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  • RSS (East UP) के क्षेत्रसंघ चालक वीरेंद्र जीत सिंह ने दिया इस्तीफा 
  • Krishna Mohan को RSS ने क्षेत्रसंघ चालक की जिम्मेदारी सौंपी 
  • BJP हाईकमान ने सिटिंग MLA & MLC को टिकट देने से दूरी बनाई 
  • सतीश महाना पहले ही दावेदारी से नाम वापस ले चुके हैं
  • सत्यदेव पचौरी भी अंतिम दौर में एड़ी-चोटी का जोर लगाया
  • RSS के दिग्गज Neetu Singh की पैरवी में कर रहे हैं तगड़ी लामबंदी


Yogesh Tripathi 

 Uttar Pradesh की Kanpur लोकसभा सीट अब काफी "हॉट" हो चुकी है। इस सीट पर BJP से लोकसभा का प्रत्याशी कौन बनेगा यह अब Prime Minister Of India की टेबल पर तय होगा। प्रत्याशिता के अंतिम रेस में एड़ी-चोटी का जोर लगाए निवर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी को "सियासी पिच" पर उनकी ही बेटी Neetu Singh तगड़ी चुनौती दे रही हैं।  उधर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से एक बड़ी खबर ये आ रही है कि क्षेत्र संघ चालक वीरेंद्र जीत सिंह ने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया है। राजनीति के जानकारों की मानें तो RSS के इस "बलिदान"  का लोकसभा के टिकट पर साफ-साफ फर्क पड़ेगा। वीरेंद्र जीत सिंह के इस्तीफा देने के पीछे कई तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। RSS ने उनकी जगह   Krishna Mohan को क्षेत्र संघ चालक बनाया है। 



पिछले दिनों BJP की तरफ से जारी प्रत्याशियों की पहली सूची में सिटिंग सांसद सत्यदेव पचौरी का नाम नहीं था। कयास लगाए जा रहे थे कि 75 की उम्र पार कर चुके सत्यदेव पचौरी को हाईकमान ने साइड लाइन कर दिया है लेकिन राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कहे जाने वाले पचौरी ने हार नहीं मानी और दिल्ली में डेरा डाल "अंगद" की तरह अपने पांव जमा दिए। हाईकमान के सामने उन्होंने पांच साल के दौरान अपने विकास कार्यों का लेखाजोखा रक्खा। उनके समर्थन में कई दिग्गजों की पैरवी भी रंग लाई। 

वहीं दूसरी तरफ RSS के कई बड़े दिग्गज सत्यदेव पचौरी की बेटी Neetu Singh के लिए लामबंदी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी अंतिम समय पिता-पुत्री ही रेस में थे। 2019 में गंगा मेला के दिन सत्यदेव पचौरी की टिकट हाईकमान ने फाइनल की और वह प्रत्याशी बने। इसके बाद विधान सभा और महापौर के लिए भी Neetu Singh का नाम खूब चला। महापौर की टिकट के लिए तो उनका नाम करीब-करीब पक्का था लेकिन ऐन वक्त पर दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व ने एक दिग्गज की पैरवी पर प्रमिला पांडेय की टिकट फिर से रिपीट कर दी। महापौर की टिकट न मिलने के बाद RSS के तमाम कद्दावर काफी नाराज भी हुए लेकिन सबको बाद में मैनेज कर लिया गया। इस बीच Neetu Singh की सामाजिक सक्रियता पहले से काफी बढ़ गई।
 

(News Portal) के पास जो जानकारियां हैं उसके मुताबिक Neetu Singh को टिकट दिलाने के लिए RSS ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रक्खा है। क्षेत्र संघ चालक के पद से इस्तीफा देने वाले वीरेंद्र जीत सिंह Neetu Singh के ससुर हैं। संघ के लोगों का मानना है कि ये इस्तीफा नहीं बल्कि "बलिदान" है। उल्लंलेखनीय है कि लंबे समय तक यह पद वीरेंद्र जीत सिंह परिवार और स्वर्गीय ईश्वर चंद्र गुप्त के पास ही रहा है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि Uttar Pradesh के तमाम जनपदों में वीरेंद्र जीत सिंह के पिता स्वर्गीय बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह ने RSS की नींव डाली थी। उनके निधन के बाद से यह जिम्मेदारी ईश्वर चंद्र गुप्त को मिली। ईश्वर चंद्र गुप्त के बाद से संघ परिवार की यह बड़ी जिम्मेदारी Neetu Singh के ससुर अपने कंधों पर उठा रहे थे। 


