October 2017

25 हजार के इनामी विकास दुबे के गिरफ्तारी की जानकारी STF के SP ने लखनऊ में दी। STF के मुताबिक विकास अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों के गवाहों और वादी लोगों को डरा-धमका रहा था। वह एक मुकदमें भी वांछित भी चल रहा था।


[caption id="attachment_18083" align="aligncenter" width="562"]vikas dubey, kanpur, redeyestimes.com, shivli कानपुर से 25 हजार के इनामी विकास दुबे की यह फोटो STF ने लखनऊ में जारी की।[/caption]
YOGESH TRIPATHI

कानपुर। उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (UPSTF) ने Kanpur के शिवली थाना एरिया के बिकरू गांव निवासी विकास दुबे को राजधानी Lucknow के कृष्णा नगर कोतवाली एरिया से Arrest कर लिया। STF के मुताबिक विकास दुबे पर 25 हजार रुपए का इनाम पुलिस की तरफ से घोषित था। उसके पास से .30 बोर की स्प्रिंग फील्ड राइफल, कई कारतूस और खोखे भी बरामद किए गए हैं।

Minister संतोष शुक्ला की थाने के अंदर हुई हत्या में नामजद था विकास

STF की तरफ से लखनऊ में की गई प्रेस कांफ्रेस में बताया गया कि विकास दुबे अपने मुकदमें के गवाहों और वादी लोगों को डरा-धमका रहा था। शिवली से एक मुकदमें में वह वांछित था। STF की टीम लगातार विकास दुबे की लोकेशन को ट्रेस कर रही थी। देर रात सटीक खुफिया तंत्र की सूचना पर STF ने विकास दुबे को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से .30 बोर की स्प्रिंग फील्ड राइफल के साथ कई कारतूस और खोखे भी बरामद किए गए हैं। राइफल लाइसेंसी है या फिर अवैध इसका पता लगाया जा रहा है।

संतोष शुक्ला हत्याकांड में कोर्ट ने विकास को किया था दोषमुक्त

कानपुर के शिवली थाना एरिया में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या में विकास दुबे मुख्य आरोपी था। यह चर्चित केस कई साल तक चला था। कुछ साल पहले ही अदालत ने विकास दुबे को दोष मुक्त किया था।

Kanpur से देर रात उठाए जाने की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक विकास दुबे को देर रात उसके ही घर से पुलिस ने उठा लिया था। यह खबर सुबह से ही सोशल मीडिया में भी चल रही थी। माना जा रहा है कि STF की टीमें उससे इंट्रोगेशन कर पाती, इससे पहले ही विकास दुबे के परिजनों ने लिखापढ़ी कर दी। जिसके बाद STF को अंततः उसकी गिरफ्तारी दिखानी पड़ी।

प्रधान से लेकर जिला पंचायत तक का चुनाव जीत चुका है विकास

विकास दुबे को जानने वालों की मानें तो विकास दुबे बिकरू से प्रधान बनने के साथ ही जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है। वहीं STF का कहना है कि विकास पर करीब डेढ़ दर्जन के आसपास संगीन धाराओं के मुकदमें दर्ज हैं।

कानपुर से मेयर की प्रत्याशिता को लेकर सभी दल चुनाव की सियासी पिच पर अपनी-अपनी तरह से फील्डिंग सजा रहे हैं। शहर में AAP के लिए जमीन तैयार कर रहे कई नेताओं ने BJP से टिकट मांग रही डाक्टर आरती लाल चंदानी के लिए अपने स्तर से लामबंदी शुरु कर दी है। सूत्रों की मानें तो AAP के लीडर चाह रहे हैं कि आरती लाल चंदानी बीजेपी के बजाय AAP के टिकट पर सियासत की पिच पर बैटिंग करें। 




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। Kanpur मेयर की प्रत्याशिता को लेकर सभी दलों में घमासान अंतिम दौर में पहुंच चुका है। प्रत्याशिता को लेकर सबसे अधिक मारामारी केंद्र और यूपी की सत्ताधारी BJP में है। यहां से दो शैक्षणिक कारोबारी अब आमने-सामने आ चुके हैं। एक की पैरवी भाजपा संगठन के बड़े पदाधिकारी कर रहे हैं तो दूसरे के लिए सिंडीकेट ने अपनी गोटें बिछा दी हैं। जो अन्य दावेदार थे वो करीब-करीब दौड़ से बाहर होते नजर आ रहे हैं। बड़े सूत्रों की मानें तो BJP से मेयर का टिकट मांग रही शहर की मशहूर चिकित्सक डॉक्टर आरती लाल चंदानी के लिए Kanpur की AAP ने “सियासी फील्डिंग” सजा दी है। सियासत के गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेताओं ने उन्हें टिकट न मिलने पर AAP से चुनाव लड़ने का न्यौता भी दे दिया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उनको मनाने के लिए कुछ चिकित्सकों की टीम भी लगाई गई है।

BJP से किया है मेयर के लिए आवेदन

शहर की मशहूर चिकित्सक डॉक्टर आरती लाल चंदानी किसी के पहचान की मोहताज नहीं हैं। चुनाव का ऐलान होते ही उन्होंने BJP से मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन किया। हालांकि लोकल BJP और संगठन की तरफ से उनको कोई खास तरजीह नहीं दी गई। आवेदन के बाद आरती लाल चंदानी दिल्ली भी गईं। कई दिग्गजों से उनकी मुलाकात और मंत्रणा भी हुई लेकिन BJP के लोकल नेताओं की तरफ से सपोर्ट न मिलने की वजह से रेस में पीछे हो गईं। भाजपा का एक धड़ा चर्चित कारोबारी के लिए पैरवी करता रहा। खबर तो यह भी है कि इस शैक्षणिक कारोबारी के लिए पिछले तीन महीने से भाजपा संगठन के कद्दावर पैरवी करते रहे। एक IAS अफसर की अहम भूमिका भी रही। यह देख संगठन के क्षेत्रीय “चाणक्य” ने एक विधायक के जरिए कानपुर दक्षिण जिले की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता का नाम आगे करवाया तो उसके बाद आवेदनों की बौंछार हो गई। करीब चार दर्जन से अधिक दावेदारों ने प्रत्याशिता के लिए आवेदन किया।

AAP के पास भी नहीं है दमखम वाला कंडीडेट

सूत्रों की मानें तो यूपी के हर जिले में अपनी जमीन खड़ी कर रही आम आदमी पार्टी (AAP) के पास कानपुर में कोई दमखम वाला प्रत्याशी नहीं है। छात्रसंघ के एक पूर्व पदाधिकारी ने पत्नी को चुनाव लड़ाने के लिए कमर कसी थी लेकिन ऐन वक्त पर एक पूर्व पार्षद ने दिल्ली में रह रही अपनी बेटी के लिए रायता फैला दिया। AAP ने दक्षिण से पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट फाइनल की लेकिन मेयर पर विराम लग गया। अंदरखाने की मानें तो आरती लाल चंदानी हर कीमत पर चुनावी मैदान में डटी रहना चाहती हैं। चर्चा तो यह भी है कि वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव लड़ सकती हैं। यही वजह रही है कि मंडे को AAP संगठन के कई नेताओं ने उनसे मुलाकात कर मेयर चुनाव को लेकर चर्चा की।

हां भी नहीं और ना भी नहीं

AAP सूत्रों की मानें तो डॉक्टर आरती लाल चंदानी ने न तो हां किया है और ना भी नहीं किया है। उन्होंने वेट एंड वॉच के लिए बोला है। स्थित बिल्कुल साफ है। भाजपा से यदि उनको टिकट नहीं मिलता है और वह निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहती हैं तो उनके लिए AAP से बेहतर विकल्प कोई नहीं हो सकता। AAP के कार्यकर्ता भी खुश हैं उनका कहना है कि यदि आरती लाल चंदानी पार्टी से चुनाव लड़ेंगी तो हम सीधी फाइट देने की स्थित में होंगे।

 

BJP हाईकमान के लिए गले का फांस बन चुकी Kanpur मेयर सीट पर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व बेहद ही अंचभा भरा फैसला ले सकता है। बड़े सूत्रों की मानें तो कानपुर के एक चर्चित और बड़े शैक्षणिक परिवार में यह टिकट देने की तैयारी करीब-करीब पूरी हो चुकी है। कारोबारी की धर्मपत्नी को दिल्ली बुलाया गया है। बुलावे के बाद वह पहुंच भी गई हैं। बड़े नेताओं के बीच तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अंदरखाने की मानें तो RSS की बिल्कुल भी नहीं चली। 




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। Kanpur मेयर प्रत्याशी के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच चल रही नूरा-कुश्ती अब पूरी तरह से निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। RSS और BJP पर एक बड़ा सिंडीकेट आखिर भारी पड़ रहा है। इस सिंडीकेट ने दो बिल्लियों के बीच होने वाली लड़ाई के दौरान बंदकर बनकर पूरा फायदा करीब-करीब उठा लिया। www.redeyestimes.com न्यूज पोर्टल को मिली जानकारी के मुताबिक Kanpur से BJP की मेयर प्रत्याशी यूपी/उत्तराखंड में शिक्षा के सौदागरकहे जाने वाले एक बड़े राजनीतिक घराने को देने के लिए सिंडीकेट ने पूरी फील्डिंग सजा राजनीतिक ग्राउंड पर सजा दी है। बुलावे पर चर्चित और बड़े शैक्षणिक कारोबारी की पत्नी दिल्ली पहुंच भी चुकी हैं। यदि नोबाल न हुई तो पक्का है कि देर रात या फिर अगले 48 घंटों में चोला ओढ़ सकती हैं। RSS के बड़े पदाधिकारी की मानें तो नोबाल का चांस सिर्फ एक फीसद ही है।

RSS-BJP के बीच घरवाली और बाहरवाली को लेकर चल रही थी कुश्ती

RSS के एक पदाधिकारी की मानें तो कानपुर की मेयर सीट सबसे अधिक विवादित हो चुकी है। यहां से कई दर्जन आवेदन आए। लेकिन चर्चाओं में एक नया शैक्षणिक कारोबारी का परिवार रहा। इस परिवार के लिए भाजपा के एक धड़े ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एड़ी-चोटी का जोर लगाया। प्रत्याशिता पर मुहर लगवाने के लिए दो दिन का प्रांतीय अधिवेशन भी करवा दिया गया। लेकिन हो गया सबकुछ उल्टा-पुल्टा। विवाद इतना बढ़ गया कि एक के बाद एक कई दिग्गजों ने आवेदन कर दिया। चित्रकूट की मीटिंग में भी कानपुर की सीट को लेकर मुद्दा काफी छाया रहा। विवाद की सबसे बड़ी वजह RSS और BJP के बीच आम सहमति न बनना बताया जा रहा है। विवाद के बीच ही बीजेपी के एक गुट ने कानपुर दक्षिण बीजेपी की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता का नाम आगे बढ़ा दिया। पैरवी एक विधायक के जरिए क्षेत्र संगठन की राजनीति करने वाले “चाणक्य” ने की।

परिवार को विरासत में मिली है राजनीति

बताया जा रहा है कि जिस शैक्षणिक कारोबारी के घराने को विरासत में मिली है। कई दशक तक MLC  सीट से हार का तिलिस्म अभी हाल में ही कुछ बरस पहले टूटा है। अंदरखाने की मानें तो कानपुर सांसद डाक्टर मुरली मनोहर जोशी और उनकी टीम इस घराने को हर कीमत पर BJP ज्वाइन कराने की कवायद कर रहा था। MLC चुनाव से पहले यह कवायद परवान तो चढ़ी लेकिन सफलता नहीं मिली। खबर यह भी है कि असफलता हाथ लगने पर शैक्षणिक कारोबारी घराने ने BJP के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने के लिए सीढ़ियां बदल लीं।

