा चौधरी कर रहे थे Anant Dev की जांच 
  • Bikru Case में सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों की गोलियों से भूनकर की गई थी हत्या
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विकास दुबे के खजांची जय कांत बाजपेयी की जमानत खारिज की
  • हाईकोर्ट ने जयकांत की जमानत खारिज करने के पीछे उसके खिलाफ दर्ज अपराधिक मामलों को बनाया आधार


Yogesh Tripathi

Kanpur में करीब तीन साल पहले हुए बहुचर्चित Bikru Case में IPS Officer Anant Dev Tiwari को बड़ी राहत मिली है।  Clean Chit मिलने से Anant Dev Tiwari के दामन पर लगे दाग अब धुल गए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में जब Bikru Case हुआ था तो अनंत देव उस समय DIG (STF) थे। कुछ समय पहले ही उनका ट्रांसफर STF में किया गया था। इससे पहले वे SSP कानपुर थे। Bikru Case के बाद शासन ने SIT जांच के आदेश दिए थे। SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाते हुए उनके खिलाफ वृहद दंड दिए जाने की संस्तुति की थी। इस जांच रिपोर्ट के आने पर शासन ने तत्काल प्रभाव से IPS Officer अनंत देव तिवारी को सस्पेंड कर दिया था। उनके सस्पेंशन के बाद जांच एक सीनियर IPS Officer नीलाब्जा चौधरी को सौंपी गई थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जांच चल रही थी कि इस बीच करीब तीन महीना पहले शासन ने Anant Dev Tiwari की बहाली करते हुए उन्हें DIG (GRP) के पद पर तैनात कर दिया। थोड़े ही दिन बाद उनको STF की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि रिटायरमेंट से कुछ महीना पहले ही अनंत देव तिवारी को क्लीन चिट मिलने से उनके दामन पर लगे दाग करीब-करीब धुल गए हैं। Anant Dev Tiwari मूल रूप से फतेहपुर जनपद के निवासी हैं। उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाना जाता है। वह लंबे समय तक STF में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पाठा के जंगलों में दस्यु सम्राट ददुआ और ठोकिया जैसे दस्यु सरदारों का Encounter उन्होंने STF में ASP रहते हुए किया था। वर्ष 1991 में Anant Dev Tiwari ने प्रांतीय पुलिस सर्विस (PPS) की नौकरी ज्वाइन की थी। वर्ष 2006 में वह IPS Officer बने।

2 जुलाई 2020 की आधी रात तत्कालीन बिल्हौर क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्रा की अगुवाई में पुलिस टीम खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने के लिए Bikru गांव पहुंची थी। बताया जाता है कि पुलिस टीम के दबिश देने की सूचना विकास दुबे और उसके गिरोह को काफी पहले ही मिल गई थी। लिहाजा उसने पहले से ही तैयारी कर रक्खी थी। पुलिस टीम के पहुंचने पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने घेराबंदी कर स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मी शहीद हो गए। 

वारदात के कुछ घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर तमाम आडियो और वीडियो वॉयरल हुए। जिसके बाद शक की सूई लोकल पुलिस और तमाम अफसरों पर भी घूमने लगी। यही वजह रही कि तत्कालीन चौबेपुर थाना प्रभारी (SO) विनय तिवारी को भी STF ने Arrest कर लिया था। उसके बाद STF ने विकास दुबे के दाहिने हाथ अमर दुबे समेत कई गुर्गों को Encounter में मार गिराया। विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरेंडर कर दिया। Kanpur लाते समय सचेंडी के पास गाड़ी पलटने के बाद भाग रहे विकास दुबे को भी STF ने ढेर कर दिया था। 

 

 


