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-3.30 बजे दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

-फ्राइ-डे की सुबह PM संग होगी CM की Meeting

-Uttar Pradesh में होने वाले तमाम बदलावों के मद्देनजर अंतिम Meeting

-तमाम कयासबाजी और अटकलों पर लग सकता है अगले दो-तीन में विराम

 

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh में सियासी तापमान पिछले करीब 20 दिनों से बढ़ा हुआ है। दिल्ली और लखनऊ दरबारके बीच हल्की-फुल्की तल्खी के बीच अंदर ही अंदर चल रहा शीतयुद्धअब किसी से छिपा नहीं है। UPCM योगी आदित्यनाथ गुरुवार दोपहर अचानक Delhi के लिए रवाना हो गए। 3.30 बजे मुख्यमंत्री दिल्ली पहुंचे। खबर है कि शाम को उनकी मुलाकात गृहमंत्री अमित शाह के साथ होनी है। रात में योगी आदित्यनाथ बीजेपी के नेशनल प्रेसीडेंट जेपी नड्डा समेत कई पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। फ्राइ-डे की सुबह उनकी Meeting प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संग होनी बताई जा रही है। तमाम ब्यूरोक्रेट्स, विधायक, मंत्री और संगठन के पदाधिकारियों की नजरें एक बार फिर दिल्ली दरबार की तरफ केंद्रित हो गई हैं। संकेत मिल रहे हैं कि Uttar Pradesh में कैबिनेट विस्तार और संगठन में व्यापक फेरबदल के मद्देनजर संभवत: यह अंतिम Meeting हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सारा पेंच Narendra Modi के "दूत" कहे जा रहे रिटायर्ड IAS Officer और विधान परिषद सदस्य (MLC) अरविंद शर्मा को लेकर फंसा। अरविंद शर्मा के बाबत मुख्यमंत्री अभी भी पुराना स्टैंड ही लिए हुए हैं। माना जा रहा है कि इस प्वाइंट को किसी तरह "दिल्ली दरबार" हल करना चाहता है। 

बताया जा रहा है कि Apna Dal की प्रेसीडेंट अनुप्रिया पटेल भी गृहमंत्री के घर पहुंच गई हैं। वहां UPCM पहले से ही मौजूद हैं। इस त्रिकोणीय मीटिंग के कई मायने निकाले जा रहे हैं।  यूपी की राजनीति पर टिप्पणी कर रहे तमाम वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि "यूपी की हंडिया" में कुछ तो है। खेल कब होगा, यह देखना दिलचस्प है।

PM संग कल होगी Meeting

मुख्यमंत्री का यह दौरा 48 घंटे का बताया जा रहा है। आज शाम 4:00 बजे पहली मीटिंग गृहमंत्री के साथ होनी तय है। इस बीच मुख्यमंत्री भाजपा के कुछ और बड़े नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं। कल सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री की Meeting होनी है।

बुधवार को प्रदेश कार्यालय में चला बैठकों का दौर

सूत्रों की मानें तो बुधवार को देर रात तक Uttar Pradesh के BJP Office में बैठकों का दौर चला। UPBJP के प्रेसीडेंट स्वतंत्र देव सिंह ने प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों और कार्यकारिणी से काफी देर तक बातचीत की।

BJP प्रदेश प्रभारी कर चुके हैं दो दिन का दौरा

Uttar Pradesh (BJP) के प्रभारी Radha Mohan Singh पिछले सप्ताह ही दो दिन का दौरा कर Lucknow से जा चुके हैं। उन्होंने गवर्नर आनंदीबेन पटेल से बातचीत कर एक बंद लिफाफा सौंपा था। उसके बाद विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के संग Meeting की थी। दोनों ही मुलाकातों को उन्होंने सामान्य बताया था लेकिन राजनीति के जानकारों ने तमाम तरह के कयास तभी लगा लिए थे।

संगठनमंत्री B.L Santosh ले चुके हैं फीडबैक

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री B.L Santosh और Radha Mohan Singh इससे पहले संयुक्त रूप से लखनऊ दौरे पर आए थे। दिल्ली दरबारके निर्देश पर पहुंचे दोनों नेताओं ने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के करीब दर्जन भर मंत्रियों के साथ One 2 One बातचीत की थी। सूबे के सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों से भी मुलाकात कर संगठन और सरकार के बाबत तमाम फीडबैक लिए थे। इस दौरे के बाद ही कयास लगाए जाने लगे थे कि UP में बदलाव की बयार बह रही है, हालांकि बीजेपी के दिग्गज नेता मौनरहे। उन्होंने किसी भी तरह के बदलाव की बात को एक सिरे से खारिज किया। इससे पहले RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी Locknow में दो दिनों का प्रवास कर वापस गए थे। उन्होने भारती भवन में कुछ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर फीडबैक लिया था। 

