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Uttar Pradesh के Kanpur Dehat जनपद की अकबरपुर कोतवाली में कुछ घंटे पहले पुलिस के हत्थे चढ़ा Fake IPS प्रशांत शुक्ला UP POLICE के भू-माफिया बन चुके कई दरोगाओं का “BOSS” है। गिरफ्तारी के बाद www.redeyestimes.com (News Portal) ने जब इसके बाबत पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली जानकारियों का खुलासा हुआ। UNNAO में तैनात एक HCP इसका अंगरक्षक बनकर अक्सर साए की तरह साथ-साथ चलता था। Kanpur Range के एक जनपद में LIU विंग में तैनात एक सब इंस्पेक्टर भी इस फर्जी अफसर का खास “हमदर्द” बताया जा रहा है। अब तक की पड़ताल में करीब आधा दर्जन दरोगाओं, कुछ लेखपालों और हिस्ट्रीशीटर से सफेदपोश बने एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल के नेता के साथ इस Fake IPS के गठजोड़ की बात सामने आ रही है। गिरोह का नेटवर्क UP के कई जनपदों में हैं। खुद की पहुंच पंचमतल तक बताने वाले इस Fake IPS के बहन की शादी बेंगलुरु में तय हुई थी लेकिन इसकी हरकतों की वजह से बाद में टूट गई। 


[caption id="attachment_19722" align="alignnone" width="780"] Fake IPS का खुलासा होने से पहले अकबरपुर पुलिस ने इस नटवरलाल को ढोकना भी खिलाया था।[/caption]

YOGESH TRIPATHI


 मॉर्निंग वॉक पर साथ चलता था Fake IPS के साथ रहता था HCP


www.redeyestimes.com (News Portal) की छानबीन में पता चला है कि फर्जी आइपीएस प्रशांत शुक्ला के साथ कल्याणपुर में रहने वाला UP Police का एक HCP (हेड कांस्टेबल प्रमोटेड) अक्सर बावर्दी इसके साथ मॉर्निंग वॉक पर चलता था। इस चर्चित HCP की पोस्टिंग भी प्रशांत शुक्ला करवाता था। कुछ महीना पहले ही लखनऊ से इस HCP की पोस्टिंग प्रशांत ने उन्नाव में करवा दी। जानकारों की मानें तो अफसर यदि HCP और प्रशांत के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकार्ड (CDR) निकलवा लें तो कई बड़े राज का पर्दाफाश हो सकता है। कानपुर के सचेंडी, कल्याणपुर, काकादेव समेत कई थानों में तैनात रह चुका यह HCP वर्तमान में अरबपति बताया जा रहा है। बिठूर, टिकरा, कल्याणपुर के केशवपुरम समेत कई जगहों पर इसने बेशकीमती प्रापर्टी बना रखी है। फिलहाल टिकरा में कई बीघा खेती लेकर ये प्लाटिंग करवा रहा है। किसी भी बड़े विवाद में ये प्रशांत को कभी ATS तो कभी NIA का अफसर बनाकर विरोधी के सामने खड़ा कर देता है।

[caption id="attachment_19723" align="alignnone" width="988"] फर्जी आइपीएस बनकर रौब गांठने वाले प्रशांत शुक्ला के पास से कई परिचय पत्र भी पुलिस ने बरामद किए हैं।[/caption]

LIU विंग में तैनात दरोगा भी प्रशांत का बेहद करीबी


Fake IPS के गिरोह में Kanpur Range के एक जनपद में पुलिस की LIU विंग में तैनात एक दरोगा भी इस गिरोह में है। कल्याणपुर के केशवपुरम में उसकी ससुराल बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो लोकल खुफिया इनपुट बटोरने वाले इस दरोगा ने भी हाल के कुछ सालों में कई बेशकीमती प्लाट अपने परिजनों के नाम पर खरीद लिए हैं। ये दरोगा भी अक्सर इस फर्जी आइपीएस के साथ इलाके में देखा जाता रहा है। उन्नाव में ही तैनात एक कुर्मी बिरादरी का दरोगा भी गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया जाता है। उसकी पोस्टिंग भी प्रशांत ने ही कुछ महीना पहले करवाई थी। जानकार और भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो UP Police की नौकरी के आड़ में ये दरोगा विवादित प्रापर्टियों की खरीद-फरोख्त के साथ खेती लेकर प्लाटिंग का भी काम करते हैं। किसी भी विवाद में प्रशांत को NIA और CBI में तैनात अफसर बताकर विरोधी को सीधे Encounter करवाने की धमकी देकर भयभीत भी करवाते रहे हैं।

[caption id="attachment_19724" align="alignnone" width="1124"] गिरफ्तारी के तुरंत बाद अकबरपुर पुलिस ने Fake IPS के शरीर से वर्दी, बेल्ट और टोपी उतरवा ली।[/caption]

