भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक परेशान है कि आखिर मेयर प्रत्याशी कौन होगा ? पांच दर्जन से अधिक आवेदन हो चुके हैं। कई दिग्गज बगैर आवेदन के ही लखनऊ से दिल्ली दिन-रात एक किए हैं। प्रत्याशिता की दावेदारी को लेकर घमासान तेज और निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। इन सबके बीच BJP की गुटबाजी भी सामने आ चुकी है। RSS के कद्दावर पदाधिकारी ऐसे नाम पर मुहर लगाना चाहते हैं जो निर्विवादित हो और पार्टी से जुड़ा भी हो। इन सबके बीच Kanpur BJP के कार्यकर्ताओं और नेताओं के कंठ से जो आवाज आई है वो नाम है रंजना शुक्ला। रंजना शुक्ला BJP के वफादार, ईमानदार और लोकप्रिय नेता रहे "अमर योद्धा" विवेकशील शुक्ला (बीनू) की धर्मपत्नी हैं। 


[caption id="attachment_18064" align="aligncenter" width="645"] BJP के "अमर योद्धा" स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (बीनू)। (फाइल फोटो, फेसबुक वाल)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सेवा करने वाले लोकप्रिय, ईमानदार, कर्मठशील छवि के नेता रहे स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (बीनू) की धर्मपत्नी रंजना शुक्ला को मेयर का प्रत्याशी बनाकर BJP के शीर्ष नेतृत्व को अपने “अमर योद्धा” को सच्ची श्रद्धांजलि देनी चाहिए। यह कहना है कि Kanpur BJP के तमाम कद्दावर नेताओं और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं का। www.redeyestimes.com ने Kanpur BJP के कुछ चर्चित और बड़े नामों से जब इस संबध में वार्ता की तो सभी के मुंह से एक ही स्वर निकला कि यदि BJP और RSS का शीर्ष नेतृत्व रंजना शुक्ला के नाम पर मुहर लगाता है तो निश्चित तौर पर यह “अमर योद्धा” स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 के यूपी चुनाव में किदवईनगर विधान सभा से चुनाव लड़े स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला सिर्फ 1800 वोटों से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2017 के इलेक्शन में वह इस सीट से प्रबल दावेदार थे लेकिन ऐन वक्त पर हाईकमान ने उनकी टिकट काट दी थी।


[caption id="attachment_18065" align="aligncenter" width="653"]ranjna shukla, redeyestimes.com श्रीमती रंजना शुक्ला पत्नी स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (अमर योद्धा) (BJP)[/caption]

अमर योद्धा विवेकशील शुक्ला का संक्षिप्त राजनीतिक जीवन परिचय


विवेकशील शुक्ला (बीनू) ने अपने जीवन के करीब 35 बसंत जीवन भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्पित किया। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में बतौर कानपुर जिलाध्यक्ष पांच साल पद पर रहे। उनकी निष्ठा, कर्तव्यता और ईमानदारी को देख BJP ने ढाई दशक पहले घाटमपुर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। दुर्भाग्यवश वह चुनाव हार गए लेकिन पार्टी की सेवा उन्होंने अनवरत जारी रखी। 2012 के यूपी इलेक्शन में BJP ने एक बार फिर अपने “योद्धा” पर विश्वास जताते हुए उनको किदवईनगर विधान सभा से पहला प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस के ताकतवर MLA को उनको जमकर टक्कर दी लेकिन अंततः वह कांटे की लड़ाई में सिर्फ 1800 वोटों से चुनाव हार गए। 2017 में वह एक बार फिर इस सीट से प्रबल दावेदार थे। उनका नाम आखिरी दौर तक चला लेकिन उनको टिकट नहीं मिली। इसके कुछ दिन बाद ही ह्दयगति रुकने की वजह से उनका निधन हो गया। अपने तीन दशक के राजनीतिक पारी के दौरान के दौरान वह सामाजिक सरोकार से भी जुड़े रहे। नेहरु युवा केंद्र (यूपी/उत्तराखंड) के चेयरमैन भी बने।

BJP के खराब दिनों में भी अमर योद्धा ने नहीं छोड़ा था दामन


स्वर्गीय विवेकशील के करीबी लोगों की मानें तो वर्ष 98 से लेकर वर्ष 2014 तक का समय बीजेपी के लिए बेहद खराब रहा। इसी दौरान बीजेपी का ग्राफ काफी नीचे गिरा। ये वो समय था जब भाजपा की केंद्र और यूपी दोनों ही जगहों पर सत्ता से बेदखल हो चुकी थी। भाजपा की हालत खस्ता देख सत्ता लोभी तमाम लालची नेता दूसरे दलों में चले गए लेकिन लेकिन स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला ने BJP की सेवा जारी रखी। इस बीच उनको तमाम राजनीतिक दलों ने टिकट का भी प्रस्ताव दिया लेकिन अपने रग-रग में भाजपा को बसा चुके इस “अमर योद्धा” ने राजनीतिक दलों के ऑफर ठुकराते हुए बीजेपी के साथ अपनी वफादारी जारी रखी।

विरोधी भी चाह रहे हैं कि बीनू भइया को मिले सच्ची श्रद्धांजलि


कभी पार्टी के अंदर विवेकशील शुक्ला के राजनीतिक विरोधी रहे BJP के कई दिग्गज नेता भी चाह रहे हैं कि BJP का शीर्ष नेतृत्व उनकी धर्मपत्नी रंजना शुक्ला को टिकट देकर अपनी सच्ची श्रद्धांजलि दे। नाम न छापने की शर्त पर एक बड़े नेता ने कहा कि स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला ने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया। दुर्भाग्यवश वह घाटमपुर और किदवईनगर से चुनाव हारे। लेकिन जब उनको कुछ मिलने का समय आया तो वह हम सबको छोड़कर दुनिया को अलविदा कह गए।


