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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने Uttar Pradesh में होने वाले विधान सभा उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। Kanpur की गोविंदनगर विधान सभा सीट के लिए हाईकमान ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और BJP की प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना उपाध्याय को प्रभारी बनाया है। लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी सफलता के बाद से गोविंदनगर विधान सभा (उपचुनाव) की प्रत्याशिता के लिए “कसरत” कर रहे करीब डेढ़ दर्जन दावेदारों में हलचल तेज हो चुकी है। अपने-अपने सिस्टम के जरिए सभी दावेदार अब प्रभारियों की चौखट पर दस्तक देने को बेताब हैं।


Yogesh Tripathi


सत्यदेव पचौरी के सांसद बनने पर खाली हुई सीट


RSS & BJP का गढ़ कही जाने वाली गोविंदनगर विधान सभा सीट से वर्ष 2017 में सत्यदेव पचौरी को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया था। श्रीपचौरी यहां बंपर वोटों से चुनाव जीते तो योगी कैबिनेट में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सत्यदेव पचौरी पर विश्वास जताते हुए उनको प्रत्याशी बनाया। करीब सवा दो लाख वोटों से जीत हासिल कर सत्यदेव पचौरी सांसद बने। सांसद बनने के बाद उन्होंने विधान सभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

इस लिए केशव प्रसाद मौर्य बने हैं प्रभारी


केशव प्रसाद मौर्य यूपी की राजनीति में बड़ा नाम है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके केशव प्रसाद मौर्य वर्तमान समय में डिप्टी सीएम हैं। कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं कि “सत्ता और संगठन का 100 प्रतिशत कॉकटेल हैं डिप्टी सीएम केशव मौर्या”। प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ उनको संगठन का तो अनुभव है ही साथ ही साथ सरकार में ताकतवर डिप्टी सीएम के तौर पर वे अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। श्रीमौर्य लंबे समय तक बजरंगदल और विश्व हिन्दू परिषद के तमाम पदों पर रह चुके हैं। कानपुर में उनके कई करीबी कार्यकर्ता और विश्वासपात्र लोग हैं।

Ex.MLA सलिल विश्नोई, नीरज चतुर्वेदी, अनूप पचौरी समेत कई दावेदार

गोविंदनगर विधान सभा का हाल “एक अनार और सौ बीमार” वाला है। यहां से पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ संगठन के ताकतवर और दिग्गज नेताओं ने प्रत्याशिता के लिए ताल ठोंकने का मन बना लिया है। कुछ खुलकर सामने आ चुके हैं और कुछ अंदर ही अंदर अपनी गोटें बिछा रहे हैं। गोविंदनगर विधान सभा से दो बार विधायक रह चुके वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी के पुत्र अनूप पचौरी अपनी तगड़ी दावेदारी पेश कर रहे हैं। युवाओं की एक बड़ी टीम वर्तमान समय में उनके साथ है।

नीरज चतुर्वेदी—पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी भी तगड़े दावेदार हैं। सूत्रों की मानें नीरज चतुर्वेदी का संगठन के बड़े नेताओं में सिस्टम ठीक है। इसी लिए उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है।

सलिल विश्नोई---पूर्व विधायक सलिल विश्नोई की भी दावेदारी कम नहीं है। संगठन में प्रदेश स्तरीय पद होने के साथ-साथ हाल के लोकसभा चुनाव में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के प्रभारी रहे हैं। संगठन के शीर्ष और कद्दावर पदाधिकारियों तक उनकी गहरी पैंठ है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में हाईकमान ने उनको हेलीकॉप्टर मुहैया करवाया था।

मानवेंद्र सिंह----कानपुर-बुन्देलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह के बारे में चर्चा है कि वे भी गोविंदनगर सीट से प्रत्याशी बनना चाह रहे हैं लेकिन अभी तक उन्होंने दावेदारी नहीं की है। मानवेंद्र सिंह के कनेक्शन भी संगठन के साथ-साथ सूबे के “सरकार” से सीधे हैं।