Note----Kanpur लोकसभा सीट से BJP किसको प्रत्याशी बनाएगी...??? यह किसी को फिलहाल नहीं मालुम हैं। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशी के नाम पर Final मोहर लग चुकी है। प्रत्याशी के नाम की अधिकृत घोषणा यदि आज रात्रि तक नहीं हुई तो फिर 20 मार्च को कभी भी हो सकती है। एडवांटेज Neetu Singh को मिलने की चर्चा है।

  • BJP की पहली लिस्ट में अधिकांशत: पुराने चेहरे
  • कन्नौज से सुब्रत पाठक और उन्नाव से साक्षी महराज
  • फतेहपुर से वर्तमान सांसद साध्वी निरंजन ज्योति प्रत्याशी
  • संतकबीर नगर की सीट से निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद उम्मींदवार
  • लखनऊ से राजनाथ सिंह को हाईकमान ने प्रत्याशी बनाया


 

Yogesh Tripathi

Lok Sabha Election 2024 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार शाम को प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में कानपुर लोकसभा के प्रत्याशी का नाम नहीं है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी का टिकट हाईकमान ने काट दिया है। वहीं कानपुर से सटी अकबरपुर (कानपुर) लोकसभा सीट से निवर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) पर हाईकमान ने एक बार फिर विश्वास जताते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है। सियासी गलियारों में पचौरी का नाम पहली सूची में फाइनल न होने पर तमाम तरह की आशंकाएं और चर्चाएं जोरों पर हैं।


चर्चा है कि Kanpur के एक "माननीय" और व्यापारी नेता के नामों पर आलाकमान काफी गंभीर है। "माननीय" के तार सीधे दिल्ली वाले “सिस्टम” से जुड़े हैं जब कि व्यापारी नेता के लिए संगठन और संघ लामबंद है। व्यापारी नेता करीब तीन दशक से भाजपा से जुड़े हैं। कई बार विधायकी के चुनाव में उनके नाम की चर्चाओं ने जोर पकड़ा लेकिन टिकट नहीं मिल सका। 90 के दशक में यह व्यापारी नेता सत्यदेव पचौरी के साथ लोहा व्यापार मंडल के महामंत्री हुआ करते थे। तब सत्यदेव पचौरी लोहा व्यापार मंडल के अध्यक्ष हुआ करते थे। जानकारों की मानें तो तो इन दो नामों को लेकर हाईकमान काफी विचार-विमर्श कर रहा है। संभावना है कि इन्हीं दोनों में से किसी का नाम देर-सबेर Final हो सकता है। गौरतलब है कि www.redeyestimes.com (News Portal) ने पांच दिन पहले ही सत्यदेव पचौरी की टिकट कटने को लेकर खबर प्रकाशित की थी। 

BJP की पहली लिस्ट में Uttar Pradesh से इन प्रमुख सीटों पर हाईकमान ने प्रत्याशी Final किए हैं। West Zone में मुज़फ़्फ़रनगर सीट से कद्दावर नेता संजीव बालियान को प्रत्याशी बनाया गया है। नगीना से ओम कुमार, रामपुर सीट से घनश्याम लोधी, अमरोहा से कंवर सिंह तोमर, भारी विरोध के बाद भी नोएडा से वर्तमान सांसद महेश शर्मा, मथुरा से हेमा मालिनी , आगरा से SP Baghel, एटा सीट से राजवीर सिंह, खीरी से केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा (टेनी), सीतापुर से राजेश वर्मा, हरदोई लोकसभा से जय प्रकाश रावत, उन्नाव से साक्षी महाराज, मोहनलालगंज सीट से कौशल किशोर ,लखनऊ सीट से केंद्रीय रक्षा मंत्री और वर्तमान सांसद राजनाथ सिंह , कन्नौज से सुब्रत पाठक, अकबरपुर से भोले सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। 