कैबिनेट और संगठन में बड़े बदलाव की संभावना

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री इस दौरे के बाद जब लखनऊ वापस आएंगे तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी होगी। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ संगठन में जो व्यापक परिवर्तन किए जाने हैं उससे भी अवगत कराया जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक-दो बड़े नेताओं को दिल्ली भी शिफ्ट किया जा सकता है। संगठन में ऊपर से लेकर छंटाई कार्यक्रम चलने की संभावना है। 

 Update News

 

-सियासी शतरंज की बिसात पर शह-मात का दौर Start

-योगी के "हठ योग" से बैकपुट पर है "दिल्ली दरबार"

-J&K के LG की Delhi में मौजूदगी से अटकलों का बाजार गर्म

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh में सियासी शतरंज की बिसात पूरी तरह से बिछ चुकी है। दिल्ली और लखनऊ दरबार के बीच शह और मात का दौर Start है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा की मौजूदगी शनिवार से दिल्ली में ही है। जिसकी वजह से न सिर्फ राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी है बल्कि अटकलों का बाजार भी सत्ता के गलियारों में काफी गर्म है। हालांकि मनोज सिन्हा की मौजूदगी के पीछे जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा और विधान सभा चुनाव के मुद्दे को लेकर मीटिंग की बात कही जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ योगी के योग हठसे दिल्ली दरबारऔर BJP के मातृ संगठन RSS के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी तल्खी थोड़ी बढ़ी बताई जा रही है। शायद यही वजह है कि RSS प्रमुख ने भोजन आमंत्रण को स्वास्थ्य ठीक न होने की बात कहकर अस्वीकार कर दिया। जानकारों की मानें तो सूबे की सियासत के लिहाज से ये सप्ताह कापी महत्वपूर्ण और उथल-पुथल भरा रहने वाला है। 


 

सोशल मीडिया पर चर्चाओं और खबरों की मानें तो संडे को UPBJP प्रभारी B.L Santosh ने गवर्नर आनंदीबेन पटेल को जो बंद लिफाफा सौंपा है, उसमें प्रधानमंत्री का पैगाम बताया जा रहा है। चर्चाओं की मानें तो यह बंद लिफाफा दिल्ली दरबार की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। राजनीति के जानकार इस बंद लिफाफा को ऑपरेशन इमरजेंसी भी मान रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि B.L Santosh ने विधान सभा स्पीकर ह्दय नारायण दीक्षित से बंद कमरे में मुलाकात के दौरान दिल्ली दरबार का पैगाम सुना चुके हैं। 


क्या बंद लिफाफा में है़ विधायकों के हस्ताक्षर ?

बंद लिफाफा को लेकर कयास और अटकलों का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर चर्चाओं की मानें तो बंद लिफाफा में लंबे समय से नाराज चल रहे विधायकों के हस्ताक्षर और पत्र भी हो सकते हैं। ऐसे विधायकों की संख्या 100 से अधिक होने की चर्चा है। यहां थोड़ा फ्लैश बैक में जाएंगे तो पता चलेगा कि 100 से अधिक विधायक करीब डेढ़ साल पहले नाराजगी जताते हुए धरना तक दे चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर और मिजाज से दिल्ली हाईकमान पूरी तरह से परिचित है। इस लिए वह किसी भी तरह की किरकिरी से बचने के लिए वो हर कवायद की जा रही है ताकि मुंह की न खानी पड़े। 


 

क्या विधान सभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं CM ?

