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  • आंसू और सिसकियां बरकरार, इंसाफ का है इंतजार
  • न पीड़ित और न ही आरोपितों के परिजन संतुष्ट
  • Bikru Case में 44 आरोपित सलाखों के पीछे कैद
  • गैंगस्टर विकास दुबे समेत 6 आरोपी Encounter में ढेर
  • सिर्फ तीन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कार्रवाई 

 

खजांची जय बाजपेयी और विकास दुबे (फोटो साभार-गूगल)

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh के Kanpur स्थित Bikru Case की आज बरसी है। प्रदेश और देश को हिलाकर रख देने वाले चर्चित Bikru Case में आंसू और सिसकियां अब भी बरकरार हैं। शहीदों के परिजनों को इंसाफ का इंतजार है। CO देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद गैंगस्टर Vikas Dubey समेत उसके 6 गुर्गे Encounter में ढेर हुए। 44 आरोपितों को बाद में पुलिस ने अलग-अलग जगहों से Arrest कर जेल की सलाखों के पीछे कैद किया। इसमें गैंगस्टर का खजांची जयकांत बाजपेयी भी शामिल है। जयकांत बाजपेयी और उसके भाइयों के खिलाफ पुलिस ने 24 घंटे पहले ही गैंगस्टर एक्ट के मामले में चार्जशीट Court में दाखिल कर दी लेकिन NSA की कार्रवाई अब तक नहीं की गई। जबकि तमाम से दूसरे मामलों में बंद आरोपितों के खिलाफ NSA की कार्रवाई हो चुकी है। खास बात ये रही कि Bikru Case के बाद तमाम सत्ताधारी दल के नेताओं और बड़े नौकरशाहों का अपराधियों से गठजोड़ का खुलासा भी हुआ। वो एक अलग बात है कि ठोस कार्रवाई किसी पर अब तक नहीं हो सकी है।  

Encounter में मारे जा चुके गैंगस्टर विकास दुबे के साथ जय कांत बाजपेयी (लाल घेरे में) (फोटो-गूगल)

2/3 जुलाई की रात गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्राया था Bikru

 

Kanpur के शिवली थाना एरिया के अंतर्गत आने वाले Bikru गांव में गैंगस्टर Vikas Dubey को Arrest करने के लिए तीन थानों की फोर्स पहुंची थी। टीम का नेतृत्व क्षेत्राधिकारी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे। पुलिस टीम के गांव में पहुंचते ही थर्टी स्प्रिंग फील्ड राइफल जैसे स्वचालित हथियारों से लैस Vikas Dubey और उसके गुर्गों ने चारो तरफ से घेकरर अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी। हमलावर मकान के ऊपर से फायरिंग कर रहे थे। जिसकी वजह से पुलिस को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई। करीब आधा दर्जन पुलिस कर्मी घायल हुए। STF ने 10 दिन के अंदर Vikas Dubey समेत 6 बदमाशों को Encounter में ढेर कर दिया। विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी समेत 44 आरोपितों को अलग-अलग जगहों से Arrest कर पुलिस ने जेल भेजा।

30 साल बाद Bikru गांव में लोकतंत्र की बहाली

 

Bikru गांव में लोकतंत्र करीब तीन दशक तक बंधक बना रहा। विकास दुबे और उसके गुर्गे के खिलाफ ग्रामीण कभी मुंह नहीं खोल पाए। प्रधानी से लेकर जिला पंचायत के चुनाव में विकास दुबे का ही सिक्का चलता था। इस बार पंचायत चुनाव में लोकतंत्र की बहाली हो गई। ग्रामीणों ने पहली बार अपने मन के नेता को वोट देकर चुना है। 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद Bikru गांव में करीब 6 महीने तक PAC का पहरा रहा लेकिन अब वह भी हट चुका है।  

 

जय बाजपेयी पर खूब बरसी मेहरबानी

 

सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक अमले में तगड़ी पैंठ रखने वाले  गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी पर अफसरों ने खूब कृपाबरसाई। Bikru Case के कुछ घंटे बाद जब Kanpur के काकादेव थाना एरिया में दो लावारिस कार पुलिस ने बरामद की तो Bikru Case के तार सीधे जय बाजपेयी तक जा पहुंचे। STF ने जय बाजपेयी को टांग लिया। दर्जनों टीमें विकास दुबे की तलाश कर रही थीं तो दूसरी तरफ एक टीम Lucknow में जय बाजपेयी से पूछताछ में जुटी थी लेकिन जय ने कोई राज नहीं उगले। उस पर कृपाबरस रही थी लेकिन जैसे ही STF के DIG बदले गए जय बाजपेयी की घिग्घी बंध गई। अगले कुछ घंटों के दौरान उसने तमाम राज STF के सामने उगल दिए लेकिन फिर भी उसे शासन स्तर से बचाने की कवायद जारी रही। हालांकि सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव की वजह से जय बाजपेयी को Arrest कर जेल भेजा गया। बाद में जय बाजपेयी और उसके भाइयों के खिलाफ Kanpur की नजीराबाद पुलिस ने गैगस्टर एक्ट की कार्रवाई की। फरार भाइयों पर इनाम तक घोषित किया गया। सभी सरेंडर कर जेल गए।

 

सौरभ भदौरिया (Advocate & RTI Activist)

ED, IT से लेकर IB तक ने की जांच

 

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया की तमाम शिकायतों के बाद ED & IB भी जय बाजपेयी को लेकर सक्रिय हो गई। बकौल सौरभ भदौरिया उन्होंने शपथ पत्र देकर जय बाजपेयी, उसके भाइयों और पत्नी की शिकायतें की थीं। पूर्व एसएसपी अनंत देव समेत कई पुलिस वालों के जय बाजपेयी से साठगांठ का आरो लगाकर शिकायत की। तमाम बेनामी चल और अचल संपत्तियों के कागजात भी मुहैया कराए लेकिन अभी तक तमाम संपत्तियों को जब्त नहीं किया गया। सौरभ भदौरिया का आरोप है कि SIT की जांच रिपोर्ट में दोषी करार दिए गए पूर्व एसएसपी अनंत देव पर अब तक शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, आखिर क्यों ? सौरभ भदौरिया का आरोप है कि जय बाजपेयी के तमाम कारोबार अब भी संचालित हो रहे हैं।

सौरभ भदौरिया का आरोप है कि ASP केसी गोस्वामी की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए 17 पुलिस कर्मियों के खिलाप अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है। तमाम पुलिस कर्मी अब भी मलाईदार जगहों पर चार्ज पर हैं। अधिकांश थानेदार वही पुराने हैं जिनको SIT संदिग्ध बता चुकी है। सौरभ का कहना है कि Bikru Case में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिस कर्मियों की शहादत के बाद भी अपराधियों और पुलिस का गठजोड़ अफसर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए हैं। अनंतदेव का सस्पेंशन तो कर दिया गया लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? आरोप है कि जेल की सलाखों के पीछे कैद जय बाजपेयी पर अब भी कृपाबरस रही है। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों में चालान के समय धाराओं में खेलकिया गया। सौरभ ने अपनी जान को खतरा बताते हुए कहाकि उन्हें शासन और प्रशासन स्तर से अभी तक समुचित सुरक्षा नहीं मिली है। सौरभ का कहना है कि दर्जनों बार वह सुरक्षा के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। मेरी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।

SIT को तमाम दस्तावेज मुहैया कराने के बाद गवाही देने वाले सौरभ भदौरिया का कहना है कि Uttar P{radish में तमाम बड़े माफियाओं की संपत्तियों को ढहाने के बाद बेनामी संपत्तियों को जब्त किया गया। लेकिन 8 पुलिस कर्मियों की हत्या करने वाले विकास दुबे और उसके खजांची की संपत्तियों को प्रशासन अब तक छू नहीं पाया है।

682 करोड़ की संपत्तियों के दस्तावेज सौंपे

सौरभ भदौरिया का कहना है कि विकास दुबे  और उससे जुड़े अपराधी, नेताओं, पुलिस-प्रशासन के अफसरों से लेकर विकास के खजांची जय वाजपेयी की 682 संपत्तियों की सूची मय दस्तावेजों के SIT, ED,IT को सौंप दी है लेकिन एक साल बाद भी अभी तक जांच ही चल रही है। अब सबूत देने वाले लोग अपराधियों से लेकर अधिकारियों के निशाने पर हैं। SIT की जांच में शामिल अधिकारी साफ कहते हैं कि हमने अपनी जांच करके सरकार को सौंप दी है। जब सरकार को दोषी अधिकारी ही पसंद हैं तो हम क्या कर सकते हैं ? सरकार ने अभी ईडी-आयकर को जांच के लिए क्यों नहीं लिखा ?