Bundelkhand Zone में झाँसी सीट से अनुराग शर्मा, हमीरपुर- पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, फ़तेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति को हाईकमान ने प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि अयोध्या से लल्लू सिंह, श्रावस्ती से साकेत मिश्रा , बस्ती से हरीश दिवेदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर से रविकिशन शुक्ला, संतकबीर नगर सीट से प्रवीण निषाद, जौनपुर सीट से कृपाशंकर सिंह, चंदौली लोकसभा सीट से MN Pandey समेत 51 प्रत्याशी BJP ने घोषित किए हैं। 

 

  • लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शह-मात का दौर Start
  • Congress के “वजीर” ने बढ़ाई BJP की बेचैनी
  • कांग्रेस प्रत्याशी के बाद बीजेपी फाइनल करेगी प्रत्याशी का नाम
  • बड़े Media House ने BJP प्रत्याशी को लेकर किया सर्वे
  • सर्वे में सबसे ऊपर सतीश महाना का नाम
  • 51 फीसदी लोगों ने किया सतीश महाना के पक्ष में Vote


Yogesh Tripathi

Lok Sabha Election 24 का “सियासी पारा” चढ़ने लगा है। कांग्रेस और सपा के गठबंधन से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाईकमान भी चिंतित है। सपा सुप्रीमों Akhilesh Yadav ने तो तमाम सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी कर दी है। गठबंधन के तहत Akhilesh Yadav ने कांग्रेस को सूबे में 17 सीटें दी हैं। इन 17 सीटों में एक सीट Kanpur भी है। कानपुर से कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा...? यह फिलहाल किसी को नहीं मालुम है लेकिन शहर के एक दिग्गज ने सभी की धड़कने बढ़ा दी हैं। ये दिग्गज कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और बिहार कांग्रेस के प्रभारी Ex.MLA अजय कपूर हैं। लखनऊ और दिल्ली में चर्चा है कि Congress अपने इस “वजीर” को चुनाव मैदान में उतार सकती है। अजय कपूर संभावित प्रत्याशिता की दावेदारी में अन्य लोगों से काफी आगे हैं। देर-सबेर हाईकमान उनके नाम पर अपनी “फाइनल मोहर” लगा सकता है। www.redeyestimes.com (News Portal) ने इस बाबत उत्तर प्रदेश (कांग्रेस) के मीडिया प्रमुख डॉक्टर चंद्रप्रकाश राय से जब बातचीत की तो उन्होंने कहा कि अभी कानपुर सीट पर किसी का नाम फाइनल नहीं हुआ। लोकसभा प्रत्याशी का नाम दिल्ली में हाईकमान तय करेगा।

यूं तो कानपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस के कई नेता टिकट मांग रहे हैं लेकिन मजबूत और ठोस दावेदारी अभी तक कोई नहीं कर सका है। सभी अपने-अपने आकाओं के जरिए दिल्ली-लखनऊ में पैरवी करवा रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान इस बार Kanpur सीट को लेकर खासा गंभीर है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि Ex.MLA अजय कपूर के नाम पर खासा मंथन किया जा रहा है। अजय कपूर के नाम पर हाईकमान कितना गंभीर है...? इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि तीन दिन पहले जब Rahul Gandh की “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” शहर से निकली थी तो खुद Rahul Gandhi ने अजय कपूर को बुलाकर अपने वाहन में बैठाया और साथ लेकर चले। शायद शहर कांग्रेस कमेटी के लिए Rahul Gandhi का यह बड़ा संकेत था। दिल्ली में हलचल के बाद अब चर्चा कानपुर लोकसभा क्षेत्र में भी कांग्रेसी कर रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि पिछले दो दिनों से अजय कपूर भी दिल्ली में ही हैं। उनके Right & Left Hand लोगों ने पुराने कार्यकर्तां की चौखट पर दस्तक भी देना Start कर दिया है।

