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  • दोस्तों के साथ घूमने के लिए गोरखपुर पहुंचे थे Kanpur (Barra) के मनीष गुप्ता
  • Mid-Night चेकिंग के लिए होटल पहुंची था गोरखपुर के रामगढ़ ताल की पुलिस
  • पुलिस से सवाल-जवाब करना Kanpur के कारोबारी मनीष गुप्ता को पड़ा मंहगा
  • होटल में बेड से गिरने की बात कहकर रामगढ़ ताल पुलिस झाड़ रही है पल्ला
  • बड़े कांड पर कुछ भी बोलने से साफ-साफ बच रहे हैं गोरखपुर पुलिस के अफसर 

 

Gorakhpur Police की बर्बरता के शिकार हुए Kanpur के व्यापारी Manish Gupta (36) (फाइल फोटो)

Yogesh Tripathi

 

Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की कर्मस्थली गोरखपुर में Monday की Mid-Night रामगढ़ ताल पुलिस की बर्बरता का मामला प्रकाश में आया है। दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे Kanpur के Barra निवासी व्यापारी मनीष गुप्ता (35) को पुलिस ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। होटल में मनीष के साथ मौजूद रहे दोस्तों का आरोप है कि चेकिंग के लिए पहुंची पुलिस के व्यवहार पर जब मनीष ने उंगुली उठाते हुए कहा कि क्या वह आतंकवादी है ? तो पुलिस ने उसकी पिटाई शुरु कर दी। होटल में ही पुलिस ने मनीष को बेरहमी से पीटा। थोड़ी देर में उसकी मौत हो गई। मनीष के मौत का इल्जाम उसके साथी SHO रामगढ़ताल J.N Singh और और फल मंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र पर लगा रहे हैं। फिलहाल गोरखपुर पुलिस के अफसर बैकफुट पर हैं। सभी चुप्पी साधे हुए हैं। सभी सीधे तौर पर जवाबदेही से साफ-साफ बच रहे हैं। DIG रविंदर गौड़ का कहना है कि मामला प्रकाश में आया है। जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खबर मिलते ही मनीष के परिजन गोरखपुर के लिए कानपुर से रवाना हो गए हैं।  


Social Media में कारोबारी Manish Gupta के मौत की खबर Viral होते ही "बैकफुट" पर आए पुलिस अफसरों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए मंगलवार दोपहर SHO रामगढ़ ताल J.N Singh समेत 6 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

गोरखपुर जनपद के सिकरीगंज स्थित महादेवा बाजार निवासी चंदन सैनी व्यापारी हैं। चंदन की दोस्ती गुरुग्राम निवासी प्रदीप चौहान (32) है। प्रदीप चौहान अपने दोस्त हरदीप सिंह चौहान (35) और कानपुर के मनीष गुप्ता (35) के साथ घूमने के लिए गोरखपुर पहुंचे थे। बकौल चंदन सभी दोस्त मिलकर रियल स्टेट समेत कई कारोबार करते हैं। सभी की लंबे समय से कारोबार के सिलसिले में गोरखपुर जाने की प्लानिंग थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से वह नहीं जा सके। मौका मिला तो दो दिन पहले सभी गोरखपुर पहुंच गए।

Hotel में Mid-Night पहुंची रामगढ़ ताल की पुलिस

गोरखपुर पहुंचने पर चंदन ने दोस्तों को रामगढ़ ताल इलाके के एलआईसी बिल्डिंग के पास स्थित होटल कृष्णा पैलेस के रूम नंबर 512 में सभी को ठहराया दिया। चंदन समेत सभी दोस्तों का आरोप है कि Monday की Mid-Night रामगढ़ ताल थाने की फोर्स चेकिंग के लिए होटल पहुंची। SHO J.N Singh फल मंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा के साथ कई पुलिस कर्मी मौजूद थे। फोर्स ने होटल के कमरे का दरवाजा खुलवाया। पुलिस के साथ होटल का एक कर्मचारी भी मौजूद था। पुलिस ने सभी से परिचय पत्र मांगा।

हरदीप और प्रदीप ने अपने परिचय पत्र दिखा दिए। मनीष उस वक्त गहरी नींद में सो रहा था। दोस्तों ने उसे परिचय पत्र दिखाने के लिए उठाया तो मनीष ने कहा कि आधी रात को किस बात की चेकिंग कर रही है पुलिस ? इसके बाद मनीष ने पुलिस वालों से यह कह दिया कि क्या वह आतंकवादी है ? बस उसका यह कहना रामगढ़ ताल पुलिस को नागवार गुजरा। दोस्तों का आरोप है कि इंस्पेक्टर और उनके मातहतों ने मनीष की होटल में ही बेरहमी से पिटाई शुरु कर दी। आरोप यह भी है कि सभी पुलिस कर्मियों ने शराब पी रखी थी।

मनीष के दोस्तों का आरोप है कि पुलिस वाले पीटते हुए मनीष को कमरे से बाहर ले गए। पुलिस वालों ने इस कदर मनीष की पिटाई करी कि वह खून से लथपथ हो गया। मनीष की हालत बिगड़ी तो पुलिस वाले अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर उसकी मौत हो गई। चंदन समेत सभी दोस्तों का आरोप है कि जब पुलिस कर्मी दोबारा होटल आए तो सभी ने अपनी नेम प्लेट को हटा रखा था।  

चंदन ने मनीष के मौत की खबर Kanpur स्थित उसके घर पर परिजनों को दी तो परिवार में कोहराम मच गया। मनीष की पांच साल पहले शादी हुई थी। पिता लंबे समय से बीमार हैं। मां की मौत हो चुकी है। परिवार में पिता के साथ पत्नी और एक चार साल की बेटी है। खबर मिलते ही परिवार के सदस्य गोरखपुर के लिए रात्रि में ही रवाना हो गए। दोपहर तक सभी के गोरखपुर पहुंचने की उम्मींद है। 

 क्या कहते हैं Gorakhpur SSP ?

