October 2019

Web Portal में पत्रकार थे डिप्टी पड़ाव निवासी विजय गुप्ता

बीवी ने लगाया देवर और करीबी लोगों पर Murder का इल्जाम

Unnao के जालीखेड़ा की खंती में मिला शव

दिवाली को मिलने पर 28 को पत्रकार ने दी थी तहरीर

Vijay Gupta सीने और सिर में गोली मारे जाने की चर्चा 

विजय गुप्ता जर्नलिस्ट (फोटो साभार----सोशल मीडिया)

Yogesh Tripathi

Web Portal में पत्रकारिता करने वाले जर्नलिस्ट Vijay Gupta की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद कातिलों ने शव को उन्नाव में फेंक दिया। देर शाम हत्या का पता चलने पर पत्रकार के परिजन रायपुरवा थाने पहुंच गए। शहर के तमाम जर्नलिस्ट भी थाने पहुंचे और कातिलों की तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की। देर रात्रि एसपी पूर्वी ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया को घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विजय गुप्ता की हत्या उनके ही सगे भाइयों ने की है। दो लोगों को Arrest किया जा चुका है। एक आरोपी की तलाश की जा रही है। CCTV की फुटेज को भी खंगाला गया है। हत्या में प्रयुक्त वैगन आर कार को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। www.redeyestimes.com  (News Portal) को मिली जानकारी के मुताबिक देर रात उन्नाव जिला प्रशासन की सहमति के बाद पत्रकार विजय गुप्ता के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है। खास बात ये रही कि शहर पुलिस पूरे दिन सघन वाहन चेकिंग अभियान छेड़े रही और बेखौफ कातिल कार के अंदर जर्नलिस्ट का शव लेकर सीमा पार कर गए। 
मंगलवार की देर रात्रि को मीडिया से बातचीत कर पत्रकार विजय गुप्ता हत्याकांड के बाबत जानकारी देते एसपी पूर्वी।

Diwali की रात मिली थी पत्रकार को धमकी

हत्या की पृष्ठभूमि में फिलहाल अभी तक की छानबीन में प्रापर्टी को लेकर पारिवारिक विवाद की बात सामने आ रही है। परिजनों के मुताबिक पत्रकार विजय गुप्ता को 27 अक्तूबर की रात्रि को परिवार के एक सदस्य ने धमकी दी थी। 28 की दोपहर पत्रकार विजय गुप्ता ने रायपुरवा थाने में धमकी देने वाले के खिलाफ शिकायती पत्र देते हुए अपनी हत्या की आशंका जाहिर की थी। शिकायती पत्र देने के कुछ घंटे बाद ही विजय गुप्ता लापता हो गए। परिजनों ने देर रात्रि तक छानबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

प्रार्थना पत्र देने के कुछ घंटे बाद लापता Vijay Gupta

29 अक्तूबर मंगलवार की दोपहर विजय गुप्ता की लाश उन्नाव जनपद के अचलगंज थाना एरिया के बदरका चौकी के लिए जाने वाले आजाद नगर मार्ग चौराहे से महज 300 मीटर की दूरी पर ग्राम जालीखेड़ा स्थित नहर पुलिया की खंती में पड़ा मिला। सूचना कानपुर स्थित विजय गुप्ता के घर पहुंची तो कोहराम मच गया। परिवार के लोग रायपुरवा थाने पहुंचे और इंस्पेक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। थोड़ी देर में खबर सोशल मीडिया पर वॉयरल हुई तो शहर के तमाम पत्रकार भी रायपुरवा कोतवाली पहुंच गए। एसएसपी अनंत देव तिवारी ने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए इंस्पेक्टर को उन्नाव रवाना किया।
www.redeyestimes.com (News Portal) से बातचीत में अचलगंज थाना प्रभारी ने पत्रकार विजय गुप्ता के Murder की बात को स्वीकार करते हुए बताया कि कातिलों ने हत्या के बाद शव को Unnao जनपद में लाकर फेंक दिया। शव को रिकवर करने के बाद सूचना Kanpur Police और परिजनों को दे दी गई है। जाहिरा तौर पर विजय के सीने और सिर में गोली मारे जाने के निशान मिले हैं।

SSP (KNR) अनंत देव तिवारी का कहना है कि पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। रायपुरवा पुलिस Unnao में मौजूद है। पीड़ित परिवार ने करीबी लोगों पर संगीन इल्जाम लगे हैं। छानबीन की जा रही है। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।