सुरेंद्र मैथानी---कानपुर बीजेपी के संगठन में तगड़ी पकड़ रखने वाले और कार्यकर्ताओं के बीच अतिलोकप्रिय सुरेंद्र मैथानी भी गोविंदनगर सीट से तगड़े दावेदार बने हैं। सुरेंद्र मैथानी ने वर्ष 2017 में किदवईनगर विधान सभा से भी टिकट मांगा था लेकिन ऐन वक्त पर टिकट कट गया। श्रीमैथानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी तगड़ी दावेदारी की थी लेकिन सफलता नहीं मिली।

निर्मल तिवारी----लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा छोड़कर बीजेपी ज्वाइन करने वाले निर्मल तिवारी भी दावेदारी कर रहे हैं। वे 2017 के विधान सभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं। साथ ही निर्मल तिवारी 2014 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की धर्मपत्नी डिंपल यादव के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं।

सुबोध चोपड़ा---लंबे समय से बीजेपी की सक्रिय राजनीति कर रहे सुबोध चोपड़ा भी गोविंदनगर सीट से दावेदारी कर रहे हैं। परमपुरवा में रहने वाले श्रीचोपड़ा नब्बे के दशक में शिवसेना के टिकट पर जनरलगंज से चुनाव विधायकी का चुनाव लड़ चुके हैं। फिलहाल वे व्यापार मंडल के अध्यक्ष हैं। गोविंदनगर में उनके समर्थकों की एक बड़ी टीम है।

ये भी हैं दावेदार


पूर्व महापौर रवींद्र पाटनी, पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश राय, पार्षद नवीन पंडित, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आनंद राजपाल, महिला मोर्चा की महामंत्री कमलावती सिंह समेत करीब दर्जन भर छोटे और बड़े नेता दावेदारी कर रहे हैं।


 

 

Lok Sabha Election 2019 में प्रचंड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी निगाहें Uttar Pradesh में होने वाले विधान सभा के उपचुनावों पर जमा दी हैं। 11 विधायक इस बार सांसद बने हैं। 8 BJP के हैं, जिसमें 3 योगी सरकार में कैबिनेट हैं। सूत्रों की मानें तो संगठन ने विधान सभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन को लेकर बेहद गोपनीय स्तर पर संभावित बड़े दावेदारों का Report Card मांगा है। Kanpur की गोविंदनगर विधान सभा के लिए "एक अनार, सौ बीमार" वाली कहावत चरित्रार्थ होती दिखाई दे रही है। यहां से करीब एक दर्जन नेता दावेदारी कर रहे हैं। BJP उत्तर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी और क्षेत्रीय प्रेसीडेंट मानवेंद्र सिंह के बारे में बेहद ही गोपनीय रिपोर्ट संगठन के बड़े पदाधिकारी की तरफ से शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई है।


YOGESH TRIPATHI


अशोक चंदेल (बेबी) की सदस्यता रद्द करने के लिए लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एम.वेंकटेश्वर लू ने बुधवार को हमीरपुर से बीजेपी के विधायक अशोक सिंह चंदेल (बेबी) की सदस्यता रद्द करने के लिए प्रमुख सचिव (विधान सभा) प्रदीप दुबे और प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को पत्र लिखा। मालुम हो कि अशोक चंदेल को पांच लोगों की सामूहिक हत्या में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की। जिसके बाद वे सरेंडर कर जेल चले गए। अशोक चंदेल की सदस्यता रद्द होने पर UP की 12 विधान सभा पर उपचुनाव होंगे।

संगठन की ताकतवर नेत्री ने लिया फीडबैक

बीजेपी संगठन की एक ताकतवर नेत्री ने गोविंद नगर विधान सभा (उपचुनाव) के मद्देनजर दो बड़े नेताओं सुरेंद्र मैथानी और मानवेंद्र सिंह के बाबत जानकारियां जुटाईं। सूत्रों की मानें तो ये रिपोर्ट बीजेपी के संगठन मंत्री सुनील बंसल को भेजी जानी है। चर्चा है कि जीत से उत्साहित भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और संगठन विधान सभा के उपचुनाव जल्द से जल्द कराना चाह रहा है। कयास लगाए जा रहे है कि जुलाई या फिर अगस्त माह में उपचुनाव हो सकते हैं। खास बात ये है कि फीडबैक लेने वाली संगठन की ताकतवर नेत्री वही हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में www.redeyestimes.com (News Portal) की खबर को संज्ञान में लेकर विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को भेजी थी और शीर्ष नेतृत्व ने 12 घंटे बाद अकबरपुर लोकसभा में यूपी बीजेपी के पूर्व प्रेसीडेंट लक्ष्मीकांत बाजपेयी को प्रभारी बनाकर कैम्प करने के लिए भेज दिया था। ये खबर बीजेपी प्रत्याशी को लेकर ब्राम्हणों में पनपे असंतोष को लेकर पोर्टल ने चुनाव से 10 दिन पहले प्रकाशित की थी।