अमित शाह की टेबल तक पहुंचा Kanpur का मामला

विश्वस्त्र सूत्रों की मानें तो RSS-BJP में आम सहमति न बन पाने की वजह से मामला पहले प्रदेश स्तर तक ही रहा लेकिन एक गुट की तरफ से दिल्ली तक की गई पैरवी रंग लाई। बताया जा रहा है कि सारे विवाद को तर्क और सबूतों के साथ रखा गया। इस गुट की तरफ से कई कद्दावर मंत्री भी लाबिंग करते रहे। विवाद से बचने और कानपुर मेयर सीट जीतने के फार्मूले को लेकर शीर्ष नेतृत्व में मंत्रणा का दौर भी चला। सूत्रों की मानें तो इन सब विवादों के बीच “सिंडीकेट” अपनी “गिद्ध” सरीकी निगाहें लगाए हर चाल और रणनीति को समझता रहा। दो दिन पहले कानपुर के एक बड़े शैक्षणिक कारोबारी की धर्मपत्नी का नाम “सिंडीकेट” ने BJP के शीर्ष नेतृत्व को सुझाया।

BJP एक कद्दावर नेता से कई चक्र की बातचीत भी हुई। RSS के दिग्गज की मानें तो मंडे को BJP के एक बड़े नेता ने कानपुर के इस चर्चित और बड़े राजनीतिक घराने को दिल्ली पहुंचने का आमंत्रण भी दे दिया। आमंत्रण के कुछ घंटे बाद ही “शिक्षा क्वीन” दिल्ली के लिए रवाना हो गई। इस समय वह दिल्ली में ही हैं। यानी एक बात तो पक्की हो गई है कि बीजेपी किसी भी समय कुछ बड़ा करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

 

लंबे इंतजार और हाईकोर्ट की फटकार के बाद आखिर फ्राइ-डे को राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय के चुनाव की तिथियों का ऐलान कर दिया। राज्य चुनाव आयुक्त सतीश अग्रवाल के मुताबिक तीन चरणों में मतदाता वोट डालेंगे। एक दिसंबर को परिणाम आएंगे। श्रीअगवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सूबे में 10 फीसदी मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील घोषित किए गए हैं। 


[caption id="attachment_18069" align="aligncenter" width="710"] लखनऊ में राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश अग्रवाल निकाय चुनाव के तिथियों का ऐलान करते हुए[/caption]

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने फ्राइ-डे को नगर निकाय के चुनाव तिथियों का शंखनाद कर दिया। सूबे के 16 नगर निगम, 198 नगर पालिका परिषद और 438 नगर पंचायत के लिए कुल तीन चरणों में मतदाता वोट की चोट कर अपनी पसंद के प्रत्याशी को चुनाव जिताएंगे। इस बार का चुनाव पैरामिलेट्री फोर्स के बजाय PAC की मौजूदगी में कराया जाएगा। 10 फीसदी मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील घोषित किए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश अग्रवाल के मुताबिक यूपी में इस बार 10 फीसदी मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील घोषित किए गए हैं। यहां भारी सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो सके।


तीन चरणों में मतदाता करेंगे वोट की चोट

-राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश अग्रवाल ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि निकाय चुनाव का पहला चरण 22 नवंबर को होगा। इसमें 5 नगर निगम, 71 नगर पालिका परिषद के लिए मतदान कराए जाएंगे।

-दूसरा चरण 26 नवंबर को होगा, जिसमें 26 नगर निगम और 51 पालिका परिषद में चुनाव कराए जाएंगे।

-29 नवंबर को तीसरे चरण में 26 जिलों में 5 नगर निगम और 76 नगर पालिका परिषद के चुनाव होंगे।


यूपी में लागू हो गई आचार संहिता


राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से नगर निकाय के चुनावी तिथि का ऐलान करते हुए सूबे में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। सभी सरकारी कर्मचारियों को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करना होगा। जिसके चलते राजस्व, पुलिस, गृह, नगर विकास में ट्रांसफर, नियुक्ति पर प्रतिबंध होगा।राज्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक मतदान सुबह 7:30 से शाम 5 बजे तक होगा। वहीं मतगणना एक दिसम्बर को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। परिणाम की सूचना मोबाइल पर मैसेज से मिलेगी।

10 प्रतिशत मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील घोषित


राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश ने बताया कि चुनाव के सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पैरा मिलिट्री फोर्स के बजाए यूपी पुलिस, पीएसी के हाथों में रहेगी। 10 % मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन केंद्रों की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम के चुनाव ईवीएम से जबकि नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। बैलेट पेपर पर प्रत्यशी की फोटो भी होगी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कार्यकर्ता तक परेशान है कि आखिर मेयर प्रत्याशी कौन होगा ? पांच दर्जन से अधिक आवेदन हो चुके हैं। कई दिग्गज बगैर आवेदन के ही लखनऊ से दिल्ली दिन-रात एक किए हैं। प्रत्याशिता की दावेदारी को लेकर घमासान तेज और निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। इन सबके बीच BJP की गुटबाजी भी सामने आ चुकी है। RSS के कद्दावर पदाधिकारी ऐसे नाम पर मुहर लगाना चाहते हैं जो निर्विवादित हो और पार्टी से जुड़ा भी हो। इन सबके बीच Kanpur BJP के कार्यकर्ताओं और नेताओं के कंठ से जो आवाज आई है वो नाम है रंजना शुक्ला। रंजना शुक्ला BJP के वफादार, ईमानदार और लोकप्रिय नेता रहे "अमर योद्धा" विवेकशील शुक्ला (बीनू) की धर्मपत्नी हैं। 


[caption id="attachment_18064" align="aligncenter" width="645"] BJP के "अमर योद्धा" स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (बीनू)। (फाइल फोटो, फेसबुक वाल)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सेवा करने वाले लोकप्रिय, ईमानदार, कर्मठशील छवि के नेता रहे स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (बीनू) की धर्मपत्नी रंजना शुक्ला को मेयर का प्रत्याशी बनाकर BJP के शीर्ष नेतृत्व को अपने “अमर योद्धा” को सच्ची श्रद्धांजलि देनी चाहिए। यह कहना है कि Kanpur BJP के तमाम कद्दावर नेताओं और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं का। www.redeyestimes.com ने Kanpur BJP के कुछ चर्चित और बड़े नामों से जब इस संबध में वार्ता की तो सभी के मुंह से एक ही स्वर निकला कि यदि BJP और RSS का शीर्ष नेतृत्व रंजना शुक्ला के नाम पर मुहर लगाता है तो निश्चित तौर पर यह “अमर योद्धा” स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 के यूपी चुनाव में किदवईनगर विधान सभा से चुनाव लड़े स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला सिर्फ 1800 वोटों से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2017 के इलेक्शन में वह इस सीट से प्रबल दावेदार थे लेकिन ऐन वक्त पर हाईकमान ने उनकी टिकट काट दी थी।


[caption id="attachment_18065" align="aligncenter" width="653"]ranjna shukla, redeyestimes.com श्रीमती रंजना शुक्ला पत्नी स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला (अमर योद्धा) (BJP)[/caption]

अमर योद्धा विवेकशील शुक्ला का संक्षिप्त राजनीतिक जीवन परिचय


विवेकशील शुक्ला (बीनू) ने अपने जीवन के करीब 35 बसंत जीवन भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्पित किया। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में बतौर कानपुर जिलाध्यक्ष पांच साल पद पर रहे। उनकी निष्ठा, कर्तव्यता और ईमानदारी को देख BJP ने ढाई दशक पहले घाटमपुर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। दुर्भाग्यवश वह चुनाव हार गए लेकिन पार्टी की सेवा उन्होंने अनवरत जारी रखी। 2012 के यूपी इलेक्शन में BJP ने एक बार फिर अपने “योद्धा” पर विश्वास जताते हुए उनको किदवईनगर विधान सभा से पहला प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस के ताकतवर MLA को उनको जमकर टक्कर दी लेकिन अंततः वह कांटे की लड़ाई में सिर्फ 1800 वोटों से चुनाव हार गए। 2017 में वह एक बार फिर इस सीट से प्रबल दावेदार थे। उनका नाम आखिरी दौर तक चला लेकिन उनको टिकट नहीं मिली। इसके कुछ दिन बाद ही ह्दयगति रुकने की वजह से उनका निधन हो गया। अपने तीन दशक के राजनीतिक पारी के दौरान के दौरान वह सामाजिक सरोकार से भी जुड़े रहे। नेहरु युवा केंद्र (यूपी/उत्तराखंड) के चेयरमैन भी बने।

BJP के खराब दिनों में भी अमर योद्धा ने नहीं छोड़ा था दामन


स्वर्गीय विवेकशील के करीबी लोगों की मानें तो वर्ष 98 से लेकर वर्ष 2014 तक का समय बीजेपी के लिए बेहद खराब रहा। इसी दौरान बीजेपी का ग्राफ काफी नीचे गिरा। ये वो समय था जब भाजपा की केंद्र और यूपी दोनों ही जगहों पर सत्ता से बेदखल हो चुकी थी। भाजपा की हालत खस्ता देख सत्ता लोभी तमाम लालची नेता दूसरे दलों में चले गए लेकिन लेकिन स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला ने BJP की सेवा जारी रखी। इस बीच उनको तमाम राजनीतिक दलों ने टिकट का भी प्रस्ताव दिया लेकिन अपने रग-रग में भाजपा को बसा चुके इस “अमर योद्धा” ने राजनीतिक दलों के ऑफर ठुकराते हुए बीजेपी के साथ अपनी वफादारी जारी रखी।

विरोधी भी चाह रहे हैं कि बीनू भइया को मिले सच्ची श्रद्धांजलि


कभी पार्टी के अंदर विवेकशील शुक्ला के राजनीतिक विरोधी रहे BJP के कई दिग्गज नेता भी चाह रहे हैं कि BJP का शीर्ष नेतृत्व उनकी धर्मपत्नी रंजना शुक्ला को टिकट देकर अपनी सच्ची श्रद्धांजलि दे। नाम न छापने की शर्त पर एक बड़े नेता ने कहा कि स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला ने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया। दुर्भाग्यवश वह घाटमपुर और किदवईनगर से चुनाव हारे। लेकिन जब उनको कुछ मिलने का समय आया तो वह हम सबको छोड़कर दुनिया को अलविदा कह गए।


मनी है तो महिला नहीं, महिला है तो मनी नहींपर लग सकता है विराम


RSS के एक कद्दावर पदाधिकारी की मानें तो मेयर की प्रत्याशिता को लेकर BJP के अंदर घमासान पूरे चरम पर पहुंच चुका है। भाजपा का एक धड़ा बड़े शैक्षणिक कारोबारी की बीवी को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए है। तो दूसरा धड़ा एक एक बड़े वैश्य नेता को हाशिए पर लाने के लिए दक्षिण जिलाध्यक्ष को आगे कर राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है। कुल मिलाकर वर्तमान में हालात यह है कि भाजपा मनी है तो महिला नहीं, महिला है तो मनी नहीं के समीकरण में फंसी नजर आ रही है। शैक्षणिक कारोबार के नाम पर BJP नेता और कार्यकर्ता मुखर विरोध पर आमादा हैं। ऐसे में “अमर योद्दा” स्वर्गीय विवेकशील की धर्मपत्नी रंजना शुक्ला का नाम सामने आना RSS के लिए किसी “संजीवनी” से कम नहीं है। सूत्रों की मानें तो रंजना शुक्ला वो नाम हैं जिनकी प्रत्याशिता पर हर किसी की हां हो सकती है। साथ ही भाजपा की धड़ेबाजी और गुटबाजी पर पूरी तरह से विराम भी लग सकता है।

केंद्र सरकार के कई मंत्री और यूपी के डिप्टी सीएम कर रहे पैरवीं


स्वर्गीय विवेकशील शुक्ला की पत्नी रंजना शुक्ला ने मेयर प्रत्याशिता के लिए आवेदन नहीं किया है। इतना ही नहीं उनके परिवार के किसी सदस्य ने भी अभी तक पैरवी या फिर संगठन और पार्टी से मांग नहीं की है। www.redeyyestimes.com के पास जो जानकारियां हैं उसके मुताबिक “अमर योद्धा” स्वर्गीय की पत्नी को टिकट दिलाने के लिए केंद्र सरकार के कई मंत्री और यूपी सरकार के एक डिप्टी सीएम अब खुलकर पैरवी में आ चुके हैं। पैरोकारी कर रहे इन सभी दिग्गजों ने रंजना शुक्ला के नाम पर कई तर्क भी रखे हैं।