Kanpur के D-2 गैंग लीडर अतीक का भाई था शफीक

70 के दशक में करीमलाला से जुड़ा था शफीक का गिरोह

90 के दशक में दाउद गिरोह से जुड़ गया था शफीक का गिरोह

आगरा की जेल में बंद है D-2 गैंग का सरगना अतीक अहमद

लंबे समय से UP Police को नहीं मिल रही थी शफीक की लोकेशन

नोट-----आगरा की जेल में बंद D-2 सरगना अतीक अहमद की ये लेटेस्ट फोटो खुफिया सूत्रों से प्राप्त की गई है।

Yogesh Tripathi


Uttar Pradesh के Kanpur Nagar और आसपास के जनपदों में करीब चार दशक तक आतंक के पर्याय रहे D-2 गिरोह के शातिर दिमाग Underworld Don शफीक की मुंबई में मौत होने की खबर आ रही है। पुलिस अफसरों और खुफिया सूत्रों की मानें तो शफीक की मौत हार्ट अटैक (Heart Attack) से पड़ने से हुई। शफीक पुणे की जेल से छूटने के बाद मुंबई में परिवार के साथ रह रहा था। Kanpur के कुलीबाजार निवासी शफीक कुछ साल पहले पुणे जेल से छूटा था। UP Police को लंबे समय से शफीक की कोई लोकेशन नहीं मिल रही थी। D-2 सरगना और शफीक का भाई अतीक अहमद आगरा की जेल में बंद है।

फहीम गैंग से 3 दशक तक चली D-2 की गैंगवार

कुलीबाजार निवासी शफीक का वालिद पहलवान था। नई सड़क निवासी शातिर बदमाश फहीम पहलवान और अकील के अब्बू भी पहलवानी करते थे। मूंछ की लड़ाई को लेकर दोनों के बीच 70 के दशक में गैंगवार पनप गया। इसके बाद दोनों के बेटों ने इस गैंगवार को आगे बढ़ाया। 70, 80, 90 के दशक में D-2 गिरोह के सरगना अतीक अहमद और नई सड़क निवासी फहीम पहलवान गैंग के बीच चली गैंगवार की जंगकिसी से छिपी नहीं है। जानकारों की मानें तो दोनों तरफ से करीब 100 से अधिक लोग मारे गए। यही वजह रही कि नई सड़क को "खूनी सड़क" भी कहा जाने लगा था।  पुलिस रिकॉर्ड में करीब तीन दर्जन मौतों का ही जिक्र है।

70 के दशक में करीमलाला से जुड़ा D-2 गैंग

वक्फ संपत्तियों पर कब्जा, रंगदारी, भाड़े पर हत्या और मादक पदार्थ की तस्करी के लिए कुख्यात D-2 गिरोह के जुर्म की कहानीकरीब चार दशक पुरानी है। 70 के दशक में करीमलाला गिरोह की अंडरवर्ल्ड में तूती बोलती थी। तब Kanpur के कई अपराधी युवक करीमलाला गिरोह से जुड़े। उसमें D-2 सरगना अतीक अहमद और शफीक भी शामिल थे।

नब्बे के दशक में दाउद से जुड़ा D-2 गिरोह

जानकार सूत्रों की मानें तो नब्बे के दशक में दाउद इब्राहिम गिरोह की तूती अंडरवर्ल्ड की दुनिया में बोलने लगी थी। शातिर दिमाग अतीक अहमद और शफीक ने देर नहीं की। अतीक अपने पांच भाइयों शफीक, बिल्लू, बाले, अफजाल और रफीक के साथ मिलकर यूपी में दाउद के लिए काम करने लगा। ये वो दौर था जब वक्फ बोर्ड की तमाम बेशकीमती संपत्तियों पर गिरोह ने कब्जा जमाया। कई बेगुनाह लोगों की जानें भी लीं। इसी दौर में D-2 गिरोह ने Kanpur समेत यूपी के कई जनपदों में मादक पदार्थों की तस्करी भी बड़े पैमाने पर शुरु कर दी।  

बिल्लू का Encounter और रफीक के Murder से टूटा गिरोह

वर्ष 2000 की शुरुआत होते ही Kanpur Police गिरोह पर कहर बनकर D-2 गिरोह पर टूट पड़ी। कोलकाता से रिमांड पर Kanpur लाए गए रफीक अहमद की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई। इल्जाम D-34 गैंग लीडर परवेज, बहार खान और गुलाम नबी पर आया। बहार खान को कुछ दिन पहले कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2005 में बर्रा के मेहरबान सिंह का पुरवा के पास पुलिस ने अतीक के भाई तौफीक अहमद उर्फ बिल्लू को Encounter में मार गिराया। बिल्लू को कई मामलों में सजा हुई थी और जेल से उसने पार्षदी के लिए पर्चा भी भरा था। सूत्रों की मानें तो बिल्लू गिरोह के लिए मादक पदार्थों की तस्करी का काम संभालता था। यही वजह रही थी कि वो भी स्मैक का लती हो गया था।

