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Lok Sabha Election 2019 के चौथे चरण की मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस फेज में यूपी की 13 लोकसभा सीटों पर 29 एप्रिल को मतदान हुआ है। Kanpur Nagar और अकबरपुर लोकसभा में भी 29 को वोटिंग हुई। वोटिंग के बाद से अब तक सोशल मीडिया में दो ऑडियो वॉयरल हुए हैं। दोनों ही ऑडियो में नेताओं की बातचीत से स्पष्ट है कि बड़े भीतरघात से जुड़ा ये मामला अकबरपुर लोकसभा का ही है। बातचीत के दौरान ब्राम्हण नेता और नेत्री सीधे-सीधे चैलेंज कर रहे हैं कि इस बार BJP प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) को हर कीमत पर चुनाव में शिकस्त दिलानी है। एक ऑडियों में तो जमकर गाली-गलौज भी है। www.redeyestimes.com (News Portal) को बड़े सूत्रों से खबर है कि 3 विधायकों के खिलाफ निगेटिव रिपोर्ट BJP हाईकमान के पास भेजी गई है। रिपोर्ट में तीनों पर भीतरघात कराने का जिक्र साफ-साफ है। दो विधायकों पर चुनाव में सहयोग न करने का आरोप है। सूत्रों की मानें तो ये रिपोर्ट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने गोपनीय स्तर पर अवलोकन करने के बाद वोटिंग के बाद तुरंत ही सौंप दी।


[caption id="attachment_19366" align="alignnone" width="695"] अकबरपुर लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के समर्थन में वोट मांगते पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


परिणाम के बाद बढ़ेगी BJP के अंदर की बड़ी रार


23 मई को मतगणना होनी है। चुनाव परिणाम के बाद माना जा रहा है कि कानपुर देहात की बीजेपी के अंदर बड़ी रार सामने आ सकती है। सोशल मीडिया पर वॉयरल दो आडियों में एक बीजेपी की नेत्री का भी है। ब्राम्हण वर्ग की ये नेत्री सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता से कह रही है कि गठबंधन के प्रत्याशी को वोट और सपोर्ट करवाओ। ये नेत्री एक कद्दावर ब्राम्हण नेता का भी नाम ले रही है। करीब दो मिनट के इस आडियो में नेत्री कहती है कि भाजपा की औकात तो 50 महिला कार्यकत्रियों को भी रैली में लाने की नहीं थी, लेकिन वो 6 हजार महिलाओं को लेकर पहुंची.....।


दूसरा आडियो भी इसी ब्राम्हण नेता के समर्थक का है। जिसमें वो साफ-साफ अपने ही पार्टी के कार्यकर्ता से कह रहा है कि गाड़ी नहीं दी गई है। गाड़ी नेता जी ने अपनी तरफ से दी है। नेताजी नहीं चाहते हैं कि देवेंद्र सिंह (भोले) चुनाव जीतें। फिर ये कार्यकर्ता कहता है कि ब्राम्हणों को अब बीजेपी में तरजीह नहीं दी जा रही है। चार टिकट दिए गए हैं। कन्नौज में क्या....। इसके बाद तमाम गालियों से बातचीत भी आडियो में है। खबर है कि ये आडियो भी हाईकमान के पास भेजे गए हैं। वहीं बड़े पैमाने पर भीतरघात की खबर वाले आडियो के जारी होने से प्रत्याशी और उनके समर्थकों में बेचैनी बड़ गई है।

उल्लेखनीय है कि www.redeyestimes.com (News Portal) ने चुनाव से काफी पहले ही रनिया विधान सभा, बिठूर विधान सभा, कल्याणपुर विधान सभा में बड़े पैमाने पर हो रहे भीतरघात की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। साथ ही कल्याणपुर में पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार की तरफ से गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगने वाली फोटो भी पोर्टल ने प्रकाशित कर भीतरघात की खबर प्रकाशित की थी। इन दोनों खबरों के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी को प्रभारी बनाकर अकबरपुर लोकसभा में भेजा। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का कार्यक्रम लगाया गया। RSS के प्रांतीय पदाधिकारी समेत कई दिग्गज चुनाव के अंतिम दिन तक कैम्प करते रहे। उसके बाद भी बड़े स्तर पर भीतरघात हो ही गया।