कानपुर के पूर्व एसएसपी के साथ विकास दुबे का खजांची जय बाजपेयी (फोटो साभार-गूगल)

 

तत्कालीन DIG का करीबी था जय बाजपेयी

 Bikru Case के बाद जब STF ने छानबीन शुरु की तो तमाम चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। पूछताछ के दौरान जयकांत बाजपेयी ने खुद तमाम जानकारियां साझा कीं। जयकांत बाजपेयी की अफसरों और विकास दुबे के साथ वाली तमाम फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। छानबीन में पता चला कि जय बाजपेयी पूर्व डीआइजी अनंत देव का बेहद करीबी था। जय बाजपेयी के मकान में दर्जन भर से अधिक पुलिस कर्मी बतौर किराएदार रहते थे। इसमें कई पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच में सबूत मिले और उन पर कार्रवाई भी हुई।

44 Arrest, 6 Encounter में ढेर, तीन पर NSA

Bikru Case में अब तक 44 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने शिवम दुबे उर्फ दलाल, बब्लू मुस्लमान और रमेशचन्द्र के खिलाफ NSA की कार्रवाई की है। मामला माती की गैंगस्टर कोर्ट में विचाराधीन है। जहां पर ज्यादातर आरोपितों की जमानत अर्जी दाखिल होने के बाद कोर्ट ने उसे खारिज भी कर दिया है। नाबालिग के जमानत की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है।

पुलिस ने 3 जून की सुबह प्रेम प्रकाश पाण्डेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। 8 जुलाई को हमीरपुर में अमर दुबे, 9 जुलाई को पनकी में प्रभात मिश्रा, इटावा में प्रवीन दुबे उर्फ बउआ और 10 जुलाई को सचेंडी में विकास दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया। 

उसके बाद विष्णुपाल उर्फ जिलेदार, राम सिंह, गोपाल सैनी, हीरू दुबे, उमाकांत उर्फ गुड्डन, शिवम दलाल, शिवम बीडीसी, रामू बाजपेई, श्यामू बाजपेई, छोटू शुक्ला, राहुल पाल, जहान सिंह, दयाशंकर अग्निहोत्री, शशिकांत उर्फ सोनू, शिव तिवारी, बाल गोविंद, क्षमा, रेखा, शांति, संजय दुबे उर्फ संजू, सुरेश वर्मा, विनय तिवारी, केके शर्मा, गुड्डन त्रिवेदी, जय बाजपेई, प्रभात शुक्ला, वीरू दुबे, धीरू दुबे, रमेश चन्द्र , गोविंद सैनी, नन्हू यादव, बब्लू मुस्लमान, राजेन्द्र कुमार, सोनू उर्फ सुशील तिवारी और अखिलेश दीक्षित को जेल भेजा।

 हीरू दुबे बना गैंग का नया लीडर


आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इन सभी को लेकर नया गैंगचार्ट तैयार किया। इस गैंग को नंबर D-179 दिया गया। इस नए गैंग का लीडर हीरू दुबे को बनाया गया। इससे पहले विकास दुबे के हाथ में गैंग की कमान थी। गैंग में करीब दर्जन भर सदस्य हैं।

 नाबालिग खुशी दुबे की रिहाई के लिए संघर्ष

Bikru Case के बाद STF ने विकास दुबे के दाहिने हाथ अमर दुबे को हमीरपुर जनपद में Encounter कर ढेर कर दिया। अमर दुबे की पांच दिन पहले ही शादी हुई थी। पुलिस ने अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को Arrest कर जेल भेज दिया। चूंकि खुशी नाबालिग थी, इस लिए उसे बाराबंकी के बाल सुधार गृह में भेजा गया। खुशी की तबियत कई बार बिगड़ चुकी है। खुशी की रिहाई को लेकर कई संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी का कहना है कि पांच दिन पहले जो लड़की ब्याह कर आई थी वो भला इतना बड़ा कांड कैसे कर सकती है ? मैं ब्राम्हण हूं संगठन के दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने खुशी की रिहाई के लिए सबसे पहले बिगुल बजाया था। उनका यह संघर्ष अब धीरे-धीरे बड़े आंदोलन की तरफ तब्दील हो रहा है। तमाम और संगठन के लोग भी उनसे जुड़ रहे हैं।

-जब्त संपत्तियों को बहाल करने के लिए लगाई थी गुहार

-श्वेता ने अपनी संपत्तियों को बहाल करने की दाखिल की थी अर्जी 


 