16 साल पहले इंदौर में पकड़ा गया था अफजाल

अतीक के भाई अफजाल को Kanpur के तेज तर्रार और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे तत्कालीन सब इंस्पेक्टर विनय गौतम ने इंदौर में पकड़ा था। कड़ी सुरक्षा के बीच अफजाल को विनय गौतम की अगुवाई में पुलिस Kanpur लाई थी। खुफिया सूत्रों की मानें तो अफजाल भी कुछ साल पहले जेल से छूट चुका है। बेहद गोपनीय तौर पर वो गैंग को मजबूत करने में जुटा है। चर्चा है कि परिवार की एक महिला फिलहाल बिखर चुके D-2 गिरोह को मजबूती देकर उसे ऑपरेट कर रही है। परिवार का एक युवा लड़के पर भी खुफिया की नजरे काफी दिनों से पैनी हैं।

80 के दशक में D-2 पर भारी पड़ा था फहीम गिरोह

77 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी थी। चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी की पराजय हुई और जनता पार्टी की सरकार बनी। इस सरकार ने नशाबंदी कर दी। पुलिस विभाग के बड़े सूत्रों के मुताबिक तब Kanpur में एक चर्चित IPS अफसर की तैनाती थी। उनके एक करीबी की Unnao जनपद में हत्या कर दी गई। हत्यारों को निपटाने के लिए तब उक्त चर्चित IPS अफसर ने फहीम पहलवान और अकील पर हाथ रख दिया। दोनों भाइयों ने इसका भरपूर लाभ उठाया और मादक पदार्थों की बिक्री कानपुर समेत कई जनपदों में शुरु कर दी। ये क्रम 80 के दशक में भी चला। जुर्म की दुनिया में अपनी जड़ेंगहरी करने के बाद फहीम गुट ने अतीक के कई लोगों को मार डाला। कई हत्याएं दिनदहाड़े की गईं। 32 साल पहले शहर में तैनात रहे इंस्पेक्टर ब्रजराज सिंह (जिनको लोग बघर्रा) नाम से भी बुलाते थे। उन्होंने फहीम को पकड़ा और उसकी गिरेबांन पकड़ घसीटते हुए ले गए। बस यहीं से फहीम गिरोह के अंत की शुरुआत हो गई और अतीक का D-2 गिरोह हावी होता चला गया।

इस तरह टूटा फहीम के मेयर बनने का ख्वाब

80 दशक के आखिर में नगर निगम के चुनाव हुए। कांग्रेस की केंद्र और यूपी में सरकार थी। खूंखार अपराधी फहीम पहलवान ने कांग्रेस की राजनीतिक छतरी ओढ़ रखी थी। तब जीते हुए पार्षद ही मेयर का चुनाव करते थे। करीब दो दर्जन मुस्लिम पार्षद चुनाव जीतकर आए। टाटमिल के पास एक होटल में फहीम ने सभी पार्षदों अपने पास बुला लिया और मेयर बनने के लिए लामबंदी शुरु कर दी। उसके पास कुछ पार्षद ही कम थे और उसका मेयर बनना पक्कामाना जा रहा था। एक पार्षद की बोली 5 से 10 लाख पहुंच चुकी थी। विक्रम सिंह तब Kanpur के SSP थे। फहीम पहलवान के करीबी और अंडरवर्ल्ड डॉन रहे हाजी मस्तान की आमदरफ्त भी Kanpur में थी। इस बीच मीडिया में एक बड़ी खबर फहीम पहलवान को लेकर आई। इस खबर ने कांग्रेस के हाईकमान को संजीवनी दे दी। यूपी सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित ने बड़े अखबार में छपी इस खबर को संज्ञान में लिया और तुरंत फहीम पहलवान को Arrest करने का निर्देश दिया। SSP विक्रम सिंह ने फहीम की गिरफ्तारी के लिए कई थानेदारों को लगा दिया। कांग्रेस को मौका मिला और श्रीप्रकाश जायसवाल को प्रत्याशी घोषित कर पार्षदों के जरिए उनका चयन करवा मेयर बनवाया।      