चुनाव में साफ-साफ दिखाई दी गुटबाजी


बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) को यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। टिकट दिलवाने में भी उनकी बड़ी भूमिका बताई जा रही है। वहीं, जिन तीन विधायकों की निगेटिव रिपोर्ट भेजी गई है वे सभी संगठन के एक बड़े ताकतवर नेता के खास हैं। यही वजह है कि चुनाव में खुल्लम-खुल्ला विरोध किया गया। एक बीजेपी विधायक को वोटिंग वाले दिन RSS के एक पदाधिकारी अपने साथ दोपहर दो बजे तक लिए रहे। सूत्रों की मानें तो क्षेत्रीय संगठन के एक ताकतवर पदाधिकारी के बारे में भी निगेटिव रिपोर्ट हाईकमान को भेजी गई है।

 

 

Lok Sabha Election 2019 :  अकबरपुर लोकसभा सीट से BJP प्रत्याशी और वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) को “चुनाव जिताने और ब्राम्हणों को मनाने” के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने फॉयर ब्रांड नेता और BJP (UP)  के Ex. President लक्ष्मीकांत बाजपेयी को “मोर्चे” पर तैनात कर दिया है। मंगलवार दोपहर Kanpur पहुंचे श्रीबाजपेयी ने Kanpur BJP (North) के अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के साथ पत्रकारों से बातचीत की। वे पांच दिनों तक अकबरपुर लोकसभा में कैम्प कर ब्राम्हण मतदाताओं की प्रत्याशी से बढ़ी नाराजगी को दूर करने का हरसंभव प्रयार करेंगे। गौरतलब है कि संडे को www.redeyestimes.com (News Portal) ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित करते हुए लिखा था कि बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) की चुनावी नाव “ब्राम्हण मतदाताओं की नाराजगी, जातिवाद की राजनीति और भीतरघात” “भंवर” में फंसती नजर आ रही है। इस खबर को केंद्रीय चुनाव समिति ने बेहद गंभीरता से लेने के बाद लक्ष्मीकांत बाजपेयी को भेजने का फैसला लिया है।


YOGESH TRIPATHI


सिर्फ नाराज ही नहीं बेहद गुस्से में है ब्राम्हण मतदाता


अकबरपुर लोकसभा सीट की चाबी करीब 2.95 लाख ब्राम्हण मतदाताओं के पास ही है। ये सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी भली भांति जान रहे हैं। पिछली बार बड़ी संख्या में ब्राम्हण मतदाताओं ने बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) के पक्ष में मतदान किया था। जिसकी वजह से उनकी बंपर जीत हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके बाद “भोले” एक खास तरह के “सिंडीकेट” और ठाकुर बिरादरी के लोगों के बीच घिरे रहे। पांच साल तक ब्राम्हण वोटों की सुध तक नहीं ली। हर स्तर पर ब्राम्हण वर्ग के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और मतदाताओं को अपमान सहना पड़ा। 2019 के चुनाव की बेला आई तो उसके साइड इफेक्ट तुरंत दिखने शुरु हो गए। ब्राम्हण मतदाताओं के साथ कुछ कार्यकर्ता और संगठन के पुराने नेता भोल के खिलाफ लामबंद हो गए। जिसकी वजह से उनका “चुनावी समीकरण” पूरी तरह से गड़बड़ा गया।

“कोढ़ में खाज” वाली स्थित तब आ गई जब कुछ “माननीय” अंदर ही अंदर भीतरघात में जुट गए। कुछ “माननीय” के परिवारीजन और रिश्तेदार सजातीय प्रत्याशियों के लिए खुल्लम-खुल्ला वोट मांगने लगे। इसमें प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार का नाम सबसे ऊपर है। वे दो दिन पहले ख्यौरा एरिया में सपा-बसपा गठबंधन की प्रत्याशी निशा सचान के लिए जनसंपर्क कर वोट मांगते दिख चुके हैं। फोटो के साथ उनकी भी खबर www.redeyestimes.com (News Portal) ने मंडे को प्रकाशित की थी।