“कांटे से कांटा” निकालने की रणनीति बना रही है BJP

उधर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी कमर कस ली है। देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान ने कानपुर लोकसभा सीट पर BJP से प्रत्याशिता को लेकर एक सर्वे कराया है। इस सर्वे में एक दिग्गज नेता का नाम सबसे ऊपर है। ये नाम कोई और नहीं बल्कि भाजपा के कद्दावर नेता और विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना का है। सतीश महाना को सर्वे में 51 फीसदी वोट मिले। BJP हाईकमान भी इस बड़े Media House  के सर्वे को लेकर न सिर्फ गंभीर है बल्कि मंथन भी कर रहा है कि आखिर प्रत्याशी किसे बनाएं...? वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी 70 की आयु पार कर चुके हैं। हालांकि “नमो एप” पर वह सबसे चर्चित और अच्छे सांसद हैं। “नमो एप” पर उनकी रैंकिंग टॉप पाइव में है। हाईकमान को सत्यदेव पचौरी के मिजाज को भी बखूबी जानता है।

 

अब देखना ये है कि बीजेपी Kanpur की सीट से किसे प्रत्याशी बनाएगा...? सत्यदेव पचौरी या फिर सतीश महाना...? हालांकि सतीश महाना की तरफ से अभी तक कोई दावेदारी खुलकर सामने नहीं आई है। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि Congress ने “वजीर” अजय कपूर को उम्मींदवार घोषित किया तो फिर BJP किसे अपना “बादशाह” बनाएगी।...? BJP ने यदि सतीश महाना को प्रत्याशी बनाया तो “चुनावी दंगल” देखने लायक होगा। वजह ये है कि सतीश महाना और अजय कपूर की आपस में रिश्तेदारी है। शायद यही वजह है कि BJP ने “कांटे से कांटा” निकालने की रणनीति बनानी अभी से Start कर दी है। देखना अब ये दिलचस्प होगा कि बीजेपी कानपुर सीट पर सत्यदेव पचौरी को रिपीट करती है या फिर सर्वे को गंभीरता से लेते हुए सतीश महाना को प्रत्याशी बनाती है। या फिर दो पुराने दिग्गजों की “नूराकुश्ती” में कोई तीसरा बाजी मारता है...? क्यों कि कानपुर सीट से प्रबल दावेदारी BJP के एक चर्चित विधायक भी कर रहे हैं।  

कभी Congress का मजबूत “किला” था Kanpur

Kanpur कभी कांग्रेस का मजबूत “किला” हुआ करता था लेकिन वर्ष 89 के लोकसभा चुनाव में कम्युनिस्ट नेत्री सुभाषिनी अली ने कांग्रेस के इस किले में “सेंध” लगा दी। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद केसरिया भगवा लहराया और कैप्टन पंडित जगतवीर सिंह द्रोण कई बार चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। समय ने एक बार फिर करवट बदली और कांग्रेस ने पूर्व मेयर श्रीप्रकाश जायसवाल को टिकट दे दिया। श्रीप्रकाश जायसवाल ने बीजेपी से यह सीट छीनकर वापस कांग्रेस को दे दी। 2009 में श्रीप्रकाश जायसवाल जब चुनाव जीतकर संसद पहुंचे तो कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें कोयला मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया।

Modi लहर में फिर हार गई Congress

2014 की मोदी लहर में BJP ने इस सीट से वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को चुनाव के मैदान में उतारा। मुरली मनोहर जोशी ब्राम्हण बाहुल्य कानपुर सीट से भारी वोटों के अंतराल से जीते। श्रीप्रकाश जायसवाल चुनाव हार गए। 2019 में BJP ने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के मंत्री और गोविंदनगर से विधायक सत्यदेव पचौरी को प्रत्याशी बनाया। सत्यदेव पचौरी ने 2019 के चुनाव में श्रीप्रकाश जायसवाल को भारी मतों से हराया।