UPSTF को लगाया गया लेकिन सफलता SOG को मिली

D-2 गैंग लीडर अतीक ने नब्बे का दशक आते-आते अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद का हाथ पकड़ लिया और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद फहीम गुट के कई अपराधी मारे गए। इसके बाद करीब 15 साल तक अतीक गिरोह ने Kanpur समेत यूपी के कई शहरों में आतंक के बल पर अपराध का साम्राज्य खड़ा किया।

यही वजह रही कि उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) को D-2 गिरोह के खात्में के लिए लगाया गया। मौका पाकर अतीक अहमद ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) ज्वाइन कर शहर उपाध्यक्ष का पद ले लिया। लेकिन मीडिया में फजीहत के बाद BSP ने उसे पार्टी से निकाल दिया। STF की टीमें D-2 गिरोह के पीछे पड़ी रहीं। हीर पैलेस के पास मुठभेड़ हुई। जिसमें अतीक गिरोह के दो शूटर मारे गए और STF का एक कमांडों शहीद हो गया।  अफसरों ने शहर के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ऋषिकांत शुक्ला को D-2 गिरोह के सफाए की कमान सौंप दी। ऋषिकांत शुक्ला इससे पहले पूर्वांचल के बाहुबली माफिया सरगना अभय सिंह को शहर के कांग्रेसी नेता ताहिर के साथ कलक्टरगंज की नयागंज चौकी में तैनाती के दौरान Arrest कर अफसरों को भरोसेमंद सब इंस्पेक्टर बन चुके थे। ऋषिकांत शुक्ला ने महज कुछ साल में ही डी-2 गिरोह की कमर पूरी तरह से तोड़कर रख दी।

UNNAO के शुक्लागंज पर हैं खुफिया निगाह

शफीक की मुंबई में हार्ट अटैक से हुई मौत के बाद Unnao जनपद के शुक्लागंज में खुफिया की निगाहें लगी हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो वर्तमान समय में अतीक और उसके भाइयों के परिवार के कई सदस्य यहीं पर रह रहे हैं। चूंकि इस गिरोह के तार सीधे अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैं इस लिए खुफिया भी Alert है।






हिन्दू समाज पार्टी के प्रेसीडेंट थे कमलेश तिवारी

खुर्शीदाबाद कालोनी स्थित ऑफिस में सनसनीखेज वारदात

शरीर पर धारदार हथियार से 15 गहरे घाव, गोली भी मारी

सपा सरकार के दौरान जेल भेजे गए थे कमलेश तिवारी

दो संदिग्ध CCTV में हुए कैद, ISIS के हाथ होने की आशंका



Yogesh Tripathi 

राजधानी में दिनदहाड़े वारदात से सनसनी

Uttar Pradesh की राजधानी Lucknow में फ्राइ-डे को हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्यारों ने धारदार हथियार से उनके शरीर पर दर्जनों वार कर सीने में गोली मारी। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने उनके दफ्तर में मीटिंग के दौरान चाय पी फिर बेरहमी से हत्या कर दी। कमलेश तिवारी हिन्दू समाज पार्टी के प्रेसीडेंड थे। सपा सरकार के कार्यकाल में मुस्लिमों के प्रति तल्ख और अभद्र टिप्पणी करने पर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा गया था। 

ट्रामा में चिकित्सकों ने मृत घोषित किया

वारदात के बाद कातिल फरार हो गए। खून से लथपथ हालत में कमलेश तिवारी को ट्रामा सेंटर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि कमलेश तिवारी से नाका स्थित खुर्शीदाबाग दफ्तर में दो लोग मिलने आए थे। दोनों साथ में मिठाई का डिब्बा भी लेकर पहुंचे थे। इन डिब्बों में चाकू और असलहे थे।

चाय पी, गला रेता और गोली मार दी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों बदमाश कमलेश के दफ्तर पहुंचे। बदमाशों ने कमलेश के साथ चाय भी पी। इसके बाद बेरहमी से कातिलों ने कमलेश की गर्दन पर धारदार हथियार से कई वार किए। चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में भी प्रहार किया। इसके बाद उनके सीने में गोली मार दी गई। पुलिस के मुताबिक बदमाशों ने मिलने से पहले कमलेश तिवारी को कॉल भी की थी। पुलिस अभी तक ये स्पष्ट नहीं कर सकी है कि कातिल कमलेश तिवारी से परिचित थे या फिर नहीं ? फिलहाल पुलिस उस नंबर को ट्रेस कर रही है, जिससे कमलेश तिवारीके पास कॉल आई थी। साथ ही कमलेश के करीबी एक लड़के को भी हिरासत में लिया गया है। 
 