मनी है तो महिला नहीं, महिला है तो मनी नहींपर लग सकता है विराम


RSS के एक कद्दावर पदाधिकारी की मानें तो मेयर की प्रत्याशिता को लेकर BJP के अंदर घमासान पूरे चरम पर पहुंच चुका है। भाजपा का एक धड़ा बड़े शैक्षणिक कारोबारी की बीवी को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए है। तो दूसरा धड़ा एक एक बड़े वैश्य नेता को हाशिए पर लाने के लिए दक्षिण जिलाध्यक्ष को आगे कर राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है। कुल मिलाकर वर्तमान में हालात यह है कि भाजपा मनी है तो महिला नहीं, महिला है तो मनी नहीं के समीकरण में फंसी नजर आ रही है। शैक्षणिक कारोबार के नाम पर BJP नेता और कार्यकर्ता मुखर विरोध पर आमादा हैं। ऐसे में “अमर योद्दा” स्वर्गीय विवेकशील की धर्मपत्नी रंजना शुक्ला का नाम सामने आना RSS के लिए किसी “संजीवनी” से कम नहीं है। सूत्रों की मानें तो रंजना शुक्ला वो नाम हैं जिनकी प्रत्याशिता पर हर किसी की हां हो सकती है। साथ ही भाजपा की धड़ेबाजी और गुटबाजी पर पूरी तरह से विराम भी लग सकता है।

केंद्र सरकार के कई मंत्री और यूपी के डिप्टी सीएम कर रहे पैरवीं


स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला की पत्नी रंजना शुक्ला ने मेयर प्रत्याशिता के लिए आवेदन नहीं किया है। इतना ही नहीं उनके परिवार के किसी सदस्य ने भी अभी तक पैरवी या फिर संगठन और पार्टी से मांग नहीं की है। www.redeyyestimes.com के पास जो जानकारियां हैं उसके मुताबिक “अमर योद्धा” स्वर्गीय की पत्नी को टिकट दिलाने के लिए केंद्र सरकार के कई मंत्री और यूपी सरकार के एक डिप्टी सीएम अब खुलकर पैरवी में आ चुके हैं। पैरोकारी कर रहे इन सभी दिग्गजों ने रंजना शुक्ला के नाम पर कई तर्क भी रखे हैं।

रंजना शुक्ला के नाम पर राजनीति के चाणक्य की राय


BJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मानें तो Kanpur सीट ब्राम्हण बाहुल्य है। यह सर्वाधिक वोटर ब्राम्हण है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटर है। बीजेपी के दो धड़े ठाकुर और वैश्य प्रत्याशिता को लेकर आमने-सामने हैं। कांग्रेस हर कीमत पर ब्राम्हण प्रत्याशी को उतारना चाहती है। इसका सीधा मतलब यह कि वह भाजपा के परंपरागत ब्राम्हण वोट बैंक में तगड़ी सेंधमारी करने का प्रयास करेगी। कांग्रेस को इस चुनाव में सबसे बड़ा एडवांटेज मुस्लिम वोटों का मिलना भी तय माना जा रहा है। कांग्रेस के एक “चाणक्य” की मानें तो मुस्लिम वोटर इस बार कांग्रेस को ही वोट करना पसंद कर रहा है। उसके पीछे मुस्लिम वोटरों की राय है कि सपा हमेशा यहां हर चुनाव में तीसरे नंबर पर ही रहती है। वोट बंटता है और सीधा लाभ भाजपा को पहुंचता है। कांग्रेस हर चुनाव में दूसरे नंबर पर ही रह जाती है। ऐसे में यदि मुस्लिम वोटर सेंट्रलाइज्ड होकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर गया तो भाजपा को तगड़ा नुकसान हो सकता है। इस बात की चिंता BJP के कद्दावर पदाधिकारियों को भी है। शीर्ष नेतृत्व भी 2019 की तैयारी कर रहा है ऐसे में वह भी यही चाहेगा कि मेयर का टिकट “जिताऊ और टिकाऊ” को ही मिले।


RSS के एक पदाधिकारी की मानें तो BJP से यदि ब्राम्हण प्रत्याशी के तौर पर “अमर योद्धा” की धर्मपत्नी को टिकट मिलता है तो जीत बेहद आसान हो जाएगी। सहानुभूति के साथ कार्यकर्ता अपने पार्टी के पुराने वर्कर और साथी की धर्मपत्नी को चुनाव जिताने के लिए सारे भेदभाव भुलाकर जुटेंगे। रंजना शुक्ला साइंस से स्नातक होने के साथ गृहणी हैं। राजनीति उनके पारिवारिक विरासत में है। उनकी ननद चेतना शर्मा कानपुर शहर की डिप्टी मेयर भी रह चुकी हैं।   


 
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1 comments:

  1. मनोज मिश्रा27 अक्तूबर 2017 को 4:54 pm

    अगर इस बार BJP वर्ष 2017 के मेयर पद में स्व०विवेक शील शुक्ला की धर्म पत्नी रंजना शुक्ला जी को इस पद के लिए अपना निर्णय लेती है। तो यह भाजपा का सबसे समझदारी वाला निर्णय माना जायेगा। और विजय निश्चित होगी।और अबकी बार दक्षिण के ही मेयर होना चाहिए। यह निर्णय हम सभी को भी मान्य होगा।, मनोज मिश्रा,टीटू(पूर्व महामंत्री
    डी०बी०एस०महाविद्यालय का०वि०वि० कानपुर)

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