रंजना शुक्ला के नाम पर राजनीति के चाणक्य की राय


BJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मानें तो Kanpur सीट ब्राम्हण बाहुल्य है। यह सर्वाधिक वोटर ब्राम्हण है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटर है। बीजेपी के दो धड़े ठाकुर और वैश्य प्रत्याशिता को लेकर आमने-सामने हैं। कांग्रेस हर कीमत पर ब्राम्हण प्रत्याशी को उतारना चाहती है। इसका सीधा मतलब यह कि वह भाजपा के परंपरागत ब्राम्हण वोट बैंक में तगड़ी सेंधमारी करने का प्रयास करेगी। कांग्रेस को इस चुनाव में सबसे बड़ा एडवांटेज मुस्लिम वोटों का मिलना भी तय माना जा रहा है। कांग्रेस के एक “चाणक्य” की मानें तो मुस्लिम वोटर इस बार कांग्रेस को ही वोट करना पसंद कर रहा है। उसके पीछे मुस्लिम वोटरों की राय है कि सपा हमेशा यहां हर चुनाव में तीसरे नंबर पर ही रहती है। वोट बंटता है और सीधा लाभ भाजपा को पहुंचता है। कांग्रेस हर चुनाव में दूसरे नंबर पर ही रह जाती है। ऐसे में यदि मुस्लिम वोटर सेंट्रलाइज्ड होकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर गया तो भाजपा को तगड़ा नुकसान हो सकता है। इस बात की चिंता BJP के कद्दावर पदाधिकारियों को भी है। शीर्ष नेतृत्व भी 2019 की तैयारी कर रहा है ऐसे में वह भी यही चाहेगा कि मेयर का टिकट “जिताऊ और टिकाऊ” को ही मिले।


RSS के एक पदाधिकारी की मानें तो BJP से यदि ब्राम्हण प्रत्याशी के तौर पर “अमर योद्धा” की धर्मपत्नी को टिकट मिलता है तो जीत बेहद आसान हो जाएगी। सहानुभूति के साथ कार्यकर्ता अपने पार्टी के पुराने वर्कर और साथी की धर्मपत्नी को चुनाव जिताने के लिए सारे भेदभाव भुलाकर जुटेंगे। रंजना शुक्ला साइंस से स्नातक होने के साथ गृहणी हैं। राजनीति उनके पारिवारिक विरासत में है। उनकी ननद चेतना शर्मा कानपुर शहर की डिप्टी मेयर भी रह चुकी हैं।   


 

Kanpur मेयर सीट के लिए घमासान काफी तेज हो चुका है। करीब पांच दर्जन आवेदन हु। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ 24 नामों की लिस्ट हाईकमान के पास भेजी गई है। समन्वय समिति की बैठक के बाद प्रत्याशी के नाम की घोषणा 30 अक्तूबर को होगी। प्रत्याशी चयन के लिए कानपुर में लंबे समय तक अपना योगदान दे चुके RSS के पुराने "योद्धाओं" से भी अहम राय मांगी गई है।



YOGESH TRIPATHI


कानपुर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) 30 अक्तूबर को Kanpur मेयर प्रत्याशी के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगाएगी। सूत्रों की मानें तो BJP और RSS के बीच प्रत्याशी को लेकर तालमेल बिल्कुल भी नहीं बैठ पाया। RSS के बड़े सूत्रों की मानें तो 24 आवेदकों की एक सूची हाईकमान के पास विचारार्थ के लिए भेज दी गई है। ये सभी गंभीर नाम हैं, इन नामों पर ही विचार करने के बाद प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया जाएगा।


RSS के पुराने योद्धाओंसे ली जाएगी राय

कानपुर में लंबे समय तक काम कर चुके राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के कई पुराने बड़े पदाधिकारियों से भी मेयर प्रत्याशी के लिए राय मांगी गई है। सूत्रों की मानें तो इन पुराने RSS के पदाधिकारियों की राय को शीर्ष नेतृत्व काफी प्रमुखता से लेगा। कुछ पुराने दिग्गजों का तो कानपुर में डेरा भी पड़ चुका है। ये सभी दिग्गज चित्रकूट की मीटिंग के बाद सीधे कानपुर ही आ गए हैं।

ये हैं RSS-BJP के बीच मतभेद की सबसे बड़ी वजहें

सूत्रों की मानें तो RSS और BJP के बीच मतभेद की वजहें तो कई हैं लेकिन जो सबसे बड़ी वजह “घरवाली” और “बाहरवाली” को लेकर है। शीर्ष नेतृत्व से सीधे टच में रहने वाला भाजपा का एक धड़ा कानपुर के एक बड़े शैक्षणिक कारोबारी के घराने को टिकट दिलाने के लिए जहां अभी भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए है तो दूसरी तरफ दूसरा धड़ा दक्षिण जिला की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता के लिए अंदर ही अंदर तगड़ी पैरवी करवा रहा है। अनीता गुप्ता के नाम पर भाजपा के कई “दिग्गज” अपनी मौन स्वीकृति जाहिर कर चुके हैं। वहीं RSS की राय है कि प्रत्याशी कार्यकर्ताओं के बीच से हो साथ ही वह निर्विवादित चेहरा भी हो। उस पर किसी तरह के आरोप-प्रत्यारोप न हों और वह दागी भी न हो।

समन्वय समिति की बैठक में विचारार्थ रखे जाएंगे सभी नाम

सूत्रों की मानें तो कानपुर के उत्तर-दक्षिण जिले से करीब पांच दर्जन के आसपास मेयर प्रत्याशी के लिए आवेदन आए थे। इसमें कई ऐसे भी आवेदन थे जो पार्षदी के योग्य भी नहीं थे। 24 नामों की एक लिस्ट हाईकमान को भेजी गई है। बताया जा रहा है कि RSS-BJP के बीच तालमेल नहीं बैठने की वजह से अब समन्वय समिति की बैठक के बाद नामों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। प्रत्याशी के नाम का ऐलान 30 अक्तूबर को होगा।

 

Kanpur की मेयर सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) से करीब चार दर्जन महिला दावेदारों ने अपना आवेदन दिया है। श्रीश्री रविशंकर जी के आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ीं डॉक्टर बनदेव सिंह (बिन्दु) ने भी अपना आवेदन किया। www.redeyestimes.com से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि RSS की एक विंग की वह प्रांत संयोजिका भी हैं। अपना लंबा जीवन सामाजिक सरोकार में व्यतीत करने वाली बिन्दु सिंह जेल में बंद महिला बंदियों और उनके बच्चों के उत्थान के लिए लंबे समय से कार्य कर रही हैं। जेल में महिला बंदियों के हाथों से बनी आर्टिफिशियल ज्वैलरी की मांग अब विदेशों में होने लगी है। जिसे वह बड़ी उपलब्धि बताती हैं।


[caption id="attachment_18054" align="aligncenter" width="640"]dr.bindu singh.4jpg, redeyestimes.com BJP से मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन करने वाली डॉक्टर बनदेव सिंह (बिन्दु)  (छाया): नागेंद्र शुक्ला [/caption]

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कानपुर। BJP Kanpur से मेयर की प्रत्याशिता के लिए आवेदन करने वाली डॉक्टर बनदेव कुमारी सिंह (बिन्दु) को Kanpur के जिला कारागार के कर्मचारी और बंदी “किरन बेदी” कहते हैं। जिला कारागार की महिला बंदियों और उनके बच्चों के लिए डॉक्टर बिन्दु सिंह किसी “मसीहा” से कम नहीं है। होली हो या दिवाली, 15 अगस्त या 26 जनवरी। बिन्दु सिंह अपने जीवन का अमूल्य समय महिला बंदियों और उनके बच्चों के लिए समर्पित करती हैं। जीवन का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवा में बिताने वाली बिन्दु सिंह अचानक तब चर्चा में आ गईं जब उन्होंने मेयर की प्रत्याशिता के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) से आवेदन कर दिया। www.redeyestimes.com से बातचीत में बिन्दु सिंह ने तमाम सवालों का काफी बेबाकी से जवाब दिया। श्रीश्री रविशंकर जी महाराज को अपना गुरु और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानने वाली बिन्दु सिंह ने कहा कि कभी उनके गुरु ने कहा था कि “माना की राजनीति गंदी है लेकिन इस गंदगी को साफ करने के लिए किसी न किसी तो आगे आना ही पड़ेगा”।

[caption id="attachment_18053" align="aligncenter" width="640"]dr.bindu singh.2jpg,redeyestimes.com महिला बंदियों की तरफ से बनाई गई आर्टिफिशियल ज्वैलरी की प्रदर्शनी में डॉक्टर बिन्दु सिंह[/caption]

महज तीन साल की उम्र में हो गया था पिता का निधन

बनदेव कुमारी सिंह (बिन्दु) मूलरूप से फर्रुखाबाद जनपद के खिमसीपुर खिरिया की रहने वाली हैं। तीन साल की उम्र में पिता जगपाल सिंह का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत उनकी मां उन्हें लेकर हरदोई आ गईं। जब वह इंटर की पढ़ाई कर रहीं थी तभी उनका विवाह मां ने कर दिया।

[caption id="attachment_18055" align="aligncenter" width="720"]dr.bindu singh.3jpg, redeyestimes.com सामाजिक और पर्यावरण पर विशेष काम करने वाली डॉक्टर बिन्दु सिंह को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है[/caption]

पति ने बदल दी डॉक्टर बिन्दु सिंह की दुनिया

बिन्दु सिंह के मुताबिक विवाह के बाद उनके पति ने उनकी शिक्षा को बाधित नहीं होने दिया। वह पढ़ती गईं और पति उनका साथ देते रहे। MA (समाजशास्त्र) से करने के बाद उन्होंने MSW किया। इसके बाद उन्होंने MBEH (होम्योपैथ) से डॉक्टरी की पढ़ाई की। इसके बाद भी वह रुकीं नहीं और फैशन डिजाइनिंग से लेकर तमाम तरह के कोर्स कर उन्होंने डिग्रियां और सर्टिफिकेट्स हासिल किए। करीब आठ साल पहले पति का निधन हो गया। इसके बाद उन पर बेटी की जिम्मेदारी आ पड़ी। बिन्दु सिंह के मुताबिक उनकी बेटी शुभांगि ने दिल्ली में रहकर पत्रकारिता की पढ़ाई की।

[caption id="attachment_18056" align="aligncenter" width="720"]dr.bindu singh, redeyestimes.com महिला कैदियों और बच्चों को जेल में बेहतर शिक्षा दिलाने और उनके उत्थान के लिए कार्य करने वाली बिन्दु सिंह को सम्मानित करते पुलिस अफसर[/caption]

RSS की एक विंग की हैं प्रांत संयोजिका

समाज सेवा से जुड़ी डॉक्टर बिन्दु सिंह शिक्षा-संस्कृति उत्थान न्यास (कार्य एवं विषय) की प्रांत संयोजिका भी हैं। यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की एक विंग हैं। प्रत्याशिता के लिए आवेदन के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का इरादा कभी नहीं रहा। एक बार गुरु श्रीश्री रविशंकर जी से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि “राजनीति गंदी है लेकिन इसे साफ करने के लिए किसी न किसी को आगे तो आना ही पड़ेगा”। सीट जब सामान्य महिला के लिए निर्धारित की गई तो संघ के एक पदाधिकारी ने भी उनको फोन करके कहा कि आवेदन करो, आवेदन करने में क्या जाता है। दिल्ली में रह रही बेटी से जब बिन्दु ने पूछा तो उसने भी तुरंत हां कर दी। बेटी सुभांगि के हां कहने के बाद उन्होंने अपना आवेदन उत्तर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी को दे दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तक मैने अपने गरुजी को सूचना नहीं दी है। संभव है कि देर रात तक मेल उनको भी करूंगी।

-परिवार परमार्श केंद्र (Police Line) में पिछले कई वर्ष से बतौर काउंसलर काम कर रहीं।

-कानपुर कारागार में महिला बंदियों और उनके बच्चों के उत्थान के लिए लंबे समय से कार्य कर रहीं।

-आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़कर संस्कार केंद्र के जरिए गरीब और दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिलवा रहीं।

-मलिन बस्तियों, कूड़ा बीनने वाले, भीख मांगने वालों को आत्मनिर्भर बनाने और उनको शिक्षा दिलाने के लिए भी डाक्टर बिन्दु सिंह काम कर रही हैं।

-बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ, सशक्त बनाओ, सम्मान दिलाओ के मिशन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्य चल रहा है।

