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-STF की (Kanpur Unit) को मिली बड़ी कामयाबी

-30 स्प्रिंग फील्ड राइफल (सेमी ऑटोमेटिक) भी बरामद

-STF ने एक ऑटोमेटिक कार्बाईन भी बरामद की

-STF के ADG अमिताभ यश ने की प्रेस कांफ्रेंस

पत्रकार वार्ता में मीडिया से बातचीत करते Amitabh Yash (ADG, STF)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के बहुचर्चित Bikru Case में करीब में ठीक आठ महीना बाद UPSTF को बड़ी सफलता मिली है। STF की टीम ने Encounter में मारे जा चुके Gangster Vikas Dubey को “पनाह” देने वाले 7 लोगों को Arrest कर लिया। पुलिस के लिए “पहेली” बनी अमेरिका निर्मित 30 स्प्रिंग फील्ड (सेमी ऑटोमेटिक राइफल), एक ऑटोमेटिक कार्बाइन समेत भारी मात्रा में असलहे भी STF की टीम ने बरामद किए हैं। उल्लेखनीय है कि 2/3 जुलाई 2020 की रात्रि को बिल्हौर सर्किल के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी Devendra Mishra की अगुवाई में दबिश देने पहुंची तीन थानों की Police Team पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने करीब एक हजार राउंड अंधाधुंध फायरिंग कर CO समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी।  

STF के शिकंजे में गैंगस्टर विकास दुबे को "पनाह" देने वाले आरोपी

STF के ADG अमिताभ यश ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मीडिया को बताया कि CO समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद Vikas Dubey रात में ही फरार हो गया था। फरार होने के बाद वह अपने बेहद करीबी “हमदर्द” के पास Kanpur Dehat में “पनाह” लिए रहा था। 7 दिन बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से पुलिस ने गिरफ्तार कर विकास दुबे को UP Police के सुपुर्द कर दिया था।  

Arrest बदमाशों के पास से बरामद 30 स्प्रिंग फील्ड (सेमी ऑटोमेटिक राइफल) और अन्य असलहे।

Kanpur की सीमा में प्रवेश करते ही STF की गाड़ी सचेंडी थाना एरिया में पलट गई। विकास दुबे मौका पाकर भागने लगा। जवाबी कार्रवाई में STF ने उसे Encounter में ढेर कर दिया था। Bikru Case में पुलिस ने Vikas Dubey समेत 6 लोगों को Encounter में मार गिराया था। विकास के खजांची जयकांत बाजपेयी समेत करीब 36 लोगों को पुलिस ने गिरप्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा। 

30 स्प्रिंग फील्ड राइफल से दागी गई थी गोलियां

Bikru Case की छानबीन में पता चला था कि हमलावरों ने पुलिस टीम पर 30 स्प्रिंग फील्ड (सेमी ऑटोमेटिक) राइफल से फायरिंग की थी। पुलिस ने मौके से अमेरिकन विंचेस्टर कारतूस बरामद किए थे। उसके बाद से ही पुलिस की टीमें इन घातक हथियारों को बरामद करने की जद्दोजहद कर रही थीं। विकास दुबे को “पनाह” देने वालों के बाबत भी पुलिस टीमों को कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पुलिस को वारदात में दो सेमी ऑटोमेटिक राइफल के प्रयोग होने की जानकारी मिली थी, जिनका प्रयोग विकास दुबे करता था। इन दोनों घातक किस्म के हथियारों का लाइसेंस विकास के छोटे भाई दीप प्रकाश उर्फ दीपू और भांजे के नाम पर था। 

Monday को मीडिया से बातचीत करते हुए STF के ADG अमिताभ यश ने बताया कि Kanpur (Unit) के क्षेत्राधिकारी T.B Singh, इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह, इंस्पेक्टर लान सिंह, सब इंस्पेक्टर शिवेंद्र सिंह ने Bikru Case के बाबत तमाम माध्यमों से सूचनाएं संकलित कीं। जरिए मुखिबर पता चला कि वारदात के बाद विकास दुबे, प्रभात मिश्रा और अमर दुबे ने Kanpur Dehat में फरारी के दौरान बेहद करीबी के घर पर “पनाह” ली थी। 

उसके बाद तीनों असलहे वहीं छिपाकर फरार हो गए थे। मुखबिर से ये भी पता चला कि इन असलहों और कारतूस को बेंचने के लिए मध्य प्रदेश के भिंड निवासी व्यक्ति से डील Final हो चुकी है। मुखबिर से यह भी सूचना मिली कि कारतूस और असलहों की बड़ी खेप Kanpur के भौंती स्थित पनकी पड़ाव चौराहे के पास बाईपास अंडरपास पर किया जाएगा। मुखबिर की सटीक सूचना के बाद STF की टीम ने तगड़ी घेराबंदी कर मौके से कई लोगों को Arrest कर लिया।