गोविंदनगर में “एक अनार और 100 बीमार

गोविंद नगर से विधायक सत्यदेव पचौरी ने लोकसभा का चुनाव भारी मतों से जीता है। श्रीपचौरी योगी सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर भी हैं। उनके चुनाव जीतने के बाद ये सीट रिक्त हो चुकी है। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी से करीब एक दर्जन से अधिक नेता अपना दावा ठोंक रहे हैं। इसमें करीब आधा दर्जन वो नेता हैं जो लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में शामिल हुए हैं। वहीं, बीजेपी के एक पूर्व जिलाध्यक्ष, एक पूर्व विधायक समेत करीब आधा दर्जन बड़े नेता काफी मजबूती से पैरवी भी कर रहे हैं। सभी अपने करीबी बड़े नेताओं के जरिए संगठन स्तर पर पैरवी भी करवा रहे हैं। हालांकि इसमें कुछ ऐसे भी दावेदार हैं जो सिर्फ फेसबुक और होर्डिग्स तक के दायरे में ही सीमित हैं। संगठन स्तर पर न तो उनकी मजबूत पकड़ है और न ही उनकी पैरवी करने वाला कोई बड़ा नेता ही।

[caption id="attachment_19536" align="aligncenter" width="544"] लोकसभा चुनाव में कानपुर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन करते क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह (बीच में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) । फोटो साभार--Facebook[/caption]

मानवेंद्र सिंह ने नहीं की है दावेदारी

बड़े सूत्रों की मानें तो मानवेंद्र सिंह ने फिलहाल अभी तक दावेदारी नहीं की है। लेकिन क्षेत्रीय अध्यक्ष होने की वजह से संगठन के सभी बड़े नेता न सिर्फ उनको जानते हैं बल्कि कई से उनके करीबी संबध भी हैं। हर चुनाव में उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं होती हैं लेकिन उन्होंने कभी दावेदारी संगठन स्तर पर नहीं की है। इस उपचुनाव में भी उन्होंने दावेदारी नहीं है। सूत्रों की मानें तो मानवेंद्र सिंह की जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक “शहर की राजनीति में मानवेंद्र सिंह का कोई बड़ा योगदान नहीं है। बीजेपी के निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर उनकी मजबूत पकड़ भी नहीं है। मानवेंद्र सिंह का प्लस प्वाइंट ये है कि मानवेंद्र सिंह की अगुवाई में लोकसभा और विधान सभा के चुनाव में बीजेपी ने बड़ी सफलता हासिल की है।

[caption id="attachment_19535" align="alignnone" width="647"] सुरेंद्र मैथानी (उत्तर जिलाध्यक्ष, बीजेपी)[/caption]

शहर की नब्ज को बखूबी से जानते हैं पंडित सुरेंद्र मैथानी

मानवेंद्र सिंह के बाद दूसरा नाम सुरेंद्र मैथानी का है। कार्यकर्ता चाहे उत्तर का हो या फिर दक्षिण का वे हर किसी के साथ खड़े रहते हैं। पंडित सुरेंद्र मैथानी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। Twitter पर उनके एक्टिव होने की वजह से पिछले चुनाव में अमित शाह ने मंच से सुरेंद्र मैथानी का नाम लेकर कहा था कि यूपी में सिर्फ सुरेंद्र मैथानी ही एक मात्र जिलाध्यक्ष हैं जो ट्वीटर पर खासे एक्टिव रहते हैं। सुरेंद्र मैथानी को बीजेपी संगठन के साथ-साथ RSS के कई बड़े पदाधिकारियों की “छत्र छाया” है। कार्यकर्ता भी उनको बखूबी पसंद करते हैं। “सुरेंद्र मैथानी के बारे में जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक शहर की नब्ज को जानने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के काफी करीब हैं। उत्तर हो या दक्षिण हर जगह उनकी तगड़ी पैठ है। साथ ही वे ब्राम्हण भी हैं। चूंकि गोविंदनगर में ब्राम्हण वर्ग का मतदाता काफी संख्या में है। इस लिहाज से उनको प्रत्याशी बनाया जाना बीजेपी के हित में ठीक रहेगा।“ हालांकि ब्राम्हण नेता के तौर पर करीब आधा दर्जन लोग दावेदारी कर रहे हैं।