शिक्षा के मामले में गुरु बहनें सभी BJP के सभी आवेदनकर्ताओं पर हैं भारी

शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि डॉक्टर आरती लाल चंदानी और डॉक्टर बनदेव सिंह (बिन्दु सिंह) दोनों ही गुरु बहने भी हैं। यह बात खुद बिन्दु सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि डॉक्टर आरती लाल चंदानी भी श्रीश्री रविशंकर जी महाराज को फालो करती हैं। इस नाते हम दोनों गुरु बहने भी हैं। बिन्दु सिंह ने कहा कि यदि आरती लाल चंदानी जी को टिकट मिलता है तो वह उनको चुनाव लड़ाने में सबसे आगे रहेंगी। वहीं BJP की तरफ से प्रत्याशिता के लिए आए सभी आवेदनों में यह दोनों गुरु बहने शिक्षा के मामले में बाकी आवेदनकर्ताओं से काफी आगे हैं।

विशेष- डॉक्टर बनदेव सिंह (बिन्दु) ने जिला कारागार में बंद महिला बंदियों और उनके बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठा रखा है। उन्होंने अपने पैसे से एक शिक्षिका को अध्यन कार्य के लिए लगाया है। शिक्षिका का पूरा खर्च उठाती हैं। बकौल बिन्दु सिंह प्रत्येक पर्व वह जिला कारागार की महिला बंदियों और उनके बच्चों के साथ ही मनाती हैं। शायद यही वजह है कि जेल के कर्मचारी से लेकर महिला बंदी तक उनके नेक कार्य के लिए अब उनको Kanpur की “किरन बेदी” भी कहने लगे हैं।

[caption id="attachment_18052" align="aligncenter" width="640"]dr.bindu singh.1jpg, redeyestimes.com डॉक्टर बनदेव सिंह (बिन्दु)[/caption]

शुभांजलि वूमेन अवार्ड : शुभांजलि वूमेन अवार्ड के तहत डॉक्टर बिन्दु सिंह हर वर्ष एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन कर 9 महिलाओं और 9 लड़कियों को सम्मानित भी करती हैं। ये सम्मान अलग-अलग क्षेत्रों डांस, गायन, योगा समेत अन्य क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने पर दिया जाता है। 

 

Kanpur में तैनात रहीं DIG सोनिया सिंह का कार्यकाल महज कुछ महीने का ही रहा लेकिन इस दौरान वह कई बार वह विवादित भी हुईं। इसमें सबसे बड़ा विवाद 25 दिन पहले रावतपुर गांव के रामलला मंदिर के अंदर घुसकर पुलिस की तरफ से किया गया लाठीचार्ज रहा। रामभक्तों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा के दो गुट भी आमने-सामने आए। हालांकि RSS ने मार खाए रामभक्तों का ही पक्ष लिया। साथ ही RSS के पदाधिकारियों ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि बड़े पुलिस अफसरों के खिलाफ हर कीमत पर कार्रवाई की जाएगी। www.redeyestimes.com ने भी करीब दो सप्ताह पहले अफसरों पर कार्रवाई होने के संकेत दिए थे। 


[caption id="attachment_18046" align="aligncenter" width="800"]ips akhilesh kumar Kanpur Police के नए SSP बनाए गए IPS अखिलेश कुमार अभी तक DGP मुख्यालय में SP थे[/caption]

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कानपुर। DIG Kanpur सोनिया सिंह का तबादला शासन ने मेरठ DIG (PTC) के पद पर कर दिया। अखिलेश कुमार को Kanpur का नया SSP बनाया गया है। शासन ने बुधवार देर रात कुल 28 IPS अफसरों के तबादले किए। जिसमें ADG रैंक के अफसर भी शामिल हैं। 


DIG के तबादले और आशंका और कयास सच साबित हुए

DIG सोनिया सिंह के तबादले की अटकले पिछले तीन सप्ताह से लगाई जा रही थीं। उनके तबादले को रुकवाने और करवाने के लिए BJP के दो धड़े खुलकर आमने-सामने थे। रावतपुर के रामलला मंदिर परिसर में रामभक्तों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के बाद से वह भाजपा के एक बड़े गुट के निशाने पर आ गई थीं। इस धड़े ने शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन मंत्री सुनील बंसल के सामने पेश होकर की थी। यूपी सरकार के एक मंत्री ने रामलला मंदिर लाठीचार्ज कांड पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट दी थी। इस बात को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के कद्दावर पदाधिकारी खुलकर सामने आए थे।

https://twitter.com/redeyestimes/status/923261936543793153

सुबह से हो रही थी तबादले की चर्चा और शाम को आ गया फरमान

DIG सोनिया सिंह के तबादले की चर्चा सुबह से हो रही थी और रात जाते-जाते उनके तबादले का फरमान आ गया। सिर्फ डीआइजी सोनिया सिंह ही नहीं बल्कि सरकार ने सूबे में कुल 28 IPS अफसरों के तबादले कर दिए। सूत्रों की मानें तो नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले ही एक साथ कई IPS अफसरों का तबादला कर कानून व्यवस्था को चौकस करने की भी पहल की है। उन्नाव की एसपी नेहा पांडेय भी शामिल हैं। उनकी जगह पुष्पांजलि माथुर को उन्नाव का नया कप्तान बनाया गया है। पुष्पांजलि माथुर IPS शलभ माथुर की पत्नी हैं। शलभ माथुर कानपुर में तैनात रह चुके हैं।

https://twitter.com/redeyestimes/status/923265165709082624

DGP मुख्यालय में तैनात थे अखिलेश कुमार 

साल 2005 बैच के IPS अफसर अखिलेश कुमार को Kanpur Police का नया SSP बनाया गया है। अखिलेश कुमार की तैनाती अभी तक डीजीपी मुख्यालय में बतौर SP के पद पर थी। इसके पहले वह कई जनपदों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

नगर निकाय चुनाव से पहले Yogi सरकार की तबादला List



 

 

BJP Kanpur से अब तक कुल 47 लोगों ने मेयर की प्रत्याशिता को लेकर आवेदन किया है। इसमें उत्तर जिले से 26 और दक्षिण से 21 आवेदन हुए हैं। इसमें डाक्टर आरती लाल चंदानी, प्रमिला पांडेय, कमलावती, पूनम कपूर और डाक्टर बिन्दु सिंह के नाम बताए जा रहे हैं। डाक्टर बिन्दु सिंह के बारे में कहा जा रहा है कि वह श्रीश्री रविशंकर जी की शिष्या हैं।



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कानपुर। बहुत कठिन है डगर पनघट की....। जी, हां बिल्कुल सही सोच रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP Kanpur) में मेयर की प्रत्याशिता को लेकर मचा घमासान मंगलवार की दोपहर को और भी तेज हो गया। अचानक जिस तरह से प्रत्याशियों की बीजेपी के अंदर बाढ़ सी आ गई है उससे लग रहा है कि हर किसी की राह आसान नहीं है। एक के बाद एक दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सिर्फ उत्तर जिले से अब तक करीब 26 महिला कार्यकर्ताओं ने मेयर प्रत्याशिता के लिए आवेदन किया है। BJP सूत्रों की मानें तो List बुधवार दोपहर को चस्पा की जाएगी। सूत्रों की मानें तो एक-दो दिन में कुछ और बड़े चेहरे भी आवेदन फार्म भर सकते हैं। इसमें एक नाम कानपुर दक्षिण से भी बताया जा रहा है। इस नाम की प्रत्याशी को लेकर खुद कार्यकर्ता सोशल मीडिया में मुहिम छेड़ रखे हैं। अभी तक दक्षिण से कुल 21 लोगों ने आवेदन किया है।


उत्तर जिले से आवेदन करने वाले प्रमुख नाम

BJP उत्तर जिला से डाक्टर आरती लाल चंदानी ने आवेदन फार्म जमा कर दिया है। आरती लाल चंदानी शहर के मशहूर चिकित्सक होने के साथ GSVM की विभागध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वहीं जो सबसे चौंकाने वाला नाम है वो है डाक्टर बिन्दु सिंह का। बताया जा रहा है कि बिन्दु सिंह श्री श्री रविशंकर जी महाराज की शिष्या हैं। उनके नाम की पुष्टि BJP के एक बड़े पदाधिकारी ने www.redeyestimes.com से बातचीत में की। साथ ही महिला नेत्री पूनम कपूर, कमलावती, प्रमिला पांडेय ने भी अपना आवेदन फार्म भरकर जमा कर दिया है।

 दिग्गजों तक पहुंच रखने वालों ने नहीं किए आवेदन

बीजेपी उत्तर और दक्षिण जिले को मिलाकर अब तक कुल 47 के करीब लोगों ने मेयर प्रत्याशिता को लेकर आवेदन फार्म भरकर जमा कर दिया है लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीन बड़े नामों ने अभी तक आवेदन फार्म नहीं जमा किया। जबकि इन नामों की गूंज शहर में हो रही है। इसमें सबसे पहला नाम शैक्षणिक कारोबारी के घराने का है। दूसरे नंबर पर दक्षिण जिला की बीजेपी प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता और तीसरे नंबर पर डॉक्टर गीता मिश्रा का नाम है। शैक्षणिक कारोबारी के घराने और दक्षिण जिलाध्यक्ष अनीता गुप्ता की पैरवी अलग-अलग धड़े कर रहे हैं। जबकि डॉक्टर गीता मिश्रा को लेकर चर्चा है कि उनकी पैरवी RSS की तरफ से की जा रही है।

 

 

सपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने मंगलवार को यूपी के आजमगढ़ में BSP की रैली के दौरान सुप्रीमों मायावती की मौजूदगी में बसपा ज्वाइन कर ली। उनके साथ तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी बसपा की सदस्यता ली है। माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में इसका सीधा लाभ बीएसपी को मिलेगा।


[caption id="attachment_18040" align="alignleft" width="645"] घनश्याम अनुरागी (पूर्व सांसद)[/caption]

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कानपुर। यूपी के बुन्देलखंड में समाजवादी पार्टी (SP) को तगड़ा झटका लगा है। सपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने पार्टी को बॉय-बॉय बोलते हुए BSP के “हाथी” पर सवार हो गए। आजमगढ़ में सपा सुप्रीमों मायावती की मौजूदगी में घनश्याम अनुरागी ने बसपा की सदस्यता ली। नगर निकाय चुनाव से पहले सपा को लगे तगड़े झटके पर जिले के सपाई पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। 


 

आजमगढ़ की रैली में BSP सुप्रीमों की मौजूदगी में शामिल हुए अनुरागी

बुन्देलखंड की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले सपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के आजमगढ़ रैली में मौजूद होने की खबर फैली तो सत्ता के गलियारों से लेकर यूपी के बुन्देलखंड तक उनकी चर्चाएं होने लगी। थोड़ी देर बाद उन्होंने बसपा सुप्रीमों की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली तो राज से पर्दा उठ गया। घनश्याम अनुरागी के करीबी सपा नेता अनीस गुलौली ने भी बसपा की सदस्यता ली। अनीस कदौरा क्षेत्र से राजनीति करते हैं। वह भी लंबे समय तक सपा में रहे हैं। गौरतलब है कि सपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी को जिला पंचायत चुनाव के कुछ दिनों बाद पार्टी के मुखिया अखिलेश सिंह यादव ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। हालांकि कुछ दिन बाद ही उनको फिर से सपा में वापस लिया गया। राजनीति के जानकारों की मानें तो पार्टी में वापसी के बाद भी घनश्याम अनुरागी को तवज्जो नहीं मिल रही थी। सपा के पुराने वर्कर उनसे किनारा करने लगे थे, यही वजह रही कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला ले लिया।

बुन्देलखंड की राजनीति में बड़ा फर्क पड़ेगा

पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के बसपा ज्वाइन करने के बाद बुन्देलखंड की राजनीति में व्यापक असर देखने को मिल सकता है। जानकारों की राय में घनश्याम की मौजूदगी से जहां बसपा की ताकत बुन्देलखंड में बढ़ेगी तो वहीं दूसरी तरफ सपा को नुकसान निश्चित तौर पर होगा।