STF के हत्थे चढ़े विष्णु कश्यप ने पूछताछ के दौरान बताया कि Encounter में मारा गया प्रभात मिश्रा उसके बचपन का दोस्त था। दोनों ने साथ में पढ़ाई की थी। वारदात के बाद सुबह करीब चार बजे प्रभात ने फोन कर उसे शिवली में नदी के पुल के पास बुलाया था। उसने विष्णु से तीन गमछा और एक कार लेकर भी आने के लिए बोला था। विष्णु कश्यप अपने दोस्त छोटू के साथ उसकी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी लेकर कैलई रोड तिराहा पहुंचा। वहां झाड़ियों के पीछे छिपे विकास दुबे, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा गाड़ी में बैठ गए। सभी ने हथियारों का जखीरा और कारतूस भी गाड़ी में रख लिया।

कार को अमर दुबे ड्राइव कर रहा था। सभी सीधे Kanpur Dehat के रसूलाबाद स्थित विष्णु कश्यप के बहनोई रामजी उर्फ राधे के घर पहुंचे। सभी यहीं पर छिप गए। छोटू अपनी कार लेकर चला गया। 3 जुलाई की दोपहर राधे अपनी बाइक पर अमर दुबे को बैठाकर करियाझाला स्थित संजय परिहार उर्फ टिंकू की बगिया में पहुंचा। वहां पहले से ही अभिनव तिवारी उर्फ चिंकू, अर्पित मिश्रा उर्फ पुत्तू, विक्की यादव, अमन शुक्ला, मोहन अवस्थी मौजूद थे। अमर दुबे ने पुत्तू को बुलाकर ठहराने की व्यवस्था कराने की बात कही। पुत्तू इसके बाद अमर दुबे और राधे को अपने खेत पर स्थित ट्यूबवेल पर ले गया....

इसके बाद की डिटेल नीचे दिए गए STF के Press Note में पढ़िए...... 

 

STF ने Vikas Dubey के इन गुर्गों को किया Arrest

1-विष्णु कश्यप पुत्र हरिशंकर कश्यप निवासी ग्राम शिवली कानपुर देहात।

2-अमन शुक्ला पुत्र राज नारायण शुक्ला निवासी ग्राम धनीरामपुर थाना रूरा कानपुर देहात।

3-राम जी उर्फ राधे पुत्र बाबूराम निवासी वार्ड नंबर 11 तुलसी नगर रसूलाबाद कानपुर देहात।

4-अभिनव तिवारी उर्फ चिंकू पुत्र अनिल कुमार निवासी धनीरामपुर थाना रूरा कानपुर देहात।

5-मनीष यादव उर्फ शेरू पुत्र अभिलाष सिंह निवासी डिंडी कला थाना देहात जनपद भिंड मध्यप्रदेश।

6-संजय परिहार उर्फ पिंकू पुत्र नरेश परिहार निवासी करिया झाला झींझक थाना मंगलपुर कानपुर देहात।

7-शुभम पाल पुत्र 10 रामपाल निवासी मंगलपुर कानपुर देहात।

Vikas Dubey के गुर्गों के पास से ये हथियार हुए बरामद

1-एक सेमी ऑटोमेटिक राइफल मेड इन अमेरिका 30 स्प्रिंगफील्ड।

2-एक आटोमेटिक कार्बाइन।

3-एक रिवाल्वर।

4-एक एक नाली बंदूक।

5-दो तमंचे और कारतूस

 

 -शातिर राजकुमार उर्फ शेरा पर घोषित था 25 हजार रुपए का इनाम

-शेरा के साथी दीपक सिंह उर्फ अंशू को भी STF ने पकड़ा 


Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Special Task Force (UPSTF) की Kanpur (Unit) ने पत्रकारिता की “चादर” ओढ़कर लंबे समय से लूटपाट और चोरी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे 25 हजार रुपए के इनामी बदमाश को Arrest कर लिया। पकड़े गए शातिर का नाम राजकुमार उर्फ शेरा है। STF ने शेरा के साथी दीपक सिंह उर्फ अंशू को भी गिरफ्तार किया है। अंशू फतेहपुर जनपद के बिंदकी का रहने वाला है। जबकि शेरा Kanpur के South City स्थित दबौली एरिया में रहता है। 