Uttar Prdaesh के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली किसी से छिपी नहीं है। वे हमेशा अपनी बात पर कायम रहते हैं। ये बात भी BJP के शीर्ष को बखूबी मालुम है। सोशल मीडिया में चर्चा है कि मुख्यमंत्री दिल्ली से मिल रहे तमाम संदेशों के बाद भी तनिक भी झुकने को तैयार नहीं है। जिसकी वजह से दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि यदि योगी ने अपना हठ योगदिखा दिया तो फिर क्या होगा ? शायद नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री ने यदि गवर्नर से मुलाकात कर विधान सभा को भंग करने की सिफारिश कर दी तो Uttar Pradesh का राजनीतिक समीकरण क्या होगा ?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए ही लिफाफे में पैगामसौंपा गया है। जिसका प्रयोग विधान सभा भंग करने की सिफारिश पर किया जा सकता है। मतलब साफ है कि ऐसी स्थिति में गेंद गवर्नर के पाले में रहेगी और वह विधायकों के नाराजगी की बात कहकर प्लोर टेस्ट भी करवा सकती है। फ्लोर टेस्ट के दौरान सबसे अहम भूमिका विधान सभा स्पीकर की रहेगी। इस लिए शायद उनको भी पैगाम दिया जा चुका है। हालांकि इन सब बातों की कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है। सिर्फ कयास और अटकलें ही लगाई जा रही हैं। खुद प्रदेश प्रभारी B.L Santosh ने गवर्नर और स्पीकर से मुलाकात के बाद कहा है कि सामान्य मुलाकात है। राजनीति और सियासत से कोई लेना-देना नहीं है। 


 

Delhi में मौजूद हैं जम्मू-कश्मीर के गवर्नर Manoj Sinha

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha की मौजूदगी शनिवार से दिल्ली में बनी हई है। उनकी मौजूदगी के पीछे का तर्क जम्मू-कश्मीर में विधान सभा का चुनाव और 28 जून से शुरु होने वाली अमरनाथ यात्रा की बात कही जा रही है। खुफिया सूत्रों की मानें तो मनोज सिन्हा ने संडे को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात कर चुके हैं। श्रीसिन्हा ने केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के साथ भी बैठक की। संडे को ही दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के शीर्ष अफसरों की एक बैठक भी हुई। इसमें जम्मू-कश्मीर के निवर्तमान प्रमुख सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम, उनके उत्तराधिकारी अरुण मेहता, इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) के चीफ अरविंद कुमार, जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह और एडीजी समेत कई अफसर मौजूद रहे। हालांकि अभी तक गृह मंत्रालय (HMO) की तरफ से अभी तक इस संबंध में कोई अधिकारिक पत्र नहीं जारी किया गया है। चर्चाओं की मानें तो जल्द ही मनोज सिन्हा की प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग भी हो सकती है।

बंद लिफाफा में अटकी है सरकार की जान

मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों की मानें तो बंद लिफाफा में ही सरकार की जान अटकी है। इस लिफाफा को दिल्ली दरबार का तुरुप का इक्का बताया जा रहा है। चर्चा है कि आवश्यकता पड़ने पर ही शायद इस लिफाफा में भेजे गए पैगामको अमल में लाया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि दिल्ली दरबार की बात मान लेते हैं तो शायद बंद लिफाफा को खोलने की आवश्यकता ही न पड़े।

योगी के योग हठ के पीछे कौन ?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद ईमानदार छवि के नेता है, इसमें कोई शक नहीं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में किसी भी प्रकार के घोटाले का एक कोई आरोप अभी तक उन पर नहीं लगा है। उनके कार्य करने की स्टाइल किसी से छिपी नहीं है। वो भी तब जब सरकार बनते ही उनके साथ दो डिप्टी सीएम और एक सुपर सीएम को परमानेंट लगा दिया गया। संगठन स्तर पर भी मुख्यमंत्री की नहीं चली। दिल्ली दरबार के इशारे पर ही साढ़े चार साल से सबकुछ हो रहा है। फिर इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी अफसर अरविद शर्मा को दूतबनाकर लखनऊ भेजा जाता है। सीनियर IAS अफसर अरविंद शर्मा की नौकरी के अभी दो साल शेष थे। उन्होंने वीआरएस लिया और लखनऊ पहुंच गए। 10 दिन के अंदर उनको MLC भी बना दिया गया।

दोनों डिप्टी सीएम, प्रदेश अध्यक्ष, तमाम नौकरशाह और मंत्री-विधायक अरविंद शर्मा से मिलने पहुंचे लेकिन सख्त तेवरों वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अरविंद शर्मा से मुलाकात तक न कर दिल्ली दरबार को साफ-साफ मैसेज देकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। शायद इस तल्खी की ही वजह रही कि दो दिन पहले UPCM Yogi Adityanath को उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने Twitter पर Tweet कर बधाई संदेश तक नहीं दिया। जबकि प्रधानमंत्री के बारे सर्वविदित है कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर वह सुबह-सुबह ही Tweet कर बधाई दे देते हैं।