राजधानी लखनऊ में अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं पर लगातार दूसरे दिन पुलिस ने जमकर लाठियां चलाईं। जवाब में महिला कार्यकत्रियों ने पुलिस पर पथराव किया। पत्थरबाजी से एरिया में भगदड़ मच गई। कई घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान काफी जाम लगा रहा। इस दौरान कई महिलाएं जख्मीं होने के साथ बेहोश भी हो गईं।


[caption id="attachment_18029" align="aligncenter" width="640"]anganwadi_workers, redeyestimes.com राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर लाठीचार्ज करती पुलिस[/caption]

लखनऊ। खुद को राज्यकर्मचारी घोषित कराने समेत करीब 16 सूत्रीय मागों को लेकर सूबे की राजधानी लखनऊ में दो दिनों से प्रदर्शन कर रहीं हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं पर लगातार दूसरे दिन बेरहम पुलिस ने लाठियां बरसाईं। पुलिस के लाठीचार्ज में कई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां जख्मीं हो गई। गुस्साईं कार्यकत्रियों ने पुलिस फोर्स को निशाना बनाकर जवाब में पत्थरबाजी की। पथराव से एरिया में भगदड़ मच गई।


सड़क पर लेटकर प्रदर्शन कर रही थीं कार्यकत्रियां

राजधानी लखनऊ में पिछले दो दिनों से प्रदर्शन कर रही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया। सभी हजरतगंज चौराहे के पास सड़क पर लेटकर सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगीं। प्रदर्शन की वजह से सड़क पर भीषण जाम लग गया और देखते ही देखते ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।

वार्ता विफल होने के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज

पुलिस प्रशासन ने पहले आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से वार्ता करने की कोशिश की लेकिन सभी ने बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। बस इसी बात पर जाम खुलवाने के लिए पुलिस आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों पर लाठियां बरसानी शुरु कर दीं। पुलिस के लाठी चलाते ही भगदड़ मच गई। पुलिस को जो जहां पर मिला, जमकर लाठियां चलाईं। कई महिलाएं बेहोश होकर सड़क पर ही गिर गईं। इसी दौरान कुछ आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने पुलिस को निशाना बनाकर पथराव शुरु कर दिया। पत्थरबाजी होते ही भगदड़ मच गई। इस बीच पुलिस ने वॉटर कैनन के जरिए आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों पर पानी की धार छोड़ी लेकिन इसका कोई असर नहीं हआ।
शाम पांच बजे के बाद किसी तरह खदेड़ पाई पुलिस

पुलिस प्रशासन को आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने जमकर छकाया। लाठीचार्ज के बाद भी सभी डटी रहीं। इस दौरान पानी की तेज धार भी छोड़ी गई। कई घंटे की मशक्कत के बाद शाम करीब पांच बजे पुलिस सभी को प्रदर्शनस्थल से हटवा सकी। उल्लेखनीय है कि सोमवार को भी पुलिस ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों पर लाठीचार्ज किया था।
वेतन को लेकर“जंग”लड़ रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां

संगठन की प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्या के मुताबिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं काफी दिनों से अपनी मांगों और वेतन को लेकर आंदोलनरत हैं। यूपी सरकार कोई सुध नहीं ले रही है। उन्होंने यूपी सरकार से मांग की है कि कार्यकत्रियों को कम से कम 18 हजार और सहायिकाओं को 9 हजार रुपए का वेतन दिया जाए।

उन्होंने कहा कि मिनीन आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को सामान्य योग्यता और कार्य के आधार पर ही बराबर का मानदेय दिया जाए। गीतांजलि मौर्या ने कहा कि बिहार की तर्ज कार्यकत्रियों और मातृ समिति के खातों में पोषाहार का धन भेजा जाए। ताकि पौष्टिक खाद्य सामग्री का वितरण किया जा सके। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को योग्यता एवं वरीयता के आधार पर शत प्रतिशत मुख्य सेविका के पद पर प्रमोशन दिया जाए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल करीब दो दशक से हरदोई की राजनीति में एकछत्र "साम्राज्य" स्थापित किए हुए हैं। पहले वह कांग्रेस से विधायक रहे बाद में कांग्रेस से टूटने के बाद वह लोकतांत्रिक कांग्रेस में शामिल हुए। इसके बाद नरेश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की। करीब एक दशक से ऊपर का समय हो चुका है वह सपा में ही बने हुए हैं। बीजेपी के हाईकमान ने नरेश अग्रवाल के भाई को पार्टी में शामिल होने के लिए राजी कर लिया है। जानकारों की मानें तो अब हरदोई में नरेश अग्रवाल का कुनबा दो जगहों पर बिखरा दिखाई देगा। जिसका सीधा लाभ बीजेपी उठाने के मूड में है। 


[caption id="attachment_18023" align="aligncenter" width="700"] नरेश अग्रवाल (राज्यसभा सांसद), समाजवादी पार्टी[/caption]

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के घर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय नेतृत्व ने “सेंधमारी” कर दी है। लोकसभा और यूपी विधान सभा के चुनाव के दौरान हरदोई जनपद में नरेश अग्रवाल के तिलिस्म को चकनाचूर करने वाली भाजपा के दिग्गज नगर निकाय चुनाव के लिए नए रणनीति के साथ मैदान में आएंगे। नरेश अग्रवाल के भाई उमेश अग्रवाल ने बीजेपी में जल्द शामिल होने की पुष्टि करते हुए कहा कि हाईकमान का न्यौता मिलते ही वह BJP ज्वाइन करेंगे।


पालिका और नगर पंचायत के चुनाव में BJP को मिलेगी बढ़त

सूत्रों की मानें तो भाजपा के दिग्गजों ने हरदोई में कमल खिलाने के लिए नरेश अग्रवाल को सीधा टारगेट कर उनके ही कुनबे में “सेंधमारी” कर दी। बीजेपी ने सीधे नरेश अग्रवाल के भाई पर निशाना साधते हुए उन पर डोरे डाले हैं। बताया जा रहा है कि हरदोई सदर सीट का ऑफर देकर भाजपा ने उमेश अग्रवाल को पार्टी में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार कर लिया है। जानकारों की मानें तो लंबे समय से हरदोई में “साम्राज्य” चला रहे नरेश अग्रवाल के लिए यह सीधी चुनौती होगी। माना जा रहा है कि उमेश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होते ही नरेश अग्रवाल का कुनबा दो खेमों में पूरी तरह से बंट जाएगा। जिसका सीधे तौर पर लाभ बीजेपी नगर पालिका और नगर पंचायत की सीटों पर उठाने की कोशिश करेगी।

BJP टिकट देगी तो लड़ेंगे पालिका प्रेसीडेंट का चुनाव

लोकल मीडिया से बातचीत में नरेश अग्रवाल के भाई उमेश अग्रवाल ने कहा कि हरदोई शहर की जनता ने वर्ष 06 में चेयरमैन बनाया। इसके बाद उनकी पत्नी मीना अग्रवाल को विजयश्री दिलाई। उन्होंने कहा कि बीते 10 बरस में जनता की सिर्फ सेवा ही की है। उन्होंने कहा कि विकास वही करवा सकता है जिसकी सरकार हो। उन्होंने कहा कि उनको भाजपाई बनवाने में राष्ट्रीय नेतृत्व की अहम भूमिका है। बातचीत के दौरान उमेश अग्रवाल ने कहा कि यदि बीजेपी टिकट देगी तो वह पालिका प्रेसीडेंट का चुनाव निश्चित तौर पर लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी में भले ही शामिल हो रहे हों लेकिन बड़े भाई नरेश अग्रवाल से रिश्ते वैसे ही रहेंगे जैसे हैं।
 

परिवार के सदस्यों के मुताबिक डॉक्टर स्वाति सिंह की तबियत खराब होने के बाद उन्हें Kanpur के अनुराग नर्सिंग होम में 22 अक्तूबर को भर्ती कराया गया। सोमवार की देर रात चिकित्सकों ने उनका ऑपरेशन किया। मंगलवार सुबह स्वाति की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग होम के चिकित्सकों और स्टाफ की लापरवाही से मौत हुई। 


[caption id="attachment_18017" align="aligncenter" width="648"]anurag hospital-1, redeyestimes.com बवाल की सूचना पर पहुंची Kanpur के कल्याणपुर थाने की पुलिस ने नर्सिंग होम संचालक ए.एस सेंगर को हिरासत में ले लिया[/caption]

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कानपुर। Kanpur के कल्याणपुर स्थित शारदा नगर एरिया में अनुराग नर्सिंग होम के मालिक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आरोप है कि इलाज में लापरवाही के चलते दिल्ली से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही महिला चिकित्सक की मौत हो गई। लेडी डॉक्टर की मौत के बाद परिजनों ने अनुराग नर्सिंग होम में काफी देर तक हंगामा किया। सूचना पर पहुंची कल्याणपुर पुलिस ने नर्सिंग होम के संचालक को हिरासत में ले लिया। इंस्पेक्टर कल्याणपुर का कहना है कि शव का पोस्टमार्ट करवाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा पंजीकृत कार्रवाई की जाएगी।


[caption id="attachment_18018" align="aligncenter" width="982"] अनुराग नर्सिंग होम में बवाल की सूचना पर पहुंची कल्याणपुर पुलिस पूछताछ करती हुई।[/caption]

सैफई मेडिकल कॉलेज से पूरी की थी MBBS की पढ़ाई

परिजनों के मुताबि डॉक्टर स्वाति सिंह ने इटावा के सैफई मेडिकल कालेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद स्वाति सिंह दिल्ली चली गईं और वहीं से PG की पढ़ाई शुरु की। परिजनों के मुताबिक स्वाति के गले में पिछले कुछ दिनों से तकलीफ थी। जिसके चलते परिजन उन्हें 22 अक्तूबर को Kanpur के शारदा नगर स्थित अनुराग नर्सिंग होम ले आए। परिजनों का आरोप है कि देर रात ही नर्सिंग होम में स्वाति का चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन किया। मंगलवार की सुबह स्वाति की मौत ह गई। स्वाति के भाई डाक्टर विमल और आकाश का आरोप है कि लापरवाही के चलते स्वाति सिंह की मौत हुई।



झांसी में BSP से MLA रह चुके हैं स्वाति सिंह के जीजा

परिजनों के मुताबिक डॉक्टर स्वाति सिंह के जीजा झांसी जनपद से बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। स्वाति की मौत के बाद परिवार के सदस्यों ने मोबाइल पर उनको भी जानकारी दी। जिसके बाद उन्होंने तत्काल कानपुर में बड़े अफसरों से संपर्क कर घटनाक्रम से अवगत कराया। इस बीच स्वाति के परिजन नर्सिंगहोम में ही हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची कल्याणपुर पुलिस ने बवाल बढ़ता देख अनुराग नर्सिंग होम के संचालक ए.एस सेंगर को हिरासत में ले लिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद परिजन देंगे तहरीर

कल्याणपुर इंस्पेक्टर से जब घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि अनुराग नर्सिंग होम के मालिक ए.एस सेंगर को फिलहाल कस्टडी में ले लिया गया है। स्वाति सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। संभव है देर शाम तक रिपोर्ट मिल जाएगी। परिवार के सदस्यों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तहरीर देकर मुकदमा पंजीकृत कराएंगे। उल्लेखनीय है कि अनुराग नर्सिंग होम में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन हर बार सबकुछ सेटिंग फार्मूले के तहत मैनेज हो जाता था लेकिन इस बार मामला पूर्व विधायक का निकला तो नर्सिंग होम के संचालक को पुलिस थाने लेकर पहुंच गई।

 

कानपुर मेयर की प्रत्याशिता को लेकर अंदरखाने में बहुत कुछ चल रहा है। संगठन के "चाणक्य" कहे जाने वाले एक पदाधिकारी ने करीबी विधायक के जरिए कानपुर दक्षिण की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता के नाम को आगे बढ़वाया है। सौम्य स्वभाव और मृदुभाषी अनीता गुप्ता को प्रेसीडेंट बनवाने में संगठन के इसी बड़े पदाधिकारी का अहम रोल रहा था। जानकारों की मानें तो संगठन और शीर्ष नेतृत्व में काफी मजबूत पकड़ रखने वाले पदाधिकारी ने बेहद गोपनीय तौर से अनीता के नाम को आगे बढ़वाने के लिए लामबंदी करवाई है। जो काफी हद तक सफल भी रही।