पनकी पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेजा है। STF के मुताबिक शेरा ने पुलिस से बचने के लिए खुद को पत्रकारिता की “चादर” से ढक रखा था। उसके पास से एक यू-ट्यूब चैनल का परिचय पत्र (I Card) और संस्थान की तरफ से जारी पत्र भी मिला है। शेरा पर करीब आधा दर्जन से अधिक मुकदमें पंजीकृत हैं। चोरी, लूटपाट और राहजनी की कई वारदातों को वह अंजाम दे चुका है। जबकि दीपक के खिलाफ चार मुकदमें दर्ज हैं। पुलिस से बचने के लिए वह चैनल का परिचय पत्र प्रयोग करता था।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से वह मादक पदार्थ के धंधे में भी लिप्त था। STF ने शेरा और दीपक सिंह के पास से तमंचा, पांच मोबाइल फोन, करीब 56 हजार रुपए की नकदी भी बरामद की है। शेरा के मुताबिक वह चैनल में कैमरा मैन का काम करता था।

विशेष----

यह कोई बार पहली बार नहीं है जब कोई “शेरा” Kanpur में पकड़ा गया हो। इसके पहले भी कई तथाकथित “शेरा” पकड़े जा चुके हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर इन अपराधिक किस्म के “शेरा” जैसे लोगों को पत्रकारिता की चादर ओढ़ने की खुली छूट किसने दे रखी है ? हाईस्कूल फेल “शेरा” जैसे लोगों को संस्थान में किस आधार पर नौकरी दी जाती है ? क्या ऐसे संस्थानों और उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर पुलिस को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए ? शहर के जिम्मेदार पुलिस अफसर यदि अपनी आंख उठाकर चारो तरफ देखें तो उनके इर्द-गिर्द ही दर्जनों “शेरा” मिल जाएंगे। सच्चाई ये है कि इनको पकड़ने का साहस पुलिस के पास नहीं है।

-STF (Kanpur Unit) को प्रशंसा चिन्ह का सिल्वर मेडल 

-गणतंत्र दिवस के मौके पर टीम को मिला मेडल 

गणतंत्र दिवस पर सम्मानित होने के बाद STF (IG) अमिताभ यश के साथ Kanpur Unit

Yogesh Tripathi

Kanpur के फेथफुलगंज एरिया में बड़ी मस्जिद के पास से 17 जनवरी को देश के खूंखार आतंकवादियों में एक डॉक्टर जलीस अंसारी उर्फ डॉ. बम को Arrest करने वाली STF (Kanpur Unit) की टीम को प्रशंसा चिन्ह का सिल्वर मेडल देकर सम्मानित किया गया। 


17 जनवरी को STF (IG) अमिताभ यश के निर्देश पर Kanpur Unit के प्रभारी Ghanshyam Yadav और उनकी टीम के हेड कांस्टेबल धर्मपाल, आरक्षी अब्दुल कादिर, आरक्षी राजकुमार, आरक्षी मोहर सिंह ने फेथफुलगंज में बड़ी मस्जिद के पास फरार आतंकी डॉ. जलीस अंसारी को Arrest किया था। 
STF (Kanpur Unit) के प्रभारी Ghanshyam Yadav के साथ उनकी टीम के कांस्टेबल।


उल्लेखनीय है कि देश में करीब 50 जगहों पर सीरियल ब्लास्ट की आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाला ये खूंखार आतंकी करीब 26 साल बाद पैरोल पर जेल से बाहर आया था। मुंबई स्थित अपने घर से वह 15 जनवरी को भाग निकला। आतंकी जलीस अंसारी के भागने के बाद देश भर की खुफिया एजेंसियों के होश उड़ गए। 


STF (Kanpur Unit) ने आतंकी जलीस अंसारी को जब Kanpur में Arrest किया तो UP Police के DGP  O.P Singh ने टीम की तारीफ की। यही वजह रही कि Kanpur Unit के प्रभारी Ghanshyan Yadav और उनकी टीम को गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रशंसा चिन्ह का सिल्वर मेडल देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर STF (IG) अमिताभ यश भी मौजूद रहे। 


उल्लेखनीय है कि STF (Kanpur Unit) तमाम बड़ी घटनाओं और देश भर में फैले तमाम पेपर सॉल्वर गिरोह का पर्दाफाश कर तमाम सरगनाओं को गिरफ्तार कर चुकी है। कई बड़े और खूंखार अपराधी भी टीम ने गिरफ्तार किए हैं। जहरीली शराब के बड़े नेटवर्क का भी ये टीम भंडाफोड़ कर चुकी है।



-Most Wanted अंगद सिंह पर घोषित था 25 हजार का इनाम

-झांसी के सीपरी बाजार में UPSTF (Kanpur Unit) ने किया Arrest

-MP की ग्वालियर जेल में बंद है सरगना सरदार सिंह लकारा

झांसी के सीपरी बाजार थाना एरिया में STF (Kanpur Unit) के हत्थे चढ़ा 25 हजार का इनामी अंगद सिंह गुर्जर।