Central Desk

Kanpur के बहुचर्चित Bikru Case में आरोपी गैंगस्टर Vikas Dubey के खजांची रहे जयकांत बाजपेयी और उसके परिवार को DM Court से तगड़ा झटका मिला है। Court ने जयकांत बाजपेयी की Wife श्वेता बाजपेयी की तरफ से जब्त संपत्तियों को बहाल करने की अपील को खारिज कर दिया। प्रशासन ने जयकांत की ये सभी संपत्तियां गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के तहत जब्त की हैं। आरोपी होने की वजह से जयकांत बाजपेयी Kanpur Dehat की कारागार में बंद है।

श्वेता बाजपेयी ने Court में अर्जी देते हुए गुहार लगाई थी कि उनके पति जयकांत बाजपेयी की तमाम संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त किया गया है। श्वेता ने खुद की संपत्तियों को जब्त करने के बाबत सवाल उठाते हुए कहा था कि चूंकि उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं है। लिहाजा उनके पति से अलग जो संपत्तियां उनके नाम पर है उन्हें बहाल किया जाए। लेकिन कोर्ट ने उनकी तमाम दलीलों को खारिज कर दिया।

उल्लेखनीय है कि Bikru Case में जयकांत बाजपेयी के जेल जाने के बाद तमाम खुलासे हुए। फिर वो चाहे फर्जी पासपोर्ट का मामला हो या गनर लेने का आरोप। जयकांत पर करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति बनाने का भी आरोप लगा। हाईप्रोफाइल केस से जुड़े आरोपी जयकांत बाजपेयी पर संगीन आरोप लगते ही जिला प्रशासन ने शिकायतों को संज्ञान में लेकर जांच शुरु की। 

यही वजह रही कि कानपुर की नजीराबाद पुलिस ने जयकांत बाजपेयी और उसके भाइयों (एक को छोड़कर) के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की। जयकांत के भाई फरार हुए तो पुलिस ने सभी के सिर पर इनाम तक घोषित कर दिया। जिसके बाद सभी ने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने जयकांत की तमाम संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त करने की कार्रवाई भी की।

 

 

-CJM Court की तरफ से जारी बी-वारंट में हकीकत सामने आई

-कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने के मामले में हटीं जालसाजी की धाराएं 

-Bikru Case में बंद है विकास दुबे का खजांची Jai Bajpai

जय बाजपेयी

 

Yogesh Tripathi

Bikru Case में सलाखों के पीछे कैद गैंगस्टर Jai Bajpai पर से लगता है कि पुलिस की "कृपा" अब भी बरस रही है। कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने के मामले में दर्ज FIR से संगीन धाराएं पुलिस ने हटा ली हैं। जो धाराएं हटाई गई हैं वह बेहद संगीन हैं। थाना पुलिस फिलहाल धारा हटाने की बात से साफ इनकार कर रही है लेकिन CMM Court की तरफ से जारी किए गए बी-वारंट कुछ और ही "कहानी" बयां कर रहा है। 

देश के मीडिया की सुर्खियां बटोर चुके Bikru Case के बाद सूबे के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। SIT की संस्तुति पर Kanpur Nagar के नजीराबाद थाने में 21 नवंबर 2020 को पुलिस ने जय के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग करके पासपोर्ट बनवाने की रिपोर्ट दर्ज की थी। 

CMM Court की तरफ से जारी बी-वारंट में IPC 467, 468 क्ष 471 की धाराएं "लापता" हैं। इसमें 467 धारा ऐसी है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। जानकारों की मानें तो इन धाराओं के हटने से जय बाजपेयी को जमानत मिलने में आसानी होगी। नजीराबाद थाना प्रभारी ज्ञान सिंह का कहना है कि धाराएं हटाने की जानकारी उनको नहीं है।  

    RTI Activist (सौरभ भदौरिया)

 

RTI Activist और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया का कहना है कि SIT के आदेश पर मुकदमें तो पुलिस ने दर्ज कर लिए लेकिन अब गैंगस्टर एक्ट के साथ-साथ अन्य मामलों में बंद जय बाजपेयी पर पुलिस मेहरबानी कर रही है। पूरे प्रकरण को वह जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष रखेंगे। उल्लेखनीय है कि बिकरू कांड के बाद सौरभ भदौरिया ने जय बाजपेयी और विकास दुबे के खिलाफ तमाम साक्ष्यों का संकलन कर उसे SIT टीम को सौंपा था।

 


-2018 में Kannauj के ASP ने की थी 16 पुलिस कर्मियों की जांच

-ASP ने तत्तकालीन IG Range (Kanpur) को सौंपी थी Report

-Report को आधार बनाकर ED के अफसर जल्द करेंगे पूछताछ

Yogesh Tripathi

 