[caption id="attachment_18012" align="aligncenter" width="720"]anita gupta, redeyestimes.com अनीता गुप्ता (प्रेसीडेंट, भारतीय जनता पार्टी, कानपुर दक्षिण)[/caption]

YOGESH TRIPATHI


कानपुर। Kanpur मेयर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अंदर पनप रहे असंतोष के बीच एक नया नाम उभर कर सामने आया है। ये नाम है BJP कानपुर दक्षिण की प्रेसीडेंट अनीता गुप्ता का। बड़े सूत्रों की मानें तो यूपी सरकार के एक मंत्री, और कई विधायकों के साथ-साथ भाजपा की धरोहर कहे जाने वाले कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने भी करीब-करीब अपनी “मौन” स्वीकृति दे दी है। BJP के धुरंधरों की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो अनीता गुप्ता के नाम पर हाईकमान अपनी मुहर लगा सकता है। हालांकि वहीं दूसरा धड़ा शैक्षणिक कारोबारी के घराने के लिए अभी भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए है।




चाणक्य की चली तो अनीता के नाम पर ही लगेगी मुहर

BJP सूत्रों की मानें तो संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके बड़े पदाधिकारी को लोग किसी “चाणक्य” से कम नहीं आंकते हैं। इसी चाणक्य के जरिए ही अनीता गुप्ता कानपुर दक्षिण बीजेपी की प्रेसीडेंट बनीं। जानकारों की मानें तो “चाणक्य” की अगुवाई में यूपी विधान सभा का इलेक्शन लड़ने वाली भाजपा ने कानपुर-बुन्देलखंड की 54 में से 42 सीटें अपनी झोली में डाली थी। इसमें अहम रोल “चाणक्य” का ही रहा था। अंदरखाने की मानें तो संगठन के इस पदाधिकारी पर भाजपा हाईकमान एक बार फिर नगर निकाय के चुनाव में अपना भरोसा दिखा रहा है। एक बड़े पदाधिकारी की मानें तो यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो अनीता गुप्ता के नाम पर आम सहमति बननी करीब-करीब तय है। चर्चा तो यह भी है कि निर्विवाद छवि और सौम्य व्यवहार की धनी अनीता गुप्ता का नाम “चाणक्य” ने खुद ही अपने करीबी एक विधायक के जरिए आगे बढ़वाया है।



पितामह, तीन विधायकों, एक मंत्री की तरफ से ग्रीन सिग्नल

अनीता गुप्ता की निर्विवाद छवि उनकी प्रत्याशिता का सबसे बड़ा हथियार बनाकर बीजेपी का एक धड़ा उनके नाम को हाईकमान तक पहुंचा चुका है। अनीता के नाम की अंदर ही अंदर पैरवी कर रहे बीजेपी के एक विधायक ने गोपनीय तौर पर नाम को संगठन, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच आगे किया। गोपनीय तौर पर नाम आगे करने की सबसे बड़ी वजह यह रही है कि विधायक की मंत्रीजी से बिल्कुल भी नहीं बनती। यदि विधायक खुलकर सामने आते तो संभव था कि मंत्री जी सीधे सहमति नहीं देते। यही वजह रही है कि अंदर ही अंदर सबकुछ मजबूत करने के बाद अनीता गुप्ता का नाम आगे किया गया। सूत्रों की मानें तो अनीता गुप्ता के नाम पर कानपुर के सांसद, तीन विधायक, एक वर्तमान विधायक और एक मिनिस्टर की मौन स्वीकृति बन चुकी है। आगे की रणनीति और प्रत्याशिता पर फाइनल मुहर संगठन के “चाणक्य” पर निर्भर है। चूंकि चाणक्य की पकड़ सीधे हाईकमान तक है इस लिए बीजेपी का यह खेमा पूरी तरह से आश्वस्त है कि टिकट अनीता गुप्ता की ही फाइनल होगी।



अनीता गुप्ता के नाम पर RSS की भी लगेगी मुहर

माना जा रहा है कि मेयर सीट पर अनीता गुप्ता के नाम को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) कतई विरोध नहीं करेगा। उसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि महिला कार्यकर्ताओं में कमलावती को छोड़कर और कोई दूसरा गंभीर प्रत्याशी नहीं है। लेकिन कमलावती की पैरवी में कोई बड़ा दिग्गज न होने की वजह से यह उनके लिए अभी तक माइनस फैक्टर भी साबित हो रहा है।

एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं BJP के दिग्गज

बात मेयर की प्रत्याशिता को लेकर हो रही है लेकिन अनीता गुप्ता के नाम को बेहद गोपनीय तौर से आगे बढ़ा रहे दिग्गज भविष्य की राजनीति को लेकर एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। जानकारों की मानें तो अनीता गुप्ता को टिकट दिलाने के बाद यदि भाजपा नेता उनको चुनाव जितवा लेते हैं तो वह शहर और आसपास की सबसे ताकतवर वैश्य नेता बन जाएंगी। इससे कानपुर के ही एक दिग्गज वैश्य नेता का कद घटेगा और विरोधी धड़ा उन पर हावी हो पाएगा। फिलहाल जनप्रतिनिधि रह चुके इस वैश्य नेता की संगठन और शीर्ष नेतृत्व में सीधी पकड़ है।

[caption id="attachment_18013" align="alignleft" width="507"] सुरेंद्र मैथानी (प्रेसीडेंट, भारतीय जनता पार्टी, कानपुर उत्तर )[/caption]

BJP कार्यकर्ताओं के बीच से ही किसी को मिलेगी टिकट : सुरेंद्र मैथानी

कानपुर भाजपा उत्तर जिला के प्रेसीडेंट सुरेंद्र मैथानी ने www.redeyestimes.com से बातचीत करते हुए कहा कि अभी तक किसी के नाम पर मुहर नही लगी है। बाहरी को टिकट देने के सवाल पर सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि BJP हाईकमान कार्यकर्ताओं के बीच से ही किसी को टिकट देगा। भाजपा के सभी कार्यकर्ता मिलकर प्रत्याशी को मेयर का चुनाव जिताएंगे। उन्होंने कहा कि मेयर के लिए कई लोगों के नाम चल रहे हैं लेकिन अभी तक किसी का नाम हाईकमान ने फाइनल नहीं किया है। गुटबाजी और धड़ेबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं।

 

"बड़ाखाना" कार्यक्रम के दौरान अपने बीच यूपी पुलिस के महानिदेशक सुलखान सिंह को पाकर जवानों की खुशी दो गुना हो गई। खुद DGP ने अपने हाथों से कार्यक्रम में मौजूद जवानों को भोजन परोसकर सभी को खिलाया। इस दौरान ATS और STF के तमाम बड़े अफसर भी मौजूद रहे। डीजीपी ने कई जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। 


[caption id="attachment_18008" align="aligncenter" width="850"]dgp sulkhan singh, redeyestimes.com "बड़ाखाना" कार्यक्रम के दौरान ATS और STF के जवानों को भोजन खिलाते uppolice के DGP सुलखान सिंह[/caption]

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह अमौसी एयरपोर्ट के पास बने ATS के स्पॉट परिसर में आयोजित ‘ बड़ाखाना ’ कार्यक्रम में शामिल हुए। ATS और STF के जवानों संग DGP ने भोजन का लुत्फ उठाया। इस दौरान उन्होंने जवानों के साथ उनके सुख-दुःख को भी साझा किया। इस दौरान uppolice के कई अफसर मौजूद रहे।


बब्बर खालसा के उग्रवादियों को पकड़ने वाली टीम को किया सम्मानित

यूपी पुलिस के महानिदेशक सुलखान सिंह ने “बड़ाखाना” कार्यक्रम के दौरान कई बड़े सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली ATS टीम के जवानों को सम्मानित किया। इसमें बब्बर खालसा के उग्रवादियों को पकड़ने वाली टीम के सदस्य भी शामिल रहे। DGP ने सभी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।



गौरतलब है कि सूबे में ख़तरनाक ऑपरेशन्स के लिए विश्व स्तरीय क्षमता की टीम विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री की तरफ से 10  अक्तूबर को SPOT ( Special Police Operations Team) के गठन को स्वीकृति प्रदान की गई थी।  इसके साथ ही कमांडो इकाई के लिए 694 पदों को स्वीकृति प्रदान की गई। इस SPOT में 3 विंग होगी, आपरेशनल विंग, टे्निंग विंग तथा प्रशासनिक विंग। इसके सदस्यों को हाई-जैकिंग से निपटना, हेलीकाप्टर से उतरना, चढ़ना, रात्रि आपरेशन की बेहतर क्षमताओ को विकसित करना आदि सिखाया जाता है।



क्या होता है बड़ाखाना

विभागीय परंपरा के मुताबिक किसी भी आयोजित भोज जिसमें सभी पुलिस कर्मी एक साथ भोजन करते है, ‘बड़ाखाना’  कहलाता है। वरिष्ठ अफसरों की तरफ से पदेन भेदभाव को भुल कर एक साथ जवानों के संग मिलकर भोजन किया जाता है। DGP सुलखान सिंह ने कहा कि ATS और STF की तरफ से बहुत अच्छे कार्य किए गए हैं। दोनों इकाइयों की जनशक्ति और संसाधन बढ़ाया जा रहे हैं ताकि आतंकवादियों और अपराधियों से प्रदेश को सुरक्षित रखा जा सके।

कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था (ADG L/O) आनन्द कुमार, SSP ATS  उमेश कुमार श्रीवास्तव, SSP STF  अभिषेक सिंह,  ASP ATS राजेश साहनी, ASP ATS दिनेश यादव, ASP STF त्रिवेणी सिंह, DSP ATS डी के पुरी, DSP  मनीष सोनकर तथा DSP WPL बबिता सिंह सहित समेत कई अफसर मौजूद रहे।

लंबे समय से पार्षद की तैयारी कर रहे कई दिग्गज दावेदारों ने टिकट पक्की करवाने के लिए "बाजरा" खोल दिया है। उनके "बाजरा" खोलते ही अन्य दावेदारों में खलबली मच गई है। सभी दावेदार अब अपने-अपने आकाओं की चौखट पर सुबह से लेकर शाम तक डेरा जमाए हैं। इन दावेदारों के डेरा जमाने की वजह से BJP के कई बड़े नेताओं के लिए परेशानी की वजह बन चुकी है। कई नेता अब दावेदारों के फोन तक नहीं उठा रहे हैं।




YOGESH TRIPATHI

कानपुर। नगर निकाय चुनाव के तिथियों का शंखनाद होने में महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं। जिला प्रशासन चुनाव की तैयारियों में व्यस्त है तो प्रत्याशी अपनी टिकट पक्की करने में जुटे हैं। सबसे अधिक मारामारी सत्ताधारी BJP में मची है। पार्षद की टिकट पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे तमाम दावेदारों की सुबह और शाम आकाओं की चौखट पर बीत रही है, और आका हैं कि उनके पास मिलने का वक्त ही नहीं। कई प्रत्याशी हर कीमत पर टिकट चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने बाकायदा बाजरा भी खोल दिया है। भाव खुला है सीधे 10 लाख पर। ये हम नहीं कह रहे बल्कि कई दावेदार खुल्लम-खुल्ला महफिलों और चौराहों पर चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं। गुजैनी और दबौली से तो दो दावेदारों ने अपना टिकट पक्का करने के लिए 10 लाख रुपए की बोली लगा दी है। इन प्रत्याशियों का कहना है कि बाजरा का भाव बढ़ा तो वह और भी दे सकते हैं लेकिन हर कीमत पर टिकट चाहिए।



चर्चित मंत्री तो चहेते के लिए किसी और को आवेदन तक नहीं करने दे रहे

यूपी सरकार में एक चर्चित मंत्री अपने करीबी का टिकट पक्का करने के लिए दूसरे दावेदारों को प्रत्याशिता से हटाने के लिए तरह-तरह के हथकंडों को अपना रहे हैं। वह अब तक तीन दावेदारों भगा चुके हैं। नाम न खोलने की शर्त पर एक प्रत्याशी ने बताया कि “दबंग पांडेय जी” मंत्री के करीबी हैं। मंत्री जी हर कीमत पर उनकी टिकट फाइनल कराने में जुटे हुए हैं। क्षेत्र के तीन पुराने कार्यकर्ता जब आवेदन करने पहुंचे तो मंत्री ने फटकार लगा दी। चर्चा है कि हर दावेदार के लिए मंत्री जी यह कह रहे हैं कि इसने यूपी विधान सभा इलेक्शन में बसपा प्रत्याशी को चुनाव लड़वाया था।