तीन विधान सभा में हैं अजय कपूर का तगड़ा Network

अजय कपूर की प्रत्याशिता के पीछे कांग्रेस हाईकमान ने कई तरह के फीडबैक लिया हैं। राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद बिहार का प्रभार मिला तो अजय कपूर ने बेहद संजीदा ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया। साथ ही साथ वह कानपुर में भी Active रहे। तीन बार विधायक रहे अजय कपूर का Network शहर की तीन विधान सभाओं में ठीक है। किदवईनगर जहां से वह लगातार दो बार हारे हैं। गोविंदनगर और कैंट विधान सभा। पंजाबी होने के साथ-साथ व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग भी उनके परिवार से जुड़ा है। नब्बे के दशक में अजय कपूर ने सभासद का चुनाव जीतकर अपने सक्रिय राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी। उसके बाद वह गोविंदनगर सीट पर लगातार भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री बालचंद्र मिश्रा से कई बार चुनाव हारे। आखिर में अजय कपूर को जीत मिली और उन्होंने बालचंद्र मिश्रा को चुनाव में हरा दिया।

 

BJP की तरफ से अभी तक नहीं किया गया प्रत्याशी के नाम का ऐलान

Social Media पर नीतू सिंह को टिकट मिलने को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं

सपा और कांग्रेस ने चुनावी समर में ब्राम्हण प्रत्याशियों को उतारा

 


Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh में Kanpur की “मेयर की चेयर” को लेकर BJP में घमासान चरम पर पहुंच गया है। भाजपा की करीब एक सैकड़ा वीरांगनाओं ने मेयर की प्रत्याशिता के लिए अपनी दावेदारी पेश की। जिसके बाद RSS & BJP हाईकमान ने माथा पकड़ लिया। Kanpur (BJP) में उठ रही कलह की “चिंगारी” को ठंडा करने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने निर्विवाद और योग्य प्रत्याशी को “चुनावी युद्ध” में उतारने का मूड में है। RSS पर मजबूत पकड़ रखने वाले सूत्रों की मानें RSS के दिग्गज पदाधिकारी Neetu Singh को प्रत्याशी बनाने के लिए गंभीर मंथन कर रहे हैं। 


सबकुछ यदि सही रहा तो अगले दो से तीन दिन में उनके नाम का अधिकृत ऐलान हाईकमान कर सकता है। अंदरखाने से जो खबरें आ रही हैं उसको लेकर चर्चा है कि “ग्रीन सिग्नल” मिल चुका है। औपचारिकता शेष है। कागजी कार्रवाई को कंपलीट करने का निर्देश 24 घंटा पहले ही मिल गया था। भाजपा नेताओं की चर्चाओं पर यदि यकीन करें तो हाईकमान के आदेश पर ही शायद Neetu Singh ने मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन किया है। सूत्रों पर यदि विश्वास करें तो यह “ग्रीन सिग्नल” प्रदेश नेतृत्व ने हाईकमान के आदेश पर ही शायद दिया है। RSS & BJP के पदाधिकारियों के बीच आपसी सहमति के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। 

चार्टेड अकाउंटेंट (CA) हैं Neetu Singh…?

पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट (CA) का सबसे अधिक मजबूत पक्ष उनके सामजिक दायित्व और आकर्षक उपलब्धियां हैं। “यति संकल्प संस्थान” के जरिए लंबे समय से शहर के लोगों की मदद कर रही नीतू सिंह ने अपने स्वर्गीय पति यतींद्रजीत सिंह की स्मृति में एक Hospital का निर्माण करवा रही हैं। ब्रम्हावर्त सनातन धर्म महामंडल की कोषाध्यक्ष रह चुकीं नीतू सिंह आदिवासी बच्चों के लिए एक अलग से स्कूल संचालित करती हैं। दीनदयाल कालेज के ठीक बगल में स्थित इस स्कूल में करीब 200 आदिवासी बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गरीब-मजलूम और बेसहारा लोगों की हमेशा मदद करने वाली नीतू सिंह “सुशीला नरेंद्रजीत सिंह सेवा निधि” की डॉयरेक्टर भी हैं। इसके जरिए वह न सिर्फ लोगों को मदद करती हैं बल्कि समाजिक सरोकार से भी जुड़ी रहती हैं। इतना ही नहीं “बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह विधि संकल्प संस्थान” में गरीब लोगों की कानूनी सहायत के लिए Neetu Singh प्रतिवर्ष फंड देती हैं, ये  सेवानिधि भी सहायता का केंद्र है। वह VSSD College की संयुक्त सचिव भी हैं। साथ ही साथ वह राष्ट्रीय शिक्षण समिति की सदस्य भी हैं। अपने सभी संस्थाओं, कंपनियों को वह खुद ही देखती और संभालती हैं। गौ सेवा उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा है।


कौन हैं Neetu Singh…?