CCTV में कैद संदिग्ध कातिल

हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी Murder Case में माथे से पसीना छोड़ रही पुलिस को इस दौरान छानबीन में कई अहम सुराग मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संदिग्ध कातिल CCTV में कैद हुए हैं। SSP कलानिधि नैथानी के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं। संदिग्ध कातिलों की धरपकड़ के लिए पुलिस की अन्य विंग भी सक्रिय हैं। आसपास के जिलों में भी पुलिस को अलर्ट किया गया है।

सपा सरकार ने की थी कमलेश पर NSA की कार्रवाई


पैगंबर साहब पर टिप्पणी की वजह से सपा सरकार में कमलेश तिवारी पर पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)के तहत कार्रवाई की थी। उस समय एक मुस्लिम संगठन ने सर कलम करने का फतवा भी जारी किया था। बिजनौर के उलेमा अनवारुल हक और मुफ्ती नईम कासमी पर कमलेश तिवारी का सिर कलम करने का फतवा जारी करने का आरोप लगा था।

कभी हिन्दू महासभा से जुड़े थे कमलेश तिवारी


इस मामले में UP Police के DGP ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि कमलेश तिवारी ने हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि हत्यारे मिठाई लेकर लाए थे और कमलेश के साथ में आधा घंटा बातचीत भी की थी। पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं। सभी टीमें कातिलों की धरपकड़ के लिए प्रयास कर रही हैं।  

Tweet कर मांगी थी कमलेश तिवारी ने सुरक्षा


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कमलेश तिवारी ने कुछ दिन पहले खुद को सुरक्षा न मिलने पर Tweet किया था। जिसमें उसने सुरक्षा न दिए जाने पर सवाल उठाए थे। Tweet में कमलेश तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग किया था।



अपर जिला जज (12) ने मुकर्रर की शूटर के खिलाफ सजा

पुलिस कस्टडी में हुई थी D-2 सरगना रफीक की हत्या

AK-47 की रिकवरी के लिए रिमांड पर लेकर जा रही थी पुलिस

D-34 सरगना परवेज ने बहार खान, गुलाम नबी के साथ की थी हत्या

परवेज और उसके साथियों के हमले में पुलिस वाले भी हुए थे घायल

मौके पर पिस्टल, बाइक के साथ पकड़ा गया था शूटर बहार खान

गोविंद नगर पुलिस ने लिखापढ़ी के बाद भेजा था जेल

आरोपित सरगना परवेज को 11 साल पहले STF कर चुकी है ढेर

हत्यारोपित गुलामनबी की दो साल पहले गैंगवार में हो चुकी है हत्या

D-2 सरगना कुलीबाजार निवासी रफीक को कोलकाता में Arrest करने वाले इंस्पेक्टर ऋषिकांत शुक्ला। Photo साभार facebook

Yogesh Tripathi

बहार खान एक लाख का जुर्माना भी Court ने किया मुकर्रर

D-34 गैंग के शार्प शूटर बहार खान को करीब 15 साल पुराने Kanpur के इस हाईप्रोफाइल और चर्चित Murder Case में अपर जिला जज (ADJ-12) की कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपए का अर्थदंड भी मुकर्रर किया है। पुलिस कस्टडी में D-2 गैंग के लीडर रफीक की हत्या करने वाले बहार खान को Arrest करने के बाद गोविंदनगर पुलिस ने जेल भेजा था। इस केस में दो और आरोपी थे। परवेज और गुलाम नबी। परवेज को करीब 11 साल पहले STF ने Encounter के दौरान बिठूर के एक टीले पर ढेर किया था। जबकि गुलाम नबी की दो साल पहले गैंगवार में हत्या कर दी गई। गुलाम नबी करीब 10 साल इस मामले में जेल के अंदर रहा।

रामू बंगाली समेत कई हत्याओं में शामिल रहा था बहार खान

D-34 गैंग के शूटर बहार खान पर शहर के कई थानों में मुकदमें दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बहार खान करीब आधा दर्जन से अधिक हत्याएं कर चुका है। इसमें सबसे चर्चित हत्याकांड रामू बंगाली का है। करीब 15 साल पहले बाबूपुरवा के रहने वाले रामू बंगाली नाम के अपराधी की धारदार हथियार से हत्या कर उसके शव को होलिका में फेंक दिया गया था। इसमें भी बहार खान आरोपी रहा है। बहार खान एक शहर के एक शातिर अपराधी का सगा साला है।