दो माननीयोंपुत्र खुल्लम-खुल्ला बांट रहे टिकट

शहर के दो “माननीय” जिसमें एक मंत्री भी हैं, दोनों हर कीमत पर अधिक से अधिक अपने करीबी लोगों को टिकट देने के लिए लंबे समय से कवायद छेड़े थे। दोनों काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं। दबी जुबान से ही सही लेकिन कार्यकर्ताओं ने बताया कि “बाजरा” खुलने के बाद दोनों के परिवारीजन ही टिकट “फाइनल” करने में व्यस्त हैं। कोई भी हो, पैसा देकर टिकट ले सकता है। दोनों ही “माननीयों” की चौखट पर टिकट के लिए कार्यकर्ताओं से अधिक भीड़ बाहरी लोगों की इस समय मौजूद रहती है।  

  “बाजरा खुलने पर आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्याशियों में निराशा

पार्षद के टिकट पाने के लिए “बाजरा” खुल जाने से सबसे अधिक निराशा और हताशा का भाव उन दावेदारों के चेहरों पर है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इन दावेदारों का कहना है कि लंबा समय बीत गया। पार्टी के लिए दरी और चादरें तक बिछाई हैं। अब जब समय आया है तो पार्टी में ऊंचे पदों पर बैठे “आका” पूंजीपतियों को टिकट देने की तैयारी कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है।

चुनाव जीतने के लिए मंत्र और फार्मूला भी बता रहे प्रत्याशी

आर्थिक रूप से बेहद कमजोर प्रत्याशी पार्षदी का चुनाव जीतने के लिए अपने करीबी नेताओं को फार्मूला और मंत्री भी बता रहे हैं कि वह इस तरह से चुनाव हर कीमत पर जीत लेंगे। साथ ही वह नेताओं को यह बताना भी नहीं भूल रहे हैं कि विधान सभा के चुनाव में उन्होंने प्रत्याशी के लिए बूथ पर क्या-क्या नहीं किया ? दावेदारों की सबसे अधिक मारामारी साउथ सिटी के करीब दर्जन भर वार्डों में अधिक है।

बाकी दलों में नहीं है पार्षद प्रत्याशियों के दावेदारों की भीड़

कांग्रेस, सपा और बसपा में पार्षद का टिकट मांगने वाले प्रत्याशियों की संख्या तो है लेकिन भीड़ और मारामारी बिल्कुल भी नहीं है। मुस्लिम एरिया के तीन-चार वार्ड ही ऐसे हैं जहां सपा और कांग्रेस में होड़ मची है। बाकी जगहों पर सामान्य से हालात हैं। बसपा में भी दावेदारों की संख्या शून्य जैसी ही है। यहां पार्टी के कार्यकर्ताओं में प्रत्याशिता को लेकर उत्साह भी नहीं है। एक पदाधिकारी की मानें तो कुछ वार्डों में तो दावेदार ही नहीं हैं। इन सबके पीछे तर्क चुनाव का मंहगा होना भी है।

कई दावेदार स्लीपिंग सेल की तरह सक्रिय

टिकट के लिए दावेदारों की मचमच के बीच कई दावेदार ऐसे भी हैं जो बिल्कुल स्लीपिंग सेल की तरह सक्रिय हैं। ये वो दावेदार हैं जो हर तरह से संपन्न और सक्षम भी हैं। सूत्रों की मानें तो ये टिकट नहीं मांग रहे हैं लेकिन ऐन वक्त पर ये रायता फैला सकते हैं। विवादित सीटों पर स्लीपिंग माड्यूल्स की तरह सक्रिय कई अघोषित दावेदारों को टिकट भी मिल सकती है।

 

Kanpur मेयर की प्रत्याशिता को लेकर BJP के एक बड़े धड़े और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बीच "नूरा-कुश्ती" का दौर शुरु हो चुका है। चर्चा है कि बीजेपी का यह बड़ा धड़ा कई महीने पहले ही शैक्षणिक कारोबार से जुड़े घराने के लिए टिकट पर मुहर लगा चुका है। यह बात न तो स्वयंसेवकों को बर्दाश्त हो रही है और न ही RSS के कद्दावर पदाधिकारियों को। हाल अब यह है कि चित्रकूट में मौजूद RSS के "महाराथी" भाजपा में बिक रही टिकटों का मुद्दा हाईकमान के सामने उठाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो कंडीडेट के नाम पर फाइनल मुहर 27 अक्तूबर के बाद ही लगेगी। चर्चा है कि मेयर प्रत्याशी के चयन का ऐलान भी चित्रकूट में ही फाइनल किया जाएगा। 


 

YOGESH TRIPATHI

कानपुर। राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी नगर निकाय के चुनाव का “शंखनाद” नहीं किया है लेकिन राजनीतिक दलों में प्रत्याशी चयन को लेकर उठा-पटक का दौर शुरु हो चुका है। मेयर प्रत्याशी चयन को लेकर केंद्र और यूपी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में “रायता” कुछ अधिक फैल रहा है। क्षेत्रीय बीजेपी के दिग्गज जहां “बाहरवाली” को प्रत्याशी बनाने के लिए 5 कालीदास मार्ग से लेकर दिल्ली में “नमो” की चौखट तक “शह-मात” का खेल खेलने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के “महारथी” किसी “घरवाली” को प्रत्याशी बनाए जाने के पक्ष में हैं। RSS के बड़े सूत्रों का कहना है कि “बाहरवाली” किसी भी सूरत में मान्य नहीं होगी। “घरवाली” और “बाहरवाली” के मामले को RSS के दिग्गज चित्रकूट में अगले कुछ घंटों के दौरान होने वाली मीटिंग में भी प्रमुखता से उठाएगी।


पूंजीपति और शैक्षणिक संस्थान से जुड़े घराने को BJP देना चाहती है टिकट

बीजेपी सूत्रों की मानें तो क्षेत्रीय भाजपा Kanpur के ताकतवर लंबरदार, पूंजीपति और शैक्षणिक कारोबार से जुड़े घराने को टिकट दिलाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। शायद यही वजह रही कि दो दिवसीय प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक का आयोजन भी बीजेपी एक धड़े ने करवा दी। ठीक उसी रात को मेयर सीट का परशीमन भी जारी किया गया। अंदरखाने की मानें तो यह टिकट कुछ माह पहले ही फाइनल हो चुका है, सिर्फ औपचारिकता भर ही बाकी रह गई है।



भाजपा की धरोहर, दो Minister और कई MLA को दरकिनार कर फाइनल हो गई टिकट !

बीजेपी सूत्रों की मानें तो टिकट फाइनल कराने के लिए कई महीने से अंदर ही अंदर कवायद चल रही थी। जो “औपचारिकताएं” थी वह भी इन्हीं दिनों में पूरी कर ली गईं। प्रांतीय अधिवेशन करवाने के बाद भाजपा के एक धड़े ने BJP हाईकमान की नजर में इस घराने को पूरी तरह से भाजपाई भी साबित करवा दिया। जानकारों की मानें तो करीब एक साल पहले तक शैक्षणिक कारोबार से जुड़ा यह घराना पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमों अखिलेश सिंह यादव और उनकी पत्नी का बेहद करीबी हुआ करता था। इस घराने को मेयर की टिकट पक्की कराने के लिए शहर के दो मंत्रियों, कई विधायकों और सबसे बड़े भाजपा के धरोहर मुरली मनोहर जोशी तक को ताक पर रख दिया गया।



उत्तराखंड के एक सीनियर IAS भी टिकट पक्का कराने में बने सारथी

RSS के एक बड़े दिग्गज की मानें तो प्रांतीय अधिवेशन के जरिए बड़े घराने को भाजपाई साबित कर टिकट पर अंतरिम मुहर लगाने की पहल की गई ताकि पार्टी में विरोध न हो। इस पूरे खेल में उत्तराखंड कैडर के एक सीनियर IAS अफसर की महतो भूमिका रही। इस IAS अफसर के यूपी सरकार के साथ भी गहरे ताल्लुक हैं।



4 लग्जरी गाड़ियों की घराने ने दे दी है सौगात

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक इस घराने ने चार लग्जरी गाड़ियों की सौगात कुछ दिग्गजों को दे रखी हैं। जो कि उन्हीं गाड़ियों से इन दिनों सफर कर रहे हैं। हालांकि इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नंबर दिग्गजों के नाम से नहीं किया गया है। गाड़ियों की कीमत करीब 40 लाख रुपए के आसपास भाजपाई बता रहे हैं।

बिकती टिकटों से स्वयंसेवक से लेकर RSS के दिग्गज तक हैं बेचैन

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर “न खाऊंगा न खाने दूंगा” का नारा बुलंद किए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कानपुर की भाजपा में इन दिनों पार्षद से लेकर मेयर तक की टिकटों पर खुल रहे “बाजरा के भाव” से बीजेपी का जमीनीं और संघर्षशील कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं की मानें तो उनको वही प्रत्याशी चाहिए जो कार्यकर्ता हो। पैसे के बल पर बीजेपी में पहुंच बनाकर टिकट लाने वाले को भाजपाई अब चुनाव में हराने की कसमें भी खाते दिखाई दे रहे हैं। कुछ यही हाल स्वयंसेवकों और RSS के कद्दावर दिग्गजों का भी है। उनको भी यह बिल्कुल नहीं पच रहा है कि कोई बाहर का व्यक्ति आकर चुनाव लड़े।

RSS की पहली पसंद गीता मिश्रा, दूसरे पर कमलावती, तीसरे पर प्रमिला पांडेय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सूत्रों की मानें तो RSS की पहली पसंद एक जूनियर हाईस्कूल की प्रिंसिपल गीता मिश्रा हैं। संघ सूत्रों की मानें तो गीता मिश्रा के नाम पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मुहर लगा सकते हैं। साथ गीता मिश्रा की पैरवी में संघ से जुड़े एक चर्चित प्राचार्य भी कर रहे हैं। दूसरे नंबर पर बीजेपी की पुरानी नेत्री कमलावती हैं। इनके नाम पर भी राजनाथ सिंह की मुहर लग सकती है। तीसरे नंबर पर प्रमिला पांडेय का नाम चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा कानपुर की बॉबी तिवारी की भी है। ये फिलहाल मुंबई में रह रही हैं। परिवार के एक सदस्य मुकेश अंबानी के रिलायंस में महत्वपूर्ण पद पर काम करते हैं।

BJP से टिकट के लिए कांग्रेस के एक दिग्गज भी लगे

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी से मेयर के लिए दावेदारी ठोंक रहे हैं। यह दिग्गज भी शैक्षणिक कारोबार से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से कानपुर में प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं। ये कानपुर से प्यार भी करते हैं। कुछ इसी तरह के चुनाव प्रचार का वह आगाज भी कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो इनकी तगड़ी पैंठ BSP में भी है।

असलहों के साथ बबुली कोल गैंग में शामिल होने आए डकैत रज्जन पटेल के पैर में पुलिस की गोली लगी। घायल अवस्था में पुलिस ने किया Arrest। मौके से असलहों का जखीरा भी मिला। बबुली की तलाश में पुलिस अभी भी कर रही है कांबिंग।


[caption id="attachment_17994" align="aligncenter" width="640"]chitrakoot encounter-, redeyestimes.com दस्यु बबुली कोल गैंग से एनकाउंटर के बाद मौके पर मौजूद पुलिस टीम[/caption]

चित्रकूट। यूपी और एमपी के बेहद खूंखार दस्यु सरगना बबुली कोल गैंग की जनपद पुलिस से मुठभेड़ हो गई। दस्यु गिरोह की तरफ से लगातार की जा रही फायरिंग का जवाब पुलिस टीम ने क्रास फायरिंग करके दिया। पुलिस की तरफ से चलाई गई गोली एक डकैत के पैर में लगी। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मौके से पुलिस को भारी मात्रा में असलहे और कारतूस भी मिले हैं। घायल डाकू को पुलिस ने उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है।