भोले को जिताने और ब्राम्हणों को मनाने” के मिशन पर आए हैं लक्ष्मीकांत बाजपेयी


बड़े सूत्रों की मानें तो Portal में प्रकाशित इस महत्वपूर्ण और अहम खबर को केंद्रीय चुनाव समिति ने बेहद गंभीरता से लेकर इस पर मंथन किया। इस बीच लोकल स्तर से भी शिकायतें भेजी गईं। जिसके बाद BJP हाईकमान ने तुरंत लक्ष्मीकांत बाजपेयी को अकबरपुर लोकसभा में पहुंचने का निर्देश जारी किया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लक्ष्मीकांत बाजपेयी के एक मझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी हैं। ब्राम्हण नेताओं, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। जमीनी नेता के तौर पर श्रीबाजपेयी की पहचान होती है। अपनी इन्हीं खूबियों के चलते लक्ष्मीकांत बाजपेयी ब्राम्हण वर्ग की भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) से बढ़ी नाराजगी को दूर करेंगे।

खबरों की मानें तो सबसे पहले वे स्थानीय संगठन के कद्दावर ब्राम्हण नेताओं के साथ गोपनीय बैठक करेंगे। किस एरिया, गांव और तहसील में विरोध अधिक है, इसकी जानकारी लेने के बाद वे रणनीति बनाएंगे। साथ ही साथ वे कई जगहों पर खुद भी पहुंचेगें। खबर ये भी है कि उनकी मौजूदगी की वजह से जो “माननीय” अंदर ही अंदर बीजेपी प्रत्याशी के “जड़” में “माठा” डाल रहे हैं, उन पर भी श्रीबाजपेयी नकेल कसने का काम करेंगे।


कांग्रेस प्रत्याशी से है मुकाबला


मीडिया से बातचीत के दौरान लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुकाबला कांग्रेस के साथ है। उन्होंने कहा कि सपा का अत्याचार जनता को पूरी तरह से याद है। श्रीबाजपेयी ने कहा कि सपा का अत्याचार ही उसका पेनाल्टी कार्नर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी यूपी में इस बार 74 से अधिक सीटें जीतेगी।

[caption id="attachment_19366" align="alignnone" width="695"] अकबरपुर लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के समर्थन में वोट मांगते पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार के भाई जगविजय कटियार।[/caption]

सांसद देवेंद्र सिंह (भोले) ने हाईकमान से शिकायत की


भीतरघात से जूझ रहे अकबरपुर के वर्तमान सांसद और भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह (भोले) ने कुछ वर्तमान और पूर्व “माननीयों” की शिकायत बीजेपी हाईकमान से की है। सूत्रों की मानें तो करीब दर्जन भर नेताओं की शिकायत की गई है। ये वो लोग हैं जो बीजेपी में रहकर विरोधी दलों के लिए “विभीषण” बन चुके हैं। कई दिग्गजों के रिश्तेदारों की भी शिकायत की गई है। शिकायत में Portal की निष्पक्ष खबरों को भी आधार बनाया गया है। गौरतलब है कि सोमवार को पोर्टल ने प्रदेश सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री के भाई और कल्याणपुर से बीजेपी की वर्तमान विधायक नीलिमा कटियार के मामा जगविजय कटियार की फोटो के साथ में खबर प्रकाशित की थी। जिसमें वे गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के साथ चुनाव संपर्क कर वोट मांग रहे हैं।

 

 