अभी तक 8 नेताओं ने की है दावेदारी

जानकार सूत्रों की मानें तो बीजेपी संगठन के पास अभी तक कुल 8 नेताओं की दावेदारी पहुंची है। इसमें एक दूसरे दल से आए ब्राम्हण नेता के साथ-साथ BJP संगठन में लंबे समय से काम कर रहे दो पूर्व छात्रसंघ के पदाधिकारी हैं। शहर के दक्षिणी एरिया से अभी तक सिर्फ एक लोगों ने ही दावा ठोंका है। माना जा रहा है कि जल्द ही करीब आधा दर्जन और नेताओं की दावेदारी भी संगठन के पास पहुंच जाएगी। इसमें एक पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ-साथ पूर्व महापौर की तरफ से भी दावेदारी किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।

 

 

Lok Sabha Election 2019 :  अकबरपुर लोकसभा सीट से BJP प्रत्याशी और वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) को “चुनाव जिताने और ब्राम्हणों को मनाने” के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने फॉयर ब्रांड नेता और BJP (UP)  के Ex. President लक्ष्मीकांत बाजपेयी को “मोर्चे” पर तैनात कर दिया है। मंगलवार दोपहर Kanpur पहुंचे श्रीबाजपेयी ने Kanpur BJP (North) के अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के साथ पत्रकारों से बातचीत की। वे पांच दिनों तक अकबरपुर लोकसभा में कैम्प कर ब्राम्हण मतदाताओं की प्रत्याशी से बढ़ी नाराजगी को दूर करने का हरसंभव प्रयार करेंगे। गौरतलब है कि संडे को www.redeyestimes.com (News Portal) ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित करते हुए लिखा था कि बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) की चुनावी नाव “ब्राम्हण मतदाताओं की नाराजगी, जातिवाद की राजनीति और भीतरघात” “भंवर” में फंसती नजर आ रही है। इस खबर को केंद्रीय चुनाव समिति ने बेहद गंभीरता से लेने के बाद लक्ष्मीकांत बाजपेयी को भेजने का फैसला लिया है।


YOGESH TRIPATHI


सिर्फ नाराज ही नहीं बेहद गुस्से में है ब्राम्हण मतदाता


अकबरपुर लोकसभा सीट की चाबी करीब 2.95 लाख ब्राम्हण मतदाताओं के पास ही है। ये सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी भली भांति जान रहे हैं। पिछली बार बड़ी संख्या में ब्राम्हण मतदाताओं ने बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) के पक्ष में मतदान किया था। जिसकी वजह से उनकी बंपर जीत हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके बाद “भोले” एक खास तरह के “सिंडीकेट” और ठाकुर बिरादरी के लोगों के बीच घिरे रहे। पांच साल तक ब्राम्हण वोटों की सुध तक नहीं ली। हर स्तर पर ब्राम्हण वर्ग के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और मतदाताओं को अपमान सहना पड़ा। 2019 के चुनाव की बेला आई तो उसके साइड इफेक्ट तुरंत दिखने शुरु हो गए। ब्राम्हण मतदाताओं के साथ कुछ कार्यकर्ता और संगठन के पुराने नेता भोल के खिलाफ लामबंद हो गए। जिसकी वजह से उनका “चुनावी समीकरण” पूरी तरह से गड़बड़ा गया।

“कोढ़ में खाज” वाली स्थित तब आ गई जब कुछ “माननीय” अंदर ही अंदर भीतरघात में जुट गए। कुछ “माननीय” के परिवारीजन और रिश्तेदार सजातीय प्रत्याशियों के लिए खुल्लम-खुल्ला वोट मांगने लगे। इसमें प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार का नाम सबसे ऊपर है। वे दो दिन पहले ख्यौरा एरिया में सपा-बसपा गठबंधन की प्रत्याशी निशा सचान के लिए जनसंपर्क कर वोट मांगते दिख चुके हैं। फोटो के साथ उनकी भी खबर www.redeyestimes.com (News Portal) ने मंडे को प्रकाशित की थी।