चित्रकूट के मारकुंडी स्थित मुनगा के जंगलों में मौजूद था दस्यु गिरोह

करीब साढ़े पांच लाख रुपए का इनामी दस्यु सरगना बबुली कोल मारकुंडी थाना एरिया के मुनगा के जंगलों में मौजूद था। जरिए मुखबिर खबर मिलने पर मानिकपुर थाना प्रभारी, स्वाट टीम प्रभारी, मारकुंडी और बहिलपुरवा थानों की फोर्स ने गिरोह की घेराबंदी की। पुलिस टीम को देखते ही बबुली और उसके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी। डकैतों की तरफ से हो रही ताबड़तोड़ फायरिंग का जवाब देने के लिए पुलिस टीम ने क्रॉस पायरिंग शुरु की। पुलिस पार्टी के फायरिंग करते हुए गिरोह भागने लगा।



असलहों के साथ गिरोह में शामिल होने आया था डकैत रज्जन पटेल को लगी गोली

चित्रकूट पुलिस के मुताबिक घायल डकैत रज्जन पटेल असलहों के साथ बबुली कोल के गैंग में शामिल होने के लिए आया था। डकैत रज्जन पटेल ग्राम छीतूपुर मजरा ददरीमाफी थाना बहिलपुरवा (चित्रकूट) का रहने वाला है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद सीधे जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया है। रज्जन पटेल इससे पहले मध्यप्रदेश के खूंखार डकैत ललित पटेल के गिरोह का सक्रिय सदस्य रह चुका है।



मुनगा के जंगलों में गिरोह के पास से मिले ये हथियार

मुठभेड़ के बाद दस्यु बबुली कोल गिरोह के साथ भाग निकला लेकिन गोली लगने की वजह से रज्जन पटेल नहीं भाग पाया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम को एनकाउंटर वाली जगह से .303 बोर की राइफल (जो सिर्फ पुलिस कर्मियों के पास होती है),8 कारतूस, 4 खोखे मिले। जंगल में सर्च अभियान चला रही पुलिस के हाथ थोड़ी दूरी पर ही एक फैक्ट्री मेड बंदूक .12 बोर, कई कारतूस और .315 बोर की देशी राइफल भी मिली है। पुलिस ने थर्टी स्प्रिंग राइफल के कई खोखे भी बरामद किए हैं। रज्जन पटेल पर यूपी और एमपी में कई मामले दर्ज हैं।

मामला चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर से जुड़ा था। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसा घिनौने कार्य के लिए BJP महिला मोर्चा की महामंत्री सविता सिंह ने गोरखनाथ मंदिर के सचिव का भी नाम लिया। मुख्यमंत्री सीधे तौर पर यदि कार्रवाई नहीं करते तो शायद पार्टी और व्यक्तिगत रूप से उनकी भी किरकिरी होती। यही वजह रही कि उन्होंने SSP को तत्काल आदेश देकर सविता सिंह की गिरफ्तारी करवाई। 



गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गोरखपुर BJP महिला मोर्चा की सेकेट्री सविता सिंह को Arrest करवा दिया। सविता सिंह पर आरोप है कि एक मोबाइल चोर को छुड़वाने के लिए उन्होंने 50 हजार रुपए की रिश्वत ली थी। पुलिस ने जब चोर को जेल भेज दिया तो परिवार के लोग सविता सिंह से रुपए वापस मांगने लगे। आरोप है कि इस पर सविता ने खुद को सीएम योगी आदित्यनाथ सिंह का करीबी बताते हुए परिवार वालों को धमकी दी थी। अपने ही गढ़ में बदनामी का दाग लगने पर मुख्यमंत्री योगी सिंह ने गोऱखपुर पुलिस को तत्काल FIR दर्ज कर सविता सिंह को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।




गोऱखपुर के तिवारी थाने का है मामला

जनपद के तिवारीपुर थाना एरिया के इलाहीबाग निवासी अरुण पांडेय के लड़के हर्षित पांडेय को पुलिस ने मोबाइल और चेन स्नेचिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। हर्षित के परिजन उसे छुड़ाने के लिए कवायद में जुटे थे। परिवार ने BJP की महिला मोर्चा सेकेट्री सविता सिंह से संपर्क किया। आरोप है कि सविता सिंह ने 50 हजार रुपए हर्षित को छुड़वाने के लिए ले लिए। हर्षित के परिवार का आरोप है कि सविता ने कहा कि  25 हजार रुपए की रकम गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी को देनी पड़ेगी और बाकी पैसा पुलिस लेगी। कुछ उनको भी चाहिए। परिवार ने किसी तरह इंतजाम कर पैसा सविता सिंह को दे दिया। लेकिन इसके बाद भी तिवारीपुर पुलिस ने 13 अक्तूबर को लिखापढ़ी कर हर्षित को जेल भेज दिया। हर्षित के जेल जाने के बाद परिवार ने सविता सिंह से रुपए वापस मांगे तो उन्होंने जान से मरवाने की धमकी दे डाली।



 पहले सोशल मीडिया फिर CM की चौखट पर पहुंचा मामला

जेल गए हर्षित पांडेय की मां प्रभा पांडेय ने पहले लोकल मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कराई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ। इस बीच यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ कार्यक्रमों में शरीक होने के लिए गोरखपुर पहुंचे। प्रभा पांडेय गोरखनाथ मंदिर पहुंची और सीएम से मुलाकात कर अपनी पीड़ा को बयां किया। मुख्यमंत्री ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए SSP गोरखपुर को तलब कर लिया। उन्होने मामले की जांच कर तत्काल महिला नेत्री को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

CM के आदेश पर पुलिस ने की Arresting

पीड़ित प्रभा पांडेय की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SSP सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को मामले की सही जांच कर दोषी को जेल भेजने की ताकीद दी थी। जांच में बीजेपी नेत्री सविता सिंह पर लगे आरोप सही मिलने पर पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया। SSP के मुताबिक सविता सिंह पर धोखाधड़ी, जालसाजी, मृत्यु का भय दिखाकर वसूली करने और अमानत में खयानत जैसे संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

लंबे समय से सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल चर्चा में रहने वाले वाले सीनियर IAS सूर्य प्रताप सिंह एक बार फिर  सुर्खियों में हैं। सूर्य प्रताप सिंह ने फेसबुक पर पोस्ट के जरिए UPCM योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार से सवाल पूछा है कि “क्या अब अफसरों को अपराधियों के आगे भी सैल्यूट मारना पड़ेगा ? क्या अब जनपद के SP-DM अब कार्यालय आए अपराधियों से भी चाय-नाश्ता पूछेंगे? दरअसल सूर्यप्रताप सिंह का ये सवाल सरकार के उस निर्देश के खिलाफ है जिसमें अफसरों को जनप्रतिनिधियों से खड़े होकर मिलने और उन्हें प्राथमिकता देने की बात कही गई है।




लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद मुख्य सचिव राजीव कुमार ने वरिष्ठ अफसरों को एक गाइड लाइन जारी करते हुए कहा है कि अफसर अब जनप्रतिनिधियों से खड़े होकर मिलें, साथ ही कार्यालय पहुंचने पर उनसे चाय-नाश्ते के बाबत भी पूछें। मुख्य सचिव ने पत्र लिखकर अफसरों से कहा है कि वे नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और सांसदों का सम्मान करें। उनके प्रार्थना पत्रों को प्राथमिकता से निपटाएं। मुख्य सचिव के इस पत्र पर सवाल उठाते हुए सीनियर IAS सूर्य प्रताप सिंह ने सवाल किया है कि क्या अब डीपी सिंह जैसे अपराधिक छवि वाले विधायकों के सामने भी अफसरों को खड़े होकर सैल्यूट मारना पड़ेगा ?

IAS सूर्य प्रताप सिंह का फेसबुक वॉल से साभार-----


पाँव लगें, VIP ‘श्रीमनके ....... कुर्सीपर चिपके रहने का आशीर्वाद मिलेगा !

अधिकारी कुर्सी छोकर नमस्ते करें,नहीं तो दंडित होंगे.....क्या डीपी यादव जैसे अपराधी या फिर प्रजापति जैसे भ्रष्ट/बलात्कारी को भी ये सम्मान मिले २००७ में यह नियम बना था कि अधिकारीगण विधायकों /जंप्रतिनिधियों को खड़े होकर नमस्ते करेंगे, चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो !!

यह सर्वमान्य सत्य है कि सम्मान माँगा नहीं जाता, बल्कि अर्जित किया जाता है (Respect is not demanded but commanded)..... असली सम्मान पद से नहीं, प्रतिभा/सदाचारण से आता है। यदि अच्छा आदर्श आचरण हो तो सम्मान दिल से आएगा ही। सम्मान एकतरफ़ा नहीं हो सकता है बल्कि पारस्परिक होता है। यह नहीं हो सकता कि अधिकारी तो विधायकों का सम्मान करें और जनप्रतिनिधि उन्हें गाली गलौज करें।  पिछले एक दशक में १८ बार ऐसे शासनादेश क्यों जारी करने पडे, यह सोचनीय दिलचस्प विषय है। १४ दिसम्बर, २००७ को पहला शासनादेश जारी हुआ था और अब १७ नवम्बर, २०१७ को मुख्यसचिव को १८वीं बार यह आदेश जारी करना पड़ा कि अधिकारीगण, विधायक के आने पर खड़े होकर नमस्ते करेंगे... जलपान/चाय-नाश्ता भी भेंट करेंगे आदि-२। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्यों कि या तो अधिकारीगण विधायकों का सम्मान नहीं कर रहे या फिर कई विधायकों का आचरण सम्मान योग्यनहीं रहा ? दोनों में से एक कारण होगा ही। आज ४३% विधायक उत्तर प्रदेश में आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। 



वर्तमान सरकार ने VIP कल्चर को समाप्त करने के लिए क़दम उठाए हैं ... लाल/नीली बत्ती हटवाईं हैं, लोगों ने इसका स्वागत किया है। यह सही है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का सम्मान होना चाहिए लेकिन जनप्रतिनिधीयों को भी अपने आचरण से सम्मान अर्जित करना चाहिए .... ज़ोर ज़बरदस्ती से सम्मान नहीं पाया जा सकता, ख़ाली अधिकारी नमस्तेकी औपचारिकता ही पूरा करेंगे। 

 

मैं जब बदायूँ जनपद में DM था तो मैंने अपराधी विधायक डीपी यादव को NSA में गिरफ़्तार किया था और डीपी यादव ने विधानसभा में मेरी शिकायत की थी कि मैंने उन्हें खड़े होकर नमस्ते नहीं की। इसपर मैंने सरकार को जवाब दिया था कि एक अपराधी/हत्यारे/बलात्कारी को नमनकरना मुझे स्वीकार नहीं।  ‘दुष्टका सम्मान करना दुष्टाताको बढ़ावा देता है। 

 

अभी हाल में NCR क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय ने दीपावली पर पटाखेबेचने पर BAN लगाया था, लेकिन हुआ क्या ... और अधिक vengeance के साथ न केवल चोरी छुपे पटाखे बिके बल्कि पूर्व वर्षों से और अधिक पटाखे छोड़े भी गए। कभी-२ ज़ोर ज़बरदस्ती का प्रभाव उलटा भी पड़ता है।  मेरे विचार में उक्त शासनादेश की क़तई आवश्यकता नहीं है ..... सबका सम्मान होना ही चाहिए चाहे कोई ग़रीब आमजन हो या फिर कोई विधायक। लोकतंत्र में वोट करने वाला सामान्य जन सबसे बड़ा VIP है .... दोनों अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को सामान्य-जनको खड़े होकर प्रणाम करना चाहिए। उक्त प्रकार का शासनादेश VIP कल्चर को बढ़ावा देता है। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों दोनों का आचरण व प्रतिभा ऐसी हो कि उनके लिए सम्मान दिल से आए। दुर्भाग्य है कि आज लोकतंत्र में आमजन का भरपूर अपमान हो रहा है और जंप्रतिनिधियों/लोगों में VIP बनने की होड़ लगी है। यह शासनादेश न केवल ग़ैरज़रूरी है अपितु अधिकारियों पर ग़लत काम का दबाव बनाने का काम करेगा ...... VIP कल्चर को बढ़ावा देगा और भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा।  क्या कहते हैं, आप ???