Lok Sabha Election 2019 : अकबरपुर लोकसभा का चुनाव दिन पर दिन बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। कांटे की त्रिकोणीय लड़ाई में BJP के “भोले” की सीट इस बार फंसती नजर आ रही है। उसकी वजह “अपनों” और उनके करीबी लोगों को पराया हो जाना है। "जातिवाद का जनेऊ" भी इस बार चुनाव में खूब चल रहा है। कुछ ऐसी ही एक सीन ख्योरा एरिया में देखने को मिली। यहां कल्याण सिंह सरकार में ताकतवर कबीना मंत्री रहीं प्रेमलता कटियार के भाई जग विजय कटियार सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के समर्थन में खुलेआम वोट मांगते हुए दिखाई दिए। जगविजय की भांजी नीलिमा कटियार वर्तमान में कल्याणपुर विधान सभा से BJP की MLA हैं।


 

YOGESH TRIPATHI


बहन के चुनाव में हो जाते हैं “भाजपाई”


जगविजय कटियार के बारे में भाजपाइयों के बीच तगड़ी चर्चा है कि जब विधान सभा का चुनाव उनकी बहन या भांजी लड़ती हैं तो वे भाजपाई हो जाते हैं। तन, मन और धन से चुनाव भी लड़ाते हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं। ऐसा पहली बार नहीं है कि जगविजय लोकसभा चुनाव में बीजेपी का विरोध कर रहे हों। श्यामबिहारी मिश्रा, अरुण तिवारी (बाबा) के चुनाव में भी वे मुखालफत कर चुके हैं।

पार्षद के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के सामने ठोंक दिया था नामांकन


जगविजय के बारे में चर्चा इस बात की भी है कि कई साल पहले विनायकपुर से बीजेपी ने रिन्कू चौहान को पार्षदी का टिकट दिया था। संगठन ने पूरे जोर-शोर से रिन्कू को चुनाव भी लड़वाया लेकिन ऐन वक्त पर जगविजय ने अपना नामांकन ठोंक दिया। चुनाव में जगविजय की वजह से रिन्कू को हार का सामना करना पड़ा।

"जातिवाद का जनेऊ" लड़ा निशा सचान के लिए मांग रहे हैं Vote


बीजेपी संगठन के बीच तगड़ी चर्चा है कि जगविजय का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह भोले के बजाय वो अपनी ही जाति की गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान के समर्थन में वोट मांग रहे हैं। अंदरखाने की मानें तो भाजपा प्रत्याशी की हालत पहले से ही काफी पतली है। ऐसे में “अपनों” और उनके “करीबी” लोगों के पाला बदलने से परिणाम भाजपा के विपरीत भी जा सकता है। गौरतलब है कि कल्याणपुर विधान सभा एरिया बीजेपी का गढ़ हमेशा से रहा है। सतीश निगम का चुनाव छोड़ दें तो यहां भाजपा को कभी पराजय नहीं मिली। लोकसभा के करीब-करीब हर चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी की जीत इसी विधान सभा से सुनिश्चित होती है। ऐसे में दो-चार “विभीषण” भाजपा प्रत्याशी की “लंका दहन” करने के लिए पर्याप्त हैं। बीजेपी प्रत्याशी के साथ हो रहे इस तरह के भीतरघात को लेकर पुराने कार्यकर्ताओं में खासा गुस्सा भी है। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस भीषण गर्मी में हम लोग एक-एक वोट के लिए संघर्ष कर रहे हैं और "विभीषण" लंका ढहाने का काम कर रहे हैं।


कल्याणपुर के केशवपुरम में चुनाव बहिष्कार का जनता ने टांगा बैनर


इस बीच Kanpur के कल्याणपुर के केशवपुरम स्थित मित्र विहार आवास विकास से खबर आ रही है कि वहां पर क्षेत्रीय जनता ने चुनाव बहिष्कार का बैनर संडे की रात को टांग दिया है। नागरिक परिषद केशवपुरम सेक्टर (N) की पीड़ित जनता का कहना है कि वे लोग सीवर और गंदगी से काफी परेशान हैं। जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत की है लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि उनकी समस्या का निदान नहीं किया गया तो वो लोग चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बैनर वाली फोटो इस समय सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर खूब Viral हो रही है।