चर्चा है कि पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गवर्नर से मुलाकात की थी तो उन्होंने दो टूक शब्दों अरविंद शर्मा को डिप्टी सीएम बनाकर गृह एवं गोपन विभाग देने और तमाम मुद्दों पर अपनी असहमति जता दी थी। यही वजह है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ गया। दो दिवसीय दौरे के बाद B.L Santosh और Radha Mohan Singh ने रिपोर्ट सौंपी तो आनन-फानन में गवर्नर और स्पीकर से मुलाकात करने के लिए B.L Santosh को भेज दिया गया।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर के साथ-साथ सांसद और हिन्दू महासभा के प्रमुख भी रहे हैं। यह बात सभी को मालुम है। चर्चाओं की मानें तो महाराज के तेवर और मिजाज से हर कोई परिचित है। इस लिए लिफाफा के जरिए पैगाम भेजा गया ताकि यदि कोई डैमेज हो तो उसे पहले से भेजे गए पैगामके जरिए कंट्रोल किया जा सके। चर्चाओं की मानें तो RSS के कई शीर्ष पदाधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में मजबूती के साथ खड़े हैं। इन पदाधिकारियों ने दिल्ली दरबारसे नाराजगी जाहिर कर योगी के नाराज होने पर हिन्दुत्व की छवि वाले एजेंडे को नुकसान होने की बात भी बता दी है। 

वैसे RSS के पदाधिकारियों को मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में Uttar Pradesh में 2022 का Election बीजेपी लड़ेगी। सरकार को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। संगठन में आंशिक फेरबदल अवश्य संभव है। RSS प्रमुख मोहन भागवत समेत कई शीर्ष पदाधिकारी योगी आदित्यनाथ की छवि के जरिए 2022 में यूपी का किला फतेह करने का "ब्लूप्रिंट" भी बना चुके हैं। योगी आदित्यनाथ को लेकर RSS ने अपना मैसेज भी शायद दिल्ली हाईकमान को भेज दिया है। 

राजनीति के जानकार भी यही कह रहे है कि योगी को बदलना दिल्ली हाईकमान के लिए आसान नहीं है। बदलाव की स्थिति में BJP को चुनाव से पहले भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं इसका सीधा प्रभाव केंद्र की राजनीति पर भी पड़ेगा। साथ ही हिन्दुत्व एजेंडे की छवि को भी नुकसान होगा। कुल मिलाकर यूं कहें कि Yogi Aditya Nath एक बड़े "छत्रप" के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं। शायद यही वजह है कि किसी भी एक्शन से पहले शीर्ष को 100 बार सोचना होगा।  

 

Note----खबर सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टस के इनपुट पर है। BJP, RSS और संगठन के जिम्मेदार की तरफ से कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पांच दशक पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला (ए.एन मुल्ला) ने सच ही लिखा था कि “यूपी पुलिस संगठित अपराधियों का एक बड़ा गिरोह है”। 50 साल पहले उनकी तरफ से लिखी गई ये बात अब करीब-करीब सच साबित होती दिखाई दे रही है। जनपद कोई भी थाने और चौकियों में दलाल, अपराधी, भू-माफिया सक्रिय रहते हैं। सुबह से शाम तक इनकी ही धमाचौकड़ी रहती है। जिसको चाहते हैं उठवाकर पिटवाते हैं। अफसरों को झूठी जानकारी देकर गुमराह करना अब थानेदारों की आदत में शुमार है। कुल मिलाकर यूं कहें कि मोटी रकम देकर थाने और चौकी का चार्ज पाने वाले सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर अब बेलगाम हो चुके हैं। सच्चाई ये है कि सूबे की Yogi Adityanath सरकार के लिए ये पुलिस कर्मी सबसे बड़े सिरदर्द बने हैं। बेगुनाहों के साथ इनकी तरफ से किया जाने वाला "जुल्म-ओ-सितम" सरकार की साख पर बट्टा लगा रहा है।


[caption id="attachment_19661" align="aligncenter" width="600"] चांदपुर थाने में बीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ काफी देर तक मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति थानेदार के कक्ष में बैठकर रेप पीड़िता के केस की जानकारी मांगती रहीं और थाना पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था।
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ताजा मामला Fatehpur जनपद के चांदपुर थाने का है। यहां इंस्पेक्टर कैलाश नाथ हत्या के एक मामले में नाबालिग लड़की को 4 दिन से बिना किसी लिखापढ़ी के थाने में रखकर बेल्ट से निर्मम पिटाई कर रहे थे। Modi सरकार में Minister साध्वी निरंजन ज्योति एक रेप पीड़िता के मामले में जब थाने पहुंची तो इस लड़की के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का मामला भी खुल गया। देर रात्रि जनपद के नए कप्तान ने थानेदार को सस्पेंड कर दिया। किरकिरी से बचने के लिए “जल्लाद” इंस्पेक्टर के खिलाफ FIR रजिस्टर्ड कर जांच बिंदकी क्षेत्राधिकारी अभिषेक तिवारी को सौंप दी गई है।