सियासत और सामाजिक सरोकार नीतू सिंह को दोनों कुलों (मायके और ससुराल) पक्ष से मिले हैं। बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह उनके अजिया ससुर थे। उनके ससुर वीरेंद्र जीत सिंह उत्तर प्रदेश पूर्व क्षेत्र के संघ चालक हैं। ये बिल्कुल सच है कि RSS, संघ और जनसंघ का नाम आते ही लोगों के जेहन में फौरन स्वर्गीय बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह का नाम जेहन में याद आ जाता है। विधि क्षेत्र के पितामह और महानायक कहे जाने वाले बाबू विक्रमाजीत सिंह ख्याति प्राप्त बैरिस्टर थे। विक्रमाजीत सिंह जी नीतू सिंह के ससुर के बाबा थे। VSSD कालेज की नींव उन्होंने ही रक्खी थी। इतना ही नहीं Neetu Singh शहर के सांसद सत्यदेव पचौरी की पुत्री हैं।


2017 में भी प्रत्याशिता की रेस में सबसे आगे थीं

बात पिछले नगर निकाय चुनाव की करें तो उस समय भी नीतू सिंह ने मेयर की प्रत्याशिता के लिए तगड़ी दावेदारी पेश की थी। लेकिन तब पारिवार ने उनको चुनाव लड़ने के लिए मना कर दिया था। 2019 में गोविंदनगर विधान सभा सीट पर जब उपचुनाव हुए तो एक बार फिर उनका नाम दावेदारों की लिस्ट में ऊपर था लेकिन तब यह कहा गया कि पिता के इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई सीट पर उन्हें नहीं लड़ाया जाएगा। एक बार फिर परिवार की बात उन्होंने मान कर सभी का सम्मान किया।  

यूं नहीं किया प्रत्याशिता के लिए आवेदन

Neetu Singh ने वर्ष 2023 में भी मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन नहीं किया था। जिला और क्षेत्रीय नेतृत्व के पास जब करीब एक सैकड़ा महिला कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने आवेदन किया तो प्रदेश व केंद्र के नेतृत्व का माथा ठनका। प्रत्याशिता के लिए आवेदन करने वाले कई दावेदारों ने बाकयदा लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लांबिंग Start कर दी। BJP के सबसे बड़े गढ़ में “कलह की चिंगारी” कहीं “ज्वालामुखी” का रूप लेकर फट न पड़े, इस लिए RSS के बड़े पदाधिकारियों ने निर्विवाद और योग्य को प्रत्याशी बनाने के लिए मंथन शुरु किया। बड़े सूत्रों की मानें तो करीब 24 घंटे की माथापच्ची के बाद बड़े फैसले के संकेत कुछ लोगों को दे दिए गए। हाईकमान से “ग्रीन सिग्नल” मिलने की चर्चा सभी बड़े पदाधिकारियों और नेताओं के बीच है। ऑफ द रेकार्ड सभी बहुत कुछ बोल रहे हैं लेकिन अधिकृत रूप से हर नेता और पदाधिकारी कुछ भी कहने से साफ-साफ बच रहा है। BJP के एक नेता ने कहा कि आखिर कुछ तो है यूं ही नहीं नीतू सिंह ने अचानक प्रत्याशिता के लिए आवेदन दिया है।

 

Note--- ये खबर सियासी चर्चाओं, कयासबाजी और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। Portal किसी को भी प्रत्याशी बनाए जाने की पुष्टि व सहमति प्रदान नहीं करता है।  Social Media पर जो रिपोर्ट्स हैं...कुछ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ ऑफ द रेकार्ड की गई बातचीत के आधार पर यह खबर प्रकाशित की जा रही है। कृपया इस खबर को कॉपी-पेस्ट बिल्कुल भी न करें...(सभी फोटो साभार सोशल मीडिया) धन्यवाद