Gangster Vikas Dubey और उसके खजांची Jai Bajpai के हमदर्दरहे 16 पुलिस कर्मी जल्द ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रडार पर आ सकते हैं। इसमें UP Police के तीन बड़े अफसर भी शामिल हैं। बड़े सूत्रों की मानें तो Kanpur में तैनाती के दौरान इन पुलिस कर्मियों ने करोड़ों रुपए की लूटखसोट की थी। कई ने तो बेनामी संपत्तियां तक खरीद लीं। इन सभी पुलिस कर्मियों के सीधे कनेक्शन Vikas Dubey और उसके खजांची Jai Bajpai से रहे हैं। ED ने दो साल पहले Kannauj के ASP रहे केसी गोस्वामी जांच रिपोर्ट को आधार बनाया है। देर-सबेर ये पुलिस कर्मी ED के यक्ष प्रश्नों का जवाब देने के लिए बैठे दिखाई दे सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से एक पत्र Range के बड़े अफसर को लिखा गया था। इसके बाद ED की एक टीम ने अफसर से मुलाकात कर तमाम जानकारियां भी जुटाई। कुछ महत्वपूर्ण कागजात भी ED को मुहैया कराए गए। ED अफसरों की मानें तो 2018 में कन्नौज के ASP के.सी गोस्वामी ने पुलिस विभाग के तीन बड़े अफसरों समेत 16 पुलिस कर्मियों की जांच की थी। सभी पर आरोप था कि Vikas Dubey, उसके खजांची Jai Bajpai और गिरोह के सदस्यों के खिलाफ यदि कोई भी शिकायत करता था तो ये पुलिस कर्मी कोई कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही मुकदमा पंजीकृत कर देते थे। 

 

केसी गोस्वामी ने पूरे प्रकरण की लंबी जांच की। मामला सही पाए जाने पर Report तत्कालीन IG Range को सौंप दी। जांच की जद में आए सभी पुलिस कर्मचारी नजीराबाद, बजरिया, एलआइयू और पासपोर्ट विभाग में काम करने वाले थे। एक एसपी, एक एडीशनल एसपी और एक क्षेत्राधिकारी का भी नाम शामिल रहा।

सूत्रों की मानें तो इन पुलिस कर्मियों ने Vikas Dubey और Jai Bajpai की मिलीभगत से करोड़ों की अकूत कमाई कर तमाम बेनामी संपत्तियां भी बना ली। सभी ने समय-समय पर विकास दुबे, जय बाजपेयी का वीजा, पासपोर्ट बनवाने में तो मदद की ही साथ ही कई पुलिस कर्मियों ने काले कारोबार में भी अपरोक्ष तरीके से गिरोह का साथ दिया। 

तो क्या IG (Range) को गुमराह कर रहे हैं चौकी इंचार्ज

2/3 जुलाई 2020 की रात्रि चौबेपुर के बिकरू गांव में सीओ समेत 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद शासन और प्रशासन की जमकर थू-थू हुई। Gangster Vikas Dubey के करीबी कई पुलिस वालों के चेहरे बेनकाब हुए। इन पुलिस कर्मियों के विकास दुबे और जय बाजपेयी से सीधे कनेक्शन अब जगजाहिर हो चुके हैं। लेकिन पुलिस विभाग ने अभी तक सीख नहीं ली है। नजीराबाद थाने के अशोक नगर चौकी इंचार्ज ने कुछ दिन पहले जो रिपोर्ट अफसरों को दी है उसमें इस बात का उल्लेख किया कि विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी के मकान में कोई पुलिस कर्मी नहीं रहता है। जब कि हकीकत कुछ और थी। चौकी इंचार्ज ने शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया और उनके बुजुर्ग पिता को ही अपराधी मानसिकता का करार देते हुए दोनों के खिलाफ उल्टी रिपोर्ट भेज दी। सौरभ भदौरिया के पिता की उम्र करीब 75 वर्ष है। सूत्रों की मानें तो सौरभ भदौरिया की शिकायत के बाद आइजी ने मामले को संज्ञान में लिया। गोपनीय जांच में शहर के तीन दरोगा जय बाजपेयी के मकान में किराए पर रहते हुए पाए गए। इसके बाद आइजी ने तीनों को तत्काल सस्पेंड कर दिया। अब सवाल ये उठता है कि क्या आइजी कानपुर रेंज फर्जी रिपोर्ट देने वाले चौकी इंचार्ज के खिलाफ भी कोई कार्रवाई करेंगे ? सौरभ भदौरिया का आरोप है कि चौकी इंचार्ज तमाम तरह से उनका न सिर्फ उत्पीड़न कर रहे हैं बल्कि धमकी भी दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सौरभ भदौरिया ने विकास दुबे और उसके खजांची जय बाजपेयी के गिरोह की परतें खोलने वाले इकलौते व्यक्ति हैं। शासन की तरफ से अभी तक उनको कोई सुरक्षा भी नहीं मुहैया कराई गई है।