YOGESH TRIPATHI


[caption id="attachment_19662" align="alignnone" width="695"] चांदपुर थानेदार की गलत कार्यशैली के खिलाफ थाना परिसर में ही बीजेपी के आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने जमकर की नारेबाजी।[/caption]

चांदपुर के पहाड़पुर बड़िगवां में हुआ था युवक का मर्डर

कुछ दिन पहले चांदपुर के पहाड़पुर बड़िगवां में व्यापारी मनोज वर्मा की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में जयचंद्र के नाम पर रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज की। आरोप है कि जयचंद्र नहीं मिला तो इंस्पेक्टर कैलाश नाथ उसकी नाबालिग बेटी (16 वर्ष) को जबरन जीप में उठा लाए। पीड़ित नाबालिग का आरोप है कि उसे थाने के एक कमरे में चार दिन से इंस्पेक्टर बंद किए थे। सुबह और शाम उसकी बेल्ट से पिटाई करते रहे। थाने पर यदि कोई मिलने आया भी तो इंस्पेक्टर ने मिलने नहीं दिया।

Modi की Minister पहुंची थाने तो खुल गई थानेदार की पोल

चांदपुर थाने के इंस्पेक्टर कैलाश नाथ के करतूतों की पोल उस समय खुली जब Modi सरकार में Minister साध्वी निरंजन ज्योति शुक्रवार शाम को चांदपुर थाने पहुंचीं। साध्वी निरंजन ज्योति एक रेप पीड़िता की रिपोर्ट के बाबत जानकारी लेने पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि क्षेत्र की एक युवती ने एक फौजी पर अक्तूबर महीने में अपने साथ हुए रेप की शिकायत की थी। लंबे समय से थानेदार युवती को टरका रहा था। एसपी ने फोन कर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए इंस्पेक्टर को कहा तो उसने झूठ ही बोल दिया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली है। रेप पीड़ित महिला जब थाने पहुंची तो उसने FIR की प्रतिलिपि मांगी। इस पर पुलिस वाले टालमटोली करने लगे। पीड़ित महिला के एक रिश्तेदार लखनऊ में अधिवक्ता हैं। उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी साध्वी निरंजन ज्योति को दी। चूंकि मंत्री महोदया जनपद में ही मौजूद थीं, इस लिए लाव-लश्कर के साथ वे चांदपुर थाने पहुंच गईं। वहां पता चला कि थानेदार ने पीड़िता की रिपोर्ट ही नहीं लिखी है और एसपी को गलत जानकारी दे दी।

मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने मोबाइल पर एसपी को दी जानकारी

इसी बीच थाने के एक कमरे में नाबालिग को बंद कर बेल्ट से पीटने की जानकारी मंत्री को लगी तो उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने तुरंत मोबाइल निकाल एसपी से बात कर पूरी जानकारी दी। इस पर एसपी ने तुरंत इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश क्षेत्राधिकारी को दिया। बताया जा रहा है कि सस्पेंशन के बाद इंस्पेक्टर के खिलाफ उसी के थाने में देर रात्रि लड़की को जबरन रखने और मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज की गई। जांच सीओ बिंदकी को सौंपी गई है। वहीं रेप पीड़िता के मामले की जांच एडीशनल एसपी को एसपी ने सौंपी है।

सुबह से शाम तक सक्रिय रहते हैं थाने में दलाल और अपराधी

सूत्रों की मानें तो चांदपुर थाने में सुबह से शाम तक सिर्फ दलालों और अपराधियों की सक्रियता रहती है। क्षेत्र के पुराने अपराधियों से पुलिस वालों की सेटिंग हर किसी को मालुम है। कच्ची शराब से लेकर तमाम अन्य अपराधिक ठिकानों पर पुलिस की पत्ती लगी है। पीड़ित को पुलिस यहां न्याय न देकर और भी प्रताड़ित करती है। मारपीट के मामलों का हाल तो ये है कि पैसा लेकर पुलिस उल्टा पीड़ित के खिलाफ क्रास रिपोर्ट दर्ज करने से नहीं चूकती।