रात के अंधेरे में RTO और सेल टैक्स अफसर बनकर करता था वसूली


Fake IPS प्रशांत शुक्ला के बारे में जब मोहल्ले के लोगों से पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं। बताया जा रहा है कि ये कभी खुद को ATS तो कभी CBI में तैनात होने की बात बताकर एरिया के युवकों को अरदब में रखता था। पिछले तीन महीने से ये खुद को NIA में तैनात होने की बात बता रहा था। केशवपुरम और आसपास के लोग इसे हकीकत में IPS अफसर मानते थे। एक युवक ने बताया कि नीली बत्ती लगाकर प्रशांत और अपने करीबी दरोगाओं के साथ रात में RTO और सेल टैक्स का अफसर बनकर हाइवे पर लाखों की वसूली भी करता था। प्रशांत के पास दो VVIP मोबाइल नंबर भी मौजूद हैं। एक मोबाइल नंबर के WhatsApp की डीपी पर CBI का लोगो इसने लगा रखा है।

https://twitter.com/redeyestimes/status/1143890010002939905

हिस्ट्रीशीटर से सपा नेता बने एक "सफेदपोश" से भी कनेक्शन


हिस्ट्रीशीटर से सपा नेता बनकर पद हासिल करने वाले एक सफेदपोश से भी Fake IPS प्रशांत शुक्ला और भू-माफिया बन चुके दरोगाओं के करीबी संबध हैं। सूत्रों की मानें तो इस हिस्ट्रीशीटर की कुछ साल पहले एक IPS ने एनकाउंटर करने की ठान ली थी लेकिन बाद में बड़े राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से उसने खुद को बचा लिया। तब सपा की अखिलेश यादव सरकार थी। प्रापर्टी डीलिंग का काम करने वाले इस सफेदपोश की बर्रा के एक चौराहे पर स्थित हाइवे पर गेस्ट हाउस है।

Kanpur के एक अधिवक्ता को दी थी Encounter में ढेर करने की धमकी

कानपुर के केशव पुरम में रहने वाले इस फर्जी आइपीएस प्रशांत शुक्ला ने कुछ महीना पहले ही शहर के एक अधिवक्ता को Encounter की धमकी देकर उसे खौफ के साए में रहने को मजबूर कर दिया था। करीब महीना भर तक इसने अधिवक्ता को इस कदर प्रताड़ित किया कि उसने घर से बाहर निकलना ही छोड़ दिया। सिर्फ अधिवक्ता ही नहीं ये फर्जी आइपीएस जरा-जरा सी बात पर एरिया के युवकों को घर से उठवाकर एनकाउंटर की सीधी धमकी देता था। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि “एक बार इसके रडार पर जो आ जाता था, उसके गले में ये दहशत का पट्टा छोड़कर ही दम लेता था”।

 

 

 

 

 
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खबर करीब पांच दिन पुरानी है लेकिन बेहद दिलचस्प है। अमर उजाला के इटावा ब्यूरो से पत्रकारिता को शर्मशार कर देने वाली खबर आई है। यहां ब्यूरो चीफ के पद पर कार्यरत पवन श्रीवास्तव की नौकरी एक सपा नेता से “मोटी डील” के चक्कर में चली गई। सपा नेता और पवन श्रीवास्तव के बीच बातचीत का आडियो इन दिनों सोशल मीडिया में Viral हो रहा है। जिसमें नौकरी से निकाला गया ये ब्यूरो चीफ सपा नेता से आमने-सामने बैठकर “डील” की बात कर रहा है। किरकिरी होने के बाद अमर उजाला के प्रबंधतंत्र ने अपने इस “कथित जांबाज” ब्यूरो चीफ को फिलहाल संस्थान से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अंदरखाने से खबर ये है कि जल्द ही कुछ और भी अखबारों के पत्रकार इसी तरह बिछाए गए "जाल" में फंस सकते हैं।


सपा नेता के साथ बातचीत का सुनें आडियो…. (साभार---


bhadas4media) (News Portal)


https://youtu.be/7rXca8Xsaxw

Yogesh Tripathi


“हिन्दुस्तान” के उरई ब्यूरो से भी निकाला जा चुका है ये पत्रकार


कानपुर के रहने वाले पवन श्रीवास्तव के बारे में बताया जा रहा है कि वो पहले “हिन्दुस्तान” अखबार में बतौर स्ट्रिंगर नौकरी करता था। कलम के बेहद कमजोर इस नौसिखिया पत्रकार को पूर्व में एक संपादक ने अपने निजी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उरई जनपद का ब्यूरो चीफ बना दिया। बस यहीं से इसकी लॉटरी निकल गई। 2018 में उरई ब्यूरो चीफ के पद पर रहते हुए इसके कई काले कारनामें संस्थान तक पहुंचे लेकिन संपादक की “कृपा” होने की वजह से ये बचता रहा। कहते हैं कि बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी, कुछ ऐसा ही इस कथित पत्रकार के साथ भी हुआ। ठीक एक साल पहले सुबूत के साथ जब इसकी शिकायत ऊपर की गई तो कानपुर दफ्तर के अफसरों ने इसे वापस कानपुर बुलाकर नौकरी से छुट्टी कर दी। खास बात ये रही कि उरई में ब्योरो चीफ रहने के दौरान इसकी जुगलबंदी अमर उजाला (उरई) के ब्यूरो चीफ से थी। यही वजह रही थी कि तब अमर उजाला ने भी अपने ब्यूरो चीफ को हटाने के साथ वहां पर नए ब्यूरो चीफ की पोस्टिंग की थी।

मार्च 2018 महीने में ही अमर उजाला की नौकरी मिली


चरण चापन में महारत हासिल इस पत्रकार को हिन्दुस्तान से निकाले जाने के कुछ दिन बाद ही अमर उजाला में नौकरी मिली। संस्थान ने इस स्ट्रिंगर को बतौर ब्यूरोचीफ (इटावा) भेजा था। खबर है कि जल्द ही ये कथित पत्रकार हाल में ही लांच हुए एक रीजनल चैनल के साथ जुड़ सकता है। रीजनल चैनल में इसके कुछ संरक्षणदाता ऊंचे पदों पर बैठे हुए हैं।