  • मिशन 2024 के मद्देनजर निकाय चुनाव की तैयारी कर रही है BJP
  • Kanpur (South) से भी दर्जन भर से अधिक लोगों ने आवेदन किया
  • मेयर की प्रत्याशिता पर अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व ही लेगा

Yogesh Tripathi

Uttar Pradesh नगर निकाय चुनाव का “शंखनाद” हो चुका है। केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक करीब एक सैकड़ा आवेदन आ चुके हैं। “चुनावी रणभूमि” में टिकट पाने के लिए BJP की “वीरांगनाओं” ने “तलवार” भांजनी शुरु कर दी है। सभी दिग्गज अपने-अपने “कील-कांटों” को दुरुस्त कर रहे हैं। सब अपनी-अपनी चुनावी “गणित” का बखान कर टिकट पाने का दावा भी कर रहे हैं। देखना अब ये है कि चुनावी समर में BJP और RSS का शीर्ष नेतृत्व टिकट का “प्रसाद” किसको देता है...? संघ की नब्ज पर मजबूत पकड़ रखने वालों की मानें तो अधिकांश दावेदार अपने “सिस्टम” और “रासायनिक सूत्र” का प्रयोग करेंगे लेकिन अंत में उन्हें RSS के “श्री....राम” जी की शरण में ही जाना पड़ेगा। उनकी कृपा और महराज के आशीर्वाद बगैर प्रत्याशिता Final नहीं होगी। सूत्रों की मानें तो निकाय चुनाव में भी बीजेपी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हर फैसले लेगी। हाईकमान का पूरा फोकस मिशन 2024 है। इसके लिए प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री को पूरी तरह से “फ्री हैंड” कर दिया गया है। हालांकि BJP हाईकमान को चौंकाने वाले फैसलों के लिए भी जाना जाता है। कब और कौन सा फैसला आ जाए ये भी नहीं कहा जा सकता। चर्चा इस बात की भी जोरों पर है कि यदि मेयर के चुनाव में ठाकुर बिरादरी को टिकट दिया गया तो लोकसभा (मिशन 2024) में ब्राम्हण बिरादरी को टिकट दिया जाएगा। 

रंजना शुक्ला पत्नी स्वर्गीय विवेक शील शुक्ला

 

मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन करने वालों में राज्य महिला आयोग की सदस्य रंजना शुक्ला (जो कि दिवंगत भाजपा नेता विवेकशील शुक्ला की पत्नी ), गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज की पूर्व प्राचार्या डॉक्टर आरती लाल चंदानी, पूर्व प्रधानमंत्री की अटल बिहारी बाजपेयी की पौत्री नंदिता बाजपेयी, निवर्तमान मेयर प्रमिला पांडेय, कल्याण सिंह सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे पंडित बालचंद्र मिश्रा की पुत्री और महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री डॉक्टर विजया तिवारी, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष कमलावती सिंह, दक्षिण जिले की पूर्व अध्यक्ष अनीता गुप्ता, पूनम दिवेदी, पूनम कपूर, पूर्व पार्षद निर्मल मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा राधा दुबे, महिला मोर्चा की ही रीता शास्त्री, समेत करीब एक सैकड़ा नाम शामिल हैं।

चर्चा है कि नीतू सिंह ने आवेदन नहीं किया है। उनका कहना है कि यदि हाईकमान स्वत: उनके नाम पर विचार कर टिकट देगा तो ही वो लड़ेंगी। नीतू सिंह संघ के बड़े पदाधिकारी रहे बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह की पौत्र वधू हैं। उनका नाम वर्ष 2017 के मेयर चुनाव फिर 2019 के लोकसभा चुनाव की दावेदारी को लेकर चर्चा में आया था। नीतू सिंह संस्था के जरिए सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहती हैं इस लिए उनके नाम को लेकर तमाम तरह की अटकलें और कयासबाजी हो रही है।

 www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में Kanpur (South) BJP की प्रेसीडेंट डॉक्टर वीना आर्या ने बताया कि दक्षिण जिले से करीब 15 आवेदन आए हैं। जबकि Kanpur (North) BJP के प्रेसीडेंट सुनील बजाज ने बातचीत के लिए मोबाइल रिसीव नहीं किया।