भोले को जिताने और ब्राम्हणों को मनाने” के मिशन पर आए हैं लक्ष्मीकांत बाजपेयी


बड़े सूत्रों की मानें तो Portal में प्रकाशित इस महत्वपूर्ण और अहम खबर को केंद्रीय चुनाव समिति ने बेहद गंभीरता से लेकर इस पर मंथन किया। इस बीच लोकल स्तर से भी शिकायतें भेजी गईं। जिसके बाद BJP हाईकमान ने तुरंत लक्ष्मीकांत बाजपेयी को अकबरपुर लोकसभा में पहुंचने का निर्देश जारी किया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लक्ष्मीकांत बाजपेयी के एक मझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी हैं। ब्राम्हण नेताओं, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। जमीनी नेता के तौर पर श्रीबाजपेयी की पहचान होती है। अपनी इन्हीं खूबियों के चलते लक्ष्मीकांत बाजपेयी ब्राम्हण वर्ग की भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) से बढ़ी नाराजगी को दूर करेंगे।

खबरों की मानें तो सबसे पहले वे स्थानीय संगठन के कद्दावर ब्राम्हण नेताओं के साथ गोपनीय बैठक करेंगे। किस एरिया, गांव और तहसील में विरोध अधिक है, इसकी जानकारी लेने के बाद वे रणनीति बनाएंगे। साथ ही साथ वे कई जगहों पर खुद भी पहुंचेगें। खबर ये भी है कि उनकी मौजूदगी की वजह से जो “माननीय” अंदर ही अंदर बीजेपी प्रत्याशी के “जड़” में “माठा” डाल रहे हैं, उन पर भी श्रीबाजपेयी नकेल कसने का काम करेंगे।


कांग्रेस प्रत्याशी से है मुकाबला


मीडिया से बातचीत के दौरान लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुकाबला कांग्रेस के साथ है। उन्होंने कहा कि सपा का अत्याचार जनता को पूरी तरह से याद है। श्रीबाजपेयी ने कहा कि सपा का अत्याचार ही उसका पेनाल्टी कार्नर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी यूपी में इस बार 74 से अधिक सीटें जीतेगी।

[caption id="attachment_19366" align="alignnone" width="695"] अकबरपुर लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के समर्थन में वोट मांगते पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार।[/caption]

सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) ने हाईकमान से शिकायत की


भीतरघात से जूझ रहे अकबरपुर के वर्तमान सांसद और भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) ने कुछ वर्तमान और पूर्व “माननीयों” की शिकायत बीजेपी हाईकमान से की है। सूत्रों की मानें तो करीब दर्जन भर नेताओं की शिकायत की गई है। ये वो लोग हैं जो बीजेपी में रहकर विरोधी दलों के लिए “विभीषण” बन चुके हैं। कई दिग्गजों के रिश्तेदारों की भी शिकायत की गई है। शिकायत में Portal की निष्पक्ष खबरों को भी आधार बनाया गया है। गौरतलब है कि सोमवार को पोर्टल ने प्रदेश सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री के भाई और कल्याणपुर से बीजेपी की वर्तमान विधायक नीलिमा कटियार के मामा जगविजय कटियार की फोटो के साथ में खबर प्रकाशित की थी। जिसमें वे गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के साथ चुनाव संपर्क कर वोट मांग रहे हैं।

 

 

"अपने-अपने दावे, अपने-अपने नाखुदा" के सहारे Kanpur (BJP) के कई दिग्गज लोकसभा टिकट के लिए दंभ भर रहे हैं। किसी पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की छतरी” है तो कोई संगठन और व्यापारियों को लामबंद कर टिकट मांग रहा है। दावे तो सभी के मजबूत हैं लेकिन टिकट किसी एक को ही मिलनी है। लोकल के करीब आधा दर्जन नेताओं ने तगड़ी दावेदारी पेश की है। www.redeyestimes.com (News Portal) को मिली जानकारी के मुताबिक BJP को Kanpur लोकसभा सीट पर किसी भाग्यवान”सिंकदर” की तलाश हैं। चर्चा इस बात की भी है कि BJP-RSS के कद्दावर रणनीति के तहत “SKY LAB” (बाहर से किसी बड़े चेहरे) को उतार सकती हैं।