कोलकाता में ऋषिकांत शुक्ला ने रफीक को किया Arrest

मामला करीब 14 वर्ष और 7 महीना पुराना है। एनकाउंटर स्पेशललिस्ट ऋषिकांत शुक्ला तब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (कानपुर) के प्रभारी थे। शहर में तब D-2 गैंग की बादशाहत थी। रंगदारी, हत्या, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करना इस गैंग की आदत में शुमार था। गैंग का सरगना रफीक तब Most Wanted था। उसके सिर पर एक लाख रुपए का इनाम शासन से घोषित था। ऋषिकांत शुक्ला इस खूंखार गिरोह पर कहर बनकर टूटे। तमाम गुर्गों को जेल भेजा और कुछ को एनकाउंटर में ठोंक दिया। न्यायिक अभिरक्षा में कोलकाता की जेल में बंद रफीक को बी-वारंट के जरिए ऋषिकांत शुक्ला की अगुवाई वाली फोर्स अदालती कार्रवाई के बाद शहर लेकर पहुची। Kanpur Police ने रफीक को Court में पेश किया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया।

रफीक को रिमांड पर लेकर किदवईनगर आई थी Police

हरबंश मोहाल के हीर पैलेस टॉकीज के पास अगस्त 2004 में STF की D-2 गैंग से मुठभेड़ हुई थी। STF ने समीम उर्फ दुरग्गा और जमशेद उर्फ भइया को ढेर कर दिया था। लेकिन मुठभेड़ के दौरान रफीक और उसके गैंग की तरफ से चलाई गई गोली से STF के सिपाही धर्मेंद्र सिंह शहीद हो गए। इस मामले की विवेचना तत्कालीन अनिल कुमार के पास थी। अनिल कुमार ने AK-47 की बरामदगी के लिए रफीक का रिमांड मांगा। कोर्ट ने रिमांड दे दिया। जिसके बाद पुलिस रफीक को जेल से थाने लेकर आई। यहां पूछताछ में रफीक ने बताया कि AK-47 जूही यार्ड के पास छिपाकर रखी है। आधी रात को पुलिस AK-47 जैसे खतरनाक असलहे की बरामदगी के लिए निकली।

घात लगाए बैठा था D-2 गैंग का जानी दुश्मन परवेज

पुलिस जीप में बैठाकर रफीक को जूही यार्ड लेकर पहुंचने वाली थी कि थोड़ी दूर पहले ही अचानक फायरिंग शुरु हो गई। बाइक सवार तीन लोगों ने अंधाधुंध गोलियों की बौंछार कर दी। पुलिस जब तक कुछ समझ पाती हमलावरों ने रफीक की कनपटी पर सटाकर गोली मार दी। रफीक का भेजा तक बाहर आ गया। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो हमलावर फायरिंग करते हुए भागे। वॉयरलेस पर मैसेज मिलते ही कई थानों की फोर्स ने घेराबंदी की। रेलबाजार निवासी बहार खान को पुलिस ने बाइक और पिस्टल के साथ Arrest कर लिया। बहार खान ने बताया कि बाइक वो खुद चला रहा था जबकि परवेज और गुलाम नबी पीछे बैठे थे। गोविंदनगर पुलिस ने लिखापढ़ी के बाद बहार खान को जेल भेज दिया। बाद में गुलाम नबी भी पकड़ा गया। परवेज को भी पुलिस ने सलाखों के पीछे डाल दिया। परवेज जेल से छूटा तो STF ने उसे ढेर कर दिया। 11 साल गुलाम नबी जेल से बाहर आया तो गैंगवार में उसकी हत्या कर दी गई। रफीक का एक हत्यारोपित जेल में था बहार खान। सबूत, साक्ष्य और गवाही के आधार पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

परवेज ने दो बार कचहरी में किया था पर हमला

D-2 गैंग का जानी दुश्मन D-34 गैंग का सरगना परवेज था। 11 साल पहले STF के हाथों मारे गए परवेज की आंख का किरकिरी था रफीक। यही वजह रही थी कि कचहरी परिसर में परवेज ने दो बार जानलेवा हमला किया। एक बार गोलियां दागीं और दूसरी बार बमों के धमाके किए। जिसमें एक सिपाही भी घायल हुआ था।