 

प्रमिला पांडेय (निवर्तमान मेयर)

 

निवर्तमान मेयर प्रमिला पांडेय ने दोबारा आवेदन किया है। ये भी सच है कि प्रमिला पांडेय का नाम उन तीन नामों में शामिल रहेगा जो हाईकमान को भेजा जाएगा। लेकिन BJP के अंदरखाने में चर्चा इस बात की अधिक है कि उनका विरोधी खेमा अंदर ही अंदर पूरी तरह से लामबंद है। बातचीत में नाम न छापने की शर्त पर दिग्गजों का कहना है कि प्रमिला पांडे की फिर से प्रत्याशिता पर “संकट के बादल” भी मंडरा रहे हैं। बाकी तय तो हाईकमान को ही करना है।

कमलावती सिंह

 

चर्चा में सबसे तगड़ा नाम कमलावती सिंह का है। कमलावती BJP की धाकड़ नेत्री हैं और वर्तमान समय में वह प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। प्रदेश नेतृत्व से लेकर केंद्र की मोदी सरकार के कुछ दिग्गजों से वह सीधे तौर पर कनेक्ट हैं। मतलब साफ है कि अपनी पैरवी के लिए उन्हें किसी की चौखट पर नहीं जाना होगा। वह अपनी पैरवी के लिए खुद ही सक्षम हैं। RSS सूत्रों का कहना है कि यह नाम काफी “विचारणीय” हैं।

रेस में रंजना शुक्ला भी पीछे नहीं हैं। रंजना शुक्ला घाटमपुर और किदवईनगर विधान सभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके दिवंगत नेता विवेकशील शुक्ला की धर्मपत्नी हैं। वर्तमान समय में वह राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं। पति के निधन के बाद रंजना शुक्ला लगातार सामाजिक सरोकार से भी जुड़ी रहती हैं। खास बात ये है कि रंजना शुक्ला के समर्थन में Kanpur South (BJP) के तमाम नेता और कार्यकर्ता खड़े हैं। BJP Workers का कहना है कि यदि रंजना शुक्ला को टिकट मिलता है तो यह दिवंगत विवेकशील शुक्ला को भाजपा हाईकमान की तरफ से सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

डॉक्टर आरती लाल चंदानी

इसके अतिरिक्त डॉक्टर आरती लाल चंदानी का नाम भी कम चर्चा में नहीं है। शहर ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों में भी वह किसी परिचय का मोहताज नहीं है। गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद वह प्राचार्य भी बनीं। हैलट परिसर के अंदर सपा सरकार में चिकित्सकों पर हुए लाठीचार्ज के बाद वर्तमान समय में जेल की सलाखों के पीछे कैद सपा विधायक हाजी इरफान सोलंकी से उनकी अदावत हुई तो नेशनल मीडिया तक में उन्होंने खासी सुर्खियां बटोरीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन उनके बैचमेट हैं। 

डॉक्टर विजय तिवारी (महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री)

 

एक अन्य दावेदार डॉक्टर विजया तिवारी वर्तमान समय में प्रदेश महामंत्री (महिला मोर्चा) हैं। विजया तिवारी के पिता पंडित बालचंद्र मिश्रा कल्याण सिंह सरकार में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री रह चुके हैं। वह कई बार पूर्व की गोविंदनगर विधान सभा (वर्तमान में किदवईनगर) सीट से विधायक भी निर्वाचित हुए। बालचंद्र मिश्रा भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बने। RSS में उनकी पैठ आज भी बढ़िया है।

सबसे जटिल जो नाम है वो नीतू सिंह का है। हालांकि नीतू सिंह ने मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन नहीं किया है लेकिन हर दावेदार और नेता की जुबान पर उनका नाम अवश्य है। चर्चा इस बात की जोरों पर है कि यदि हाईकमान ने पैनल के नाम की जगह स्वत : किसी नाम को Final करने सोची तो वह नाम नीतू सिंह का भी हो सकता है। नीतू सिंह फिलहाल अपने सामाजिक संस्था के जरिए समाजसेवा के गरीब लोगों की हरसंभव मदद देने का कार्य कर रही हैं।