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 प्रत्याशिता की रेस में लगातार बने हैं कैबिनेट मंत्री सतीश महाना


यूपी सरकार में बेहद ताकतवर मंत्री सतीश महाना लोकसभा की प्रत्याशिता के रेस में लगातार बने हुए हैं। चर्चा चाहे जनता के बीच हो या फिर सत्ता के गलियारों में, सतीश महाना का नाम हर किसी की जुबान पर आता है। हालांकि खुद महाना ने अभी तक किसी भी स्तर पर दावेदारी पेश नहीं की है। बेहद गंभीर किस्म के सतीश महाना की प्रत्याशिता पर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी काफी गंभीर है लेकिन अंदरखाने से जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक तमाम वजहों से सतीश महाना अभी पूरी तरह से मूड नहीं बना पा रहे हैं। गौरतलब है कि सतीश महाना 2009 में कानपुर से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। तब उनको यूपीए के सरकार में गृहराज्य मंत्री रहे कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल ने हराया था। हाल के दिनों में एक कार्यक्रम के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से सतीश महाना का नाम लेकर उनकी काफी तारीफ की थी। वे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी बेहद करीबी मंत्रियों में एक हैं।

सुरेंद्र मैथानी को दूर करवाना होगा कुंडली का कालसर्प दोष”


कानपुर बीजेपी के उत्तर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी भी तगड़े दावेदार के रूप में हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या उनकी “राजनीतिक कुंडली” में बने “कालसर्प दोष” की है। जानकारों की मानें तो इसी कालसर्प दोष की वजह से 2017 में सुरेंद्र मैथानी का किदवईनगर विधान सभा सीट से टिकट अंतिम समय में कट गया था। हालांकि खबरों की मानें तो सुरेंद्र मैथानी अपनी राजनीतिक कुंडली के कालसर्प दोष को दूर कराने के लिए नागपुर स्थित RSS के कार्यालय पर पूरी तरह से एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। पोर्टल से बातचीत में मैथानी ने कहा कि दावेदारी कर रहे हैं लेकिन टिकट देना शीर्ष नेतृत्व के हाथों में हैं।

संगठन की ताकत सलिल विश्नोई के साथ


जनरलगंज सीट से कई बार विधायक रह चुके सलिल विश्नोई के पास संगठन की बड़ी ताकत है। संगठन मंत्री सुनील बंसल के वे बेहद करीबी लोगों में एक हैं। यही वजह रही कि उनके राज्यसभा की प्रत्याशिता पर भी मुहर लग गई थी लेकिन ऐन वक्त पर समीकरण गड़बड़ा गए। अंदरखाने की मानें तो यदि सुनील बंसल की चली तो सलिल विश्नोई को बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व प्रत्याशी बना सकता है।

व्यापारियों की हुंकार एक बार फिर मणिकांत जैन


यूं तो मणिकांत जैन पहली बार लोकसभा सीट के लिए दावेदारी नहीं कर रहे हैं। पहले भी वे कई बार दावा ठोंक चुके हैं लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने उनके नाम के कभी गंभीरता से नहीं लिया। बताया जा रहा है कि व्यापारी एकता की दुहाई देकर मणिकांत जैन एक बार फिर टिकट मांग रहे हैं। मणिकांत जैन करीब तीन दशक पहले से लोहा व्यापार मंडल की राजनीति में सक्रिय हैं। तब उनके साथ सत्यदेव पचौरी भी सक्रिय रहते थे। दोनों साथ-साथ पदाधिकारी भी लोहा व्यापार मंडल में रह चुके हैं।