 

 

Lok Sabha Election 2019 : करीब 18 लाख मतदाताओं वाले अकबरपुर लोकसभा का चुनाव दिन पर दिन बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। BJP ने जहां वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह "भोले" को फिर से रिपीट किया है तो कांग्रेस ने Rajaram Pal पर दांव लगाया है। सपा-बसपा गठबंधन ने Nisha Sachan Bsp को “चुनावी रण” में उतारा है। राजनीति के “चाणक्य” इस चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष बता रहे हैं। मतदाता यहां चौथे चरण यानि 28 एप्रिल को वोट डालेंगे। BJP प्रत्याशी सांसद देवेंद्र सिंह "भोले" के प्रति कई जगहों पर मतदाताओं की नाराजगी साफ-साफ दिख रही है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी Rajaram Pal को हर वर्ग (खासतौर पर ब्राम्हण) का साथ मिलता दिखाई दे रहा है। निशा सचान का चुनाव बेहद शांत है लेकिन ऐसा नहीं है कि वे चुनाव की लड़ाई से बाहर हैं। यदि यादव वर्ग पूरी तरह से निशा के साथ रहा तो चुनाव परिणाम चौंकाने वाले आ सकते हैं। भोले को सिर्फ और सिर्फ कल्याणपुर विधान सभा का सहारा है। जहां से हमेशा BJP ने हारी बाजी को जीत में तब्दील किया है।  


Yogesh Tripathi


 अकबरपुर की 5 विधान सभा में है BJP के विधायक


अकबरपुर लोकसभा के अंतर्गत 5 विधान सभाएं (कल्याणपुर, घाटमपुर, बिठूर, रनिया, महाराजपुर) आती हैं। महाराजपुर से सतीश महाना, बिठूर से अभिजीत सिंह सांगा, रनिया से प्रतिभा शुक्ला, घाटमपुर से कमलरानी वरुण और कल्याणपुर से नीलिमा कटिया (सभी BJP) के विधायक हैं। इस समीकरण के हिसाब से तो बीजपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह भोले को घर बैठकर ही चुनाव जीत जाना चाहिए लेकिन ऐसा है नहीं। भरी दुपहरी उनको पसीना बहाना पड़ रहा है। कहीं भीतरघात है तो कहीं आक्रोश।

 घाटमपुर बड़ी लीड ले सकते हैं राजाराम पाल


कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल का पैतृक गांव घाटमपुर विधान सभा के अंतर्गत आता है। घाटमपुर विधान सभा के वोटर्स पर उनकी मजबूत पकड़ है। कई गांव तो ऐसे हैं तो किसी दल से न जुड़े होकर सीधे तौर पर राजाराम पाल से ही जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि राजराम पाल की स्थित घाटमपुर विधान सभा में काफी मजबूत है। इस विधान सभा में राजाराम पाल को सीधी टक्कर निशा सचान देती नजर आ रही हैं। निशा के पति गुड्डू सचान नगर पालिका के चेयरमैन हैं। क्षेत्र में उनकी भी एक वर्ग में खासी पकड़ है। बीजेपी यहां तीसरे नंबर पर आ सकती है।

 रनिया विधान सभा में नाराज है ब्राम्हण वोटर्स


रनिया विधान सभा में ब्राम्हण वोट काफी अधिक है। यहां से प्रतिभा शुक्ला विधायक हैं। 2014 के चुनाव में यहां के ब्राम्हणों ने भोले को जमकर वोट किया था लेकिन इस बार हालत बिल्कुल उलट हैं। ब्राम्हण मतदाता काफी नाराज है। उसके पीछे की कई वजहे हैं। अंदरखाने की मानें तो यहां पर राजाराम पाल ने तगड़ी सेंधमारी कर रखी है। राजाराम पाल को यहां पर दलित वोट भी ठीक-ठाक मिलेगा। कुल मिलाकर इस विधान सभा में भी राजाराम पाल 21 साबित हो सकते हैं। बीजेपी को यदि यहां पर चुनाव जीतना है तो प्रतिभा शुक्ला और उनके पति अनिल शुक्ला वारसी को आगे लाना पड़ेगा। जो अभी तक होता नहीं दिख रहा।