Gorakhpur (SSP) Dr.Vipim Tada का कहना है कि तीन संदिग्धों के होटल में रुकने पर पुलिस पहुंची थी। होटल मैनेजर को साथ में लेकर चेकिंग के दौरान हड़बड़ाहट में एक युवक गिर गया। होटल मैनेजर को साथ में लेकर ही पुलिस युवक को अस्पताल ले गई। इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। पुलिस ने परिजनों को तत्काल सूचना दी। चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। तीनों युवक गोरखपुर किस लिए आए थे कितने दिन से ठहरे थे इसकी जांच कराई जा रही है।


  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताया गया
  • पांच चिकित्सकों के पैनल ने विसरा सुरक्षित रखवाया
  • पुलिस ने तीन नामजद आरोपितों को Arrest कर Court में किया पेश
  • किरकिरी और सियासी हमलों से बचने के लिए CBI जांच की सिफारिश
Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh Government ने अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत Narendra Giri की Death Mystery की गुत्थी सुलझाने के लिए देर रात्रि CBI जांच की सिफारिश कर दी। राज्य सरकार की तरफ से CBI जांच की सिफारिश के बाद "गेंद" अब पूरी तरह से Central Government के पाले में हैं। HMO यदि चाहेगा तभी CBI की जांच संभव हो पाएगी। वहीं पोस्टमार्टम के बाद Narendra Giri के पार्थिव शरीर को सैकड़ों संतों और महामंडलेश्वरों की मौजूदगी में धार्मिक रीति रिवाज से भू-समाधि दी गई। 
उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत Narendra Giri का शव प्रयागराज के बाघंबरी मठ में कमरे के अंदर पंखे के सहारे लटकता मिला था। Narendra Giri की मौत को लेकर Congress, SP समेत कई साधु-संत और मंडलेश्वर यूपी सरकार पर हमलावर हो गए। सभी ने खुदकुशी से इनका र करते हुए Narendra Giri की मौत को बड़ी साज़िश करार दिया। जिसके बाद सूबे की सरकार "बैकफुट" पर आ गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Narendra Giri की मौत फांसी से होना बताया गया है। चिकित्सकों के पैनल ने विसरा भी सुरक्षित रखवाया है। 
प्रयागराज के IG (Range) K.P Singh ने मीडिया को बताया कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने यह भी कहा कि जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत लिखी थी, उस कमरे से एक हस्तलिखित सुसाइड लेटर बरामद किया गया था। IG के मुताबिक़ Suicide Note में लिखा है, "मैं मर्यादा के साथ जिया, अपमान के साथ नहीं जी पाऊंगा, इसलिए खुद की जान ले रहा हूं"। 7-8 पेज के लंबे पत्र में, द्रष्टा ने यह भी लिखा कि वह कई कारणों से परेशान था और इस तरह उसने अपना जीवन समाप्त करने का फैसला किया।



  • Police ने पांच पन्नों का सुसाइड नोट किया बरामद
  • शिष्य Anand Giri को पुलिस ने हरिद्वार में पकड़ा
  • Anand का आरोप, "गुरुजी की हत्या की गई है"
Yogesh Tripathi
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Narendra Giri) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। नरेंद्र गिरी का शव प्रयागराज के बाघंबरी मठ में Monday की शाम को पंखे से लटकता मिला। मौका-ए-वारदात पर पहुंची पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद "Death Mystery" से "पर्दा" उठ सकता है। पुलिस को करीब पांच पन्ने का एक (Suicide Note) मिला है। जिसमें Narendra Hoti ने अपने शिष्य आनंद गिरि और दो अन्य लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। 
प्रयागराज के IG (Range) K.P Singh ने कहा, “महंत ने एक बहुत विस्तृत सुसाइड नोट लिखा है जहां उन्होंने अपना सामान भी सूचीबद्ध किया है जो संबंधित लोगों को देना है। इसमें उनका वसीयतनामा भी है।” प्रयागराज आईजी के.पी. सिंह ने कहा, “हमें आश्रम से फोन आया कि महाराज (महंत नरेंद्र गिरि) फंदे से लटक गए हैं। 
वहीं देर रात्रि आनंद गिरी को उत्तराखंड के हरिद्वार में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। Anand Giri ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि Narendra Giri ने खुदकुशी नहीं की बल्कि उनकी साजिश के तहत हत्या की गई है। Anand Giri का आरोप है कि "पर्दे" के पीछे काफी ताकतवर लोग हैं जो मौक़ा पाकर उसका भी Murder करवा सकते हैं।
आनंद गिरी का कहना है कि ये एक बड़ी साजिश है जो गुरुजी से पैसे ऐंठते थे और उन्होंने ही पत्र में मेरा नाम लिखा है। इसकी जांच होनी चाहिए क्योंकि गुरु जी ने अपने जीवन में एक पत्र नहीं लिखा और वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं, उनकी लिखावट की जांच की जानी चाहिए।
आनंद गिरी ने आगे कहा कि मैंने अपना पूरा जीवन वहीं महंत नरेंद्र गिरी के मठ में बिताया है। कभी उनसे कोई पैसा नहीं लिया। मेरे और गुरु जी के बीच सब कुछ अच्छा था और इसलिए मैं सरकार से इस मामले की निष्पक्ष और पूरी जांच कराने का अनुरोध करता हूं।