RSS की पहली पसंद हैं बैरिस्टर साहब की पौत्र वधू नीतू सिंह


नीतू सिंह का नाम वैसे सक्रिय राजनीति में नहीं है लेकिन बैरिस्टर साहब की पौत्रवधू होने और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी की बेटी होने की वजह से वे बीजेपी, संगठन और RSS में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। नीतू सिंह का नाम 2017 में हुए नगर निगम के चुनाव में तब चर्चा में आया था जब दावेदारों के बीच चल रही रस्साकशी के बीच शीर्ष नेतृत्व ने उनको बुलाकर टिकट देने की ठान ली थी। हालांकि अंतत: टिकट प्रमिला पांडेय को मिला और चुनाव भी जीतीं। बेहद करीबी लोगों की मानें तो नीतू सिंह के नाम पर खुद RSS मोहन भागवत समेत कई कद्दावर उनको प्रत्याशी बनाए जाने के पक्ष में हैं।

रेस से इस लिए बाहर हो गईं महापौर प्रमिला पांडेय


पिछले कुछ दिनों में प्रमिला पांडेय का नाम काफी तेजी से लोकसभा की प्रत्याशिता को लेकर चल रहा था। लेकिन फिलहाल वे रेस से करीब-करीब बाहर हो चुकी हैं। खबरों की मानें तो हाल के दिनों में महापौर प्रमिला पांडेय ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी लेकिन उसके बाद उन्होंने फिर से ले ली। कुछ मौकों पर उनकी प्रतिक्रयाएं भी ठीक नहीं रहीं। एक ताकतवर मंत्री की तरफ से हाईकमान को ये बताया कि गया कि सत्ता पक्ष की महापौर रहने के बाद भी उनकी यह कार्यप्रणाली बेहद खराब रही और जनता के बीच संदेश गलत गया। इस लिए माना जा रहा है कि प्रमिला पांडेय का नाम हाईकमान गंभीरता से नहीं लेगा।

[caption id="attachment_18972" align="alignnone" width="695"] 90 के दशक में फिल्म "मैने प्यार किया" की अभिनेत्री भाग्यश्री का नाम भी चर्चा में है।[/caption]

भाग्यश्री, राजनाथ, अमित शाह हो सकते हैं “SKY LAB”


वैसे BJP के बारे में एक बात कही जाती है कि कब, किसको क्या बना दिया जाए ये किसी को नहीं मालुम रहता है। यही वजह है कि 2019 लोकसभा के “चुनावी शंखनाद” से पहले तमाम तरह की अटकले लगाई जा रही हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को लखनऊ से कानपुर शिफ्ट कर चुनाव लड़ाने की चर्चाएं काफी लंबे समय से हो रही हैं।

राजनाथ सिंह की प्रत्याशिता को लेकर लंबे समय से तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि लखनऊ की जगह उनको कानपुर या फिर गाजियाबाद से बीजेपी टिकट दे सकती है। वहीं, शनिवार को लखनऊ में आयोजित एक बड़े वैवाहिक समारोह में यूपी के पूर्व संगठन मंत्री और वर्तमान में एक बड़े प्रांत के संगठनमंत्री ने 90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री के भी कानपुर से चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा की। जानकारों की मानें तो भाग्यश्री के पारिवारिक संबध बीजेपी के इस बड़े नेता से हैं। तर्क ये दिया जा रहा है कि भाग्यश्री चूंकि बीजेपी की मेंबर हैं साथ ही उनके ससुराल पक्ष की कई रिश्तेदारियां भी कानपुर में हैं। इस लिए बीजेपी के ये बड़े नेता उनकी पैरवी में जुटे हैं।


चर्चा ये भी है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी ऐसी सीट चाहते हैं कि जहां पर जाए बगैर ही वे आसानी से चुनाव जीत जाएं। ऐसे में लखनऊ और कानपुर ही काफी मुफीद सीट उनके लिए हो सकती है। खबर ये भी है कि केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कानपुर की चर्चित चिकित्सक डॉ. आरती लाल चंदानी के लिए अंतिम समय में पैरवी कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो अगले महीने ही शायद उनका रिटयरमेंट भी है।


खिचड़ी” पकने पर रिपीट हो सकते हैं “भीष्म पितामह”


चर्चाओं की मानें तो कानपुर से बीजेपी सांसद मुरली मनोहर जोशी ने अभी अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि प्रत्याशिता को लेकर खिचड़ी पकी तो बीजेपी एक बार फिर से उनको रिपीट करने के बारे में सोच सकती है। हालांकि विपक्ष भी यही चाहता है कि जोशी को रिपीट किया जाए ताकि सीधा एडवांटेज कांग्रेस को मिले।