बिठूर विधान सभा से आ सकता है चौंकाने वाला परिणाम


बिठूर विधान सभा से जो भी परिणाम आएगा वो चौंकाने वाला होगा। यहां लड़ाई बेहद दिलचस्प है। ठाकुर मतदाता तो खुलकर बीजेपी प्रत्याशी के साथ खड़ा है लेकिन कुछ वर्ग कई वजहों से विरोध की मुद्रा में भी है। राजाराम पाल को यहां पर अपने एक पुराने और करीबी “रिश्ते” का अंदरूनी तौर पर बड़ा लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। यहां से भाजपा के विधायक अभिजीत सिंह सांगा हैं जो कि अकबरपुर लोकसभा से टिकट के बड़े दावेदार थे। लेकिन हाईकमान ने उनको टिकट नहीं दिया। निश्चित तौर पर उनके कुछ कट्टर समर्थक नाराज तो बने ही हैं।

BJP का गढ़ है कल्याणपुर विधान सभा


कल्याणपुर विधान सभा बीजेपी का मजबूत किला है। बीजेपी हारी बाजी भी यहीं से जीत जाती है। इस विधान सभा में शहरी मतदाताओं की बड़ी संख्या हैं। जिसका सीधा लाभ भाजपा को हमेशा से मिलता रहा है। इस सीट पर एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी बाकी प्रत्याशियों से 25 बैठेगें। हालांकि अंदर ही अंदर विरोध की स्थिति यहां पर भी बनी है। लेकिन इसका बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ता दिखाई पड़ रहा है। हां वोट अवश्य कम हो सकते हैं।

महाराजपुर विधान सभा में भी होगा तगड़ा घमासान


यूं तो महाराजपुर विधान सभा से योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना विधायक हैं। जनता के बीच उनकी स्वच्छ छवि और खासी पैठ भी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या यहां के नाराज मतदाताओं को भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह भोले अपने पक्ष में मोड़ पाएंगे ? इस विधान सभा में भी शहर वोटर्स हैं। मुस्लिम वोट भी यहां पर ठीक-ठाक है। जानकारों की मानें तो यहां पर “घमासान” तगड़ा होगा। यहां कई एरिया में राजाराम पाल एकतरफा लड़ रहे हैं तो कुछ जगहों पर निशा सचान का भी चुनाव ठीक है। देवेंद्र सिंह (भोले) को यदि यहां पर चुनाव जीतना है तो सतीश महाना को मैदान में लाना पड़ेगा। उनके बगैर बीजेपी को यहां कुछ लाभ होता नहीं दिखाई दे रहा है। सतीश महाना ही एक ऐसा चेहरा हैं जो कि नाराज मतदाताओं को फिर से पक्ष में ला सकते हैं।

[caption id="attachment_19355" align="alignnone" width="695"] राजाराम पाल (पूर्व सांसद) (कांग्रेस प्रत्याशी, अकबरपुर)[/caption]

कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल


सरल स्वभाव और मीठी वाणी की वजह से कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल आम आदमी के बेहद करीब रहते हैं। समाज के सभी वर्गों और जातियों में उनकी ठीक-ठाक पकड़ है। राजाराम पाल की सबसे मजबूत पकड़ गरीब तपके में हैं। हमेशा जनता के बीच रहने वाले राजाराम पाल की एक बड़ी खासियत ये है कि हर वक्त वे जनता के लिए शुलभ रहते हैं। फिर चाहे किसी के दुःख की घड़ी हो या फिर सुख की, राजाराम सभी में शामिल होते हैं। यही वजह है कि राजाराम पाल समाज के हर वर्ग के बीच में चुनाव लड़ रहे हैं। पाल वोट के साथ मुस्लिम और दलित वोट भी राजाराम पाल के खाते में अभी तक जाता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि ब्राम्हण वर्ग का आशीर्वाद राजाराम पाल को मिला तो उनकी जीत पक्की है।


बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र सिंह भोले


[caption id="attachment_19356" align="alignnone" width="261"] देवेंद्र सिंह भोले (वर्तमान सांसद) (बीजेपी प्रत्याशी, अकबरपुर)[/caption]

वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह भोले के मजबूत विरोध की एक वजह ये भी है कि उनको एक “खास सिंडीकेट” टाइप का ग्रुप घेरे रहता है। जिसकी वजह से ये आम आदमी से सीधे मिल नहीं पाते हैं। जो इस चुनाव में साफ तौर पर दिखाई भी दे रहा है। देवेंद्र सिंह भोले का चुनाव मैनेजमेंट कुछ खास लोगों के हाथों में है। इन खास लोगों के व्यवहार की वजह से आम कार्यकर्ता दूरी बनाए हुए है। यही वजह है कि उन्होंने अपने बेटे और भाई को इन सारी कमियों को दूर करने के लिए आगे लाए हैं। पुत्र और भाई काफी हद तक कामयाब होते भी दिख रहे हैं। भोले शुरु से ही करीब दो लाख ठाकुर वोटों पर मजबूत पकड़ बनाए हैं। नाराज ब्राम्हण वोटर्स को यदि वो मनाने में कामयाब हो गए तो एक बार फिर से सांसद बनने में कामयाब हो जाएंगे।


 

[caption id="attachment_19357" align="alignnone" width="695"] निशा सचान (बीएसपी-एसपी गठबंधन प्रत्याशी, अकबरपुर लोकसभा)[/caption]

सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी निशा सचान


निशा सचान जातीय और पार्टी का आंकड़ा लेकर चल रही हैं। चुनाव यदि जातिवाद का चुनाव हुआ तो निशा सचान त्रिकोणीय लड़ाई में आ जाएंगी। हालांकि कुर्मी वोट बैंक इस लोकसभा में बहुत अधिक नहीं है। दलित, अति पिछड़े के साथ यदि यादव वर्ग ने पूरी तरह से गठबंधन को वोट किया तो परिणाम चौंकाने वाले ही आएंगे। हालांकि निशा सचान की अपनी खुद की कोई राजनीति पृष्ठभूमि नहीं है। उनके पति लगातार दूसरी बार पालिका चेयरमैन बने हैं। बिरादरी के वोट बैंक पर ही उनकी व्यक्तिगत पकड़ है।


लोकसभा सीट अकबरपुर (44) के जातिगत आंकड़े

(सामान्य)

ब्राम्हण - 2.95 लाख

ठाकुर - 2.15 लाख

वैश्य - 0.80

पिछड़ा वर्ग

यादव - 1.60 लाख

कुर्मी - 0.80 हजार

लोध - 0.15 हजार

अति पिछड़ी वर्ग

मौर्या - 1.20 लाख

पाल - 1.25 लाख

प्रजापति - 53 हजार

कश्यप - 41 हजार

दलित वर्ग

जाटव - 3.04 लाख

कोरी - 76 हजार

अति दलित वर्ग

बाल्मीकि - 52 हजार

पासी - 75 हजार

मुस्लिम - 1.20 लाख

नोट---पंजाबी, सिंधी, क्रिश्चियन समेत कई अन्य जाति के करीब 40 हजार मतदाता हैं।

खास--अकबरपुर लोकसभा से चुनाव लड़ रहे तीनो प्रत्याशी सोशल मीडिया में कापी फिसड्डी हैं। सभी के Facebook (Page) और (Acount) हैं लेकिन Twitter पर तीनों ही शून्य हैं। राजाराम पाल का ट्वीटर अकाउंट है लेकिन लंबे समय से कोई ट्वीट नहीं किया गया है। साथ ही उसमें फालोवर्स भी काफी कम हैं।