IG (Range) ने तीन दरोगाओं को किया सस्पेंड

लंबे समय से Vikas Dubey के खजांची Jai Bajpai के घर में किराए पर रह रहे तीन दरोगाओं को IG (Range) मोहित अग्रवाल ने गुरुवार रात को सस्पेंड कर दिया। IG (Range) की तरफ से कराई गई छानबीन में तीनों दरोगा जय बाजपेयी के मकान में रहते हुए मिले। सीओ नजीराबाद गीतांजलि ने तत्काल मकान में छापा मारा। कर्नलगंज थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर राजकुमार, अनवरगंज में तैनात इंस्पेक्टर उस्मान अली, रायपुरवा में तैनात सब इंस्पेक्टर खालिद यहां पर लंबे समय से रह रहे थे। सीओ की सूचना पर आइजी ने तत्काल तीनों दरोगाओं को सस्पेंड कर दिया। आइजी का कहना है कि जय बाजपेयी पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हो चुकी है। मकान भी अनाधिकृत बताया जा रहा है। केडीए छानबीन कर रही है। ऐसे में यहां पर रहकर तीनों दरोगाओं ने पुलिस महकमें की छवि को धूमिल किया है। जिसकी वजह से कार्रवाई की गई है। तीनों दरोगाओं के खिलाफ जल्द ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

 

- गैंगेस्टर Vikas Dubey गिरोह के खजांची Jai Bajpai समेत कई के खिलाफ शिकायत 

- जरायम के जरिये अकूत संपत्ति बनाने के मामले में एडवोकेट की की जांच की मांग 

Yogesh Tripathi

 दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी और उसके गिरोह खिलाफ आर्थिक अपराध अनुसंधान (EOW) में शिकायत की गयी है कि किस तरह जरायम के जरिये सभी ने अकूत संपत्ति बना ली है. इस शिकायत में कई सफेदपोश के भी नाम हैं जिन्होंने गिरोह के जरिये काली कमाई इकठ्ठा की है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने मामले में गठित एसआईटी को भी इसकी जानकारी दी है साथ ही जल्द विजिलेंस और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच टीम को भी साक्ष्य देने की बात की है।

क्रय विक्रय सहकारी संघ के निदेशक और अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बताया की भू-माफिया जयकान्त बाजपेयी, राजयकांत बाजपेयी और गिरोह के खिलाफ पहले भी शिकायत की गयी थी। 

सौरभ का आरोप है कि जयकांत के पिता पंचर की दूकान चलाते थे, जयकांत स्क्रीन प्रिंटिंग का काम करता था और भाई राजयकांत पान की दुकान संचालित करता था लेकिन कुछ दिनों में विकास दुबे के सहयोग से जय और उसके करीबी करीब दर्जन भर लोगों ने कम समय में जरायम से अकूत संपत्ति कमाई है।

 जिनकी जांच शासन, आयकर विभाग, केडीए, सीबीआई, ईडी से कराई जाए। सौरभ का कहना है कि इसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है लेकिन अभी तक गिरोह के लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। उन्होंने कहा की 9 लोग हैं जो काले साम्राज्य को चलाते आ रहे थे और कुछ लोग आज भी सक्रीय हैं लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा की कुछ दिखावटी धंधो की आड़ में बड़े कारनामे गिरोह कर रहा है। 

KDA कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप

सौरभ भदौरिया ने खजांची जयकांत व रजयकांत बाजपेयी के ब्रहम्म नगर स्थित मकान 111/481 और 111/ 478 अवैध है। जिनको गिराने क आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं लेकिन KDA के कर्मचारियों की मिलीभगत से कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्होंने कहा की इसकी शिकायत की गयी थी लेकिन कुछ दिन मकान सील करने के बाद अपराधी जयकांत ने 6 मंजिला इमारत खड़ी कर ली। जिस पर तत्काल कार्यवाही की मांग की है।