 Yogesh Tripathi

उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPST) की Kanpur Unit ने मध्य प्रदेश की ग्वालियर जेल में बंद खूंखार अपराधी सरदार सिंह लकारा के भतीजे अंगद सिंह को झांसी के सीपरी बाजार थाना एरिया में मध्यरात्रि को Arrest कर लिया। अंगद सिंह के सिर पर 25 हजार का इनाम घोषित था। उस पर कई संगीन मामले दर्ज हैं। करीब डेढ़ साल पहले व्यापारी संजय वर्मा पर अंगद ने भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस कांड के बाद से अंगद फरार था।

दुर्दांत हत्यारा और अपहरणकर्ता है सरदार सिंह लकारा

UPSTF (Kanpur Unit) के प्रभारी Ghanshyam Yadav के मुताबिक ग्वालियर जेल में सलाखों के पीछे कैद सरदार सिंह लकारा बेहद खूंखार किस्म का अपराधी है। भाड़े पर हत्याएं और अपहरण करने सरदार सिंह लकारा एक्सपर्ट है। उसके गिरोह में करीब दर्जन भर से अधिक अपराधी शामिल हैं। गिरोह का नेटवर्क यूपी के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कई जिलों में हैं।

गिरोह की कमान संभाले था अंगद सिंह

UPSTF (Kanpur Unit) के प्रभारी Ghanshyam Yadav के मुताबिक सरदार सिंह लकारा के जेल जाने के बाद उसका भतीजा अंगद सिंह गैंग के कमान संभाले था। पिछले कुछ महीने से उसके झांसी में मौजूद होने की सूचनाएं मिल रही थीं। जिसके बाद STF ने उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लेने के साथ मुखबिरों का जाल भी बिछाया। गुरुवार देर रात्रि अंगद की लोकेशन झांसी के सीपरी बाजार थाना एरिया में मिली। Mid-Night को STF की टीम ने सीपरी बाजार थाने के फोर्स की मदद से घेराबंदी कर अंगद को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से तमंचा, कारतूस, नकदी बरामद हुई है।

व्यापारी संजय वर्मा पर बरसाईं थी गोलियां

ग्वालियर जेल में बंद सरदार सिंह लकारा की रंजिश व्यापारी संजय वर्मा से चलती है। सरदार सिंह ने जेल से ही उसके मर्डर का ब्लूप्रिंट तैयार किया। योजना के तहत अलीगढ़ से भाड़े के शूटर्स बुलाए गए। सरदार सिंह लकारा के भतीजे अंगद सिंह और प्रहलाद सिंह ने शूटर्स को सभी सुविधाएं मुहैया कराईं। रैकी के बाद शूटर्स को रुपए की व्यवस्था भी दोनों ने की। 21 जुलाई 2018 को व्यापारी संजय वर्मा अपने ड्राइवर रवि वर्मा, गनर जय गोस्वामी और सुनील कुशवाहा के साथ झांसी न्यायालय में तारीख के बाद जब पजेरो गाड़ी से लौट रहे थे तो कचहरी चौराहे के पास सभी ने तमंचे और पिस्टलों से अंधाधुंध गोलियां दागीं। हमले में संजय, सुनील, जय गोस्वामी घायल हो गए। इलाज के दौरान जय गोस्वामी की मौत हो गई थी।

गोली कांड के बाद फरार हो गया था अंगद सिंह

व्यापारी पर हमले की FIR झांसी के नवाबाद थाने में मुकदमा अपराध संख्या 334/18, धारा- 147, 148, 149, 302, 307, 120(B), 506 IPC के तहत पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज की। अंगद सिंह इस कांड के बाद से फरार चल रहा था। कांड में आरोपित अन्य अभियुक्त जेल चले गए। इसके बाद अंगद सिंह गुर्जर ने गिरोह की कमान संभाल ली।

पहाड़ियों के बीच बसे जीजा के गांव को बनाया ठिकाना

UPSTF (Kanpur Unit) के प्रभारी Ghanshyam Yadav ने www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में बताया कि चाचा सरदार सिंह लकारा और गिरोह के अन्य बदमाशों के जेल जाने के बाद अंगद गुर्जन ने गिरोह की कमान संभाल ली। फरारी के लिए उसने अपना महफूज ठिकाना मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित डबरा की पहाड़ियों के बीच बसे अपने जीजा के गांव छोटी अकबई, थाना डबरा को बनाया। वहीं से अंगद गुर्जर अपने ताऊ सरदार सिंह लकारा के नाम पर वसूली का काम करने लगा। रंगदारी वसूलने के लिए वह कभी-कभी झांसी भी आता था। अपने मुकदमे की पैरवी के संबध में वकील से मिलने मध्यरात्रि वह प्राइवेट बस से झांसी पहुंचा। शिवानी तिराहे के पास सीपरी बाजार SHO की मदद से उसे तमंचा, कारतूस के साथ दबोच लिया गया।