Vikas Dubey के खजांची जयकांत की जमानत हाईकोर्ट में खारिज

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस मयंक कुमार जैन ने Bikru Case मामले में जेल की सलाखों के पीछे कैद जयकांत बाजपेयी उर्फ जय बाजपेयी की जमानत याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार जैन ने अपने आदेश में कहा कि अपराध की प्रकृति और दोषी होने की डिग्री गंभीर और जघन्य है। जयकांत बाजपेयी का जघन्य मामलों का लंबा-चौड़ा अपराधिक इतिहास रहा है। जयकांत बाजपेयी उस घटना में सक्रिय रूप से शामिल है, जिसमें क्षेत्राधिकारी समेत 8 पुलिस कर्मियों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस कांड में 7 पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। मुख्य आरोपी विकास दुबे को दो लाख रुपए, वारदात में प्रयुक्त 25 कारतूस मुहैया कराए गए। इस लिए अपराधिक पृष्ठभूमि वाले याची को जमानत नहीं दी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि Bikru Case में STF ने विकास दुबे के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी को भी लंबी पूछताछ के बाद Arrest किया था। जयकांत बाजपेयी के तार नौकराशाही से भी जुड़े थे। पूछताछ में जयकांत बाजपेयी ने STF को बताया था कि उसने विकास दुबे को कारतूस, नकदी और भागने के लिए कार मुहैया कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने चौबेपुर थाने में जयकांत बाजपेयी के खिलाफ IPC की धारा 147, 148, 149, 332, 353, 333, 307, 302, 3946, 412, 120-B, 34, 504, 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया था।
उधर, RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने पोर्टल से बातचीत में कहा कि SIT जांच में IAS, IPS & PPS Officr's शामिल थे। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में अनंत देव तिवारी समेत कई पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई थी। साथ ही SIT ने सभी के खिलाफ वृहद दंडात्मक कार्रवाई के लिए लिखा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सौरभ भदौरिया का कहना है कि जल्द ही वह विधिक परामर्श के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

  • बुलंदशहर के SSP ने रिटायर्ड DSP पर 25 हजार का इनाम घोषित किया
  • लंबे समय से फरार चल रहे हैं रिटायर्ड डीएसपी रणधीर सिंह
  • 2002 में Fake Encounter कर बीटेक के छात्र को मार डाला था

रिटायर्ड डीएसपी रणधीर सिंह पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुका है।

Yogesh Tripathi

करीब 19 साल पहले Fake Encounter में B.Tech छात्र को मार डालने वाले रिटायर्ड DSP रणधीर सिंह पर बुलंदशहर के SSP संतोष कुमार सिंह ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। रणधीर सिंह लंबे समय से फरार चल रहे हैं। वर्ष 2002 में इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए सिकंदराबाद में रणधीर सिंह ने किया था Fake Encounter ।

खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस Fake Encounter के मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए Uttar Pradesh Government पर 7 लाख रुपए जुर्माना अदा करने का आदेश जारी किया था। रिटायर्ड डीएसपी रणधीर सिंह इस मामले में फरार चल रहे हैं।

रणधीर सिंह वर्ष 2018 से इस मामले में फरार चल रहे हैं। कोर्ट ने कई बार नोटिस, जमानती वारंट और उसके बाद गैर जमानती वारंट जारी किया। रणधीर सिंह फिर भी कोर्ट में पेश नहीं हुए तो अदालत ने उनकी संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया। सिकंदराबाद की क्षेत्राधिकारी नम्रता श्रीवास्तव का कहना है कि अदालत से मिले कुर्की नोटिस को आगरा में रणधीर सिंह के पैतृक आवास और गाजियाबाद में उनके वर्तमान पतो पर चस्पा किया जा चुका है। इस मामले में सात अन्य पुलिस कर्मी कोर्ट में पेश हो चुके हैं।

Fake Encounter के बारे में बताया जा रहा है कि तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद-बुलंदशहर मार्ग पर बिलुसरी के पास बदमाशों ने बस के कंडक्टर को गोली मारकर घायल करने के बाद लूटपाट की थी। इसके बाद पुलिस ने एक कथित मुठभेड़ में एक बदमाश को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। पुलिस के मुताबिक बदमाश का नाम प्रदीप था। जो कि सिकंदराबाद के सहपानी गांव का निवासी था। प्रदीप के परिजनों ने इस Fake Encounter को कोर्ट में चुनौती दी थी। परिजनों का दावा है कि प्रदीप बीटेक का स्टूडेंट था। उस दिन वह फीस जमाकर घर आ रहा था। रास्ते में पुलिस ने उसे दबोचकर Fake Encounter कर दिया।